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Full text of "Rishabh Saurabh (1994)mlj"

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ऋषभ सोरभ 


स्मारिका 


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वृष्ठा. : 225 50 02, 225 79 





मंगल वन्दना 


“४ यः स्त्युत्यो जगतां त्रयस्य न पुनः स्तोतास्वयं कस्याचिद्‌ 


ध्येयो योगिजनस्ययों न नितरां ध्याता स्वयं कस्यचित्‌। 
यो नेतृन्‌ नयते नमस्कृतिमलं नन्‍्तृव्यपेक्षेक्षण: 
स श्रीमान्‌ जगतां त्रयस्य सुगुरूर्देव: पुरु:ः पातु न:।॥”-१२ 


- भगवज्जिनसेनाचार्य, जिनसहस्त्रनामस्तोत्रम्‌ 


अर्थ- जो तीन लोकसे स्तवनीय हैं परन्तु स्वयं किसी के स्तोता नहीं हैं। 
जो योगिजनों से ध्यातव्य तो हैं परन्तु स्वयं किसी के ध्याता नहीं हैं। 
जो इन्द्रादि देवषतियों के लिए नमस्कार-भाजन हैं तथा 
..._ स्वयं नन्‍्ता की अपेक्षा से रहित हैं। वह श्रीमान्‌ 
(मुक्ति श्रीसमालिंगि) त्रिभुवन के सद््‌गुरु 
भगवान्‌ पुरु (ऋषभदेव ) हमारी रक्षा 





मंगल संदेश 
आचार्य विद्यानन्द 


तीर्थंकर ऋषभदेव विश्व संस्कृति के आद्य प्रणेता एवं पुरस्कर्त्ता हैं। उन्हीं से समूची 
मानव सभ्यता, सम्पूर्ण ज्ञान-विज्ञान एवं समस्त कलाओं का विकास हुआ। वे विश्व भर 
में विभिन्‍न नामों से पूजे गये त्तथा विश्व साहित्य में सर्वत्र उनका स्तुतिगान हुआ है | मानव 
संस्कृति के सुदीर्ध इतिहास में आदिकाल से ही उनकी गौरव गाथा गाई गई है। 

आत्म-विद्या के आदि प्रवर्तक ऋषभदेव ही विश्व संस्कृति के उज्ज्वलतम शलाका- 


पुरुष एवं आलोक स्तम्भ हैं। 
ऋषभदेव प्रतिष्ठान, दिल्‍ली इस दिशा में जो युगानुरूप सत्प्रयास कर रहा है, वह 
अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एवं प्रशंसनीय कार्य है। 


कुंन्दकुन्द भारती, 


पल आचार्य विद्यानन्द 


६ जनवरी, १९९४ 





हे संदेश 
आचार्य कलाप्रभ सागर सूरि 


इस अवर्स्पिणी काल के प्रथम राजा, इस अवर्सर्पिणी काल के प्रथम साधु, इस अवर्सर्पिणी 
काल के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव युगादिनाथ, आदिनाथ प्रभृत्ति अनेक नामों से विश्व विश्वुत 
हैं। वेदों और पुराणों में भी उनकी स्तुति गाई गई है। वे संसार के विभिन्‍न घ॒र्मो में 
अलग-अलग नामों से पूजे गये हैं। 


परम हर्ष का विषय है कि भगवान्‌ आदिनाथ का जन्म कल्याणक बंगलौर में मनाया 
जा रहा है तथा इस अवसर पर ऋषभ सौरभ, १९९४ का प्रकाशन किया जा रहा है। ऋषभदेव 
सभी भारतीयों के आदिविधाता हैं तथा सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति का विकास उन्ही की देशना 
से, बचनों से हुआ है। आज भी विश्व उनके उपदेशों पर चले तो सबका कल्याण हों सकता 


है । 


ऋषभरदेव प्रतिष्ठान, दिल्‍ली का यह कार्य अनुमोदनीय है क्‍योंकि प्रतिष्ठान विश्व में 
ऋषभ का सौरभ फैला रहा है। अहिंसा, संयम और तप की त्रिवेणी का संगम जहां भी होता 
है, वहां पाप की निवृत्ति होती है। मेरा शुभाशीष है कि विश्व भर में ऋषभ वाणी का प्रचार 
हो और प्रभु का शासन सबके लिए कल्याणकारी हो। 


चेम्बूर, बम्बई आचार्य कलाप्रभ सागर सूरि 
६ फरवरी, १९९४ 





संदेश 


भारतीय संस्कृति, समाज, सभ्यता और विकास की 
प्रक्रिया को समझने के लिए उस युग की यात्रा आवश्यक है, 
जिसका नेतृत्व ऋषभ कर रहे थे। अध्यात्म के मूल स्रोत 
ऋषभ हैं। आत्मा का सिद्धांत उनकी देन है। भगवान 
ऋषभ के व्यक्तित्व और कर्तृत्व को जनता के समक्ष प्रस्तुत 
करने के लिए-ऋषभदेव प्रतिष्ठान जो कार्य कर रहा है, वह 
पदार्थवादी युग में उपयोगी है। 


दि० 7 मार्च 994 - आचार्य महाप्रज्ञ 





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99. 5घ7९३॥ (बाएं 2७ 2874383 2870368 


9. रिवांगांवा] 3िशा503, 95 

59. 99वचा909 (जावगात॑ खंदा।, 8979 

97. गा [रब उवां5, 2ैव9०23०, 3ए97 

57. ५४४५६३॥ 38 |.407975) सै, 3070439 
997 उतर सीट (गाव 230), चैं५५5072. 


परछार्डयाँ 


अप्रैल 994 में बंगलोर में आयोजित ऋषभदेच जयन्ती और 
कनटिक में जैन संस्कृति-संगोष्ठी की चित्रमय झलक 





2. ऋषभदेच जयन्ती 
महोत्सव 





$. कर्नाटक विधान 
सभा में मुख्य 
सचेतक श्री एन. 
जयन्ना द्वारा 
महोत्सव. का 
उद्घाटन (उनके 
याएं) श्री हृदय राज 
जैन (दाहिनी ओर) 
सर्वश्री अभोलक 
चन्द गादिया, सुरेन्द्र 
हैगड़े और किरण 
राज जैन। 





परछार्डयाँ 


अप्रैल 994 में बंगलौर में आयोजित ऋषभदेच जयन्ती और 
कर्नाटक में जेन संस्कृति-संगोष्ठी की चित्रमय झलक 








3. ऋषभदेच 
जयन्ती 
महोत्सव 
श्रोतागण 


4. संगोष्ठी 

(माइक पर) 

डा. हम्पा नागराय्या 
(बाएं से) 

श्री एन. सुरेशचन्द, 
डा. ए. वी. 
नरसिम्हामूर्ति और 
श्री हृदय राज जैन 


दी # 


परछार्डयाँ 


अप्रैल 994 में बंगलोर में आयोजित ऋषभदेच जयन्ती और 
कर्नाटक में जैन संस्कृति-संगोष्ठी की चित्रमय झलक 





कज ु प्र ते कक 
ऋकऔगाटक ने जन करफ़ाय सजीए 

हे] (६ ]( हा! 20२ प्र रा ध् 
0०४0६ (४ (३) एक. + उड्टी उसे 


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) है ॥ / 8 3) | 0), / रह 


के 


5. संगोष्ठी: 

(बाएं रो) 

प्रो. एन. चिदानन्द 
मूर्ति, डा. एम. डी. 
वसन्‍त राज और 
डा. पी. एन. 
नरसिम्हा मूर्ति 









6, संगोष्ठी: 
डा. चन्द्रशेखर गुप्त 
और डा. के. वी. कह 


सोन्दराजन ० सकता. गा, न, 48 म ही वििकादरख वा हक ५७०-काजिलन्‍ओनलथ 





परछाईयाँ 


अप्रैल 4994 में बंगलौर में आयोजित ऋषभदेच जयन्ती और 
कर्नाटक में जैन संस्कृति-संगोष्ठी की चित्रमय झलक 















7. संगोष्ठी: 

(माइक पर) 

डा. कमला हम्पाना 

उनके याई ओर 

रयामि अखिलेश जी 

और दाहिनी ओर हैं 
कर प्रो. शुभचन्द्रा 


8. संगोष्ठी: 
(बाएं से) डा. एम. 
एस. कृष्णामूर्ति, 
डा. ए. वी. नरसिम्हा 
मूर्ति और डा, आई, 
के. शर्मा 


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], (09 ६8, (५९७४ 028॥॥ - 0049 
इज्लाप पि680 2097078 ०0807 6563577 338494 
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0. ॥.॥४., 0९50.98॥06 6967920 


0-25, 2655 ६£१08५४९, 52|(९, 
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50. विताह०॥) (0॥80 38॥१ 727853 7363॥7 
8-28, 8870 श्षा, 08॥ - 40052 720329 73464॥ 
खि&508&कशा: छा, 00]8॥५8॥ [..8 38॥7 2520232 7773234 
207, 49॥0७' 4080, 206॥ - 0054 252999 7525433 
४४#0#/(0॥९७ 5॥. ४७४(॥८७ 500॥780 #/8| 3॥॥१ 665299 
#माह्डाएधाप: (0-67, ४७९७४ 89070, ((6॥090॥7 +080, 685404 
७५४४ 0९॥ + 0049 
$+#. ८६८ 90, पिश्वां80 [.8| 827808 35428 75347 (7) 
साहशा0एलश्ा: /205,7270/65808 0007५ 5346 7548॥ 
+॥॥ 78४8६, ४ 9/8-282002 
१06 90. 6.5. धशाध्वारं 6483248 5737023 
नाह्ड््धहाप: ॥५-264, 58608 |(॥85[, रिक्षा - | 5730232 
[४४४ 8 - 0048 
07. 5069॥ 779880 जल्जां0 7485920 


233, नि्वुशाद्वा। 5708५७, 
7686ंथा। रिध्रा, 0200 - 40034 


[.. ॥॥8ए४९९' 78880 ७॥॥7 4624707 4624022 
॥/5 ठिश0थी 5४९९ ए॥॥6, 4693642 4624202 
(0-49, 5007 8307. ?-।, [३७२९४ ए0श९॥ - 49 4635547 








650, लिताशा [8 एशछाएणवा...|# 603206 2875082 
5. .,0. 0॥08 & 00. (/क्रॉा"ा00/0०7फ/क्षां5 
9, &४७७७ +090, 5468/078 - 560002 


50. इशचा०% एाह्ाव॑ उद्बत 3508॥4 
089, (॥॥/5. #8/507'5 5॥8९॥08॥ (०0. 35082 
(?५.) (४. 0७॥7 (68, 8978 - 282002 
50. 5प्राधाषाबां दतावप जच्मात 7437722 28348 
/8. 3 7790006 ०८०., 2520432 
783, ।४४५8 उद्वरक्षा, 0॥ - 0006 
ण्ध्ष्ध4. 850. ना/त3५ 98] उतना 2255002 
डह्क्ादहा477/ 429-0, 700९8 - ॥, ?956 - , 2257]49 
५५ का 09॥॥- 4009] 
भाप तह, 8॥0. 0७986 3७॥ 723232॥ 3278332 


5ह्क्षाहा47: |॥/8., उंद्या। 0080786 & (0., "#क्राश००4०८०एाांक्षा 
48], £६8ए/्वा७व 3080, (7, (॥07५/६, 000॥/- 6 


50, 59७/858॥ एाक्षात उद्ा 7773272 
॥(/5. 38४०६ (3855 (०0. 7773272 
3823, ?्ला8॥ 0 भं, (७॥ 3080), 7772773 
00॥ - व0006 
डह्थाहा4777: 8॥. 0.7. उक्का 743829 
0-/9, विव्वाल) 0699, 58५०५७॥ 8087, 7245575 
(06॥॥ - 0052 
राह फ्राहईताः. 8॥. 26 98580 38॥। 7273888 23 5 46 
॥॥/8. (| ॥8065 764702 299242 
9639, शात्रा] 8807, 26॥- 40006 
9. ह 5, 508 पिल्रा4 ॥(था87 उ8ा। 7836453 332757 
क्राई45 माह: 3738, (को खक्षा।क्व0५/४४, ?िक्षात/ 00॥॥8], 332785 
006॥॥ - 40006 
॥6॥/85/88 
जी, 96 ट॥श्रा4 ७७॥१ (६.८. ?.), 24006 22349 
(ाक्माल। (006, 340 - 470002 (७/,7,) 22789 22037 
', 80, #8४॥0/९ ७8॥॥१, 
४५ 88, |. ९शा।। पि608॥, 00॥॥ - 0092 222098 2242845 
$#. ं।। ७७॥॥, 6868324 
€-29, 970 728, ॥9७ 028॥ - 0049 658638587 
शी. 2णती वित्र| 9७9; ॥४/5. 30007/ 778779 00, 68845499 23 6 89 
9, .8|ए9वा विक्लो ६08, (0. (0०५८, 090 - 40006 2947557 
779. 5.7, द्लाह्ाादु, 2065500, 009(. ण 86780 7257984 7.7. 
08॥॥ (॥/४७४६॥५, 06॥॥ - 40007 
80. 58ा (पका जउशा। 225490 


53, लिड्ञाहंओ शी, 000 - 0092 
3 तनमन +++मम-++-«3++33+3 33-33 ५ मनन». 3+५++++५७३७५ ७७ +++े.)3+3+७3+++++.3+33+++++-+क»७७७+क+७आ३.+५.+++७ ७५. +५»७७3७9.+७+»९ ७ ५७७3०» +>का मम ५५७++न५७ «4०००७» ५६५फ ९७७० ५५०॥७७७४३७-ारक ०3०५७» कमर, 


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पं्)5 (एॉपार 97 (दाावव ((एाठ(पाट 
प्राएजाा। वंठंत3 रिप्रांटा5 गात धीशी 
(0॥(५00 प505 

बंशा।व 67 वी 47793 8 

एाफपिशंणा फिब्ाशा) रण खंगांएंशा बाएं ॥5 
खा वी 50प0 शिवा + ह 30९6 $टाशा8 
पैगाव चिंणाप्रााषटा॥5 ॥ १070॥ (7॥9 929 
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बंगागव # बा4व #ाएीए८पचाह ॥ /॥0ी5 


» रि९९८९७ 20॥520027९५$ | उं6 54 (९६५७ 


(86077॥0705 ॥॥ वद्ाग॥॥च0७ 
ए९॥8४३75 54865 ॥ ४४१८ जाटायाॉप्र९ 


राजस्थानी लोकभाषा में ऋषभदेव 


97., ४.७०. ए०५४वाधावः गं 
9. श.(|ञावद्याआ456 चिएा पीए 


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97. & ५, 50643 २३|4॥ 
97. 8.४. १४79श॥।॥3 ७४9 
&7. रध.9. (गाव िंपातीए 
शिर्ण. 0.५9. $फ्रागगाबा29वा। 
छा. 8.6. 56778 


0॥, ॥चएठ6ठा) श9॥3942ए७॥ 
97, 8#59लीक्ाताीव उ७॥ 3छ9्प्धा 
डा० महेन्द्र भानावत 


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श्री ऋषभनाय और उनकी मूर्ति परम्परा 

ऋषभ और शिव: तुलनात्मक विवेचन 

वैदिक एवं पौराणिक साहित्य मे ऋषभदेव 

पणि और श्रमण संस्कृति 

रििजातय : ॥॥6 फाट-नी570९ ७४०५४-णिवपदतः 
र् जगरारंबाए इटांशायी6 इफांतरोएनी५ 

मिउवजातव जी गी९€ 8॥37ए3०2०3 

बरैगेघव जॉटाठांप्रा€ थी वा) 

बेंग्रागव हाँ बात॑ हैटॉप्रॉोएलएर ॥ दिवाफरधदठ 


हा० रमेश चन्द्र शर्मा 

डा० गोकुल प्रसाद जैन 

प्रो० खुशाल चन्द्र गोरावाला 
प्रो० कृष्णदत्त वाजपेयी 


जी. हैिवाठड्थाएक,ञं दि 

97. 5999 ?8। '१४।376 

शिर्ता, रि. टडाफब3 ,9857। 
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33 - 39 


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44 - 54 
55 - 82 
83 - 9] 
92 -45 


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435 - 39 
440 - 44 


47 - 56 
456 - 66 
467 - 777 
472 - 475 


476 - 390 
79 - 397 
98 - 24 
245-227 


एकाठांगां 


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ण ८ट०णाधएरएफीएणा 0 एशाएफएड 4592८९५ ० 0967 50टी९ॉफए, वादा ५० 7979५ 72॥9॥075, 5९८४ 
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5ट779॥075 एछपाॉ 435 350 ठ5८घ७55९९ उपीशा(टगौंप्र शा ॥76प्रांहाॉ९, 0॥08व[आ2ट7! ठा0॑ 
7गेबर०दावएीटव श्वॉधार5, चिंएणाए०एटा, ॥2 35 6]5८प55९0 ९ ७४०0705 0 गांगरांपा गाते ॥९फ9 
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052955९8 ॥6 #5#07ए 078 ॥07शा5॥0ग 0ब्689 2९709 ऐएांगे €व्र॑पा९३ ०0 दराएैधांरटपा वो 
इज९ए5. 3९5४665 उमावएबावँ९803, (०वा वींशटं 70प््ली0प॑ ९ बछ९5 एगी एावादए4 * 
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एक्वंडागएंडा) गाद॑ एवउबवांणआा 5 350 09527020., 7]6 उधा07 4935 $टा0दा]9 7280 ५७70 प5 
3592८65 30 ॥85 6९5८१०४७८० ॥#रशा। एंणंतफ. 


9. ॥.6 ,जञावाधाठ ॥ ॥5 एग्छुशा 'बग्या।३ ता बात 6काएशटाएार ग शादीावब' 55 
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वृत्ढह हक्ाण शिर्ण, 5.ए.पिद्यावाव गा गिंह 099९ रिघ्वण3 गा वी९ दतवाए३एटत॑व' 
॥9४९5( वा ९5 फ्र्व0७5 ॥॥280॥795 ०0 रि550॥3 ॥ ॥6 ह6ै9ए४4ए2७३. 3698॥॥॥69 एग ?8॥|5 


9) 


ण॑ (#९ रिप्चए४०३, पीए बचत07 7220हापटड 0९ ९०ाीटा ठ रिघ्व॑णीव एव) 02 ९00/९0९7 2९ 
[95 7९97९527/2४0 0ए एव7)0प5 तशा€६ ॥ /$क्राती। 8पंचव ज्र।€7९ एव-ंती]ाएु ७७५ ४50 
3 [70]९2. ४॥0000८९४ ७३४ [॥6४ गाव) [8802. एबाएव5 ण 6 #0ए४ए2८०६ 80९ 8 एप्रा027 
० श्बरापा९४ जीरो वार टतागागाध।तका छांग (005९ 0 ॥॥6 १्या75. 5]0एॉंफ्रतिवााए79 ए़रएगएते गाते 
(580॥8 725(07९6 [45 50ए€7/९६7फ  गश्वा 40५64 70परावा।, 


छा, ए#बर॥एवा(709॥॥7 ॥ 67 फुठफश बेबी जिशवॉधार ॥) वाया ॥3/॥658 ९ 
॥शशिश06 40 उइद्राशेतिाव वी) एाददा) टॉब5४०5. ॥ 60॥-7॥ रश्यां, 8.0. ९ ४ 
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चरवेश॑गीज व हैवी-88559एव7 वी जाशाठाए/र गात॑ एक0055 आफ्रै४5, 27॥29 ० ॥9॥3 35 97९- 
5ःठब्राश्त 45 रीएत॑९0 [क्‍0. 75९ 00 8 6 छुद्व[07392, [36 ३7935 0$8 67 ॥7907970८९. 
8254025 व॥९ एशा0व॑5 ॥) ग्राब्या।]998५३७ 59९ 3॥06 ॥7932८ ० ठि॥4%#गव णा था (श्र 8, 
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डफज९ बएतु 7460 45 १४० दाठाहः शवॉपर ]"0ा (6९ एशा ० ९३४९१ 869. 


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7970700705 6 गै॥0प6 ९76 5 ॥0 ताशिशा०९ ० वा गे ईैक्वात499, एटा ७५७॥८७५, 
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(५७7९5, 2 052७55९५ थिं099388770॥)85 300 38530॥5 ९६९ 


छा. कआावशञा9779 ॥ 5 949७ चिंवात308 5व०ीप्रश्वा9 ४९ 36 .795049 २५३४०(॥३0९५७ 
(॥ 79) [78८९5 6 0९ए९०कृञ्माशा ० एवाॉ005$ 35९5 बाते गीशा ८णा0णाॉं079 टिवांपा'९5 
[0॥7कवा टाणी2वाॉ07, 89, चिंव5 200 78 906 0७९2९॥ (९ पद) ९0ग्रा।0प्री0 ०0 रि5३०॥30९५०४. 


शिर्ण, ॥#फ्रशावाटाबा04 007495/ ॥7 #5 939९ '५४०४४॥४७ 8पाव ?ि8५४७7॥09 5399 
ग९।॥ रि58050203' (॥ गाता) 35 5$९३7८॥९७ व0 €९१एगा]९त एठा0५5 रंशाशा5 ९ 
एावफ9$5, गिवाफएगचव0०॥4 300 322९एॉवा८९ ० 53003 35 वैटबागबा0 ॥ ९ उित562एवंव 
एप. 


[ठ९€ ?20/. ॥९.70. 8छ8]94 ८०॥!ए0प्र०१40 शिन्या। 70 काग्ाव5ह 50780[ ( |70/॥). 
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दर्पण 
गत आयोजनों और 
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(0505 0 फाएएंं०पड 
श्टाग्राद्वाड गाव त्ीाएा फिटांगा$़ 


विषय - विश्व संस्कृति में तीर्थकर ऋषभदिव . ऋषभदिव - संगोष्ठी 


स्थान - दिल्‍ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, दिनाक ३० अप्रैल व १ मई, १९८८ 


शोधपतन्र - 

() विश्व इतिहास में ऋषभदेव (लिखित उद्बोधन, आचार्य श्री विद्योनन्द जी तथा युवाचार्य 
श्री महाप्रज्ञ जी) ' 

() वैदिक एवं पौराणिक साहित्य में ऋषभदेव (ले० प्रो० खुशाल चन्द गोराबाला) 

(80) ऋषभदेव विषयक जैन साहित्य (ले० डा० फूल चन्द जैन प्रेमी) 

(णे 755छ848 :- #6 [|#टनाड।ठांट एफ णिफ्ाएबाता ए ज़ैगालंतप् इटांलाधिीए नरमी पाप 
(89 99. #गञाठब्क्ाफकर्ता रिका) 

(ण) बौद्ध वाग्इमय में ऋषभदेव (ले० डा० रमेश चन्द जैन) 

(५) पुरातत्व में ऋषभदेव (ले० डा० रभेश सी० जैन “नूतन” ) 


संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रमुख विद्धान - जस्टिस एमगाल० जैन, डा० मुनीश चन्द्र जोशी, डा० बी० के थापर, 
प्रो० ब्रज मोहन चतुर्वेदी, प्रो० के० डी० गंगराड़े, डा० पुष्मेन्द्र वुमार, डा० वाई०डी० शर्मा, डा० गोकुल प्रसाद 
जैन, श्री गोपीलाल अमर, प्रो० चाचर्स्पति उपाध्याय, प्रो० महेश तिवारी, डा० शिखर चन्द जैन, डा० गुलाब चन्द 
जैन, डा० सत्य प्रकाश जैन, श्री राजमल जैन, डा० के०के० मिन्तल और डा० दामोदर शास्त्री 


विषय - भगवान महावीर की काल-गणना - विचारमोदरी 
स्थान - ४, तिलक मार्ग, नई दिल्‍ली। दिनाक ४ सितम्पर, १९८८ 


शोधपत्र - पं० चन्द्रकान्त बाती और डा० कंबर लाल जैन व्यास शिष्य 

संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रमुर्य विद्धान - डा० मुनीश चन्द्र जोशी, प्रो० डी०एन० झा, प्रो० देवहूति, डा० लक्ष्मी 
अन्द्र जैन, प्रो० वाचस्पति उपाध्याय, डा० गोकुल प्रसाद जैन, डा० शिखर चन्द्र जैन और डा० मोहन चन्द 
विषय - “मृकसाटी” महाकाव्य - विचारगोष्ठी 

स्थान _- ४, तिलक मार्ग, नई दिल्‍ली। दिनांक १५ जनवरी, १९८९ 

शोधपत्न - प्रो० विज्येन्द्र स्वातक और डा० विमल कुमार अँन 

संगोष्ठी में भाग लेने वाले विद्वान - प्रो० निर्मला जैन, डा० २विता जैन, डा० लक्ष्मी चन्र जैन, डा० गोकुल 
प्रसाद जैन, डा० शिखर चन्द जैन, डा० मोहन चन्द और श्री सुमत प्रसाद जैन 


(५) 


.. जोंग, -. गिगम रंगशाला; डाउन हाल, दिल्सी। विनांक ५ आर्च, १९८९... 9) “के 
सोजकश -  शा० मोघुल प्रसार जैन, भी सुमत प्रसाद जैन, डा० ववानन्द भार्गव, प्रो» खुशाल चन्द गोराबाला, .. 
हा» भपूर चन्‍द जैन और डा० भुंधर ताल जैन, व्यासशिण्ष ! 
संगोछी में भाग लेने बाले विहात - हा० मुनीौश बन्र जोशी, प्रो० महेश तिकारी, हा० केतके० मित्तल, प्रो० 

..शत्यदेत चौधरी, प्रौ० बाचरपति उपाध्याय, झा० (शीमति) सुदेश नारंग, डा० पुणेन्द्र कुमार, डा० अमरा सिंह औरे 

...._ शा० मोहन चन्द आंदि। ' 

५, विषय सगवान ऋषभदेद जपन्ती एवं विचारगोष्ठी_ दिनांक १३-५-१९८९ , 

: थाम - सलाकता, जैन महिलाश्रन, दरियागंज, नई दिल्ली ्ि 

भाषण - डा० जगपीश अत जैन, मस्यई 

गौछी में भाग लेने वाले विहान - डा० भुगीौश चक्र जोशी, डा० सत्य पाल नारंग, डा० गोकुल ब्रशाद जैन, भी 

डाल चन्द जैन (सांसद), डा० लक्ष्मी चना मैन, श० मोहन चन्द, डा० कंबर लाल व्यास शिष्य, श्री सुमत प्रताद 

जैन, थी गोपीलाल अमर और डा० सब्ति जैन आदि। 

६. विषय भारतीय संस्कृति को जैन ध्लर्म का योगदान- विचार गोष्ठी 
स्थान - ४, तिलक जाग, नई दिल्‍्ली।.. दिनांक ३१-५-१९८९ 
भुख्य अतिथि - श्री विष्णु प्रभाकर (वरिष्ठ लाहित्यकार) 
मुख्य वक्ता - श्री यशपाल जैन (वरिष्ठ साहित्यकार) 
अध्यक्षता - ह० मुनीश चनः जोशी 
मुख्य वक्ता - डा० लक्मी अन्दर जैन और श्री सुभत प्रत्ताद जैन 





७, विधव - सिन्दु सभ्यता में श्रमण संस्कृति . में श्रमण विचार गोष्ठी 
स्थान _- गांधी शान्ति प्रतिष्ठान, सभागार, नई दिल्‍्ली। दिनांक ८-११-१९८९ 
उपृधाटन - श्री पुरुषोत्तन गोषल (अध्यक्ष, दिल्‍ली महानगर परिषद) 
अध्यक्षता - डा० एसण्बी० देव मुख्य ब्रक्ता - हा० कृष्ण दत्त बाजपेयी 

८. विदय - भगवान ऋषभदेव निर्याण महोत्सव एवं _ 

ह भारतीय साहित्य में ्रमण परम्परा तथा पथ जाति और जैन संस्कृति-संगोष्ठी_ 
सवान - टैगोर हाल, दिए्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली। दिनांक २५ से २८ जनवरी, १९९० 
सानिध्न - माँ श्री कौशल जी ह ह 


सुस्य अतिथि - ओऔ रविराय (जध्यक, लोकसभा) 
जसोध पत्र - 

(0). जैन एवं भीद्ध साहित्य में श्रमण परम्परा लि० हा रमेश बन्द जैन) 

(2) 9... निलानभीलंधा ध एजानावाए, छिपवकैता गापे गेगंगांगा (07 सर्ज, 'र.5, 5धाज0०) 
(3. जैन संस्कृति और श्रमश परन्परा (लि० शा० एस० जी० देव) - के 
(4)... वैदिक साहित्य में श्रमण परम्परा लि० डा० दपानन्द भागब) 


. 


(5)... पणि जाति और श्रमण परम्परा (ले० डा गोकुल प्रसाद जैन) 

(6)... कांड ॥ ऐ० चंदा है रिंएए निठागुकुया छाग्प्णै्वंपुर (99 07. 72.0. उबात, पपणंडा)) 
(7) भौतिक और आध्यात्मिक संत्कृति के विकास में पणियों का योगदान (ले० फृष्ण दत्त वाजपेयी) 
(8) रिक्वा& ॥१(॑ ऐ€ वंबता5 (89 07. 5.7. काया तो) 

संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रमुस्न विद्वान - डा० एभ० सी० ज़ोशी, जस्टिस एम०एल० जैन, प्रो० महेश तिवारी, 
डा० राम करण शर्मा, प्रो० वाचत्पति उपाध्याय, प्रो० के० के मित्तल, श० फूल चन्द जैन प्रेमी', ग्रो० खुशाल 
अन्द गोरावाला, डा० सुदर्शन लाल जैन, डा० शिखर चन्द जैन, डा० पृणेन््र कुमार, प्रो० सत्यदेव चौधरी, डा० 
' मोहन चन्द, डा० एम०एन० देशपाण्डे, डा० बौ०के भापर, डा० दामोदर शास्त्री, श्री सुमत प्रसाद जैन, श्री गोपीलाल 
अमर, डा० कैलाश अन्‍्द जैन, डा० सुदेश नारंग, श्री पन्‍ना लाल नाहटा, श्री राजमल जैन, डा० बिशन स्वरूप 
रस्तोगी, प्रो० संघ सैन सिंह, डा० एस० पी० नांरग, डा० अमरा सिंह, डा० विभल कुमार जैन, डा० सविता जैन, 
हा० अभिल जैन, डा० अरुणा आनन्द और डा० एस०पी० जैन आदि 

विधव. - कालकाचार्य - ऐतिहासिक दृष्टि, विचारगोष्ठी 

सानिध्य - मुनि श्री आनन्द सागर, “मौनप्रिय” जी और भुनि श्री (डा०) नगराज जी। 

स्थान - गांधी शान्ति प्रतिष्ठान सभागार, नई दिल्‍्ली। दिनांक १५-९-१९९० 

अध्यक्षा - प्रो० आर० चम्पक लक्ष्मी 

जोधपत्र - श्री फना लाल नाहटा और पं० चन्द्र कान्त बाली 

भाग लेने वाले प्रमुख विद्वान - प्रो० डी० एन० झा, डा० लक्ष्मी चन्द्र जैन, प्रो० पुष्पेनद्र कुमार, प्रो० एन० एस० 
शुक्ला, डा० एस० पी० नारंग, डा० गोकुत प्रसाद जैन, श्री गोपीलाल अमर और डा० सविता जैन। 

विषय - भगवान ऋषभदेव जयन्ती महोत्सव एवं भारतीय समाज और ऋषभदेव-संगोष्ठी 


स्‍थान - अशुव्त भवन, नई दिल्ली । दिनांक १० व ११ मार्च, १९९१ 
सानिध्य - मुनि श्री गुलाब चन्द जी “निर्मोही” 
शोधपतन्र - 


'(7). जिन ऋषभ तथा श्रमण परम्परा का वैदिक मूल (ले० डा० मुनीश चन्द्र जोशी) 

(2) ऋषभदेष का दर्शन और समाज व्यवस्था (ले० प्रो० खुशाल चन्द मोरावाला) 
3). व्रात्य जाति.और जैन संस्कृति (ले० डा० फूल चन्द जैन “प्रेमी” ) 

(4)... व्रात्य समुदाय और श्रमण संस्कृति (ले० डा० गोकुल ग्रसाद जैन) 

(5) प्रागेतिहासिक भारत में समाज, सामाजिक सूल्य और परम्पराएं (ले० डा० जगदीश चन्द्र जैन) 
संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रमुख विद्ान-जस्टिस मिलाप चन्द जैन, जस्टिस एम०एल० जैन, डा० एम०सी० जोशी, 
डा० एम०एन० देशपाष्दे, ह० आर०के० पर्ती, डा5 राम करण शर्मा, प्रो० के०के० मित्तल, प्रो० #२७सी० पाण्डे, 
प्रौ० जार० के० जैन, प्रो० एन०एस० शुक्सा, डा० 'निजामुद्दीन, डा० रमेश चन्द्र जैन, ड० गोकुल प्रसाद जैन, 
डा० पी०डी० जैन, प्रो० एम०पी० जैन, श्री गोपीलाल अमर, डा० एस०पी० जैन डा० लक्ष्मी चन्द्र जैन,पं० प्रकाश 
हितेवी शास्त्री, प्रो० खुशाल चन्द गोरावाला, डा० जय कुमार जैन, डा० कुवर लाला ब्यास शिष्य, डा० धर्मेन्द्र 
नाथ, डा० पुआओेन्द्र कुमार, श्री सुमत प्रसाद जैन और डा० पी०सी० जैन आदि 

(शा) 


१२. 


. स्थान .-. राष्ट्रीय संग्रहालय आडिटोरियस, नई दिल्ली। दिनांक १२८-१०-१९६९१ 


... सानिध्य - आचार्य श्री विधानन्द जी, मुनि श्री मुलाब चन्द जी “निर्ोही”, मुगि शी सुयशप्रभ जी और मुनि 


की कमल जी “कमलेश” 


मुख्य अतिथि - अजस्टित रंगनाथ मिश्र (मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय) 


शोधपत्र- - डा० रमेश चन्द्र शर्मा (महानिदेशक - राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्‍ली) 

विशिंष्य अतिथि विद्वान - डा० मुनीश भन्र जोशी, डा० एम० एन० देशपाष्छे, ढा० स्वराज प्रकाश गुप्ता, डा० 
जदसी चन्द्र जैन और डा० आर०ही० जिदेदी 

विषय - भगवान ऋषभदेव निर्वाण महोत्सव 4 


' स्थान -  फिक्की आडिटोरियम, नई दिल्ली । दिनांक १-२-१९९२ 


मुख्य अतिथि - श्री अर्जुन सिंह (केन्द्रीय मानव संसाधन मन्‍्त्री) 


अध्यक्षता - डा० विशम्भर नाथ पाष्डे (पूर्व राज्यपाल, उड़ीसा), 


'विशिष्ठ अतिषि- जगदाचार्यः स्वामि अखिलेश जी 
विषय - सांस्कृतिक सदुभावना - संगोष्ठी 
स्थान - राशष्ट्रीय संग्रहालय आडिटोरिवम, मई दिल्ली। दिनांक २ व ३ फरवरी, १९९२ 
मुख्य अतिथि - जस्टिस एन०एम० कासलीवाल (न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय) 
विशिष्ठ अतिथि- श्री सीण्के० जैन (सेक्रेटरी जनरल, लोकसभा) 

स्वामी (डआ०) अखिलेश जी, 2०. १०९) 0. ६09, ०.5.8. 
शोधपनत्र - 
() आतेद में ऋषभवाच्री ऋचाएं (ले० प्रो० खुशाल चन्द गोरावाला) 
(2) पिबांभाव ॥ 06 #0१०९१४ (59 9, 5,7, पिश्षणा4) 
(9) जाग-जाति और श्रमण संस्‍्कृति (ले० डा० भाग चन्द्र जैन भाव्कर) 
(4) जाग-जाति पर श्रमण संस्कृति का प्रभाव (से० डा० महेन्द्र सागर प्रणण्डिया ) 
(5) ब्रात्य जाति और श्रमण संस्कृति (ट्वितीय पत्र) (लेव डा० फूलचन्द जैन “प्रेमी” ) 
(6) ऋषभनाथ और उनकी मूर्ति परम्परा (ले० डा० रमेश चन्द्र शर्मा) 
(7) पुरातत्व एवं कला के प्राण-ऋषभदेव (ले० डा० शैलेन्द्र कुमार रस्तोगी) 
(8) आनके सभ्यता के आदि प्रस्तोता- ऋषभदेव (ले० डा० शशिकान्त) 


[प.. #िजएतंडएविवा5करैजिजॉथ्लेफर बाव#ध50ए0श7॥ 909 [97 फ.५,३०फापदवकृा) 


(0) ऋषभाषिपुरम-केरल (ले० श्री. राजमल जैन) 

(!!)... उत्सरी और पूर्वी भारत में जैन पुरातत्व और कला (ले० डा० राकेश दत्त त्रिवेदी) 

संतौष्दी मे भाग लेने काले प्रभुख विहान - डा० विशम्भर, साथ पाष्डे, डा० कृष्ण दत्त वाजपेयी, डा० एमणएल० 
ैशपासो, इस» भुनीश चद जोशी, प्रो० आर० चम्पक सदयी, डा० एस०एस० राणा, डा० स्वराज प्रकाश गुप्ता, 
हा० रायबेक सिंह वाजपेयी, प्रो० पृष्पेष्ठ कुमार, श० रमेश चन्द्र जैन, डा० रमेश सी० जैन “नूतन”, डा० सत्य 


(५॥॥) 


१३. 


हैंड, 


चाल मारंग, डा० जेड००० सिद्दकी, डा० चनाशेखर गुप्ता, डा० मोहन जन्द, थी सुमत प्रफार जैष, डा० गौफुत 


. अलाद जैन, श्री नीरज जैन, ओऔ निर्मल जैन; डा० कपूर जन्‍द जैन, ढा० जब भुमार जैन, हा० फैलाश अन्य जैन, 


डा० एस०पी० जैन, डा० गिजायुहदीन, प्रो, एम०एल० जैन, डा० अच्षणा आनत्व, डा० भक्तूर चअन्द जैन फायनीयात, 

ओऔ प्रकाश बाषना, श्री. सुशीस जैन, डा० जोगेश चन्द जैन, श्री रंजन परमार और श्री सुशीष जैन शास्ती। 

विषय - भगवान ऋषभदेव जबन्सी-अदोत्सव 

सवाग_- गांधी मैमोरियल हाल (आड़िटोरियय), नई दिल्‍ली। दिनांक १४-३-१९९३ 

मुख्य अतिथि जगदाचार्व स्वाति अखिलेश जी 

विषय - आग्देद में जैन सन्दर्भ तथा नस 
दक्षिण भारत में जैन स्थाफत्य और कला-संगोष्ठी । (दिनांक १५-१६ भार्च, १९९३) 

मुख्य अतिथि - शा० विशम्थर नाभ पाण्टे (पूर्व राज्यपाल, उड़ीसा) 

स्थान _- राष्ट्रीय संग्रहालय आाड़िटोरियम, नई दिल्‍ली। ! 

शोधपनत्न - 

(7) ऋग्वेद मे अईत जौर ऋषभवायी ऋचायें: एक अध्ययन (ले० डा० सागर जल जैन) 

(2. दिरण्यार्भ सूस्त में जैन सन्दर्भ (ले० डा० गोकुल प्रसाद जैन) 

(3)... रिप्काब # ॥ रिहुए७8 क्षा्त २४७ दिशा।शां (39 07. 5.7. फ्लावा।) 

(4) केसी सूकत मे श्रमर सन्दर्भ (लि० डा० विवल प्रकाश जैन) 

(5). केरल में जैन स्थापत्व और कला (ले० श्री राजनल जैन) 

(6). म्का #प्रपीश्लैपार बाते है था दिखाआंबध ( छि9 जि. (९.७. रक्षा) 

(7) गैगंवन #एट।श्टरांपार खावे # ॥ आग फिवेए ( 89 0. #॥.५, 50प्रावंधव विभ्ेका) 

(8) गैगकंग  अंशनांणर 0 थाओं (89 शर्ण, 8, 'क्माफुक आप्रेभा।) 

संगोष्ठी में भाग लेने बाते प्रमुख विहान - डा० एम०सी० जोशी, हा० बी०फे० बापर, डा० राम फरण शर्मा, पो० 


' ग्रेम सिंह, शा० एम०एन० देशपाष्डे, प्रो० बी०एम० चतुर्वेदी, प्रो०् काचस्पति उपाध्याय, डा० सरोजनी मतिषि, प्रौ० 


पुथ्ेन्द्र कुमार, डा० आर०सी० शर्मा, प्रो० श्री रंजन सूरिदेद, थी डाल चन्द जैम (पूर्व सांखद), श्री फृछ्ा हे, 
डा० एस०एल० राजा, डा० स्वराज प्रकाश गुप्ता, डा० आर०हो० तिवेदी, पश्री हा० लक्ष्मी मारायण पुणे, हा? 
स्केहट रानी जैन, डा० चन््रशेखर गुप्ता, डा० रमेश सी० जैन मृतग, श्री सुशील भैष, भरी चुतत प्रसार जैन, श्री 
प्रकाश वाफता, औ रंजन परमार, डा० रमेश चन्द जैन, डा० कैलाश अन्द जैन, डा० शैलेना रस्तोगी, झा० विलाभुदीन, 
डा० टौ०ए०वी० मूर्ति, डा० शिव प्रसाद, डा० फूल चन्द जैम “प्रेमी”, श्री निर्मल जैन, शा० जाई० के० शर्मा, डा० 
(औमति) सुषमा कुक्पेष्ठ, डा० मोहन जन्द, डा० महेश भारतीय, हा० भागेगा चुमार सिंध, ४० अशोक जुमार, 
डा० रविम् नाथ मिश्र, डा० कमला पंत, डा० महेषद मानव, डा० जे० एन० जोशी, डा० ईश्वर शरण पिश्यकर्मा, 
डा० एसल्पी० जैन और डा० अरुणा आनन्द 


0... मिच्ोक३49५ 0७३ ॥(व०५७३७३ 


एक्वाएट +.. 0फरेण एन्शनताब पिब्राएु3 चिाक (वैपवा।0ांाए, ठिक्षदर्बाणक, ७क- अप करी 04... 
(कार्श 5028४ - जा ि, उल)क्ाा।4 ((कार्श भर, (क्ााथंओऔ॥ ॥श्दंड्रिक।एड 29, 505 क्ष०९.) 
स0...-. शंब शा ए #दाआांबड- था 


(58) 


_.... पंद्राक + एलकिबविणतीशोजािनबांटप०णी "शाप ऐआइब्रेगणे चाट: 4-56 994.. हे 


वी ०० अशणाकाम।ए, ठिक्राइबोणच (जाशिनी॥, छिद्वइनो मर) 
हंतंजिल। ता प8 फ़फ्णा 
().... मिल्नोजवंणर ।मेगनांधार ॥ दिगाभालव (५ 0. 8.8, ॥इभोवा) 
8 .2। ###तक्तीजक कै: ीक्शंशार (यीडंजएतब जि॥ जि, औबाओ। फिद जिफंिक्य) 

(है) खिलाफ विकुणांका २शआी। पिप्ंशात के गन्शा! एजातंजा।ला ० पातीदा विभ॑०० (99 रिषां 

..... इप्ांजीन पपवानवाच) 

(4) ऐंबं। (जोधार ॥ सिताब्त तीशबांधत (59 विर्ण, में. पाधक्षाक्षाएंत शिफए।.. 

().. ह# पहाएह ता एद्रान रिंक-ऋ की दिका्रतं+ छिए (|, 0. परकककाती रक्ली..!9. 
(0) तिफणांगां उंड। दिप्राशर आा0 शा ९भांफितील (9 फि. 7, पिववशंधपत निधाधी पी 
7. खोज का थी दिज्ञाजांबात छि॥ जि, व. हि, फिशोजानाी औिभा).. 

|है) ए#फ़िक्षा रिक्रॉशा) ७ रंग्रा।ंमा) बात ॥4 है ॥॥ 590 वी (59 जि. १.४, 50एंबार 

मिल्क्ष) 

(9) #ि७०काईं 4:0एशां४+ 7 सब (७७ छटाएज़ी एफ की क्षण पिक्त। (09 .. ैजीज्वंशरकाए 
0. एकता ण॑ एक्रत । ल्याजश् ते दिवाततांओज (8 वि, विगा।३॥ पिंवपुवा गजल) 

(7)... जात 'िकाफ्रााशा ॥ िंएणी) दिक्षाार्वाकरएव (59 जि. ह. ४. फिंवाबशआाजभव 'रपाएं॥) 

(2). उंड्ोह निशाजात्भांब ॥ जैतपरत सिकाावांदा। (89 जि. रैं.5. कीकिा। कैपाएीए 

9). रत (फ़िर के सह॥ ॥शजंपा> (छिए गिर्ण- 5.9. धशहवाता१ाएशा)) 

4)... तोजा। हैते बातो लायभीडलंफार ॥ हवन (ि9 जि. 6. भाग) 

(58). ४बॉबधा३ 3959 था 08 रिकपंब आते वक्षासंत्ा) (छ9 ७. हि।कव (ग्रर्वाद बंगा। लिक्षेक्र/ध) 
(6).. ताजस्थानी लोफलापा में ऋषभरेष (लि० डा० भहेर्ट भाभावत) 


[8 ण॑ कक्रतएक्षां डटॉडबांड मे 06 विलाओना + जि. शिवा विवााएजआ३क, जि. ि.औ, ४9॥8 
एफग्राकाब, सिर्षा, पे... पिकंबाओं, गिर्0ा, पिदलाजबधाहुब हिब8, ती।. जीावा३ विधात्तता, जि. 9009] 
गमिदाकप उंद्त, गिर्णा, 5.%, चिंकागाभी, 7. (पकवान शीशे उप, की, 8... ()भ्रातायाए।, शी) 
7.8, (कक्रावा॥ अअंजवा, जि. पं, लैएालओ सिजाश, निर्पा, २९०एबावीआब सियाओ, जि. 58व्रण्ण्काी 
९७ रिजरना क्षाप्रे जि, #ैशफा। #ै।आप॑ लि! 





थेनेले 


. (0): 


प्रेरणा, लक्ष्य और अभिननन्‍्दन 


यो तो हर स्यक्ति को अपना देश अच्छा लगता है, क्षपने देश की मिट्टी से उसे प्यार होता है, पर हम भारतीयों 
को क्षपना देश प्यारा तो है ही, हम भारतीय हैं इसका हमें गौरव भी है। हमें गौरव है क्योंकि भारत वास्तव में एक 
महान्‌ देश है। यह अपने विशाल क्षेत्रफल था विशाल जनसंरूया के कारश से महान्‌ नहीं है, क्योंकि भीव की जनसंख्या 
लो हम से भरी अधिक है और हमसे भी विशाल क्षेत्रफल चीदर व कस आदि अन्य देशों का है। ज्ञान और विशान के क्षेत्र 
में भी हम ज्ग्रणी नहीं हैं और आर्थिक तम्पस्वता की दृष्टि से तो हमें गरीब राष्ट्रों में ही माना जाता है। तब प्रश्त जकूर 
अठता है कि उपतोक्‍्त किसी भी दृष्टि से जब हम प्रथम पंक्ति में नहीं आते हैं तो हम महान्‌ राष्ट्र कैसे माने जावेंगे। 
हमारे देश की महानता है हमारी विदिधता में एकता। प्रकृति ने केदल इसी राष्ट्र को अपने सभी रंग और आतुएं, प्राकृतिक 
छाट्टा और सम्पदा 'मुक्तहस्त से प्रदान की है। इस देश में हैं विभिन्न भाषाएं और परम्पराएं, अनेकों जातियों, धर्म और 
संस्कृतियों के मध्य अनेकता मैं एकता। भारत के लीन ओर महासागर की असीमित और विराट जलधारा है तो उत्तर 
में है बर्फ से दफा संसार का सबसे ऊँचा पर्वत हिप्तालय। सह्तारा के रेगिस्तान की कृति राजस्थास के थार रेगिस्तान में 
जपलब्ध है तो संसार में सबते अधिक वर्षा भी भारत के ही भेरापूंजी (आताम) में ही होती है। दोपहर में थार के रेगिस्तान 
में ऐसी भर्मकर गर्भी हो जाती है कि उस गर्भी से उबलते पानी से भय तैयार हो जादे और हिमालय पर इतनी ठंडक 
कि पानी यीने के लिये भरी बर्फ को गर्मी देकर पिचलाता पड़े। पूरे वर्ष इस देश में ज़ब जैसे मौसम का आसन्‍्द लेसा चाहें 
देश कै किसी एक हिस्से में उस मौसम का आनन्द प्राप्त हो सकता है। हर प्रकार के फल, फूल, स्जी, सुगन्ध, स्त्री, पुरुष, 
विश्वाप्त, आस्था, संस्कृति और सभ्यत्षा यहां हैं। सबसे वड़ी विशेषता है अपनी मान्यता और आस्या में हुढ़ रहते हुए भी 
दुसरे की मान्यता और आस्था को सम्मान देने की इस देश की परम्परा। वास्तव में यही है अनेकता भें एकता। 


जब शक्ति प्राप्त ही जाती है तो शक्तिशाली का मदान्ध हो जाना अस्वाभाविक नहीं है। इसलिये शक्तिशाली 
होने से ही कोई महान्‌ कहलाने का अधिकारी नहीं बन जाता। बल्कि शक्ति प्राप्त होने पर भी उसका दुरुपयोग न करना, 
दूसरों के अधिकार को भी सम्मान देना, धीरता, गंभीरता, सहनशीलता और विनयशीलता के गुण ही उसे महान बनाते 
हैं । इतिहास गवाह है कि अनेकों बार इस देश में ऐसी शक्तिशाली सत्ता स्थापित हुई है जो विश्व को पददलित कर सकती 
थी; अपनी सीमा के निकट के देशों को अपनी सत्ता और शक्ति के बर्वर प्रहार से आक्रान्त कर सकती थी; पड़ोसियों करो 
रोंद सकती थी, लूद सकती थी और अपनी विचारधारा व संस्कृति को शक्ति का सहारा लेकर जिस्तार दे सकती भी, जैसा 
इतिहास में अनेकों बार विदेशी शासकों ने किया भ्री है। पर इस देश की परम्परा में कभी तलवार की धार पर असती 
संस्कृति और मान्यता को प्रसार देने का चलन नहीं रहा है, क्योंकि इस देश ने शासक और शासन दोनों को ही ऐसी संस्कृति 
दी थी जिसकी राजनीति का भी एक धर्म पोता था। उनके स्वेच्छा से निर्धारित संयम, नियम और बन्धचत थे। इस देश 
की संस्कृति ने शासक और शासन के लिये ही नहीं अपितु युद्ध के मैदान में योद्धाओं को क़ोध और आवेग की अन्ति् 
स्थिति में भी कुछ नियमों, और बन्धनों में रहना सिखाया है। युद्ध के मैदान में नियम और संबस्र की सिस्ताल वेखिये 
कि लंकेश रावश अपने महान शत्रु श्रीराम से पराजित होकर युद्ध के मैदान में मर्ण शब्या पर आलिरी सामतें गित रहा 
है। उस समय विजेता राम अपने छोटे भाई लक्ष्मण को युग के महान्‌ पंडित और कुझल शासक शक्‍ण के पात जाकर 


(5४) 


उससे शासन फरने का अपुश्रव और कान प्राप्त करोे का परामर्श देते हैं। रावग भी लक्ष्मण के विनय और सम्मानपूर्वक 
पूछे गए प्रश्नों का समाधान करता है । इस देश के इती संस्कार और संस्कृति, परम्परा और इतिहास; विविधता और संहनशीलता 
ने भारत फी महांत्‌ राष्ट्र कहलाने का अधिंकार दिया हैं।.... हा 


... - आपने देश की यह छवि जब मेरे सन में. आल्हाद का संचार कर रही होती थी तभी देश का आज का यातावरण 
और घटनाएं वह सुख स्वप्न शक झटके से लोड़ देता था। कहाँ है हमारे देश की सहनशीलता, समानता और दूसरों को 
सम्मान देने वाली परम्परा? हम तो प्रतिदिन देश के समाचार पन्नों के माध्यम से धर्मान्चयता और भिन्‍न मान्यता के कारण 
होने वाले संघर्ष, भाषा और प्रदेश के नाम ते होने वाले संघर्ष तथा उच्च और दलित वर्ग के संघर्ष की ही जानकारी 
अधिक पा रहें हैं। मुझे लगा हमने कहीं न कहीं भारी भूल की है। वर्ना हमारे देश में जहां हजारों वर्ष से आपसी सेल-जील 
और सहनशीलता की इतनी सशक्त परम्परा हमें मिली थी वहां इस प्रकार के संघर्ष कैसे होने लगे। सोचने पर मुझे लगा 
कि सम्भवतः भारत की विभिन्‍न मान्यताओं और विचारधाराओं के मध्य जो एक समन्वय बिन्दु या, जो विभिन्न दिशाओं 
से आने वाली गंगा, यमुनों व सरस्वती की धारामों को एक स्थल पर मिलाने वाला संगम था, वह कहीं अदृश्य हो गया 
है। इसी से अब इन विचारधाराओं में संगम न होकर संघर्ष हो रहा है। पिछले जमाने की अनेकता में एकता समाज 
में चुन: स्थापित करने के लिये हमें इतिहास में से खोजकर उस समन्वय बिन्दु को पुन: अपनी आस्था के केन्द्र में स्थापित 
करना होझ्ला। हमें उस महापुरुष को उभारना होगा जो इस देश की सभी प्राचीन संस्कृतियों, मान्यताओं और परम्पराओं 
में कभी एकता का प्रतीक बना हुआ था, जिस पर सभी लोग अपनी मान्यता फे अनुसार अपनी श्रद्धा और भक्ति अर्पित 
करते थे, जो सभी की श्रद्धा का संगम बन गया था, जिसने भारतवासियों को ही नहीं पूरी मानवता को सभ्य, सुसंस्कृत 
व सम्पन्न किया। वह महापुरुष थे- भगवान्‌ ऋष्भदेव, जिसे देश की हर मान्यता और धर्म ने अपनी श्रद्धा के सुमन अर्पित 
किये हैं, जिनको जैन, वैदिक और बौद्द सभी धर्म ग्रंथों ने अति प्राचीन पृज्य पुरुष और मानव संस्कृति का संस्थापक माना 
है तथा जिनके पुत्र चक्रवर्ती सम्राट्‌ भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारतवर्ष प्रख्यात हुआ। बहुत आश्चर्य की बात 
है कि जैन समाज ने भी उन्हें प्रथम तीर्थंकर तो माना है किन्तु समाज में उनके विशिष्ट अवदान को यशेष्ट महत्व नहीं 
दिया। उन्हें जैन धर्म के चौबीस तीर्थंकरों में से प्रथम मान लेना ही यथेष्ट समझ लिया गया। वे भूल गए कि ऋषभदिव 
जी ने ही इस युग में सर्वप्रथम धर्मतीर्थ की स्थापना की थी। बाद में जो तेईल तीर्थंकर भगवान्‌ हुए उनको आत्म कल्याण 
की प्रेरणा ऋषभदेव जी से ही प्राप्त हुई थी। मुनि धर्म की स्थापना, गृहस्थ घर्म की स्थापना, शासन करने की कला, युद्ध 
कला, भाषा और कृषि विद्या सब उन्हीं की देन हैं। सज््चाई तो यह है कि वे प्रथम ही नहीं बल्कि अकेले तीर्थंकर हैं जो 
मोक्ष का सार्ग ही नहीं समझाते, आदर्श गृहस्थ होना भी सिखाते हैं। उन्होंने ग़ृहस्थजन को असि, मसि और कृषि का 
उपदेश दिया था। इस पर पूर्ण गंभीरता से विचार करें तो यह उनका ब्रहम वाक्य है। साधारण रूप से तो इसका अर्थ 
होता है, (असि) युद्द विद्या अथवा सुरक्षा, (मसि) लेखन विद्या या शिक्षा तथा (कृषि) तो कृषि या खेतीबाड़ी है ही। 
आज के युग में भी आत्मरक्षा, शिक्षा और कृषि का ब्रहमवाक्य जैन समाज के लिये उत्तना ही महत्त्वपूर्ण है जितना पूर्व 
काल में था। सच त्तो यह है कि वे पुरुषार्थ, पौरुष और परमतत्व के प्रेरणा श्रोत हैं। 


इसी प्रकार, प्राचीन वैदिक वांड,सय में उन्हें विष्णु का आठवां अवतार और प्रंथम मानव अवतार तो माना हैं और 
उनका भरपूर गुणानुवाद भी किया है किन्तु हिन्दू समाज ने भी उन्हें श्री राम और श्री कृष्ण के समान मन्दिर में अवतार 
के रूप में नहीं चुजा और श्रद्मा का केन्द्र नहीं मांता है। समन्वय, समानता और स्थाह्ाद शतान्दियों की गुलाती के कारण 
अपनी परम्परा कें केम्द्रविन्दु भगवान ऋषभदेव को ही भुला बैठे हैं। इसीलिये देश में शान्ति और समन्वय का वातावरण 
बनाने के लिये पुरे देश को उनके अवदान के विषय में बताना होगा और देश को उन्हें अपनी श्रद्वा और प्रेरणा का केन्द्र 


(४0) 


जमाना होगा। इसी उद्देश्य से सन्‌ १९८७ में दिल्ली में ऋषभोद प्रतिष्ठान की स्थापना को गई थी । ३० आल, १९८८. 
को दिल्‍सी विश्वविद्यालय में “विश्व संस्कृति में सीर्यकर ऋषभदेथ” शीर्षक से प्रथम दो दिवसीय संगौष्ठी कत आयोजन पतिकान 
हारा किया गया था। उसके पश्यात्‌ प्रतिवर्ष विभिन्‍न संगोष्टियों के माध्यम से यह संस्था लगातार अपने लक्ष्य कौ और 
जप्रसर होती रही है। इसी स्मारिका में प्रकाशित “दर्षल” में गत जायोजनों की मिस्तुत आनकारी उपलब्ध है। उस्ते यह 
स्पष्ट ज्ञात हो जाता है कि संत्या ने गत कुछ ही वर्षों में अपने आयोजनों के स्तर और शोधपन्नों के स्तर में काफ़ी विकास 
किया है। देश के प्रथम पंक्ति के विहानों से संस्था ने अपने आयोजनों के लिये साझुवाव प्राप्त किया है। 


गत कुछ समय से आमन्त्रित विहान और संत््या कि शुभचित्सक हमें प्रेरणा देते रहे हैं कि हमें अपनी संत्या के 
मुख्य आयोजनों को अब देश के अलग-अलग त्रदेशों में आवोजित करना आहिये। दिल्ली में भी लघु रूप में मोकियां 
और अन्य आयोजन चलते रहेंगे। इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए गत वर्ष संस्था ने यह निर्णय लिया था कि हम 
आगामी पांच यर्षों तक अपना वार्षिक तीन-दिवसीय मुख्य आयोजन दक्षिण भारत के अलग-अलग प्रदेशों में करेंगे। जिल 
प्रदेश में करेंगे उसकी प्रादेशिक भाषा में जैन साहिर्य, प्रायीन जैन इतिहास, कला, स्थापत्यथ और शिलालेखों आदि पर 
उस विष के मूर्धन्य विद्वानों से शोध पत्र तैयार कराये जायेंगे। इस सन्दर्भ में प्रथम आयोजन तीन-दिवसीय महोत्सव 
के रूप में ३ से ५ अप्रैल, १९९४ तक बंगलौर में करने का निर्णय लिया गया। रविवार ३ अप्रैल, १९९४ को भगवान 
ऋषभदेव जयन्ती और ४ व ५ अप्रैल, १९९४ को “कर्नाटक में जैन संस्कृति" विषय से संगोष्ठी का आयोजन किया । (विस्तृत 
जानकारी “दर्पण” में देखें ) 


बंगलौर में इस आवोजन की व्यवस्था के लिये भगवान ऋषभदेव जयन्ती महोत्सव समिति का गठन किया गया। 
इस समिति के अध्यक्ष श्री मोहन लाल स्वारीबाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री एस०सुरेन्द्र हेगड़े तथा कोषाध्यक्ष श्री किरण राज 
जैन (एल० आई० सी०) का जो भरपूर सहयोग इस हेतु प्राप्त हुआ है उसकी प्रशंसा शब्दों के द्वारा व्यक्त कर पाना संभव 
जहीं है। वास्तव में आधोजन की सफलता का अधिकांश श्रेय पाने के थे लोग ही जधिकारी हैं । हमें जंगलौर की जैन त्तमाज 
से प्रथम परिचय श्री प्रताप कुमार तोतिया के माध्यम से मिला और बाद में श्री पारस मल भंसाली और श्री सुरेश चन्द 
जैन (अशोक बैंगल्स) ने इस विषय में भरपुर सहायता हमें दी। श्री भंसाली महोत्सव समिति के उपाध्यक्ष भी थे और 
साथ ही उनके कार्यालय में ही आयोजन समिति का भी कार्योलव जनाने की अनुमति हमें उनते प्राप्त हुई थी। उनकी 
इस उदारता एवं सहयोग के लिये हम उनके विशेष आभारी हैं। समिति के अन्य उपाध्यक्ष श्री रविभाई शाह, श्री हस्तीमल 
सिसौदिया, श्री विजय राज जी (कोरपोरेटर ), श्री रतन लाल कोठारी, सचिव श्री मनोहर भारती एवं उपसचिव श्री अमोलक 
अन्द गादिया, सदस्यगण-सर्वश्री लक्ष्मीजन्द भारती, निहाल चन्द जैन, जितेन्द्र कुमार (इंजीनियर), डा० जय चन्द्रा आदि 
से भी भरपूर सहयोग मिला जिसके लिये हम अपना आभार व्यक्त करते हैं। बंगलौर से बाहर के समिति सदस्य श्री र्रिल्ती 
अल जैन (अलबर, शाज०) तथा आगरा के श्री रतनलाल बेनाड़ा और श्री स्वरुप अन्द जैन तथा श्री बसन भाई लखम शी 
शाह एबम्यई), एवं शाह हेस चन्द जैन (मैसूर ) के भी हम जत्यन्त आभारी हैं। उन्होंने इस स्लारिका “ऋषभ सौरभ-१९९४* 
के प्रकाशन में फ्नेशेष आर्थिक सहयोग प्रदान किया है सभा अपने मित्रों से सहयोग दिलवाया है। इस कार्य में साहू शरद 
कुमार जैन (बम्यई), श्री प्रताप चन्द बरोल्या (आगरा) और श्री कैलाश जन्द जैन (एज० डी० सी०) तथा थ्री सम्पत लाल 
छाबड़ा (कलकत्ता) के हारा प्राप्त सहवोग के लिये भी हम अपना आभार व्यक्त करते हैं। आधोजन की व्यवस्था में श्री 
प्रकाश मापना, जयपुर ने बंगलौर व अन्य नगरों में मेरे साथ काफी समय तक भ्रमण किया तभा काफी सूझयूल के साथ 
अपनी जिम्मेदारियों को निभाया | इती प्रकार, ब्रम्यई के पूर्व डिस्ट्रिक जज श्री आर० जी७लेडकर ने बम्यई में हमारे सहयोग 
में अपना अहमूत्य वोगदान किया। इन सभी के हम बहुत जआभारी हैं। 


 (चत) 


हु *आर्धभ सौरभ-१९९४* शोफपाणों का शक सुन्दर संकान है। इतिहास, स्वापत्थ और कला विषय के शोध पत्रों. 
के प्रकाशन का कार्म काफी परिश्रम और सावधानी से करता दोता है। इसकी प्रूफ रीहिंग और साथ-शज्जा में शा० 
आनन्द और डा० टी० ७० वीं० सूर्ति एवम्‌ डा० बच्चन कुमार (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्‍ली) ने जो परिधम 
किया उसी के कारण एक सुन्दर प्रकाशन आप तक पहुंच पाया। स्थारिका के वरिष्ठ सम्पादक प्रो० एस० पी० मारंग ने 
जअगयर यह प्रयास किया है कि स्मारिका का प्रकाशन दोष रहित और स्वच्छ रहे तथा श्री पारस दास जैन मे इसे आकर्षक 
'हूप देने का जो प्रयास किया है, यह कितना सफल रहा है इसका निर्णय तो स्वयं प्रमुद्ठ पाठकों को ही करता होगा। सैं 
सो इन सभी मिन्नों के परिश्रम का अभिनन्दन करता हुआ यही कहूंगा कि “ऋषभ सौरभ-१९९४” को सुन्दर रूप देकर ' 
आप तक पहुँचाने का श्रेय इस सम्पादक-मण्डल को ही जाता है। 


सबसे अन्त में, मैं सबसे महत्वपूर्ण महानुभावों का अभिनन्दन करना चाहता हूँ, अर्थात वे विद्तगण जिन्होंने भारी 
अध्ययन और परिश्रम से अपने शोधपत्र तैयार करके हमें संगोष्ठी हेतु भेजे तथा वे विंद्यान जिन्होंने संगोष्ठी के विभिन्‍न ._ 
सत्रों के अध्यक्ष के रुप में अपने बहुमूल्य ज्ञान का प्रकाश हमें दिया। हमने तो इन अहुमूल्य मोतियों को एक माला का 
रूप देकर ही आपके सामने प्रस्तुत किया है। इन सभी विद्वानों के प्रति हम अपना आभार एवं अभिनन्दन व्यक्त करते 
हैं।. 


हृदय राज जैम 


(पर) 


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55 ९ ०7४ ०7 ब&वॉर5 लह्ह्ाा5865६ 05 ४68878७6/5. 


फु डा० प्रभुवयालु अस्निहोश्री, पूर्व कुलपति, विश्वविधालय, भोपाल, म०प्र० 

ऋषभदेव प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित संगोष्ठियों के विवरण मिले। मैं इन दोनों संगोष्ठियों में प्रस्तुत किये गए 
लेखों को देखकर चकित रह गया। आप बड़े परिश्रम से लोगों को तलाशतले और उनका उपयोग करते हैं। प्रतिष्ठान के 
प्रति आदर उत्पन्न हुआ है ये दोनों अंक देखकर 


रु श्री डालचन्द जैन (पूर्व सांसद) सागर, म०प्र० 

भगवान ऋषभदेव जयन्ती महोत्सव और “ऋग्वेद में जैन सन्दर्भ तथा दक्षिण भारत में जैन स्थापत्य और कला” 
संगोष्ठी में सम्मिलित होने का सुअवसर मिला। 

उपरोक्त कार्यक्रमों मे हमारे देश के विशिष्ठ विद्वानों के खोजपूर्ण तथ्यात्मक विचार सुनने का अवसर भी आपके 
माध्यम से मिला। मैं इस भव्य आयोजन हेतु आपको साधुवाद द्वेता हूँ। 


$% . हा० शरंजन सूरिदेव (साहित्य - आयुर्वेद - पुराण - पालि - जैन दर्शनाथार्य, पटना (बिहार) 


ऋषभदेव प्रतिष्ठान द्वारा दि० १४ से १६ मार्च, ९३ लक आयोजित त्रिदिवसीय सांस्कृतिक सदुभावना संगोष्ठी 
ने सगोष्ठियों की परम्परा में अपना अभिनव अभिज्ञान उपस्थापित किया है। कहला मे होगा कि ऋवभदेव प्रतिष्ठान ने 


(५) 


'इस संदर्भ में एक नई स्वस्थ परम्परा को शुरूआत की है। इसने संगोष्ठियों की जुटिपूर्ण आयोजन-विधि को सक्षय किया ..: 
. है और इसमें संशोध्तत कर एक नई दिशा का उद्घाटन किया है कि संगोष्ठी में वे ही शोध्न-निवन्ध पढ़े जायेंगे, जो प्रतिष्ठंन 
हारा पूर्दामन्जित होंगे जौर वे पूर्वभुद्चित रूप में प्रतिष्ठान द्वास सुलभ कराये जायेंगे। ४५ 


इस जिदिवसीय संगोष्ठी में तीनों दिनों तक ऐसा ब्रतीत होता रहा कि जैसे हम भूलोक से भूबर्लोकि में प्रोन्‍्नत 
हो ग़ए हैं। 


% भी भहेश्व कुमार मानव, (भू०पू० क्ति एवं समाजसेका मंत्री, वि०प्र०, भोपाल) ् 
१४ से १६ मार्च, १९९३ में आयोजित सांस्कृतिक सदभावना संगोष्ठी में भाग लेकर मुझे बड़ी प्रसन्‍नता हुईं।  , 
मैं शानवर्धघन कर लौठा। 
आपके प्रयत्न के लिये अपनी हार्दिक शुभकानायें भेज रहा हूँ। 


% .. हा० निजामुद्दीन (पूर्व प्रोफेसर, कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर) पो० बालैनी, मेरट ह 
ऋषभदेव जयन्ती महोत्सव तथा सांस्कृतिक सदुभावना संगोष्ठी में भाग लेने का अवसर मिला। विचार-संगोष्ठी 

स्तरीय रही, संवाद को नए क्षितिज मिले। वैदिक साहित्य में ऋषभदेव के प्रसंगों को खंगालकर, सतह पर लामा श्रम साध्य 

तो है ही शानलब्धि सें डूबना भी है। आपकी नई सोच भविष्य में अनेक-ज्ञान-राहो को प्रशस्त करेगी, ऐसा विश्वास है। 


कु डा० शैलेश् कुमार रस्तोगी, उपनिदेशक, लखनऊ संग्रहालय, लखनऊ 
१४ से १६ मार्च, १९९३ के समारोह के भव्य एवं सुन्यवस्थित आयोजन हेतु मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं स्वीकार 
करें। है | 


मर डा० जगन्नाथ जोशी, रीहर, संस्कृत विभाग, कुमायूं विश्वविधालय, नैनीताल, उ०्ग्र० 

प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित सांस्कृतिक सदुभावना संगोष्ठी में मैंने और मेरी बेटी डा० कमला पन्‍त ने भाग लिया 
था। इस सुन्दर आयोजन को आपने बड़ी सफलता पूर्वक सम्पन्न कराया) इसके लिये आपकी जितनी प्रशंसा की जाय वह 
कम ही होगी। 


हु हा० अनुपम जैन, प्रोफेसर, गव्नमेन्ट डिग्री कालेज, सारंगपुर, म०्प्र० 
आप भगवान ऋषभदेव विषयक ऐतिहासिक, पुरातात्विक सामग्री के संकलन हेतु जितना श्रम कर रहे हैं एवं 
जिस समर्पण भाव से कार्य को संघालित कर रहे हैं यह एक आदर्श है। ह 


पक डा० राजा राम जैन, पूर्व अध्यक्ष, संस्कृत और प्राकृत विभाग, एच.ही. जैन कालेज, आरा, विहार 
यह जानकर बडी प्रसन्‍नता हुई कि ऋषभदेव प्रतिष्ठान गत वर्षों के समान ही ऋषभदेव जयन्ती और सांस्कृतिक 
सदुभावना संगोष्ठी का आयोजन करने जा रहा है, जिसमें भारत के अनेक प्राच्यविद्याविद भाग ले रहे हैं। 


भगवान ऋषभदेव के महान मंगलमय उपकारों को लोग भूलने लो थे। ऋषभदेव प्रतिष्ठान ने उस प्रच्छन्‍न 
यथार्थ को उजानर करने का दुढ़ संकल्प लेकर एक अमूल्य ऐतिहासिक विरासत के प्रति अपनी समर्पित भावना व्यक्त फी 
है, जिसके लिये इतिहास-जगत उसका सुदैव ऋणी रहेगा। 


(5४४) 


कक... ह० के०आर० बता, अध्यक्ष, पाी-गादृत विभाग, गुजरात विश्वविधासर, अहमराबार 


आपके ड्वारा भेजी हुई दोनों पुस्तकें मिली । इस प्रकार के प्रकाशनों और संगोष्ठियों से गये ऐतिहासिक तथ्य अकाश 
में आते रहेंगे और जैम धर्म की आजीनता पर काफी प्रकाश पढ़ेंगा। आपके उत्साह और परिश्रम के लिये बंभाई | 


. $ श्री निर्मल जैन, संयोजक-ाकाहार परिषद, सतना, म«्य० 
सेमिनार बहुत सफल और प्रभावक रही। दो दिन तक अच्छी चर्चायें हुई, विहानों का भी अच्छा समागम रहा। 
सैसे सेमिनार में भाग लेते वाले प्रायः सभी विद्वान प्रभावित थे और व्यवस्थाओं से प्रसन्‍न भी | 


कु इा० मन्द लाल जैन, रीबां, मणा० 

ऋषभदेव प्रतिष्ठान के सेमिनार में सम्मिलित होने का अवसर मिला । इसमें भगवात ऋषभदेव और जैन संस्कृति 
सम्बन्धित प्राचीन भारतीय साहित्य में उपलब्ध सामग्री के आलोड़न और आलोचन से शोधपत्नों का बाचन हुआ। सभी 
. _शोधपत्र उच्च कोटि के थे तथा जैन संस्कृति की प्राच्रीनता के संवर्धक रहे । इस दृष्टि से प्रतिष्ठात ने सांस्कृतिक पुनरूत्भान 
में योगदान किया है।.... 


(5४९॥) 





. ॥ 9०5४ 5 उश्षार+ 720०४७५ ५ 
६4 पार७04& 


एछि. रि.0.ए७डथ2)7क्ष॥* 


जगृगा8 उंजा।933 437०९ प्रा्व6९0 3 एवंए०अंट ०0आऑएफॉएा 00 तितगा (पाएिर 35 3 ज्रोॉक्‍णांरट खाएं हां 
ठजापरॉण्परॉणिा ००८एूअ४४ 8 जजामाशां जोर मा ॥8 पिल्नैठाए रण दिती8, वेब वा बात॑ बाटोभीस्टाफार 872 
क्वाशत शाशात005 2छएड़ाश्टॉबॉाता 0 भी तृष्डा।श5. ॥॥6 शाए९5 ० निणएफी। #एप, ९ 
(०ां९?ऋछब्ाा।0ी7गक्‍7८ट #नफ्ट ठ जावएशवउेश3909, 02 ्र००जाग5 'चिधावशंबााणि।व5 बॉद्ापीरए ॥ 
गणा र्ज प्रगाए् बचं। शाएं25 7 50फ॥ 99, ४९ फ़्गागवा95 त प्रद्याप्र (शाएंं९३ बाते #ी९ वक्ञाग॥ 0७४2५ 
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ब्रालांश्टिणर 


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छ्ग्रागावु, 5पटी) 3$ दिग्एए्७, रिपराया3, #ैगादग७, (085, एप्रब॑ध्थाथा३, गफ्छा58, क्‍ैएचाए2त3, (गा, 
रिशाह्रैंणा, शि#॥05०9, शंट, ॥॥6 ढउवत5 कं6त 0 १8४०४ 3 0885 0 थाए एथ्ाप्रं्जैड' वधप॒पखठु2 2१0 ९० 
शर्शगर ०07790920 ए४०॥५5 ॥ ब्ा0श व! 6 फापीजा ाठ49९४, +6९ ॥8789735 72९च८टा९0 ऐश! 
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वा) वाएंशा एशें ताएशा 0ए7 र॑ १(वावरगेप, ॥रमोतवाेस्त 40 एज 70 स्णीपराव 0१९ '(खागा॥2एकत09शओे५०9', 
बा0 ३5 3 7९5७), 77९ '52फिगा0450743' 0९ 76४ एशाश220 29छुघझ3 रण प९ जिंक्मा।एच्यव उंच5, ८४१९ 
प्रॉ० ०थंगठ, 75 ७०5 णिं09020 एए (6 ९०प्राए०आ0ठ) रण णीश हैपुक्रा३ एणाए७ आपर्ली 85 वथ्वणज्बएश्राप05', 
हएा0बप्रातंबलीक्ाव93 5 ए00, 'रचंपोद्नशलीाभव' शॉट, (चएफथापप्र०घुबर, 4िगावाशाएए083 भाव (फााराथापफ०घु8 
गाए पीा९ गादी इच०९एॉ5 06वीं एांए। की #॥292 टैएुवाब #णीौऊ, पाए इप९ए उ्र्चाश रण रिवगेक्शाएप्०प० 
जग ०जाप्रपशवे वा ध€ गाव! फ्नतीएणा काते गिवाए, थ ९ भरी था 8.0., मावशशावटीावापफ्रव वां 
(ज्रजी505 5फ8॥४४ ग्र0एंए९त ॥ 000 ९ 'नैंदोस्‍59एएक्ाव' 9 ॥2 #ज्रर | चिंठवक्वा3०फएव, ॥ 5 ३272५ 85 
6 गराा। 506०४ 9008 छा ॥र0भञ ए (7९ द्वारा ठेखा5 ैशढाॉधार ०090580 ॥ $5क्षाअ॑ता, सै0//॥39759, 
गक्मात्रों थात॑ वद्राधाव0व4 708525. 


नि 8 ७७7६ २७०पएॉ चैं३७ थिंबं।आ2एाबा9, शांटों] 88 5९7७७० 85 39 50008 07 प्राद्याफ ठा (6 4िक्ाव१908 
|8ए935, या 380 85 & ॥008 0 ॥€ ८जाएएआएस्‍ण '्ठर्॑ 8००७5 ॥ एशाश७।, 45 ॥8029559. '73 ७ण६ तरकटलै5ड 
४ ॥ए6७ रत 53 छाठ्माफ्रराए >छजावधु2$ जर,, 24 वापम्भाएथव8, ल्‍2 (राभ्नप्रवएदारा5 (8 002/00$ जज 
ऐ९ शा|एश सिलामभंडडराकरे, 7४ 9 एकडफ02ए55 (0 धर #ती43-णीडंएाउ5-नीर ०एटशेज3$ छा गियों 
सिगवांगरंड2७०), 9 डिवोगंएक इंतेश पिया जिजीड5 रण ४३३७१७०७) ०१0 9 7/रैएवकत2ा७ड विशाए- 
पएच्डप्रतएए०३ डिणा। छा 2 7च४४७०९०४५ आश्वरी ॥0990 06 .0>रणरउ॑-डतंछ रा उंग्वाग्रंबा5९४व), १ ॥85 छठ: 
45 ढांक0 008 9५ पिछ पऐपिंट: "[75850(०63) 59ल्‍प्लआआब5७ (>चा8", जानवकशावटादाएल छा 0जावजेसता3 
* २०. 86, 900 (7085, पिंतसाप्रावडांश, 4(४एटडएफथद्बा०, चिए50०72-870023 





छएक्षागरा।, दै।९ कर्ी।05; 302 रफा०2चे४९व 0 ऐंड छारदां एणग: आ, मे: 0फ03 एंटा।07776 (0 चंबं।8 पैशाए३५ 
० उतकीक्ा।4, व8 आंजाए5 5९7०४ 35 ४शंप्रेलं९ 5 (ज' ९2277 (॥९ €552४८९ ए (४ कराए०5. |8 वेक्षा।4$ 

एय्लाॉंटपांकांए की 9०फी वितोव , 7शचुकात ।9 दावा 88 3 इ2टा80 एज 2१0 एएण४7)9 0 35 'हनएाज्ष 87 

ए्जाश वंभड निव्रोव[०फ्गाव 5 ०णाहत९0४0१ 250 85 6 गिल 8फ॥6ग7ए ॥ 0०2०075 गरद्वांर$ ठा 0000७, 07 
छथ्वाग९०, ॥९ए507056 ॥%९ ०जाख्राणिताए रण एबराारशड श्र गवा।वछुर, प्राएंशांबंतादु 3 0पच्ञा२५४ वात॑ 50 
07. >िए ह 75 (९ 875ए27/ ् 5 #०ए एठा ॥8 80७७४ एज) & 59०टरस्‍ट गांपिदां, 8947 707 पं 72॥8005 
ब60द्रांणा, 082 ४ ०( 5 बुण/श९्एंद्वाएत 85 00९ ० ॥7९ 0९८ञं िंदोवंए0ए०५३५, 35 7९83705 (९ 5070९ ॥ठ(९ंदो 
लि $्ा॥309 3०५०5 १४7९ ॥ 5 60९55479 (0 धाशा0ण), ध बताता 0 चिंवो9पठ73 ए0 ॥08४ एज; 
ग्रग्गाशंप् फग्पाबटवरा।3' छा दिउजकशावलावाफएव' (60 एथशांपाए 8.0.) व 'विक्रोएडाउइ3फएप्राद्ा4' ठा शिरतंव 
बंगवाशाल्टीडाएठ (80 "एशाएाए 8.0.). 


॥ ८बा 0९ इ९शा शिणा। [2 8एड30०९ फ़ाबांदत, 550 बाएं (46, िशचापार ० (ताप, 
शिवा चं्ा08 वीशिवाधार ॥ 258 दिाध्रप्व525, शंक्र।08 35 पी९ ९वरीरशं, 8 वं्ा)4 दिगााववंब (६०५०5, 
बवंलांणा 40 णएसाग्र 02९ रथाओेंटड, 2९ 34720, ९एशा) 40 075 6989, 0णि शा ए०शॉ|८वो ९४०८४ी९॥०९. 


पफढ ४348 /9एपडा8 ्छ फैट एएश रिवाए8 5 पी6९ एढारश 20 एशह ० ॥(2 2एशीवए०९ 
हड्याव04व (एप३5५- | वा ठां25 ऐ॥2 शऑंणए ० सिड्व॒णाशाव5, प्री 00/पंंीगाव३, शी दिवए३७ आअए्ट,  एा5 
जात ०९३७एिं 3९३४ट2४॥०75 गत 79585 5प्रणे) 45 शगाघु॥3, जा ढ€ाए, 30 ॥6 पाता। 7359, 35 ॥ 5 प्रडपव| 
जात 6 उक्या।4 (६५५३६, ॥5 06 5ठगांवा३5. ॥6 एछॉलपा९ ण 6 ॥0ंतेश०९ अ क्षाभा9'5 0९26 ["९5श7९0े 
0५ ॥8 906, 77539 ७९ 7000 ॥९2४ 07 5 06९5टांएीणिाबां 0९5७7 ४३0 €१72९5५०॥ | (४ इशावप्राशा।$ ० 
शागु॥आव कणाह ॥58 वि्रीप्र 00 पीर शागाशंगवच्च, 


| प्ा९ 5गाओएं 2ैकताएफ्रद्या3 ण जावश्शाब्याबाएव, जोप्रंशा 45 2 500९ ६906 गराठ्तवश 0ि रि्ग98 5 
(गायव0व /ै0फफए्बा5, िंवा]आ)व $ 6920९ 85 एटशा तेशुअंट९्त ॥ एच 8 €रिफएए $#205 गाते ॥$ ॥0 85५ 
प्रा[/९५३४४०४ व5 ?िक्राय8 3 व९ंलींगा, ?्वाग03 5 06४्ए:ाजाणा छत मा९ गरांण्व। ता विवियगांभाव, ॥6 ॥प्रग[ 
प्रभाव्शा, .) ४ अब 9 7रवए९॥0७5., शीश! ॥९ अंबठु९ (5 5९ 0 2 ०णधाशाटशाशाए. [| ॥॥6 6906, 
(९ गज १992९६४5 गाते ॥९7 १शीएलीणा गर। 02 छल अछ00९0 ॥) परै९ ०ाभ्वा९7व5 एएणा) एए ॥९ ए०पराशि5 
गा बल ला2४5 537९ ॥06 ग्रा[/९5॥070 ॥ ९ 55 एछशाशाबां20 शा ९85. "िशर ९7९ 48 व तक्‍श्टां 
5प554९5007 छत ॥0ए (१९ ॥एच5 2०९ ग्रीपशाट९6 गात॑ ख९ ८व्जएठा20 07 $शाआठफ5 000८5 ॥॥0 ६५ 8 /शआओएं 
९ 69 था 08 एणांतर०00व ्ि प्राणा/गार ९शडशाट6, नि०ए2एश'  ॥75 7260, | आ0ए७त॑ 9९ 70०००, धरा 
66 ॥8 & 3/७र7९02८९ ०2ए९९॥ 8 ७००एॉ४ 9९ #शक्षांप््ाव 5 4 ॥एव त2४॥ए६ 0 तांवेत गरशीएशाव ॥ ९ 
॥6द पिंएाए बाते ॥8 जोश 5005. 5 ए०एं0 0०९४ फिशापव३ ० 8 7०३ त९60 0 आगे) #एछा9 ॥) 6 
गश्वा घर, ॥0प8) #ंपव्टांस्वं 07ए उशा50075 00९८ॉड, 45 ॥0 शाज्ावारएं 0ए परशा। |एड 35 4 टष्जयं, जी 
बण2९का३ ० धर (४6 99 ह।8 200प्रा ठ जा 0णजु९ल व ०७जा2१ थ ९णांबएं या (, 9 570 जिशांना6व॑ 
छ9 ॥. ्रावामंचा45 5 00908 एशरफणिपाहा८९, थी ग्टिं, गि्रोए शव१५ 0 02 १एशाराद रण पिप्।वज8त९००. मे 
॥8 प्रगांपंड छ ॥॥6 फ़ा078706 संदा]॥4'5 पर एजा९$ 0 4॥ शा दात॑ 0228092 ४2 ७४७5 3 एज्राए। कीट 
००07 आंध्राएप परांडिक्‍25 ॥0॥ ४१९ $८शा९, डिए 074, ट्व6 3 9230 थ 0॥2 उशाधा।शा। ).8,, 4ि45४०१०१५७०, 
प्राधरतायरारएए ८ाशखां४5, रांती वा5 वीएंए2 ऊ़ठछरा, दाजीादा फ़्ाइठा ज्जी0 72567925 (2 0ा/दुएथ॑ ॥चा08 . 
_एएरएश एंड ००घ्रोत गा ९७०४2 #॥2४ ॥॥7ए 70008 ० 4 रिपश्ावंजाबत९०३, ग्रा्र०ठीक्षरप् ॥2 79000075 ठएरा' 
फंड एकाआए ० #०ाए मर आप 02०७25 ॥0 एप तै? # रण उशा|यादटंगराजा 0 ढादा। पिछ तजए्त९ 
एशशाबाशा।।ं एजी58 4,९., ऐ%४ इंडांए रे िघ्रत 5 पिकरकाव, 





. प०पकी प्रेशर दरार सस्ता 2एं080025 | #वागर्प ((३2एएच५ 0श6 ९०ा/20920 व8 एलडाए 285 था एवढा 

- श९ 8 ९शााएए 8.0. एडगआ92, ध्यी० ॥एडते # फि० 706 02779 8.0. छ <क्षफांत॑शछ; 55 सी+2 मैद#रएं 
्राएत॑ 8950 88 सै।९ छाश्यांट्ड छा 6 सिगााव्वंत 90235 ९एशा 40 0॥5 099, रि्रा]98'5 णाॉछः छएलशी (0097 एठछाई + 

5 'प्रफ्रगात्र|पाव एसंंवाव' गांड प्राएजा एएं 6 तीर रिक्राएव2 सीक्षाचंद' ४ अणए एण जीली ॥5 985७0 ०7 

' गाव एपए्७4 5 चिकॉ।-भजीलावाव 


2?ण8, शिव्रा॥8, 0743 था विग्यु३टीबराश्तेव 885 /ै08ए3 रिक्राए8 ९ ठतदा 7शुतपां20 ॥द॥25 
बाद धा९ वंकातव शा305 9089. 20079, 3 000शथाएए/ठफ रज॑ रिखाए4, एव5 >९शं०७/2०१ ४जंती ९ ॥86 
फणजलाअंग्रचएक्ात + 7०४ शाएशात', नाड उानल्रा।ियाव (ावरांव 5 ०णात्नवंराएते 45 ७8 गाठाड। (8 वाएडं. 
प्राशॉण॑ं0फ याशय्त4 (6एफ्5 


पछ एणश रिवाावब, एी॥0 45 050 ए९शं०/९० एज ॥2 ॥0९ बणजलशाडांपवण्धाए' ०५ 5 एगाएज) ाद 
भाव, (85 ९८४॥०९० 0 वंश 8 )7थ6 858 90९0 6 ध्वार्धं॑ 7, 5 (3०)३ (50359 सिव8 ए[|9एल्', 
एश। दा0ए7 250 एए ॥6 68 (3809एप0व)्या।' ॥95 पुक्षा॥20 38ता|रीणा गाव शगञश्टंगांजा 09 0४९ खात0 
था. एशर अजए रण शा ॥वएएव (५ 035९6 ० पी चिवजीकाबाब #णगए, ॥ एवर्पेट्पॉका, 02 2एशार (४ जिं००९- 
शक एश॑ंएश्शा जिपाएठकीडत48 तप डिंता3, ९7९ | 35 ॥20255879 40 ॥0९ ॥९ 59९८ंत श्खाेपार ठा सीए संत 
एशड0 ण (2९ ९छौं८ #0०९5. व॥6९ टवाग्टाश$ ॥ ४५९ आ0जा25 ढा९ ॥९ंश जाए जांफ20 50 ए९णफि) 
07१ ०१९ आंत, ॥0 आग जापठत5 गाए तीजाार ० प्री९ ०९ अंतर, 90 बढ प्रा) ॥ ॥80ए2९, ॥4ण)५ 95त7 
जं०९5 १0 जा(७९६४, रिवाआ35 एणिएए0०4ंकाव 4$ वा) ग्रधाथ 35 थाए तीशश लादाग्टाश' ॥ 8 इएण9, ॥। ५ 
(३एफ्रव र रिया, ॥6 7280९/ 30777९5 7पए०ठब्रा ॥70 [९5 5 तंठजातिव & ॥6 शा, 00 जौ।एः ॥005 
॥6 35 06 एवठठां2 ॥४0 0 [5 ६१एए३, गी९ (जोएण)छ ॥लेऐशा। तेथ्फ़लंड ह& ॥शधणे साफ ण॑ 7फएलतीशाब,.. 
तैजांगराभाएप, एगी० 9 ९ ४07 रण #्र|ंणाब, ]2 0९4ती५9 ढाणाएं ण 7प्रएवीनाब, 35 त०0 ॥॥ 02 0०७०४ ॥९6, 
09 [0फए०व43 ठु०28 7087 ॥6 0९०0० 90०4ए | 8 णफ्रगथाप्रप् गाते ानशा5 भात॑ 5595 (0 #णंगरवाएए 
रण प्राब्व॑ला४५३ गरांध।, जीशा5$ ट व0 ता) ए फ्णपा एवांग्पा, | छावए 00 प्रणप |फा णि. ए$ प्राएटी)- लए 
९४ 0०९ एा९५9९0 एजी €एएटा पड 8 एवा रण एठए एएएश5$ 


(05025 >)2०5(एंहाबा4- 

गावश्ाएिदण्डा) एशहाए९ ध्रवााव वठ्वाभीदा। 
शिव्यांतरी॥४एशावजित]दाए। गरीड 
श्वधा45020९शवदाप्रदुपावाशा।व54४६४ 82099) 


रिएशं रिक्रग्ाह 5 एकांत जाधव पराएं जाॉश ए०१8 छा जएं) 'गानीाब रिएाक्राल' 5 2णाडांतंरारतं 
व5 3 एल ० धांदा एाढता, 


"रब्शा०कीबाब (जीगा।॥' (5 ॥९ एशों प्राए्णा छा रण 2700 खेखगाव, ग ग्राथएशो0फ फां९0९ 
7०श29 त6अंटा$, था 4 0एपएएग्रातु ग्राध्मााश, (8 ॥"7ज5 रण गन थाएं 5शात्राभए, दितठु प्रथ्ो0028 ॥5 / 
वाडछप्णार्प भांधी हि, फरशाद ए्रॉग९55०१ (९ 2जातरफिएु छा 5जराए एए गांड प्राएव एसएएउव तृपणशा।, ऐीडश) 
भिं$ ॥7णीश शापृणा28 38 00 गए 2 48 70058 3200 ॥0 चुवए त5 पर्व, ९ री5 ॥2 एच ॥8 छिपे 6 ऐश 
अच्या, निड ए्0ताछ, पेष्शाश्थाू+03, 5७७५९५५ 5वएजीएशचु 3 ॥९॥ 40 पं।6 दिाएप शाप 40 #छ9व4 778 ०४व्फए - 
एज, ४ैंबआ०वीबा5 45 07700 ता ॥ 8 फंड, क्षात २४६७५७०५ ० ॥छ86९ ६0 पैड टापशे नए, 0ए कोड प्रजीएश 
_ अयपप्नष्कोड इवटीकाए 4 वश ग्रागत० छा संदरीएण, बाप ॥0 रण व #शेण वेशा, डशेल्‍एतीडा3 3९०2फॉ३ 9 

अ्प्ृप्ररआजं 38 ॥8 पीते ॥0 शर्त, 40 पैाएत कह एड 8 ईएटाएपुड, क््त॑ 89 8 2९5ा६ 0णाारर5 'उद्यताप्था08 
वगान4 (त।यदु 0ए आशा) छोगंसी 040७28 मय खाद पिंड घाठीश (0 ऋतायत॑श' मी ब्या।बवाच थब्ोफायु छाए. 





8 2220220%22232220 0:20: 02222: 52000220%05022222022 2 
॥ ॥6 गांगावां एजां0 गाए ॥सं।[्र ॥णग70एर (00005 ॥725. 44092एटा वा 68 ॥6 [90 50५ बट 020जाआा0 
बएबाप्शार्त डॉ0 0 ४ एशी। ० ॥एशबाॉतठा, 


पिव्दुबर॒लीचावाब, एशी0० 4$ एशए एशं। 0ए ०9 ४ गरद्या९ 'तैजं।7एक रिक्राएवा (5 3 एप 9फर्णव 
ए०४. ॥6 8 ९ दणी0' एछ 'रिव्ावलावापाबलालांव' धाव 'चैद्राधाशीव्पाता3', (| 0९52 ७० 7९ ठिताश 
छा०एथ। धंधा चित्र 00 ॥र्मा]2 85 3 9०९ ् गाल, 6 ड09 ० फंड ०७७ 9 089७त जा ए7बकावरटकाा|व 
(ण रिकाा9फ्ण8) 8 5गाडंता ७07९ जे रिणं्रशावलाबाफ्ब, 509 ॥ ९ उिद्यागराभ्रांट एशञं0गा5 रण (९ 
रिशा9एथ्ा, रि8एच73, ॥€ सिवा (00 0॥९ 40एश5॥9 छत 08 हश०) ० 8 श0ए, 45 0९ए़ॉंट९0 85 8 
एशए एांट26 0९णाजी एरइणा; "्रौशरव३5५ /ैएंग्रा4ए७ रिब्राव09३ 5 विक्का 5 8 जाप0095, ॥20 2८ फ़शाशता, एप 
6 ९ प्राणिप्ाब्वांर ध्राट्ंतशा र १075 गरग52/ (0 ०220776 3 [॥/९५ (0 ध€ एव रण 8, प्र९ एराि 
रण रिश्ा8, 5 एएा प्रद्यााआाग5 ॥5 95:परद्राए ९€ण्शा [0 ॥5 059. 


(ञआ९ ॥002 एट रण ग्रांह्ली गा, पीवा॑ 35 0 0०९ शांणारत0 ९९, $ डिब्रा0॥0ए079. 
पाब्रांएगा।ओिक)एए03फएक' गाते '९९ए३हवाए0आीलकार' बार ॥९ एए एज फठां 427९ दांएशा रत 8 [090६ 
० 7९0०0कां।णा 35 ९१०शाशां 70०2९. 078) !ए€ नि्वाश्थााओवणाएपए0593, ॥$ #0९00९6 ॥40 (९ 
निक्राएद्ाओव रिप्रद्मा० रण रिप्रागंबव मा।व्र॑ञशावटीगफ्व णि 5 गाठांथांगो ०00गञाता, ॥ 45 ॥९एशग९९४५ था 
प्रिपे९कुशातंशा। [2०७०० 9०९४ ०९८३७७९ [| पर९ $ंतंधिं ९४९८प्राणा रण ९ गावाशांदब 09 06 ७०2. ॥#०पवं। 
९ रशाशदा #606 ० (9 ॥3ए५३ ॥$ िशाशशवबा4, ॥९ (छशाए 5९००१ शव, ९०४50025 टी) 35 
0056 ॥९७९४१ (00 ५४७६००९०७, (.ब्राप्/बा4, ॥(7॥3-ठवरांव्रात्राव, भ0 व3५३७-२ि08५७५5, ॥98ए९, 7780९ (९ 
ए०श९एफप़ ॥राणर बबलॉफएट गात॑ लाका॥ं।।[. 


डिद्यातीतएचा73'5 '२९९ए85॥090त57९' 5 450 3 720 96९०९ रण 9०शाफ् ॥ पफ्रतांटी 5९ए९०ठों #0९5 
बार गदञ्ञाबरर्त वी 2॥ ावउटॉएट प्रभार, 53९९४ागारत उद्याव' 45 00९ 702९ एणाए, एगांटाी #ैव५ एशशा] 
7९८९ 05207९४४9 670 ॥55 ए९शा ॥रगरणए॑टत 00 ऐंड एणज्टा. 


गफक्कढ बार गव्ाए 06 उ्यो34 9025 ए्री0 ॥8ए९ शा|ला०9 ॥6 ६ठ303 ॥५9०/३ शशद्रफर जाग 
गिशी ढणाए्रएचीणा5 2॥0 ९ 0९5८!) | 6 5९ 5 ०९एणात॑ 2 5009९ रण 5 जाए, 7॥6 
०जांपरएाणा! ० पि गंगा 3०९5 70 गानों (52॥0 0९ (३एफ्३४ वशिवॉधार जार, वीशा ८णाएएजणजा 0 
चार गलत र छांज्रन्ना55 + इएटी 35 ॥00076 (0०075 7रश्ठीलास९ णि गजंगाद$), गेंप्रजोश्िव, (डिश, 
अतकाक्षांव ९४९., ॥ वरेता0एणांस्पंदुर0 ज्यों 7297९०. 


व रथ्रातब5$ प्राध्धांवा९त बाएं हाट पागरायांगंतद्र ॥शी ०णा पैआं।एं एवए ठ्ी 8 93520 07 ॥€ 
शि052णुमशऔए [/882८१९० 0ए 0 उक्‍नीवाधबा3, विश: 5022 $2शणं०४ ॥35 था ॥0 ९, एशशा शैपब्न पा 
इशारा 7एअडंटाएव॑ [0 धशीा 0था 2णशशणाफ्र, 


प#७ ॥69 #ए2 8 ॥6 7५९ 40 ॥शी 9॥05०ए9 - '5्याओंब 5 ४णीए2नं।7' - 0 ॥ ्अ॑ ०व्जा५ 
ज़ांती थी फैजा।हु जशा।95, गात॑ ४९ 270 ९( ॥ए४'. 


9पएछंए 





उश्चार& 0८0 व्राप्मर पर 74804. 
[747 रए 


छः. १४. (क्रातक्षाधा0ंव चिप ए9* 

5« आम 
नाडठाप ्॑ इब्रागांझा १5 8 ।शीहंगा बात 8 ०जीपार ॥ दिागशेदा8, एश टथा ४8०, 7. 5000॥ 
68, 3 2052 पर 3530ट28०व ध्यंत कशशावबएडाब0श8098., जितरशा परोल छुए्श्वां गय जितना, 
प्रा पाढ शिएग्र् विवां 7वएडप९० िठाफ गार्वोक ॥ वी९ वितव॑ (छा 5४८070) ट्शाप्राए 8.0. , एक्ट 
क्‍0 5ठ6प्राा धिवांब ४05 जंग ॥४ रिक्शणा टव्ग्रणावदुपछॉ9, ॥68 उछ।९रत 0ठणा ॥ $74शआत- 
एटंधु०4 बात॑ 59९0१ 5 चिड ठं595 ॥९72. 6 ९० रण 5 0॥82985 ००020 ऐश ]0प02ए (0 
पृक्याा9609, 290 59240 0 (278, [॥2876 )5 ॥॥ 8 28४९ 00 (९ 9899० ० शवों] का।6:8 
जी उंधवएक्रा७०९9०85 दएएएए 3५ 'िावठ्ताीवदाएप 28०४", ठ00 एशा+57$ उिाववाबशीध एशते पीकशा2. 


प6 ८ रछ उिद्चताबाटडांध्रा 200 3 ॥0॥ 6 का5 8$2७४६४ [0 50प0 ॥6॥8 45 06 ०श्दामए4 
रण बंदर ॥ 500 गधंव, #90 छा ८075९, गंड 5 8 एशी क0णा विटां, 


800 ७ धंभाव पाली ॥$ एशए ॥0॥6 द्वठएा 45 सा जाउएड7802९6809 85 3 [0७03 89 शठा 
शांश वी गौर (शांत 0शांपए एोशा (68 5णशाध्रधंव गिव[्वर ७३5 6) 00 ० 6 7020, 7#0९ 
$ 3 जी88 0पए गज्या॥९ चिद्यॉ2०ए३-5९60/8 ७9 06 86]809, 890पा लिपा त्विगाशश5५ 7070 ० 
शाबण्गाबंाशहु०ंब, ॥॥6 एशए ग्ाार 5पुच्चन९्छंड एीठां ॥ 45 0ठिरा ऐीगा गराजणाश "8९905", | ॥०९ए७ 
चजा९ ९शाओंए९ 5पए९ए ० ॥९ णजीख्घु2 गाव ॥#5 3प70प0795- 7]2 9877भ2 828049 (५४/॥॥2 2070) 
808 922$ ९ ९४४९॥८6 ० 3 90704 एगं। ?ए९ एद्वाटा, 7॥68 97९३९४ एणा।  5शाउएश्ा३०९ १०४७, 
५ णाफरबाब५९ए 7९८९३, 3$ ॥9 5८४०0 09 था - गाइएफजाणा ॥ जावएडाच०९8ुएोब; ॥#. 85५ 
एवच्रेज९त॑ 0 09९ -फैणा। 99 हा 'िंप्रडछणार शंए् एपाफ़ियत९फ्छावफ्त ४४०4९फ्रछा ॥ पीर ह70 ० पा 
$९०९शॉटशाएं टशांप्राप, श्ाव॑ (5 45 9770ए०26 ७ए ०0९7 ९ए४०९७१८९ 3$0. 06 िं8९फव 3उ0९8008, पिी९शा९ 
5 8 ०७ ०१6, ६006 छांठु णि 8 आएठी जाय ॥8९ 6३॥९५० 3660)4., +॥९€7९ ७४४ & )७फशः 0 
ग्राधा९6 78॥78 9965 07 ॥6 एच ० ]6 9070 2॥0 धीशा९ )5 & जि ऐप प्णाएपं 38580 70687 
(९ एणावचच6: (९ 395304 5९९श३५ (0 ॥8ए६ ए९शा एप था पर 2709 0 ॥2४ शा एद्धांए पर. | ॥95 
दा 0४ दाला।|रटाएडों (रडछ725 9 ९ 5गत॒ु8 ७९०09 (00 ८९तवई.) ए८ टखा थ्ातठ5ा 6०)रतफपफि ॥ 
जा पर 385894 $30 0 ॥908 ०९९/ एप! ७ए घीशबत९एशवग3, ३0 छा एशवएणाएं०एड था 6 
"8४608" 06ए॥, पौधा 45, "ब्रौरए8 36९8035, ॥#87९ 6 0ॉत्रिरा एशए श/०ाधु 702088078 [0 09९॥९९९ 
पी विवरएक 32007 5 6 7९३॥ ०68॥0वे 86904 सांविछु& ॥रष्रां।060 ॥ (6 छडटॉफ्रॉका9 
ए०िछए ९ 0४॥ €शाएए, चिंठडं 970030॥9, (6 रक्त $ठग्रां3 (एि06 णा 0९ 373/87 402/0 ५४९॥४ 
8९७ 9ए पी बंगा।ब ०णाधाधाएएं जाँगटा ॥ए९त ॥ा निबोरएड३ ठि28०ेढ तंजााह 7९ जी02९ एलशां0पं 
ए४८९०॥७ 6 शारी] ८शा'प्ताए, 50ग्राधदांद 65९ फ्ब$ 02ंग्रवु ॥एप्रा ॥ (.984 8.0. ॥॥6 866 
9707 ॥40 (.98] 8,070. ए७$ 5 #0ंफ छा328 67 ॥€ ढ६व8 ००ताधशधा।ए 06४०७७३४ छा ९ (एमए ४5 
बात 6 4॥॥॥8 450९॥08 ०0 (४ शा 06%, #वींश [8 89928787208 ० ४ 50वाधर७ं3 ० 8 
जकुध्र वं020, ऐ॥2 6७ ऐशटवा॥8 8 992८8 रण 0प्राझ5' वंश25६ ४80, [0 (6 5९98४ 77072 &70 
ग्रठ6 खं्ा।5 डायल णातहशा 7९०9४ ए2छुआ 40 छंद ४४ बराइ3, 30098 टखाा€ पु, जांशां एक 39 
7९9॥एशंए ३€८270७व वब7006 झोशाए [980९४ एश्टथआश 8 ७७9० बाश्य, ९ उद्यांगव ल्यापश्राणाओए शीजाध 0 * 
निर्नंध्फथ छि०६०ॉ5 तथ्ापाल्षोए फ्र०परदांग वी 0 9४ गातार फ्राजी।कार (0० #79९ संठ३श ४० 08 #श्रीठटांडड., 
पृ॥४ए अ०्णाए प्रभवा्ांगत गा निंक्रांएए३ छिर(एांब ऐ0 58ए87802४७०8 8788. 7]6 69 .40ए॥79 


घ88 880 72786, 38 829008, ४7०९ ॥0४ 04 08 ब्श/श8 ७९8 ।07 8 82808 00७ 0/4 580 ॥87920 8$ 3286068, $7026९ ॥08 64 8 8९275 एछ९ा& 797 8 छ४40|8 (00 (0 


र्तएशब०7 जज पिववतंगतिएत)) उिद्याठुबंजर ए्राफ्डाआफ 










50224 222. 0:0:22222220220220222220 222 मं 
5०8०४) भसा।ब(8. 76 त।श/|थडा६९2 [४ ७४० 32875, कार एड वडाप०त॑ 85 व4॥०एव 5०६०७ (0 
07 076ांगवा उिशेद्र्ण०) 8॥6 ४ ठीश 285 5व१एगा७शेदुणं3, 0९ ठि&8०३ शोती ९ की।वाधव8 


० रंग 850९(९0$ 


पपहाढ 8० ०पीढा ९एंतढा९०० जाली वाली ९ 4$5706 पीठ नि्यो०प्० 3०६७०)७ ४०७5 6 
णांह्ारं 0१९. ०४ िश९ 37९ ॥0 7078 उ्जा$ 7 ॥7९ जीगद९०, थैधि0््दी, 38 गलत ढब्रीश, || 
5 || ठछ खंबाव 70णरपशाए5 ॥ ९ ॥४/07९ छ धाइटा।प्ञाजणा5, प्रपतीवाणत उंगाब 9825, 4 उद्॥ब१ी 
भी जाप चाट 0पा 70 छ0शाफएछ९त, [00006 शै2, [0676 ।5 बरला|श्टेपाबं ९एंतषशारढ 0 शी0श : 
पा 6 गरांधरा॥ब]07 ० बंगा।5 70 6|०फढ छि&9ु०04 )0 छवएथवटोपु0णं8 ९०७३ ८०79४७ ॥ 0८ 
लछिप्ाश्एण) टशांपाए जाषशा पिशर एशारट 5९ां0छ5ड हिटॉ0ग5 एशएटरटा वि€ बैंसा॥$ बात (6९ 
5#"08/838785, तैपतद 6 [6४ ० एशां]8पथा2ध्र्वाव 4॥6 30095 (368 8.7.) 


इाबए॥॥३०९७०३ ००८५७९५ ३ परवुप९ छएॉबट९ एल) गा 6 कांजठाए रण बेहांगरांडा वात 
एृह्वाशा2द ८एरफ्रा2ट, 4 5 00९ 952८९ जीशाशा ए९ वा 8ए७ 3 छव56 0 8] वां ।5 9८६ (४ 
ल्जॉपाडं ॥९तरग9९ काली एड्ायवाॉिद टथ) ००456 ०. है 5९थाली 700 6 ९३)ए |१98९$ [ शांड09 
रण दिवााउतय ९7४72 (९५-७5 40 ॥2९ ९१८९ ।४॥( ए९€१५९५, शान, 207 00520 ॥ 3 $॥7]06 
9पा धरंठाएं 6९एट९०फ०० न्शावुपवह2 ८गाए९त ० 70205, ९छागीिव 6९ 068) ए बगा8 वीए5 
7०५ ९ एाउटॉ2९ ० इब्रारॉंद्रीगा॥ एठज़ 0 ॥6 आभीशा भी060६ ढा जावएड202०६०७. ॥6 
भाए्ठांट एशट75९ 90९75 89[70०%7व2४9 एट)686 (0 ९ 5९एशात एशा।एाए 8.0. गाएं 70 60फ0 [९9 
लिए पी९ २०९5 55९टांताए05 ् (बगावबतंव छठरए, 85 5#74एड7892९|86ण०व ९ए०ॉए९0 45 4 टशाि 
० वद्गोशा बाते 85 वक्षाहा॥ तार वे #/शाहाओ 959 99 099, गि९ ४६5 धीठपद्गं वश ९५ हरी०पात 
€ाएड्वाार ॥6 #वाा4त3 8790592 0ा एएछ७0०5९5 ० 9079०0ग0 0 शा 7शींद्ंणा ७ाग०णाव श९ 
7859९5. ॥॥0॥7 ॥९00707 ७६5, ० ९0७5९ #ैंबवएए७., 00व4)7 ॥ ५8५ 8 (ढ6त॑व035, ९ टाई * 
दिद्वाग7848 795 ० छितब्रागावराटवा 07785 (0 7०४ 0ए67/ दिख्वादांथ, एशी0 धु४ए2 ॥९४7308 8 
97९ ध005 93८6 ४७च एाढठांतधाए ॥ ॥6 5७०१९ ० दर्वाभाशाबाएणा,  छ89 एश895 
इ्ाहइएशा906 धुत शीँवां बांरशगए5 0 टजीएवारट #९ विाध्रएबधु९० 0 १९४॥९४॥८ 9090529 06४6 
ए82९, ॥॥76 ध्वार्वांर्शं बशाएं22 (40 (द्यागाय्त॑ंव वीटावॉपार 99 खेखंा5 45 विदा ९ शरी0 एटाए दाशवा 
एिडांजा। इटाठी5ठ5 ॥8066 ख्यावा563 4 7 एशॉमंटार ७ हाठपढ्ां ठात॑ ढ्टॉग्रवु5., है ७ ध्रीड ध्यीशा 
$द्ाईंता का0त ?2्त्ों तंताधगवा०त तीर विशवाए 5०९॥४ ॥ िती4, ॥ 0९5 [0 धी९ टा29 ० वेग 
8045 0ि ध्रंणा6 ॥6 708079 बा9७3925 3 6995 धा९ए ९2१]09 ९एशा ॥0७. 


प्रफाेशाढ एड था। बाचुणागाल्यां ॥ इटीतांबाए लाएी९8, पा छाती इ/0०ादाँफ़ 0५ वां 7.5. 
एशाफब्शाावएएव फिठा ॥ ४४७5 30958 ए0 5570४व0 ज्रातगिद गी िंदा809., | ॥8ए९ 809५9  ॥9 
एचएछ७१5 पगा॑ 6 बाधुपाशशा 0065 76 #ंखा0त॑ पा (९३४ 0723507. ॥॥66 ९४ ध82९३ ७ ठि090/8॥7 
प्रभठएक्ी0एं 6 भिंड्0ाए छा द्वाप्रयांदाव, ग07 6 7९200 ठा तैशाठैड (सर।व ८९७7७ 8.९.) ५७० 
बा॥ध6श ९ डंजॉश्शायी ८शापाए "मीरा ईख॑पए३ गे छिद्गाठुगंगर >57९ एछ5 8 क्‍0प/धव एज ० 
छ8फर6ठीतंडाड (७५ 8 शौश्शांशत॑ ॥ 8॥ विडलाएाणा), ठिएी #6 धातु 0 92 टांडशाए 0९6 8 हीरा 
8960! छ७व5 ॥९ए०४४ 8 0णगरवा। इशेीह्व00, 3 7॥९90१0ण ० (४ ह29525. ४४९४ 8४४ ॥0 €एंपरशा८९ 
वां दा पद छिपवरतीडं इलोठेडाडइ छा छठ ४ए९/ ४0९ ब्राप्रगगित ॥ िडाशावपे3, ॥ 8 ९४३४ छत 
बेशंयांशा छोटी] शब्र5 ची९श गाएश ए0्पांधा 7शीहुणा ॥ पाद् ढंदांगी छाते पीर गाए ८शा(ाए 
७४४08 प[ए ॥0 ५४९ (एशा।। ०८९४7४फ9ए, ॥6 स्शीध्वणा छत ४ 36एां एछ्चाौःए/282 छत ए०ढापि। 
तज्राबड2४8 3॥0 ९ 70९9 ए&7€ 7590वत 0 जावाढ 4 #ैवाव2त4 07 |70090०8द॥6 ॥॥8॥ हरदा, 
छछ रथ 589 पीछा की ४879 #877904 [(शदापाश एव 0ंद्त वींशखांप्रार, ]6 रिवञाधवडांग्ध8 0706707 
पिएं हु8 (880 8.09.) ॥3 5प्970520 40 &2 (6 ग्यथाठ छी धार कीड वशकॉकर छत ॥ 
(09565; ॥5 एणा; #(बए। [बताया पुत्र ।5 4 ए०)॥ ० ए०2॥८$ 733९7 00 एा0ः'5 शैं.&एएकतैंब-कॉड 0 . 





न जे ञशएाइएढक, प्रं।0, 8005त8 0 $जार घटो।ठॉंथिड, 49 विद वही वपरए रण 'डुलसएनुंगिकावन्छुल | ग 
एटा४ कछिीटिणदाड ता उंडंगांडा0., भंशरत॑तैडाअली।88०७ (0920 8.0.) ।3 8७ ८6स्‍8लछा. छा चांधाशंररा - 
50]66 88 एव ३उछा९ शिवा 20रध्ाशए 07. 5४/एथ्कट'5 छेलशिलांडिबांमिन, किट डांल्यूंड , 


एशाली 2७ ॥ छ95९ ए९€९ 8 दाद ् इएगप्व ब्राग़ातप-0 सिक्का 0 जर्जंण्ट 80 ककया... ' 


0परापठ ॥38 एशाव08. पिएं) ० 06 #072$ प्रै४80065 40७ था 0थंगवाए फविपयावा कफैशहं॥8, एप शंरंपक्ष ' 
छा 5 शीठिड गाव ऐ$ए फावशादुठांत्रवु ए्ा/गेत छरएडाटशो हवते ग्राश्याँत बघुण9, ८ठछंते छंकाएँ 6मीं पैड 
डल्ाकराट पाद्वांएांदों फठशा उचता0ए065 ह9 बाधा, 300 उॉथांत्3 इसाएशरॉ-0909, #खजाफआॉप- 
लॉइलेएन 20 इल्षआएनशोट-तैड72#श्विवल, एंटी! आ४ 6 ७९७ 7र्ंएार छा फ़्र बीच बढ एंएक्ट 
शाप ण परी€ ए0ण॥ 8 $पटी प्री ईइ९४४ $ ॥0 जीछशः छ०ा+ जे #ँद्ामावतंत ता ए7056 छापा ८0क्रुआरएंद 


क्‍0 ॥#. प॥6 एणा६ क्रापक ॥9५8 प्राइजारत॑ गिजावाएत5 ् बात! बच्कागांड 0 050 3 फ़ाह सैंढि:- ' 


पार छाश्वाएडा 7025 व पैक एब्क्‍क्राफुब ठित, शद्ाएठ, रिएतव बात॑ दिवााव एशंणाए ६0 ॥86 
शाप टशाप्रापए गात॑ एश९ थॉ! 7४॥5., ॥69 ३९शा)३ 0 ॥87४ एं९७०९१ ॥6 (70एप)73 [७० ध8/९४: 076 
#०7 6 5९८एौ७॥ 07 छणांतीए एछजा।  एंण्ए; ह0णीर प्णा] ॥6९ 7९॥60७5 छा 8|्रंतापश 9 
 एस०ए्, ॥॥०फ9 40९ €१०7९३४५९० धीशीा 5९८घाँढा' ९४०9श९0९५ पछ०घक्षी छा 89 ठवा। वक्रॉंधंदिओ । 
लांवष्ची०5, बएते शा 70॥9005 0 5ज्रापठां र्शोगपु5 व0०एवी पीशा अश्ुत्आभींव टैबएएछक, एिएामसठ 5. 


#ैलाफुएश्शा१॥ 5 3 डांठए ० #&9 एलाशीबफाब पकरतीशाबाद्वाव; ॥ क्ॉंटीपा९5 ॥00 8 500 ता28९० ... ह 


गा प्राएात॑व्ाग2 ए९३5प्7०5 ए85 ०३७०९ । पएछ गा 6 ०५८७४ ० ए7/5 दर तेरलटा5, बात 8फ्डि। 723906 
चिढ वर्बापाढ ० 6 पाए छा 06९ शाएगवाए फ्ांश्व॥प९5 जीांदी 2 एणांत वठ00त छि एव 
एशागपुड, [00६ [0 गबा५ एशाहााए2४ 0ा रैयूफन्न8ह वा0 ए९८ढा28 व ए९बी5४० 300, 3 गेछ%, ही. 6 
रणावुए९४67) 3706 3 ॥फकाशांतरन्रभॉध[श३ [. 3 22307 ० 9333282 ॥700ए8ा [ 2८). 23087 0025 
ग6 0९४४९ ॥ 500, 896 60९5४ 70 ०९॥९ए९ ॥ (९ 207८९9( ० बरजा।8 ॥07९ए र्ांटा) ०) 7०06४प्र. 
व गैणागा एट॥09 ०ए थी फु्श जशञं।5 वा 00९ आा088. वंक्ांडआ) #008ाए9 ०९॥९०४३ पीवा तीव्र) ०आंाधुफ 
ज्जों] 06 7९॥९ए०० ० शा? झंगर5 ०079 फा0पछी #९॥ ९075: छाए ठतिशा 7९2!209 सै।४ 8॥8॥079 
ग्रद्ांपा९ छा ९ छए000 ८०0४७ (९फ 8९१।९९ए९ कराणेशील 0प्र ॥ए९रा रीजिड,  ०ीशा एछ०0705, जाप. 
जिला रणि(5 एचवा एाग9 | शारंशाीत्र: ॥575 90506 0ए ततता। ० हैल्शशान ॥0007790 09 ४35 
9पह् $एिशि095 बाते ०9 उत्वणाताद फु्चणएच्च- 0ए श्वदागवु ७ ०06 ॥6€ 35 ए/९३5८४०९०१ 5५9 उंव98 
९05 


ढेंबांधांडबवा ९ए९7 ए०७९५ 6 ९#हाओं वराफ्ातंब6 बलांएएशाशा$ ॥88 एंटोआ०५४, ज॑/0०४६; 
7्ढंयीरा ग क्वीठशीरिड (९ इएापव! बएी९एशा।शा5., (००09० 0ए७ 0९'5 9350075 45 5७०७९€॥०0 0 
९0770 0००९१ ४0९ ए।एशा5९; 4 622]0765. ॥]75 ४९५॥०३४ 0 बं॥्आ॥89 35 ९८)680 ॥ ९ ४09 
छताग्रबरांह 2)0 ठिग्लोएडी था रिवात्98 5 #ैत0एफप्राथ्रा4, उीष्थावा टणावफपशाड 8४ छ00 0प0टी 6 
॥शंएछ 5 बाज; छिद्योपँजा तररशयां5 8 डोत॑ंदा ए०06४7 उिावाबाब गाते क्ााँणातबाॉ।6शा।ए 09220065 
कार अप्रक्राशाह गाली, छिपा सा बट छा. 5 ॥79065 थी) 7ए49९ 6 40॥0007255 छा झ्राप्रश्टक्षो 
संल079: ॥९४ दाए25 ०42 (6४ शाँ॥/॥४ 0 छि]8/838 270 280070९5 8 57५88] 60 43॥085 00 9शा॥॥॥०९. 


बढ शाप 50रक्ाबांब वायतुर 5० पल सा।ठलर का 5्रिएथा02९60 5 $फ्राएणी2८ ७ ह७ 
अरए्रशं ठश280655 रण उद्यीप्रँठी, से 5 एशपवाशा। (0.56 (80 (खाठं3 2जएर ॥95 एजडॉएएते . 
(शरकुब तार दा छल छुल, परेशान] 7076 तिवा पए्चत॑तं।॥-एण]६98, 005) व 088 


णलण्प्रा ध्राश्यां #0076 शाक्षदु०5६ ० 09एयागवंद, मी भिावश्यावणरॉपुएन, एि्रापला84, परएापा इपते . ह ] 


जिग्रामत्शधियांड, . है. वि एम रे 8. ए०तांतता659 . थाद॑ पी. 0॥8-ए०7्रवीर85 8 शतक. 
काण्पड्ला०ए 6 छिध्रार छ एथामादतंब सिशात५72, ॥95 45 ॥दवां॥9 तंफर 40 (॥४ शिएतएँं वंशज, . 
' चात॑ पी इडीजाए रण जिीडाबांध बा उल्याषाक्षी 07 76 इ०लंशए, 


कग्माफ्बजीक्रारांस 5 (१6 #एछंडिक 57 6 इटटपांका ४छाए ए सिववा98, ॥8 इंताएं ॥$ छठा- 











222000:222 ९0०, 08 08 20200 शी 0.22; 05% १०९० 
6. 2200.2020:22222:2022002222032 ः 202222232 23 
बडोंत8, ॥० 0000. रिक्रा94 ॥85 टवाढफपिए 3ए०960 णां॥ठ)769 थाए रंगा3 ९एताशा। ॥7 ४5 सिफेश्रमररल 
ह€छांट, ॥॥8 $5०टांढ ए४५९5 07 5 एंत्रा25 4॥08 एडछबल (20579), पश्चषणा। (7"7689), शांघ्8 (0९76ांशा), 
बैड (चिागर), एथ्लोड (०00४773८9), ४#प्रटां| (लोवान्टारा) गीत शैत्वृप्शा। ७४४का०४अंणा ाएपडोी 5 
टंघ्शा22९४५. 7ठा ९शढाएछा९, >प्राएठतारतत ४०00 67 ठ9852८फ, एच छि एीर्भपो72९55, 8॥फ%2 
लि गैशतठांशा, उिंधेश्ागर णि लाबाबटांएा, 7.््राण्वाधंव 0ा क्रोब्रश्या#, 


६2 20002 00 22८2 कल २३७१४ 702०525 ५ 
; 8४% ४५३:४४७४४३४७४४:: ८२७७: 22000 ५: 2! 
08, 20०8० ०२०५५००८०.२००० 4000 2.4.0... ०१0८० १०)०१३)१ 4०१०१०२०१०४०:०२५९ ०८२५7५०८०५ 


#प्रिठ09) प।25९ फ्रशार एडए25 फ>ुठ-तगतांगा 9 लाबावटांरस, (६ 0९5 $0 धी९ टारता 6 
रिकाएव पीठ ((6 30 ० विं्रो्कणीब्रनबा& ए45५ शाए0एट०व 00 0९960 ९ वैठमांवदा। 30८ दा।॑ 
गराठाहां एडॉएर5, इच्ा०गीरंगढ पा व ऐीर टाीबावटाा8$ ० (8 दिशा 509. 7॥6 5९लागरंदा ९00 
इ€7ए९प ।€ 36९56९06 पचिाटांणा ० ए०टाए ॥रणढ दा भ5 72॥99005 श[जे८, 85 6 ंधाइशा फुपा$३ 
॥ भा का$ एिबाफ़्नणी798- "| ९१७7९५५ छिपापतश ९7९, ऐप गांशथ्रतुन्शान ॥ 79 #/फ््चएना५, 


खराणीरशाः दाश्या 90९ दिवावत जशाठांर ऊउग्जोग्रश्ींशवो]॥एन ० उकलेबरएप्रतंता॥ 35 
िपादिरछ ९एॉ2ट, 0छपा 75 55793 ९७८ एव5 #डंधिबकुच्चश्छकब, ६07 2ठत79, 5 बाद ८७ ९०॥९८ ७७5५ 
छा धरम रिलशाबवएप,्रतबबएु० (६ ४०7 0 ९हांगा), 0ए ॥5 शुभ; ९00 एव35 
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शाए्री०एशवं रिद्याद्र्तंतव 07 7शीध्वां०प5 एातरहु5. एाबजायांशंडा बर्तए0290९१6ं ९6ंपटढा06॥ 0 फ्रणाशा, 
बात ॥66 &50 वेग्ायडा 009९0 (९ ५४०ए, 36९८8७३४ वंश 7९ए९ ठलिफँत॑ ९।तए८वा।।द एणा०ा: 
करवाए ए्रणाशा जिी098१5 0 735 परशा९ 704 ०79 ाशावा९५, एएं ए९7९ 0९९७ छ४९८।-१९७०. थिं७५ 
बंशा। एरठच्ाषशा उद्यााड एढाह उलोणेबा3, वांतिाठपह ए९ढ 60 वां 478 बाए श्यांतैशाट९ (0 970०९ एँवां 
४५ 008 ॥0 ध्ीगतु ॥# रैँद्ाधाव04, 57९व छएछछणााशा) ॥0४ #लग्रा400०९, (२७९९४ ॥08 आिवाातिबोत 
७7९१९ ॥00 ०गोए इवेपटया2टत 0७ 97070४06 ९४788076४ 390 482 थ्रा5 0 3 छुदां ९ररं॥॥. 7॥22 
ग्रशर स्ीदीशिाश्त॑ एजाशा बा॥णराद बंगा।5, बात॑ 'ग्रिं5 बिटाँ ॥99/7०९० ॥४ शाजञओदहाएव चैं०एटभोशाँ, 
ए/॥०४ ४९थर 8ग्ा।ंतशा धर४5 ॥0 8ए90प्राव०९७ [0 छठा९ए॥१ 8 ९०प८४७॥, एश्वावग बाते निांश 
एावजञाठांशशा छ९ढाढ 90॥ए९ए ॥ ०५४ ० ॥0747४79 ९०४९८४0०0 0 एलाका ३0 परव॑र दिशा 
४ चलाीए४ एल्ला ॥ 502ांब्रो बटॉएंध०३, 6 ॥008 वा 06 5008 बात॑ ॥87575ए 09079. #७7क्ार्दाओप3 
7९ए९वां5 हा (फ्रांचद #8 ४॥७३४॥ए४७ 70एशाशता, वा बह, ॥७०2क्‍79३९ए९॥ |०088॥ ७6९78, 0९ 
छा विशा गा शाओं-तशओ6  70शपांड, ॥0008श ट्टागाद गण) पी निद्या]80 2886, ९०770980 
पएब्ट835 ॥-#8708094, 


]॥ ग्राबए वाछां 0968 09 ता फौग०९ ६0 हांएश व छंटाफ्रार रण (॥6 8०९०-थडा०७5 बलॉएिए25 छा 





किपाव006, 8 छु९ड जाता) णाँ. प्रण॑ ०४ए द्वाब्रांडा ०० ् तीर, है. टॉस फंटापार की पीटा 
बरलणि#४5 कि डए्दीग्रणर व फ्वार॥9 8 कॉए-:क्था। कुक प्रश्य७ ००७02 ॥॥ 98:80. क४ 
ट्वा९ #णा 8 वगिीए ता द्वारका 2र्ततार्वविद्वीडा0त5 बात॑ 2लीजआ5ड, गिषा विवाह! िंबॉिए2फएएस, जय5 
फ़गीटांशां 0० मी अव्िशशट8 44 ४4४२१; कम जीरा छा005 2 एवड 0फात ऋद्ांठा तातते 8 
50087, ॥ ४४७४ ]९ ए्सी0 >ह्ा०2४० फिहशटॉडाफ8एडे।ति २00॥8 <०0903९ 6 $]्रारभरॉकप्राश्तओ : 
॥ 7 ऐ९ ॥ंप्रवी९ ्व06 शा टश्यापए, निएा द्िशशनानैब७ वविए78 ४5 4 एफ गरीपशा।लिं शी, - 
जा ह€ रिकज्गाबीपंव ब्तगाणिआशीएा, वी 5 घयांत वह ॥९ ७४०5 सवएक 0 ती९ राएशण गा एढगेंती: 
रिवाआ8 97०2०ॉबॉगा$इ वा ९ ठगांए क्रॉलिशा०९ एश॑फररा जाबाचएठ वात॑ (९ विए2707 ४३३, 
ए्री४7९85 #ह९ रिा॥एशठा गत 8 ॥7ण९ बात एव 60 ॥00 9085९55 036. विश घाएांट, ग९॥ 
##रगा0 बाएं ९एशा ॥९0 3$0 एटा€ 762097क्‍5206 ॥९४४०0€5 एज पिशा दि6. | ९४ 9777४ ० प्रठ्शी, 
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8.0. उद्यंग्रष्ाा गाए व6ए6 ९९7९० फीड पाएं ए0एाएफ, किछातीरढा इट८००शागप (0 नचिधाएवसकय 
3 विषतकांनओ ए्र०7 ते ८०्ज्ग्व, मिवाट० रग्रर्चप्रेकिावजन एजणी। 8 ॥0088 0ि 6 ादुक्षाति 
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एीाब9९। एव5$ ७पी 09 ॥6 तिाए ॥ ४१६४ इमार टाए 0ि पराहुदा।3 दिपराणोवातंन छॉपटी) ४४३५ 
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१0ए९शआए ए ठउिप090गकंजआा वा 0९ण०छा, ॥॥ा5 ऊुगां $ एशाफ अंह्ातल्वाणां ॥0 5झाए ण्वत ९8वें 
(0 बाएं 6०प्रगाए्र 0प ढां50 दाह, रिएट॥ सिठांटा ता ठा 85008 5 शीो$ड ७५ ७ ऐ॥2॥९ 
७०385 ॥0 ८0५09 ए्रा९ए7९ ९5९ (७४०0) ९॥४३४९५- ठि्याशाव्रा5 8॥6 धब्राबाव 00 ॥00 ९४३, (१४) 
5.70. 5॥#द75 85 207९6॥ए7 086ग्रा॥ी९७ 'उक्‍ा्याक्ा45५" 8५ उ३४४85.9 हिशा उप्च॑ज्नीथा) 2739590 
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(0 ॥6 '306609 ॥र०॥/' . 70 . 5॥99 85 ०४ परबत९ ६ 04४ ए०)रंप्रभणा #प्रश॑परापु (6 
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६ाताब्राध्यएद 5 ।$ 574एचाव .€. , 2्वंतव, 6 रश्थाए९ 00फ6ण7 70० '5ल्‍64ए७7802 ०७०४ 
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पिवाए५ं।(8 [0 ४छ7क%४55 (8छ573५935॥) 80 'चिंद्ा5॥#वशाहा083॥ (9507९) धराताए्व्रां० 2 )88 
छाए ७ 800ी5ता 0 दि्वाधवरवाह8 , #॥20 0पए घिं$ प्रत्ाह उंठांत्राई॥ ६80 प80९ 5 शावाद था तह 
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०ए 7.8. 706894% ८एक्तंबागाप्र (दावरातबौव गाए एड छ०शा पीर विश छः०७ात 607 (6 7४5॥75 
85 छत ह९ वंडा।35, ?27074कॉए फंड किटांगा गराएड। व8ए६ एागाफ प्ट्त॑ पी गेंगा।व जाय 
. सछविबताएड्योप 896 ॥5 डि098] 88208 70 00056 02 50) ग0श ए/एए॥06 ० ैएड0/० ु 






22220 50222 


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5076 5$07 ० 56 0३४८४ [0 06507 7ए९श]शाबा0ग ० गे्वा।डा, 58॥730 08४ ३५७९ ८०76 
णांज 00 7९ज्ांव52 6 व8१09 ९५५३5 7शीहा0. 79॥9 ३ढणांशा प्राप७ 8ए७ 5५८८०९९७९० 
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(2) ब्‌॥05९ छ0 छ०07॥९४ 67 ४ ए९॥एशशाआवु ० पीर 7शलीहांगा बहुबात।श वए ०005 गाता 
8०४ 7८07020 ॥ 9707967फ दा ।९85 ॥ 978५98730९]890]3 ॥॥6 €।५७ ए९72. 573ए50402।७6०|8 
0०९॥6 [॥6 $8४४ 4८०९ (000 ४९ 600 ग6 शि6 बाए 86905 रीएश॥)०९ धीाशढ) 67 रंक्ा।शा) 
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७7९८(४५5 तृषपवराप्रांगछ ० 70085 4 बात बर०णाव ऊच्च्वए॥73३०९१७०३ गराप्रं ॥83ए९ ८४७४५2९० छा 
एशाबराशा ॥0$5 0 बा ॥एव४घ३४७९ ९एंहबएमरएब। एशगी।। ० छा९ गाव ९वाए टपाभांता :9. 
09 8 ॥शाार$टशा। ० 6 94७, वृष्थाग्रागव 8 वदधातु 980९ ९एशा ॥0प ए्ात इ5टवा। 725एटटां 
७ वेश्या 456. 


कटा (९ चिंवएाएव३5, द्विवावावए8 207९ पहातंश 6 5७४७५ ० (९ $#व्वौ3एछ७978$ ४४० 
7७९6 0 ०एशा 0िए €शापा४३, ॥॥6 7प॥९ ए5 70 00प06 €एशाएपिं थी गाधाए 7९592९८$. ४९, 
बचाए) 45 4 ४७ तात॑ दि वि/ावाता रण 5 एलशा०0 जींटा ताषाफा5४ 3 94 १घ6, 
७७88 58०९० 0७9 िढ छुाश्बां४5 एा 406 पंगरवा65-(पात॑वदपा(तंबरी4798. 


45 इद्वांत॑ दादा रिवाशातिगरावएपाव 6 एक्जाोठिी 2 ० 6 50वॉ९०श्रीौआ8$ ४३5 3 
87078 60 0 गंगा, [॥6€ 0एा6वंछा छत एं5 तैज्राब89 + जप्रो ०९टबा९र ० ८०ाए४॥ 0 
बंबायांशा गाए ऐप गद्याए उ38फ98$  ॥6 टट|शाॉंगों .0 5ए८दएव४४०॥5 ८00800८ट९० 9०9 07. 
प.७9,.6. 5509 8 रिए प्र्वा5 वधु0 2ा 4 छावट९ एगीरत एबततीाका।॥व0 था ॥6 5प्रगांपा तीईंटा 
रण दावाःव 784९५ 443ए6 छाठप्रवा। 40 ॥8व प्रा ॥89 970090]ए 9९ टह्ां४20 4 ०७॥॥3 5(9४98 
कि 8 कि 6 | (8 5000. क 9९००७$३ 0 08४ शाद्वावएशी॥04 9९706. लछै0छए68०९३, 7५८ 
रण धरांड 967०0 ॥8४ ए९0 0 ८०९6 0० #वा. 


परप्तद. ६&89#शै885 0०7 88788५०४७।: 


वृताढ छगरांवशद्ो्राब ॥ए९ छु३ए९ एट९ 0 छि0 वाएठांगा।ं 0ज्ञरा१905 0 (78469 
शे2., ॥९ च6877045 ्छ छेद्याहएव४वं ब्ात॑ 06 09079935 ० [84/4590. प॥७ क्‍#$ ०76 ०९€6ुवा 0 
पर 0९७ शी९ एरडंरा) दात॑ ॥0श7 फरवाईड बात॑ त8 तोीश इ०एतिषशा ब्ात॑ 28807 9875 





>र्जकैद्ााद/कांध्,. एगतंढा दर गपीढ सखेब्ताशा दुरशंड 8 टोरवा ज्ोटएार बस बा रहफएक्रातंगक 
चीश्ाडर री बएॉफरतंट5 3 न ; 

परकराढ व्चाग्दप्रारंव बातद॑प्रावए पा म्रडटा।एप00577 एछ७ 6थीए 5९६ (0 7४३ पीट | 
ए700शा) छा ऐाीढ९ ठांशा। ए (6९ ैगवेद्याएच 70फवां ॥095९, 'पा0पछ्ी 8त्राावधांटल्शों व धीशीा 
छा ९ दितंवा945 एऊत्चरद॑ [९ एकए छा स्शंप्णाबाएा छा गण गाए (१७ एश्वाट शशांदांखत , 
90 890 ० 4 2 7९ $+व98945., ॥70शीा ॥5ट7एञणाड 970सं(€ प५ 4 एज फ़रौटए7९ ० ४ 
एडा40प5 5९०३ ता ववपांडात, चिंवापए 8 (705 एछ छु९। 8 60७७६ एीशीार। 5006 0 फ४ एके 
छा |3॥705. 


[9 ॥6 ए279 ग3 प्रा ० वं$ 7र्पा९ दिग्वंधाा04 रिबॉाएपएडाउिव्ं्रठाप8 ता25 3 राव छाववोर 
0 52 ( 8 खेगागे ऊषांबंता। 38 3 70970 छा इचणाए ॥ा52॥,78 १॥९ 2697९ छॉठा2 
जला धरणिए5 ७३ ० 5 एशथं75 छात्र 5बरफ॑द्वा075 [0 उिशदद्ुवएशा गंाशाताब ते 6708 जात 
5वाप्रॉगी075 0 सिज्रा3०03. ॥॥6 प्रात 4९08 ५9३६ ८३१९१ *००(०) ४३१४-शैश।ााव', 7॥6 ए98९ 
णए सिर एो272 वाट वीं९ं।त ९४॥५९८त ०९८/005०९१ 40 4॥6 ॥09 27036 ० &6 539(20 40 9८ 
"(0९ 54ए०एछा5 ० ४९८ 7९९ एठ70'., ॥86 #श6 फ्रह्वतेट हल ठाठदता प्र])2 ०६७७४घु 2६ 
शरिब्राॉग्शं४8 (77006. जि७)959962 47 82]88 थ7 ]). 070 ॥९ 94५७५ ० ॥8 तंद्वा४५ 3५5878४0 0 ९९१ 
(602॥770%3 *॥6 ०ए 8.8. 50927 (ज्ञां3इ ०0972 कफ्ञञौह्वॉ० 7०9 ०९ 9]3८९१ ॥7 ४९ ए७० (!. 405 
8.7. 


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5.09 





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बा९ उप्रतततीडई (बाएं ॥0 74 35 5प59९50९6 059 चि. न, #ग9) धाशाप्राव075, 30८ठत79 
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लिप्त ०6 ० फांड 8 ॥6 इांग्पुट ० #एफ़ग78]/58, 000०९ एी।5 ९५]३५ 6९ 559०४ ० 
"छ7ए3पिव 5097" ,(७7) प॥5 45 6 30०0८ ० 48९ फऊुपार 370 ॥96750९०0 5607. 


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'डातंतीाबएन्ाशाब फुष|&" 4909205 0 0९ वा ॥790वा शैशा ० एठ0शोांए शा ९ 73540॥5. 
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'हडातताब-एकश्यॉपश्ड खश्यी्॥6७"' |) 6९ ०७5905.क्‍09 850 ९ ८0वच९ ८7055 ॥॥6 छा 
$कांत॥न-एआब्रफ्बतंल गतााफ्रां,2 'विद्यात0 5त0ाद्रादशा' ।5 वा गराएजाॉँवा। 5४6० ० ९ 
चि70५9$ 'एच्याटीच्फवाशग९क७ँए।ं ब०णॉडक मानव, नपातिीशा ॥ा९ 2 0] 5 7200ात 72805- 


#(8€एडावा) * गरवध्परौदावा। फएावजाब * वजआंदिवा 
547ए8]755$4 - वं9फ््वी 5ए5 00वचावा4" 


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ए96६॥ ॥९0॥007९0 89 ६ ८९6 ० तंग्रागांधा | ४ छ० दव्द्रा/ए4 (097७7 एॉड९३ ० 9 
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वृफछ/€ ॥7€ 3 €ए ॥9076€ 762८0705 ॥श॥6॥076 बरए०पां ती९€ गपफ्ाए6मा 873॥5 0 6 
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76€5986|6 छा 6फछा 5799९5.79 १४ ॥5ट274950008 ॥शफठा5 तीर दाठु विचवएंएण्डायाब 0प्री व दिद्वाउ2 
बंधद्व89७, प॥९ पति 5 फ्यॉंडट९ ढजांडाश्त 00 वि कंक्षा। ॥0त6 रण विाड शा।फ़ञोंट बाते ता ॥8 ढरि 
€ड्रांडांटत॑ 9० बरजॉएडअलड (27276 निगी$) बिटागई ९ (ए९९7६ 9०2८९ : (बशरं७0७7७) . (| 


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वां (ली, वतांड 9068९5 पिला या प्र पीर दिंततदु, वा ९8४ ९ साशाफएश! ० ॥0फगोें विीए, 85 
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प्रभ्तोष्ट 5880/285: 


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ब70 7280॥84) छ९7९ एॉ९552० ०ए ॥ि8 खं88 प्राधश। शाशीवबाबावंबएराबाए०, छिपा अारांफ 8 
ध0प्ए$ जोीशशा' विरार छ७३३ ठा9ए खंगागव शैगात 6 रशं्जीशओावशशा।ा ए 8 03999 
09एक्‍88977) 


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70070ए पाएटी [छु 0७९ 0 छडपटाए ० 50प70९५. ॥0 495 ९ (७०९०५ [.९७०७५ ३0४ ५ध]0 589५५ 
पाठां वांड ९४००वाॉता ए$ 8 5प८९९५५5 बाएं पा 3 एग्श्यॉफन्ोड एड ए०७5५ ०एएॉँ। वढछठा िंगातगो 
 जाग्रा०54 छीडाएटा, 97. छारांए ह॥ णर९5: भर 576९ ॥ व्ता'९८श९०॥आ। जात शिंट्ट तिठा ॥ ७४३७5 
६०0ाधुवाएशणधा4 )ं' जाो0 ।९१ धार ९४०७९काता 00 पाढ 4िणांवा (०04357", जि०0ए८९ए४ा ॥6€ 585 आीशा। 
ब्र/०प० ऐश (एशाबॉफ्रदोवफ्स 4.९., 8 ०95००॥ 0ए॥ 09 0९ #त842 ज़ठ0ए९एटा, (| 9 ॥0ए॥ 40 ७५७ 
गिजा) था वाइटाफॉणा गिणा धतांगा०0539 9५90049 [वा एिबता6-चिंब॒तती4ए3, ९ 0फा१त९7४ ए 
॥९ 0क्कातु8 दिए एऐपा। 8 एठ55व9 गश्या विद्वातगी (व जांधवाएएण ढाए), 4 एव5 विश ता 
7९एणी। 9४000 870 ८6 'एल्लॉपग्चंक ठिब््यतां', 50060072 |३४९ | छए७५ गठुबा। 7९८0ा50प्रटा९० 
700७8 $ ७०7९ (॥९8॥0७०९८५०) .** 


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(6९ वि४ एटा 0 ९ इठा6 ॥5ट7छ9छ07॥, ४९, ॥€ #35$ वृण्टशा०ताश्त 35 [0 ज्ीशीशा (९€7९ 
९७७५ बाप खा] विवातं ॥ 6९ ९श॑व्रणीजाधशा ० थी९ 5गातुव रि6्फ्रवा गिधा9, 


(00077 ६0 5 रगाारत वषताएा छोा0 वि 7९७८ ९ छुशारत06घप979 एछांगपा तवबवां८5, 
#(ठ5ाध्ववाए्वा प्राव चिंबतीबएड |, पीर #/श 05च59ुव िंगठ 7८0 76500 60. 350-370.५450 |€॥7८९८, 
6 0च्४बत ॥९व चचिंवातंथाो 7 5॥ एप वबाप: छा ध्ाग्राठतुब ठांडएंटा परापडा विबएर ए2शा ऐप 
कांगरव वां5$ 792700 ($3५ ७. ३360-365 20). 


[5 उद्ांत वीवो वद्याएदागाब 300 ४ज॥च॥ए5०78, 0ंरसागराट४टव॑ 20520ए2$ 6मरा गंबा8 
जरफ्शा०९, उिए घ0 ठग गैव6 0९९१ 0006 (0 बंबागांशा, वा बिटां, ठद्रीओबा छिणा।ै पा0६€ 6 
(0बा985$ 6 ववांगौआत था एएटा वाटाटबञाआध 7209 छा ठुः१९०९ 3309 दावातेंर्ता एंटी 445 ९ 
एटा 3 शडतगशा०णाए रण २एश।बविडातद गतव्रॉपार वी फिर छिता$ छा कींदाबॉपार, भाई जाएं 
बाएश्टॉएाड, 


वफठण्यी उ०प्रए/४त0 ६६77७१, 07. 50९४ 8॥, जार 7ररिायग्रपु [0 धार ए्ा50 छा दातत 
मैसा।48, 3855675 पिजश्वा री९ वरछांत॑ 6 चंगीाक ९4225 00 (९ उाछ9 प्रपॉँश$ ७३५ वध 
डाठताद.4० गृप्नठह उद्वादगाएपाओं ए]फ्बदाओं छू 6 70वीं छए९ट९फएा एण॑ उव्याछुय तैशाबीछ 
वृत्र6 सिंध ह80९ छत ० जात (0  वं्वांगव शग्राए४ (छा०0ढ७०ए ॥ (07 प्रावत॑8ए॥8५३) ०7 (९ 
80एॉ८९४ ० ॥85 ८९४7. १? 










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डक्राबादावी, एचंटबदाए३,ए8४॥४08790, ए[730९ए१, एा|वफ्रबाता।, एिप्रांप्0ए303, >९एच्राबाव 
एपागंबटलाओथा979, [042ट)वा एच 3९ एप 8 रच वाफऊु0ांवा। घ९$ छा ी९ उ0्र ह९८ॉत87925 
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पराढाढ बा९ चररबार९३ ठा तेबांगशब ए्रगारथा ०९८००ाधवबच प्रष्राई' (६9775) 9 छातंढः 40 
एक३त्ाी दीशं। ऐऔिठापरा॥' 8300 ॥0:7प्द छा 'पर०॥8' ॥ 6९ ॥6९5 एज). िड॑धा८९५ ० ऐ6ए 
बॉ50 एशाविफागधु उच्राए545 बात 5दावतीए।णंता। 6 27.00 


जि चिशाटरत 0ए ॥6 क्राँंगपड ० ० ९5९ 7>९०ए४७०९ रिएणं किह्ृणारतंःव)43, (6 
छिद्या8 क्रांगव ००ाडफफ्टाटत व गादांउफ्ब 6गांर्त पथ धीवाए बगिन्रोॉ्एड ० 57 ?रिप्राव् ते 5व६3 
698 (#7 7776-77), ४6 50॥ ॥९वब्ार्ठा फ्रश्वा ७ फि९ 59584 6 579फप्रापचौ3, ॥॥6 0द्याघव 
दाग दाार्व 6९ ए)॥१5९ ?रिग्रानों की ितवुण्वा34 ७७३५३ १९९ ० ॥9095 0 5 एश5व0, 5! 
0 #प्ात7९०१६$ 6 5घटी। ॥$8025, [5 45 ०7९ 0एांफ्र. 


| 86 चैंबात3ा) ए७५ 50 ्रापटी वॉशाए0ए९॥) ॥ $0टाएफ्र वीवा ॥ 280 ०९८०णार ताीटिवा 
60 तीभांगवपांशी  गैगावब विणा ॥0-794 370 एं5-3-ए७5. वगा।शा 80 ॥5 ॥79 '0506श॥ 
89०४! गा 547983५380 घा06€ (॥४ शा06€३7 टद्वार ० ९एशा ॥6ग्राठ/5006 0983 7098] विग9. 


गफाह ट+8.09#॥५8७5 ९70४6 ए९ाफ् .पएला #िणा ९ #ंचततव095 थात॑ ९ (७७॥935. 
४४५३७५७॥5 ७७७५ धार हागात॑$0) ० 5च्ा9व जिप्राणाव 330 35 ०0९75 पा0९7 (806877095 [6 
टाशापोएए85 ९०गा॥670९6 पधीशंा ट्ा९९।, 


पृक& (शब्४ाॉए८७७५ ०४९०० ४९४5९।७९५ ऐिन्राद्रतानणीबपुअए६28 ., उिएा वीा5 तांतं ॥60 
तीडापाए वी वाए छठ धी९ बता।8वा07 3॥96 ए2९9ए टदा।06 7९॥8095 90॥09. २९॥६०प५ 
#९रव०॥ ७७5४ 50 ॥पटी सिवा 50ग्रोाश॥65 गषा9€75 ७० (९ 70फ्8! विय।ए [00020 0९7९०॥। 
7249075$. (शब्रपा(प्र७. एागरज््ग्वाएबव 5 तंबणद्।श ॥प्रा।एएरावत0९एण एव५ 3 ७09979९7 ० चाव, 
9#९ ५ गादा९6 40 ॥6९ #094 ४ढँीगव (एम्लागवएशीबान एी0 ए0॥979९१ 5क्आाए३७ १ात॑ ॥85 
ए९९॥ विद्या।€त ॥ 5टए/075 35 (6 थागवध ० वाी९ रि्र्प्र्क्ृन॥&. 


छुपा॥ध्याव60९ए 090 ॥6 470५5 07९59]]०९-०७३७३१० 2 ?िपा5९7९., ४५७३ (शा एथी)375 
बांगगधणाए प्रंड वृपणरा एछवाएंटाछवबा26त ९ 2ट09९ट9ाणा टशााताए बा94 7९त७९४०त० 5 
एा०ंाढा--9809, ९०९7० (एाबीएप्र८  एगुबफ्रव्ताएठ 0 एा०एणंव९ चार एावाॉप्रिगंगपफ्र4 एज 
प्रपारीट्शा छ्ाबग5, जींटी ७३५ 2८2९०९० ७70 07 €दा76४प 6एछा 0फए 6४ ९ीए७९१०7५४॥ (तर धी€ 
ए€७7 6० 707). शिप्ाील्टा। दहावा5ड एछशार गावत९ [0 गं)वबचफ5 गातं २808 ग्रापां$ 09५ (९ 
एगबाफपफ्रव5. फिठएी॥९९7।, (९ 70005 $खतवंक्राएह72॥॥ ० 7?9]4725॥ | 0०७) 8 घएी३फ३७ 07 
॥6% ०  ॥ी। बा &ैपो06 (धार चिंएदुणा छााएा०) 0 जरंटी ॥6 रएााफएुटाणा 8०५०2 इशा८7/0७5 
ध्रागरा5. ॥॥6 वित0प05 शिवश््या छा रिपरढ2५॥ की ८0ग्रए४8 707 ए$ उंशवौए३४, (००7905९१ ७०५ 
चा९ 906 व्धाश्वा९ रिव्ं2९ाा 5९ &00 ॥8 080९0 60 634 .(8०») 


व टाडांप॑एएड टबागोंटाए $ एिश रडिजिट्त वध फ़शाप्रनाततिदु दी९ उ्ांतव5 (0० 
श्टउएडाॉा2 8 ०७३०९ रागए)४ बांगदर्णात तीर पराश्र ए/बंत)323] 23४४5 ४ उ080॥. 5 28०८ 
789 9०४ (6 ९खांटईडा रण पीढ ट8ए९5 ॥26. शागागाफए वीषशार९ 5 3 2३ए९ वंशबांठफ्र० ० #0०९ 
४षहप 00052 0 6 ई9700$ दिउशका3व9ब)480 ९४०2. ॥6 (एशवप्रपफ्रच६ ऐशव०ए९४।९०व (॥5 









32252. 28 ६:१५ 2) 20020 2268 20220 220 >पपट न यट4ु ९ 20020000222.2. हा | 
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एप 50 06 छताए ॥. ॥४7 ट०्ज़ांबी निणीताढत (ैगाफ्वॉताशंव) 5९९४३ 0० 06 8 ए९पए आाट।शा। 
ढटाढ उठ |ग्रधंडदश, लै220वातदु 40 निंबराणीव्रताबडपां, 2 बफत0 0 कदशइएनांटांए ऊैअफ्रॉओओ३' ;- । 
भिष्ाक्ारव 270 (5 7९870000004 ३5 धररताशत ७9ए 3 विज छ004 प्रणाफश' ० 5एटंडाग्रडा8 
बंथां१5 35 ९87४ 35 5 ठशापाए 60.6० 52एजा693 ॥] ॥90९ 3 ठुव्शा 40 धीछ तं338 एब्टीशर 
लैशीपि। उ829]6 छा शाबफ्रकदाा।, नंड एा०ीपशा दिवागणी3 85 पु0एशशाता ० ठद्याध्ु५चत प्रावते& 
धाग्गाड 0० खमँद्रंवए७ बात चैद्ला।व शड्टीरड, #्रा0पीवएबाडीब | ७७5 3 दाशवा फशातणा का. 
वेद्यांगरांआ, विष ए९टकरा९ 8 णी0एरशा 6 इंड्रंगांआ तंपरांतदु ऐ९ लर फ़ठ/ ० ॥5 पांरए बातें 
9476758व दिढर दधुश्थां चगं्ा।43 वीशाएड5 5पटी। 35 जा55९073 304 (उप्ाा्ष093890738, |7९३2 
लैटी37ए859 ए7०९ #ाकुएाबमल गाव एसर॥ओ फर्चाशा8 72592८८।०८५ए, 


हातद दै/हाशव वी शावता4९०0 3 047934 9700255 97॥26 ((७70॥9300९. 5॥8 ८075$#7प८ॉ४0 
व (ावॉफ्रय्रां3प्8 वा पिवातेहएवाव (ग हैतवुगां गरपां)) वात 5066 परपााटशत॥। द्ाबां5 00 ॥ ॥ ह9 
932,06) पारा 80ा वाता8& (७ छला0॥7600 53॥660938 (5०७ 90509403897)8 (2 07 6 
शिबोद्फ़ुपल्यश भातं वरातादागाठी वपीठा रा खेएक्ोअलानाीजमां-5 672 ए९27९ 92070णा52८० 9ए 
दतह्राव ॥. 8९5005 निं्वांति९१0, छिद्यार590785 ए85 व॥ 70774 टशााए ० वंबांधांडा . 
जिएएटएटए, वी 5 08 एीएी 5 हती गार्वाएशागरातवु ॥९ ध्रागातंरएा छा उठंतिांशा ०एा 6९ 
एिडडागपांठ व6९ णोती (5 एशाए ऐ९०प्राँणि 23०४ (॥8॥93]899$5. 0 (॥९5४ शाशाएता गापडां 
0८ गावतंर ० एकल॑ॉजड कँंदा।48, वाते/श्४ $्रएीश 30 खंल्धुद्यावअ॥3 5890॥4. 


पक९ एशबापाए्25 ० दिद्वांजु्ाब 0]0920 5वाएं5च्ा, नि०फ्९ए९ा, 928709882 0 94597 
0०0770९त, ठिपा ठप |4|॥ 0 420 टशाप९5 वंत्रंधोंआझा ॥80 0 विए९ 2 5९ए४॥९ 
७ए?7०शाठा िणा 580एव 5ठाग्रांड ९४ दिशएश्रा।बतंद रिव्रावांशी गाते 00४75. ॥॥6 वद्या।8 निएा।5 
बा6 56ाठांब्रा$ विंरत 0 ९०070/0८ इछचट2255फपाफए 9/$७9प्रांडी075 388॥5 ॥€ 5498 58875. 
प़ाढ 7शीक्षांगा] ॥08 ॥5 700॥9785$ ॥ ॥€ ॥07प्रद्या फ़वा5 ० दिवावॉवाव, चि०४ ० ९ 
टशगाएदांडफए३5 7४270 207ए९7६९१ क्‍क0 5एनं3ए385., ॥॥7€ हशादांगा 9गंत ए९ए 0७७४० 92८७५५७ 
० (९ |ठ5»9 ० [(5 ९१९. 


ए७ए९३ ० 5॥0९॥ 7282॥6९0 0९ न०फएड5व३ 46607 ॥ ४ 50प00. 4ि०७४९ए2/, ॥6॥€ 
९ 33020 ७छड5 ए2८7ए छएशी 805070९९ ध्यात 8 ॥006 तंवव4ब8९ 0० ९ 7शीकछ्षठश गथवांगांशा, 


गह खेत 0त्तद्वा) 06 ॥6 नि०फ्३वा३ 4ज्राव&फ ।5 एरए छएशे] ॥0ए॥. 545, ी74020776 , 
एगवफ्रबाप8, रिटएबाइु8& बा उिीचांत | एशार त6ए४0फा गगाड, लिंठश ण पीशा उफंठातातबांरश 
7प्रोष्ा8 प्रशा९ 7875, ॥6 (ब्रावव[ु& 3076 (0 ठे्ागाहआ॥ 40७७ 40 (08 वाएबं०णा ७४७५७ ए9709679 . 
7693॥760 #ए &| //238९ 9९०७०. 


छिातावए३5 ००ाएशआता एटावाताफ़ वैबत इतर शॉट था 6 इबा०णी पर्व 
बैडाप्रडा ॥ 6९ 078 7. 7 5 00 रछाएटा 0 इतए धीद एॉशंग"ापएए70तीश्र9 ऊकेताइश - 
7९75९८घरां४७ [॥९ बंब्ा३ 57 ना$ वित00७9 वृष९्णा शाव्नांबाब बातव॑ तीर शत ठछा पी पैकाआं2त 
एथ४)९ एउ्याच्ुबायुं3 ७०2१९ ब्र॥॥05. ॥ 8 इबोत॑ 8७००४ पीशां गी. एव ठगापुवाओुंब ए्ी0 टठाएटाट्त॑ 
(९ एड0९ ० उगाएन्एशत ० 8 ६0928 ७५ 7९एवापादु ॥0)27008 93530॥9 ० ४ #29#07.. 






पुर 0एफाव००त पा९ जीगठुर संग्रावाधबफपाव, एप! 5 एशक्ाफबाविएल वा छावएडाबँ९छएाव था (6 
घबाग€ ० गरंड गठाीरा गात॑ €०ाइक्ग्रढांटव॑ 6 वर शालं०5ए९ छएरं। द्ाएपात पा€ डंव७९ ०0 
(ए्वाधरवांब ०ए2 ठत099808((.75)0 पृ॥ढ 50०5 ०6 0ग्राहुबववग[ुं3 98४९ साएजावाीट्शा। द्ाद्या$ड दात॑ 
€ए९ए। ९०ाईाॉ॥पटा४0 ए458त)5 हिट 79077 ० एंटी 755 रिधाइएथावागव उठघ540 वां 
एए-बडपरापतवाब, 4 ७85 7शावाश्त॑ 'ए॥३ए१फएवाइएच्ाओवंव3' 0ए एशााप्एद्रातीव8 १5%) पृ॥९ छ० 
छात्रा िंद्या!प्रार बा0 छिवावांग्रवएफच्४ एी0 एछ९८ार९ हात|67५ ३0 ८0॥77370675 ० 
एाड्रगाएश्डाताथाव 00926 फाढ एलाठए ० ठ05ग्राहुवाब]ब  शुपणंगवागद वंडांता, 


(एटशा शाग्रांबाबव ९०ा5उएएटा2त 0853045 370 9>2९४07760 569 7१ प४5473]8 
(5708094 (रिप्रा॥ध्चा39फ9व |) व॥0॥6९7 (एणशधशणवात॑९। छत एात्रापएब्रादाभाब ७७ 3 ॥7॥943- 
बीग्रा्फ्रव )रथा९त ?िपाद३-वंंग्रवा398 गा #06दाव (00667 (फबावाजंबावधु47/8), 7९ 380 
ह० 7शाठए्वॉ20 पा९ एच्डबवा5 वा उा9वबण्बत 96000.00' (शांवह4])3, बाणाीश एएणाध्राब्राप॑रा 
छा एाइक्रापएएड70॥0303, 30069एाएवा 7॥5 छाठवतारढा टागएगाबव 2725९ (४० 0०३55045 85 
'एचड्राणॉडडी2पएंशवएअ"' [0 60॥ 770गाश--(8787०९ ६ विदा]9894.729 ए[इशापएडातीउ79व3 विगइट 
॥रवत८ दाबा5 0 720फ8438-व॥4]3938 .९००78प८४४० ४9प्र धी€ तै॑बरातंधा329३४३४ ५॥॥9५००॥७४. 
मिबीबलीबा074 504॥4730९798 722229९60 ॥॥6 दाग, 7० 


व एठती0गा ० 06०९ ५०७5 ८णापवप्रप26 0फए ९ ५ए८८९४५०१६ ० ४४धापएकावीवाव . 
8९580९6 8ाणाद छाबगा5 गा 7९छबागतु 06 ०00 ए३5३०5५, 7९७ 00९5 ए2/2 ८९३९० 70 
87/5 ९डटउएचॉएत 80 ब्रागिलाएत (00 धिशा, १9 


लिठए९ए९ा, ॥ द्वारा 25 ए९ गं06 5076 08880क्‍5 ०९ं॥6 ८00ए९7९० 85 (९॥7९5 ० 
शा इंंएव ० एाजशागपए.79 इ080 एं]8925 7शावग॥९त दात0 ८2णाएश€/९०0 35 88/83735. 70 [| 
5९९॥5 धीवा 6९ 70फए8 ए़वाएगाबदुर 32204९0० (९० 5#एंक्रा8एंडगश ४७३5 ॥]5प520 [0 3 ८९€गाा 
शडांशा, 6 ती579पॉार९ एऐशं॑एररा) पीशा बाते 0375 ० ९ रशाए॥/९ वाटॉसत ९6 बॉर४7ी]0ा 
० पार फ्र2फ्रवा8ठुब5क शाएटरा०णा उिप्रौदव 4 एी0 त62९९० सिवा [07९ ७३५ 70 4९7९7८€ 
एशाएटशा (९ ए8॥743ए8 370 खेगा।व टा2९व५ बात॑ शा ॥॥6९ एवज्रा)]वए35५ ॥ी0प्रात 200९ 
॥0 9700९ (6 रेंड्ागड ए7९९०.०7० [ज्रएछादंे 97000९ए७0ण0 40 #6 इं्ा5 ९०७९6 ॥ वाह 
ए2875 350.7780 8 उठवतांडवा 6 अ8पशिश्त॑ एर7०ए ॥एली), वी ॥80 |09 45 #।९090 ०ा ॥5 0 
0 #ॉबातद॑ 08 30 |गर्त४एए९ा0तंटगा।9, 


काणगा 05द्यादुत (िखतेत्वा)05 9९706 40 दादा ० 6 नि0फ954999 वंवांगाश 460 2) पफ़्रा 
गिडात 02235७९७ ० इतगाद गरीपटाट९ 0एटा पीठ एएरगद् ठित्रा॥९5 गाटाणतागठु फैशी 0#८ट९75 
बात उद्ला॥4॥935 वबात॑चबिट९व कार टणाफुश]स्‍6त7# गिणा 6 डिध्वीणवांल्श उश्टास्‍0॥ ० ॥॥6 
8०0९४ए., (शपोंट & 80009 सपयाएंटा छा पाठ 7एीप्रह गि6$ इपटी 35 रिवाव8 रा उगतंदा॥, 
6€ 5670798(85, [॥2 5]]90985, [6 6प्राव5 ० 0पर।, (१6 पिठांडा704 9एवबी8ए०४५, [१6 
७॥7९73 चिंउ३53[९ए४०6 2॥९५, ९ भंतपठ्ठ३0ण ला४ड५ड, [९ 88745 [6 उ्चा8$ ० दववातं- 
एढा१60064 (60फ5743), ४॥९ +00843008५ (९ 547(87385 बाएं ॥॥९ (फद्घातुबरए०5 ४४९7४ (0]07%९75 
0 बंता .79 ह५४र९व ऐपीढ परालटाीशा: ठपाँव ० क्षांतरठ९-एा/व ठउिावाफडउंचड एर९ाट 0क्‍09727९५ ० 
पैगांधांशा चटटठाचाए 00 07. 0.8. 028ढ., ॥॥6 (709 ७ ॥॥695९ ॥प|४75 458 5097९80 0०ए६/ 
व प्रांतढ 4९8 ९८०॥एाशाए ० ढ77॥0725 0 निंग्रावावडा॥, #ै!)745 बाएं ववद्रावधदतफ 90070९७१० 





6 9/2$86॥ा डॉग्रा2 ० #द्वातरठांहड88. शी छा (65४ तेप्रातडा।९5, री 756 छा & आप 2. 
ए९€ावशीबांएब हराएएशाशा थी 6 तठापी गाव वीर शव ्ण 57-फएव्वज्ञाब्रणंधशा 079 फिट वेद्ाओी 
ए०एाए छाठप्रदगा ॥ 28 चै्टीए2 ता बंहांग्ांधा। 


पिद्वणाह 08 ॥5 70075 | ॥6 फ्ञौँचात5 रेशाओशा (80 विड 60ए ०७टां०७४ (९ 050885$ 
बात॑ 0 6 ए0च७ < हिदागाबांदा3, ॥॥6 दारशा ०0४० ॥9॥5 गातव॑ ए8॥6फ95 ० 0९ ८०७४ 
एछाट्एंहरत॑ ब इवार 37९0407358 0 पा९ तांशपः0७2० 9. गंगागांगा ध्जीत25560 बाणीए चधर्तंवेशा 
69९४ ॥९€॥९ है 


बेंबागंडा एतारए॥20 [6 पिठाएही ब06 500 दिद्यावाव 05705 ० गी९€ 2088 (पद ॥९ 
7७]९ ७ 6 ४डिं्वतंद्राव095 ७ उिद्यागएबर्डा, रिरर72९०४ [०0 6 गाँगठा त्पगाहु उंठांगव गियाफ रण 
६९।॥७५ 85 ०९शा 7302 3॥72949. ॥#6 शं्वश्शाशा 6 07. 8.8.7, झागवोा तीवां 50पा0 दिकात्षाब 
2८0०्रगा)5$ ॥0 ॥एक्ाञाॉवा। ठ3 ए९७॥952५ ० शि९ 59॥-420 ८छ्गांपरा९$5 0.0,५0 ३६ 40(9७॥ए७ 
णाणाएर, 70०, ए९ ग्धित॑ इपीटांशां गरर्वादा॥5 0 9700९ ॥5 ९ज्ंाटा०९ गैश९ तंपाताद पी5$ 
92९॥00 .(87! 


ह#67 (8 70]९ ० (6 8७७३५ ३ 7प्गाफऐटा ० 0फ्ञ5805 9256दा (०00९ [900९9९70९॥9 
कीह€ 20व8ावो तांडाटा5 छा दिद्वागथ20968. ॥॥९7ए एढ९शाट ०९50९5 ४९ (९!|३५, (९ ॥(७०3७॥7095 ० 
टाह्र)0फएग73, ९ लंड ० छादा, पिवतां7९€ गा06 निबतप्रण्व गा पिछणाओती दिवाता॥ थात॑ ९ 
छ9895, 6९ (8०७५, [02 8॥95, ॥॥९ व08॥935, (४ निग्राषर९फ्३ (ि703॥5, 0॥? 5879785 
870 ॥6 ॥(६|8$53-(7॥3]3 7७5 बर0 8 ॥0$ ० तशिशा उिगींबो35$ गात॑ नि०व३००९५. [2$2 ए९१९ 
वा गेंदा5. 5"८९एप्रतु & रण, पी९ 7९9 िठत शा ॥5फ9 9495 तंपांतरठह ॥6९ एूविफ्रवावद॒बाव 
7९7708. ॥॥6 शावरा'€ ॥९छ०ा ॥20 ८070 परातेशढा ही एऊुशाएंेशण ए ॥॥6 ७|०फचा89798 60ए९770॥5 
जी ॥९१तवदएचाटाड वा चिंवाव30०९, उिद्या्दाएपा वात लिगागञ9एवा. 


परजछ गगांगव 75 िया।65 6 6 2055 ९7]09९0 एथा[टवां उतारा, 5£५९८९७४7५ 
॥॥6 3376993$8, ॥॥6 उितववा873505 ० िबवा६33 870 ॥॥8 पिठठ।९ ८॥2८9७ 6९ 00९75 ॥प९० 0ए६7 
शाद्योंषा 372९85. नि९€॥८९, 956४९० थधाढ घटा 72९०४० ९८076ा्रॉंट आशा), एटा, ॥९ए 0ए९0॑ 
॥0९9९76९7०९ 400 क्रापट॥, व5 €ावाता टखा ए९७४ 97९ ट्ब्ाएवा९त एजगी] गी6 खाटांशा ८9- 
5९5 ० 07९2९९. शैद्या5 वांशाह 0पा ० चउ60959 गाए ग्रापापठीं वाबारत, गैबत 0९९॥ (० 
९०ााएणा 8८९४८. पार९फए एव८शार वा ९३59 77९फ५ 0 ९ ॥0९ शाॉाशाफुरोशाए बाव॑ तवांडटफ्रा॥266 
॥07068 ७ हा ॥रांशा5 ० (शत जा0 ए७९हुला 0 ००८५5ए 6 ८04४ गीश 6 वि ० ० 
एाहफ्रद्यावपबाब लाए, गंगाव बटॉजी९ए5 ८९३5९७ 0 €जा5ह 0प पा९ ग्रांवहर छा ०९ 37 
व्शाप्राए बा0 4 €ए परत वियर]6९5 ९रडांशं ९एडा 0049. 


प० #ए7०85, [6 ९७॥॥८5६ 7णंाहु दिया छा 56प दँँगाबाव ४९7९ 0॥07९०१५ ० 
$ाजा, कशा 2096 855009९$ ए९ा€ 6 ॥६९॥३५ वा6 वी€ 5वत्रॉंबा55 एणी एऐशापु वेठाग5. 
एजान ॥8 2८0|॥75 ए९875 ० शा पर णए९ गगि6 6 #ए985 3550९06॥79 (2752]०९३ ए 
धा€ गंगा 707 ० चिंप0त300९76 . (१४) 


एह/-फछिएबा62 ता इन्‍्बती।न्एंतं। एज 8 टषशांगा प्रॉगाब5टा। तपातह ९ 450॥ 
हछ9॥8]! पर्दा ए उिद्यगागवतं९०३ किएडफ्लाता॥ ॥$ 7800क्‍6त6 | वा ॥5८790 ० #0 285.,५७9) 
फेथाश 0 ॥॥5, एछ९ ठुषशं व 0०णगरिएगीतठा 7ढघबावा।द 6 हरािगारि रठाँव्टाड छ. 


४१० 


दि ५ ४७७४ ७४४॥४७४४६॥४४: ,००००,०,००००८०५ 2208४७४ बन, %; 2 22 2/220050080 20000: 2 ०१ 
कस 52205 0 22200: 02222: 2000202020000222200:07202000222200000222. 2 


१०,०३०, ०३,९.९४,१५०,०)५८०,०,०६०,९५०,९, ०१९, ९.९, ९; 


२९४ 





#रपए45 ज्यीती पीर (तववांपए०5 छा उिठतंगया। बात ॥8 ऊव्गांबवाब5, #ैैफ्व दाव एवाहएआीदारव 5 
चवएश्शा िपा#पा302०३ 9005 बरटां5 09ए७ 52९7 7€टा९6ं 40 द्रा[९७09. उद्धाद्वत्धा 05$ छुएां ३ 
एशाए ए७९१एपांपोंए टबाएटएं 9९९९० ० श्रभाब्कीाएर शंणार ०९०ादांतव 40 4॥5 फ९700."+ [॥5 
इ+0ए5 पीछा बेंडांगरांशा। रजांडासठत विढा6 तंप्रांमद ० एीवीप॑फ्रगा एटा0त॑ क्‍0 पीर टशॉण्ा छा 
प्रीपशटातवु 980एॉ९ (0 6९ एए ध€ वि0प5 वेंडतद पी. 


पफाह 55798735 0 ए6ुवा 0 7९ 60 निषााटाव (5काग्रा०दुक जिडाएट) ॥8ए2 ०९९॥ 
व4९5८7/9९0. 385 "ए?छाध-?ठमाएण्टोटॉीड रिप्रश्यएरशनवीरएशएबशबओत वा तारा पाइएाएा।]0ता, 0 
छ0ा9 प्शारढ ॥ छव5 एशॉां2ए४० धीवा रिवरा-207ऐफ्टलाटीड 7९9725९75 ठांए ९ ट्वज़ींग लाए छा 
ए?7त्प्राएपटो2ट053 (नपच्तोत्त8), हिए2९॥ 72523720९5 30€ 970ए७१ शाधां छ0 ८९5 37९ ग्बाारत॑ 
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पृद्ां। रि९८ए. & ६6. 9पए 07. ६.७. छद्या९७॥, िंटएछ 02९॥॥, 974 - ?9 40-] व्यक् 
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# वीरता बठप्रागव। छा हँदशशावतव उ5चाजएव रिक्राऔीवत, उिादांणर चि.0. एव5वाधादी 
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[॥990 ०. 23 - &॥50 इल्रधबाधं।इश 27 6व-72. 

एप... िंएाधाफ़ - 59. ८१. ? 34-36. 

8.8. 56ऊढा जित॑. [899579. ?9 "एणा-.>. 8 €श 5८४०७७ ठप वफठ0पां 3099 29908 
॥९€(९€7९€7702 ॥४€:४. [|॥९फ फिांगा धीठा 'िंवता॥' ६९7९८ ॥69 पाश्वया॥ 6799 सिंढातए48 
ज्र05९ प्राततवु० 705६ 4ए९ 0९९॥ प्राबत९ 5ए०टांब्रफ्र 67 (९ ८&७९७7३ध०॥ ० ']गैवर्ताप्र४5७व 
६5०४४. 67 ठाठुण्राशगां5 5९९८४ ० ए९ पाशावए2 35 6 त0 ॥0 इ$चए वाफ!।ा। 
3090ए (6 (छाए छा रिवााबएवा।, व चंबा)व क॑लआओ जीटी 45 गाशां।06९0 ॥ ॥2 
इता€ 722070 3)0076 शांति ब7ाणाहशा शाएंं ० दैवा)3 ((६गण0९०३।१फ३). 2९ ०6 
बाए धुएं ०७ 80०066$5 ॥806 0 37ए इफ़ुण्टांबाँ ?िप]|ं॥ )5 40 ०९ वाधधरष्टाइरत ॥ एवाॉटा 
ग़रागशतंद्वांरए बी ९ €९शे/7ा।0ठा एर।९€7235 ॥ 2 2८85९ ०0 उप्रतवावकृ0्णा' ए९ वि0 
वी९€ उगावाब्8 एशांगाठु एप 0 दावा$ 7466 वर णाफ़ 404 एप ३50 40 एछ० ठादा 
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६.९. * 'िंदंधा 35, 72. 

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797. 8, हझकढा: 8॥: 09. ०. ? 323. 

&079978 5 सी९€ इक्वा€ 35५ (0797व | उशरिवंटापफा 9576, रिक्वशलापा 95 ज्रंरशतटत 35 
चाताए 35 उे टिवीटांड छा #जआी004 बात एफ 780279 ०ा९ 707९ 5 7[007९0 (0 ॥39९ 
ए९९ठ ता5८0एशा९व, 5 वादांट9९५5 #॥#6 00४5७ एग्रापट्ब गाए 56टांगदां बढाएजा]65 शिवा 
€शांञरत वा पिंड 7९ठांणा तणांगव [॥6 ैंवपराफ़्वा ए20व., पिव्वाणय।ए (09875 (९००४१) 
ग्रिपज्ञ वैबए९ ए2८ठगार 4 इाएठा 7शॉदांठप$ ट्टाा९ ब्ाग05 हिणा 5 9९०५ एव 
एाभाफ्र्बाब,््ल्‍च5 वी बरात्पातव॑ गाते धारवां ग्रापांड 7९डइंतापु ॥ पीछा. निद्याटट ६०१48 
ए2९८शा३९€ व इप्रागाएा) छा 3 ॥०गोि4-९९८7४०. 

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९६788 (ईठ7704643॥68॥ 5  वेगाशं ण छिशवादद्गाध्णो ४. 5.00. ॥ 80 (7) .-82 (73), 
६.९. ॥४ 0४. 2 (83) टशआगावादांगावद्वाव , 

६.८. ४५ षिछु. 33 

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(डायल, तींते 700 फाएवंपट४ 8 (एटा छा धी5 एछढ०, 706 ॥एत॒दु उ8ध9 4९६7।६०5. 
० 80फ५ा॥ 05 (छत पिलातावों ॥90093732९) वा ९7१९ जाए ॥ दियााबइाया8 0459. 


' ६,0. ॥ ४०३5. 3,2,9,40,.१,43,84,5,6,]7, ४४८. ६.८.४. रु, 24 थाते 55. 


६.2८.५. पु. 55, ६.८. प्रा (06 569.) . 45. ६.८. ॥ 86, 4]2 €६८. 

६.८.७. 8. 349, 

६6.7. पा0. जड़ेड़ा। 79 3]7 7 छान छएछांगव९; ६.७, हिग्ाशएता: 8 लिाइा0तफ ण 509७ 
(डाद्व३" 2? 59-62, ?. पर, भिपाताए, ०9. ४. ? 38-39. 

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7?,8. 76५७३ ००.०॥. ? व98. 

[90: ? ]49; &450 875८ 496. 8975. '8' [४०. 540. 

६.८. प 763 80 98 िंवादा 50. 

5.8. 5#व्ा॥3 09. ०. ?9 40-4व. 

79॥6 80, 82, ६८ ४ ॥४६. 33. 

5.57. इक ०7. का. ? 4], ६€८ ] 349, ६८ ४ २६. 32. 

६.८. ४ २७. 30 बगा9 68. 

६८ ॥ 462, 476. 

६८ ॥ए (४. 2 (83) टाआग्रशावागुंधाबाब 5 ४० 6 चिं७७ 29. 

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६८ शा नम7्र. 85 (४ 42). 

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४.व.. 30, 3, ६८ शा ४३. ३, 2; ६८ त॥ 60 3, 40, 40], 402, 403, 23, 
पिवशंबाहुए0 ]46, ६८ ४ (॥. ३3, 4, 99, 95, 37; न्णाह््पए 37, 38, £८ ४७, ४&ए। 
20, 2], 22, 23; ॥. ॥३३४75४7०एा३ 280, 28]; 5.८. शा लन्रक्षागरा8४एएा० 7, 8, 9; 
89. 82, 433, 436, 437,व40, 4, 457, 

जिछ95०7]7 746, 447, 448, 465, 69, 74, 8५ 7 €(८. 

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बंग्रबांब9३', चिंबती।3एव४ एश्णाएांट वा िएावात (निव558॥ पार) ७०७५ 20फ्रडवांव जी।ब५9७. 
वृफढ एशापरबपटडौीयएट ९709९ वां ककवावीद्वावा॥ 850 5९९८पम्रा5 0 96€ & ए$5००4 €श767. 
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8.0. ॥ा 6प्रमवा५फु९९ 40. 0दांग्राश्वादरोदा। 85५ 7शात्रा९6 रिवयु]5९वएफएा8., 

६.0, ॥ 5-बएथ१4३०८१७०३४ 475 (344) ए. श2क्‍्ाा 805७घछडा 3368 870. 

5.6. 9॥9778, ००. ९४६. ?? 44-46 

7.8. 0९58॥: 09. ८. 7? 42, ]-24, 433, 247, 748, 45, 52, 60, 362 
63, 492, 26, 334 ९८ 

2१.8.7, इ998, ००. ०ा. 73. 

7... चिपएा)ए, ०9. ०. ? 27-32. 

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०... 09. ८४. ?-38-42. 





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5... शा ॥४०. 294: 

72... ०9. ८(. ? 79-88. 

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?7 28-29. 

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7906. ? 454-457. 

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॥90: ?9 37-38. 

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व 3९९७ ८णाशे्रागरिशां [0 शी, ॥ 3 0030 5९॥५९, 5प५६६०९५५९ ०] फ्रांएशण्ठ! ढतांट्वों जा।एंए2९५ 
गा0त रिशाह्ुछत (गशब्वाकरित्र) 7 4 7९जञांटाटत 5९३५९ तैशाठग्रावु 4 एगगीटणौगा गांधी गेंगरापांशा), छा ८0प्राउ2 
ए्रावर0पां उबरटाीलाएह ॥5 शीशाशां ९४९० ००0९०, ॥ ०ाश ए0705, वंद्याव है ॥ एचापतांधछ 
अंक्षाट्थाएंप 7शी९टा5 0९ |॥0507##९व बात 7शपछुं०प5५ गरप0९ बाव॑ टजीपावी 35][जीवी05 ० [९ 
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(९ए९०़्ञरगए ढा४९१ भपट खंग्रागांशा। ॥ 4िगवावाबा8,.. ॥॥6 उगावब शा।ँए))।४5 बा९ एलाधांटवीए 2८०ी०त॑ 
(फगांफश्ोबएछ5७ 07 रंँत्रदाश्रएड७ 20 गाणर ए0एण॑ंगाप्र उि्ढताड 0 छि90$ (त९ए९त ग"०ा) एश्च४व।- 
॥#68 6एशा॥गत्र 42९), श्वटंगीश्टापवों रव॑एा९$ 0 (6 बेंब्ांघत 0450 बा९ तिशापरी९१ 09 0075 (९7४८० 
शंताश ॥0ा एठ58ं८टवाँ (९४६४ 0 ग"णा ॥6 आज एजॉए्बाट3 09 6 ८0रशाफ्रावए वाएं३5, 
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वृफ€ गंगा) एज 5 वंज0९० ॥॥0 तरॉीरिशा। 522८0075 07 ए07[9णा९त्र छ5. ॥॥6 ८शी ए्यीश8 
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एब्रॉरत॑ क्राध्ोदीवाश राधा ्फुब एंटी 5 ठशाशातोए व 2 शाा।9ए एगय॑, 805 3 7९50 छा धांड गागयादशारएओ 
8 हुः०णात जाग $ 7एटांग्राठुप्रॉंठा 07 ९जाठु/ंए0,. वि०००2०४/ 672 5 00 7९ढ409 ॥ 50 शि! 35 ६१९ 
शआा[०९ ए चर चाठपाते छांगा 45 ९णाएशा॥20., ॥76 औव्फुर ० (९ इछुन्ाणिनबद्शीक 0ती९शएांड९ उपलार 
$$ $07शाॉगरा€5 गावताीर्त 0 0०९ ढेणाप्रवांध्ते 50 35 (0 3ए०णगा7008/8४ परणर पैधा णा९ ग्राधपु९ 
वृश्म्रक्कांद्राव5 "22, १५९, एशापरिठ्पा,... जाधभीवाए ऐएी]९ इनजीडाबानुए३ (ीँवारत फैगो गाव 
साधाताबानार8धक३ (70॥0० प्रावए ४४० 0९ राणावुद्याश्वे 50 35 ॥0 222णाग्रा0वैद्वर 7078 धाठाप8 ॥ 96 
छ०का। 4.९. 0७थीएशद ए9802९. 7 5 ॥ प॥5 7९४ए९टां ॥रा0४ परतिवगिंगा गया इच्राएगट, 7॥९ छाए 


३ (एकथपाशा। जज सप्वी68 का सिजंशां बातीश (रज्नणए & 80999, िगगगंज (गरए,ज-१47७५0-580003 


ऐ०१०१००५१५०००९९, 


/३..१.5,4,५..०,०,१.९,९१.३,०, ९, ४02 22%0.22 '५०,%,१,०,९,%,७, १, ३१,४५४ ५५, ९.९, 





ज29९ ए ॥6 जद ग्रागए ०९ एच), एणनच्शार्ते णा अऑ९शीवा९ ॥8०९ 0 दिणा७. 


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ग00सघ0णाडी डपी९-०९! (छुण्ीएबधुणीबछ) ॥ पिट विज छाँठ एा तिरट कॉदीश्ाबव शांरटी 8९७ 
3000९ #॥९ इ्याटाएा। ० पी९ गाया। छुब्चए्ऐिनन्चली 2006५ 8 तीडंगटा ढिव्धा2, ॥॥5 
गावए ०४ पए्ुएगांह९ ० ॥%ए००गांद० (६८ ॥ (973) 58373) 685 ग्राश्प0729 | ॥6 
5ाबश8१8०९86008 वा5टफीणा,. चिढहुफ्ती छत क्षाए06, गोतदढोवफ््व दा. ऐक्राविवेबादी बगत॑ 
5ावएग्राव०टवतुएं३ बार 5006 ० ॥॥९ रएश्वाफ|९5 0 5 शिवॉपार, 


एफ आंपागाव रण मधवाठफ़्ब 0 गंावधुए॥व 35 ठशारशावॉफि ० ९ एशाष्त्रा4 फ्र०९, दांव, 
इ8॥९ ९४ ताीाशा शात्रा5५ तंशातातदु फीढ आंदतीवाव, वी! ॥$ ठुशादशानप्र त2८ठब०९० ता 
इ2प५./ए07९५ ०0 परांठाव ४3535 3॥0 ४६४६५॥5. 


पगृफा९ €डा९707 ७छढ४ (छात्रा) 207्रञ्ञशंड ० शी]र2 52९00॥5 9१8शाटशा। (९ ।09४9८। 705), ५७३॥| 
9709९ (790॥९ 90767 बाव ९३७ए९ बात॑ एव३ए९ (फःएशा 706) लाढाइटॉ2788520. 09५ 
बगज़ीलसाए 6 इगा6 ९5 वांगगापरा बाटगएटॉप्ावा 0९००30075५ 35 ९ए१९४70९6 ७५ (॥6 
एांभा। ८ 9758087090९।950|8. | 


गँं]9]5935 व7९€ 0९0 0ए [, ॥66-#ग्रात76 5 0९५घाा९0 35 गरधद्ा्रष70935, 
507९(॥0९5 0३॥९० छ/छवा्बकात बचाएी७७,.. ]06 55९5 एज 489 ॥॥05768735 4९॥॥6 
वी९ छिपा वं[एटां07$ ८४९७ (आग्णापादि३५ गाए ग्रठागदाए ठिप्ात॑ थी ॥68 गरढा04 ०7 (९ 
00 0० [॥6 ग्राद्षा्र३कावए35., 50000९5 १६।5॥35 020099 ॥6 93९९ ० दावणा]७)(35 
एप ॥९एटा पी९ १४आओ5. 25९ वा९ टबी९त छागीावत९०३एी]वा5$ 85 00फा0 का 9690. 
पृ॥र6९४९ गोगावधब्राएणावउ5 ९ तठीएशा 72982ट९0 ०9प्र स्‍00, 70णएाव॑ ० इचृष्डा९ 50०५5 ०7 
डशॉपटापएा९$ ८३९० धब्ातैक्षात्च5 ०0 एगाएं[925-. 


बक९ शाटा0१चा४ 370ण6 पिी९ उा॑गएव ॥$ ठगी फुब्रणांडप्र/्य 0 फुबणतिोंत, फ़राएटडीथ 35 
९एेबशाएण्त ए0पए 6९ 00९5 प्रात बरा0्पात॑ पी९ ८00558] बुर एा 50रागवांव 20 (6 
8#गरा09 एवडा वा 54ए३॥३०९।३३०।३..._ 6 जत्रद्वाश्वैद्वण्ध छा 2 .0गाधवयाव टटॉबा5 3 
एजणा6व0 एणि. शाह फुयथशॉफएकाअत९०७०५. 


वर जांगवांगिफ्रव9 7९ ०9वीं ० ४००१, छाहाताताबा (चिंगातंती, 79830), दावा (नि8), 
505 (348]९00) ७7 $०ए९€ ०फ#९€॥ ग्वाशाव5.. ९95७ ग)वॉशांओ$ ॥3ए९ 3॥50 ीपशार्टत॑ 
प्रब्ांघार वग0 डाफ्रर छा बंबीाबव था वर क्ाताग3,.. |॥6 ववांशाहर डणार प५९७ ॥ ९00454 
दद्वत्राबावा जधाब िगागवतंब थी फ़्ववएपॉसा 35 छिप्रात 2 उादाइवों बाते 7090 02८३7 (5 ०प. 
वर छघ३४९४ ० कावाजीर 0 पी€ ऐक्‍डडशगाशा, छा2६ बात ए००१ (?) [0 शाढ इफ्छटशाइशप्रतांएणा& 35 
प्रतांटबवा०6  वी€ 7९टशा ९टबएडॉठा$ वा व40 3595 ६0 507 दाठ'श|९१66 0० खव55 67 | 
&७77949/08 . 


॥| 45 €णा0प्5 0 ॥06४ एी९ व्रीएशाटर ठा ढचांग्राबां 2८०े०वचांटड)] 5 रम्णंाणादषा्रा(दा 80075 60 
॥6 ५ जाट 359९८ ता वंगागब बराटप्रॉरटॉपार, वह गेवा।द वरण्राणाशा३ ठ्े एवडाबाव 08725 
छा ॥60एफए 7005 [ शांता शाबफ्र 7225९०70/४ ६0 5076 ९हछां ९ वाटीा४टापः2 ० ॥6€ 
निगारीदफ्बा 72९छणा) गाव 00प06 ज़ी 3एशाशा ० 6 छा बश्लीन वार 50० जढी तरडंधा20 








५०५०००८८०२०५८८५१ 000६8 22220 22025 स्पा 
2०002: 020222 00% 2002: 2200:2200022:%: 





25 (0 $चा 46 08 ॥0९8 ९८० ००व 2ण्वाव।075 [6४ #९वएफए ४8॥5. नैपत2&तंप76 प॥00फशा।5 
(छि अंद्ा 70०ीच 9), शिगाद। पाजाप्राश॥$ ( 0 ८0घ7३९५ ० ३०३ बरावाहुरत॑ ०07८78०7०75 
006 87067) ॥75ए ७९ ॥९€॥प८०760 ६७४९ 35 9707९ ९५३४७७७८४५. 


जशरत वा ता४५७४ गरीएशासशपु 4०005 पीसी बार प०/ए एऊल्टपीनक (0 ]गंगव था वी दिवापतां०व, 
बंद्या।॥ 'कै।ली]९टॉपार ॥9॥2९5 जीता $ 0०चवॉाँ। &छा एजाहापटा९2त6 पाता गीर वार एछाए ७ 
छं।व्ुगाएश्याब उद्गंपांशा ॥ #काइ(वणव, चि च6ठ भीदा ए69ुगरा0एड2३ उद्या।॥ ट2णार व विर्द॑ध 00 ९ 
ह३एट 35 ॥राव9ए गाादांवप्रव७ ०00एटाफापु 3 ७6९ ([ग्रोर या 35 वा एिवाग]ता३वत वी प्रशारशातं बाते 
5789४3090९॥80905 7 ७9व१४८प्रांठा. 


प॥6€ ३०7एपाडा वा ० देँगागबाॉग॑ह ॥॥0९ 67 ।९55 ॥220705, ॥॥ 6९ए८०फ्ाशां कराते 
वाडएपांजा, जी गधों ए बालंभएटाॉफपरट, वी गाव इटप्रपफपावी था वी दिक्राद्यांध६ 5 
चंटीरश गात॑ 0९ एचव०९४१ पीगा बालााश्टापर, चंद्यांगठ 5ट0७ा९5 700, 7९॥् बात॑ 0३९० 
चिता ८णाएणं॥९ ९ टीद्ाव0९7505 ० 0णा (९86९ बाते डंधाते 74939 एटएटरटा शा) 37९ 
छिणात | एंॉडशिश्श। एला$5 ० एैदादांबौ3.,. चिंरए॑ंवी ॥95९5 ० वंबंगव ९४४७०॥४४॥शए॥5 धा९ 
९वण्बॉफ डांटी बात एथ7स्‍९6,. ४९ 7००९ [९ 5८९॥९ ० र्टावणावावाए 3०ा९एटारा। | [6 
गिशीत रण गैगा)3 $८पराीफपरवाी गा वौठ्तदर्णात ॥5 प्रांवुएट 7९804 €(शगाश॥$. 


छ#909%, 500 ० #89॥%5, ९ ॥9 वतीक्रांदताठ, था 0970॥67 णए €४99९४०7 
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वि €४8(७१९५. 


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गा दागी #णा रिवतंवएा (0॥9990) 
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॥९5८०९४५ ता प्रा दा50, 567८, ग्राफ॥00व2च् 390 50९0-८घए वो $छ४0808 . 
प्‌#१९६४९ ॥रणाछा5 ०82 45८7०४०।९ [0 46 9708-५॥]59व०घ्र॒चा३ 9९700. चिंप8७०॥0॥72 773795८79#5$ 








8७650078 87090268 ?क्षए५874॥#8, |(७५॥0स्‍8/0॥7 870 ४|६५७ ४28॥(9॥ 


० 9#4ए७8, बं29१च9५७]8 बाएव॑ 
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दा रा ४॥९४ 'न6प्रश्वांठ 9९१09. 
रि्राा९त गा एजाह! ००0009+5 ० 
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बा'९ वएठापदा एणॉा) ठा ही 
0९०पांफ ० ।९0[275 800 607 (६९ 
वीप४734075., ॥॥65€ ९४ वा ' 
(2९ीद्रा।ए।फए। द्राांशाट टाश्वॉ0णा5ड 
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07७50. [॥6 ॥0द९0 (था! 
वि९ जाव 570 धार १&॥लत€क्ा0॥ 
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9९7706. ॥॥९25९ वपएडञाबरा26त गाद्राएडटा905 छा दिग्यावॉाप्व 7९9205श॥7 3 एांवुएट बाते 778 
€/877925$ 0 गेंद वा. धगाविाप्र 50९ ० वि९ फुवाग्राएववे 3॥0 छठफशा ॥870527क्‍5 


7725८7४९० ॥] 9743ए३730९।३७०!३ ॥0474, 
जिपतपछता९, नएाएीव 20 ०67 ॥8935 
॥टपतीह ९ जिवा॥३उ5ात33 ॥7४5८पाशव 
बा९ ९वृष्बाप्र अतनीह्या। 707 ९ एणाा 
् एंटण 0९6ांगावबां 520005 ० 97076 
९ चिए४5072 52000] ० श्राप 4. 


॥ 45 ९एंविशा। #िएणा ॥6€ 300०९ 
7९एंश्ण धीवां ॥ रिव्रातवात8 8 87 0णिी5 
974707560 0७५ [2  वंद्वांगव॑5-०९ | 
गाटा।९टपा९, $2०[०एफप्ट 0 943व१8795 
0९6 (40 02 द्ष्य#&€7/९४, 3९५९(८३॥9७ 
१छएथ्बंाद जाती ॥5 0जएा 35८९४९८ ०७००४ 
गाव 40४4८ ठ[ु)[0302॥. ॥॥6€ एस्‍0ठवराएवाव 
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(९ए९४०फ९७०॑ ८९€४ऑथ॥ 59९८वां ८)43730027502८5 
गा बाएगजॉसटांपार, 50फएौजपार गाव॑ एवोाएंंा5 
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छा 0००7#0प्राणा काली वंच्र एबाॉ€ॉए द्वा0॑ 
वांजीालाए ॥सकपद्माोडार मा इज, 


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जाऋएश0प एश्षाह्रार 07 उक्षाप्राठछध 00 ।5 
602 ४ 50एप्त ७4 - 5 छायाहः 5टतरष/४4* 


77.7९.५७.50एरातंगाव दिवांब्ा 


[5 एं९] |0एए॥ सै ९ 0९ए९०ड्ाशा ० 6 27९00 40702७४० 0ए चिंॉठशाब + एलटी 
प्गा३९ 0 02९ ८९0 वद्यागांधा ॥07 या एा जां३, ४ शा््फ्रयांश्वे ७9९ - बीत गण कैल्दाओ गंधाशं 
कि) वींड 0णा 6 फ०ैपा 6 2059९ छा ७शाप्रा।९5- बरींशा शी, व 6 एक्रोंटशं [0986 ० ॥5 
28830॥58#70शा 3$ 8 ॥क्षींठुंगा तर ॥5 ट्ाशजाः बात पाठतुशफ ( गा0जभोए ० क्षापद्वाव5) 0 ए55 
टशा।7९० ॥ 'गिैंब॒ती)930९59, ध्यंति 90 प्रपटा९ए॥ - जाढ९ #ण्पात शि्रोगच्टा७ ॥ 6 0चाएु१- वा 
60% ० प्ररश॑रशा जरा 2वत९शी बाा0 ॥6 5067 बा०्फोत शिक्वाव की सिवा, ]6 छिपाश' वीव0 
०९९॥ ३ संक०००५ 36९ ८शा९, ़ाठछ 3५३ ७३५ 0०0 86 ट्वावादों 306 70008 ध्यंधं) 00॥9 #00॥ 
पक्का ॥ ९ 09८४, 0 837फ्न्‍्कु8328 ( 07 70469 370ग2टी ॥ 50फप॥ 0ण॒ुंबावा) 207, ॥07॥776 
शंब ए&छांए, जाटर ॥उ6९€5 एदा0तां5९१ ए।2 85ट९४९३ ०0 गवांगांडा 35 एशी 3५ 5 &( ०0058९0(फ 
#णा ॥6 ५९7फ्र 82९/007 (| ॥0667॥ ॥729), ्चिच्नातिपाव ए७५ 3 70048॥ 7८९७5 ॥] ७७०९ ॥0]9. 
प#॥6 जाए 280९5 व3त0703ए ३5९८70९० 0 ९ 224 [िवव्राना35 490, 0ए 0 द्वाधु९, 7९९ 
[०८३९७ 9 ए।गि खिब्पेरओ गाव 8657, ० ए८॥ 385 72599 १५ 0िचा ॥०0 0९९७ 07) 8900॥94 0॥ 
592९ ( 0]ग्राबी)3, लैजा]वबडात॑॥9, 5परात्रागबा]व गाते क्राधांवधाता।43); 726 (597र043॥79, 
(जापरीपावाब खात॑ &ाग्रातर3) हित विंवशांतव्फुपाव; [एछ0 रएब्टी #0तए पएबागाव5 वाद चावा। 
(3567). 7॥05, ॥6 (53988 एची९फ़ 02८३९ 6 जरया99 #0॥९ ० खद्वंगांडा), एच ९ एवॉ[0ाव6९ 
रण धावत0चहगाता ॥90 6९१, 05 तापिशंशदु 7शांद्वांठा) [0 ४४४४7 उतार णी९ा९,  0प्रंगिव 70 
दिव्ंधड80, # एच पर 8 753598ए2 ८ै६४४४।॥८ ॥ 2९४79 40 चिंएत45९ए४ ॥765, 3९50९५, ४७/॥॥॥ 
#70098773993097 35 (९ (9३०८० तंब्रेरट।, ॥ ७३५ 00एं0प5 वादा ॥070670॥ 80837 ७०४ | (९ 
एग्राठुप्दाव छा पीर तुशएएए रण ॥5 गाराग्ग्ञाप्रशंटवां ग्राव टद्ागरांट (शादापा९, 5 ९वाप 90352 
(378 ०श्थरांपाए 8,(00. 208 एश्शापप 8.9.) ॥90 ०९९४ ॥॥6 पग|णांएठु णी #496४ 07 5 ॥०/९७०४ (० 
हा 20765, गा7075 एंटी [007९7 30प/6क॥ तब ८९ 0 ०0ग्राशब्षात 6 ध्।९०४७४ |ं४0708, 
॥छव बाएं राप्रागरभाग॑ अंधु्लात0आ९ए2, 6 शिज्ञ वााएा बाणा की (४5 7९छुआ0 45 4॥6080743|9 
ब३ट/926 35 पता ९ ९ढ्वेश।ए ० छिीव्वीवगीए, 0 ी९ 96 चिंवपाए0 9॥35९, 7004॥ 
टशापंशात। 70ए४६ एंटी अ/रशारत टाल्बा गी॥९ 6 ए2९ड४ढा। 2९८८० 6 चिद्ञैद्याव॥।एव 545 ० टरब्रडटा। 
मैवी/ब ए०च४, ०जांग्प 00 258 ए० एशाए 90॥॥6 20725 ० उिपरठेकाड ९छालर्शााबाँता 
उशीहा०५३ ढती02५, 40०0-८७ ॥.॥06 235९ ७ 0९ णछितर गाते ग्रबादंगगीए 50 0पा 97०9ज700व579 
० 99098 ॥7050$ ॥॥ ७070 एफ्लाएट/5 ॥ फिशंबारशा 7680. 50९0579790403॥9 व॥0 
बराट१९००द्वांटवाए, एठ लिए: डांद्रातं 0पा 7रचक्ाता।ब #6 बार) ० पीर ढाश्वा 6572९5० 
गिक्ा। बगांधांग्रा, #णा गरठरवीढरा। 0 59प्रताढा। तितांव,. पर गिड ७६5 तिवां चंधांगांशा। गरा0ए2०0ं 





+(फरगाक्तारच 5 प्रिल0तएटस्‍67फ फठ्कफलशा छा 97.,थिव॥462ए६॥'5 ७३9९7 ०0 - १९०७४ >300एश#९5 ० 
बैद्या39 (४०९ वाइट४90णजाड ॥ धाएी पिठतेव, _ 
+* 87/6, ५ब४०१०३ /#फएगाापढग5, 'रच.8॥./ैगा।वा) (जी 50९, ैपज्री०0०ण0०, ४०३४१४५-600 004 







22070%22 0308: ४ 





दधिछ्ाही 6 दशा वात 70प्राशड गत 5९०००१ए७, ०छांत्रठ 40 प्र 70एढी दात्ै४३ए०ए5 83गटॉ(2 , 
शिकप्राएव, ॥ ७ 97652 फ्राक्शाता रण छिप07थंड ल्िशांड 9 05 वि क्‍ीपाए शाएंर वात॑ ७ए (6 
585एची३४३०७५ 5फैडशयप्राए, ए्ा० 7एोश्त 07७ ॥8 ०४४ फछा ए 50णीस्‍श+7 व, 2०४79 08ठग्राफ्रैडार 
बबिंधांशा फ्रापाएराफए ठफॉ्व॑ 07 7९4८ ० ० ॥6 विदीरजन 50पी ॥ वा पिंठतेप, क्‍0 टाइकट 
[509 27९, ९७९४ 3६ 60०7 ८९५ 


एपांगपह पी शैशी०डा ता725, ॥68 ९€डञए/2९$5 ७३5 इछाश्वप्र 60७70 0 धीढ एटा दिकंडाव3, 
पितिश इ0ए७ी) ० शापली, था ी5$ 0णा ढवाशाशां, 6 ॥0692000९7 लाशी३॥॥5 ० (7००9. 
ए70फ8, 348फ्रव० व बयां (िशागं59एॉा० एैंबा5 जार वी0फ्रांग्ाप.. ॥95, 6 6९आवद्वाव00 208 
० ॥6 वाशाशद्वााई 357 एपडाएशव 0पा 8 पाठ तंंभाविटाॉ।४९ '३220070379 शठा€' ढ ९ 28॥6% 
99356९ 40 ०७९ ॥06त॑ क्रषाएणीशढ ॥ व, 707 370-200 ८९४एए 3.0, [0 वा#-5ध0 <श्शांपाए 8.0., 
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४05९ 60 ढछाशवा व्िा९: जात शिैकश्ाा ०णा 579९टांगो वीगाठज5$ ण्णीत बेगाधांआ, गा 00०९काडांबा८९ 800 
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5९ए27थ। #907९0$ 0 प्रा] 70660 0 28ए९7॥ ४९९१३ 00 ॥॥6९ 9297९ धागी 5 ० (भर 0९९० 
5067 व ठा॥ओ।! ा60 370 7९८शं०2० [06 ॥0॥7579[075 ० ॥6 008 360९57॥67 एणी052 5९7ए४८2५ 
एशा९ 50 7220702९8 ॥॥ औ0/ 52700९0 722003$ ॥7 श्री ॥80 2078 [0 9९ ८8॥]९0 ९०४ए 'गद्धा॥- 
छिग्ा।॥' ॥5८09075 ( 0 ९#००णावागदु 200 क्राशोट्शाठघए ए75टफिाह ज्यींटी) 7९वगंग्रव पाए, 
[. शिं्वॉ0800ए9॥ 85 3 गाद्य॑ंण 5ट०१०ंवा।ए टोगाएओ), वैंद्वाफए छा ९ 7000 5॥९।६४75 ० (0४ वंठ)8 ॥07985 
॥930 5 दात॑ 5८७एाए/९०० ॥वीगाहेगाव5 वी ॥शीर् णा ९ 00प्रार्तश/ 80९5, ॥॥ 0९ [27005 
8प05९९१७श९॥ ॥0 ॥6 विश 0९८ए0एब्रांगा३ फरावड5९ वितट20 ९४४7. ॥॥69 80 3/50 0205 50007920' 
07 ॥6 ॥हा गी057 ० ॥९ ८३०९ 0एा ह€ 70765 0 769 - ६ 'तक्ा॥3' टा८४०९०१ 0५ ४28 80॥76 
प्रशा॥ए, [॥05, छा 7800 एव ९क्।|इचारए ढटगा) 00 ॥90९ ०7९० 6 ॥98०6॥ ० ॥09ॉथाफए 
0 65606 ॥25९८ €द्याफ् बेंब्रातत 3४८४(८5, #प्र८ 00 गीढशां। 6णा क00075 ० ८79 ि ॥॥6 
95५९७४5 90 ीशा ॥800. 


वृक्र& #भीड 00 णौशा फ़था5 एा एटा 5000॥6॥7 08 ४9९7९, ॥५5, [0 ७९८ 5५०5९१७९शा 
80 [7#5 ९७४9 वागाँतावतप गरावारंड% छा खाद ट्जॉपार; दात॑ दिवाानबद 022876 ९ श€फा 
05परॉड॑ंग्रासा।[ २20९ शी€ा९ बदांगांधा एव5५ 40 7९८९०९८ पिगिश 0ावाींब) दश्वाग&॥ बात॑ 78८५७॥९ 
एणाऑस्‍6क दाठएणा। घधा0त67 ९ 5द्याएु45 | ६09 गाव वद्वांबव6 जीरा 50986 9०४707458९ ४७४५ 3[90 
०९५४०09४९० 67 6 वबेग्ाव 7शींहांगा,.. 306 ए९ त९ठे जीती 76 दिशा टीक्एांशा, 0ग९ 
वराए0/क्ां एजेी06० छत ह॥8 ९79 956 ॥ बद्याओं 720॑प्र ॥शचा९त॑ [0 6 वंगातव [725९0708 ६१0 | 
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शााढत 8५ 6 'जिक्जंत! इटचएा णगाला।]|द ०पा ॥ण॥7 पि2/ै॥00ढ7 उिवंगा (प३$९४९ छा ए870प5 
शिगंधा! ॥52छञा075) द्वार जाली "एगतए ऑठफांत ॥वएछ७ ८णरागशाटरत हित 2 शिव (९ उव॑ 
व्शाणए 8,0. ॥#4गबप६5३, ॥ 5 अंत्रगान।९१ ७५ प४ छिीवा।फ्ाणण 509गाच् 7४॥0 वश 7९टठ ते 
ठ॥60 0 शा टशा्रपाए 8.८. प्रकरांटीा 5 707 बाशत 09 उइली037$ ० पशाएओ! छिग्ापां 38 ता व इच्छुर 
छा त९एराएफ़ाशा छा प2४ रवीएा बंगाओ। पिद्वर्तध्न उंांगव टवएटता ९0009... व दिवकलवांदँ0, ९ 
5ज़ात7076 ए४छ॥5 १9॥ ९ 5वद्वां3श्चीवा3 (765, ० ॥6 ॥शंद्) ० ४8॥हए्प्राएठ कवर), व5 
5७९७३ ॥॥ [भं5. जंवाव्ुपवां ऑरएडा ५ण5 टला एजा) तर दिव्या बात वक्कयागिव्रवंप, केवावणंट (0 
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ब90ए९, घुछंआ8 [0 आऔ०ए परीठां बगागो। व्गाद्पवदर बाते इटांफ। वैवत 2 र४त९99 वात ॥6 
त९एश०एा7ए ४39९5 रण 6 छाग्संवरीबा गिामोए ण वबाहु५१५९५ 86 #ंद्या॥बत0व बात "शे०च७० ( एव 
गिंदांडएखीवा) 35 3 ठा९ ७९शंगशाः के 45 गती!जशंतिप॥॥ए ७ इउटफ़ा थाते ७॥00९॥25). 


बढ 5गादव 7एशा०तव ् वउा05 एग7048९ ८०००१ ऐ४ छशशा हा 2.50 ८श्शापाफए्र 8.0. 
0 80०एां ४ ]00 ट्शांपए 8.0., ००३९ 0त ४९४ ७ 0९ €डए उवाणं। ॥60५ टी59र67. 7॥6 
छब्ाइवब विव९5॥7 जीतवुएब्ो 2णराएडाइवबत गारव0फए 02९॥ टपाशा ॥ 72 ए९छाशएत।ा 3९5५ ० बागी 
ग्रब्तं५ टबॉटव 35 (छाहप हगतप, ज्योति वड एबा]ए ॥र०त9 टषशा/९ बराठणात जिवागावएएा) ( बालदा 
पृठ्ुगवण), 7प/९० एप ॥९ #र्प्रवड था वी९ 5276 9९00, ०एश4७9फशआग पएश॥ 6 ांश 9 ० 
[6 ९07 9852९ 0 ढच्यंगांशा) ॥ वरायी ॥400., ॥॥8 द्वार्य 70९९६५५ /ैएए्वांफ्रवा ० वठाओ। ॥छाह्वापा९ 
एश।० ध्र85 3 ०0गांशाएाए0ा99 ० क्षप्रगागा बिल्व॑पावा 60, ९ #्वाफब लांशीया। ० वफु०पां ॥९ 
276 टशाएाए 8.7, ७०७5 ॥06206 (96 9706फटा ० [5 जीव६एढ४| (06फए वटा --5 7 व्या]2 ॥52[[ 
50682&५, 35 77९वा76 गाव गा वा, 07 ज्रांगा ९ 4०77904 ९दृ्णएठांशा 45 '३०७००७', 7॥70४$, 
॥ 5 5९८०॥र्ष [49९ 0 झा ण्यांसी ॥व60 5छारठ0 #07 ाञदतवंप (0 €द्यावाबव ( ७ी)॥॥९ ॥ 
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तां$ 0फ्० 7९८0705$ तं९वतवु ता रं$ 3प्रतृततांडं व्रभंईडागादाए बजाए पठ। गाए आदर पवटा 
ग्राफशाशर ॥ जिद ॥4 ज्र|ंतरव) 540935 ॥96 937९० 5 0050९ एच था एशंग्रवु ॥0९ 0प्राद्गातीगत॒ 
ए075 एफ ठ99्रांछा., ॥॥6 00 [३५९ ० (59९75 &00 ०00९९४(४७४४०7 0 उद्यात5 ८९०४९५ ७०७५ 
जात तीर शित09 ए (द्ा65 ॥52९ॉ ॥0509, ( 707 ०१000 8.0.40 ०.१60 शा 8.0.) 
व0 ए्ञ९55९० (6 रगाब ॥शीहांणा जए९ी। दााशालारत ॥ ॥6 दिग्ावाब३ 50] एज 5९एशवों 
9ज्ञ8865 ० बि॥९, 6४ ॥6 ॥६904770995 ० 8373085, टीव॑[|एफ्३३ रण छिठ्तक्षा।,, रिव।वहप।३5 
रण चिंग्रापा९१व (एी0 प्रशा९ 06 फ०8४ ढोडीग॑ंशारत एगा05 छा फ्रांड गीत), )बांण (गेपाए३5 ० 
४8879 (07%णा9 धिशाः गरी5ज़ाबीणा गिणा 6 ९क्यींशा उिब्रतंधगां (900 फ्व५ ए्जी0 ॥80 ७जी। 8पटी 
(९7९5 85 6 उ5ग्राताव-गावढ।वफढठ वा बडगराए5ए३), िप्रत्वाएा९5 8९ ९ इ्या85 ० एद- 
?00०पाटाआ३ (नाली), #पएव१5 री ४६ ९०वडावे दृग्रागवतव तीडा05, 40009रण5 (8९ ०ा ध९ 
7णा[टगे बाएं टजाप्रागे ॥0720॥, | 5 एव छॉौ356, ०5 00 06९ ०0765 टणाश/शात005 
9गा।टव ९०गारटा5 एशजफरशा 6 व्वाप्रगा (79०9३४५ बात॑ 6 56प4-7448ए०8 टाशीबआंत5 
7608॥] (7006॥॥ >िड्रप्रावांब०30) 50 बात॑ वार ०07रवपरढत एशएटशा ९ |०तं९शा 3॥0 ९ 
पि०५५5०)०5 ण एि्राबड्थाएकब, 3 ०ण्रपएणंतव ०ाएदी 2095-तीइवा०णा 490 3]50 48९0 9]8८९. 
7९$फजाावु 9 पए०एढछा 2९९८८वा ८प्रॉपार्दा 09365 5९९ 0 #९ 0फटा 76०९७ िवाणवॉचाव दा।।ं 
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पतिवीद्या शगरफ़ोर छिपा ठिणा।ते ढ क्‍फ्रा0ववा जी #ैत0ा। (बाप: छत #द्ा(वफ़पा 0डॉ50 ०870॥780०58, 
ए०वंलशांततु 0 (िउ0व8609, छि (९ उंद्वातव १शीठुठत, | ९ जि विद्या छ 95 ॥6 9085९ एमए 
७०७६ (0९ जि छ88$5९ छि बेक्वाग4 770ए2॥७75 ल्‍9 50 विठ॑व, सवारी पिठतय गत ०ावापढ8० ॥5 
९ग्जीशा एिज्रैशह6छु टगा€ तर ठद्वागाशा गर गराएणांवाा 00 शात ॥९७ ८९शा7०३, 8६ ए०72९३७ 07 गिरा 
शी०४ (एशाणएटशा 00 2१०१ ]3॥ ८९ाएए 8.0.) 


चंबाशा ॥ 6ढ968॥8 ॥40 ॥5 ०॥४र/श 5९प्रफ़पएब। ॥8500 7) उि्क।)गी 0 ठग्रगानार७एशव, 
35 पंपएर्राप्र 599९6 वा शिवश्या०४६एणे३ गाते (वाएबांब, छपी ॥ ग्रापड 926 उछात वी ॥ 4क्ाएों 





22.4 दि हे 77% 2222024:022 22 20000%00 0:00 200220220 228 20002 ३ 22 १2८ डे: कु हैः 22] ह 
फितेप, ॥ फीड ढ॥69 एशांत्व रण 2.2798 ८९छाप्राए 8.0. [0 0% ट९्शाॉजए 2.0., त0र४%१४४ हाहपए 
बंध टकाजंधबुड 0 डंतार कात॑ छातजा225, ० ३९०९१ ३ प्रवीहाहेठा385, परैडाएडी85, 7858 €ॉए,, ॥0 
(एठ्माउ्रां8 बटर्परफ़ांप्श शदेत॑ >रशा साएएा) ( ९एसशा ठणादों थी ९ ८०९एकों छ़ला॑ठते ग अँगाा4ांड8, 
(नाजएच5 गाते दिवडफ्रंव तजाणयालांड, ० एज) 68 702७०पा बाते इअंत्पटॉंपानंं [9985, 29 
पज्राए॥0९6 5९एशर् शएबा028 ् प४ ईणागद्वथ्श्एशव 5८परफज़ंपर,. पश्ांड बशटा ग88 गा ऐशटा . 
इद्यॉडडिटाठाए उएलीएत ० रफ्ंबागर्त परछां... #ाटोीभास्टॉपा॥2ए फठ०एट2ए९ा, दिगाशदाॉंबॉब्त 4005 (ड 
एगेग ॥ प्रश्णा।ह 69 परणाएगशा$ छि वंश ॥ ॥2 एी0९ 9९700 6 0॥6 ३९८०० बात प।0 
985258 ७ बेशा3 ॥0एशाशांड वा 50प्रग जिताब, 870 205९ #शैब्व०0 | बालएटॉपाओ डफज्४ 0 
पृद्याजी घतप एशवबा ८४०७०, | 


:९,०,९,१,३५०,०.०, ६. 





रा मिनी पर 
ऋष्सापक्षाधार ५ 


05. 8.४. पिद्वा88॥775 'चिएश।॥9५* 


है ९ 0७5९६ ॥ 5 7९८९55६४५ ६0 टांठ्एफ़ शी पीर ताएं30॥9 ० (773(58 
0 50प7 बा।0 छठी 5 07 67 6 इ8४ छा 207एशा।९४॥९९, | 5 ८0णावएए)0॥ 707 
दिखावादरवापठ 5 ५2० 35 पी€ 8९8 ८ठाशएांडशाव पीर 9०5९४ 4दि्ाशशावात रडटाॉप्दातठु ऐ९ ठांत 
5०९ डावा९, 706 770 रपरााशा|ड ९56९ 657८5 ॥306 02९0 ८0050९7९6 ॥7 8 ८7070064८6[ 
गरावाएारा विवाद धी९ तंज्रावडइां४5 3090 धा० एणाऊंतंशबाॉता, 


8:£206एारट85:; 


पड ठांतवांए) रण खेगास्‍ब ब7च्ी।एटापार च 7600 दिगाआंबो३ 5 हतती प्राए८ट८9॥) 95 6 
ए९598९25 ० 0९ ९87 9९४०० ॥5ए८ 90 ८076४ 0७9४ 40 छ७. 575 #छएांध१९५ ९८०7/९१0ल्‍00749 
0 /6 $0[0०प्र॥ ०७ 3#50790809फ 0 54ए४70९6०0३ 3०९ 70 ए9९९॥!॥ 0पा6 ॥९7९ $0 जि 
६०९) ९ ९३४7५ ्र0णांट €एड४ट३ए३४४०5 एछाए। ९जि। उद्यागण्वीड03 स्रीचार९ 4५ वा एगठबापहुलणा 
०09ए7०9७७7 206 ऊद्यागादा 5ए९€ 7 ज्ंरशंत९एत वाए गावषपाप 9 ऑपटॉफपारट गीर्ठा €वा) 0९ 
85502८4९० शत उेंठी॥50., 0४2ए९१, ॥ 85 [0 0906 ॥060 वकीवा ९ ७7॥0५७॥७९५ 3870 
डॉपटापए2५ 0 ॥6९ छिशिशा आँश ॥4ए९ एश/0 ९८ शंपत06० वा (69 3)6 ९ [वां 9९ 5 एटा 
70 9९ ॥9 ९४८३एबाश४८ं, ॥॥॥5 )25ए2४ ७८५5 शांति ९ 6045 ०एण 3979ए958 ७० ७९१९ 
दि0णा (0 02 9870795 0 ब्ंद्रोागराहआ) 35 श्एंतंढ00०९० 0५ पीछा ॥752८स्‍]0/0॥5. 


४9708/४823 ?हार079 


पक €डां४वत26 0 वेढ्राआठ शातरए0 65 तप्ातदु ह९ 9९४00 0 ९ छिच्व5ए8$ ६805003$5 
क्‍5 37799 €९णंबशधाएशव 09 शा ९एंहाव0॥5, ॥॥#6९ ९व्रांटड 7€शिाशा८९५ 08 छुागा 0५9 98 
॥404॥705 तिातधवु /0 3 ठग इदांता 5 पाते ॥6 निद्वा35 2099९ एंच्वां2 ० (| प्रक्रेविएश्ाएव. 
[( ॥षश्या075 (05६ 6 छ7590९४0 एचदु९ ॥॥656/973 5९[07626 ६० &787943. 079९४९॥. 8 
॥€7९7९6९ (0 9 बेंगा। शराफ्ञरांरड ((कब्राफ्रढ5ए99) 8 लिणात॑ था 6 7९एवच्७५ु7० ८077९ छ90९ ८ां 
चिएंतु259ए80797,7 ]॥6 शाड़ाफरांता इॉदां25 फिया चि8659फब्रायक्षा। पुवएट व ढ्राठगां 07 ९ 
$द्ा757]573, प्रु००/४७३७७, ब्राएीबाब 3700 9॥56874547$६873 ० 6९ (क्ॉफचा३फ५३ 00369 3 
छतस्‍ावाफएबाबपा, औिपाशा ॥९ बड0 तकाढांएव 07 8 ९7९05प76 ० [€ एकब्राए3/४एठ8 ०7९ 
प्रोश्वांग्राब ए वबात॑, ग5 26व479ए ही)095 चीव॑ 8 30०0०ए४ ए/शआफ़रबा३ए७ ४७5 ७) ९१7०प६॥ 0 
वि8ए९ व €70९005ए5४९ ठो50. | ॥९ 97९ए६७॥॥ ॥5ए7[907 ० ४॥|७४०७ 9ए8 'िभंठुए३एवायवा 3 
7४7९7८९ 5 97902 0 छजह्कैडां 8९ एदीरढार व तव[ठु९ 0 वंगरर्तताव ए556 7 थितुर$एववदा 5 
सिवोच5 वोइटाएता ० 8 7९छशकी एटा डीवां०३ दावा व विातह ऐोी 3 वीता8फए७ )) ग27079 
+ छिर्तार5४० बात॑ नि९्व0, छा. रे कै।लंशा। नाब्ाणए & #त्ा१९००१ए, नचिएड४0४ (09९89, नए४०2-०70006. 





०१०९५१५: 


्॑ सिड गिरा गा शिवाठजापक 200 छाविगॉशत॑ 05 0 इत्रा7(5 ० एव्एक्राफक क्राधागापरात ब्ाएं 
#फटीओ 4 इादी4व, दिक्एंएवापाव 5 रॉस्एशाती ॥789गवां एश्डा वगाइटाफूशीणा ठिपात॑ था वथां39, 
7€€ः5 08७ छा 0 ॥९ बजा॥४6व छत गंशशात7३.7 00एज0०पडफए फंड 7श्शि5 0 4 खेबीाव 
शगफ्रो९, #ा0तंकि९शा ॥550907 ० ४ इाहए दिपु 7€िा5 40 2९ एठाआफए ० उंध्रशाताव ता 
एजला छिपा प्रएडशाला25 ० वदात॑ ७७५ तुक्षाऑ९0.९ 


पृत४ बितव0905 0एक्राठफपा धराइटाफीणा | दिग्शएडागओवा 8 ग08 रडफीली ० ऐ5 
ए0ं7 #८९०7काबु 40 वभ5 52८707 (86 किच्शंफ्शव एप 3 शाए0०, एशाव[ंएवोदफ़््क 
07 िंद्ापाब(5, ए९7फए परढ्वा पीट ए5802 (9]38025॥78) ढात॑ दरावातुरए8 छा [(8 ४०54॥9. ७५ 
प्राग्यागपु गा05. 6 (08४ $3॥९ ंगार ॥6 ३५० ठु8ए९ छ375 0 गाव]त43|5फएव वा वितियांफ्यी। | 
37॥0 रिक्वाउएबा शा ग॑ ैव[दादाव, 00. 8.8. 50फव एॉी)०0 ॥35५ ९ता९त (5 ॥52790097 
]45 5प569९8४९6 व! 5 #्रावग745फ्र० 75 3 श7096 6 उिद्यौषएव॥, 8५ उि्रफरशी $ . 
0९5८४४०९० 8६ 'रचैवाधभावावव, | कांड $ 50, ९ 0067 छा शलांगठ 00.ग्र्ांवब 5८ए०[/०/९४ 
90९५5 ०3८६ ०0 (९ 9९700 ० (६60977035 874 (0 350 €षगॉपाए 8.0. ॥52॥7. ि०ए९ए०९१, 0।. . 
8. 5प्रातववा3 )35 0500ए27९( 8 #$८प्रफ॒परार ता रिदवां बा0 िागरवबात वा ९ 5376 94९४. 
ए४॥९(९४ (॥5 एछ5 6 5८५|७(पा९ ४४०॥5779९0० व [6 देँगावगातवा|एव 700 ०€ 452८९9॥7९व 
जभरववा $ 706 पाएगा 5 6 वबताी।ठा त एपवींगठ गाव शा[ए९५ 0एि विद्यागदाव वात॑ 
रएशा खिवा]तएवका! 


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शिवा 2॥48790(९7585 [९ रिवशाठंदपरांठ 92700 35 8 0067 बुछ '् बंडाडईं। ॥॥ 
दिवशाव्राबं(9 .. तीड 45 बाए।ए प्ेशाजाह्रा॑ट्त एए 4 चिाछुर गपाएटा 0 वंग्ागव €फ़ांध्राबए5 बाते 
गा50 प्ुशाएा0७5 छागा।5 0 बेंबाब शाए९5. &श0०हीवश्वाओत | प्रऔ९त [0 एणाडंतेशा वाशिड्शा। 
एप्रतीर्ते एप्र फ९€ एशाए 7शाशा।0472९ छा वैंंड ठुणाप 33527309794. * [१९ 5$ 5० तै2४८ऐशपे 
5 & णि5ठएढा/ 6 5५9307809.7९ नए करत ब7एणाग॥6९6 6 दि008 वेद्ागव इतागां उच्यावोशतान 
55 ही रेबरएी67 (607 58 507 दिलतदीव॥3.77 देतक्लागात ठुठएछ फिशवाी (गरा्रोणाई ० ॥6 ते्8 
शा॥छञांर 5 चपप्र॒पाव॑, विता (ए छू 8 0००९१ बंग्ंतव बाएं ॥8 60 ८णायाताच 5 रंतठ74 . 74 





शिगाए ० धार रिवशीबात्एांव (९एत07065 8 शिवां35 छा 55प्रातंचा। परढाए आअंबपारी इफूफफॉशिड 
रण चगातांशा, 070 वो। पी९5९ रएंतेशाए९5 #्वॉशि॑(धदा ९३शाग्राबां25 पी ठॉशवडां जार वात छा पीट 
409%] 7०एुांबाँला छ पी९ढ ए7९टटवा वंपाताध् धी2 एछल03 छ९7६ ०३5. 


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शिग्रांद्ाटठ0, वॉदिशीतर5एव, /(०099343, ठिल्यापपा, ॥ ९ ए/2९5छ७४7 099 द्रव आात व £ि॥078 
॥) चिंद्लोह्याव॥ातव एरा20॥ ४३5 वैटांपव९त था व2९ दरिबशावपांव श॥एा2९, ॥॥6 ]वाबव शा वा 
रिब्राउकेवव ८0ा5ंडा5 री 9 धुवाणीग्वा3, एश्ब्रते्राएडीवनवकु॥आॉंवि, दावा, उकीवायतैव99 
गाव ग्रपंदधावावगधातं॑व099, € ठुबाणाीदारिव 6000 |बा0 35 ६ गिर धरायदियशरय। रैस्स्याथ, 
(097०ञ्ञॉँ2 ए७३॥६$ ०0 वा।वा३(5 ॥480९ 0€ए४३॥६०8#7[35 [0 40052 १8/६508 370 ४७](5॥5. [€ 
इीवा]9॥0893 5 उतप्रत्रा४ 330 385 0प7 ज्ाँवि$ड ॥ [6 एशा7९, ॥॥6 शपौदीवरा)॥)96593 
[95 0७€९॥ 7०एंतं९१ छत दिगंआीवहभाव25, 7#6 दुवाणावबदातव 25 3 तएाएयान पिंठु28 
कॉपी, त 95 बाजार इवाणावदा]वब ० गी९ शिव 00 ॥ए९ ॥९४ चिंटठुपा €॥ए७ॉ९०. ॥|6 
०0परॉटा एवा।5 वा वीर एछरडॉषशा। 300 ॥0/शाा। ॥आंतं25 0ए९ गाव $८प्रा9प7९५ जोीली ९०गाी[।ः) 
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[€ ० है0909 78758 | (8]4-874 8.0.) ०७ 'दकीह्ा3 | (०. 770 8.0.) , का 6 
शंज़ाहञाट श्वापा९५ गागी। टशांपराए 8.0. 5९८5-00 0०2 723907370]6 ६07 5 €॥79९. 


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0 &॥09गीगएबाहीठ 26 एफ 897॥258 ॥7 860 8.0. ॥ #95$ ७ ठुधाणीवव।॥8. भााॉ०39, 
इबजीवाब्रातबऊब बात॑ व 7९० गर्ंिववातवंव93, 2 पयंवुप: श्विपार ० (05 शागए।ट 45 [6 
$ढा 599९6 ठु30॥547व73, ण्वांटी [द्वारा 02८2॥९ 3 पांवृप९ रिवएः९ एा ॥॥06 0953 (€॥72$ 
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3]50 39 [४० 90॥6 वबंबद्याव35., ९ गपंांधिवराबवा0494 $ 7९2टोा९0 धाठ्पवा मिंहत रण 
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वृकढ उबांगव शाफ्रोढ वा पिवाट5ुवी गो रिएा छाप छा जिवाफठत तड८ ७४७५ ऐपी( 0धा9 
वि९ एशा00 ता ांशाउ वी, एप रिब्रशाव/बा व, ९ चणच०९०ा) ० 05ग्ाठव ?िशााववी उितपांवफ्फ्र् 
9 950 8.0. (१0०७ गी 8 2४९77९6 (0 35 पिंरा2प्गतव छ98), 7 45 6 एंकुठू2०४ रि950॥73पा3 
छाएंश |] (३779909. है 95 3 $ं|तिवाव ० एिफक््ांतेंश प्रशन्रा७ (एए९ ०ए९/ 6 ठठ79॥897॥॥8. 
8८प्रांठप्र 4 5 8 शधश्जा9, ॥॥6 गत) ठुआए॥967]3 ए 5 ९७८ ए०5 ताश्क्ा। 07 3 चंं9, 
270 45 इतप्ा९, वी6 एटा छ० चुबाणावद्ातव 3९ 7रटॉगादर्पाना, गात ॥43ए2 7९टॉवादुणीवा 
7९0९३ ब5 #67 एव।ें। [0 एवाॉ। एज शएथशाफि०्पा ॥0९5 गदाीटगांादह पार्2ब॑ एणी ० तिा। ७९९ 
प्राश्यां 07 €शॉव्णीआीा॥9 छिशाएरठिपा वशगशवाफब्रात इटाज्रापा९५७, पधांड ॥$ बॉघ0ठ 3 प्रशांवुप९ 
श्वांपार छा फंड ऐ्डअता, [775 ०22८०7९ ९णगठा था थीशर राॉस्एशाएी ८शाएप्राए 8.0. 


वृकढ $शीउएरड शाशएंर वा श्ीवठारए 45 ब्राठाीत]ढा डणारएटत केंशइशक्ष।, - 9 ॥7070 





29985: 22220002002 १५९०९९९९२९०८००९९: ०९, ५222 003५ 82 ४३०१४ 20228: 22082 ल्‍ 
2११०, 3०,०२९) १३०३३, २,३१५ )५४५४५०,०,१३५, अछि: है/०,९,९,०,९,९,९४०/३/९३ > ४८ ५ 2220000:000000000 ५2० 2080070288 2:22 22 225202%2: (0४ 22220 55 
शंवा0ाधंट गा ९४एटप67, 4 45 क्वॉ50 3 ईशॉपांड, 3250९5 | 
बाएं 3 रज्वाधा0ठा ॥#रवएडावइए798 


ऑफ 
जज 


#4३ धोधढर बराधीबाावा्वंबएबढ हे ः 


पृकढ पिराशिवाए5 एऐक्व्सी वा चिव0४0, (8 ८३७४ ० (९ रि85073(0883 0४/0795 


0 वश ध्टाथप्राए 8.9. एशाछताएाचाएए 6 ठतांद्वाग। ड5धप्रटापाए प35 एटटा) "€एगाएत॑ 


०हशा 0 किशा०९ है 8 ती6एॉ 0 दि0च 5 0कझ्ञाओं शिवांपा९5, ॥6 छुबाणीवद॥8 ॥88 
8 वी।र 8९वॉ९त िंटा।]403 50एफॉफप2, ऐरा उइ2एौए9 72५5 लठिप्रात ९7९ दरार (05९ ०ा 
रिद्राश्एग्राथ8, जिावबावए0९ावातब बे रि्रवागबएबाी.. 5णार ॥076 गाव $०प्रीफ़ांपार5 वाह गा वाई, 
$80॥द9870895; "७५ १९७9 5९४४४ 0 ७९००७ (0० [४6९४ 9९॥005 गा 


पृषतार छैगडननते वां उल्लाधपा  5प्रकतपाहुब तीनभाट ३९९वञ5 40 एढाठठ6 [0 धार छाए ० 
॥6 ऊिग्आीा।बपांड छराां00, ९6 ९ वाबाएं वी8€ 52प्रीफापा65 ॥) 5 ४92०. िं0306 


गाणाह पैदा बार तवै्याब4, एीग्याकाबञाबजाब, उरी, रि्राइएडाबी3, चिंगोथ्रएां०, 


ए80॥5रए७॥, छा 7॥९॥४€मस 5८७/एछएछा8५ ० रशाए ०णिए (व 985 


का 3690/0ा 40 68९ ३०००४ वेहाब (९79९५ ७ ९ रिक्शीाएकंप्रांव 9€ाप॑०0. ॥0979 
ग्राणा€ बा९ढ 350 ठिपात ज्रींदा ० 70 9709९79 802प॥270९०0. 08९ #6 छा०४३2९४/ 
एंडागद्षौ69 59९, पीट रिवडाव्रपोठ ०452645 ४6४ णपाते था 504 ्रोटशार शिषाडट 2० 
(86 बेब्रा3 0४ए९ ९€79९5 7४(४7766 35५ (ता 455, ॥0745430॥5 70 ४864979358078 . 


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€ 0796 इतं2 बात 2९ सावहइद्रांणशा छा उिद्च॥३एक्ता3 ०ा 78 0ॉग्रोेढ/ एडार गाठांफाव कार्ड | 





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धिगाचणाब, गारशा विधीठाध्वा359, प्रैं॥६99, ४०६5॥5, (बछापंी39वा35५, 5५0038ग्रेपां 
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$50पर|फ़ापा९, प॥6 धाफऊ।8 48 क्रंठगए ॥रए०भाए जात ताशरगांणा$ ७ 93. बाएं 35 ॥. । ॥95 
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१ टीब्ापटकडमएओ, अधीका&॥, छत) 9 इध80884., 7॥९ प्रपांतिद्राधतं3998 35 59982८00४5 580४779 
शाबा९९5 ॥7 €वच, $50प॥ बा)तच॑ 700. 6 5८एैफाफरड छ उद्योग बात रिब्रतंतावएलआत। छा6 
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6 €शाँगाओ) १8एछ4373, ब00075 वाद ९॥११०णगल्यां5. ॥6४ शोदात) शाएं४ ० ॥$ 870५9 4$ 
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ग्रापत्ाबाप्रब)4ब78, ी ॥985 8, $5॥973 ए.व९ 50प्ररीरा) एकल (५७०. 6९2 5 480 307०५४०. 
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एिब्राइएबाबात3 एऐ३७ती व शैगतदादां गा उिशेध्वव्पा ठ$076, व पयंचरत ऐकनती) व चिंवादारत 
गात॑ द्रागारा छ्््डती 80 50तवा गा ठ5प्री0प्राठुब वांडंट2, चैं०५ ण 256 बार वा पा भाते 
बा€ अंगराएंशाः व तींताशाडांणा$ बात॑ 6९595 35 209९० 0 6 टांब३शंट्व। एच्श्वव5 076 
गा फप्राती रात शा (9७० एं3०७५5. [0972९ए27, [९5९ ८०780 7८(075$ 509छ9 (॥6€ "०6५०7 ९०पं 
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6 6७ 597०806॥ ७ धा€ 5९५७5 ० ऐ06एबचा।, ९४6९ बार ॥0 09546 ॥0970/९४0(5 सं] 
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व्त्त& इधएएाब७ एछारा059 


व 5९एप७७७ ७ 92९एव०७/॥7 उपश्त॑ 0एशा पाठ एथा5 0ी वात दिव्वागब्रॉक+७ ॥व0 9875 
एज निगोशबनाएक बीहए/ ९ 0९:ा॥९ ० 6 (४गंफएव३ ० इऐरिंछीफ््यॉग, वाबताएा टण्याणटॉड 
वी 36एप्राबड शत वंडंतांडा, 0५ ४ए१९०३८९०१ 0पए किडांडिबंध्बाए०, जिका।वफराधावाद ०ा९ ० प९ 
श्वा।ए डंमड रण जीमंड तंजराबडाए धारफ एायवंश 8 ८87९ ० (फातवाफ़ाबणीवडसशा।) बात मी 
6009र0वा छा एड 8 गद्ाार्व 5 ०यमांहां एनद्रााबताफ्रफ्णधाब, धीरा 5 वेद्ाब इस, 


९१42 ५०८०7४१०४४ 2४५ 2 





5९एप्र॥व6९ए७ ही छद्च॥ 8 त९€एठएां 4943, नि5ड श्षा][धादा वइटाफॉणा 09605 ए ढग ॥7ए0९४907 
0 एडमली23- शिक्रल्डप्रारड2ी कक वार काशरा5, 390)9395, बए)ब7995, प्रण्वतीप्रहप2३ गात॑ 
ब्वत05.* धादगाद वी जावते९ट 3 ]879९ ॥७४एश ० द्वादार$ 0 राढ्वंडए३ वा रिप्राफेधावधुदाव  0णा 
ची९ छतठाओओए ० रित्राउच्चराबा।ल गाते 0 ॥6 रैश्याफॉट ० श्ाबावांब वीषधिवास्वा8, दिपु 
पिव्लाबटाीबा0ं/व व्रावतर पीर दावा रा व एा।चदुर निपाांडशीयोर 6िा व वीगव्रांवफ्व, नं दा एश्रवेवदयरनां 
8 इक0 [0 ॥980७ एपा। व ऐैनकडती 8 6 8766 ० ॥5 छुपापव बीती डायिबापच , 947 707 
(९5९४ ९फ़ांदाबफएगटवोी 7र्शराशाट९5, ॥ ॥5 ॥60 90580 0 66॥राफि बाप छा 6 गज (शा।०|६५ 
जा तपां7ह ५6 एछ९700. 


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॥ ]8 इछ्याशाबफए एटर९ए९१ पीदां गंगांगांशा 0९हआ 0९ट)ग्राहु ॥ दि तीरएा (९ 
नि०फ्रड्बा45. शत) (6 €४ांव०0॥5गगाराए ण वि९ एॉ|एलवदुबात 2ााए0व6, ह।2 322670 ७०४५ ॥072 
०ा 6 लिीधतएांशा 2ा0 00एा5प5ए४ वंद्राधांशा 5९0 3 इटोॉ०32८॥., £िए2८॥0 ॥07९7049 
72९( 7९८९५ 0 काका गर80९(024्ाव ९४०७०वी।]|शांड 02206 शा ॥ ]प77967 ९०5873|070349 
परांटा 380 2८ रीरढ एंएए तोता बंबांधांडय एव85 003॥ंग्ठु छाणणाव, पकतां$ 8 बा।एए 
"तशा॥ता5बाश्त 0०ए 0९ इ5टाफ्ातातगा ० छंद गा निद्याएं, ज्ीटी ९5 0 एप वएटठपां 3 
6077707756 एशए९९॥३ ४ वेबा)।35$ ध॥06 6४ 50एव्ंड3985. 0॥6 ० ही€ 7९07९५5९४३९९ 
बैगांधब (शाएर वा विद्या 5 पीर 5ावढहा।एह ठुपवे एणा 09ए गाचणावांदंव क्‍7064399व फि्यात॑धा 8 प्र 
ज्ा०0 ७७०७५ 3 गांग्राशशाः प्रातंरा वि्राधद्वाव 0, ॥ ]385 8.0. ॥॥6 ॥९॥9]९€ 9७५ 3९०॥८७९० ० 
परापाप पापी, 


लि०एए्2ए९2ा, 5000 देवाठदाठ वात पिता) एिवाद्ाड ०९८7९ 79077 ८९७7९5 ० 
बैबागब वाटगीएटॉफार तंधाधातु धीां5 छरचां०6, ध्रागाहुठ, था, चिंएतंगएांती९, उिापप्राप बात 
णाीएश 79980९5 ए९एश्ा॥९€ 0९गर/€५ ० गेद्या।३3 ४ 0५७९४ 40 ९ ए़ठॉण9592 ९ऋा९]0९० 0५ 8॥५99 
तिााव5 ० वण॑पराह67, गांड 45 एटशा ती5टप५5९० का ब्राणीशा 999९7, बात 4600९ ७९ [2855 
67 60 जरैठाएी दिक्लाबाव तींडीटा, ॥6 709 90व्रा गाणाप्राशा 0 सीढ एशातठव वा 5 
हञाल 4$ पीर टशनांपरमाप्रातान ऐलबकतों [0040०० 3 ७९7४509792०. 0पद्ठकी] ॥$ 0एच।४४३ 5 ॥0| 
दा0जा व€ीश९ए, ॥ 45 छइशाराब!पए ए०2॥2ए४१ ीठा वृए2९॥ (एस्‍ाशाशबंब्ा।406९ए ४४७५ 725007976 
लि धी९ एगाइग)्रटाजा छा 5 एव5चर्ती, वीढह शाह 0455वी ॥8 ०9एत ० दुरप्रांशी $एतगा5, 
70%पब्वाप्र छिठशा) 85 ४03ल्‍09707९. ॥ 885 3 ठुब्ाणावदधाव, ॥ जणोांटी छिपा प्रप्रधावा3$ 38 
इट्फां था आ€९ बिटाए[ु 6 छिपा बाशटा08. वर ध्रुबाणाबदुतीह ॥85 शाधवाट९5 ता 0पा 
9465 गाते 45 4 छु00वे €ह़ठातएं० छा $5छ87ए७र०फ४४7०७ 2[055. ]#6 (0४८7 895 653999237270. 
वृजढहार 36 गाता इप्परॉफ़ापार5 ता वीच्रीात9795, ए्र्र(५)85 खाते प्र4४85 फ्र९) १76 छा ॥९ 
प्रणापताबाजआांए, ॥6 ०67 ४798९5 4॥ (27७5099९ 87४ 'िदावातहां3 ए9श३:0॥, ४70ीआ)])33 
छब्चश्थती था0त ए0 रिहा5एच्राबीडक एिड्च्लतीड, 30 [6फए दार धारा 800 00 त0 ००9३९ ४८।। 
भाग ॥॥6 एब्रापरफ्रफ्ॉपान एल्नतवा, नि0०एटरफ्दा, पीर इटपााएॉपःर5 ० (652 095808 ०९ 
वरा/श€इए 


बढ टब्शाताबायावब रशाफ़ॉर्ट बा शिीवॉशों 9 बराणीश बापटॉफ्ार ० (85 कुरा०व4. 
हिषाप्ोाए वी $ दाठएएआा 85 बेंटॉइ्ए[अ सिंडएलांटलमल रएफिनाशेतारीश्कएअतस फैलता, 
एणा॥5ंड ० छ0 ए02८४5 ० ऐप्रीवंतदुड जारएवे 0च९पीरर 09 ग्राए-एशशंतड एएाटी दि 295 बात॑ 





्आ ५००३, 2 20000207:000:2:707% 54५०५ ४५४४०: ३ ४०३४ 20080 
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छाढडा, [॥6  घढडाशा। 9णपणा 98 (छ० ड09९9४. पृश० वरांशाण $ कॉबांत, 78 शब्डांशडओ | 
ए7०0चाठा $७7४९३ 385 3 907८ 40 पर शराए2., ॥॥6 इुब्तछी38त 85 6 ३3०४०(प९$ ०0, 
सिडी004379808, (॥86/57)4व 37॥0 कैंव॥3॥9. | 





पृपाढ पिल्लाणियौट्मएन ऐडडकतले। 6 36 |5 अवा08४ शाश।वीठः 40 ९४ छऐकबती # उतवाप्कों 
ठिएए ॥ 5 क्रांश्यशती8श8, ॥॥6 धा।र९ दुवाणाव85 ॥3ए९ फिशा्राव3, रिक्राइएडतादा3 सारी 
शिव, मि९ा९ 45 9 जंतं€४ एलटी बाव 3 ग्राधाधानाबात38एव छतांटी 37९ फ्ॉँया।, "6 फरीह$ 
876 ॥ ९6६वणॉा, वां त70एव॥ 6 5व्ाद्ञांब्कृएाव ९7९ 5 3 शाएं९ ता एशब्ावागाा9. 
5 छाॉँबा। गात॑ ॥85 3 गीं5 700० ॥॥6 इट्ाफ/ए:$ ७ $0॥6 गंध दा९ ९फ्न थ पीछ यवेध्ाशांत्, 
प॥€ $८पराज़एार ० एबरावः खातिर 5 ए९7ए ९९6ुआ 3॥0 औी0ए (6 ए]5ए्रा्वुआ3 ए0707408779 . 
मन०फ९ए९०, 6 (९चएछ९ ॥३९॥ 5 77! ० माही ठाठढा, ॥॥6 पराशंव। 9625 वा 5 छशत0।४ 6 
० 5006 ॥0९7९४(, 00९ ० फँशा वैंशापीरत 55 9 6 रिंडावतथादा। रत दजाएंपा5 
जैचाप५3 85 था ॥इटाएजीजा ० धीढ 70फप्रांटशागी दशापाए, 50९एशाफएफणा6 ंततद्ाट्या 5 ७४ 
7९97९5श९॥९४6 0०॥ (९ कुश्थ्३एना।, ॥6€76 48 दाणजीरशा गोशिय वाठए९ ० एक्ता।१ए०) ० 4० | 
त6९ लात 509795 6९ त62८4पश॥ 592९... 6076९ 507९ इट्प्राफज़ांपार ० एकत॑ग्रञावए४ा ४० 
ए९॥०795 0 ॥ग5 ऊागज्रे९. #्वींएए शी€ 5९एशांश्श। व्शांपए, 06९ एछाहरापटांता ०) चेश्यातद 
€॥79९5 000 ॥0 9९८०ा॥९ द्वातइक्‍ट टाएगीगा5ड 0पां 5९ए९०व 2 शीह्ा०ता, 7॥॥७5 ॥6 ॥075 
॥बतातवतठा ् बचंडावब 70) रफ्राशा5 ण्रांदा छलााउ795 शंगांश्त 09 ९ ९०79 2९क्राप९५४ ० (68 
(ग्रांडीवा शाबव छशातं९त 9ए ह।॥ी९ छशंत॒निण्शारी दशाप्राए्र 8.0. गा गठाती #िंदा3308. 


वृक४ 3007४ 5पाए९पए 5095 पीठ ढगाबव बाटगााश्टांपावां डफ्रेर 6९ए९०००९१ 5॥06 ०५ 880९ 
एोीवी तारा ॥सोाक्का०05 एप वाणेएशव रहा प्ृ॒परा९5. ?7९:3595 6९ वल्यी|श्टो5 गाते 
5८पछॉ078$ एछ९7९४ ८०गाधतठा 40 9# 7९॥ढां005. व डइॉ0ाएटत हुब्वाणीवठु8 5 3 5०९८४) 
साएशा।तठेगध ० 6 गंगाबह वटऑं।९९६5, 35 0फात॑ ॥ धवाफ़ गाव (९9९५5, 6 वं्रात98 तांत॑ 
70 #8ए९ (७९८०567 67 5८७ एछॉपारट5 छा 00/$06 छद्वी5 एपा 6000 ट्याू2 0 ७३४९ 5४ 
06९८० बता ॥ 4 धिा९० ए७०७ए ज्योति] तीढ धऑाएटॉए॑25- वी ९ ९बाए एलशाा04 06 4९009क्‍९5 
चिवेरणाव छएछढा& ग02९ ए०फएंदा एपा एए ग्ऊतएा प्रशति एशापाफ जौश ्ा85 ]॥९ 
एलाइएबाब9, तीव्र) दात॑ एलशाआएफलिए वीीादेबाव5 ०९८टका९€ ॥06 90क्परांधा, ॥ ९ 
शा|ग्रग्रागठुबाब 9९706 (९ ९०005#घ८॥० ० एाग्राए-क्रापादायन फैवश्ड्ता5 दुवागरत 90०एपरॉआओए., 
वृका6 छाढ5९३८९ ० तए्ब्राइएवांडा85 350 0८८टयाह 970एएंवबा शा) हा रशांप्राए, फाछए शढटलाता 
णी गिद्यावशधाधणिब बौ५0 5९९७४ ६0 ववए2 ०छगा6 शा0 €डॉंशबा०४ 07 व०ए०एं फि४ शिाएा।ाी 
ट्शाएणए &,0. बाते वश कक ए2टदा6€ ठंगा0॥ 3 ठुशाशवरं 7८, कप िठात दिखता 
6०ारत0फएा०१ चढदाताए [0 6 ४९एशी०फ/९॥६ छत चेंड्ांघठ बालापरिएटएर 0 ४ाए४(व९३. 


8८४६४8६१५८४ 
8.7. 656फ्ठी ; दिक्लम्ग्रतकां दिंबतंबरशाएश7छ, 529007 ६०. 3. 
॥006,, १७०, 8. 
[90., ०. 9. 
छिंत,, ०, 43. 
॥0७., प०. 48. 
-  96., ०, 22, 


( ७छ+ बं5 (0 (3 #5 





छः सा $ 0५०१०,१,%७:७ ० ५७ ०,०८०,५,३,०,९ १८०: 4००३३ 90,५३०, ० ०१६२, 22220 8 ७३ ०४ बह: 
22 8 00060 50. 272 250 2/5.5:/2 228: 2222: 
हि 2००० ००००५००००००८० ० ५ 2५८ ०2८ ० १022४ ५ ध० 2272 00020 5:202/00९ ०००८० 


20222 22222020222. 





7. 'अल्लाॉभ्रभट्िक, ?. 6. 
8. 8.8. 66$%4 : 05. ला, ०. 24. 

9. 98., ६०. 32. 

30. 6. 5ग्रातंाव; हिंडाहॉक्रोदश शायीएय रेंड्रॉग्ा3 5अन्राडॉपली३, ?. 4. 

]. 48., ऊझड४, ?, 2१8. 

2 व96. 

3. ॥७6., ४६. ?. 2. 

]4. ॥8., शा, ?. 04. 

5. छठ, वा, ?. 26 

6. ०2887,45., ४, 7. 85. 

37., ॥96., >, 2. 92 

]8. ॥00., #ऐा।, 7. 24. 

9. 8.5. #४ंधवा : र& रिक्छीरश्शॉएप्रौअड अत दीप दीं॥॥68, ?. 

20. 5.... जड़े, ४०. 3. 

2. ४.8७.२., 97, 7. 79. 

22. *5..., >|], +, ४०. 24. 

23, 0७06., ४०. 34. 

24. 4०ं0., १०. 6१. 

25. &68१६., 3955-56, ॥४०. 200. 

26. 5£5८0., ४, ८6. 50. 

27. 5. पि|55९३7७ : डि्डर्यादिक्रॉंस हिला | िंडशाअ0, ?, 309. एशा०एअ०त, 799]. 
28, 5..., जे, ।, ४०. 52. 

29. ६०., शा, 59. 436. 

30. 8. 0॥09॥ (६0.) : ग्ांग # 7 बात॑ #7९४ए९टाएर९, ॥, ?. 32, 
३3... 6.0. स्द्वाग्आाओरब िएापापए : पार $७सएप्राश्ढ छा 7एरसनछॉ४, ?, 76. 
32, 4.6., जा, ?. 24. 





ह##0##॥#॥#॥#॥॥00॥॥0॥ 0 ू_ॉ॑ 8 ## 
ब4॥ब5 0०ा/भथएष््रा5 एफ 50एफप्रष्ाराष 
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97. .5. ॥६75079 'िधाएप* 





बैंबांगाशा), 006 ०७ 6 0065 जाए गि॥5 ० पाताठ, ॥355 8 ०49 व्यापक्‍्फाफ गा 
दि्वापाद्राबोइ3, ि० 66000, 5 7शींत्ांगा [008 8 एव ॥ पिठा। कितीय, लिठएटए९ा, शांत 8 
००पफा९ रण 8४700७76५ ० ॥5 एा॥, प5 7शी607 ॥$ 580 0 30४ श॥४/९त जञां० एयगिवांबोफ., 
बेबाब एवठ467 बचटाए० वा 2.8,0., 85 [४ 85४ छा लगाए छा कांड 7शींठांगा 40 55पा7 विवां, 
बाव [0 एथापंदा 0 फैद्यावआवबाब, लीश पींड एशा06 उठांग्रोशा हाशएफ शिणा ऑशाहां। (0 
876॥6 370 €/666 6७ 607075 ९75, 72ए९॥ 40 ०९ जञांवा255९९ ॥ वाए फ़वा 0 704, 00 
9९८०ाध९ व ॥९ॉहांठा) ॥९४ 079 0 डिवांशावांशा) ॥ ए9०6फ्पाँधाफपर 220 शफधाएटा, #0फव77 
बैयागांचा ए३5 57९१0 0ए९7 तीशिएा 975 ० 8600 वितांठ जाता पीर झिडं रण टथगॉफएा2ांड 
० 6 (जीव!) ९१, 5 ॥026098 35 ए९]| 35 [९ शा/076॥00 ४६४५ 50टा!। दिद्वाधरवॉदोी(8,. 
[ विटां, ।ी 8 6 इुशाशाबत्रां ठज़ांता जिंदा ी९ रडांठाफए ला वंशागांहा वर 560प (08 5 
97९60क्रागवाफए धी९ काजश09फए ० पार 7९शीहुंगा ॥ वाडा॑ंवांब, 5घटीा 9३५ 6९ ७9/णा९४726९ 
गीठां वी5 उ९ीहुांसा ९70ए7९0 ा0०प8॥0ए पीिछ विडईा शाँकशापा) 8.0. (एटा 70फ्रव/]ं एवॉाए0+ 
वधुट ९#ा४ए00९० 9५ 6€ ॥६80877035, [2 0379835, 6 (वाप|(ए8$ ० 880व7, 8 
रिक्शा वपाॉव45, (6 पि087055, ऐ6 4४9०॥० (3०#9७५, [6 40५953985, (४ 'शा]9फ्र्ावठुथा 
एपर)5 बाते दीशा इचटट2255075, 7९$णॉा४० वा ही€ एगंगांरटाप]९० दुाणणा)। 6 एऐ॥5$ 7९॥ु०07 ॥7 
$0परव९शाा) #ैवागवाॉदौव ० 2॥ प्राए7722९6९7(९6 5८3।९. 


एफ हा०प, $97०९३०6 870 9079प्रीग्ाफ्र छा खेंगंगयांशा की रिवातठ 5 ०2३४ वएड़ा। ७९० 
एफ ९ एश्वएा५एि चाणापा९र्यांड पीवा पी९ बेंड्ातड टणाआ॥पएटॉटत 0 वॉडटिशां गांड ० पी 
84०९. ४ ९05९ 50७०ए ० ९5९ ॥णापाशाह5 ॥ दिवागवादव, ४०प्ौ0, ॥0४९०९४, 7€ए26] पिता 
९ बेंबा85 85 70 5९फुव्रागांश बरालंगाएटॉप्वा वागदीएता छा वीशा ०0७. ॥ ी€ ठुशाषाउ। 
एनॉएशा)) ्ि दाकाश्टाएावी बाएं वा 05, 29, ॥27६€700€0255, 3007/४0 ०7 000४९0, (॥४ 
९०गरांशग7०११प उितद्याशणवाएटर बाटा९2ॉपरढों आफ ए/९एबाा]ह ॥ गाव. वा )5 [0 599 
तवपतदु 4॥2 ९४ए 92700 पौशा बश्टपीएटांपार ए३5 अंग्रांवा [0 ॥6 एिवशताीदा 4९077९ ठिता$ 
35 74८600:60 ४ 6 06935, टागाएए३5, ?38ए७५ €८. 9एध6 06९ +०५४४।४ ए९८700, 
[69 टराएशांशाफए 0009४2०6 [९ ॥80॥079 +०0988॥8 35५ ए९]| 655 छाव्णंतंच आशंजर४5. 884॥ 
(06 चाद एबढप्र्यावदुता बात॑ वार 92005 धी९फ एच! ०3५७05 गा ा€ #्व/९ ए0एुर्णाता 
फक्णंतागा आशा९, 


8288065 06९ #॥एटॉपाली 9735305, हीश४ क्रा४ 450 8 र 70ट॥-पां ढरेडं॥8 ॥0रप- 
शशा5 चर दिवाविवाशाएच वाठॉटडागश् 70 57006 वच्रिगीएा ० पैड बगैंबाग5 [0 0/6 छवाीटएंदा 
॥0096 6 ##दा।एटांप्72, 7]252 702॥-८ए ए25पंपुटड ठा९ एट7फ रछ कि गध्याएश वव0 भ्रषकए 
शैधां+फ0।6९ | ऐड २४छ७टपा0॥व, वकरषार्टा07७ ॥ $ वीतटएा। 40 #पधुध्ृश्का विश 3 5श्फूचा बांट 


लाभ आभास इक हल कल लइ लक लललइ नमन कल अल ३ शलइलल तलब. आल लक कल ला मु मु रु इाइाा।;ााााााा रा आयाम धाम ौीाी्ीीौणायष्ष््ीीन््््ग््््््््ध्््ग््ज्णम 
* ९०७९९, >ल्कुबात॥शां 0 90025॥7 वैलंशा नींशणए बात वै।ट8९000५, /एशआए 0 रवए४08, /॥85899॥(0, ५9०7४-6 






१ 90९2० 220 ४ > 2९०७० ८ है ू 226६ 






पबरता60 ०9 79०४-5८ 

फऋछा पीर अब 6 आएतए धार ढ्यंडए9 वराएगांगां ॥7त्रापरा॥675 ० [6 वगँशंत3 | 
$0प्राश। वलार्बाशांट8 वियए० >2ढ7 टावडडीएत तरांठ धी72४ 2ी70700व2ट8 ६7075 श2., 6 
श्थाए छ2700 (ठबाइव 72707), 7-॥#6 डाठतार एल्हं0व (न0प्रश्ठांच 9204) गाव ॥ पीर वदांरः 


एढ७700 (एप]छपफ्रद्धायुव7 बात 902-एॉ]4फ्रथ्ा4887). 


॥ - ए4गार शारा00 (64368 एट्रार079) : [#_९ ला7ठचठ5699ए ० 6 ।९॥9565 दबा 2072 
घावहः 48 870५9 &$ एशप्रर) 6छ0ा टरमराफए 40 400॥ टशाांपाए 8.0. वप।॥9 एलटी ंग्राढ 
पराठज्ञ रण पि6 फंड छा इ20प्रशा गाना ए27९ जाट एच ति९ फरशराएओ उगाइव३ 
इच्य॥#७6, ॥+% 6 एथ7०7बपइढ दी ी९ए छुचणड 607 6 एाठ्ालाता री खंबामांकत का धीछा 


क#ांगरवु4070,  |$ 70 00फ%/, प्र79720९०९780. 


पकढ प्रशाशावों 499०पएां 67 छा ० ती6 उगाव अत्पटाणब। (श79९$ ० 5 79९४700, 85 
एक्षा। 96 एछी९6 व0गा ॥6 ढजांगागठ ४गावब र0तप्रा०75, 9९7273॥9 ९07955 0०0 8 500७8/९ 
87007, 3 '5पैद्याब॥ज, 4 'ठप्रतावागवातंत093' (ागएगावा94') 2॥0 ॥ 7476९ 2७५९५ 8 5॥73]] 
शाबिाएव छ77०॥ (प्रापफ्रिव गराबा0994'/7णॉ09 0॥905॥0). वृफ्७ए 2९ तुश९7७॥9 'ा॥॥0॥373' 
965. ० 39504]| उठ 09580 45 ॥00९८९० 5० 60. पिठागाबाफप ध6 0०35805 दा 0पाी 
वाडंतव९ बा ९ाट0685प9० एव णांती 2 ध्रधर्णवछ वध णा, 022450गए क्णाहु 8 0ए०8४- 


प्राथ260498 ज्वि0पाँ ७ 'हुणफृप्राव' ४७००९. 


पृकढ शापरटांपार ॥$ 0.जा। 730०0०० ६ 7700[060 जय ८078ंधाग[ ० "प4॥98 , 
'बबवबा। #पाएतंव' छा (जाता 6 ण्रातात्पा फिदाए3") +फैवए04' छा 'फ़राब', 800 'फ्०॥॥8', 
पृक6 घ्रढव$ ० धा€ 935505 37९ ]९0, वा हुवा व87ए३5, धतंत 995675, ठणााह ४) ।॥6 
(ं९८०72गए९ ०७7९३ ० ॥॥6 एछ975 7एा6 जात ॥6 ९96०, ?880275 5७७७००७४ ।॥९ 


) बात॑ ०7३०९ ('ए४४०॥"') ३७००९. ॥॥९ बाएगिे73५९३४ 67 0९क्षा॥5 5002- 


०070९]$ ('90[॥0& 
'॥8709 ', 


वि९$ ८0॥/थ)5 3 #९२९ ०0 वीथाा599' 07 (59735 0 ओजीहाः ठताढाः तेरटठाबाता, 
7प्परादाबां४१ 0ए '॥एत५5' 2 7९चर्णावई वा(शएवा5 गाव॑ व (9749९) 890०४ 67 '9#0' 
(९शं॥ह8 8/90) 0०८प7 ४०००९ ॥९ ७०, 50० ॥$ पीर इुशाहावां बार) एा 0९९००३॥०॥ ०0 [6 
९९707 छा! 5पाजिट९, ज्रटी ॥075 ७॥0०४॥॥9 ढाॉ76प्रातव धी€ इाप्टाएा2. 


पक४ 9] 5पाव०९ 7०9, इ$णाशाग्रा85$, 43५९ 'छीवता35" 0 टशाहवी फछा०.९८००5 थात॑ 
॥0०5035" (धाटी४४) व 7९वपॉंवा जिाशाएडाड, विबाएशत ७७ छा|9ड/०75 इपापराठ्जाग्रतवु *05ठ95', 
इ#6 इरादा" हठावावए ८टठताथात5 & 5एशाशाएटांप्रा४ छा 6 ए:9 #ंवाफ|९ 6 [87०९ 
आंतीवाव) 0 8 ४072ए९6 409४7 ॥.९., & '$४79878 “0४८१. 


हा धा९ 66अपच्चवाा ॥॥9 0९८०४०४०ा ० ए]975, 60007 [38॥725, ७76 005, (७ प्रेडांप० 
९9005 छत छीा5$ फ़शांठर्त ज्ी०ए 3 ॥छा4७९ बीमा ए एज ४ ढशॉह्धाधव छिव्योीगाला।८०४। 
[छअआए९$ 6 ९ जिवतीया डए!९. नरि०ए९ए९7४, ॥॥ ४ 6€००+ठता07 ० ९ [९74075, 
एगाएंटपांबलए कार रशा।ब। ७४ ० (१९ व्शंत्रितु (ज्गवत") छा (6 परावए॥/9७8७' 06 ८67 ड्९€ट 
3 धआीत्ा! ता४7७०९., ॥॥6 छेथ्रीपग्राधतांटर शाफ्राॉट5 हुदार73॥]५ ट0गाशो। ९ 9०१९]$ ० 
*$8॥406:983]3095' #पार०णातादु 804 (पशाशगीए पिश्वांगा३]8४), ठिए0॥ ॥॥ (6 ढंबं।त ७25505 
विश्व छा 5ए9 मी ॥6 टशम्रॉएट ७ 5९8९० पशफ्रक्कार॥9 ।8 709725९४९०. 7॥0९ हुबाजाव्तः)55' 





0७०८४ छठों। ० ४ ४ंध॥6, विए9 ॥॥6 (00989, 


0७ ८०गगए १0 ९ डॉए0ए छत ॥6 गाणाप्गशां5 छाएफश, ए९ ट्, णा तैशीगरां४-, 
द०णापैड, 539 शिवा ४ शाए०० ालीभाीढटाणार 0_ 86 वैगा5 ग0 4 एशाए €वए एशड्वागगगए 
व #०पीशा) दिवागबराव8, 35 प्रोश्वा९ते वीणा 8 €़ंक्ावज़ांए्व बा0 बालीा९00पवटएं ७ए)- | 
तशा८९$, प€ निबाड। 207767 9]96४ ाइटाफगा! 72८0705 एढा जि792४0३००४४३ (455-80 
8.0.) शा ारढ॥ओ07ए ०0 5 विवश उद्राश्याएणाव (4330-55 2.0.) 60। ३3 गंंध्रब8ए98 ८०१४४७८४०॑ 
बात 98०९४ ॥एशच) छुावबा5 (0 खबर 35८९६०३. चिंधाए ॥076 ॥220705 0 पं४ रिवर्तद्वाफ85 छ 
छह ए28$8॥ 7९ 0 (6९ ढछा875 गादतर (0 इ९एशाहं। 'इवा545, ० का९ उ४7035 800 0० 
'बरातवतबफ्रत्ैथआ35' विठां त0प920 का विलशा पाहुतणा, 


557९ ३५ 6 ०७9९ छा 5000॥ एदा5 णए दिवााब्ावबाद् एटा एश!९ट पराते९। (९ 
70टढा ॥00 #७छस सि९ 054769935 ० 057083०80॥., 54ए३॥3०९]४60०0७ 3 997 ० ९ 54793 
दातछुतणा, ॥0० 60709, ए४5 2 ॥८९४७३ छा खेब्ाशि। वी 96पा ि0ी4 ९५७९० ०८०7९ (€ 
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3 7906 छ#68 0 ४०00 जपघटाणा९, प्र070 परी 809, टिएशत। 65९ #॥प्रटांपा९५, 
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86९80609 85 8 रिक्षाइएचािल 0व5१०१ी" ॥$ तंबांड॒छ९ 07 शंएजी50८ दाणणातै [0 70, 80 टर्शाॉपाए 
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3 ९0ग्राशजा ॥8770ए७9 ॥शाष्रातिक्ा5704894' , | #06वां ० ां5ड शीध्राफए ३९फदावाछएत॑ 707 86 
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#0९5. 3 9540], छ9वा(2प्रॉंडापि ॥6 40०_, 3०7श्वा5 [0 ॥987९ ०७९९॥ 0९८४0ए9९6 | 8 ॥76 
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॥ब84', (प्रगापतद' (०0फपा0) '॥बा॥4' (एां। फैशाए8) 'फ्टदिव' 2॥60 'फ्राद्वा।', ए३५ 970ण5९० 
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'घ०७३', ९९४पागपांदा85',, ऐप 0/॥205 छत एक7005 डी392०8, 522९5, 0 ाावटणा 
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ब्रा 00]९टॉ5 वादाीटा९ पीठ 8 जरीं। शी99९त बाते इप्रएत फैवड्व्ती घए35 ९डीडींग्रवु वा वा 
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09 इाज़ांइचंट हुएचाव5 ६0 रिद्रो8ए5 + रठ9 (054 एटशा०0 (.९., 80 - 90४ टश्मांपाए &.0.)/ 
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०7 पिढ [छ० #$ंठ९5 बा९ छिवांपा€5 ०एाधता 0 ए०ग 6 >ठ5530)9. 7 गा3फ ए2४ 7060 ९7९ 
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जा #0ा [8 शिवा ्ी श्ाए शा9९5 0 ववाओ। ८0७79) एटआद एप विडा, ४2९7एटत॑ 95 8 
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एशटगाईापट(९60 कात॑350 ॥ पी९ वाश्वात॥९ ढात्राठुएत, >फााठ ध९€ ॥शा6ठएाीता, 6 
८07(९॥फ905बाए बराला(2टाएा75। फ़ाबला2९ ० फछाठ्एं॑वादब 8 ढलाव्प्ादाएपा[ंदांत प्र 79355462९ 70 
गा बा।ग०९6 5एग्टा०५७५ शिवएागातु3) ४५ 0092७., 80 380 छा ९४४४० ॥९ह॥९ए7 ० 6९ 
छगे। गाव बतगगंशीनाव', ४ एशवागवावठुफरीब ०354!) वां जावएगआ३०९४।३४०॥७ $९7ए९६४ 85 8 
7006) 667 7९४07ब07. 3९2८80०5९, #0ण 6 7९79$ ० ॥6 93550, एशाशश्रव्र॥$ ० बौ)09 
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98९९४ प्राश्वा2९0, 6 7९2८ठराजञापटांणा ० पी 0१वीं 09526 0 [2९५९ ॥€॥7795, ७००७॥०, 
॥09९एशा, [70ण॑6९ ७5 एज वा) ९९फएबाॉांगाव। फ़्दांशा, एास्टांइशैफ्र 7९8शाशणा]ह ह९ ९ै९एडाता 
० (क्रादाबपुपए8 03530]. 7९07९ व थी एछ०0वग्ा।|।फ [॥6 784७० 99580| गरप5। 80९ 
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98530क्‍5 7 8 (त072 92€70067९27/ पाबाशा6३ ॥॥९ 507९, फांपंटाो) ४85 (॥2 ठ766॥ 67 (९ 099 60 
फि९€ #05ॉघा९५ ० (१९ उिीवााब)८व४ (7९2०. 76 5७०५ 8७४०0 5७] ९टांबॉरट 4९ ४७4768 
प्राण्राध्राहशाड छत का5 छशा04 0०॥6 85 40 णंज्ञों 93ए४750९॥६०४  टछाग्यगादावफ््वफ़्वॉलाद 
पर ता निव$5डवा 0इॉटाी, 676 [७० ॥॥02085, 792" (707597/एाग्रताएठ97]) वात 
'शात्रा' (टावावाबचत) 97006 एएफ/४श॥ 7शा8/095 ९ता।ट९5, छा ९ ढेबा5 तरध्ांब000 40॥7 
7 €श्आपाए 8.0. 40 घा0ठ१ढता 9९700. 06 (65९ छ० व3 ९ 'शावों ॥॥" 207वा]5 
ग्रणापरादष्यां$ छा ९87॥67 त8९४ ऐीवा) पी९€ वाध९ ॥/' 


पृफर ९काएजश बणातु्श ऐी९ ढडाशताद हराप्रटॉपार5 09 06 यों गी।' (8 ९ (फद्याता 
शिवजाबाबधिब ०38530॥, 9पी। वविशंग6 ॥00. ॥॥6 फांधा ७ कांड इॉपटॉप्ट टठतडांडॉड छा 2 
'प्रथाणावदा]3', एव, गात॑ 3 गरवश्याथाहुव' गवसादु 53 छा0फ0 ० छिप रशातवंं छश75, 
गज 05586॥ ॥8 06 'शोडा' 998, 4.6., ९ 078८४ #7एटॉएा९ इछॉडटव॑ 0एश & ०१6७ 9॥77. 7 
[8 80 40 विवए९ ए९शा छएएटां20 ४फए ९४ उगाधदे धागाठ अाण्यागवाव है, ॥९४726 ८९२१ 5ण्याद्ाव 
9335व0]., 


पृष्ना शरद [0 टलाड ०07 6 ॥॥ नि 6 (टागातवा्रइपजं8 ०4580), 8 (790९ ८९॥९० 
#त्पटांपार बटबरतए एा।29., 7॥5 एव्डडठ ऐपार का द्वातग्रोी€ ॥2099९575 ६० वैे4एद ०2०१ ॥ल्‍052)]९८पे 
छा पर छाँगा ० दिल वद्ांडब80 एाटंइ फैयड20, ॥॥766€ ८९४ धाावत8४0 व 3 709 ॥07४0 0०४ 





कफ क 887/005.5-0ए-कार4जात (5७5.. ॥4..) 


50७४९0७॥ $९७६६७४॥ ,$. $7७४8॥8& 5680!8  जिी#/अह6 , 98। . 





8) रिक्षआर््ानषं 08540 7)/९द98 98549 6) "॥॥0/89०78 78580 0) 90क्रषाएभ8 08580॥ 6) 509करऑक्ानं॥8 99340 
+एब्रातान्च980॥9 08534 हू) (0)क्षाएतातंद्रा8)/8 09580 ॥) 8॥85क78 09889 |#॥#0क्षा।॥ (स्का) 09880] |) 
द्ा0प्रापबा8 (#0ं॥शा।9) 08989 ) 98४9॥ 0द70॥8४क्४५9 095व्व9 ] क्षात (8807) 09590॥ 7) 88४88 08980, 


#2#08%॥00७॥ 8) 90404 /0854व॥ 0) #_क8048/985#0 0) 008 शक्षा8 08580 ६) 7989808 8क0980008 शि॥्ष 7) ।7॥ए8 
(09892) 98560 9) 0॥80ए58 ॥धक्षारक्षा3 08540. 


व)#क्‍0८क्रा। 7580 2) छ0क्‍|08980 3) 7शक्रज्ञाई9 08590 4)पचच्ाव जादांउ/8 5) #900989/ 98580| 6) सक्राएशा9 02844 
7) उक्षा।8 #ह9 8) हक्षाभ्ाह्षा।8 099580॥ 9) 2999//08880 40) 880॥90800 08५७. 





वा 000त6 एशक्ाातंच) ई0705 [९ ००7९-०० ५ छ३5थेवीं ९एशा धात्पवी ॥ 45 2०ए९४0  क्‍0फ 
छए छा इतगप्रटांपए-25. (04 0॥९ ९7९९ 2९१७५, (6 ३७० 8096 0725 ॥896४ '€५व०व जैवेाउइटॉटीड/स्‍द 
एंगराब435', शीश पीर जाग छा पाढ एशाावी और 5 ए5आआइ, है #प्पफ्रॉपार 


27875ए6708॥03 5 ०छ5९ऐ0_े 
एद्राावएथधी 300 ७४॥४3- 
ग्रधए॥ ४408॥5. व€ दवा- 
पार पा" हइटटठातागठछ 0 
97. १.8., 5द्याग837 7, “7९7- 
7€5९वञाॉ5 वा ९थाए एवीदा। 
७ व पृश्नांद्रांदा 69 फ़ञांग्ग 
जा 6 [7९2 'एंग्र8785' 
॥0 3 9378|]2 ]798४ #707720 
0५७ 3 07)6 (74709]08  ॥7 
79॥ व3797९5, या) ॥02 
ग्राबा) ९704708 2 [९ ट९ा- 
पर विदां)0 50प्रॉत", न पा 
वीशा डांगा25 वाितां वीर 2€गा- 
विखा 5776 790 079॥3/9, 
27270395, 3 'चरज़ावांय 
शंग्रात्रात्व 0॥ 5 [0०79 ००॥- 
5प्रगात्षां८ट [0 ॥5 086९० 
वाशिशाईठता वात पी९€ - 
- एछठ7ंदा66€ एाॉ शिी€ 
8877720 73596". 


8ि0 07 ३ छात्रा 
0०07$4$87789 ० पफुचथाव' 
99977, प्रीएजावाएपध्राप04', 
फिद्या)092', 'फुवा४9', दीए 
प्रवव] इएविटर ८0ाांवा]5 9 
70970 ॥॥08275 9९60ांवा 
ग्रांड/एदौड, पक ीवताव 
ए०7067 वा पी 0७च८ 35 
९८) 85 (॥06 डइॉपिड एथा5 
गए *॥६0$8035' वीठाई20॑ 
0ए गा छाशिड27७, ॥प९० 
फिब्फ्ृतांव 5 ँुपाटांड॑र्ट्त 0ए 
फप्ठव३४), ॥॥6 'एजसदाव' 
पाण्पांचातवु, 06/09४8 ॥6 
(एशछा 485 एएच्ांवएता' 
ब॥0०७76., व॥शा6 ३/४ ए० 


9 पछीछ व्शपाठही औ॥6 छी९ 6९ [ए० 306 हल7॥8885 (005९ 





(॥00७१५४॥४७४ 88580/, 982 8.9. 8ा9ए७०७9०४ (जाश्यावा 890) * 
(007839: 0॥6040क्वां8 ए #0960009 ४ 470 ॥॥५७७७७१६ 








रंगे एॉएाबा35' ० 'छिवावबलादलीदात॑व' 2855 80072 ८077९579074478 40 6 ए० #02 
डी।ग९5, 470 पी€ ट््शादां 'जागाबा3' 385 बौश्यत५ आ/3(९6 8. घा58॥6, ॥॥6 'ह#प[०9' ० 9० 
९ 'शांगरवा85५ &6€ ग5906. 


पार ग्रढश वाएणावबा। #एफटपघार 0 ० फफी। ता एाव्राव्बढा। 5 ऐ€ एकैदापात987498 
०8४५४३४०४॥, 6 हुशा) ० खबर बराएा॥एटॉंपार थी ॥6 फ्मार 74णतंदा 5४6, 28५5९० ६0 0९ &४7९2060 
9 टशबशाणात379फए993, (8९ 8४७०९ गाजर ० 05वढ76व #शआद चिंवावशाशवताब 4 का 982 8.0. पर 
एब5४१॥ ७७७5 ८०ा॥ए९४९१ 0७ए ९ 0ाए67"५ 50॥ 70806ए8 ॥) 995 8.0. ॥॥06 995५3809॥ 45 & 
कट्टाॉब्राठुपादा आपटॉफपार ० 6 'इद्रातीावबाव' फ्र०ए९ एपॉा। विला6 ९व७ाॉ, पार फागा 200$85 ०0 
3 दा णावबदाव]79', 8 फरार बवातव , एूशा '5फप्रदा45', वव्एताबाएु4, गात॑ 5 
'वापांतधीब्राव)4494 , 20००९ ॥6४ 'परद्ाणावदा43' [5 8 'तजांगव जादाव' ० ज्रांटली वी९€ विष 
'वीढ $ पाटाताबोी 35 ०0विांग5 3 ८९६ बात ब एलटी जाती 3॥ 399703८) $970९8$52०. |]6 
इ९८०॥0 "89 5 ०ए एणाएरातंगाव।, प॥6 'आपीवाब' शैशाशा। 5..रछ 'एश्राप्रटीाटीवा04' 
प्9९ (0०८98०ारी) इप्चा०्णाश्त 0०७५ 4 '#एछ0'. 


वृशढ शापट्रापार 4५ एपी। 0ए९१ 8 ॥९०ए एा०५४0९१ 'हरतति॥38॥4'. तती6 छठे 300०6 45 
0९९०079९0 ए्जी। ॥९तुपांवएए 59322०९१ ज़ांठाट75 थाएं ॥00०5, ॥॥6 ४89०४ 8 एछ्ाटॉबाॉ०्व णी। 


88५४87038089049. (80009 +9५98 89580 








कृपतंप5, ॥॥€ पीवाब परीएत जी 7९॥ इ८घा७9/७72५ 0 वनधीबाँदवा3$, 730585, ४3569|5, 
(ब0॥87085, #059795, शैश्ज्रीया।5 €ा2., एाएड वा गागवटॉए2 ढाट्एवॉटा 0 ॥6 या. है] 
'फ्एगागाएव' 55 अंडजाण्श0 जीकिड बात॑ (6 3प्रॉप्शा350" ॥85 ७0. ॥॥6 एठफकी वी खिणाई डब्या 
बचदीतएा गरोठ्त2 ०५ ॥९४ नि06फ्डइ4ॉब पित्त ४ओ०0एछएडापीबा3 ॥ 9082८९ छा (3९ 0४छ्ञयावगं 707०॥. 


पर 'द्रव्ागणाबदाव3' 40प0५25 6 वावदु९ ० पिशांतवाीक वित्वा20 ७४५ 'एवपा।' 
9९७7६१$., ]75 शक59९४ ०एश35 ०95०३ ए)गावटॉटांडी९ शि्वापा25३ 270९, 7739 ए2 व टाटा 
7९फ9]0८९0श॥. ॥€ टशी3 0॥ 6 फिशं #06ए ० ४ जवाब 00525 ९ हं्076 शाठउघु९ 
रण रिबराइएबदावंवब 59९१ 09 एशगापाता8फ्र4ब"/5 5गा गंा430९ए०४ ॥ 985 8,70. 


पक गराठज एटशबजापि' 790 5>शापीव ९गाएँंए ० ॥९ वगंग्ाब बाला।एटॉफप/र रा (8 
९9 फुशा०वं 45 शिरए ?रिा205# पांव एचडी ता दिद्या/एदवग्राद्वी, चिंठा099 ताहआांटॉ, 5िडणटा 09९ 
छा 6णाहञॉपट]0 ० पां$ [€77|6 45 704 ताठएशा, 40फ7९ए६७/, णा जज़ांहं।ट धा0४७705 (5 799 
०९ [5९९१ 60 ४ ८९३४७४५ 8.07, ॥95 ७55०७ ि९०ं॥छ ॥0॥0 45 0७॥॥ ॥ ॥७४७० 99525. ]|४ 
ए0९ हापटाॉपार 5 20९[005९0 एफ ३ गांक्षी एबी वेव्ण़़ातु बा शााबवरए९ बात 4 799० ॥ ९ 
070. 6 ॥ज फञा!]456€ ८0॥3485 ७० प7९९ इज़्््शढ॥089॥ए बावगदरत बात सवण्बाए आअंगरत 
2८९॥85 6#९फ्ॉ४त॑ ॥ै0एछद्दाते5 इ0पी, ९वंच बात॑ एछढडा, डिगटा फुबाँ ॥45 3 'ठ्ाणावध्ा8 , 
'5प्रस्)597 09९॥98 [0 3 ९एणाए्रणा '75एद्यावी99 ०09४009 ० 4 ८९१४४| ए॥37$. 76 
'ग्रवश्वावग93' 35 3 00999 [0एवग05 6९ गठा। बाठ 3 ए9ठली की #70गा ०4॥. ॥॥#6 ४९८०४प॑ 
97#9358 $ 4 'तज्॑टपांव' ०07 जीव बार 79600, ०एजा। पड़ ॥ #07ा ० ९ एठाली ० गए 
ए352, [ ८0755 छा [छ४० 5॥॥6९5 छपाग बिदाह ९३८ी१ 6प्ाषा, दिवट/ 5077९ 85 2 
'दु्ाणावधातब, 8 '5प्रऑकदाव' 7 परावश्त्ागातुब एण 6फए ख़ीब्रा5 <णाश्टरते 00 3 एछााधवा 
7००ली का गिणा, कक 0९फए९टा) ॥6 900॥65 ० ॥॥2956 छ० 9॥3525, )5 8 '0वौाआ[3'. वश 
5 व ग९्गीए गरात्प्रातेशव डपटॉपार 350 5टपएा2व 07 ॥९ 8965. 


ह 6९ 3॥7025 376 ॥6€ वधाव62९५४ ० वींएतिद्यादवाव5$ प्रांट,, | 90852, 50फॉा]- 
खैवींगडा03, ४४९३-िशा॥)9॥3, का ९३४ 5बग्रगरद्याव, की [852९, शै९४-8०१ांतवाउ बात ९७5५ 
$्ाध]वादव, हि 6९ ०९ 65 ४7९ ऐप भी क्षावाव6 था एपारढ जिवशंतांवा 5५)०, ॥९00९ 
[00॥ 40७शवटठी थ छिएा 200 899९ ९४८७एछा छणि 8 'जंधिगव फ़ढां एांगंटो) बा ० 709॥0, 
इपृपथार दावे 049०9) ॥औ9९५, ५रा6वा 2॥९ए०ाठत्त ० वा विी€ ॥॥25 €श्ाएों 702703॥9फ 
पध€आशव उप्रावबिए2, ॥॥6 7606 ४॥65 0 6 | फीब५5९ वात 0 [९ ८06] 'बती।हाीकाव 
बात [ए० ०७ वा | छ35९, ०ा बहा, ॥॥6 ॥6प्रठतिा985 ० ९5९ [9४०0 'बरतीह9735 3॥6 
82०९7॥९]९५३ 0९॥वो वी हहठागर॥आ, वी्ए बा९ 'प्ुबआ3', ग4930, 'एफॉव्धैपा)फपत७  , 
फतवा छाती #िद्या)92 ात॑ 9869 


वृश्ढ8 ए७३॥ 5पदि०९ 85 रशॉब6णादा [55९75 ठां ॥९तु्छादा ग्रॉटाए३5, #िटो6९फ्राव। 
70॥2४5 ९, १0७४९ए०९१, 0070 7 गिर टशाादां ज़्बां ० किी९ एवों5 छा ढरढटी ण पीर | 
बाएजआॉल्टॉपानी 2णाएतगाशा5ड. 4 शए ० पिशा व50 47९ इॉबाठीवद गाव ग्राव92९5, १४०८९- 
।९55 ७ (०ांठं बएुश्थबावा6९ ० धाढ फपीव799, 5 वांदापएर 070)0905%, 5ज्रगरॉतरेटदी दावे 
एंश्बडांगपु, ।॥08850 शाए)्नॉी०३ छा पीछा छा०एजावठाकां दीशारए90ा5, 32८८०प/६8 ६० 97. .8. 
सबाप्राव ह्िफ़वा गत दातमिशशॉट ऐटबएॉफए, इफटवा एा 6 ॥85679 ० 6 ८077०आा070व। 
3572टां5 छा ई॥6 छगाएंए एपीचवटाइ77", [07, ॥९.२. 5क्ाएव्डडा ए0०ाडांतदाड वैंंड गाठाप्राधेशा। 85 
॥. पैक्राता)बडर का उठाते वातिबा (श95)४ बाष्यनॉइ्टॉपा6”!4, 





865065, [656 पाएएाँबा चेंचा॥4 ग्रोठ)्रप्राशा।5 त९४८४०८व 89002, ॥९€7९ धा8 
ग्राधाधााशा 60]6 वेद्रां) ए६४४/६९६४ 7 50पीशाए दिद्यागवांवबधद तंबरॉब्फर 0 ही९ विश वर्ीशांएओ 8.90. 
[#9णगांवा। दा०ाव वीश्या बार ९० एड : 


2]90४ [५४७॥१९ ४३(९१8| 

. िा॥९, 3उ[67९ तां5(. 5पा€ 0९ए०१३|४५७७ 56072 

2. थचिपठुएा५, चिए50॥2 ०9. 8ए8399 38530 878९0/5408९6 
3. ०१०।, 3'"07९ 0॥3(. ६80८४ 9॥#९|€१5५ 
4, [॥979एणाप, 'र्चव099 03». 5॥९. 80९०४ $#2॥0॥5 
5. फ्राधात902, 'चिद्ात॑प्रत ताहा-स्‍टा, 5॥6९ 

6. 885079प79. 95०7८ 0॥9. 5॥6 (२०४ ८०४०॥९८९।५ ७॥5997227€४) 

7. 0046द्वाप्ाावां, ५5०१९ ०($. [२5#0॥[ 

8. छि९घपा, 5'।07 0॥8. पज्ाता 

9.,8053707, ६३0५ 98. ज्ञात 


॥. खाराएछाह एधरशा00 [त्र०0४७8.5 ?झ॒प्ला00) 


वक़ह छत रण > टशााप्राए 8.0. एजा॥९55९6 8 फएशाशापठए५ छछणवीएगे टीबाहु९ 
$006॥ दिद्घाशवा३॥8., ९ (दु4 70एवा वि] जाला ततागागरबांरत ९ 9०05 छा (5५ 
हएचांगा 07 ०ए2 [ए९ एशगॉपा।25 5७50९79 ढ€९८॥०95९० 00९ 40 ऐ॥6 907८व इप)श९॥व८५ ० 4॥९ 
(॥055 ० ०7९ शंतं& 370 ॥06९ €॥279९7९९ ० (॥6 095$3]85 ०॥ ॥९ ०९. [॥6 (.0|85 
एज।0 ०070दुणए९ा९०6 50णी ९३४शंशाा) फुदबा5 ० #वावांव३ गाव परपांएव ॥ छा 0ए८7/ ०९ ॥पात72९० 
प्र९चा३ 6 ॥0 व०7९57 ॥0 ॥8ए९ छ०ण॑ंव४0 85 ८००7827व) वा 0705) ९7९ 35 ९#ाश)0९० 40 0५ 
(6९ 067699$ 6९ ज़ाणागांठा ता गे्यागंआओ, 409९०८४, 6९ नि०95३)9५ ज्री]0 शार/हुरुत॑ 35 
8 57078 7ए0ना€ठ) 9707एटा 0डशि०९वं [॥6९ इ९ 976580फ95 90॥007 70 #वाॉप$ ०0 ऐंक्षा।।5॥ 
885 ७४७5 ९४९॥(९७४ 0 99 [॥6 (537935. £०९॥ 4॥€ ९॥॥९75827700 06 579935073 99॥7 ॥॥067 4]९ 
56ांग्रा ि477970]92#9793 35 3 970५श7पि] 72॥80गा वात जठ॑, 9) ब79 ४३५, व७िटां 4॥९ 0५९८7, 
7ण०॥7 2१० 790.प्रंव।9 छा इब्ांशा) 6 नि0फड3 ८०परा9, 6 इ००९॥ 398 एज 2 शा 
था कैग्ञापवाव जवींदी 20राग्रशारएत वपातद वीर ांववीर ला मै दषयापाए 2.0. <एा्रपरत ए० 
6 छाव॑ 6 देती दछ्मापाएं, ए7िपागह मर5 ए2709 ॥6 9९५ ए ९ 7९6005 274 व्पॉएाबो 
बटा।९एशा॥8765 ॥98ए 0७2४ 5च्वं0 40 ॥3ए९ वागरारत ऐप वीर वंगा5 ॥ खावांग3, 


वृकाढ नि०फ59७5 75टॉट6वं वा वतीता णरतांटी 45, छा €6प्रा5९, गरकाओीटशा। 000 
परागंवृध९ 0०प ॥5९॥. 9९5८४४७०९८९४ 8५ 6७ #जकांवांइसत लिए ता पिंवदुवाबन बाते >िल्जतव आज़ा९5 
गारत[एटा06९, 8 095388 $+९27079]९5 ८०ाँब) ॥997097 जी€९ः शंशा)९75, शा।रट0,, [0 3 एव 
शशि, 276 406 गर70५8075 07 #9॥9 508९3 ८९४०८ 27585. 7॥४ नि०99३)8 ॥0९0भ५7) 0 
एणाडशप्रएा]07 छा (7928 ४०5 धावांएए (क0०्वार इटांश छा 5089 #06 एा0एा) 0 ॥5 ९ 
छा, ८058 |€:ापः8, 50ी ठप गाद्यो2४७00९ पृणकी(85, ग€ 5007255 ए ह2 ह#०णा8 ७०७६ [शा 
ए€का उततेएद्रा।4छएर छा 67 6 ९ूवपांआार त5999 ० क्राएओएार बाते बडी त॑&20चवंगा गा ९ढटा 
बाग्च €ण्शाप्र फ़बा रण 6 बाहलाश्टांपागं ए०्पागाएा९, विष्रातीारतं छा (शाग्ए/९६ वो 0ए2ट/ 
50 पाशा। #वायब्रंवाच फरार एपां।. चावंटा धार फिडावां कदाताबद्ुर ० नि०7४8795, ए०0 77/0925 
रण बाटंपॉडटपएाठ। इज़ोटड एढार फ्रार्टारतरत [0 0 0प्रक्रातु शशए९5 फैफ धी282 ढ655. 7॥९ 
विश 45 वीर ८च55ट5| 0096 एछरतिंली 5 टॉगब्रावटाटरंडपट ठा धीढ। डाज्रांर दा 06९ 5९८टछतावं ।5 ॥8 





छीान्संठीबा डफज़ा९, ॥॥6 285908व 096 07 6 न9फुडडाब डा वी50 (९६९० 35 '५४८०ढ74' $9७' 
- व बिडटि| 90606 ठ7 पिछाएी 800 50फग वावांगा एगॉांरांडड - ए०ाअंडा5 ्ा व #ऑधा-शीव2९2त पं 
छा 6 'ए्वाजावधाविव . ॥6 9760४ फ़दा(5 0 86 श्गू॥९ फॉँगा वा९ '5प॑ॉ04$४ , 0एकाव)घु60 , 
'करापातीवाशकातंव92' व ऐजी हशारावीए 0एडा 3 एॉबाॉणजिए 0 ]5947', आप 9६५९2 0 ४2९ 
हवा) ९ एफ 9709०, 9770णव7905 बा ०फ़ा एाणाशाबत९ गाएणपाएं, छा टाएप्राबा#प्रौद्याणा, 


पृक6 'परक्तद्ाव', ए९॥6 6 क्रांदशत छिपा एणा 900 गातव॑ 50ए0 56ीदा एका।€(९४, 
90०5925585 (6 [पिवछुआव €शाशां ॥ 8 एशाएशओ। 7007099 ३) 0९७७ ०७५७३ ० ९ णत्ी 
€वक्‍60 खंधा। प००0 4॥68 409; 35 छछशी व५ वाश एिवक्एंवंच रौशार४त7 ॥ 6 ४९९7० ४९०7९ पं 
॥णाग्णा3 65 ० ९ 40४2८7. ॥॥6 'शंतावा9 "०9४९१ )5 श॥शातिरा ८प्एशो॥ढरठा 707 ४९००९0 
एपफ्रागायातबो एप 40005 70पक्कीफ ६४ 8 वो छिव60 70फ्व 9473$0., रिज्थाए9९5 ० ॥5 फए० 
०0 'णगावाब5' बा९ ९ 2८07793726 40 ९€ 5९९०76 #5ए28 6 गाठभााणर्त फिब्सतीणगा 5९०7०४७ 
एचप्रागांत॑ंदा॑ 'णगगराव745' ० पीर न0पफ्र४/95., 'िबतंगा।093 पिठठुबव' 0 शिविाधाध्याव' एडांशफ ० . 
"जा 07९१5 ४९८९ 350 "एप ०286९5 [6 [एछ० ७७7९१९५ 02९520९6 ४०००९. 


पृजरढ खगा। ।रा०9९५ ० [॥6 नि०फ$96 9९706, [0०0 5णॉो सशिशा आशंग्राफ़रॉरट ॥2॥00 उप्रशांट72 
7टावां?घ३ (8, प्रर/९ 450 ०070॥प्टा९१ 4 जंग 0), णए ०05९, ण्जाीत्र 6 छुशाशाव। 
एथ2शा।) णएा ॥ि९ जि0फ्रडांव 590९. ४८९४७ (एज0 वाद एगाए९५ वा ९ 7ा)4 गाणाए॥शा।5 
० ९ 9९060 ढा९ टणा*5एंटप्र०0७5 एप विदा हआावएीटाए बात टांग छा आफ्रो९. 


965ए्ॉ४ 6 बिएा हीठा की९ 3 एप्रीत6€75 एएा 4०८पशणारत 40 6९ ॥6५ 5एॉ6 ठा0॑ 
गश्तांठ एा०पढ़ाए 7 0 दाह निठफ्रश्वांब एपरत९€75, 052 बंबा॥3 ॥70रपरशरयांड विवा एरार एप 
०7 ॥॥6९ (-गरा0799॥7 (ज्ञाञव)] ॥4॥) १( $8ए३74592९6038, [९ एफ्टो४५५ ० वद्वंगांशश वी दिवापरवाठांव, 
१7९ एपा। गो गिर 900॥0905% एिग्णंधांब्रा #ए४ 35 945९॥०९० 0५ ॥6४ 56379435. ॥९५9 ४/४ शा 
कावाधाहरए 779९५ 6 एांए; शाएं९८5 छा ग्रोहाव' (रा5९०) 9०९. वी 5 ताीएप। 60 धक्ए४ 8 
$वाॉ5डविटा07५ ९शफ़ांब्राव0त) (0 (5 फु्णांधियांचा ० एड वंगा5ड णा पां$ड िा. लि0ए2एढा, दंड 
गाव 02 ९२छदठांग्रए6 35५ दीव (९७ एटा 970043909, 509 ॥ व६5शाजभीतयवा[॥9, एी2 त९ए छ०ए०९ ० 
बाटजा९टॉपावी 70एशशा९टशा €शांडधरावु बाणपात णा एटा49$, गी९फ छिपात॑ पीढ ००१ ग्णंधीवा 
अज्रिर प्रांपरा [855 हाँदा0प 362०९ए०४४ 0 ढढा शीशा गांधागारा 7९ॉध8005 ॥7९वृणएाशथ॥7९75. 
शि०7९०ए९७ शव 30९7९706 0 बच्शशाए बात॑ ॥९एशाब।। ब6 6 गिछा बाप॑ णिशा0ऊं 
शागटाफरी९$ ० व एप ठेद्रा) [0 बटी९०९ 6 ठुठढों छ $बए४)070. 20047 5 श॥फूरा ला ढयां 
ण पि९ गगा।5 9099९0 ७ ग्राढ|णा 700 वा पीढ तद्दशंक्ा बात 0९९००बीणा ० 06 0७०5३४४ [॥69 , 
एणाहॉप्रटॉए्त॑ 0॥ बाग) वी, वी शापञ ए९ तशाशाएटाण्त दीवा गंग्राशोंसाप्र ० पौढ डढाए४, * 
॥0ए9९५७४४, ॥ 70 छ३७४ ॥श8टाॉ5 6 ९८०० अऑबाएर ० गो 9व7075. ०४ रत (256 
03३205 876 ८णाड्ाएपटा९०0 09 (0985, (२४९९१५७, ए९वँतवए बाते ग्रीएशातंदां 928075, $0॥0९ ० 
ज्री0णा एशा९ ९एशा ॥शवाएत 40 धाढ ॥पंतदु 70पफ्रत॑ गिाशीए 70 एछांब०९१व वांदाए ॥ ९ जीटांद॑ 
बा0 5०टबा ' ल#टए४$, ठग्राइवागा3, रडछ टढांटएाबांट0 छएशाशवबां, धातु एंडंप्राएएबाीवा3, ७०0 
जार, (७९2८७ उद्रागंवत९एं, ॥5008 बात॑ एटवी सरालीरा।5 3०९2 ट280520 ७35305 
0 0७९ ४७9७ ७४९. शा ९ए 86 अ#ंगाए।2 एिब्एंडीवा डऑफटॉचारए5ड छत ॥0 5७कुएा०0ा 
हाराल्टाप्राबं ढैणघुशार2 गाते पीर गली नि0एडडॉ9व इाज़ोट गैठ$ विछ छत ग्रग०ब९७ णा वग्ट6 | 
$8079८(07४४. . 





श््रा6 5 छ३३ (१९ ९००5० ध्सी) 2० गाणाएणयाशा।तह 00 ए9749॥, ॥ 00075 फौ॥225 
॥6 ाएबटा 0 'निठ6फ्रश्यांव वा एव5 वीर ९5५. निएए९एट7ए, एट50वा फछाथ्वीाएटॉीए्ा5ड थावे डांट 
० पार फ़्बा705 बड0 फ्ञञांवगएर्व 38 ठ९तंतागछ 70९ वा ॥6 इशैरटाला छा डाएगि|श्टांपार्वा एलश्लॉशा 
० पी छ्गाएंर, वँतड 72वें चर € 2०ाजहशफप्टा0ा छा व €रिए ऐ३०३०5 वी पीर छातवांरड आज़ड 
० (॥6९ चि०9५५७३७।४५. ॥॥6 ढद्धाह वाटा2टॉ5 बॉ50 5७7९० ठा3उ004३ै)५ 3050076 6 +०फ528 
शैद्ा९75 ॥0 ॥]शा डशाधघटापा९५5., 5030 50०76 ध्मांटी ए०७५ ७५९० गपतिरा 70 ७ए 6 ४०5 6 
दवा एंगठ $८एपौफञफपरट5 3550 92276 पीर गार्वांब छा ०ाशशापफ्रटांपवु एवी5, ट्वाणाव फंड, 
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3. 88530॥5 ७॥0५९८ 'ज़ंग्रात्रात35. 30९ $0९2]|&४ .]35. 


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0 7876 68525. ै०५०2०९४, ९फ ९ ऐणा। वा एग्एंदांवा ता पिंठफ्रडदांव आएछी23 १९०९ावातदु पएएठा 
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वृफ्ढ क्री875$ ०0 06 उ३॥) ।९9/९५$ 0 ॥९ 927700, 268 70 000७04, 48006 ॥घ77920 87॥0 
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शशॉवा।, चिवाए ० धीशा ९ रंताशा 9 087९7वा 0 93ए९ एटशा ॥200037९6 6776 थां९7 
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छ९।., &7076 #९€॥॥ 507९ 37९ 08793, 5076 3९४ 0फ538 द्वाए॑ 5072९, ए॥|चए०॥96क7॥ ॥ 
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ट०्ताब्ा$ पीह धावदुढ३ ण थी (6 24 परातिद्रापद्वा45, शवटी 3' जा वेछंक्ा, गो ए>28०९१ 60 2 
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(232४' 0 ऐशंवुग), व॥6 'पावएबावा93' 35 0९ कावठु९ छा शधातवात।त छिवावा0०९ए०३. ९ ॥०05 
 ॥07 | ९ टी िद्यात दरा4 ३ णााए थे ९ हां, ॥0९ 9९०6९७४| 85 [6 ट्ठाणंगकठु रण & 
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॥62९0 €हा९7, 376 एपं॥। 60छा ता क्रधा।€ 370 ९ ॥ मिव्णंवीबा 509|0. ॥!#९9५ 8॥९ १, 
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?47750४5४५78५ 845,40: [075 ००006 ०76 ०0[20०0 9]29 5 0८।097९5५ ०[ 574५5४३००९ ७००, 
4009९$ वि९€ आं590॥9 ॥556 0६ एडा5एछ805 रण ]7' $9 ॥शंह, ॥ ॥85 8 5८०९७ !॥00066 


शिक्षा- 809700878 88880, 578987809909, 4459 #.0. 
(0ए765५; जि6ए086 0 #70088९005, 00 ॥७५९ जा5 , ।(दाप्र्वां७९9 


५ ५ 8०48० रे 2 2 39 73 /ज4, शहर १०८ पर दर २5, 








इ९7एशा। 3000९. ॥॥5 जावदुर ट्वाए९त 6 ० व आधार 90067 ता इलाज 8 वर 0प्र 70 (2 
०९0०05595 ७० 68छ0गाध्रबां3 ॥9 वैशंधा।ा 2 उावएड270९६७०३७. रिठ। ठगोए ऐंड इ०प्रॉफ़ांपार ० 
रिक्वा5एश्याव3 5 0005$4 ०0प ॥ 5 2५5० ०शहपतपि! णांगी तशीटशर 00 (396प्रि 0९९0व075 
णा फिर 40०0606 '5८27०९॥, $८ांछाप्राश6 ऊुश्तंशडदा ए९४7९ प्राफ्भ॥004९एवॉफ व्राएए0ाबा। 7९८ 
87९ ८57ए८0. 


बकह शाए०ए९ 0८6७७९५$ दा चा९३ ० 69920 एटा गात॑ ०ा सवा ०0555 ०ा 
'ठुबआ०967]73', 'इपॉंद2॥85', ॥2एडाबादुव' बात॑ 3 ए0ठटी, "०९७ जि 6 ॥९०)ए गो०पा0९० 
जीतता गात ठ7शव 890०७ ३९४ताटा08॥फए पीटारए 5 रु ॥060ए009 कक पी€ इापट- 
पार, ९ €चबर्टा तंबांट 6 ९जाशाफटव07 ० फंड ढशाफ़ांट 45 ॥6 दाएजा, नि०एछएशा,त 5 
083०९ 40 धा९ छथ्वांगारंगव ० 7]20 ट्शा।पपप 8.0. छा 2 995॥835५ छा 2 चड$़टाए।ता 00 8 
जिंदा ॥0 ४ €॥9९. 


रा हिता। रा ॥5 9क्‍53० 5 3 गश्ठापए ९४९८टपा९त 'िवानडाधाए3' ४7८९० ७०५ 
?9॥0०एफ5 ॥ 7॥ टद्यांएापर, ॥5 50979075 ३ ज़ीव्ा९6 9१ए०ॉ०७ शांति 8 प्रारशं ०0०९, ॥॥6 
0वां ॥€ांहा ० 5 '5970॥9' 45 655'..6", 


॥&७776.६ 8854507: व] एछांठव०5 छा (6९ 95१4६ 609 (९ झा ॥॥. ॥ श९३५5५९५ 420 
# 40 ईशा, 'ठाणाववा9', [73036 गत 433' (6 #738792 |2707270॥ ० 5 4€॥7]26) 
57 0०फशा '500878554', 6 'ग़ठएदा07955 0 6 9॥975, 3 |द85९ 'औठाठुवशावा65945' (6 99059]९ 
बिक] ए७७ं॥ ब)/जाााह ४6४ ॥07।0 रण (०7075 8७७(७७४ 0०4580| ० 06व्ाहुव 6९5) 87९ (९ 
९०॥7ए०ा९श॥5 ० वी6€ फ़ाँगा छा ां5ड आपटॉपा९ए, ९ 'हुका/णावदाव9' 00525 ॥6 5९वा०० 
ग्राव5९ छा #ैकग्राबाब वीग्राएशत ऐप ग्रोवर 'टागठ्पा' एट३ा९४$, 8 बरी ॥इडटा।फ़राी0ा ०ा ९ 
7९0९८९३४३। ० 5 गागठु९ढ 7९८6065 शी ?0ट2087०९, ॥०ााशा | 05ग्रातुबागुंव ८8७५2० [5 
93530 0 0०८ एपा गरै€ा९, 6 विाचर अ#तार इटारए्शा 2त्रांबाग9 शाक्रापफ 7श९5॥76 #िटांवेशा5 
छा बंबार प्राएए॥0099, (5 0पा60 एॉच्टरत 5९७काबवातादु 6 ॥)9वा870993' ० 5 73590॥ 
370 6 30]0॥7॥6 (॥३॥0738५968 08580. 


9854, 285890]: 8 शापटांप्रार ० गरांशव छछ९ .९., 4 गश्दाए फीव्शाशारत 09008 बात 
॥07ठ7 ड॥पटॉपार 0 3 छएढं] गराठप्रांतरएत ४07९ ज़ीशयधगी, 5 छोॉवा 55 4 'ठु्श्शीवधाती3ब', ठएशा 
'इप8357., 3 'गरवश्वाबा94, 2॥0 3 'ग्रपतविवावातंवएव , [॥6 'पुठ0557॥3' ॥09525 ॥6 
45९ छा कैब ० 5' भरती, '5प्रंद्थ3$ ॥0फ525 र॥6 73925 छ| ४509 0079603 8॥0 
ऐद्वाईआआ (ीठांदारइएडा, 2 छ३ी) (९८एावाता ० ९ ९जाश0 <07888 06 205९॥9 593८९० 
एंबचह75, ५8908, पीद्ा3' 00ज्माह गंबांग3 607९5. 086879]93, (९ 3४७6 ठुशाश)9। ० ताठ 
एाज्नागापण्कावीक्षाह ०जी पिंड एचचचताी श्राप तात॑ #6 दिए दाधारदत 8 शंद्रवर 0 
(5 ए[ए-7229. ॥]6 0ठ5थ०ी 435 तं€ट7५९४ [8 एा९€5शाए तद्या32 722850७8 ता [6 [7285९॥८९ ० 8 
48766 डा070९ गइटाफ्रा0) णए" 7]8 8.0. ॥ गिणशा जाली छावॉ25 वा (8 ड/फ्रतांपाड ७४४७७ 
"पा 0७ए प्र४ फठातवश बात ज्रारि छा उद्याप्गागुं3३ ॥ 448 8.0. ॥06 7९६०त ४४४३ €7१धा३ए४ते 
9५ एडाएावावाहइटीवा 345 ठउदा6दवटाथ।।१. 


डिलैएला7764्रणल54ए4म्हा७ 88589: हााड़ फरशीकपएब्रातीदाव $टांगंड कृघशहा कद्ा850९०, 
प्रा।6 शैदत बी€ तरीडसंत्रटएढ स्गाश '5चद्वएवराध्रगरादीश्षएद्रा3' ( 4 709 डरफरीआ 0 76 ८0- 
प्र/ए28) टद्वएड5९० ॥ >3$864 40 ०९ 0पा गैशर शात शाहीश॥९0 उद्धव (जे 4") 5९४९० 67 






व छा प॥णा6 ॥ फै९ एश॥ 4423 8.0. ॥#०ण०8॥ 0७ए॥ छए ॥2 टांजंर्ट तृपटर॥ रण ऐ।6 कछडछा | 
7०एढरःपि +0फ9इ्ववांद गराठाबा0॥, बाल्गॉ]एटॉएाबीए ढा0त॑ बाविशाीट्योप्र जिींड एच७ढती 45 थ4॥ 
3ए2९249९ वचगाए छठांतिावबा5इ४9, (उद्बाणावधात8., 'इफैशा35',, तरवए्थावाए3३' बाश 2 ८07- 
$ए९॥5 ० ॥॥6 9]87. |7 [06 '5प्रोन्‍्धा95' छा€ [6४ विघ्रपा९५ | 5राएगीबा4३ 20 #ाक्तती६9., 7॥6 
'जिवश्गाबाएव' ॥व5 बार छातीतवाए 70 गरवा0॥9 9055285 (6९ 40५95४४ ८।९०एु37८९. ॥॥#67४ 5 
350 ३ ॥#ग्ा96 फुप्नावाओतक] साधा -०एछा 40 (6 शा्र०, 7९फु्द्या।एत 5प>5९वप्रदाफ, 


पष्दाद्ाइ& 855840॥: ॥॥#5 ॥5 8० ॥5 गत्ा९ ०९८३७३९ ० ९ 50 ८2॥९0 'टबा-0४" ॥3$5579 
ड0त0९ >गििा 6 ऐवाॉीएजी।ड' की ता ० ॥. वाह कँधा एगांबा।5 3 'ठुआएणीठकुएआीव, 8 
'उपरर्ा3ड! बात 8 परावण्थागाव4', 7॥९ 'धराएाआ०७४॥३' ॥95 ९ |ावदु९ ० उन्योपशा 6 5 
गांधी, वी6 'टछा' 707 ० 6 935व0ं 5 टकीएत॑ 'बादात॥३', [७०0 289525 ० 'धाहात 985 
37९ #00णण |) बेंगंग्रव ॥बती!6ग एंट,, पषिवाठ5एशव' बाते 'िंटा५', ॥॥5 ' ८७7 ०2०॥0785$ 40 ए€ 
"भा 2७557९]6 2075 6९ 72॥2705 छा 52 गधाव8 ३0070. ॥7॥5 ४७५ धु०णां टथाए८ते 0५ 
४०७८७॥४४००९ दा06 58002 ध्राण]९75 रण +०ए5व०३ इशांपर 0 पिशा5९(ए 72892९0ए2८फ 9 
फि९ ए2०७४ ]77]7 &७.0. ॥%९ एए० 5075 एद्यार्त॑ ९72४ पी९ 0फु्व एशाटीछ05 0० दाभत 
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5/#र775920745 885890]: 8ण0॥0 90080०५७ ॥ 7447 8.0. 0ए लाए (९४४८४) £८४7999५9 
इ0ा ० उिवशधवागावब ९ ९6९7 ७7०67 ० 902768743]43. सी] दल्शांगशवफ्रफ्क ७8६8 3450 
7९57078806 6 टणाशापटागद सी€ #एदु३। ए85व० ढठां गाग्राबधा99ए३., '(540॥967]॥9 
6छएुशा 'पौ3939', 8 ॥5एगावाएव' ० ]0 फा]ठा/5, 8 /एतरिगागाबातव99" ९ ० ९ फ्ांठा ० 
5 ए0४॥०0% एच३बती, #ाटला॥९टॉए्चबए प$ 98540 $ ॥567#ीटवा, वी व्िव5 6 डइध्रात0॥ग0 
प्रा55९ छा 5403 (5 .2" सांदा) णोंदोी 5$ 2४४8॥76. 6 9720९5४॥9) ० 6 7382 55 
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पृछ्0 गॉरशातववा वाव8९5 णा 8 67 9227006 ९४ बाॉउ0 छिप्रात 60 6 ए० 5065. ॥॥6 
'इप्रर्या35) 935 [९ पर्छठां वा5उदु९$ छा इबाएथीशाब फंवॉड5द गात॑ #॥000 बआ)।, ॥॥९ 
छाग्णताबा] 70एए९7 णएा एंटी 20 ॥रठावा 435 408 45 06॥93] €४प7९५. 


बाष##ात8/णशार283: फाड जावपर 8 आऑपवाॉशत 80८९४ 0 55एथाएशेवु०098, 70077 ०0 
स्ााकबाण०टा4, ढद्याइु&व3)43, एटारावी ० एक्रापरब्रादादात 5 उठंत 0 ॥43ए6७ एपफावं80 (गीं5 
जाबहुर था ॥8 ०ए९ट्लगगागया[द ० ऊँ। एएमश्राॉपाए 8.0. वाशार आर [ए0 935395 ॥ 5 सोीव8४. 7॥९४ 
विश 076 5 96९ रिव्राश्एबगदा।3 उठडवती 67 #९ट्र४। 03580 ८895९० 40 9९ ०0750फटांट0 ७५ 
हिटा3, रांतेंशा 97णीडशा छा ठउथ्याचआ9])9, ॥ ]]35 #&.0. पक्नांडउ 5 3 एशए 0त797ए शाधए्ा ० 
प्रा४ नि०प्रड्कांव इापर वैदणात 3 'घुद्याजीबध॒ुश।3', '5फगावडा' वत्तत व गरढणदाधातु4', ॥॥6 079 5७/ 
जिाडतुर ॥ 8 'ठर्वा0तधचुत5' 45 5808. जिशंर्ठत 3 रिवाइश्शाली।8 358९४ ए०$ 54680 
676 40 [889 ४७४ 076 उिल्योफँवांवएए०. ]्‌१॥९ €गाए6 380 ०एणावा$ (8 40092 5८फ्रौफापा25 
24 पति दायड, फिक्ाबगराती3, एिवता।एजनी, एथाटीवफकद्ाभा०९४5,.. पिवए:त९०३४(७१५ 
बाव विडाती छा्यप्रां 707 ९२५७४)९१६. 


5456 80958 07: पृफ़ांड 935च0ी आपियांश्त [0 ४ ए९३ 6 तार जबदु९ 5 06 तडा॥ 





बॉव32८90790 ० फीछ छॉं5०2., ॥#5 छ85 ए3७७2८० $0 ७९ एछ७छा( छप्) '४३५४घ७०ब्रोइ३७306)0504 
रिरटाहइव93, 3 खध$इछा ् उिद्योंदांव 0 ॥ 70० 2200 8.0. का$ 93530 5, 9९४१०७४०5, "९ 
05 0छाववांट एय5805 एप ॥?0 6 टाउ8ट्वा निठफ्रईक्ाव णाववार ५9९. 5४८९४७॥६ (6 
'ज़ाावाह "न0०फएटा व जीरा 2077णाशा5 0 5 शाएंट रद 77९5९८ए०९८१., ॥7॥6 ']१6०', 
'हुब०94709' रण शंशीवांर फोद्रा।, '5एबाव8', परदण्बाबादुद बार शीरह 2079०ाशा$ ० (5 
(€79[8. 7॥6 एए३| 5प्राव०९, ि०एठा। ए5508॥9, उश्टाॉंग्रादुपांका ८छां3॥5 75709 ॥0४॥43075. 
रिरतुपांवा' 060074075 ० फिशं९१5, 7८९5 पी) पघि।शाॉटत 2७0709025, ए०॥ $00[79प07९5५ 
ण बए९ाव5९ 3' शछंध्वा, ॥ा€762९76 ९८९९०९४ $270॥5 7पगधधगा।द एट/आ८3फए 9 6 ॥7९75)98८९5 
रण टोठइटोफए 59३८९८त फ़ा्रशा2ट75 27९४ ९४८टी९४॥।फ्र वावध्ोीएशत गात॑९४९८पांएत, ॥॥6 $प्रतीष्टां 
बाधा ० ९5९ वीप्णा९ इटणफ़ापा९5, 5छथााधव ॥6 वीकीवाहिगाव5, बाए तैद्योाएटाइना3ौ९ 30 
(०९, ॥) 0शि९ए॥ 90525, (0005 300 (500608255९5, ४६8॥85 70 '७९5७॥]5$, 8(९7॥७97(5, 
'लाहप7' छ९87९१5. 2 ६९52 5८परॉ०(पत९5 गाते त९८०वॉए2 6९३65. 50 ७2४एॉापिए ठा0 
त९ीट्डा९फप ए३ए९० व! ए९ गि06 €४ए एठआव3।6९5 ॥ [॥९ शा दुवाप ० 409543]93 5टप|०७7९५. 


[छ धाढ९ त€ांहा बात त6९0ठावांता ० 6 गांटए/05 दवां50 व धागा 0९6९९ ० 
€#0९॥९॥९०४ 5 गाधाादा॥20., वी6९ द्व९ प्रागरत क्ञी975 ० ९ '9५ए8/97683', 02 607९0 
शं।॥व5, पीर एव! प०५2९5 ७6 ॥षां। धाः€ं5 ९ 8॥ 0 5पएटा७0 0७७०७ ए078097509. ]॥९ 
'दुबाएी4367/3' 0प५52५ 6 अंवावांगरदु वर छा उावावा॥43, 


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5९९३7 दा एिणागइलआ00678 ७ +93९०८९९०७, [९€॥ टव[आ3| 5९३. पिटा९र 2९ 722 093590॥5 ०७) 
दा 3 70% (0णएवात5५ ९ 50ए50॥ ०06 ४ 0958|९५परदराठ (९॥96. ॥#९5९ 938530$5, 8॥09 
ठ&राट्दों ॥ एगा ब0व4 $प९९ वाट, 7९ एा ?5०ग्ाव]4 (!33 #8.0.), $थाएथ 8 
(]496 8.70.) द्ातव॑ 89793 (8000 ॥6९ 5$27४ 9९2700). 6९ रि्राइ5एडशादा]3 085404 ७७५ 
60०7शापट।९6 09 80978 $5०॥ ० 0478973]9., 77 ]]33 8.0. ॥ (6 इच्या॥९ फ्रश्चा 50॥ 
षिवाउडं॥08 ४७३५ ए०7 0 शांंज्ञातए7तीवाव, गिद्याट2, वी९ स्राव वदग४त 5 93580॥ 35 
'ए]]8५४ २75५७. ॥॥6 कराँचा ८णा$$5 ० ३ 'ठुग्णावद्वाएव', 'प्द्ाव5ी बाते वावश्वागावु4'. 
वकह 'प्रबाए0387॥97 0952५ व गे गावहु९ ० रिवा0एगरावावब [((4 6४९ गरिदा)े ज्योति 9 ॥00420 
$९एवा। 800ए९ ॥75 ॥९58. [॥९ एवढा। 5७7८९ $ ए23(एते ॥ 8 ए2८79 हाव79९ ए७०. 7॥९ ५४७!५ 
बार छॉिगा। ध्णीत की॥ क्रीं8ञाटा5 वा 7९दु्वावा गाशिएबीड वात बार त6९०0०0 छा 879 दा 
0(९८०079075. [॥6 फॉच्रा5 | धी€ वाठण्दाबा95 7९ ९४८९॥९आ।ए ८४5९॥४९ 270 90॥5॥९0. 
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लसए्ाटत4&; 8 इफ्रर्गा ६टएा 09 पी९ निठइद्गावदुव75 छाप छा उत्तांगाठववुव वा४ा70९०९, प॥ढ8 ०90९7 
॥9॥7९5 ० 5 फछाॉवट2९€ ब7९, ?िएाएप्साटलीव, शिब्वा-रिग्राएफ्लीटीाव, जिछाएपुद ४2८. ता 6 
०शचांग्रगा06 ० हैती टढ्गांधरए 8./0. 00 460 ८९॥ए7ए, ह5 फबट€ फ5 30 92006 वंक्षाव ण897॥ 
एशाए९€, 7॥5 ७७५ 350 शि९ ट्वज़ाँब 5९वां छा ९ 5607935 ० उक्गाग्राह९-१000 |०एा८०. 
वाहा९ बाए गाबगाए 045965 वैदार 0एाते | कॉडिशा। हग्वु९5 ् 97९527ए४४०१. शरद ९०४ 
बा076 विश) 5 वावर्ण९ 40 ५ 850 2,090. €गाएव एगन्रीप्रगेछेगाब ०3३३१), एगीटी 70 णाहइुर! 
€ज्जंड5, [॥6 76€798॥75 रण रि्राइएद्रा4005 800 438[९-७०३5६4५ १7९ जी 40 ए९ 5९९॥, रिालीवपात 





958530]| (गा 'द्वाछुरशं 3006 (6 945०५ ॥९7९ छब३5 ४७पीं का 3077 ७ए एशवॉपबां्6९ए७, 7॥5 
एब5व0 45 7606720 40 ॥. 08८ट79075 3$ 'ए/५0॥णंप्तीबत।, की 7िठ्ा ता एंड शपटप्रार 5 9 
बी ठाबॉट पराक्रावडाक्षा।09', िए2 'दुबा जाधव, एच)! 07 3 ०0एशगणा जीता शातब9९० 
था 3 709 0० 8ए6७ 8 00०गञाधता गरवश्बादा5ु3' 2॥0 वरर्धाविवाशबात393'., 8 0ाांदांगव। 
$2परफएपा25 ० फिदशावावांतव, इ््रांवाबीब 20 एद्राइसशाबी4य 079 ढा० 7॥शादात6 | ॥6 
हुद्गणाबदाव35', [॥6 09530 ॥85 एाठेशाहुणा2४ शापटी 72095. 


छन्नाद5 मल. 55065: ॥795 एॉगटरट एव5ड वा गराएएकांगा च्रांतव 5शी।शाटा। आ८€ पी 
व्रा९ रा गीढ 05ब759345. #हशा ९ 5गापु35, 6९ एशशाहवाएव5 एवगॉा07स्‍560 तक्वांग्रांईत) 27९. 
हैवांगनी43 03530 ० 5 एस्‍382९, 5380 [0 #5ए8 ए९६४॥ |॥583]९6 ७५ 57 शिद्वा)3 ७४४४५ 
722ट057पटॉ26 एप एव रिव्वुशात075 पिदयाय (ाशाहु34ए9७ रिह|४7078 (0व8, 3 ४१४09 ० (९ 
(॥०8$ ॥7 >। टशॉपफपाए 8.0. ]धांड छठ55409 5 4 (जारणांब्टीबाव' 7९एवा7९०१ ठात॑ 72600$79७0|80 
ग्रा 7९८९४ ७९७75. []6€ ऑपटाफार 5 ० ध्ावा[९. "०7९०९, 6९ णांर४ 000 गिशा९५ बाते 
(6 5८७७७७४5 ९९ वा बा९ वात ०७ ० दढा6ठा 56६5५. 7॥6 0९९ 'ठुआ9487॥99' 
#09096 लैादा4ब, $ब्रपिवाव काठ पिशाशावाग43, 0) 8 'दुबाणाव6ढा035' 48फए8 '»प|दा355* 
एकांटा 09९0 03 ण्चा3209832'., ॥॥6 5प०९०7५ह7पटापा९5ड 9 (652 '6४70॥5877835' 3९ 
००॥7७9|2८९८।५ [0». 


बातववएडए: 8 (0णा 0 500७ छाप छा इच्ाफफा तांशजटा कै85५ ७0 0796 5वगरॉा5एच्राव 03590॥ 
णा तीछ 0फ5ब4 ए200 (0. ]2॥ एशापाए 8.0.).'537ए]467873"  '$७४६४739', तावएड27/9768' 
वा णैदिीग्रा]47043947 ३7९ ठिफ़ात॑ ग 5 (€79|6., ॥6 फटागाशा। ० ९४ ९४८४४०४ ॥$ 
पृणां(2 0743४ जाए 4 ॥0प्रातरव 'बतानशग्रद्याब', फरवशरशा९त0 एव, गांटीा९5 पज्रगरी ॥077९7क्‍5, 
बात णीश ]09] एथाॉ2775. ॥॥6 06७ ० 6४ फछव]वा$ ० विी6 वरावएावबा93' 37९ एवांटत 370 
वबॉफ20०९, 7॥6 'एाएज्याटइफ्रवा5 बार 4९९०७ गात॑ राग! 709002 0९८०7६०॥५. [8 
*दुब्ा0897॥5' १0705९5 2 वावद९ ० धइव्रा7474. 


#855४&58छ852: 58॥558798/परंव उं438फ्3 ० कांड 0जणा 5343 ए९वपाफपि। गेग्या।ब 03594 6 5039 
807९ एच एप ऐद्ाता5फ्ब४8 रिएटीगरा7॥43999, 3 छशाढःव। ० नि0फ8वाव सिगाठु उिद्यो]गेव वी था (6 
छश्वा ]220 8.70. व॥€ 5०एाफ़ांठा ध्णी० अप7थटाएं5९त ९ छ0ा+ ७३५ िठा॥0]37, ॥॥6 फांधा ० 
वीर 03530]॥ ८ट०ाअइंडांड छा 3 वाठुर 'ठवाणावद्ावव' जाती 4 फॉगा5, 9 '5फता35' छा 72९ 
5007999७5$ ००९७७ (0० ॥९€९ ९९ ०३५$ ० ॥6 'रबश्वाबाएुव,, 8 रग्श्यवाधु2', गा 8 
'कापाधाबा।8॥0599' . वृजा6 पराहएश्बाधव943' 45 ९ शा0/ वॉप्बटॉए2 छुवा ० ९ शातिर $2ीश॥९. 
वृक्तह 6प्ा दावों ज़ावाड बाव वार गांगर ऐएगएएद्ार5एडा5' 37९ 0 फ्र्ांट्वं +40५95438 
छ0/दागा5॥5॥9. रिकर८फावाए ॥06४90779 5 6 ट्शाशाब 'छएएएवा2ट5ए०वा।' फ़रंटी 5 97 पी€ 
लिए 0 8 75९ ाएशा60 0प75 4092०7. ॥॥06 ठाीशा '97पएए6९५०३४7४५' 8०९, ७८५४०८४४ ॥|6 
पञपरखा तं€८0क075, प्मेतेशातवि९शव॑ ॥843096€ 7९2९5. ॥॥6 'दरुगाणावए7क्‍3'  ि९ टशा।&ड 
55 8 '5द्यीोशावरैफव ची3 णााएड' ट0रांगरांगांगईु 4008 क्ाप्र 70972९96्रवां।075 04 ती35 
स्वाए९तव 9 8 ॥7ता0ापर2 टणाएलाणाब। चबाएविशटफाबा 7006, 7॥5 'एंग093' 48 52760 ॑ 77 
गाते 720008 धारा ॥ एव85 वीडॉयबॉरतं 099 रिरएटी373556 ॥ ]220 8.0. €ाजशांधशा। ट०णाटी]67 
एचांबटापा। तफ्राबडाए, गत 7४0९2 प्रातरशा उद्योगों हीं. 


वृकह एच5१०!ी 35 फावशएुणा९ गरपटोी। 7९9वा5. चिंठश एगा5 एा वी€ ९एॉटयवी एथी 





इधाविद९ 5 72९99॥॥. ॥॥6 0ज्रश छा (6९ 0ब9430॥ ५ गांजा. 


पान-#ाहार एटहाव070 (एर4११२,७२७०१४ #जरछ ॥.4788 एशहा005) 


बंगंगांश। एंटी शा|0फ९१त व धार 7289९टॉंब0७ शंब्राप5 प्रातंश 8 फिदागे एथाएा- 
488 ० धी९ लि०958३५ अ्पधटिएते व 5९ ०2८४६ तंपागह पी€ एशपंगांतद रण ४ ए]9फ्रकता8ठुबाव 
70९. ॥]5 ५ बएएचाशा।ए तैप९ 40 धार इपततेद्या शाशाहुरा०९ ० एरटशावडबाफ॑ंंडा ०7 (8 076 
अंवेड बाते 50 एढंत्राबरंडा। ० 8४ एगीश, फरयांटी धशं४।0९त0 2050९7490९ ग्रीपशाट82 00 406 
॥प्रधादु विधष्ांए5 ० ए8फ्रग्रावठुणा, 0ए0९ए९, १९ 20आ०5०फ्गाता 0प्री06४8 0०ा 50श९ ० तपाढ 
ए9प्रथा35ग7 पर्णघंशा5 ॥९92०0 0 गाता) ॥शीवंठप वीगप्राणाए का ॥॥९ €)ए7९ 300720॥258, 
पा०पवा एशाइगाबोीं वाराशिशा०९ ० 6 ता95, क्‍/0 इशॉ ि6 7शांहांएप5 ८०णाी25. ॥5796 
० ९ 7टांब्वांठ पड एंटांउडापतव९5 पीता ह6 ऐेंबं75 ९१9९7९८४०९०, ९९ ए३४५ 70 त९&0 ि पिता 
एाश्वाए९ ए904प८॥075 9 ९ वक्‍िश॑ंत ० विा€ ७5, वेद्वा।३ 722९7९6 5५०७० 70 793(707386 
0 9९०४९ था। ॥एटा5$ दी।९, ॥979 ॥९णए 085805 ए९ा९ ९८07हराफप्टांट6, परवाए 600 7९फ4॥60 
370 7९०९ए९० ॥॥0€१४ 8975. 7]95 [8276 $2९735 40 90९ 09४७7) ॥॥0 ॥769 07 [॥6 929८९। 
2८0-९१४६४१९॥०९ ० 5 हशीह्षंगा पाता पा९ फ]गिप्रव्रमावठवा पाठक ॥ 50प्रतीषा। दिदयागवां॥9,. 


पफश्€ ढा९ 5९एटाठाी ॥5ट7एॉीतठावा 7एशिष९ा7९९5 0ा ही ८०#7/पटॉतगा ० ॥९9७ ४9 
७१580635 ॥ गा णांड 7९दंणा, 825॥065 25९ 6 ८0ए॥श/एटॉांएा ० गाए पर06 935805 43०७ 
धुणा९ पा९८०/त१९० ०07 परग00९९०. [॥९ ए|9फ्रथावधुबा 2५0380725 ॥॥९ ॥९07693|795, (.॥97093)035, 
(5९7५5097९८ 7५]९7$, (९ एब्रा005 घाठावब[742०॥05, 73997095, ४४0०९५३॥५ ९(८., 3850 >ब7075९0 
बंबांगांशा 0शावए, ९एशा ताहा 6 ०0॥49$5९ ० ही€ एशाएव। ए०णछदढा वा िंद्ाएव. 


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[8 (00९४ गाशा।678९व बहुद्या। ॥९7९ दीं ही९ इुशाशवा! इज ण वालपरॉस्टाप्रार ० 6४ 085305 
एठ5 ॥ 0 ७३७७ तां5897॥67 40 ९ वाट्य|एटॉणवबा ॥ए९ ०07॥6९ उिदीगाबा।टवा 2९९०, 767 ॥॥6 
परातवराहंग्राताद छत 6 ९०गञरीदप्राबवांता ा ॥९ फ्र्रांप्वां 3गा8 0953045 ० एॉ]|9फ्रव्गावदुवा 
एशा00, छ९ ॥99 3९४ ॥॥6 फ्ाँग्रा ० 6 ९टंड।त0 0ग्वाववा।। गात्रावएद वा दिगाब।वएपा वढठा 
विद्याफ़ा, ॥ टणातइड४5 छा 8 'ठगाणीवदा]]3 , 3 प्रा, 8 7वादादयात॑व9', व 5९९०0 
'प्रगाध्रबगादातंव[90' बात॑ 8 ग्राप्रदोगादात॑व99 वा द्राव॥]5छ2९0 07 ०0॥९ 4%5. 7॥९ $९८०॥० 
*'7879वव्रा0394' 200585 ० [72९९ 60079895, ०0॥) ॥5 [7९९ 5025, (>> (€॥ 00४ |९७०५ 
0 93 'एद्याजीवधात8 0 0९ डइंत९ बातव॑ ॥6 ठ67 [छए० 09९9 40 ए.४ 90700९$. ञागवा।५ 
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एप्रीत€75 80 06 96०9० छि [त।ंं5ड (एए7९ ० छद्४व१5. 40 [0९52 ०85305 ॥ए८ 8 फफ्राक्षा।तंदा 
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चाह 4९4एफ ह्वागदिं। धीठां एध्र5 उश्दांणा 7220ए४९१ धागप्रवापर, शी९ इडापटॉपा०5 एशारट 9छएं॥ ॥0 
शांपिडगात॑ वी6 07शाएवा 735. विश्ाट्ट ०0५९ पीद 7९छुपांचा ड/णातु शिदागर एएा॥ 870 ८९४॥॥7७ 
् चार डापटॉपार, व॥0067 डठा2९फ़, इशाढावॉप वठा पितातावे, गर्व 4 [659७९४7 ९897 ७४०5 
छपरा, छीशा 0ए९ 3 ४0००096॥ गि्रा॥९ ४078. ]]॥45 ७85 ट0ए९/९० ७9 8 (७0० 6०. 67 ग्राहदा 
९९5 6० 0ए८7३9ए॥9 डहंजार 3805. 50006 €द्रवागएंशड ० 5 बार प्रात दांगाठह ही 6ए९ 











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50एा। एशाबा७ प्रीडगांटां,. ग ीड फॉचा एा पी९ इसएटॉफर इशादशानीपए & एवाएणीवछ73 , 8 
'इपद्कत्र85, 4 प्वएद्रातातवु3', 8 ०00्राउब06व एदाबतवतकी ब्रौाठपात इछाफंगतु 55 8 'फराबवडी।]।त 
ए94%93' 35. ७शी। ७5 3 एलटी) [0 फारएडगो धी९ हां] ॥07 दिए पिच शापटांपार, 


* 0 (९ 7द्वागठ परठाए्ाढारड 02 5ावतदाएं चीघर्ांवए३ 5 ए2श39$ ४ 708 ८0749९।९ 
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9९5८४।४०७८त. [7]5 ४७५ 2०$7फप2ट0९0 ॥ 6 ए"७7 ]385 छ७प ॥993, 78४९7 ० छेएंकठ वी, 
6 ॥ढांध्वा रण विद्राप्गाव ी., वह गाइटॉफांणा ग्राद्याकणा5 विंड एव्डच० 35 दिपागीप गातवाव५७. 
एफाढ हित 600793ए ॥35 8 $5ग्रावी इटगांटत उंगव प्रा8९7 (छा४९ प्रा/एारशीव, 5 6 'वाबां३ 
जाए, 650 पी९ एॉएं: 306 वा0/॑वा फुबाबएशं गी वीणा ॥85 अंगीवा शापीबवाटठ इए0टट0 
रींत35, रि०३४ ० ९७ हआाएटॉफपार 45 3९एठा6 ७ 609 86४८074/ए४ ८७/एणं॥५५. 


छएफाग 8 शॉाब्प्रगावव्रवा 9९700, 57937373028098, 3/830 7९८९शएश्त॑ 70फ9) 3028॥- 
(07. ॥॥2४ 'िद्याएइु39 एवठत) ० €, 4325 8.0. ८0७॥$४7एटांरत ऐप 3 09 ० धीठां गरधाा९ 
2८0795455 ० 3 'हुद्याणाव्द्वाव93' 3 '5्पदवाा35) वात 8 परगण्वादा953', ॥॥2 3एशागठुव" 85 6 
डॉवा0काद 43598 ० रि्राइफादाी।व 674९१ एज ठीता।30९ए, 4वए९०९८7 ० 2९००४३५७३ ! (7406- 
22 8.0.) बा 6 बफ त$569फएो6 ० रिवाबलीबरए३, ॥॥6९ 70ाप्रशाध्याड ७ शावर्वावएणएटावुटांव 6 
पिंड 9९च०9 णा पा९ 9९ ॥शं 2९० 0॥व्प्रसं$३ वकिबांइवाव 94530 (648 8.0.), 00664/ 
ए4540॥ (4॥ (टशापाए 8.0.), (कद्यागब्रागवब एठ540 (2.667 8.0.), 5906]|#न्‍73 973530 
((,.]7-]800 (४॥।ए७४५७), ४४०4९८ए० परदा0478 (634 8. 70.) ९८. 


पक 96ज 30 एछ फा2३९ए०४० गेगा।ब ॥0प्रागशा।5 छा (5 9९700 वा 0८ठांशव 0 
वीर 506फ7 एगादावब ती$70, फ्राशार व #पशाएटा ० ए९व्वाएिं वव0 ३९४ी)।९(23॥फ 5५०९४० 
बात बादाटॉप्राव प्र अंदुर्"णी टवा। 035305, 7क्‍000076 38ठ7फ0वां हवाॉध९5 70 'चिंवा्रड था 0959 
वा९ बएवां।वोँट ॥ 86004 हप््ाए९१5. गा] | पै५ 76607 ० दिगशवाॉव4 985 ७ 7९700 
बाएंधदृपा।ए, वि०एए९ए९१, वंद्रांगांड।॥ ए2९टथारए 8 तताववा। 7९ीहुंता 079 8ण्ताएह 2 86 
नि०५9४48४ 270 एा|ठिफ्रव्मवध॒वा 9९095. ?0%णॉदा।फए बात तांत्रवांणा 0 ९ फएबंशाध्रवण्व धा0त 
ए९€€ाउडदांएव ८7/९९(५ 7 ॥॥ 6९ 0९८९७॥ छ98९४6७ एए55 927॥395, 725090705600९ 60 ९४ ग्र5730057 
छा बंबा05 70 6 3046 0 660 5 20984 छाँद्रा05, एा20॥ 9३८९, 97९४395, (॥९9 ०प्ात 
॥7076 5घ्ााविएणरट 0 फ॒पाधइणएट पाशा 7९॥80पफ5 धर ज्रांधी०पां फी९ वांसारट/शाटर छा ताश 
पठांग्रगां ।शीहांएप5 5९८५. 


ब्ाठग्रतुडं 8 प्रा7ठएडार्श च्रांगिव ऑपटॉपार5 छा 5000 एब्शाढाव ९ ॥राएापश्वा5 
(एवं ७45३० वा वरपवबणशतार, एतव्प्राप्रतिव 98590 व दिदाइबांव, उद्राइएथ३ 09584 
गा एशापा ९(८., ४९३27ए2 59९८ांवी वॉशाधिणा- 


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गि€ बेंब्राब एव३वीं5 ० 56पग एशाबाड तंडंटा- सी छ३७ एप 7 4429-30 9५ 6 शाएटरा०7 
ए८ण्बाचफ्व ] (]446-67), 8णा ॥59४ 8 0५5०४ शाट०0577 , तग5 डपटाएाढ )95 9 'धु०0०08प979' 
गाए पा।ए९४7च्जदुद्दातव॥03945', ॥। वाप्गाधुरत॑ 9 पछ इल्याड अडॉ5. 6 785 ब्रारढ गव्यारत॑ 
गापभ्राग्ाऑद्याबा65953, ठवतत65 गब्गात॑वव बात॑ "कत्वावात493, #67९ 5 3850 8 तंरावाटीए् 
एग्जाीएणा 09 क्‍0वयों छा 6 0ब5१० ९०बीरएतं छिकावउतं९्णे क्राव0993., 78 ४७३5 ७छा ॥ धार€ फ्रश्ता 





बफढ क्रा४067 छा धा९ ॥35 ० ९३5४ 'शाठात॑व9३5' ८0गरांगा 8000 #प्राएश। ० ७9975 
जांटी ब९€ दाठजशा छा विढां! एशवपांआाड व्वाणात्रु5 ब्याते एशाइवांदीाप् ण 0०८०0496 6९&ंध5. 
एग्ला जीग गा 3९३छ्ा बाते 66९८0गाीतठता, 5 वाॉडशिशा। #ण7 [#९ 0/8९7४ 300 70 ७० 9॥975 
ब99९वा ९ इद्या06 ॥ प९९८०वाॉंछठा, [#67€ 37९ 350 ॥९2९5 ० 5९८एफएॉपा€5 7प्रगांगएठु ध।0५ा0, 
6्वावीएत॑ 85 इट९ा९5 ता) पी ठंडा रिप्रावाव5, 


द७पा<8.5 : धापबांस्त 49०७ गिी९९० (709. #णा शैप०३०॥१:४ (8 7]80९ 8 ६7007 
607 ॥६ वी ग्रागाठआगरट शाप छा 8िद्गेपँव, गाव  ढउद्या33 0354045. 7॥2 (एफब्रपगापाँती 0 
(टआादापाएएंत) 03550॥ एफी।  4587 8.0. 8 वा बाटभाएटापरावीए ॥९7९8076 शॉपटाएा82, ॥6 
इचपबार इवा0टापा) 0985 ठिपा 00059995 ०0एशांग्रह [0 6िप्रा काएटां005, ठ70 5प770ए0066 ७9 9 
_शॉविश्त एटाबा0वगी जाते एाणु॑ंश्टातदु 7ण.0९5 ० वे 6 ठिपा ४665. टिंवटी) 0 (९ 0007939५५ 
ण॑ 6 'दृद्ाजाबदा3' 09९75 [0 8 70ए ० [९९८ वउ॥935 एं2.. ाह॥9॥5, चिंठाीँव धा।त॑ 
शिपा5एसगांव ॥6 ]80॥, 90, 370 20॥0 िधवीवाबा35 7299९८९८(ए०९।७. &॥ धा९ 607 5९५ ० 
चठी5 बार ८2०९० ॥ एछांवटएड्ॉणार )0 36९ 00॥॥6ट86 ॥7 582९ बा0 ट्वाणा95. ॥॥6 700[ ० ९ 
इाटापा 5 वीचा, 060 ० डणा€ $405 धी९ |जा5 छा एंटी व९€ ८0ए220 ७५ $(000€ 705. 
पर एशागावतशी 435 3 5]09९6 ॥0०स 3#0फ्रात॑ छिपश्तव॑ ७ ०एशाव09069 ४०९ $)३०५. 


एप्ापएफ : 7॥5 9|4८९ 5 हपिव्वाटत 300७॥ 20 ॥#क्रा5. 077 'िंप्रतव0॥07€ एरी€7९ ६ ४७० 
गिगव ०8538045 व90ावा। छा धीशीा आप्टॉपायवां 5ँ92टांग्रीस्‍९5५ बार एप, 5द75एव93 ०3530॥ 
९7९, 0966 489 8. 0. $ ३ शशछॉ९ एएजी। ८0फ्नाशिरपफ ठप छा छाणा९, वैणाावु 3 5९८०० 
50९9५, शञा।हा ॥ ३2९, टठाद्ा]तादु 4 ८९8, व0प्श्रातु गिर गरा396९ छा व गाव, क$ड गाशी]00 
णएा एपचां98ा69 छाटाणाब। 2९०5 6एशा पी€ छुवाणीवदुतवब' 5 वा 939९-00 9>26060९ छा खेंब्वा$ 
ही वा 35 ९जंतट0९९6 0प7 ॥6 चिं९ठुपां ४09९ 60 006९ वाव॑ (ीवएप्रातं9फ्रव 0व5व4 
हा। 98ए००7430९८।509. व॥ा5 ऊउव्या[$एच्याव 0एव5व३१३ वौ50 55 4 ए९व्पा।0पि।, 'व्रावावशंतवाओीव | 
[707#[. 


छ्त&7708.: ॥॥९ (फगातावादा९5५०३/8७ 93530] ९7९ 45 8 #प्रटए९€ ॥009४07709 6 5 
जि) 370 रॉश्पता0णा, 6 शाशएं€ह िट९5 रचा, वी ९००ा8ंडॉक ० एछ० 5घ८ॉपएाठी 0/0८॥5, 
९48९7 वात प्र९॥ञ९८ा॥, 0०00 ९0०॥77९टा26 0५ 5 शव 790०॥. ॥॥6 ए९७४८॥॥ ०02॥६ ॥835 (९ 
8॥77€ ब३0 ए० ॥95 0पफां। कुबाबी९॥]५७ ३८7०055 6 4३5 ० पी रशाशु॥९, ॥॥6 वों5 8९ 
एा०ण३९१ ध्ंती 9९४/079020 इडटा४275. वधं5 एछा०028४ 350 45 820 पुफएशा ४0९9 ८0०९९ 099 
व एप्रागाांव॑त 700 छिगवा&त 6 0०९27।७३9०79768 5076 5905. 


वाह €ब्डाटा) छा०८ं ज्टी 45 ८075फ52ट0९3 ॥॥6 8 'तंफ्दावाबातं293' 07 (९ 
(शाए[९, ८०एांधागं$ ॥ धार गरांवत।€ ब 97050 ठु९छ३०, उपज। 07 3 फरञा०ठप्रांतेश्व $(078 फ्ञराधा)), 
॥ ॥95 ॥6 छठी 5046९ 7९॥2०९१ एांती शातुवपुरत छ95 40 5097070 [॥6 ग96९ ४/006 ७९थ॥5 
० ९ 700०_, वशढ वीबा 700 ज्यात ॥ठ7टतं हंत९5 5 लिप्माए१ ० 0ए९१ए१एध् 5००5, ॥॥6€6 
48 350 3 ॥7९टाबराठप्रांडा ७07९9 लि फां5ड 00000, ए्ांटी] 2४0 (45 शापबप९०त फातवीवा5 था ९वर्पाता 
शिशाएगे5 5ए99०प08 बाल्त4ए९५., ॥॥6 स्ाढ/5940०४५ ० ९ दा49960 फ़ञगाब्वा३ ०० व]6९0 ०५ 
3 एथ|। ठा विशाह ऐड265. ॥॥8 पछश' #०ण९एु 48 20ए:/९0 9ए व वीं 70ण5 ० शैजा6 शैक्६ ७ 





पद 





०, 22055 50 ०१००० ४८८९४८०००० ८१० 22002 ग्न्पर, 20200205 20282 22002: 23020 20202 2:24 ०४५२, 0 
22202 202220200 0000 200022%022000:0:77700 222 20222 3००42 





#्रए-#खाहइड 00फएच/ा79 पिढ छणंधांड, द्00 8 औ०क०० 'डद्ए०8' बरॉ।एफात॑, ४४893, धां5 4$ णाष 
छा ऐंब७ द्राडिए़ांड 'ठुा फ९ बाद ८८ा5 ०5 पड ।2चाछा ६० 97०परंत2 3 5७॥३0]6 '(एवरबाशा।(।4[03 
ा बीं€ '|729$ रण 6 जिवशंकंदा 9०फपाद', एागएी ॥रछा 0०ाफि इएी३ 48 5७४:०७:०४॥४४५ 
काल्ॉर्ट॑फवी -फ््वाशि, ऐप बाड0 ए8ा एीपीशैंगात पीर वेणाशभांशं 75 ७ पीर 7९8ोॉ07॥. 


58२७ 5१7/8 ४४ 8985' 


ज्‌ृ० धार टो755 ० गंगाव ग्रण्यपांगश्शांड ले 5०पत्ताशाग रिंवाशरबावॉ 729 9७2 20060 ॥॥० 
९00558) 'गरावाबडॉा0॥35' (909९४ प्राव$०चफए ढ0फा9) दाता बा6 राछटाटत का गण ०ाँ धी6 
बेंगा0व 938$530क्‍5.. [#69 ढा९ 8 ८0प्रा|श४ए9479 ० वि विीावफ 'िएग्ेव्शंधाा35' ॥) 707 ० 
(शाएा९5 ॥९ (57908 दिव्धाएाीव' बात दाता िडगाए3', ॥॥6 'ग्राद्मा8४वा0385" धुष्ाट79॥9 
एजाहंड रण का९४ 9795 एं२., 4 ॥0घात66त डर्शीबणिएीण, [0 8एजा ९ ड४2९४ ० 6 शीक्षा, 
70070फछ6ट जी, वात वि९ टबजॉगे 6 पैंग्ैपां3', पी 20णारगपु गराशाए६7, 82 फोबाॉणिा।ाओ 
[$ ध्राव5ठाए वी गर्वाधार, गरा०परांवएत ण्यी। बराबटएड छित5 बगात॑ ५0 50720729 .0220079९0 
एांपी 7ढ6००५., ॥७6 हाठार [5 प्राठतर 0 4 #ंधतार #गार बा09 त९&ंतद्ुएरव॑ इचा509. ० गंदा 
0०९ शा एथ65 707 8०९ 40 7/30९. ॥#९ हीआी 02725 !॥8 ८व[ज०, ३७३४८७५ 3॥0 4॥6 
एा0०शप्रातु ॥९४70९7. जिदार€ ऐ€ $तवी) बा0 व्गाव्धाातबा0) छा विी९ आरा 769फ गर2५ (6 
ता/९0९९९. 5(वंग[ु #॥707 ०ातंवरबाफ़ 2०्:.ीवा बरात॑ 7१०च्टप5 एए९र (0 पा08 ट0गफ़ांटवांएव॑ 970 
०९ 270एावरठ धढाएटाड बार िणाएं टबाएशते ॥९९. ठग वा ठातवीगराफ इ९चा९व इटपोए पट 
0 प्र/९९४त 'फरगापंव985५ ज्यीती 0९८९ एडाजंाव5 वदशट ०९९॥ 0घए74 फराॉचट८स ० 658 
'जाबावशराधा।णाव३', 0फ7 गा जिला।बु ०णिपः तॉएटॉ0ठतज$ड र्कींटव '(टशव्परापंदवि& गीत35',, बा? 
क्शाशाबाए 79९९० ॥ ९56 94एणॉीॉ०75. ४3॥४35 ॥95फ $07शग्रा28 72[/62९ ९ बवं55, ऐप 
९505 वार १2ए९८४ 932८९6 ॥४॥९. 


वकढ 9९५४ 5७9९टां॥९€05 छा पराााउडबा)ए357 007990९7४6 85 763%5 0 दालीरटॉपादो 
हवा! वात॑ (35९ ० (९ ४) 670505 ८व0 9९ 5९९३४ ढां 5बण्वा३०९।५७०३, दैंबरशा0304064, 
लबीरए०९०९०७, निधागटी4, निशाफ्रव्राठुव0, ईवाप्ांव, चिपतंबएांत7९, चिपाह बात॑ छोटा फरांव०७५७ ॥ 
50घ९€।॥ 8733॥8 . ः 


0०0व4 पछ075&5 


8.8. 0७०फ्ृषां, छिद्यावएबर्ां 440दा0एथाप ॥5. ४0. 3, (४०९०. 
६.९. ५४०. ज, धा70. 79. शान, 9, 4. 
[छ94., था, 72, 73 
5६.0. ७४०. , 7707०0, ?9. णा-द, ॥. 4; #िएडद गाहशंवत रेथात वावहु९5 छा तीडिएा। 
#225, ०९, वानएडॉव्राए05, ता, विधांगे, बाद॑06त जार एण पा€ एगादा औछी5 दा 
[98८ए४00 9 नि्वांरए [(चा्रठ65 (शदाठटारशाड, ९ छतणाते '?8ंत्तापएत! ६8 ए४7१॥६९४.) 
5. .6, 59778. ॥॥6 ॥९॥925 एज [९ 09995 ए[ #(733]08 , 
#&.5.7, 020४, 3992, ?. 435. 
6. इ॥ढ ए/रटाएाड2 छा #ालाव20659 बाव॑ िएी३९एाव5 व किंवाशटांबा व बाव॑ 06९ चिैंए४502 
एमाएशएाआ५ ?0इॉ-चु/ब्वप्रताढट 26एग्रागरगा ण॑ शैदांशां धरींा0ए कात॑ 27003९८०१099, 
- कैब 0ग्नाए ८०रातंपररत &ए।३९०069ांटडी टि<टएडॉा०त5 ढा (489 7९2८९709ए (निंवाटी- 
(९(6696€7 993) 70 0800ए७४९6 ६ खेंब्रा।द फवडटव, वाएठशांग्जा 6€ढी5ड ० दी 


बं> (0 ७ #«+ 





82222 222 22 20 72780 
डॉग्पटॉपा8 द्वार प्रंएटत 68, वरीढ उपगिठा ।$ 6७७०ए ग्रतर४०(९४6 [0 68९ छ० 
पाडधरपाताड' छा. एलाशावदड 0 पं (९ तंदांव ० 8 ९हए३ए७)०॥7)- 

7. (090 (४ 98585 ०एा 8 ९०गॉांशथाएठवाए कशॉर छा इंगा0शदु रिक्राइण्वाह3 प्रातंशा 
(00080 ८०073, जा रखिताउबएगत शशि बेशावायह ०ा व, 06 व्प्रावछ९ -जव5 
80॥॥द6९0 35 8 57३०४ 0 ग€्वा ९ एौडट९, एा0८९7 3 02४९). 

8, छ06# ग्राएणाढ (त&बीड 5९९ "ढागोतात8 ऐेंडात3 फएव३39 (६बागयबतेब) एए ४ चिता 
छाटब्शा९४तं 8 5ग्एथाव ए९ेच०ाच िंदोधा35 405९4 5शशरावा णा गेवांसांशा ॥ 
रेशाार958, 0८7/0ए27 4993 'चैंए४+०76४ (7 97259) 

9. छएा९०० 388, श्गढ€ाथीफ् पैबएशा 35 5308 9९०४४ ०0772590०70798 [0 8.7. 466, 8 04/९ 
40०0 €बाप 66 #6णाा4, 5.0. ४०). ।, ?9, -5; ४.७.8. 924, 79. 46 आत0 5]. 

0.. 5९४ [.7९. 58775, 09. ०॥+., ?. 43. 

]]4. ॥906- 79.443. 

]2.  ॥90., 9. 464 थाठ ६४. . 

73.  ॥एणात. 9. 35]. 

4. बगाँगदव ह7/ बात 2ल्ांशटॉप्ार प्रावशा ९ एट९४९८7त 07995 ० वढांडाईब0. छं.7?. हा 
था नि.8. 20970, (26.), 05792८($ [| बखंद्वा3 67 270 /४72८४८फए्९2, 877९03090, 
975, 79.77व) 

5. ६.८. ४०. ॥ (३१९०). 50. 33, 372 

]6.,. ॥९.ए. 5वफ्रातग़द्याब)था ८25 7॥ िकातं5०७४००' (]855, 95४९८ ठंद्रात8 है 370 870॥[6८- 
पा९, ४०. ॥, ९०. 8. "॥०५, ९७ >८॥, 975, ?. 36. 

47,. #67 ठंशंगों5 5९९ दांटारट 0ए रद बणीठा '5द्यीोवश्ाबाफांव गाशबाफ्रव ठा राव96९९, 
लनिबा-१९चा।फ्र 70प्राढी ० चैएड0० "्रएशआाए, (805) ४०. 7., विंवाएी-5९ए९ाए7#/८१, 
?294-45 

48. ६.0, ४७०. ७, 8. &. 77). 





र६7६४8६८८६५ 

8.8॥, 556778, 7€ताए9९५ ० (॥९ ठवाठु49 ता द्वयादावाव, है/टीउ९00दॉंट24] 5पए९ए ता वाीता5, 
पि९छ 0९॥व, 4992. 

8. 56667, ॥6 'िंठफ्रह्णां8ब 7९४ए9९४५, उिद्ाध्रबा०९, !992, 

8. $5शावा, छावफए्57९७०)३७, जीव्ाण्वा, 498. 

थाटव9९] भर. थिरंडारा, चि,2, 209६9 (९१.), धितटएट/09१९१३३ 6 सितारा वछागफ़ाँट दरात्कीरटॉपार 
-50फ00 वादाब-79फारशा एिब्ण33 2९5३-टिकाफए 2॥95९, थ्िशरांटडा विड्रीपर छा वितीवा 
500॥25, 'पिटएण 08॥॥॥, ]986. 

ए.?. गा, ि.8. 9॥ग 079, 8579०८5 ० बढं)8 कया बात विटी॥ए४टॉपा९, 0205090, 975. 

8. 0॥#0५ (९१.). खंगाव हि ब76 #7टॉज्राटटाॉपड९, ४०5. ना, पिरछ 9>2९॥।ा, 974. 

97. ?. 6फ़णन छा, 5छफ्तां४5 वा वर्ाएए३8 नीडा0ठाए छात॑ 0एञाप्रा९, ैंगाएथं, ]975. 


छत्तत 





बार (एणजाए्क्लएर प्धाएजए पापषकाएट: 


एर्णारणा 0.0,5फगीब्वएथा। 


वृतढ शिज्ञ तपाशापणा ए क्‍ैयपीयव३ 8 0िएा। था ऐ8 ल्।शरफएव उिन्नेतावा3, (४व 300९5 एणि का 
[रडांणए द्वार 82८60 रिणा। ॥8४ 559एगीकाब रिक्षांठत, 4,.९, 29360 ० आए (छ्मांग्राए 8.2८. छिछा पाशा का पी९ 
वश्ाताए रण ॥ ०णाएट्आॉर वरिती॥व ०प्रॉण्र 56शाड ६0 ॥3ए९४ शाशचलुत0 फ्रातेश पै९ प्रीएश०९ | 5९एछवां 
बाश्याय5 ्ण॑ प्रवर्शाीतजा ॥0गा प॥९ 00 प728., उठ०फीांडा, खेथंगांशा, ४शशवब 5दंएणंडा, एच्रंजाहएंशा। ्रात॑ ए2त८ 
€जौपार 2गरांजपऑ०त 0 775 एफटाप्राणा ग तीशा >ज छगप्र. [0घ49 ॥2 एजाएटठां, €20%ग7आं2ट थात॑ टएबं 
फडातए ण लिावीड 5०2९ए $ प3000 "३ 06 ए2छऑमांगणएड ण (भरज्नक्का शक, 06 हि ]टर५5ए ॥52ए0ा 
(ब्वांश्ड ०४०४ [0 575 8.0. गाए ऐ९८ फिश्ञ बएगीब्रणं2 तीशिबाप् छलांग 7०एुप 00 ४ शाप 8.0. 


घिब्या टज्रॉपादों एबणा ९5०९5 ॥35 ताएचएा 0० ९ ॥टिशआप्रॉस, एज0-जण९ए, एशोल्ए०चदा 70075, . 
खां 500 शदांपार छा 3 50209. 60 ठी (४5 एडएटा ॥5 (0 आऑए09 ७१९ गाएठ्ण छा उत्ताला जा ऐ2 एऑप2 
याए॑ च्ंपार रण #ावाबड ग तुशाशतवा 


वश९ ९ व िज् वएजांभा। 9णा॥/5५0 ०४ ॥९ए७ 0 ग्रगात ध्णं2 अज़ब ॥९ ॥गीए2॥2९ 0 खंगआआ) 
था ३छफ60 (टैाक्‍वं73) $००९ए. ि९ छिशाठऊ रण ऐैशा 5 ॥2 ॥6 ग्रे बच्ञाग्रोगिंणा ठ व हजाधद शाशएगा। 
रण गंगंधांआ चां० !एंण्द्रण 2ीएरट, ए्ंत0ए वाह थाए ३०९५ रण कंडला९55, धुठ ०णाफ़ांशंणत॑ एप ९ 
शा0 ० ]30 (शाप, (000 फांठ एका ० [गा प्र रंडए एजीएादोी हाएशा। 47 3 7रंगाएशंफप 70९ एंँजवा 
शांडंरा०९ ॥ 06 7 शएंद्ापुआ १0 डि9ए392श॥4 ॥85ां0त$ ण ल्षाताब रिव0९आ था ०2ा।वडा (0 (॥९ 5098ॉंढ 
एशी एांसी) एछव5 7छ९90॥0९ए पातंश 8 ऑए009श ॥942८ रण 5000 बाएं ए९३८ एजॉपार एिणा 6 70 पंत, 
6 06 अज्ाल्खां 00520] 5 व त॥6 गाएखटी ठ वेग णा ' क्षण पीशवापार 5 वर्ण 8४ पा।2ली० 
॥300806 85 ॥ (92४ ०8३४९ रण ॥०ंप्दुप स्जॉीपार,. जार 7>एशाएीए फशाशाबागत ध्रा० धार एफॉपओं विजाीट 
ण॑ #876॥785, वंद्वंशाओआओ 32275 40 5ए7९ एटशा |९5७ वह्ध्याश्इञआंएट गा पीशा ९चंजणा,. ॥70०था 5 $0ी 
एशाशथॉणा चंबंधांशा शी स्व अंध्रयीरिया। 73025 तर 6 ॥अंठाए छ ४ शफ्५ 9९०7९, 8एश] (0099 
ह6 थाई कात॑ बारीत्राश्टॉपार रा खेश्ा)5 ८वा ए९ व९ावतरत ॥ प्री गाटंधां शाशए०ड क्षाएं जीश आफ्टॉपरड गा 
(6 #छातीत्र5 १९छणा २७ ॥02 शाए0९:5 ए #९ ठाजां005 ए$ छ उंदत €जर 9 पैह एदा छत पार ०00ाएप, 
एिएशा जाती 7एठ4द0 (0 ॥#४ धाजबटां ण॑ गेशाांज) ण टरंफ्ठए हैंरागफार 8 €ए ॥/०४$फाध् 0052एदी0णाड प्रावफ 
ए९ वश बठांए रण: (न) जाए 8 60 ९एण१टा०९5 ता गेथा। सशवपरार था शेपुए आए १एशेव्लीरए, 2820 धार 8 
€िए/ वातीटथीजाड तक्॑ 0॥2 उठा 9०९४5 ्यी0 आर 00७0 (0 ॥8ए6९ ए0(0७०७० वद्त पशकवांप्रार ॥ दिदाा2005 
ग्रधं९ बलि 40 छजाएकाए:ए आओीब्ा ज़जांड एशशा ॥ शणठ0, ए.) वंगा। #शच्वाणार ॥ िवाधाबत॑ंव ध्राका।०2॥५ 
रत ९० ॥8 €एठाप्राणा रत ८रकंथा।) अंदाभीट्या पुर ् पश॑फ्दुए (शवाए७, | औोश एफ (० शे॥एजवॉर प॥2५९ 
एणाप5 चिं।श # ऐ5 एछथ्कश, 


(३) परशरद्ठ उक्कंश सिडलंज्च छा सडारपीशय सिडांकलफ: ेल्‍ 
७७७ नल मनन नमन न न 
॥ ए?र्णर३३8० जज वल्चठ्व५, एमाएशाजॉए जै निफ्तेश्ञब००१, 0शाएगे एग्राएडाओऑए, 7.0. ॥90००७१- 50034. 





अर छ ५७8३ 2008७७७४/७४४ 0080३ 
ह 20220 2052 2222 
५० 2000000022:2022272777757/ 20024 222 2 00220 52202 4220. 7, 





6906 93०४ ४0 9०छ॥गरां705 छा #उक्ताव ॥509 6 एद्ाजा2[दर रण पिंववण्शांद, 2 ताक 
हुगांग्राछु७ (0 उंधंग्रोज्ला। एड ६ प्रधाध्रोध्गराता0७5 ऐटछंशाए6 ि' पैड शु/रक्ष्व ऊ बंजगिया) था ४ /रथीीय शस्यांजा | 
बेगागांगा। पंधागदु 5 ए9श2॥00. ८0७0 5ए८८९८5४ेए इपाएएट बिदापु' पी९€ ॥0॥॥९ ए९५९ गाए॑ उिप्रततीाकं 
प्रवध॥00075.. | एशं्रर्शा 265 बाव॑ 625 8.0. उ्ंधांगा गी0पांह्रो४व 9 08 बंगॉएएा09 रण ट्विट 50क्‍गएदा। 
बात नृज्ञाणानेंएञा04 रण पशेक्रातुक्काब १९छौ०चघ5,.. पीर एदयाएए३१० (20095 एश९ ॥2 ॥65 राग 
गए ए एज) 0 6 है0 व 7९807. (50 ए९ 700०0 22 गा |5 ॥252 शएद॒ुप ।95, ९(०९९८४४॥५ 
॥९ श६25क] 4, छीन्‍0 9थाणां520 #2४ ए०श॑ं5 रिक्राएव ॥॥0 रिकाा75 एशऑ।0 ०णाए0३९6 पति रंग वीशवांपार 
रण दिद्या004., एशांगा। गरिज्॑ग्रांबत5 02॥९ए४ हीठा॑ रिव्ञशए98 बात दरिवात 7शातंशारत 3 एज वेशा एजी७5 ॥ ।€पाव५ - 
एंली 88 पर बध्ग|4णे2 04०. विण[ध 7॥6 ९१४शा। (आबापए35 एश्र।॥एएवॉपीवा5 | परा्त९ 0.वांएणा5 
$0 म#९ िलतचां खेगा। ०5० ख॑ ठिश॑ंगए्चत०, [8 संबांतबएी॥935 ्ण पं पच३ढाँ। एटशंकाए (० पर९ (विएताफा 
(्याव, खिागावाबांध ४50 ॥50९ 52ए०९४ 0०750075 (0 जंतदांवए७5५ (005 (शागए/९५) .. 6 ए४७गिवए। (०74, 
दत्ाधिएवाएव 008, ल्‍90ग%9॥ छुच्टलाव, पिद्यात5800)3 ८णादारदुगा0णा$ रण खगागांजा धित॑ शी गाद्यीणि 
॥ #॥९ ॥75टएॉरॉंगा5ड ॥शी९०० 0 धाड रियाद,.. ॥86 0गज्ावरफ रण एकल्रादबागापु4, ॥९ विग005 0शाढाव! ० 
(पजा2हव ए.गएबआए३, ए०३५ ७ गंगा) त्रबअंफ्र, १९ए फएशा९ 06 ॥श०कावाए 7प्रेश5 ् (बांदा), 2७६64], 
प्र चारडा-पाचा0507 रा रक्रोवबग्ाबाधपु+ ०जाञभापटांर्त ॥8 (बॉब्लवोजिवाधाब जावोवएठ, ॥ ॥ 0 ॥75 शा? 
प्रिधां दाभादाबांध 0ग्राठ्ांर्व॑ ॥० 'जॉठ्छुर चिंवॉग्प्रबा०एती,.. 0पच5ग०गृंव ए०5 पीर रिशुंग्णं॥3५9344694055 (॥९ 
एणाहंटव ॥९७०)  ऐद€ दिवव3 २ि88॥79. 


गढ #बंएगाप्र० 7प्रश$ एश0९ उलेबाबांध 0] एशर मो पीर णीठज़रा5 ए गेंगांगांडा, उिश॑ग्ुंप मी ए४०५ 
९ शिञञ (वप्तांए 06 (0 एुशं ०ज्राएशारत 0 ए४ह९ब७५वंएंगाआ, ॥5 5७८०९५५००७ (ी0४९० [5 5एा #097/76 
॥6 0फवा एगीआावकुर (0 वन्य  गि९ दिगछीफ्व शाजीर९,.. 076 रण धार गात्ज ग्राटंधा दशप्थाप्रव 
००आभाप्टां075, ९ ?807/७॥ (९777९, ७४७५ 3 गंध] (शा॥0॥९ 40 0०९७ँ। एां॥. ७३5 ०0//प८०९० (५776 
प€ 7शंक्षा रण शितगयुंप 4. िल्वाद्वा॥9, प्रमोर ए 06 ग्रागरडिंटा 3शंद्राव ८णाश५7पए९6 पार (३0959 ४उ्वा 
07१ 3 ॥॥ 2 निवाजाब४0704. 68 7]8जा9वाव खेशाउ3 060] 5 ट्वाए2त॑ ॥] 076 ० ॥९ 50065 ०) 07९ ॥॥॥ ॥5९[. 
हिएशा ॥ंतंर ९ शा” छा रिब्रका।दजां ए2 0०४) 9९९ ९ 005 0 उंत्प)4 ९९पीडाउ/तात थात॑ १४४४गव5. 
छिए गीश दव्ोप्राएड88 ॥000 40 ४९शावनीबांणेआ ता$ शाओएं९2 धुए ९ताएशाॉ०त प्रा० ६ शादी (शा॥9०. 


लिश परी ॥055 री एबाए298 ॥ण7 ववा9व प्प5, ठंगागंगा एव5९० 4 एच) 0४॥/९ वघुद्या। 
40ज॥॥ 0ब्वी08 ० ४०शवशगंणंजञा३ 2१6 ४९१८ ८जॉफर ब्यात दाग्पंप्भीए 9९९३९ एकल गण 6 गा 
डा९ड ० 0067 ८एॉएफर, ठिपा ऐमंड |णाएु ९शांडें९0४ 03 $णी एप एॉँणवाा। गठवीजा 5 0णा धात॑ंराए2 
ग्राबा५ था ॥6 ॥6प8७ ०प्रौपाट, 


(2) ॥+9०७७ ता गंगोत एज्ॉपग्रार कि ॥०वेछए'3 ॥2ांप्रद्ुत्०त पाए: 


पएशढ गार टशांवात ग्राफताड ठ खेशा "पार एंति0त एा0शजयातंणत णोमलाओ 5तट्पों [0 ७फ्ँगाा 
5९एशवों श्खिण९५ ० ९0०५ ८एाएार एएशा 40049, 5078 ए॑ (25९ 8४ ए४7ए तीशा! शम्रौशाढत॑ 0५ 5९४0५. 
पक०ज बार: ऐ6 छत फवआ' लि. 'ण(व 0णा' व ००चच5) ९४५ बात॑ णि ॥025॥०8 रात॥ 4 एंध्र (0एआाभतए' 
॥9 वैंशंग्राप्थ्रा8 बा९१ड, 5 प्रेंश०ए2० क्छा। ऐी९ गंगा ,र०ात 9ब5०7' (ए8४३7).,.. ॥6९ इ०९७० फाउ2 ज्रोटी ॥5 
प्रावतं8 (0 0९ ए्ञाशा 07 8 7शप्रण ९गंत एज अकताय मंद इज छहागरांतवु ज जैक #ए0९5 की पुराशव 
8 (0॥ िग्रा455ए8एव जतवंतीका) पिशावा_',. 508 इ्ीएीवाड 0जा९ पीठ ता ३2०७०० छक्वा ० ऐड ब्ब्टार्पे 
श्शथांरा०९, णंर,, 50009 फियाधये', 5 बलफयीए 8 बलाप्रटशा०९ 6 खेवा। व्योपार, ॥7ड "९ठुप ए०० 





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5....220 2 हि ४, 2 83) 8 ८ 2232 29072७986: ३, ०, है ०, 22002 22228 १%,%९,९३९५५:४ ; 2252 22220520 22005: बबव: 2282 222 22228 22027 2222 8 3: /४५०० ; 
ईएज ॥7/#एटआफजाड॑25 ६ 'संतं।वंप', पड 5 बटाफडए ४४००० 4/७घ9 0९ कि फछप्रे ऊ तह # व्रत एडंटा।. 
बजे का सिनर्ाक्ी अंद्रधातु 85 शांत उतर एक्ठुप० शंका, जा०2 जएपदोन ॥ 40 ए०चुएर 0७७ खाए ्थ्ट्र॥पव५ 7 
फ्रै ॥शण्घ० ॥०्दांजा,- ##प्जेणदांदगीए, ॥लणदुत्र 92०फाॉ९ जार्शश 40 ७४ 'एकाप्रब' 25.४2 096 (पाए रे 2 
तह गा 6गराावडं ६0 ऐ९ रियो (885 0०७2९ 09 प& णदा ३0पपी वि्वावा फर०फ्रॉंर,. पैंश्याप्रणा। 4$ 3 गधा) 
एणाएशा।णा 


$07स्‍6 णीश इ७टी राशिद ्रा॥5 ९ 0पा0 व 8 05४2 ॥8725 क्षाते 90302 098॥25. (076 
झट ग्रागिरआंपद ०४2 ॥708 क्‍5 (लावा एरगंएी 45 ॥2 ॥४ए९ 2960 एटठा0 0िा ॥6 शवंशीप्व ण ॥98 
700#लीशा। ०छाशाजा५ (००४९). #5४707045 6९०९० एज॥7 (९ एणज(6 (557र्वा॥' ए्रीली ड९का5 (९ 00092९९5 
रण 57धाशा।2३४७व... ४9 एांद्रां ग्रातांटछ४ ९ एांतेरफ्रास्वत॑ छएएकशाए९ रण बेबंधांशा वंाणजातु पी४ गरदाए९ 
ए्‌शंपद्वप एरहालीग्रा5 ४ 8 व्शांयां। जा छ 09, 'ैजा' 5 8 एणत॑ ज्रगेटी (8 िफाव ॥) ह€एश<] 930९ 
॥7025 इपली 8$ 'चिएग[ए4॥९, निधा॥0708, ९०. ॥॥5 ४७0 "जा गर्नदुश ार्शश 40 ४९ चंगी। प्राधां5, 


गृफ९ गाए प्र/ंशरजपठ 7शा।522709 ए ढंग) ९जीपार जा 0४४ 70060 १४छ07 5 06 हजार पराठ925 
ए०॥९० '5ठ945 0९ए७'. ॥॥252 5525 ग ९8५9०587७5 90४06 372 5०पराए उ्वंत ग्राग5925 एच [0089 
[९५ ४९४ ५०३५४७४९० ०० एजााशा 0९॥7075 ० ए7०दुशाए. 


9077९ गांड्रणाबा5 एशी९०९2 पता पार प्रीपवे ००७5४ एण॑ विश्व , आआ३3049745 (000 0ीथि॥ओे द्वाव0. 
05884 ग्राद्रागशाता2९ ७९९ 907प75९6 0ए ढ9व975 था 0९ ॥शैणतुप 7९हंणा. 


पफ०€ 26४ गरवाप्र बाला३९००वांटर्श ऑर5 व 2 #चतीा3 72807 एजी।278 7श/॥52९70९5 | ढांटशाां०्व 
0९१9शागिशा।5$ ७९ 9९5श2०९१ एज) गएजींए 5०एॉजफाकां बाव॑ 40092 ८०6९5... [25९ उलीशायंटर्श काबट225 
ए९€7९ ॥0भाी9 गं। ए०घ५९८ बच्चा०9 ध2 वं०ं॥58, 


(3) बेंद्रांत्रांडत बात वशॉपपए जिध्टाबाएलर: 


व#०ण्क्की ख्वांघांझा) ८जागरफ20 ॥5 0ज़ब्राओरंट छराशनशा८९ 7 6 ए४96फ 7९6ठागा प० 70 ९ एरं90॥9 
रण 6४ ]3॥ शाप 8,0., .68. 0 300 ५९०१३ ठांश/ (0 ॥52 ५०977 रे ॥6९एशावंशा शैशदाए एएजार5 
॥ 0069, ॥ 4$ 50च्रा9९ [0 ५९९ तीचां एर ८० व जिते 89 उगा ॥शफर 35 502) ०00790920 ॥ [0७७७. 
॥ ॥5 उठीपं प्वां पै॥6 5्रा९ 9005 ज्री]0 ०0770500 उद्या। #शिवाचट वा श्ग्रावत5 7श30९७00 3 ४७ 2३४ ४४०॥05 
गरापद्गप 00. 370 फॉणिपिावा।रशजए शरण रण प।.९५७2 ए07 ॥5 3ए8॥80४ ॥0689. जिाशा ४४2 539 पक िशर 
६ ॥0 वंगा) शैडिवाधार ॥ ९ए५ए, ए९ जाप वाशवा जिबां गरशर बार 70 ९७६५ एणॉफछ ०णा90526॑ 0 ॥72 
जजग्दाजा छा रंग), ी किए, 22 ९ 922 क्राशणांगा 7शतुछ ए०७ जज (९ ब्राटशा (ग्रार जला 
बार 3550टॉ5( ९० एोधी उंछांग्रडा),. ९ वा९: ([) ऐवफज्याएत चिंशांदिाव 5. 04757, (2) निंड03 रि९८तात ५ 
(४णें|गावड्ायफ्ा (4 9०0०४ था वशंपठुछ छएः०5099)) गाते (3) #वागएगावटाबाएव5 2ैपंवाएचाव रिव्रांफिवएणए्टो 
जंगली ॥ ॥ ०णाग्राशांत्राए था कैश्ापी।व5बव5णोपाॉदाआए, व उद्यान 000 ्॑ एथउ25 ण 'शफपका पागाधाता, 
'त्याि' (9 ॥2 005घ /शातलतदु ० का 'णाह॒गिं वबंगा यिद्वेत्ती छतीर जा निगीशा।ओआं0ड,. छा शेर बाण 
ण गाल वशाणक्रा एशनअंगा, रखिफ्पांजा िद्रीधा3, 4$ 3 ४४९३ओऔगंण।2, छझि॥ 56 8 ९एछ छ७धछग[जअ25 7छंद्रांए0 एग। 
बेंगा परापार 0957 08. लिएव 9 5 0006... णंद्रावता गन्ना! १६ 80 जंग 45 00070एशरञबी, 5006 
0४ एश525 बार गि्रापं 9007055९0 40 038 [चिंव98 रिश्टा3, 7॥5 थिंठा५७ रिटशा३ ॥5५ 0गाह०त 38 ९ 
बणत0 0 ४ 90०0० फफए 50०76 इटीटांडाड बा 96 ४8 (मरते व3 2 ठंड, छिप इएशा तिड. ४७ 6 ॥0 
॥०लोए पशंडांब्वे प उथांधरांग्रा। 385 उठी, वि०घछो। व 0ए७ ७गाफ़ोट$ थे वंड 9008 वर्शर (6 खेत सपॉष्ताए 
पिपीलाए्यावबटीआएव फ उपाए ६० 0६ 4 उदो) ग्वणीद्ाप्र बाप 5 इठांते ॥0 म्विएए 0णाए058प व ्ए 90005 






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५22 22222: ५3२ १4८ 52६ 26: 


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'एशश्कार 8वाएड॥82ए्व 5 7शपंशा।द छा प्र& निग्ोवओशाडंक ए७85 (तार 0 उंगरंंड व॥९ड छा 00 ॥5 
रण छञठएशा। 0०९८७७७९ ४5 2०७०नांणा णा ॥९ 'चैंगजिहावांड 5 गए व्यांव्णेट, 


पृ०एथुए७ 9०09० 9९शा। [0 ॥8ए९ एम ३०पृण्ना।ंरत णात ॥९ गा (वात उिपतेताएन) एशअजा& रे (९ 
एिशा9एच08 वा)5ए ७४ ९एश) ए् ॥6 चिंद्रौउ॑णागर), (शांगंत) जाठएश05 ध्लांशी ९ ॥ 7089९ ९एशा (0059 
गाणाव ॥8ंप्रद्ु05 दांएर फां5 धपीटनांजणा,. ण छरूगा।९, पीशर 45 38 एए0एशए एलटी प्राए805 ६ ५2९ा5ड 
807020०7९ 35४९ पी 8 8 ?शैंग्रीणा रण जा 0 रिक्वा78 भीश अन्नरशांग्द् #0९ आऑजए रण ॥8 दिक्राप्रद्मा9 ९ 
एजाण९ गांदांत ".. 5 ए०एश० गरांझा ०९ राहु [0 0९ ९जाफिएा ३००पा प्रा ॥शंकाणा एशंफएरशः रिंदाव - 
वा0 जञ5 ९ चंगा। रियावप्रदा8 टारवां25 ॥ 6 ॥705 | ॥॥€ [7९०४९ ७0 .्रा९50ए एज 0९ एव्यांगांत 
एशर्डाता ०. (॥#श< $ ३ आभाँवा ज0एशए एजांटीा] 7४/शि५ (0 ॥९ 3605 एशनजं०।) छा 0९ रिशा5फ्थ३.) 
पृथ्णठुप लाधु0१9९ ५९शा३५ ॥0 ॥3०8 आ।गापुशंप [॥९५६7०2० ॥९ 9९0ए९'5 खरशा0ाए छत 8 #शदाए एज जौतीए 
धा९ ७०६ ॥5शॉ 45 ॥टएथए 09 ॥ ८0पघ52 ० करॉंड॑ण9ए, 


पार रक्ाएल प्रकट र उगंगांशा था ॥शपदए वैशवाएार (।0फ6ी. प९ साॉराबलाणा रण शपण 
फैशगांणा९ एांती (िवा॥906 वीशवाचार ५2९75 0 0९ एशफ् अंधर्भारभां, 7 5 बढापओए 6 शै्ञोगरेंज ग"णा। 
रंड दिवाधाह्रतंव ठगी) शैशवाफार विवा ९0 0 ऐ॥९ णांछा) रण ॥९ शिज्ञ वएजीकी९ ॥00श200९४ ]छ०्चए #॥श०ए 
0५, एं2., िंठागाव8'5 चिं्व॥40423. 


507९ 3८०0875 60 40 00९ ९शाशा॥ र अ्व्ज़ाप मी ॥९ #ग्रपलफर ण 76फ50 ३०५०५, ऐशी लैदवा।ए0 
(एश५९ 9१0 छा052) (णा॥, #९ 2८0०४ ण 77शा९५ (॥९४ (एवंगा।बावब थात॑ लागाएत्यावोत), 00९ ९002 ०४९० 
६97097), ॥€ #एगंवा।53 छा ॥0९ [7४४०७ अ#ऑपटलॉफएर ० ९059 ४9ए५७४५, शं2, 378 2] )9॥) ००790प#075, 
छिए॑ गा बिटा, 252 फएणचरए काश १शु०ट८ॉ5 ण "शण्दत ॥4०ए३5, ऐे०पी 44ए९ परीशा णांबी। ॥ दिवाधा405 
सारागपार, शांदग ॥38ए2 70॥76 0 00 जांपी वंगाओधिा। 35 5एणी.,. उप कएल टाल छत ०0ाएथांपरणा 
ए९एश्शा एसटावशीलांणंआ) 0 वंगांधागा ॥36 0 [0 3 आगाधदु धरा9कटॉ 0 दिगावतंव श(शवांपार तो 06 5॥9ए5 
वाशबापार ॥ श॑ंपदए, ण ल्ूथाएओ९, ही2 ०णार्फां छा एवडाएप एिग्णांऊ! ठिएात॑ ॥7 पिता॥९९०१०१४'5५ 
(जाददावध्शा0।5एगा बाएं प९ गरवाणोप्र ८आ5टां०00॥९55 ९१७९५५९० व90थ ॥0९ 70075 ९० 76॥ 8॥0- 
बंग्गाप शेएदुप ॥ 0९ जागंणोंर वशिवाँप्रार 2४ वा 3 (िए ९एशा॥2९५ 0. #0९ तशीवाी0ा री ही? 7 गधांत$ 
एज ९ कञउंजोर 9०९५... 


(जा€ छा ऐश गराठ आंपाएप ०0524७९70९५ छ ऐंड प्राप्त ऐ४ एण्ड! एए 59जॉ९ 79०2५ 
4 (6 शाशचुशा0९ छत 8 छुशार ८गौंर्व िपानागा।' फ्रातंश ॥९ गपफ्थि06 छत वद्घाव रक्षा आफपटाएर ठी 2 
दिधाावतंद एछा5 2070824 9पए 0०९5 ॥४८ ?ह79... 'उि4ड4एव्क्पायाशा3" ॥$ ९ 7009 जशं८ ७जठा70० 
ि' शरांड धाशिर्आगपु त्राएबए ् बंद्रंगांआ। ॥ #॥९ गंध) रण 4 (0९३ (4४९) दश्मार ॥ ॥2००७७ फिशवांपा९, 
वार गरछ्य ब्रा वि 2) ्ि पा$ छठ्फशा 5 00ए०४० 0 श॑ब्फ॑जंर पैड अठीटका ग्रफुव्ए रण खंड 
सॉंशिवांधार जा शंप्दए, 


(4) वृगढ वरजीएशा<ढ व ब्ञकव लिपाक्ाकड 09 6 50्प्रटॉंचार छा 'छिक्राशएक शिएकमा्' 
एब्रॉपातांत $0एफ्रबशभातिल: 


छिब्धबब शिजागा4 रे ?िबप्फीत $ताभाशभीय एव 2 शिव >छन निक्ाव ॥ शंप्तुर श९चएा९, वी 
ए35 एथाए0ज586 | एड पाशंारश जिज्राएथएव ॥ धी९ दाल वक्ष ण॑ 0४ 30 ट्यांप्राए... 75 एछ एर$ 





बटलेडंतिारत॑ 35 ह2 खितेाया: ॥ पैं।ह एअंप्रंजा 5 28४ 26607 ॥ रांप्दुए #शछंप्रार 

पफण्प्की 54४ एा६ 0४७5 ट्थोशव॑ 3 ?िप्रक्षव, है 025 ग0॑ एशेणलु 0 #08 'रैथपुन रण 
छा गितायाद #शवापर, चिंवाए 3 टाप्रेंट गा थरए्दप ॥85 7200 सांशफरारं ठि58ए2 गिक्वाह एप उ|जेप्राप्र पी 
ज़ांग्रलफा०ड क्राव॑ कोगबटांशाड]25 छा 6 निद्वी9 एएराक पएब्काीएण री 5च्डाता शत 85 गीत ॥0 छंड 
€0९३ए०ए. (03 ऐ॥९ णंश किवा0, 4 रिए >ती९ा5 पां26 609 एजावफए 5 एऊां 88 4 (एप ॥ 06 तु 
ये गिाका3, एएं ९9 एश४ 7० 500९९58 शत, ७ बांशाफ”ां ॥35, 4॥0ए02ए९, ७९९३ 7806 (0 ४ए09 0९ 
एफ्रड)3 85 8 णिाया ॥ ९ 7९9 हवतीतजाः बाते ॥6 प्राछठटा र ऐै€ एा0०५७5 ॥९आ05 थात॑ ९ए७शोागशां।5, जोमंली 
एश९ एछणएणंवा त $0णी पातांगा विह्एब्वु25$, 00 ॥8 आएटफर छा ९ रिपा&95. 


वृजछ प्रणजण्टा छ ए९एहडवापंज्ञा), ९ 05टफ्रठुड रण छि55598 खाएं ॥९ वीश3ए एशाते5 0 (गाउएंव 
ैशगंफार ् रिक्त 50ताद्याबीाब श९ भ्िडाएांट्व विटां5$, 0ैटपगाए, 08 टरएदुए 902०३ ण (6४ ]78, ]207 
थातं ]34 ०शाफ[ा९5 एए520 पा0९ (6 फएडापि (परीएडव0९ | 7९३४ ७एशांग्रशां5 टक्का।०6 07१ प्शााततंत 
जैश्बाएा2, प0पवॉ ४०॥९ रण #॥श7॥ 780 ०ए९0 0णि 0९ एब्तंतजाए छि$ रण 5जरनंज! टावर, सिब्रा(एात 
$0शशगावाव एड ४ व ए०श॑ ग 2९)प्ठुप एणौ0 4004 पए ऐश 7 र् ऐश 22८५ एव्शाब 38 5 लै्नेशादुर 
ह) ९ ५/5णोँ रण कर्खागरत 3 एगहंट एप 0॥2 ४९श०ठ53ए३ #शवाफर, फिव्शएव सिध्राथार व्राधाएए 0९25 
ज्ां। (४४ ॥९ ० छि5ए८३ए्चा३-- ॥6९ ॥ट्डा।बज) री 8435803, 874 ॥॥5 0॥एण7९ फै॥30005 ॥005 एां0 ए७४:005 
इाणा2९४ छा 58793 0९००0९९५. 35053ए8 रिपाभा4 2 गिर रिप्राव3 रण ए९९७5०एंच्ा था 72९9609; ॥ ए७5५ 200 
3॥॥ 5 ॥९ 5०टा०6 9000९ छा ॥6 59ंएजं९5, रिक्त 5राब)गा।3 85 ०02९ 2 5070९ ग्रात्ाश6/ 607 
गांड परशा९ ॥णा एथ095 7९५ वीशवाए लिए छा णग॑ ध्रचजा 9 दिगा03609 2॥0 7009590., ॥॥6 गा! 
$0प0९$ बा९ 0९ |९६९॥०१७ 50765 0९ए़टाएदु (8 अंठां25 0 ग्रालंशा 66ए0०९९5 6 908 ॥0 85008 
(पिछाउप्रथाव रि30: ). नि९ा०९, प्र5 रिपद्ाव 45 गठ॑ 8 "राणा अर आए ४०९. ?िब्रएीत 55तठाकराठत8 
[45 ७०एश।] ऐ]2 ए0 एण ॥९ 3598ए5 एिपदाव ॥एा चा९ 500९ विए/0०5 रण गर्ग हग्पाप्ंणा जाति 5 0था 
जंती। 300 4603॥07, 


छ88998 रिएाथा8 0४७5 एवॉश्शा जा 5९एशा लावु/९75 ७5 0075: 'पिा0॥08503'$ शायर) ब6 
8853ए९४०३३, ॥शंश्ला78 (९ (0.9॥9फ्रथव 7 बिए०ए7 छा '४९९४गाव९5एवा३ ५784: 55809 5 87292 
2१0 85 इजराशातंश ९0० उश्ातदुद्ा।25४छच8४, ९ 0९३20०0 ॥ ४९ प्रिग॑ जाग्आंश, 3853ए725ए७873' 5 पाप्ाता 
8$ 8 ग्रीणिड्श ॥ ९ ००जां रण शि[ंबिद; एवांप्रधाववयाए्व 00 ॥5 तीजा2 प्रााव2९5 सर ९ गा) ०जशिाड 
रण 0९ ३९००० लावएाश, ॥॥6 ॥र्ादांणा रण ९ ४एण१९5 छ् निएदुत3 302/935 07 88583725एव3 (0 (गा 
छि880ए3 002ए७छ९८३ 8 ॥रभुंएट 0॥ण।] रण ९ एात लावब[णंश, 50725 ॥002 (08 रण वैक्तीएचॉप चिैंव्लीशांधी। धाएं 
$0॥7९ #/07285 ३०0६ बाउलशा 53ए3 6९ए02९५ ४ #९ गाता 5एजुं९ए ॥रआंश ०॑ प्रौर जिपाफ टो3एश-, 50725 
रण फ९ ०जांशाएजछाए 02ए०000९५ ० 388०2५9८8 लि।) ॥शा52ए९५ 0 ॥8 दि लैघ्एांश, ॥82 अंडर 
जराध्फोंश पैरा एथंती त& 5065 रण डकार दिगादांगी गात॑ जाट5, ग॥6 5९एशा। लोबजंरा 0जाएफपे९5 
पाए वरवशाबएश प्जो। (02 प्रशचुरश छा 5850ए25छठव जाती 59थ०९5ल्‍७8व, 2 355385$॥4007 ० 529 दाए0॑ 
थ6 9७८॥१९ ५ फथार्थाप्थांव:9. 


[ ४४ 59827ए2 (92 ८९०्रांटएए5 छ #।९ उिच्च52एव गिजद्ा8, एछ एक ०७भीए 2जा३९ 0० प्र९€ ८जारपअंका 
पका व७ ए707९ 6085 70 7शीरएं आए कीबावलंसन॑ंञरंट5 0 06 शिप्राठा)35 रा 8 िंकाघुब उरी, 


गृपढ 882०8 275, थी ॥3 आप्टाए2, 485 ऐि९ वरशरशा लीह्ागटाशाऑ28 रत दंगा एजाजा45 
हंगाकतंत ऑशवांपार, उह्ंतद रिफूबाव5 पाजंग्रए त2इट0७०१ प४ ४ ढ0 तंजा।2 फ़छएरश5 ण धार 7047 ्वावड 
जग० बॉनिंतश्त इन्ए्यॉजा प्र]ठण्यी। सागाठ, व2 चंद्याघ5 02४5 परग्राश्नव॑श्व उताजेती बात॑ शिवंतां एघाया85 





90000 


गए दिवाआ॥209, एशफएटशा 9740 ४70 ]]40 8.6., ज़ोांए) 5 कुशाशनाए ८७20 +९ यदु९ रण रिश्ा[०9 9 पैक्ट 
4#शंणए अ दिगा32693 विएवबाॉपार, ॥652 रिप्राश्ादड ॥3ए2 022076 एटाए >ठभ्पीवा, एशप्र शाधपविशां 9०शॉड #08 
'पि्याबावएव' 48०७ ०णाएफिपेरत 0 ॥5 हाएथा ठ वीशबाणरट, 'है4वीएण' शिव (तश वैल्ल छ 8 400 
शा #0 ए्राश 24वीं 27243, प€ #0एए ्॑ रिपएत९ए३, ॥2 शिश॑ बेन्चाग4 वधरितीक्रा(कर, ॥॥ (0राएप 
इंज्रे९, ॥ ए्रव5 3 द्वाधाठतंव 7शातंशााद् ए उशावब्शाब'5 उद्या॑ता: एज, एणावप्रंश्नध्वण (पावांधावएशाओ' 2079 
पबत ८णाए5९0 ९ 0 रण पी 460 उगा।व वरधीकापिव 85 उतरी शिप्रवाव, पृरणलावंतगएवारोए' 
पिब्वा॥8 ॥90 एशावशा 08 शि ऑजए छा ॥॥९ 5४८०१ सेब वीके 35 #शविफ्पादाव, थी बवऐती0) 0 
(925९ ७०7९६ ७०४ (ति0 तराब्ाए 9पाच95 ॥ (8070305 ॥९8 'चै्यीत8 रिप्ाक्या॥ 0 विश्व, ज्रॉतली एश९ 909पंवा' 
बाण ढं्रा5, थ गा शरागफार ए९ रिशाएवं रिएगाब रण 'जाशफ्रांटीय', प्रोगंली 007975 02 ४0705 
58ए5 02८ए०९९३ द्ीठएणा। 35 'हैएश्लॉाफाप िंठजएगादा5', ॥55 ०2००९ एशाए एकर्णवा, #४॥ (652 
€छुशांग्रशांड 5प्रुकष्ड वा ॥९ गशैशिवाप्र गा) रण शिरगाव ग गंगा शवापार ॥ एद्वाजाव09 बात॑ 5308 
॥एशचांपार ॥ बलाओं ॥35 ह॥९ कांर्श शीगब्टांशांज्ीट रण तरगंताह ॥#९ 6 अ0ए ० व ाशॉह्ांणा5 एाशवटीटर 
(थिवगावलावा प्र), 5 0शाएव! 3०९ एशं१8 5प]7०7०१ ७५ एड्रां०एच5 5005 छा 3 गपाएशः 0० 0९००९९५. 
पृ+रांड 7क्र्णंग र्ठापफार जे रिफ््ाव छण 07 टशाएफए 8.0. ॥$ ४छि्शां #णा पी९ उक्षाआंत।। निंगात रिपाधाव 
ध्र4व00ा, उबर एप्राच्यात जि079९0 पी९ 9९ञं गढतां।णा ध्रश्न2३४० छत गिग्यो8 ?िएगाव रण चिगतुव 75काीएणा 
20 9९८9९ 9०>णैचा 85 ९ कि ४९८९४/३६२४०३ रिध्षग्राव 7 शंपहढए, 


इाश्रा|डिला29 


() 28गंगर ९ ॥०ए९ लीक्षब्टाशांऑ05 रे 5थरांशों विक्वुब शिफगाव ॥4ी॥07, खथा5 ॥3ए९४ 8605 
मार [स्‍८०णबवायाओं' छा िक्राटॉ॥3 बच पिंद्राव (वाप्रब्राव5',.. 6 ए०श रिवा]8 495 ॥0८व्व2व॑ 
6 ०९ लीदावएछाशांतञ65 0 वंग्राव रिणाक्राव5 35 00905 ( 09990793: 56): 


(0)... णबबंग॑ध्वए्वांगठण55५७ ण  0वणी4एवॉवाबा4 रिगपवव9; 
(७) बगागागवए॥2/0538ए8७ ०7 वउं॥आा॥॥570॥97९६८३ (०ए०१3; 


(८) एक्गागज्ात्वा॥।ाओं चिंदोी0ठ॑55ए8 ० रिव्यागंशरातपिवाद्राब 4फिख्याव; 
(०७) हुबंएथंएव0000053ए9७ ० (९ए27ठ75 44 फ्रव; 
(९) एशाी।फएगगानीठ॑ांडवए७ - ० रिव्याभीए्गाव रिशएड3, 


१8४९ ०४ पराडइक्‍ए७5 07 #६ढप्रणा३39 2९४ ९ ॥7ए९ अब्दु25 छा ढैएएडाजा मा) ॥6 ठंजार #९ ० 3 
चेंगा।थीपंथाबथात 70णा) रेंड जाती 00 ॥5 #शदाता,. खेबा।व रिएवा35 9ए2 धुवधारत॑ 6 उव0एा2० डंबाप5 6 
वीरादांपार ज्जोत (॥२४2 शए९ वपरंपे९५, 


(2) वछ० प्राण दृषपआए5 ९ एशफ्र न्िाभीदवा ॥ चंगा।व रिपाना35., 29 ॥९: 3॥909802॥ शाएं ॥6 ४0765 
रण 5ंडाए-[72४९ 5वं्वंड्ना४8]प/प535 ( फ्रांभाव्शा। 59909 चंद्र 2009789). 


व 4७३टमज्रीजा रे 0९ फाशणंग्पड णंत5 ्छा ाकप्हाव5 9 जठतंटश 5 ट्यीएत सिलएकएटली।... 5 
बेंक्राव यिती०50फ ॥ 48 एड॥एएशए पिठा 2 00९ए४०76, जज वरावगगाए वा, 3502705 एा) 0४2 0॥ा 
६0 परंशीश जाए दात॑ विजाए आक्रीा।5 रतवव-अंतंतीएं, एैगेटी) 0805 40 प्र९ जा। ् व ॥का्िाओद्यानच, 68 
फिर लाथबटाशांआऑंए७3 रण 5क्छुब बात खित्रा। 59घुव, व ॥6 एल्दाएञीएए रण चिच्यी॥ रिप्ाआ745 छ॥9०9ए०॥ 8005 
वह गज फ़द्ां र्ण डंह्वा॥॥ शिवाया१5,.. पिशा००, िीवएचएवा 5 ॥78 ज़ाजएठुएर एण हाश गागा अंठाए का 8 
वृफ़्रानिबाब, 6 विशा0 ् उज्लेतत शिक्षका4, . 






#०००फंए (0 बेंक्षा।॥ एक्वविशा ॥27९४ ७27७ 63 58958 ?7प्रणे)55 
दा0॑ भग्।श्त डिव्शवपणा,. 6५ उशर <०॥0त पधांधिदओए 524५3 चिंवा8 रिज्षापञ्रक, 4389 बार शॉशिशां 
(छा 0४ 24 पधधशधिवाऑपआव5,. वीच्शा: टाकडऑ2वा0 49 35 लिफिएड: 32 (आार्बाफ्रचएराव।ए।ड, 24 #ृगाउ0९ए०७५, 
9 छठ्वंबवे2०७5, 9 ए६४एवं९ए०३ आत॑ 9 2 ए8500९५७५.. 029 #8 5प/०८०१ (0 8॥9एक0थ0098-७००४/ 
चाग्टा॥गरा॥5. |6 ६०06 बजाए पीशा। ९ (फ्ए्थगा।5., 29 ढ2 छा 5वध्णी( 7रंपर, ॥#/0द॥॥/007/55 
७7९ ॥९ 068 0 शो, एज) 7008 (0 गावाटी पशा।, [8 [25 लेता हटा 7९ 6९8८४७/जा ्॑ प४ अंजांटड 
् राढ 63 [िग्ोठ िपापज्ञो85 $ वा व्रागिंीजट शि्रएए रण 6 कपल:  बेंद्रात॥ 06, 


(3) (7पचग ( "द्वाद्ावा), ९ ॥ज०9 9८९ रण एबरबफातं 55, ९ ८वजॉड लए | ्वाए85, 
भाव॑ागररत 08 बा0 गि९ 385 06 ८शा॥7९ ् 79ओटव 907श 870 7शौॉदांठपड 487076९9 0 ४९ 43॥ ८शाफफ., 
प॥९ दब्वाधतधाए25 एछार वेंबाग]5 ॥ ॥2 एशफचंगांतयद र ४ 4॥0 ८शाफए था ९ [09९5 52ंणंशा #07 
छ९क्षगंए ., ए0 ८९ (0 ए9जएश ॥ धा९ की वृप्दावर' ्छि 2 24#7 <शांणफए, ९ शत €075९4फशाए 
3 60९७ 2८०गीए ०९९९१ वंद्ाव5 गत॑ 5एगं25 णि 07 शेंडएप5 अशिशा०25,. 55णित्रा। ७४७४६ वए९ (0 
0०0) 098 एगाणा39९ 2704, धशर०2९, 0०2709079श72९व उद्यागराआ, वंवा ७३५ 0॥९ ता।९ स्गीशा >िगीरफां 
507रभागाद 890 ०९१ पए 5 एशा णि' ॥९ 970फ॒गठ॒गांण ् ए९४:३६वएणंडाा, ठिशावु ६ 79०2० क्वाए्टित0 एांए 
एगी गात॑ जांड60त, रिवीजातं 50ात्रादाीब व शा ]९ 7शंत$ ० प्र४ 765 ग्रा० ॥5 44705 ठ90 060८द20 
गगाशशी 40 06 ०७५५९ ० [7०745गााव शीह्रंणा ए४०फढी वैशवाफर एए टरडा00ठु 3 70060, 709एॉव। थआग0त॑ 
लि८रणं शशिगाएं गियर 600 ॥९ घ$३९ ०ठी इलाठ॑ंबा$ ग्रात ॥6 तुसाराओं 9४०८ 35 ए९।, 5 & ॥00 2 0ह0९ 
0 ९00052 8 905ण७/ [४8५ छि), 8 रिक्र्ा3' . 


(4) बक्ां05 ९ ॥6 गावाश्वीं० ०>णाशा७५ अ ४९९३३5व००५., निरछा०९, 50 7व4 भा! ॥376 ॥९शा7ाफ 
0०05९४४९० ॥6 एकृण॑बा वंगाद रिपावा8 अज्रट$ बाते ॥6 ग्रांठी। ॥30४ पररतिशा उिद््वएक रिपावाय गो 8 
८0779श॥ए९ हश/शाशात्रा 40 5ए७७७55$ ठेथा।4 रिपाद्याव३ थे ढा। 72592९25.,. निंट 30९ प5९, था थाए तवां९, रण ऑ 
6 आध्पटाजओं तदण्बा(९६ छा उग्रतव 2735, ए्त0५ पाशतीठांचदु तशा तार३लापए गाव छाठत०८०९७ ह2 98 
शिफागा3 छा २४९९ब६ढंणआ 40 06 09९४ छा कां5 ०0०५, ज्रांत्रणण ्रत6 धराज़ाततए 7७४३५ #णा 75 7शीदांठप5 
श॥08०ज५ ण 790थ0 ०जाणेएा07, 


(9) पड धापिदशार8 ् चंग्राव रिएराबात६ था ॥8 आऑफ्टाएर छा छिब्नश््एव रिपाशाव प्रावए 0४ 005९०९० 35 
+॥0ए005: 


प्रैक्ष॥4  ?िक्राबाव३ 84&48४8 रिप्राध्ाबड 


(०9)... आावए8ण्वा ... 6इटमज़ॉंगा न गार 9०क्ामांपु छत उित््र१ए७ 
* ' शिफद्ा4 रण 9254०2१ए७था७' 5 फ़राश्एं०७५ 
जाध5॥.8९. है0 एगडीड0१8, पिदाते25ए्वांक 
बाते ठ58०९5७०5 


(9) (द्नाणीवएआंथार (व०एगाद छ8853724एथाव $ छॉ।0!) 35 ॥6 50) 
' ैज्रपंकाए4 


०, वंग्कगाकीड 8:०2 (आए रा ख्द्वाह्ंबााए5एल्ञाव छछकिए्रंपए सैजीडीए 





१0 टांत्रीत-छवच्वए8 जाग ग्थ्ाध्रवाव एवएच 
प्रध्रात38 बात साजाएा॥. 


(60)  ?ग्ांताक्रीपबा।वआव दिवाफ्रवा5 रिशंट्टातवु (० एव्चाहए््राउ थात॑ 3०८०४एाद 
एशशबा।नि2९इण्वा8 पीठ, 


(९०) (९एड३ गादा३ (वीप्ब्ाठ 59ाएगथ्रा-25ए३१७'५ एर्वटी)095 0 
88532९३७७7४ . 
() .एक्गएगशा3 दिव॑फ्रआव छ655ए३ $ शिद्ातुष्ा जांगि 5ाएव 4.69. 
(9) ॥8#6 जञलठ/९३ रण म्रन्नाठक्ां 53५ बृकद्ठ ऑंठ/९5 रण #एएक०॥707७ (63) 
शिलाव रिधापी35५ (5९/९८८९०० 507८9) पिवएआआ5 (5९॥22/00 50762») 


ब्रेह्रंतव पल्‍/35 4308 090820 6 फ्ती।एा ० चिद्रा३ रिपागावब तक चिगातुब रिपरथा3, 230 तिए 
जएश ॥शराठांश्पे पैडाए 0जा ०९ छ ?फला95 एग ॥ए९४ लाबाबलेर/ंत्री25 आ्जोक्ी४ 00 शैशा ॥९७ लि गाते 
एलांशां,.. 507९ री पशा] एश€ प्रद्राअ्र्श्त चा0 दिद्ावतंव ग"णा उद्याअंतां ब३0 शिंता, ]॥6फ ॥9०९ 


9९००0४७९ 7एकपण॑वा. 


?कएीत 507गावाव, एशातठ एशे| एश5९१ ॥ 5्ाञणा, वशंप्वुप, (द्याशवतंत 20 00श९ 50णी) 
विरयगा वाठुपक९०5५ भव वीशशांपार5, पातेशा० पड (44% छा छ040टागठ 0 [7९5शाएदु ४ 5 
'पए९टावश्वांएठ रिप्राआत3,. 4९ 00527०20 ९ तरागाडांट रि्थवाए725 रण उज्चाग3 रिपादाच5 ॥॥0 ॥009णवगा९० फरैशए 
जरां0 कशां5 एज), गिववाप, उि्8ए७छ रिपावात ए>2९टखा९ 909पग गाते थी पा ए९शावषछांएणंशा 350 922८07९ 


एण्ड ॥ ॥शपक्का 


जहा ॥ 60०5 00 पाश्का पर ?7गीपपत 503 85 एीएतए जी0ए९० पर एद्या।व रिताहा05. 
00९6, ॥6 95 ट््ार्रराए ली0580 जाए 0९ 5जॉक)ो९ 8ट॥१ुए25 ॥29 १62]"०0 पशा। 0 6 टाशवाणा 
रण ब ९णाफुशंशां #शगए ४0, 4 ?िफगाउ' आ, एच 5गाशात्र कंशिशां हि राव रिप्रभा8, 


ग॥6 ध्राशिशा०९ वा गए एट तावणशा गए) ॥९ 300०९ 39005५०॥१ ॥5 गग॑ वंगाएंशा) शी एशफए 
0९९७, जांतरश॥/९०० 0७ प॥८णाइ|फ९0005 १0 गशा। गरफुटं जा ॥श0्चए टॉपर, वी0पढी गी९र९ ठार 4 
शिए ॥जा-एा2३ए९ (शटाॉएंटडी एण७ गा ९५७प 555०22०0 जी वंग्रांआ), पैशढर (5 ॥0 ॥शोह्ांठपरशपफ उ्या 
वशिगंणर ॥। शे्ुप्र १एथीव40४ (005प. ॥शए5प 92०४ ० ९ छठ 5९शा। क्‍0 ॥8ए2 ०९९॥ 8०१४७०/7९० 
[शा३5९०४५ एज 8 ठंठा0 एशझंजाड छ 580९0 ए[-05 जात ठशांचंत गक्षा। शराद्रंणर, 5िए0 ॥2 079 अंवााद्या॥। 
पराफ्गल री राग शवंपार था शणदुए ॥०5 ॥ ॥॥४ ॥0/02८ ॥रगीएश१06 ० दिावत खेधा शवापार जा 
जीादांए्थांश #शआाएर ॥ | शण्दुण्, 


आए पडा 


# एव, 965. दादा 8 5704075 2000एव7), ४०४. । & ॥. ैंहत55: . 5९शीवटीवांया) & (० 

2... >्नपक्राआ, ४.९., 967. (200९ ८६ ॥६ २2४॥00% ॥427202 7 पं, एशाओ: चिंठांदि 
छिक्लारा8025 

3. छउपाएव्फव, ।.... €।वं., 7959. छाठा ?2र्शब०० 40_540 2098, 'चिंएण४ त्राएशआफ, रिग्रगाव्ष्तंत 
छा 'ैंग॑ं5 

६... विद्रभाग॒5, €५., 3974 शगजरअंजा,. 400207902204 एप 8200020 270 2॥75 ४. 

5. (लजाप्राए्शागिकया, , जा0 ९, छिंशाए३शंतीशया), 395, 87 (003, 5407॥30॥॥, 


कब्ज 





न 
2 20222 :5000 20% 





दाफाएओ: छि8ंब्रद्ारडछएा उ०॥ एि्कूठ,.|॥#&" 
पिडाउइपएशाब धिक0, "मरा, ७8., 4939., एड४//4/४52७ (यद्याओ, फिंग्तीवकड: #उर्वीष्रत 
(क्राैय पाहौत,... 

शिवफरडॉफाज 54879, एटा, ०वं., 4926. 84280 2) ४ 2807 544. 
4095: 4िहआक्रीपां 6९5७8 सि0. #।वीएन रिकांसीए॥ 2255. 


5फ्राथंगोभाएशा, 0.0., 994, 94४70 (:पद्राव7 (० )गाएा।&4॥, ॥7फएतश:050 
वृछएछए 29तेशा 





गभार45 60 8० 8४2८ पाा६८टा एल फफ 


4 प्ता२4 हे 


89 9. .6.58४8* 


प्‌ृफ्ढ उंगतएण॑ठदांण्डं 00९5 ॥ 7९5९८ रत तैगवीं74665प 3०९ 70० ०७श॥ एणाएशेिशाशए९. 
६४०2०७४ ०४5०७) 7९€/९४९श०९५ 7 7.3. 7658 5 ए०ण॥, ढगंलांडश ि $0प7॥ त[ातदीव, क्ाव॑ 80068 ईैंचा।व 
ह8फंडाव>5, (शाठणीकुप, 957) ०70 शाए क्‍00265 ॥ 8. 50690, (60) खठांतद 47 का 6/टी|एटीफार, 
छसकावांएचव 7ाद्ाग्रा। (ए९ए 02९७, 3975), ४०5. |0 7; फ़ग्टलांटगीए ॥0 ०णी 745 397९थ४९० ०॥ 
बंबा।3 धर 870 #टीपीश्टॉपार थी 50 वि #ाती।द 5 जगात्श्शाशत, 5 एश08 5० (8९४) 5. (७0988 
दत४ंताड एफ 935 0006 09 43 ७०६ रएतीएत उतांतत (2३/६2०३ # 4798#76 ॥॥ 2 ७८३४ 963 
ए9पएआ४0९१ 0ए 9९फुबांगियां रण #ट्ो३९००५५७, 00एशाशगिशा। रण सावी[क ?शिक्वंश्शी,. उिएं ॥्रीड एणाफ 
94065 70 59९०८॥८०ॉए 96४ जी (॥९ 6९ए९॥०काशा ण गक्राह बा 6 कलांएश्टापा९, एच [70णं0९5 
गा ग्रांशर्शााठु पर्ा्ीए९ट णा गाद्याए आंर5 ए। ब2टवॉ।22९0 $८एेएछाए९$ ० प्री$ गत, 0४९०९, 
चिशात औठपरांध ०6७ ॥वत6९ छत ०2 3९८०णां 6 शैशवाए 502९5 ८णाएरतवे ७५ (60०) 'चिंद्रैाएगे। 
60॥755टोताह/3 5ा॥8 शांत चत्वांवकशादादााए" + 4९/प३४ 260ए92ट074९व7०, ४०. ग, (959), %79. 
844-553. * 


प९ एण+$ छा #797०9एवाए३, 4 90९ ९ (८00०7 ० शिवाकु०ए0750९०७ (4295-]328 8.0.) 
णज॑ ॥8 4#ठ]ए8 (ए॥45५ 50९5 0०५9 ॥९ गदा९ गाशाचाए (4फए07909पए40एवक7.. दिताए/0 ९९ 
चाश्था5 श्डशाणाए ७ प्रकञ्नाए ० प्णाबाणा एशांवरंधा।द [0 72974 ८णीं, सिा0॥९7 ए०0॥ 5 2507व6ा8ए५ 
बतारिश्वता।त9प्रावाता।, 


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॥ ]5 कशंत इलशाशबॉप दवा गंगा।द ग्राह्बरीणा 6560 एव०९ #एण िठाती ग्रात॑ एबराकाकाओए8 
शशैथीग्णात्र 0धुदा520. ॥6 शा गेंब्रा।3 टशाध्रपशाए, 6 कैप्र/व856097०, ॥5 ९शौ९एशा काइल|>९६5 एी0 
७९४९ प्रथ्ा]९0 (उद्यातवीलबवड,. 00095 886 ठा6ठ095 [ गच्य॑ंत5 ्री0 ०8५७५९० ॥6९ ९१०च्याहंएणा. रण 779 
जी0०5077,.. 0 रण 25९, #70९९ एट/2 एटश। |चाठ0ज़ा) गाते 7एदुवात९एत 35 “००5... ॥72फ7 एट/९ 
सिश्चांगा9, ०ंग्राएप उच््राग बात हाएव 50076... 69 ॥ पा 90 वी5टा9४५ जा।0 ए९श९ [कण 

'ड$ कापांच ढएदीॉड ए्री0 एशछ गीए४ - एंञ्रा०, पिद्याता।त5, 8एचबा3])।6, 00एडरती4आ)8, 50णेव0क्‍04 
बा0 308974020.. छीव//408/0, ३॥8 5४ $#पर/2 #2एव०॥ 9७४ 8 2गांश770737ए छ॑ (075 0098 
5०००३ (35 8.0.) ॥#6 440 ब8७०ट०॑गाएा रण जिवहा49ीप जाते 690०0 [विधा 86[90|, 
8 शव 85 9 एशा।ए९ रु 8इक्काफवाव वंबागॉगा थी 220८20 35 फश९त छट 007, 9005९व५शा]!५, 
पी९ धाएवां इपाचंकप्रा्चंक्टीवाएव, एां0 ७४5 7284020 35 (2 0फरात॑रः ० (5 कैफ्रंवड्वानद्वाव, - ता।त 
भिंड वीगएयधुर ॉफा्रकाण्वफ्ढ बए]एथ्वाड 40 8ए8 ताह्एं2 छावश्क्ाकरादुणां3 8 582790 7९507  र रंडतड शी 
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70८६-९७ बेढा)8 28ए९॥ वापएणिप्रांवणीर [0 4 9९-(टगाज्रीदा। शव 85 7९7907९व ॥0 379 गधा) ०2४/६४५ 
॥ए७ ९7 दा0एए गण ॥0 5# €श्मांपाए 8.0. $ ग्कूएथ्वा9 जिक्राकैवाब गेगागंडए तीतप॑ ग्रणं उश्चल 
वृ्रभांगिक्तंप #िणा ाबएशआउण्ट9ु05 प्शापार एज 70५9 07553-2045व टै0798 7000४ ॥ #वााफ 
र्शांप्रा०5 5.९. 


फह एक विणा िंपांवटवाव गाए 24फ्लीएणा08074, फ्रोपेशी) ए्रश8 ०जा90०9९0 तंधात0 ॥0९ 
श€वा।पए ०शाप९५ ० पि९ (गरांजीवगा शब, गीक फशायगाशां ॥4जीद्वांणा 40 धार बैंगागत 090०९॥८5 ६ 3 9९०९ 
5 णिएा06९०ा, ऐफक्टवात छावेद्ा5 दी2 राज 40 शव ॥ 8 त९३९/४0 40प52, ४0९४ 4 ९९ ०7 एप 
दाठफात 07 ॥ श॑ंप्राद ८४७७5... ५० पी€ एक/आीवए:34 री प९ ठवा5 एटार प्र0भाप्र वरबाधरतं 7000 ऑआशदा$ 
व ९ ७४७५०-४0९ 5 दात॑ 06३ 3९१5... ॥शर्ढ०ण०९, 0० गाव ए९डस्‍9९5५ ८00०० ९ 354९6 40 
एीं5$ दि ॥ 59९९८ (९5४75. 


॥. 787४४ वष्टापएट्टा5: 


छाहक्ा097च गंगा 95 ॥श्छा पछ अंधंणं 35०शा2 206९5 थातं परी९ सीएठछी 00927ए7028 ००7७४० 
प्राधथॉरारव ग्राशूज€ ० पी९€ ॥शाशव5पघ८४ छाठएणा | 6४ बटाएणीादे$ रण खवतांगव डकाहीव ॥ 5०णी 95. 
08०श2॥८ सिर ।005 एप्रतए, पावुप्९श१९६५ बाते पा5जी॥2२७ सिपरह 40 वंब्ांधना याणाव 0दा 7श9्7075. 
बं॥08 $८चजापा९५ 49 परधएछ७ गा00९५ रण 5कॉहितिसाव, पाया 9 एणेप्रांदाए जंवाएशा०0, आंबाती।पु 
॥7000व४55 ॥ 66200, ए्रातावा93, प्राएजथा १५ िंवरिवए ५०, (50 छत 'िवामिव लैशा एे #("ा/794५) 
गतंतरत॑ 400 पार वबेंक्ात5 (#ढापाफच्रहव, ध्रीवाएाव, (बैशा30, 8/#क42॥4/एक, प्री श्राएं ि०॥- 
डाश्यगछेो, ४ #एि 936 87गांधप्रा।ल (0.7-905525ं07) पीशा९0एए 00र0गरफ़ांशर णंट॑ंजए ०एडा 00४९ 
वकीएछ व. मँधाब ता ॒#ूढएक्‍ी ओतठपांत फ़ाचलीएर खाते खींचा ऐशार्ट ७९८ ॥आएग5 रण फिशायीएणी - 
उ्क्ाएचत्वंएाइ0#त, 5पा099ट!ाप्राप, वाप॑ डचा॥एतएटीवा।[6 


॥. 30भष्ट प8%०६58. 07 568५ उ्ाश5श पर #र्एल३4 


'वफ़छा8 बा 70 गणीशापए शणवशाए०४ छ॑.. ज़कशाशक्‍९एव। चंतात क्‍शकाई पा कराती, "न 
मैण्टछावीलध 40 बंबांत्प गबतीपठाढों ३०८०ापरॉड, 'ैश्रोगगनणंशव 5 ९फणाईएत॑ क्‍0 3९९ संञांस्ते दृगॉएदव . 










2090 22% 4228 22707: 


कक रर$ ४४ 
१4022: रे ५ 
22222 20/4:2202:20:772:200 07222 2 42 






...४,५० ५०, 


श्ण्णााँपप, पिशभिधृर्ञातओब पड! 7665 
0 चॉध्ड शभं३एवंरट 0 प्राध रिवाधंज3]8 रा 
वध, एी॥0 00९ बण०ए पे क्‍9079 
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॥3ए९ 7279४७४/४१9ए 207रार्लेरव 3076 रण [25९ औएठा क्श 7९६0765 0 खक्वांगव त्लीचाएत5, कुध98 दवाएं 
$7ा8#॥98 रछज एक्ाए ८९ााफ्!९5 8.0. ७॥60 8.0, 





४४० 0६६ ८ हक 


200०. 2 ४४काठाप्पुढं, 2875ए8750॥6 (१९७०।९५५) 


[ ए०एजांत ॥६४ ६0 अं विक्व ॥॥282८ आकार ॥50एछ075, क्ा0 3 शिएए 50ाश्णोवां ।णातुर/ बा 
77९67४9ए (6 ॥रद्या॥65 एज 6 प्रजा ६8 4ै/व +- खरा लि #ागाठा।3; बहता (66) 27; ०7976, (०४७, 
620), 00/ढ/ए७4॥67९ ठ्वव०0403०, बाग (क्षावर॑ंधड, छशट, $वाहीपड फिर फिकडव, उंपकुताए, ठिक्वयार। 
उब्ाझ्ञीब रण ठ4एक्ाकइवाँतीत; #प०8 ॥02 िववाव2, 274#64; ॥रशारड ॥ ए०वीदताव (564/), /वैंतरीत ह 
(564/2), ७८७०० (67/2), ७४०4कठााद्माव ?८०वंड (567/6), 78०0० (567/6), /७०त! (573/4) 
43ए९४ वी एश्शा (४४7 40 ७६ पि९ वरगा€5 छा बध॥० वतथा-+शड5 800 फ़ैडए25,- 5५07९ए्शौव। ॥९78॥५४ 





#९८070 था 4 #दवाभ्रोंद अं जाटो) 5 ॥0णाएंटार 
॥छब्वव5, / एकवापग्ासबद 77३80 वा पर7ंडद 
इवलादांप्रॉप्यश्व- शिश्रीप्राप्प 5.0 2#6/एप्थ5०. (५० 
ईजील्याप्रांप्यिषत. एप [770)" खात॑ 5580फए वीश5 पए 
॥5 जिक्षापागांब, इ्ंतंशा। छा ७०4/०7व५ (0 
8 फिग्रा्नी र व इलांज़ाँणा #णा। ि्ञोपाल 
छा0 $ टॉशतल 5 वा व्ीव्णावा 
कप्राफएक््दादीवातां?, वशञां5 ६ बफुणशाफर 3 एशफ्र 
प्रावधंग्रिवााए2ट वींग्रॉस्ब्दट. णांतिठपां 9985. 
प्राफ्वणकावीवापए 45 3 7980९ 205९ (० चिंवाएा[3 
+ गाते 5९एशर्क इप्णी एं0५5 [40९5 शएंञ गा 5दा94- 
जवबागपाव 0090, ॥ी $ 38वााग ाशरञाओव 0 ७५ 
0700॥ो4ा 302॥९€270९5॥86 7/द€ए[क्‍/ध, 
'एकाएवकाब 50726 (569/4); &407707/ शॉंधरव-2 
ए420#ठ/0270४:00०7/7/८४ (567/8); (8॥॥/5#0/०$9), 
शाक्रध्रतंत कष्लापच फांएवप्य50; 8॥0चरए० ०976 
77ए० (९); ध्रा/।र्छ०5० (566/9) एकावाक5व फुटमां 
(68/4), 7९९००॥० ठ64#ढाांत्र००० (574/8); 7९2 
कर्डशि' 40 #९पएशा। एंड्ा ७ ग्राणाा5 70 एढ0घ5 
ए4९९5 0 ए्रे$ 0 हरात्रावइा2टःए 370 70 [34 ९ 
7रणावशंशप्र 5 बाह)ा20 [0 ९४टॉप४एटाफ उंबा॥5. 
पृषआा$ ॥#४ गां।त, काठा॑व 39799 ००0 0 ॥९ 
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$/पक4 एदिवाफगी।, चिंवी।09, ८ा)९40 2४४६$।200०९ 
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श#एटॉप्रा25, (९9 480०2 (॑एशों गराढाशप्र गा. 0फुशा 7९9078, एयर एगत रि०८६ शीशीशड$ छि ॥ द्याप 
32850॥7 [सिकआ्ीव०95०),.. 6 ॥074॥९7४७, ०७७ ००६ एपॉना 2३०८५, ४85, 35 एढीं॥ 45 $एटएठ) 
एणंवव्रा०६ एशा९€ ॥0 7९९९55च४ए छि  फ़द्घपटपैवा 2९टाहराशा 0पा गारथां णि ग्धा००6४३ एशंगादागप 
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गा।4 7 प्रांव॥ ॥एणणात वांजोट औापगी९5 
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7240रणाएवगेैज)), श॑ए.. 300 (९02 ॥3$ 
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२00 १०. 3, ॥4्राफ्रागद्ररएग04, 2899)560॥ | शग[९. ग्रवावीए ए९ पु गाए जीविवप ९३५६४ 35 क। 
58747 ॥॥#द/#95 ध्शं। ४०९४०. ९ उिवागद्गा८80॥ बात उिप्रतताड। 

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गाव॑ ह8 ९१525... ९58 700॥ ८३४४९॥क्‍5 बा९ रण धार श९5 ० ॥6९ (र्ग॑ण॑ए४५ 200 सिब्ञ्ला/वपौ95 0 
०९७ं॥ धगी। 270 ८0ए॥7फ९८० 0ए ९ 5५00255075 ॥86९ 2 |8(श (क्रफँफव तात॑ 4(वठ५च३ 097458#25, 
(ए९० ग्रांतंतीर अंर९ 067 गाभांव॑ाणार९ शाफ्रोर गराक्त९६ ए एव0फ05 499९५ ०ए70 7 ४शा।ध्रौ७०७०४, 
?7्रकाकंशाआं, 0 ए]३ए५३७७०३ धरंएट एड था 023 ० [6 गा (शा]|९४ ४५७०5. ।7९5९ ॥00९5 ८05९५ 
॥९८व सीट ९७)ए (ाब्रोपाएगा ॥070फट शाक्राॉए5 0णावे 3 चिद्यैक्नागापी, 5फ्ए०0पए, #्त॑ग्राधात 
4३, 8&4779फए, शंट.. 65९ 8९ प्रश्प्ाप (/कप्वाप्रतिवज ता (ावएएंशं5ड शांशातंर्त िी ठिए ० 
शशाए 00 ॥7#67/ए०7५५. 





छीप्राब 5गीत प्रठफावुरशा छैणजाश ्ी (एाबपाए३, धी]5फ्१व॥ाएगनी छा एशात (806-846 8.0.) 
55 ब्रांए्शा 9गण्एसीणा एए ॥० रिकशावंपरांद 0जाणए65 -, जी॥0 [9८९व ांग गरदा' ताप 
॥0 ९9 9 टशाप्रए 8.0. 54) विएएपरशत बत्वांतत$ प्रगी60 गिश ९-#०5जीआी60 3 ००0०णा५ ॥ भार 0, 
१ जिपाठ७ वद्यांद बात॑ 706 #श॑श$ 0 #€ 50/06760 गरी5. 


एपजाएए 6 गंदवांप् पी25 बैक्ष।।ई॥ 35 एण72 40 00९ 08 35 06 ९वाप ताशाएटा5 0 (९ 
वरस़रावडांप ०00फांश्त बप्रढ॥577. 





_का०0 ४०. 7(8) हि8/0ीद्ा, २0:४8 52॥67 एज] []772788 
80477 (०. फ्रद्ञा35080) . 


दा0णा) ब्रालंशााप्रि 38 76प्रतंधाएक्कफ्॒पातव 0पाआ॥9 ९ रिकशाधवोपा8 ॥फ्रां2, मिठ ए9८९ (935 
ए€८0ण3९ ६ वंधांगव शा, 6 4९९ ०0 .काधिवंब, वी 52ए2९ 75 3 ट8]|गॉभ ए रिह्रशञठाजाव उतछ 
पिएवएचाओव 075 (95-927 ०७.0.) 7॥9 2०॥॥०७ ४७०8९ ७ |ता0फ़ा) 35 ।(४/४४/2४०७०१०.  ॥) 5870॥8, 
॥76 वीछण९ ० (णाधावाँब 5 ॥व्ारंपफ 5९९. ॥ शिागरब्कृणवा), 3 .0आगगावात 5 ठिपाव एमए) 48 ०७॥४व०॑ 
#पापा/25एएाच -+ 5 प्रफ॑िपांध उदा!05 अपराा0जात शांत, पृतढह एद्वांडफ्रवड ग #रतीब वार एगीरव 
#(00क्‍478 (8 ॥9772 ॥९।ए6प ए४०70) एशंगरह णि0फ्रढा$ छत 90#476. ि९ए 77९ 40९75 एप 776छिशशंगा 
गाव॑ 60॥0ए९/५ रत चंद्वापरांझा, 


एशशापावणववंत:: (वागाओवठबा ती5|८), 


खिएश्व्वांजी (930-9535) 7प्ॉंटत वा ४टतराणैबएडतव,. 6 दिवा॥304 90९6 ?िद्रा]99,/" ए€ उप्र 
् #वएपच्चाव, ऊांक्षागौपए #णा परशाक्ञागरवावंदाव, [गाते पीर 20फा रण #्ाद९5व7 ऐशे!तु 4 7कांव०, 
है. एछैंठु चंगशाव शाफरए तदारत व5 5प9वीवाव चरॉकिवांवप्व जव5 पदांएएत,.. #ताफटइलानी ततावाण्त॑ 8 
णं॥388 (68.0. 966) (०0 #06 बधाशव 9०ग्नी. 506९ए६ 509. ण्र0 08शणाए०० 40 ॥९४ 00044 $408॥0 
० पिला वातीया गांपएआ, फॉशटछ7॥89फ 5 कीं छएव७ 0 ८३५५९ गर्ा।]।श]9९९ ॥68 ज्रोभो४ ण्र०ञे। 6, 
पैदीए णीलनिणवु$, बात एजञ्ाए - +कातावंबणाप्रीव ववएव 5एवीवंस्वावत, 8वॉ, 7र्वाएटवंएव/व7", 
5 62076, टांटव' सदा धीहए डिदीाराांटताँ ही गराठवं2७ छा ०407०वं 7 /000, #0फ4ीईी 
व##वात्था0ड वी खेंबरॉक्रेंआात एडाह दल्तांव्रांगाए ॥0/ 0075, 7#6पवी 6 शाएं९ ठण मजा0त ए९ शी 
3९९ ॥6९ शिक्र्ृए"श्रोगीव वागवकर रण शत इवात॥02 छसश्टाश्त थी ती९ छाशशशा रिवुंव ह0)25ए३७/०५०. 
$९एछ8] 00४४ वृक्रफ्रिब्ाह्द्ा३ गीकुण2४ बारह छिएात॑ छएगॉशटत व) एडा095 शत92४ 87९. (08 
रिबशबएगाबाव, प982 एद्रपाब्राए॥११5७, 50एव्ाइप्गाब8, 3१ ठग्रगगवां8, बाते एफ जीशर>), एशाप2ए३१० 





७३5७ पघाम्व॑0पररतीए 3 एंठ बंबाधत 
0शा।९ |) 7 शैक्षाएवा33, 


वृता8 किशशाआध्र -७०४॥७५ 02 
शैगशबावांधव एज 504442४३ 270 
- हैप्रीएपावा8 ऐफ्र रिह्ा।ए३ 52९१६ 
धी९ पछाए-श्गा0€॥08 रण खंग्रपांशा। 
जा पैंशेच्रशठआल, तट धिगाराप्वाशात 
वाइटाफ्रणा रण छि९(5र्न 7९ए2वा5 
पीर दी (0० प्रबधाव्रलाताव 
बीड्रदांपएच, उिशंगनी ५50 ऊुबा। ५९० 
४679-79 09564075. 


पएढ ?ि5परत्राठ॑की।। छााए6€ 
॥5८जञ[ंला रजभ 06 #325$ ०77604- 
| (44]7 8.0.) 7९००7७5 ॥॥6 
20०शनाएटांगा णा .4०/0090 
965०4, वर (क्कपरत॑ंध एशाओारश' 
० शिांग?9 रिप्4/8 8 729370९0 
७प्र 506 5८॥0975 85 6 
विालीकवाबव एा उ5गातग्रवा4, (९ 
60॥. ाम्तीपाएवाव,.. हि703स्‍7 
ए/छ85५ & ब2०व ॥250.,.. 5९एटा व 
बैंबाहत 8925 ९/९ ठिणपातवे ॥॥ 
९४ ७०ांछा९व, (6 एवावीगा।वाद 
(2.), ?875एथ843 (?] 2), 700९| 
जशी९€ शा वधीक्रा।धवा85 ॥ 
गांटा25 ([?] .3), ॥। ० 982॥ 0०४५४) 
बा९ए. (फ्पभरंध्बीज् (न्कैडॉप्रवा, 
?िबगाराओं। शाफ्ञांरट णा नद्राप्यावरणात॑व मं] ए०5 2ट०्राग्रेपठपञए >चॉा035९0. ९ ९९ गद्ा0णए 
एचा।। 5 0 दापैपएछ5५ बा९ 4 एप 4७०९८ तेद्या।5 ९056 5एटा छ4९९5 जाए, ॥)6 इंद्यांतव 97384 ॥0० 
९7]0५९० 9श'एशपरदा छाा।$ एंव मी९ धागा ० शिगंब०4 रिपतातक'”. छोी0 वाश॑ंत वो 6 ंध्वातफ्रव5 
(विं($) 7 ९५५७३ €४९शा१. 





2॥000 ४०, 78) (#्रापाब[०ोओं।.... 2000 (४०. 7(८) 


वाह #वर्वंत909० 95490 एणा एद्रताओ (शातरर 5 फ0णी! ता व 56 700५9 6एण ८०7. 77९ 
परंध एजी। छातीव्ात्र गाव ब्रााशापावंए74, ग0० त5प00 ॥97259॥ए९ 0085, ढा९ वंश ०८णाहईघटा0॥5, 
पृछढ इग्ाटॉपा। 5 लठिाढ0त 0ए 3 विरद्ाधान। ९३एशावा बाते ्णात 3 26580 (९ ८ गिलंघठछ ॥00.. 5९छा९4 
रिवजाइपद्ाबाब णा पड गात॑ 3 70पफ्रबा 809 ॥00॥76 पए वा णाएशोींव गाए 8 लांसीशा एए पी€ ४9९ 
ढाए... जीशा बशा 3७ िग्रॉग्राब वाद वैढा ॥प्#खाएं (7.4.. कीट छंगादाए ॥मरिवाईवात 4 
# 0०एठाड्वाइव जाती 8 असवाशते रेबॉदआशीब + १बॉजांएं फरार ध्वाफ्ातुड ॥ 0०0 श्र ० (९ [शी 90फ्रतंश 
टा0867 40 इुाणाबद्ाएव (2.5).,. 5 छा्मीएशाए धाम 8 5९एशर्वो बेह्ा।त विछध8 स्ाणावुड, 6 0907(- 
॥एर्श (9,ब३व4३ा।मव) )5 आठएा),. 40३ की] ए85 3 94०९ ण्ी रशाआ9, ९ 5चएनशाव९रांए0)9, 





पशरशढ छा९ राश००5 १० एगाणोव$ ० प्र९ 
मात बा चार 7-0वत ए०प्तंबाए रा प्रा९ सिला बाते 
7रहटर्ड) पी€ 70००५ ऑशीशड रण एंगीशांदां. . ठ00 
छफ्रबाण्गातुगला) म जाए३र्त५, 


6 70७ ० ॥#धावांब्रब5 (2,6) # ऋ्रटी+४5 0 
धा० ॥र0ती 2९ बॉलिव व कुष्या0 005 तीशी ०एगे 
लिग्रा5 बद्रात॑ इचफ्शांत अठांताभ्राओंए 05 ैवा4 
धठ9. रिब्ाइएशाबा, प्रंकाब्डी)) रिब्रतेगंवएकी, 3 

- गांपाद वीतावधिावध्यारद ॥ ॥रशथाए टर्पा, ज्रोटीड2$. आ९० 
रगा65 द्वा।इंतद 50 छा डिश एगावव-रिकऔाकॉएप्रा8 
प्रफि९शा८९, १ ; 


.कणाएवँाव: रढांगव शा।ए९ एव एजी। ७ए एपचाशा३ 
पृक्याॉब943. 6 207709#0/6 णा ॥6 6067 |क्राव०५ ०0 
आंत9९, करवाव इच्रात9705, ८गाणाहु5 रण 800748, 
रिबरवा०एण्वी गत 6 थांही शगार 0दठ्ाव 8/82 408 
9[22८07९॥$. 


॥॥6 89] रिहर|ंठ बीधडावछ99 ७०७५ एप 00779 ॥2 
धा॥९ ० #भाह्ाावण्वाणदा ]487 8.0. व्‌१९6 छशा९ 
कांह्ठी) एबाइएडत3॥3 45 एशाए ह97९४४०९, ॥6 चंता//4 
(शा।ए८ ठां (॥9999॥॥ ( ० ॥॥९ ॥), ८७गग779९2५ ० 
4 प्रचातगवर/॥#व, पावावशावशर्बंत?74 ठातएे #॥70॥5, 
गाग्ररांव००, बात वताप्रातीत 7707497५., ॥6 'पषए.ध7899 
जब5 एिग्कैजोवञलात वो) बा0जाएं गराशां09 35 6 
क##/०94 67 वार (द्योपाफज्वा 9९09., 





शा00 ४0, 87९0:0पंव, ?75एथ403 


रित्रा॥00067077,(४४2०5): [0४2 ७४९ ४४० ८६४2८५ 07 0७2४४ ३९ै९९२५ छा02४ 8 ७052० ॥५7९ ४00९. 
वकढ प्रहप्र [8 ॥006.. ४ ॥९ 5ण्णागंदवब गा है संभंगाटछ एण जार दित, ए९ गितव॑ 6 तरद्वापावं 03०९ 
आशाशांगठु 8 बंगा। 40४ (7.7), एजाबींगताए4'5 ठप वण्गंवए०5ां जतागांवव०ण्व णी।0 02णापुढप॑ 
00 66॥ंधुव8 एंआाट6 0पर/ठुआ।#0004.. व#9 चंगो।व राणा 8 औठणा ॥ 72 60 ॥९ 7026 8॥0 (7९९ 
गाएाए विुणा९$ (ीवाएागू)आरकणाव (24.79), एवाशएगावबाी3, बाएं एश्रद्राप्व्ञाबंणाबव (27.78, 0) ०ण र्ज 
॥06व किगात॑0तर ॥९३शाशंश भार दिवातवबंपाव ९जाफ़रॉँ25, (गगतंवएणप, ८१एवठे रण ४७ वकादाई 
(कण ४भ।2-3॥ व्शा।पफए 8.0.) ॥85 2५5० $९एशा३ं बंधा।3 क्‍9025. 


(वारंग्णाएपाए, (४९४४ 5065ए%7]) छ85 68 १९॥१९2००७५ ० उठांत्5 तंफांत्तु (6९ फं्रा९ 
खिगावाबुंबनी, # 999 गद्मा7९०0 (॥शा३९ऑक्षाफव 9पछ॥ ण हैएावप्रब द्ाादाते, 72926 ३ (शाफ्ञॉ४ ०४९० 
ज्चाए्बाकंबचज३ 7॥05070एच6 


रिश१परॉफहरवंक, था. छ/९३४ २066एवा) वर 4 रिक्राउएकावधाठ, जगंली 45.. 8 !शाएजास्‍60 एो४८९ रत 
७कहु, सेन कीक्‍एशीवाप सिखॉखवात्४ 006 छा गी९ (िफताप्राचंप०व एव्रउुबश97०5 रण ०७४५ (?.8).. 





9५९ कि 


खिएचए46तश कक टिवज्न॑ (0क्‍वचएचां तीज्ञा।टा, 7९०7 
ख7क/शीपाकगातक 485 8 बढांगवएक्व५, ॥॥6 एथ्र0ीवाध्ाव 
प्रावदर र् छाप छाग्रांश एा) वैढ४ 85०) ठ70 ९थोफ्र 
7९१00 कातत ॥35 ९ ७४९०४ 270 ॥॥2 ॥796 [08795०'. 
पक लॉक एडबाशड बरा0 णाड 9८ए-०-०ढ८६ गाए... 
॥ कीकावइणाव,.॥8 व्छॉंव! €१(.725807 ॥॥6 5€727९ 
[056 4) 0#फ्रश्माव 778 ऐंड दिुपार [९359 00075. 
पए-प्लौक्रावाप्था09 रएड्रीआरत ति 76९ (37899 0जा) थी 
6०ाए०पजात॑ बं50, 86024ए6प 35 93 गि९ ९४०7]0९ ० 
एडाआागधगगाव (?.,9) त०ए 0 चिंवता38 ०४८७७. [75 
व[77९चा5 +0 90९ ब रिबज्ञातवाध्पांव - एशादां एगंपाप्रत 
॥4/॥(2 80 ा]$ का।0 ९ छ५ 2355 ०0 वीधप्वा९५, ॥९€ 
[0९ #शप्रवश्वाका। ९४९, ९ धर ॥शागवे९त ० शी 
आंग्रींचा 2ठांग्रव 5८एफएप्रा९5 रण द॥09. 


गभाष॥ पहाधाश,65 ॥प पष्ठा।0788 णश्यराटा: 


९॥०७८ 5 एीठएा 35 एदरबाव शाभीवापां, 
80८0 9कााठह 40 805४९॥,.7 (/॥क्ाग्रत 8#7क्‍7079 9॥0 
७॥७५४॥825एच्घवात ९च्ा[25 एशा९ ८३७५९ ४8५ 076 
थिएफवाओा (कारातके 3 स्‍९6ठशातववबाए रिक्ोएव पाप, 
(प९(0/९ 3॥0 ॥5 570 परात[ु5 72ए९३४९९ ५९४९१४| ०90 
एशआञांपुर४  जगटी [अ0एणंतंर 8 ग6जञी (88४ ० ९ 
ग्रबाएा९, ९७7 509 बात 5९३१ छा [ां$ १शींदांछा, 





.,.. लिक्ञाइएचस्‍ता6 शाव88४॥7 #6 70फा ।40 [. 20) 


20०० ६०. 8(8) 707५६०009, ?िव्र5ए३१०॥9 पा ॥6 एाशा॥5९5 6 पिशा०7 204/९६४०९ जिआंणा 5 
(0णा नंगी) |णचाए व शोर 50७एफाढ ठा 3 उठंवव वीलवाएशिक 5 जोगाएत ॥ एछठजआांण, 


वफ्रां$ #णार दा ग्रषवञ्छा2५ .44 व९0९5 शाही गात॑ 63 दा. एजांतेश 0एा ्छ एक्ट एठ5चा 
70८6, क धो€ €शावों एव णा ९ ड06 5 व ॥0फ7९ डांग्रातह सरल (इक्ाव4445 डग्वादप्व), 706 
॥ /(79०/श्वाएव 90802... 6 $९एशानी00066 962४ [06८5 ॥8 ९३७० ० 06 प्रावठु९ एंटी 85 
॥6 उकाट6॥79ए०7, [९ $ज़090 ठ76फगाए, ठिंत९६ ॥॥९  #49779एव7:, ध९ ए-पएच्ल्‍/ [07070 ॥49520 
०एश #५०फए०-४४व797#45 ७०३५ ॥९0 9ए काठउ/त्वावएफ्र्वाठ काप्रातिव व (6 025९, 4 ९ शात5 ० ॥९52 
एंड बार ९ गॉशापंगां ठु०905 ण॑ धी९ चढंधतव एथगा९₹00.... ध्खाश्बाड शाबवद्ृश्त 6 ९ 5९ए2ा2 
ग्पशंशापं25 छा शिक्ाइएकावांगव गवव॑तवा0 बराशा[ए5 70 तीगरपाए गाता हा एशावा2९,.. 6 ९9०फ 
१०णएाए०प१ ० गा बात॑ अंग! ३५ ८०७५2० ॥९डपँँयह गरी 09 ठंशाहुर ४/०पात॑ (9 #क्राता78 
गिवाइएकादाव,.. की एज इफाटॉपार जिकाशावा, ॥3९ ४०० फ्ि।ठु "व प्र ]णा ग6 7०6 बंगाप 
श्[ 5 00507॥ ?वण्वी 00 छ02० 6 गा, जिद्चाग्राशाताब 9200॥25 3 ८वाप्रीत€ फप्रधाध्डाध्र खाएं 
शशञश्वतें5 0 गांड ॥0005 गा #6 ९60 ०0 फकिवाइण्दावाव 40 एवं णीं तऐैछ ४87, एरपोंट रिबता]0एचशा। 005 
पफ 6 ढिश॑ 0ए जोबला6 पड ॥09875.. ॥#05 ४९ ३० ८०पर्फ़९ 45. ठढ-फ़ंटल्त गढ९ हगातंत शक 







र 2०238 +ः 
भर 0.00 ५८3.५22.2 ५, ६, 27720: >पपवपाह4९ॉ०,९१९ ०५०, 2 2५४७888: ८ न 22 2८27702०००१०१ न 
520. 2202. 
222002220202222/02 0.22 20002 22242 25070, 222/0 29% 24:00 2/00. 22: 





७०-३., .९,९,०, ४(०१५९०९१५९ 


$6025 एंत छिच॑ंटएए वद्याव0 
$कातीव गत [.वाॉध५ (न्व्र।004070) आ९ 
पछ पाए छ्वाशा5 2४६ ॥ राटाता।ठ 0 
एाएणंटएटा ॥6९ टशाएदी वीकुछ6४,.. 7 ध४ 
एशाादों फवां 82 (9० जवां ए2०25. 
व#€ फ्रफ़शा ॥009 ० ४९ ॥070प्त 5 ४2९0 
एप १ 5९ ता शेकृग्गा शंतंरा8$,. 090०९ 
९ शि४00व 5 3 5क्राधीबाएव एछॉक्फ्रागव 
पाए कप), ै 


वृक्न७ हए७०ए४ ३८7 पर/ं2 छ७5 
720904४0 ॥073 श6 द्वार8 ८/0$28 40 0९ 
(गा।एागे (गराफाला ध्ीशर 4 5०७7० 
976 8४50 ९€(5४४8. []78 8९४८ वा 
६5 ॥00 शा 0०९7 0०ए पो९ निज्नाद्े९5 
छ67थाएशा। जाली ॥8 ठलंठडशा ॥0 ॥#6 
लशित९ः ०५४ छंगाएं...._ प९ 50एफ्राणा९ 
७०१५ ॥0०९ए९४१ आप, 40 0९ फराशाव5९५ 
० ॥6 ि९॥07८ 7697 'नि्ली,.. 7॥6 
#श९7९५ 98904 985 हग। 500९ गालंशां 
टिवाए725 97९927२८०. [१९ 5204क्‍5 ८०॥९0 
घितएपठुपाधा3, 6 | ४8७5 6 
$/96ठ0/4[ण#2कवाइएकसव!रीत शापएंद, 





पिठा ०7रप ए९ ३०००९ जिते, पा 

#०0९०. 9 छा८८३४०७, एशवीिवशाशाठ बाणीशा वठुपा९ रण ?िकच्एगादी। ७००5 

70स्‍८४० [९ ८०ग्रा90०१० ५००) ० (९ 

0०4 एपफाएगए०ए ० छींजञांल बणतंद९ 9 एगपएुमाजांद 2९१.० ]0प6ी (४०९०, 0९ धराव९ ॥85 2 (९ 

लाबावटाशाजांट5$ तहबा।20 8007० (0.4) एजं॥ ॥९ ९५८९फुपतणा धाबा ॥0 लं९्जागाा हंते९ए१६ ९ औठजाा 
गाणाह ॥6 मिकम्री।॑कवपा7 0९००/०5 


बी00 ४०/पै॥407070 (?.]) 


व]॥5 ग्राफ्टार5शएट ग्रोहपु९ रण एगरक्‍वावाग3 5 छा०5षाए एपा 06 िद्यावशंधाव5एवां 
शाफ़ञॉर की जि्रात॑प्रण्वा। 976९, पिशी02., 90च6 7९570 पं स्िुएार९ 35 िंद्वावएंडा गात॑ एठाओंए9 , 
वृ॥४ ॥च्ठ० 5 ॥४७॥ एंव था गजा-छव त00 जा ॥6 शी 802 7007 एण॑ ९ ँछठफृपावदंएबाव, पी 
;र९ 5छ9९शागा 5 ग9028 6था ० जैव्टा 045३६ वात कांदाप 7०0, 56४०१ ॥ 00॥एकाव, ॥॥८ छिपा 
48 4.6 ग्राश76 )ैछी। जाती एशी गद्याएशत 070९0०8०, [06 709९, ती॥९0९6 ७ गाते चिं। ॥९८४, 0वा 
प्राग्रा(26 ॥४ए क्ा-रांधीवड, बाव ॥९०6 जीती एकाादएणपाव टप्रा$ प्राएबा।०0 ९ ॥05; ० ७ 79९०। ० ८परशंखात 
गए, ॥॥6 क0ा76 विए९ इत्राएराप०प क्ात॑ अपातए औतठपवशड गाते ग वृ्षार प्राएकी।नाए2 9०४ंपा९, 
शशि पब्राएडयाया4 ॥000 | €एटाए इछ758 4 कैवलाक्वाक्‍ चतित, ं।र एक्ीवार ाठ्पाा) 8 ता एप 
आ८6 (2 989९ फ़ु्यां ।५ खसाए2त620 ॥ (९: €दां।, वीतं$ 4$ 0 णंडए९. 


छः ,१५४९, ९, 
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00,2०५ २०००८) 


५ 





70000 १०. 40 4९॥०7९, रिध्वा६एक्वा)88 जा००१०. प९॥072, 'िच्या390779850 97वं 
(00 +७॥) पछआएं४ एठाभावग्या5 


[8 ९90४0 सिर ०ांत्राग५ 8 १0००७ प2488 ए३३ प्रंधा। ह।2 /87/989 अ॑ 8७ ०0 670४6 
(0एशप्वाप) एप णबरंशातिए ए0205. 06 दिधुर (वाद 0७६ ४50 टी05060 ॥॥ ]900 फ्राशा पह जझआांएा 
6णाए्टक'$ तीर एड 735९0 ३ पी९ एशफए इक्रा९ 902, ॥०7९०5 तह 60779 5 ४४०7) 755५ 
ठुणाएु ०, ९४एबए४प0० गर०णात ॥2 $८णैएए९ १९ए९६३९१ 3 शशाएर एड, वा संणछ ् भी९ गशिकशो९8५ 
् सीढ चाबतुर, 02 0685 एरी0 ७९९ गाचटी ॥श/255९7, और 008 ध्व72 40 #6 ग7९भ०ए 
पिहयश्ञातीद5एशा। शा जी 0ग6्४वआ ज/९९... 5९एषाव "चाए९( 9/९02५$ री फिर शार्ज९ भाव 350 
(९ 07९४ 90०४5 छश€ ७५९१ 35 एप्रॉधात9 ग्राभैशा्रोड 7 ॥6 00#फटॉएटा. 


बृ॥९ व90ए९ ९एंवेंश्तट९5 ज्रॉचट0 फएपा ण्वशाएश एछाीत्रात ॥0 गैछी॥। #08 ९रडरशा८8 र्ण व बंवातद 
वृढगए€ जात था ग्राव02 र॑ एड्वदी-हापवाक बाएं 5 वा (एपशीिएओ) 08३ 0 7 ॥०॥. 8 ४९८/५ 
जराएगागा। गात॑ बॉड0 ताशरइततु ६0 प्रण॑९ प्श 6 ॥73982 5 एश्कली20 'कजादा9499' 0४ 706 शे085५ र्ण 
धाछ 0णा.. [क05 प्री ०ण52८८९०९४९१ ५क्व्तीक्ा।व३३ १४३३ 7९घुर्राप॑श/॑ 75 ध९ धिए (१92) गाते धाश्थाप्र 
प्थ्ण्टार्त, | ः 


[क90 ४० - 43 50805%9ए दा, 300#प्रा5फ्ए40708, २0८४ ६2॥27 


है साध 0: 44 $5प97प/०त, जि09०एफ््े0त5,5९900 प]न्वा।88570 एटी९5. 





,व् ९2 कर, 5 बर्, 


द02/ 87 


07222 ५,०५०. ९ 








4५१०१११४१/०-०, ५, ४2220 2) 5५३०९, 


[गावए ए९ 5९शा #णा ४ 300४९ 
लिए पीठां | पिश॑ठार छाठएटा ऐ)९१2 
वतए९ एशशा ॥ 2ोरंड्रर७ा९९ वां 559 
वारटचताएव(शा[0ए5 द्ात॑ बद्वाठएवा पक, 
05 92407060 ॥ [6 ४वरं0-0धु6/705. 
एज 28 (एवं रण इिच0०053चराधा व, 
ईडएटांच ० ए740वां $4/45 (..005 7 878) 
७४०5 ७ 700३. निशा2८९ 2 207[0|९5 छ[ 
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#शपद्रां)5 ७९72 7702८290॥2. ॥]95 सांपता 
वती[ठ67 ए५ $७वचााौ।व3९( 370 
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तवप्गाधद्न 80-9 ट्शाप्रां25 8.0. ॥॥6 
व सव्राकाव रण इडावश्याव/टां०908 
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७४७५ ऐ€ 5९३४ रा 5९एशवां /8छ67774/6 
042८007968 ० शा०५ग 374 (९ 
एटांवडध/07474 ९ ७५०5 [९ गा08/ 
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एछाइफ्ाा0एकापव वेत्राराशा आ/आ९१० 
विजणा। दिद्वाशतादर।व4 (0 (९ ४९९07 
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छ80ए९॥ एशा875 2 6९ 0७लो€शं 0 
2009 ९०. 5 590479पए/था, 50000॥93फप्र/ञाएंठ, भीएवाएवा' ह8िलीवाएव शागरोौगाद्वाएं। र्0ा 
578ए90302900 0७४॥09 7॥॥-8॥॥ 





टष्ाापाए 80.0. ेृ 
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35९छशं। बा 0509. #गंड्रधाव चियाएएव जाशाधंता 5 वपांठव शा वे सिलापएथाती। 930५ शं9९ 
जॉली 5 20 दया ९०्ञ रण फिंश।02४.,.._ भिछ ढव्वंएत शाग]ओर वैद्वार छव5५ ऐप एए दृवाफवो8 (0009 ० 
€छ०ण09वाए विश, ठिपा (प्रगाव 06 सधंर॑ए उ९एलाओ ए2आ ् ९ (॥04 (तह रिुठ रत] 22९५8 5 
(णा5णा रिवाभी562ए 0३७5५९ए 8९05 [0 08 74/#भरंटीवातंत गाय 9820 |का्त५ (छा प्रा्नतरश१९९ ता 
पी९ ॥ण्राइडश9. पं॥6 शरा98९ रण एच्रइएक्राबी4 गाव के पित्रंड जोर 50478 2056 7250704॥॥08 (0 
पी९ वीद्रपार हा पिं/॥॥2 9052-४०2० 39092. | 


सिवा ता 8 बवगत शाफ़ञो९ ढांगाद जाती ऐ2 चिपाश ्ी रिक्षईएथादाव8 ९ 478९2९६४८ त 
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2॥#650क्‍30. 46 0375एएं।[220५, ?28757ए8796]2 | 2%#007९०., 47 ए7ाावएप्रोबए50फ, 29/5ए89 
वशक्तद्ाताव ॥) 8 (शाा|0।९, प्रशधाक्षा।वाव ॥ 8 (४0|९, 


उकडकादव००/65, 7९शए९टलॉए्शए जिीगाशाता5 एकआऑव बाते छुएु00९55 एि्रतागावएवा। 37९ 93976 
00श5इ9॥02 4०7 ' शॉव९० झंते25, 0पफ86 लिपाव॑ब्रागादों वशटसऑएत0णा5$ ९ ॥ठा पिब०2०, (6 बैंवाॉयत 
0९८३४ा9९६5 ॥ ९ िशा0/९ 7९ठांजा एश€ ० भग टश्ाापाफज 8.0०. गात॑ तणगाव गी९ शेर ॥€।ए6ए (0०७ 
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वृफ्ढ आएश री खंबांगत वकएार5 ॥ ९06 80९06 7९$शाए।४ (052 ए 6 (बपए३५ था0 
7श्दाश उिद्य9च3.. िशीतार 880 92टवबणरट जि005 तणगाठह 2.0. 849-893 8.0. तफ्रातद पीर 7शंता 
ठप्राबबु8 ए|४एव्तीएव,र 6 वंश) 0॥वरपरएना पिाव िं5 एक७०े रिवातपराब्ाएुव शातता९१ (व0पचा 
॥0 405४8 ॥॥७ उदखजग्पे8 गा ॥5 दावगतढ6पा गात॑ 7जंएत (6 पिछशाठार ॥शदांगा, 


[ जांधाप्ति एर रे त]गंटने ॥/ररछ 40 सप्ंटीए एडक्ांएर 5९ रण 06 00० (209४5 5 
पि&08.._ चिंणाए इ९०८०ॉ५ ॥० शएे९ एण 90(02९६५ वच््वव एक्यावा९४४०] एणजा0एढ0 पात॑ंश ॥9९ 
ग्रव्ा॥९ रण ४शप्रडीदा।गब 35 8 ऊचती क़ारभंताततु 8 एॉंबद९,. ॥॥6 शा” 45 ॥0टद९9 ॥ 'िैंपॉवए॒एरा 









2222 रा] ०222१ ३2 ५ ै, 5. कक ७,९६०, ९ ४४५ 
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वए ए०फपांधा 85 'िंट!078 9९. 7४५ कछगए06 5 - 
एप जि ांखोएंरट छीोंठटलेड,. एजेलाफाहु4 (काछांत- 

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गात॑ छुबच०४ ग्राध्शीलिशा हछड, ॥॥009 १४००९, 

चा९ हछ0980९55 ९ (ीद्शाफाती 85५ 0७7 35 

(िाटीटीकाव, जी४5 6 000॥0फव ०.4अंशा्ं, 

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॥ 5४ 0 दिवइत्ा94204705 व0०एशाध6 [॥6 ४०६ 
शा[९४ बात॑ डशाशंशाशां$ड 3ए8४ ८076 40 889. 
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जगा जालॉट९ ॥ ए०99९.,  ७0 उं4 शा॥0९5 
मी 22254 5९१॥८३७॥९८०७ 7९592८0ए९2ए ॥0 एशा2एगवाजओत ( 
7॥0०0०७ १0. 8 [028289५9[2840, (आशयागा॑धाच, . 748-749 8.0.) भा।त (ा0शाव8 (]90-9व 

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छि्रसए्गरागा क्वांप॑ई ० 50फक कैल्छा तजंटा,.. 6 उद्लाग३-१वाडी35 5९६ प9 वेशर फ९ढा९७ 97720. 45 
#शि|त्पांव रप्रात॑धतां लिशापागाएती गाए गिद्यादुश्रा3फ्रत्े्त व्ााश्ते भींरा ॥९ त०ा6 छ् ९ शाए९ छा 
#73925. ॥॥6 [7९5/9)96 तशाएं र ॥९ िशी02 (शाफ्रोर ७४5 2०२१ 8९-ए७५८ ##प्र/प्ठां०-७97ठ7725एव7 








शा०७ 0 १0, 9ग्रीठ्जागिए०व०, बंदर ४25४७७5 























छा सिप्रडत्ांद्ापाव 20तांव शै5 छट ।शप्रुढाचेटत॑ 8 3. 
बक्ागिय डचडक्चर्वलर्ण बाओवे पीर डजएपायादांक्टीारट/॥#०५ 
ऋवच +2 धं॥970प 50745 ि ॥%8 गेहांतव वरँपिओ रण 
डईवरशाव0व347976. न्‍ 


जी 20 ब90 ७९ 7289077फए ॥शं0 धागा "गा" 
एशंप्रतु #९€ ईक्काए छी ५ 7ल्‍वीप्रगाधार गाँव 6 
प्राए ज ।वएक्वंप रण प्रो९ फ॥०2, फैए 40एगाएाा 
' 5झराभीबएएणां 0 फ्शी07९€ एा॥रट 40 ००६५८. 06 
बंवांतत 92494 ऊंप्रीवानातो ।वाौं0 (४2 8९९०५ ० 
बेंबंगिडि॥, 6ि' ॥2 गिर प्र९ दवा थी एांवटए, आप 
[म्नमिं$ ९५७7६ 350 प्रंदा एच फिव€ गर्ार क्गीन्षूठपां 
00 ९09९, 9) बाज ०७४९ 6९ 45 ॥0 0० 
फीए शर्त ् गगांगंशा ॥ पिशीछार 7९8ुंणा. 


॥० ७४:2७ ७000ए५06700: 7िहाजेंकषोव तो (प्रॉफब।प [॥९ शं॥98९ प्रब)65 शाती।ए छततीत 

दा0 28007858/7. शिा।, जवांता ब्रा07040 अंत्रााी९0 वंद्वां72 शा €ए)९॥॥5. 

जा धा९५ 7८005 09 १९॥/०0॥/एणाहुब (जाए॑दना (]78- 

226), परा5९ ४5 ८०२७ ?4776/# छा ?वंवव शाक्रवात कींग्रावक्पाां, वी. 8 वृष्तौ४ 708507%9९ ६0 (9५९ 

बीए #एाढा।09क0 9, 0९ [7॥09वां गाव व ॥6 बेबंशव [शाएं९ ताक 40 भा दशापाए 8.0. 35 ॥6 

०जाश रण ॥6 ढठंंतश घ०ागव जा|85९, ऐ४९०. 75५9 ०ठताटाफपतर पिया पी९ काा९ शाशीवएफा 40 2८0९ 

णांक्ाब्रास्त ॥०ा ॥5 एशा।हु ब ॥रएगांगिा। एॉ४2९ रात बगंधांशा तंज ९ धीधए5 रण तरलीवाफ्रत 
डीक्रावावा थी. *ै 


ड[ए0फ्नएा4४४१४०:४24: (ए॥ग5९ 529व7णवाए): (4% 4273: 79" 44'६&) 


वां फॉंबट९ (5 0०966 50 का, वीणा पिली08 30फ-ए८ज, 30 का, टिव्श रण 5000 फिचुएए 
है ९८९ 05८0ए९४9 99 06.8.06०॥0,* $प9शस्‍|शाशा]०ताद स्राट]१९००५95, िजतेशबएश०व (ारल॑ं९ 6 
किटाव९०छांठदांटई। 5पाएशए रण वरत॑ंब बात ग्रिड ०0॥९8872$५ 5 छा द्वाढग ध्रा7णांत्राा22, 35 !5 49 गिर वार्व 
गए 7020८ण औशाटशा (70.]3) त€कांटवाशवे 40 बेंगा।व दिवी ॥ ९ छारव बीश सगाग्रार्ता ग ॥6 
॥शंक्00परावा9 िएछाए। 66० दाजांट रण वंदा।तक00, 


पृ॥ढह इफ़ावफ् सजीव वॉलवरा#वबाच विठिएा९5 जाती #ींटीवॉतव090 2ए/णावाप फारएथनांशरत॑ 
पराफैराीव, इ९द्यं2त॑ था 4 कीशिाीवद्ञाव गत कवॉण्वक्वाफ्० बार िएत भाअंतंल पत्र ॥९ वफाठांह, 
वपन्‍छाह उह९ (ए० उएच। वीएएद्रा(हा25, 2 जि 908 7॥23557९5 .,60 था | 40 5 ]0 टाग३ (25.44 छाए: 
35) 45 ैव77 विव्यांद20 99 [9० झंतरा0॥6 गर्ंर €ी१०प्रा+टश5, ण्णोमंट 6 छत 5 एबाीशा।व79, 
(56 ४ 38 ७ 0 था धाश ?2697क4०व३, | पैशड, एप ९ 5९ब९त कैंविकिाएप 734 णा ॥8 भंधरा, 
गाव डावंका०ए/८० एा पीर शी: 4॥6 एकउएस्‍सव 5, #क्‍शंतीव छा प्रौ& तरटर बाते 70055 एपौचुएए 48०४ 
ग्रात॑ ऑपात 7०0०9 रिबांधार5 टांढ्बाप्रि 7सींसए 2 लीक्षाबटाण्रंड05 छा एगीएडग वचीक्राप्वाव5ड गरात॑ व५० 
शांप्रबाभाध्ध॑ंया,. 30 जा पैड 7०2८ ८३५०७, 06 ०३०९ र 5000६65एएजं७ ॥85 था ०9९77 ं & 08 
0०च्रवशस्त सजवछुर शांत बा शागक्राए& तंठग-वए, प्राढ कांफस्वप्ु० वचथ था पोह विए8 रण 8 7065 | 
च०0०ए९2 9॥6 (0]१ ॥6 वाएखाां ९० ढारए४ पी8 पाक्ा। ७द्ांदा क[एटीए गिंधद ॥#/0 दी2 ८४०४ ए.3). ]॥5 





#0०॥५०. 24 #शा89व09, /ै9प्रौव)० शिाण०१0, 23 छेठ9गी9, ?धा5एगाशी।4 (807९) 


बंबांगव ८8०७ 999९5 0 4ए2 9९७७ ००ए९( ॥॥ |ठॉश' 9९7005 0फए 8/एदव5...6 ४ा।व ॥78925 [00 
87९ 7९छुगतं९(6॑ 09 #॥९ [0८25 35 क्वएव-5ड ० पुशाशाबॉए कींवंबीपांप 4.९. राग. 


जिकाठएवांवफ़वतंप (वीडए4द! 0ए4/०कूर्णा) 


#०2८099 (0 ४९४ जब्लांएॉणा रण सिक्षत/4/प्वाॉए पिफ्एदाओ ग्रताबनी (95-927 8.०.) 
€बाएड९त 8 ४वकार 9987 का गीं5 एॉ32९ बात गाञधीरव॑ जा 8 286 पी४€ ॥7998 ण $80003॥3, 40 
कानदााकाव, गियावश्बी096५ फ़ारशांड का ९ए०ए०९० अंवा९ रण प्रीएदी बा।06 0०76प9399 फ़रारइशां5ड था 
९एग०९९ #ग९ रण माप! द्वा0 ८णा०ठावा[र्जीए ् बेंबागआ5, 5९एटावां एजीर पाक, इक्षोपैजंणा8 इटप्राएए/25 
॥876 ए९शा छाठएदाए। 0 चिवताव5७ 00ए. िंप९णा, 7258 प्रटापतं€ ९ए९०, 76477 [ाविा5, क्षाप 
॥रंडंवाप्त #जा९5, बात॑ (फतपरावरपांी25,.. जैएिां। 4 लाटपांचा एंपंदुर्व शि(#6 2709 (॥6४ शा।एं४ 70705$, 
(5. 6 & 7) ठदश्थ्ाफ छाए शा ठगंगाद। ग्रशभीवाॉजा, ९ ऐशाओए5 पाए: | ॥शोर्श ण। ४ 
झ06 ९तंद्रृ९ ० हार लाल्णंबा शव [शि| ]8) बार घाादप९ रप्थाए९5 गाते टप्रशाप्रातीव& एशरट गाढवाएं 
नि ९ कीपोंगा ्॑ इउ्गरवी4, 8 कपफलपफपाने गाव शा।एेश /5 था सरॉशिडंएड ग366ी 0 पी 





3 


2000 ९०. 22 8594, 5९8820 ४४॥7974. (8022) शा०्र०40. 24 89928. 'ैं॥)5एणं।३ (8072९) 


0गा(5 | ?छएग्रावा 7॥एश (2. 9). 8 क्री एांतर ४९979९व० 0९३८९४ छ०$ 2350 70एं6९6 07 ७५९ ० 
९ वतांस्‍5.,.. 6 करा।एकफ्टांण एण॒॑ क्रओीराव प्रधाफ बा। 34एग्राट्शाशां व (6 चैगार गॉपवाँ गाते 
(९ 52पफ्राएणारव शातात& एज एवाश दापांव 5 43 59९टांग्रॉफए रण ज>िग्रावएगैब9व60, 


४6 गगाब कशा॥ए25, (0फ7४/045, 3 9९क्‍९जंवे 0एि प///व5, उनाशा भिहै। 0९5 
् रि्ाशएथ्ाब्ा3 (9० था दावाार गाते रिब्वातवएगां 7शढर परार्वा॥९6 (2., 20), ८९एछां 5 रिफ था॑ आऑछ 
725 बा० ॥॥ वैंवता95 चिट, ]]6 उद्याएचा०एवर्वाएव १5 व 5६ प७ व 3 ध्वृण्वाड शा ध्यात 
०एशांग्रतुड बा ९ 0णिपा करारटाजाड, 6 5९३९१ गाँव, 5 5९७शा एजी0 शॉगिाश्त #ईंदाएवफ्च.. | 8. ९895९ 
(९ वीहुपा९5 €5प्राव ऐड 052 ० निंगावशाव, पिशांतरवा4 णा दिज्ञा्णीआावा3, 


छवरााकवबदाव्रत, ॥ 0790 वप: ए शिगवच्चा) तीआांए, ॥$ दि0जा) 35 >िवाकफा ठि 
॥$ 0शांत्रठ्न्‍न 4 फॉंब2९ ए उंत्राहव 2क्‍07. छ० णाढ जी व्वाउर३ ए7०जेत०त औशरशर 0 वंबा5, है गांहवााएच 
छव5 टगात्रपटाए। वां. 08 ९०४ रण पर जा।बछ९ एाकृश ० 0पुदव॒ण्भु३ ॥6 (एणाधादंश चा-ए.ांर रण 
0७प्रावढब फांग्परव्वाप्र4,.. 4#5 गधव4एव एछ३५ गरठ्याश्त व५ फवॉवापपशगीवापाद ब्रीं॥0999 ३70 5९एशव वि 


220 25 8॥8 ०, 22268 +५०५९५, 


25422 





2#609 40, 25 869नाव, #जी<9 (7072७) 
॥५७९१०००७0 चिैंप५छणाा 


प्रिउट0७० (00  9॥-]0॥ शाप लीवाबटॉ275. 





दाधाड ४७2१९ ८७9९०, #०7७ (३९ 
विधवुधार$ ठियोएं गा किए जीह6ठुर, 
मिक्ाइएवावीव, गाते 86 द्वार प्र छ0९ 
पकावरधाध्राच ग0णफ था 500 (२2०07 5 
णीट८ ०४७ 680०4. €४०॥9!85. 
थिधापकुरका था फ्रयांशितएवाी। 70, ४४०5 
ह बीवंतव शीए70. -ी ॥95 ९ ॥47॥2 
- शाएएं हरीहांदिव इंदत। 90596 
॥269श/व9पाचररंरां॥95, (परॉजफाहु8 
(ए०5तवर्न, 0) 5. उफ््नी 7एछादा 
एशवा पुवए९ 6 63(5. 


चिाग्रांब2५४ 27९१: 


ल्षीर (ठ7व९0709, ॥7[90व9!ा। 
बंबाओ4 ९८५ 9९72 ॥008४त 6( 22९00॥8 
पृप्रा0वगोद्वा), (7 प्राएा) . 
4गएवतपा, पिठफ्रवौध्वोीती। 0090॥; 
रिशाप्रौरए॑ण08 ठा29 रा0/९ ँ0गां।रगा।फ़ 
निद्ञाठएवा, ए९र आबो। एणाओंवंश 8 
७ ९४वाग[एंट5इ वा०9 (252 ९5 
7 व उक्शाॉंत ७७०३०. 


सछाएरणदाां, ब्राएंशा।पि श0ठफाा 
निशांशाप, 8 टठआबो 0 िठांगाएव5 
ए्ी।०7प्रौएव 702/एटटा 979-40फ% शाप ५ 
6.0. बाते ४८७७ टो05९ ८णा(टा5$ श्ण। 
28॥9795 (80935 ्ए (दागवांवा(9, 


8 वींचुणार छा हैकादएव (?. 
24) 8छव्रांटव व 4 33580 कीा॥#65074 
वशालात्राएवणएणी), गिग्रीए४0 ४५ ॥0326 
टलाकच९5 9 दा! 94380 शाउपु९ द्ात॑ 


#ाजीश वद्वा08 शतवादवा3, ४१ीक्ावाव का 


वापथाव 72०९३५ (९ 5५७9० िं।दगा04 शिवांधा९5,. विशागवएनी 07526 ठवा)5 वात 3 साफ रातंडार्त 
#श९, है। दिग्राएचर्तपा', 6 खेब्रावठ कशा।फ़ार किला 700॥ 45 8 णिा।) [6209 (0ए2 (9शजाओ08) ०एशः 
पी इवा9769४6, #गांरव॑ 0ए थी क्वा्दीवाततातंव9०, 4 [गिल की वे। जरंपिषा। १-४णार क्ावाताए छठे], 
वह 600 गिर ्ी शी९ ?क्ता औतठ्जड 2परावठ्शीतवाएड बात 8 वंगागव विवुणार5 0) ॥९ .40/५ ० ९ 


०एश 600 गशा९ 70८65 ॥5 उग05 बिंदाणा, 


है बगावब शाफ़द गरद्राश्त॑ उिबगाउ-चंालंगप्रव 


॥0पभाव रिव्राइएथाव्रव 4$ 5९९३ मो क्ीव्यांग स0त, थी मैाव्रावएपागा जीव जे #गवाबएपा 


५507॥2८(. 





260 ४०, 26 849948 , /॥0॥8 (870726) 
पर्तए0०३० चैपप९एणा। 


0फ्रष्टार उ&358 ॥0805$ ॥४ वानह 5086६ ४ए55ए५, नर0522830 


व. विताटीदहापएफ: 





& 0600४ जी, 06 705४-८ए 5छल्या28 उ॥38$ 9 3 
छ९्बाँ 7009 (॥2९ 709) ०। ४ गी। वशयाप्रित ७5 
जिभाषादाएगाठेव, रिक्ष३एवशजरहीद प्र #वए0/54759, 
?80गरवएगा-शिाल्वाह९00795,  ॥8 वैछठ8 ३7४ "० 
६३॥४॥73/प/8 एंगरां352, ०000९75 20056 0९ शा730९. 


वृबबाएबाप णा ]ी४ 0३१5 ० रिशातरा ॥85 ए० 
बंबाधद श9४५, 06९ ० (कग्राताद्ावा3, 02 
जीश णि रिधवाउए्चातरा8,. 252 ७९७०५ ॥दव 
छ९्शा 9प79९8 7 4208 8.0. ७४ (/ग एऐऑंशीका 
ए|०४फए३०ए5 0ए गवठा]6. 


880पट:55 #20५4 887877.0 8828: 


$९५९४8४। एाणाडर९5 रण बंगा।व गिंता पए्रढ९ 6ठफाव॑ 
॥687 3.94... 0 ॥९56 [ए० ४४ 9९६5, ९९एशा 
पकरशडव(ठ73$ ॥0. 2/(४0त९७00 १7७४शाव-४ ३८80॥ 
गक9८5... [स्‍252 37/९€ 70 [7९5९॥०८० ॥ 54९८ 
शप७९णा, 900740430... [॥6फए7 बा€ 0वठां4086 ॥0 
]70-]20 व्शा।पए 8.0. ५द्ाग्रद्यावाव इ€वां20 
4॥#79०70 $]77९6 09 १३॥४४-४३४शांयां (2] ,22) 
एप टॉ0वप्रतं5 2४ए20 30002... पिंछ 85 3 77476 
इचाा0परा९6 0प9 43 (/ठ[क्‍एता, रिह्वाउएथाजी3.. $ 
इ९वॉरर्त 0 ३॥ रॉ्मबांट डींशोॉीठडडाव पी 9 
77476 ए०2॥॥9 ।॥5॥230 (?] ,28). १७४७) 055 
छत पीर लत 45 औ0एा ०ट0फ7 ००१६ परी९ 
एद्यादा ० गराव6०-7०९ (?,26), 0४९5 गेटपत९ 
एडाइएडाबाी3, रिशायगात्रा4, रि807980॥2003, 3 
एा9950९०७, ९८. (?3,23, 24). 


लिए्पस्‍श३0७व३त॑ चार8 45 5वाश्ए 40 ४०2 5९एशढक्वा चंदा।8 948०वीं5. डांगरातगाद उि्लोऐेवा वा 
#०४०/३०786 शांति 26८०शा5 शाजिया 5५ ९65 5 9 90ए९/फिं 7८925४7४(०07.. 2 ॥7392९ (5 0 
]20 टछ्यांपाए 6.0. थविंगौग्जाब एगंती 23-]तवा।दबाव5 ट्वाए2त बा0पाते ॥5 ्राफ़ार5डॉ५४2, ॥॥6 खत: 
डवा०8०वाँं 5 2) €श्वागओं2 छा 8 700प8 शिववंश वा इफफ़फ़रॉश छित, जीत 5९एशवो 0ागाशा५ 0०॥ (6 
00०09. # "ऑक्प्राध्रफ्रौंताव जांप) $/वा० ]8 ग्रीशर्शपप, 


हिए प्राछणांदा "शा र बेक्रंशजा 5 पिरक5090., [0९ ?दवइएआदो द्रावछुर जो दो। (९ 
शिदाव 2प्राप्रज्ञाव विला।वाव$ 8 ्र/शरभता्दु, 





0. #प्रत#फवा, #वाशिावठठ्ता दींडक॑र्टा: 


87 ध्रावठ९ रण १०आा)। टीबाए725एग7, बाशा06तां ण॑ क्‍ैकाबाव 45 3 वै्ंएत0 ९8 शी) का 
पाइटाजीजणा ० पार वंछाऊा विपु उंगरगरवा|वणी8, एाठतदा ० रिगरा04, ॥6 कुर्ता दिखा804 9०6४ (950 


&8.0.). 


6. (मापराएडाप: ह एशए 7ठ0पन्न क्‍छुएा९ री एककइएनालाी।व 5 5276507९ ॥725509॥8 3.25 ला. 
॥_िशेह्ञा। आंग्राधाद (५०5०6 एव५ एव व (शफ॑ँपाप, प्रश॑ 20 गा, वि निएछाव20,. 
खि0वीढा िंद्योब्रणा।5 5९३९० ॥) रिबरता5878 ॥ 4॥एढ707007/9, १०३३ रण 04८६ 0व5थॉ द्राध॑ ०९ प्र४/2 
#90. ॥४० टीडए+ एऐशड१९/5 एछा९ 9950 60, 


रष्टप्श्ष्टापट८ट5 
3... एक एठक ए्रव5 ०0णाफ़ीशंथ्व ता ऐैगडीव 59 वबडढवाओं, 5०0० ]24], ०07९59णा०076 ।0 39 
#.०. गाए [72४5श॥९0 (0 ॥॥९४ क्ाद रिप्ताव, 
2. व [86 एछा00ंशा) 5 शाब्रागग9 जाइशा।४१, 8.५. पिद्यबआआ३ चिपावए, “8 उव8 श्णांद्ागुओ 


किणा) (िणाबोसगातीब"३०प्राजदां छत /#4॥7व स507८वां ३९३४९८०४८॥ 50669, >फरणा।, 
थपिफ्रवशा३040, !983) 99. 75-79. 

3. [.46, 58079. पश#/फ्र४६ ० [8४ 07948 ० #८77047/6/८०, (प९ए 0९, 992) 77. 30-32, 
42-44. 

4. ए७.>.आबा गाव .8.0॥7 (६9), 8592८ 66 चंबांतल # ढात #८प्रीएटए, (]975), 9७9. 
87-88, 25५० 97.438-40. 


5. ॥#.,8उ्वराव - डीफ्वींड३ की दवाएं पंत कैएशप्रशाशा।ह& बा 97407 ॥5८7)77075 ०0 
खेत वर4८५०,- (पिबवए०,988) 69-70. 
6. 6ग्राइगएशपाए'5 ९४79 35502॑बवांणा प्यीति पै९ 70फएव 075९ ० (गातव(8 (>49245 5 गर5 


€श४वणजाओछशत, 3९९ ॥.॥0,55773, 790, (992), 9.3. 

फ्र. वाह 8 उर्शशारत ॥) ए6 72000 6 एशाप्ण्ववाग्राबनी, (79-55), 20फएश/ |गं2० १०.9. 
खग्रापठ। ह९०७+ रण गाता रिाक्ाबए9, 396-7. 

8. व.५७.6. 58979, “वंबरा।॥ रिशातब्रा)5 ० एडततवगता।" 0 (एीकाप्क-नदवावांव, (8 कावाएंत8 
एणु #रवाव प्रीडाताए, (वैगादावश्वाी, 4987); 9779.35-44. &8]$0 #ववार्वाएबटीबाग3, ४०, 4, ॥0.2 
(0००.3988), 9.6]; ]१२०७. 3 & 4 (989), ए97-30-37 द्ाा१ 4-43; एव, ४०. 2 ४०, 4 
(१990), 979. 50-59; 63-7; 

9. थिं, दिव्या 89, "5९९८६ जाइटजाणाड गिणा एव०व१द्ाकरप", कक हसिवावलीद्रावा+०, ७०. 
), (993) 979. 05-77], 7.24. 

0. वृ॥ढ वाइटाजीणा था 4 रि्र| एडापटड १९७१६ - एवापत॑ंध 85 ॥#०9॥0 ”, 

१. +.४.७. 58879 45॥89 तीशा) 85 दं56ए०5 ए[ 0793 छाववांथाप: 502९ 470097 ए०८४०ा०, ४०). 
2 १०.4 (5९97.990) 99. 50-60. 

2. दीायीवा प्रक्टीवाठ, ४०. 2, 70. 4 (5९७. 90), 99. 57-59, 570 63-7], 

43... वर ॥5 शा 85 3 उर्शशाशवा0०७ (0 पिदाधदा8. 

१4. ए.ए.दांक्राब 538४9, “[]72४ ८०972 फ़ौ्व2 चुशाड ठा शांपाणं - जनणदाबांच" 20०फत्ता 
ण हफ़ाफव्फताटवोीं $5ठंशए ० #दा०, ४०. 6, (#ए9५४०९, 4990), 79. 74-75. जन» 48 
एपणाजर्त॑ ७80 छा 4 खाताठदागजञा पावर ह.ज़ादा०एमिट्टां 5शां४5, 7०.20, 5०ए ० 8.7., 
एछथक(. छ॑ #टा2९०० ६५४ (१99९०३०, १992) मे 





22. 
23. 
24. 


25. 


26. 
ध7. 


28. 
29. 


5.6. धिप्रागए, 07. 67. 9. वी 
5,(3.प्शराए9, ०2. ०2. 99. 42-45 
निद्रापगाबाणावंब 52एछाणा), 74सलार5, 200ए-३ , 8979270%-4; 82फ94॥५7९८6/तै, वाइटांफरंएिाई., 
रण 6.2. ॥०चाएवठा, 9. 50 हे 
$5.06.थिफपा9, ०9. ०४॥ . 99. 27-28. 

डाक गावी०5; शो, 9. 472 

809ए20॥ 2#/0८ ७४००, 9. 687 

पफा$ 9292 रण गरार जि 3एशगढते गा 3#दावा; ह8छगी, 4985, “शीएाए परा्ावंद्रौद्घत्रणा& 
चंबांगबाग्ख्गापाप" (॥ [65७ 99. 47-50.] ॥ ७९४०७९॥ 0 ९ प्रतप्रदं)/९ 358 व0९ ध्रएशा 
0पए 59 पि्वागिापरल्वेव 57 एनिशिगवाप्राएप बात ए९००१वात एश/वरंगवादा ० पिशी0९०, (जाए 
79 ड४ॉपध0ए ० (252 ०४०४० [2902९5. 

5ल्‍999893 00944 क्षगवाापराए॥फप्र, 2०006 ए28/8४८७ 7 /ै#4774, (नें५०४४४०७० 963), 9.84. 
क्‍94. 99. 80-8] ॥95$. 60, 608. 

छचाशएठणी 476 'चैं, एशापद्ुक्रर्बवलाशाए, + # ८0ॉ€टा07 ० शिड्टा70075 007 ८००९7 
(9/25 क्षातव॑ 3/0065  ##28 उशा०6 ठांडकांटा ए०.ना (४6745, 905) 9. 789, शाएा९-४27, 
पि.पचा6९5७॥१., ॥॥6 20867 (/वाप्राएए7०5 ० शाह (9१९7००००, 4975), 909. 40-, 48- 
9 70 47. 

एशवा गणांट 0९5, #, 70. 30]9 7>०8९४-275 - 8460व47/त 809$97व70. 

(.?. जागो गाव ४.१. 0॥48%9 ([£08.) 4572९ 0 बतांावब 677 ब्ाच॑ 4/2ट7#ए2!प/९ (#ंगरा8043030, 
]975) 9७9. 9-02. 

.6. 5779, 6, (992), 77. 89-9] .0 98. ?..58. 

[9 द्रव तीद्राएड [0 9] 0श0/600, छी. प"्व०9735804 रि3०0, 5 8.५, ॥६(४#ं॥रशाव ३० ७00 
शाग०्वाब[शशा$ रण ९ निएव्शबाबत (ाटए 6 पार क्रणांध्रा९005 ॥609 ॥४70 5फएए ० 
7॥00878]0॥5$. 





दाः(पोषा 79500पफाकशह55 07 7874 
(2४४८ ॥5९८छाए0ष५ पब 60भा।ष40ए 


एब्ण्वा।था) चिैं40९ए०॥ * 


फरा09०एट0फ७ए :; 


वृक़& ३०४९ गाइटाफाणा$ ए वराभोगवतेप बार ९ शा]65 वीर 7९८08 ता वहा 
9 56णा वात॑ीतव, क॥ 48 एण्शा #९ए वा 50०७९ ० छा 7099 वा €-प(80४ [९ ९३7(९५ 39॥08 
वि5एफा075 वा ही 65 छा की९ €0पा7ए, कार फिर रवाग65 [ा0एणा वेद्ात8 ]7$८7[/7 075 
क्णा चिंवागपाव वा (0598 (९३|॥603) 7९2 व586छग९6 0 ॥6 ॥00]6 ० ९ 5९८०7्ते र९॥पछःए 
8.९., ॥॥6 €बावी९5 वा" 3व]गा॥। ट्वए९ वा5ट790075 ॥ए९ 8९९१० 08९6 ०0 74३९०५७१०]०॥0८७॥| 
छा०ए0३ 40 ॥6 लात छा ॥6 ॥009 आप 8.0. ० ॥९ एणशाशार्एण॥९७०७७ ७ई (0 5९८०० 
टशा।फ्ज्र 8.0, कक65९ वाइटाणां05 ए>60एणं(0 ए3)730)॥९2 (89७ [60% [#6 ४५0५ ०| ॥€ ४०१॥।प 
7॥4356 0 चंबधिांशा 0 होल वगाओ। €०प्रभाए, ककुबा। 7०] 0९€॥9 ॥7907#9॥॥ $06पा८९४ 80। ।[९ 
९]५ शांडा09 ता वच्रागा 50टांशए 3790 द्वात। [व79045९. जा] 7एटशा।ए ॥0७४९०७९१ ९७७॥) 
5९९ंव5९ छठ वी (९5९ विश॑ति$ 44ए४ [35520 0०८४७ 6 67-84 ॥75८॥4]980॥5 
एज ९0प50ए उ्शिा४7९0९5 ता [6 9)९३ वा 052 चिडटाफरणा5 76 जी|] 'प्रावरटॉफ्रीशर० 
७7 वा 'प्रा750066 704॥0'. 


वाफ़ 5 टहाडजापए घ00 (९ ८8६९ व 9725८॥॥. 0९॥ (१४ 907९€006 20०॥(५ ० ९.५. 
509वग्रा3799 8099ग (924) ए॥०0 सावर्तातीएत 6 पी९ विश वार (९ 0०िपा कहटांआ) 
लावावट९श5 0॥7 वां] 50प709$ ॥॥ [5 #0छाएा गा (द्ाणाइ#बा80 वीबा ९ विाठ३5९ ० 
९5९ वरा5९7फी0॥58 ॥$ वैक्ञाती, किए छाएइशा। बीए एप्णीड॥९0. 0९ (०7७४५ ० #2८ 
वब्बशा-8#मकरा विडटापं78 0805 (छा) 9 966 270 ४६४० ५॥0०४९० (ठा [6 237]ए 
गृढ्मा। ८१५७ ॥527#075 ९५0 शरथ्टांच 0ापरीठप्ावएवंटव। छिवाचा९2७ 72]826 (0, ७५६ ॥0। 
ता एके, की056 छा 4॥९ छक्र770. ०५४९६ ॥08८79075 (]968). & गषाफँटः ० 
णाॉीढा बिवाओं। इटा0]878 गालणताा हु 7.9. 3॥)37786 97) (967), १. िब्ठ35णाग9५ (972), ए. 
ए7579€९१३४९८।५७७४ (972) 550० ५.५. ६९०४१ एवा०५ (98) 9००९ (0॥09४९6 एज चीशंा ०णा 
#र्ववीतवु5 वण्व 079/290075 ० ॥2$९ पा52८॥90॥5. 'चिंवदं)वु 30937॥0९5 07 (॥6 
व्रश्णांकी€ तं[60000९5 7 7९३०४॥७७ 2३0 ्रा४/फाशाॉंब्रां05 35५ एछी]) ३5५ तंगागढ रण 50776 
ची९ वाइटाएी005., 9 छा0ठत ८०75९४5७३ 85 शाशाहुरत क 76०९॥ ए९875 07 ९ ॥रवॉए्९ ०! 
6 वा8प49९, $टाए, एा070!09फ7 बात एठ्राटवॉ5 ० ९ ॥35८79क्‍0॥5. 


8.#60865: व॥ढ&76 ॥58 7० चर 379 000 वा ॥॥6€ द्ापुप१5९ ० (९5८ ०३४०८ 
पाइटापए6ठ5 45 वीठाय, ६.७. 5एाीगीवापफएव /फ्रफ््ला ॥958 ड।0णा 4 35 (९ 77$0[9]0॥5 
[व९९ वष्फाबाए5, एमंटरर्प ०णा507809 बात 50॥67॥5 (जो 787९ ९४८९७॥०॥५ ८णाति९व१ (० 
एक [(6व्ञा-एतार्व9) (6१ वबाहपगछ९ ०00 07॥ए 9७ पा, हएछए ९ ९७ शिवादाा ४४०705 


जातगएःबातणाफ गा ट्फता ममाउत ता ह छक्का... 2॥00, दीया (.0०णाट। ०0 4965 765 रिट्टा दा 
0,8-8, ॥४ 5२९०ए०ा्च 80०90, एग्रगात बिचकुवा, व॥पएदाकोएपफ, नैंवत795-600047, 





0०००प्रायंगठु 8 252 गी5टाफ्रॉणा9 बार गरएशीफए जी ंदर्बवा4ए०० छिा75, ब्रायाीक९ते' 0० >ज 
पगाणी ज्रीणाशा०5, [3 दबाए ०३5९ (0९ 0०८प्राशा८९ ण सिवा ए0705५ 9 पार डिद्केया इटाफए। , 
9 ॥€ €व4४ए वद्ायं। ८68ए९ 50क्‍79075 औठपांत 92 ९०ाह02९7९९ 70 707४ दंगाठाएाठा पीता) 
वि€ ०06८प्रा/४76९ ० उच5तां 2४07९5908 ७त।शा के ९ एावाएव $टफछ के वीह वर 
एहारएपएापए गाव वाओं ॥7527907$. |; 


50पाएा।ए ॥6 ढव्वाप्र गा 6बए९ गिहटांफीणा5 बार फ््ताशा 0 3 फऋण्टांवी एचांगाब वात 
[्राप्णंंड2८ एश्धांवत( 0 पी९ उिद्याएं 5ट॥ वत्रए९१ [0 फिी९ 7९९०५ ० व 6ग॥ग [907805. 7]$ 
$5९॥एॉ, ॥09 ठुषश)&8॥9 7९(€7720 [0 35 7-87 बी), )5 7094 970040फ ९ ठप्रढ गधगादव , 
एककाओ। ॥ ९ खैेाँगव सागर ए0त5 $ईइकशाब्एचफ्बाइव ऊकप्रदध वात एबमलाशबण्ात 
$च्रा76 (55807९06 [0 ॥#९ ?€९-एगगांवा) 573), गाते 35 076749/7%7 ॥ 0९ 5990॥क्‍8 ४४075 
4.०/दरएां॥+!००थ (9700370फए ज्रातांशा था ९ ९३7५ ८षथगाएणाा2९5 8.7०.). 


789,58:206फ.8एन्‍र: ॥॥06 579९टांग 973]8209वञाि(ठी ट्वापा९5 ताह्ञांविवुर्धांतआदठु धी€ वध 
छ+ठव॥ा 50790 रा9५9 09९ 09॥९॥9 50एणषञा)378520 35 [0॥095$: 


(3) ()ग्रां$ड07 ० उिद्दयाए। लीवबाउटाएटा5ड 790 7श्वणारतव की वगाओं। एणंड., 5९॥॥।-०००८($, 
ध7050470०, एंंडकाधु4, ए०ं6९० 2८०0750रा्ा।5, दहता्रावां25 270 5087/5. व॥6 ८0" 
८०07509875 ($4#709४/0०/5क्‍0799) 37९ 3]50 70 ७५३९०. 


() खचंत्ा।।ठता छा पर टीचावटा€75 [0 7297250९॥7 50परगा65 छ९टपरोंवा ॥0 97॥, एं2,, |, 
+, # बात ॥. 


() शि०्वील्शांगा ॥ इ89९5 07 509705 छा 5076 |शॉट75, एं2., ५५७९ ० [6 ठ79 | 
5ज्रा700| [0 तवशाठार ॥९€ 38077 | ॥2९ €्वाशा ग56077॥075 क्ग्रत 8 59९८६] 007॥ 
०) (4 


ण्ाानतए0छ85ए१: र वाओी-छागायओ इटाशा ४ए००९० ॥0 4९55 माता) ९९ तंााढा 
०0 8क्फूगांट $फ्रशशा5, वी। ० धाशा वीडहिशा वि0एा धाीठं ए उिधाणां, छा गी९ प्रठद्वांणा 
रा गाश्ताींवं ४०४८४, | ४०७५ (6 बिफपिा९ ० की९ राव) 5290975 0 प्रा्षा5द्रात॑ (25९ 
5फ996॥5 8 ७00०0 ॥ ९ एफ ० $49विटा0ए 72236॥795 ० 0 60॥॥-879779 ॥507907$ 
467 3 छाधु ग€ ९ गाधांग शलिवॉपा९३ छा ॥6 [7९2 000875770 ४9९५, 4402!॥20 |€॥९ 
40॥ ९०ए८ाआंशाट८ 35 ॥8-] 40 गी, 87४ णांडीफए 35 0॥0905: 


छ- : ॥॥#6 ८ठश59गावाए टोी3४च०९४ 45 श९वाॉ९त॑ 35 03540, [86 5, #८8४ ज्रति०प४ (8 50- 
८१९७७ वगरढा7९१( -6 गाण्वांग ए०ए९!, प)९ शारपींवा ए०ए९] ग्रावश६९7६ 0॥ "व 806 -द 85 ५७८।| 85 
[6 दो बाते गाश्तांव झ95 छा ४ द्याप॑ ५ गाए शातवींशा वह गाव 62 ०९ तींधागवुर्धाग्ञाए0॑ 
जाप छिणता फिर एठ्रांटडा., 


क्‍छन-वा ; पर एणाइगावा सोबावटांएा (5 7९वें शांतविशा 35 एक्ट ० ण्यीती तीढ९ वीशला। न्‍य 
0९०९४७॥१ता) णा ४ ०07९५. ॥6 फाएठीवा ए०ए2९।-गरावाएहिएए 07 -व बात ॥06 धर ध॥0 ॥2९449) 
डाॉंछु)5 67 प 60 ॥04 ७९४0९ ॥6९ 725792९९ए९८ $0॥70 ए0ए2८$ गा धरंड 5फ्रशछा. 


38-444; ॥॥#€ ८छएए05गावाा टावावटॉटा 5 डीफ्र8पफ्5 7९80 जा 6९ शीषाटयाँ -6, 3 7832८ 
0०7500977 $ गर्व॑रढांर्व॑ 9ए ी९ >पम (0040) प्रा. 





॥6937-त6धरीटव। जाति 6 50प्रीश्या एिठीट5 छा ह65०4. श्ी0ज़ाएह णि 8 फरातगिश फुछ्ाांठत ०6 
ध्रा॥९€ 07 ९ ९एणगेपणांगा ० ॥ा॥-छ8ग्रीगा 07 6९ उिधाणां इटाफ ध0०फणपा) 3 [700७55 
ण एशएट्ांगरशादाता बाव 36496607, एट ट्वा तंवर ९ विवाती-छख्ी।। इटाए। 70ण. 6 
शत ० धार रात टल्यॉपाफए 6 हि ए०वरंगां76 ० 6९४ $९०००० ८€॥एए७ 8.0, 7॥॥5$ 062679 
मब5 एशशा ८०गीशाहएत एए पीछए व0९एशावद्शां आावाहवाबए6 एशतंराट९ ० धाइट0९त शी605 
९ऋटवण्वांए्त गा वार ध््ठाग०275 ॥ 7९2९7 7९३7४ ॥07 5९ए७ावोी वालेशो बाग] 65. 


जछ््ञा6 67९ 77९ 80॥ एढिशार९३ छा ठ्ाणा बगा0ाह €#एशा5 णा 6 वंबाधगए ० 
गाता संतप्रवा ॥5८90075, ४९ ग्रावए 55जंप्रा पी९ वाती-उिवबागा। वाइटाएा075 397970%गराद्वा९।फ 
॥0 ॥7९९ 07026 ८॥४70706ठ604दी 543928 00 93/4९097 4४८०) 8006 ०70067397८6! ७70७॥0५$: 


&879 वद्वा॥॥-छिवाए। : 2-7 €श्मांप्रा०5 8.0. 
शथितंतार वदा-35वागां : 4-2 ट९काएए९५5 8.72. 
[०7९४ वीबाजां।-ठवीतां : ३-4 ठकशाप्रा९५5 8.0. 


वृकाढ वया-3गीणा इटांफा हावतंप्रताए ९०००2७ ३६ ९ एवॉा९।ए॥७ 52797|, [९ 
लीबाबटाटा5 ०2८०0गागठ 0066 बाते 7०02 6प्राठ९त' जात ९ 9355982 ० धार, |॥ ९ 
078ह॥7 छ9द7/5 07 ॥6 बाण ० क्यो ७फ५ पैर कफ ?7]8एव5 छा ऋुवाटीओ, छावाताद 
५85 ग्रीपशाठ९व 0प 0९ ८णाशाफएठाबाए हैतत5-वाएर्रावा8 52905 बतछ0 0९०९००९० 0 
वि वाया 5टाए09. ॥॥९5९ ९ए0फ्णाबाफ लाधातु९5 ॥39 9९ 50 [0 9ए९ ७८९७॥ ८०77०।९॥९० 
तप्रा)ठ 5-6 रषगॉपा९५ 8.0. की फथां$ ताआताब] 9९700, 6 टीवावटा2४5 759 3४५० 9७९ 
0865८70९0 8$ ६6707 पठाया। 0 एवठॉाशेएाप 8५ [06 ०४४९ ॥099 ४७९. 


एएथराष्राबा5: उद्यान टौग्ाढइटाॉटलछ ० पीर 5209#0085 


वृका€ ८2९९ गाइटाएण5 37९ ए०0ए९, 7९८09॥76 ९ ही ० ८३ए९-०॥९।९४४ 07 7॥06%- 
०९०१५ 0 (6 गाणा8 7९806 ९7९॥., ॥6 ॥052८9#075 ॥2200 (6 7रद्या॥25 ० (6 007075 
० ॥6 गा085 0 5०गाशी॥॥९€5 वी8 ४#02९-१35075 ७0 ९५४९८८प्रा20 6९ ४०६. ॥ ॥5 707 
इशाटशाब9 3९९९छा९वे धीढा ॥९ 70८॥-शीशां४१६ ॥0 6 व्ापाव) ०३७८१5$ ० 6 " ठाणो 0०७४० 
छरढा९€ 0९८एणंश्व 67५ 0ए 6 चंका।ब गरात्परा5, एत्चोर पाराढ 5 तवावीए बाए ९एसंतेशत20० दाम 
(686 ८३ए८-३७।॥श९४5 जाति ता९ उिघ00का9 0 ९ #से वराणाहड, ००07एट2]|॥68 ९ए॥१९४८९ (07 
९ चंतंगबव 85502चर00 445 बटटपा)पड९१ 0ए९/ त€ ए९चा5 07 8 7707९ 7९व्तागरत ० (6 
एठएट ॥5ट0एा0ा5. 


पकढ चिंवाहएवा) 370 #]वच8गगाढ।ध ॥5279॥075 (2४87, -4 570 32) 6७ ब०छठपां (6 
52८०ातै एशा।पए 8.0. रा 0 खां (शीत, 6०४), 5॥; 9०7।॥7), 4 एशी-दराठफा बेब ९7 
वशाठातएु 4 इशांठा पाठ; वढ्ठतांग्रव्म 5 इधाव, ॥॥6 5९ए|9 0॥520४९7४९ 'चिशाए9०॥ 0३५९ 
विड्टजा0ा छा बछठपां पीर इाह 79श06 +९(९7०७ [0 व) तातवाता (९६. इधरा070०0, 58, 
इाध्धाए॥व4), पी8 (७० (४7४ 4050097075$. #07॥ एपढगांपा री ब०0ए० ]-2 ८शा।एा65 ४8.0. 
एफ्रा, 56-57) 850 77 40 ॥ तशाठगवद्वत , 4८९८० वाआड 40 (॥6 प्रायएटाइन्र प58४ ॥ 69॥॥ 
वाषबापार गाते गराइटफ्ञागा३, हार पाता ए0तत05 टएात07० बाते पनात्गच वैद्ाण॑रट ०ए 6 


2.4 (0०९४ 67 39 4/#कशाब्वातत न, ९/॥ए०॥ (947० 2.). 


/9,202/-9865 दरार्त 00078 छथी 7ीए0॥/-ठवीगाग वीागइट//0775, चैंड/४944॥. 








चे्यातव 00765, 0060 ग़्वा१९५ ठत ॥6€ गणार5 ०८९एणापाध | पीढ5९ धाइटाफ्रॉा05, ॥त709 
(द709), १60 (ग़द्ऐ8), 70॥7 (70) बाते ॥078 [09 गद्गयाती), कात॑ ० ४ एद्या$ एका।[[ 
(2709च7०ए ८०कछगाबांर जग फवांगिवावां प्रष्याणार०व 0 6 व दा 78705) 3॥0 िधह/[ 876 
लंल्गांफ बब्यांगव, ४४४ वांड० वि0त की गाए... ० 6९5९ ट१एशगा5ड |धवांशा बंगा॥9 ४९८४(9७९5 ॥९ 
इटपार्णफा९5 ् धाछ प।तीगाए्गव5 बातव॑ एद्वा6५ ् वंभा।व गराणाएड बाप )प5 राशी वी वैंच्ा। 
धात॑ एबा।रढफापए इटाफरांड ० 70 0 ]00 ए९ग्रॉपरां४5 80.0. 


50796 ॥४€एए त520ए€/2८तें वछाएव-छिल्‍न्रौफा िड३एएाॉफ्रॉएणाड 


वृकढ (०ाफबन ० सर वरबमाए।-87्वीमा वाइटताफ्त/णाडओ (एाछठा) एछाएाींआरत | 
966 €6वरांबा) 74 वद्याए-84ताओ गिडटाएाा5ड हिणाा ]9 आॉ९5 20 2 ॥ाइटा900॥5 ० [॥€ 
पृाठाइराएण58| 26700, [0 5७०७९ए७९७॥ 9९७५७ ]0 ०९ द्वा0-फ्रिद्याणशां $975८४॥907$ 9॥0 
बए०एा 20 ॥5079॥075 ० ०९ वाठ्याज्ञीकाठोी रिटक्‍60व 3ए९ 50 7 एटशा) 0800ए७7९०., | ॥980९ 
5९]९८(९०6 (पा ० 6 वरएशाफ़ दाइ5ट0ए९शाश्व बात 8 गर06 एफ 9,0९6 7-8790॥ 
विइटाराएणा5 6 व तलावबाएवं #पतेए ॥672 35 पी९5९ 76 5ए९८ंब्रीए 7907 07 6 ॥ठ्ीा। 
९५ 50९06 ०॥ 6९ ९9 शांडा09 छा खेगातंशा ॥ 7397. 07॥९ ९३८) ० वि ॥52८7॥9व8075 
9९076 40 ॥॥6 खिद्या।ए गाव जव6]6 2९7॥005$ 270 490 40 ह€ ९ 7९४00 07 7-8: द7॥7. 


85 की5$ 7९5९7 वा0॥ $ ाशाते€व॑ 67 धी९ दुशाशात!ं 7९36७, | ॥389ए2 ३५७०6९० 
[०0०70९5 गाव #९७॥ [९टाफांटव 6€३।५ ब0 (00प्याशावा।ठा [0 6 एव वधवात!पा), | 30९ 
#0ए९एशा 39ए9०7060 3 जीता ए7९३१ांाद 9 छा पट चिाश्7ण८४००त 72430९75 (0 00(6/60 072 
वराणिववबातठा 9 6 वढाशा।-छिावी॥। ८३७९ ॥5079॥0॥5. 


4. चटधाएएशएहाय (बताता व्ाप्राा, िंध्वत्व॑प्रत्वां 00/577728) 


शायद ; शिशापिएवा। 5५० शावी जीव6ु९० 0 75. 50ध0 6 ९ 6ध्णा 5 ांवऋतांदां ठा0 
40 [5. [0 धी९ ॥070-ए९8 ० शिंबरतपाव लाए, #050पा .5 ॥05. [0 6 #ताए। ० ॥॥6 
ज|बध6 45 व की! क0जा 35 छांववाबाणरबादवं, किए ती९ उपाय ता ॥95 भी 0॥6 टखा 802८ 
8 ९००गागधावाए संरए ० पीर एशबाववा जिया) गात॑ ॥९ एवंधर्ग 7ए९४० व0979 पिा0एछ) 2 
शंएापा९३१ए०९ ९००७॥9902९., (00 6 50प्री670 5009९ ० 6 शी 5३3 786 [र्वाणएाव| ८३ए९॥॥ 
(0, 4) ॥0णा |0०१ए ३5४ ती€ एग्राटीब ?िग्रात॑गण्वा 2990४ (७९०३ ० (॥९ #िए2 78909५७5५”), 
विडंतर 6 दबएछाआ ९ ठिएणात॑ एछ० 7095 ० गां76९ 9९१५ ण्यात 75०0 जी095 ८क्रांड०ौरत 0ा 
॥6 706४8 ॥0०7 (0. 2). 00 ॥8 ज्ञा]0-ह46 6 ७४८४ 0७९० 45 5८9९0 4 5007 |४७८) (॥ (॥९ 
पता 840 ४८४७४ 7९९००7प॥9 भी९ एठ९5 ए ॥ि९ तेठा07$8 0 ०८८प्रछ्व7$ ० ॥6 ७९०५. 
ब॥6४४ वाइ्टाफ्ञा0ग३ ॥4ए६७ 9९९१ एपीजरत 0709 38०0 दावे ॥४पत/2१ 5ए प्राव79 5९८१00979. (# ४ 5. 
4543-] ० 4908; ८7४87. 8-26). 


4 वाधज प%णा,-छार4पावा वर्5४टप्राश।0ए: 


हु 
चैठा€ 7९एशवोए ७0067 | बाजी ठि बसी ॥5९07ए0ा हि०पा पड ट्व्एशाप ७०७५ 6[5207९7९0 


ग 4982 ७ए घ्ाद्रापढा उं2०३7व]ना रण ॥९ दिर-टवा (0०0॥052९, 'चैंबबंधावा, वा5ड ता 
7शागाो३5४ ध्राएपी5020. ६४८९ छि एड गछणा८९5 गा ढफ़ांध्रावफताल्दां ए५०॥८व605., [#6 





वाड्टा।जञजा 62३४7०९६ ज़रांते€/ बॉशाएणा 35 ॥ 5 बशगाव पार रबा63 ॥दा-उ्य 7600708 
ह0 80605 3व्रपीटद्वा।एप 40 ठप दाठजरतेद९ ० ९ एवाफ वाशन079 छा खवाोगाशा था ववाभोंगडधप, 


वह वइ5८7एॉणा 8 ठ्प्रा। ढाहावए2त क जाए कार ०ा पीढ९ छाएण ० पी९ 0एशागीाबाएंगपठ 
ए०पांतं€/ 80ए0ए6९ ॥€ शाब्राा7/2 40 6४ ए३ए2८४०॥. /5 [€ घश्पढां ताए-]॥र८ 8 व्फैशशा, ॥्ट 
॥8८क्‍9॥07 #45 ७४०४ ए279 ॥7॥ 00९ [0 एछ९व607व4 व4 (35 विप्र8 25८392० व्यशातएठग आऑ।| 
प652 ए९875. #॥09४2ए९१, 7०ए [दा ९ व5ट907 35 ए९शा॥ 590०९४0, ॥ ॥5 ॥07 पती९टपफौँ 
0 शाव#€ 0पएाॉ (९ (९७ (#नचा7255800 | 7. 3) ; 





42,3९७ व॥॥-ठि रीता 8८090, चिट (०.200 ८९॥ 5.९.) 
पृ&द्ा 20 7छ35.570 5 


बाशलाबवाओ धरक्षाँ।/वी द्रॉवशया प्रक्‍दां पौधएथशात्5त3 


बृप्रछ ४0006 (प7०7) ७ का, ९ बंका गाणाह (कावावा) ० चिवतपावा [कावास्‍वओ, 
[((0॥॥] ० ए68७फए8४78 (पौ59७79) . 


६#ए60268: पगाढ धाइटाएएा 5 ए्रतीशिा की बाग] 35 शी0एा एज ९ छतठ0ातं$ड तगावाणा 
बाते प्राव्वां बात 6९ लीवावटांदांबट नया शावादु छा गाब३टप्री॥68 एश507व4] ग725, विए?९एट/ 
था। परा059७4| शिवंपा९ ० (06 45ट7090ा7 5 [वा 2९ वत06 ० 6 वंठग67 5 0099 ७४॥६९७ 
[8 2? 85 ए/चरफद्रावड० जात (6९ बताता ए ॥९ पशाएऑएश 2352-67079 -8५ 0 6 घवा९ 
(0पक्ठी। व॑ंए [48४ ०7९एएछता€ ईद बात ॥व 729॥4025 76 प्रातंष/ (९ गरपिशाठ९ ० वेद्याप्ी). 


$50घाए।' ॥॥8 ॥98८770067 45 एछतााशा ॥ ॥6 गाशी-ठिवाँ))ाओ 5079 35 &09॥ 09 6 ७५5९ 
छा धाद लीबाबटल९सःशीट वद्ता-8 बाओ शाछशि5 7 बात | ग0ं बए्थबण० सी 6 छिग्ेयां इट9. 





+०ए७ए९7 8 ॥000४०77॥प ल्यांफर ० ९ वाइदाफीणा  ॥6 ७३९ ए ९ उन्‍तवगाएं शाह 8४० 
धि 8 8४97/९5807 (|/वफ7454. 


एप4050845ए7: प१॥6 धाइट्तएपता आदा०३ (6 ए९८णांढा णाती०क्वाबाशां८०ं आज्र० (78-) 
छा ग्राठ8 ा (6 रढा।6 वेक्ञाती-छिवा॥]) ८8ए९ धाउटाफ्राणा$ड ढएच्कण्टांबाए था धार रिव्त6प्रथा 
0प्रतराए, ाप8, छा हडबाए6९, 707 बाएं प्रथा ॥4ए९ 6 व्कूएवगशा। ताधा$ बन-ॉाधनीनाध- 
॥व हा? फ्रतवां, चि0एरएशा, ए९ 00 ॥0 गाते 6 ब9एगशाए -6 गाल्तावी 86 वा पट 5४८०ाव 
बात 6 फल्ञापरतयबरांह ताैशीवा'व8 वात बात॑ 76. वं०ए बाढ शीश छणा णी 0 णा।०व ७५ 
॥॥9 22706, ([ गाए 96 7006 [वां | 8०९ दगाओंशिठांर्व॑ 6 हड़ां 35 4ी ॥$ ग्रॉश्यत९त॑ 0 
96 76940,) 


0्ल्‍8४०0070,006% ॥7॥6 ॥इशॉएीणा | 96 ब१३8आव४वे.। णा एब4९०व ०08 छ/0७॥08 0 
6 ३९९०७॥० व्थांधाए 8.0. 


(00० हारा 8: 7॥6 ॥8८0#णा 7९एछावं8 शी९ वैणावाँता ० 8 ए१ए९-शीश 09५ एवएशा३ ॥0 
#ैंिवा, ॥ बबातिद ग्राणां। 79॥ िं8ध७7७, 


खैभाव्रश वा ॥)8 9 तह एवाहिडी वराडवाा९0९ छा 6 ५९ 0 वी6 शा) कावादा ग वधिा।। 
[$20॥9#60॥8, +]6 06८परा।श८6 0 [6 ए०/० ॥ 3 5९९८0706 ८श॥प प्र 3.0. क्‍हााती ॥507007 
8 60०वाहप्रहाए७ 9700ऋ  पीचां चंह्राशा। ॥80 8978809 (0 हाशगावतप €एशा) 0 एच तैक्वां४, 76 
वद्रणा॥९ हगताएं प्रिव॥696 एए ए3 जात 42068 2एश॥ 0९प्रतमत, 7॥6 ७५९ ० ॥6 ९०००९१ 
छिपा क्राशेव्षाता [ए॥60 09 ॥6 058 | 6 वादा एचठांब] | के टवशावात) औी0७०४ 60 [९ 
क्ष्वा-एक्ाव धरापडं 8४९ 988॥ 0970ए66 ॥॥0 वैद्य गरपदी दशा (0 3009 8५027( (॥7९ 
हि ॥॥4 वाप्रप्राक्न।6 ॥85|007॥ बा।0 क्राई0ठापावा।00, 0॥ 6 99७8।9 ७ ॥5 ४७०॥७४९८४०४ ७४९ 
वियए त्रद्वार वी९ बना शब व पंब्रोतिंशा 40 8 क्‍या 60779 दा 6१४ ६6 भित 2७78079 5.0. 


विंधह।"0ा।॥6 ब्राटांएा वद्याह ए िंदतेपाव, पीध॥ ॥8 00९ छा ही टरब्ा0४ ॥927098078| 
॥867९7065 ६0 6 9 076 ४0 वि, 76 क्षा।९€ 690 002८५७४३ 88 776(8)879 ॥॥ 4७४०० ॥७॥॥- 
छागाए।ं धब्रह्ा।॥॥08 ॥ 689%709809 8580 (0 8000० 2"] 6€॥/५॥९३४ 3.0. (०१'छा, 30 
ग्राप्र 38, 7०७8७४), उच्च्न्रागव 0 पीर #रसंतहा०७ ० (४ पिवाओ॥-8िाही॥। 0४०७ ॥8९0फ075 
एंप्रशंशाब्व ब्रात्प्राव पवैब्रवंपाव), 8 2० 8९708 9 ॥4ए६ 0९९॥ 6 ॥09 व्ाए0/ा7 0७0॥6 
9 बाधा ॥ 8 गह्राजी 6०४७४ 7ए९शणज़ाप्र 7096 ए9व70)998 छा वह रिन्ना6988 #0णा ॥6 
श्वा॥९5४ छला०व (रॉ, चिगाइप्रत्रि। 800[श798 ता पिशपा०७एजआ) (एए'8ा, 3 & 2). 


मचा पियाव९ ० ॥॥6 बद्रात8 तहत 46 जाए पै8 एशए९-४॥९ी९ा ए४३ 9॥80, 76 पधणत० 
(088 0१6 #€बाए 6 6८८घ१ #५९०एर/ी)।९४४ ॥9 7 ॥5९7छ679 067 ॥९॥5प76 ढात॑ 7शावरवाा३ पा 
७॥॥90 छा 8 छ76#शा।. 


धाड़ाओ। जश्न ह 78846386, छपा पह९8 का वी8 वैबाताफिवांधा। ॥809075 ॥॥ ६6 
[#शायांह्क्रां 86858 छा 3 ६३४४-॥॥४।७३ द्रव [9 [॥6 बंबाड गाता, 7॥9 दया 330 006075 
 ब्न ९४ए९ 98ठएॉणिा व वी दा फद्गां०१ का पएबावएफ (ए8ा, 8) हात. ॥ ए० 0 
विश्टाफ्रांग्रा$ ण ]- 4. <एम्राणाएइ है. छि. व शघहुबांप (एाछा, 56 806 57, 7090३७०). /& €0प्राच्रा९ 
९#छा९5ञ०ा प्रवाएफ। जाती ऐै।४ इवगार गारवाांगठु 5 ठिपात था त6 क्‍ैववांगाओंदा ।दा।-छे१छात 




















अछ४ ह 5. 002५2 ०,३,०, 2५५ 0/20 77% (३० ह५९२९/०५९९३१३० 0222४ ४:87 20 ५३४ ९९ कप ५08 पक 422 ट् 
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वाइटा।एीएणा) ० 4-2 टहााधिा।९ 
ए।बएब047: ॥॥6 वरलाणा छा ॥6 ८३ए४-॥॥९।६१, निं८ ए६ 7050 970040|7 & [4९७ बेशक. े 
66ए000९, रह गद्या॥€ 48 ० €४८९ए।एदो /९४7९३।, (चद्रएडाव (चएचाताा ॥ ला शा हाएा लत) 


एछ88 6 विव005 ॥870 ० 8 चंबा 8एॉ0 डिएशगक्रॉस्करव॥ ए070560 ०ए 0प्ञाव१698 कोड न 
एश556 ?734569, 90049 प्र [0 8060 (06 56 66प्रांप्राए 8.0. 7॥8 ७४७४४ ।8 00६ ४४६७४, 59५ 


488 8९7ए९6 88 [6 ३80०प7९७ ० 86एशढ) #हावंशात[ुह ॥ दाह! बात॑ छवतीहा' वितीबा) 


वि।ठएब्ठ्ल्‍घ०8., 40780ए6, ह गेशाब बधी07, #ढ606त ॥8 ९फ्नोट वी वैगाओ।। एततेहा (8 वाद्मा8  - 
एश्श्प्रगदिक्क॑ंथां [85366 (० एकक0५३ वंबाए॥ 0९एशरा 60 879 0॥ ८हााप्रा।88 /6,0.), ७ ' 
एणा। ता ग्रांश8४ 676 8 6 96९प्रा।शा0९ 0 /76 गद्मा)6 (एक्रंफ्रधात ॥ 8 8९९० ढांप्राए 
8,0. पद्धा॥ं। ॥5८7॥9॥007, क॥९४-४याग[ठ ॥0 079 9 दा 696 ४ैप्रा एाएवप ४५४६॥ तक 
०ांक्रा।क ४०7 ०ए 5प्राव्वाफ्४, ॥ 8 ॥2।५ शीत (6 8079 0 एतब्रप१4 8 भा भार्टशा। 00 
8|९ 07 जएा 8९५67] ब्रांरा [087५ ७०7५ ए६/8 98820, [॥9 ह्श॥ते पापा ॥4ए९७ फडा) 
70996 एव (0७ बंदा॥988 ॥ ९ वठाओ। ए0प्रावए ९एटा ता 5 ढठ्ाए ९760 व8 व७हाएत॑ 
०ए वी९ ००८प्राहा6४ छा एच४एवचा१ 5 शहर | 8 गिटा।फञता, 


॥. खंछव4ा (7एल जीप्रर वछांप्र४, $0प्/॥ 872०0 09]876|) 


छाष्ट ; वाल जोबादुर ता गं्धधराएदोा ।8 ता 6 ॥0ा फैशाई ता 6 99एा शिकाओादा' एड़ा वां 8 
ताशबा८6 ० 45 (5, ॥ण 9४ ०जपः 0ए, बब्राफव ४०६ शा वाएणांत्रा बंद्रत8 0676 
वा पी ॥66॥6ए०| 9९700, "७३७४ |॥॥ #०ग बा) 86०॥9॥0 6 ?रिक्षाआआ486 (.॥० (678. 446 
ण 7937-38) ७ ॥6 हृशॉडिंशाए8 णी 8 बेब शिात।6 विशाढ ट्वोीहप परद्रांवाप्रपा पिवाप्र-9- 
एशापा99ी, 690787 ॥082८969॥ ता रिबाव]5 ॥ (675, 448 ० ]937-38) ॥॥27॥॥078 6 
गरबाग6 ए #िद्यातंबराबता।[8--79श0794॥, व श॥96 ता फिशाातावाव 2 वंबा॥0॥- है 70॥878॥40]6 
शिहापा8 0 ऐभिड शाश[एह एह8 विदा ॥ एव की इशएटत 88 [9९०९ छा ॥९प्रिद्षश [(ाटाएव। 
एप्राप्धवा।) ॥ 82९००४१४॥०६४ एदी। ए४॥8 छ806९७/४६, हिए७॥ 08 [8० 8६ (6 ]50॥ ०८४॥४४५ ४.0. 
॥ 8 ए|]बएदव[्ा 987/00, ॥676 ७३३ 4 १६॥१8 8॥08 ॥08 ५6४१ [8 ॥86 ० िकफ्त्रा॥। 
एा॥०ज््गावज्बाप्का (82, 449 ० ]937-38), 8768 70ए9 ॥९ 98520ए९7ए ४ 4 6 +छि।क्री0 
विडटा4छ90ा ॥ 6 ॥8७॥7०ए वती। 9५8॥85 04१0॥ ४ करातवपाए रण खब्रागांशा) 2 बंब्रशण्वी ० 
[९56७ 6९ ०७॥४0॥ रण 6 (टाराशा|विय दि, 


७-86 उम़्७एछा?7।70ए 


$6एवच्ाव] रण ॥89 ढाभीमवर्दप्र हीबांह जिश्राश्वातोीशा। पा /0६9889999 89867ए2/88 व 
पढ्ाशा-छिक्ीणं! वाइ्टाफ़वताा थी विद भी परछद्ा' बेबातएठी ॥॥ 98]. ॥ ॥8 & छवप्न हवा ड़ 
वरिएजांग्यां व80900॥ स्व ।शाक्रताहत पाएप्रतशोरते 8४0७७ ० ॥ ८०0४ ण॑ ३6७३४७०७९/ 
ा।।008 ज्राताशा ए५ कि, सिबदुद्वबातातप इ0७त क्षीक्ष #8 ध820ए०४9. ० ॥ एपशोज ०प्रॉष्टा०्फ 
(ए], 4) छ९ ॥गी, 9 धी8 हब ता बंगाातिक् बात छ० ॥बाप्रान| धवएढायाड 00कॉफ ध]०छणा 84 8%| 
प्राबशबा बात इिब्ाएड४ गाढ्प्ंया, पड विवश ॥# ह 6869 08४ए६॥, बियर इ०पाति पत। 
ग्िशाठ्छ छफरान्वाए8 (. 6), 8 ।8 ॥9 #9-ं8 ७॥ 82 0०७. ० [8 ८४ए४९७३॥ -39००४ ॥|2 
शाभाब7८७, 409९ए४४7 ९78 38 ७9०४-१065 धतारशाएछ 8 छिगशा ४॥ॉ४शा०४ ० शाए9एा३79 
शै/फ्रटीए/88 जोश 6 ए4एछटा॥ ए45 050च्एाॉंश४डत, वशाछार 45 4 व प९ काठ 9०्पाठढा पा 8 वीं 








2/.4 | कछ्वाह॥# (०९775, #/व्ाएचां (56प /700० 42 ). 


2.5 (808०7 क्रंध॥ 7क्काओ- हद (5ट४७9॥#07, सपा छत, 


३०५ ९,०,१,०,९, 30 25500 00274 
श् ' 


22322: 








॥09 धाशंत९ 6 ए8एटआओ। छटी 970040/9 इटाएशत॑ व5 वि€ ऐश्त॑ 67 कौ €वंडां 85 वर छशवाँ 0 6 
प्राछव6 प्)0 7286060. ॥67४. ह 


[8 ए7९८टछ)0एटा ]99] [6९ 409 50०! छाती ८0ए2/20 02 740<६ ]0097 ० फि९ ८5एडाव 
ए85 72770ए2९० [0 5४९८ फ्राशीाला वारा९ बार दबाए 7000 ७टत5५ 67) धाढर 7007. परछठा6€ ४३५ पाते. 
जएफ्०एडा प्रशीशा (6 0फुशावबाएा एव5 7९7०९ब्राॉट्द ॥ (6९ गश्वाए0फए टव९०षा) (57945 ॥्राथतंठता) 
[9० ब्राधुरट ०९65 एटाए पराए0ए27/2त 07 ॥॥6 7628 606 ग्ञातवीत्गागदठ् बं8/43 ०टटफ्कएीाज छा (४ 
०३०९॥75, 6 [6॥7॥-878॥7 गर5टांए67 5 शाह्ावएशत वा ताए क6 60 ९ 7९वा १026-णत्चा 





7].6 खागी-8ि ढोतग 7507]/0, वैक्ञापएवां (६ रैज्ञ ध्सापफ्रा५ ४ 9) 


866 6 5 ट्चएटा ((६नावएाह586ा ॥ शी. 6). ॥॥#॥6 ॥बटांएएा 5 गर्व टाहावए९० 
गाव का 7 ९४८छौहवा हंवांरश छा [॥९६९एकॉाणा एटाठ चिप फाणार्टाए्त ॥िएग 6 ए४83॥25 ०व 
छश्वात९7 09 6 0९७9॥ ० ० वी€ ९३ए८॥१. 


एफ 8४0 प77७७४७१.5707७: 
अ्च्ॉफएश्चएफपाॉ० बॉफएछा प्रशाँपाता खोटा वींच फवा। 
(बए९८-आाटलाहशा (947) ठावरत 0ए (6) #फिश पिरणाबा (०, ति९ 54ए9900079 ($490|2७0). 


[.4006038658: ॥#6 ३टाफरओ|क)य 45 क वद्याएं। 65 जीठा फप़ तार एतठातवड कप गाते वी वात॑ 
6 >व7 शाता5$ ० एटाइतावी ग्या)25... वि०एछएटा ॥0 ॥5द7ग0 ९0ाम्रशह९९५ एज 6 
पं९ इद9०797/० ण्रतारटा की शिवा, #0तीरा प्राप्ञ्णवों [टदए6 5 0 2700९009 घ५९ | 
वंशाव। हक) ९ ी वीर वॉएटठावा #॥ गा वीर वीर्वा एठशाीएणा 0 ॥ी6 09705 576॥ 35 तराफ्चाा 


बा)0 #॥6€0७/077. 


[ 45 #0ए0९एटा प्रादिंर 40 वप्तश_.ञांणा दि९ 'प्रीराएलाए' ता वीए ग5ट॥फएाणा 0) [25९ 
हुठपाते5 88 9076 6ऊ॒ंक्ा१एीडि5 ॥38ए९ 50प0 ॥0 60. [॥#₹ पघक९ ' व शिव कावागवए७ 
९€ए97९580०0ा गा वाह ववा।-मिवाा।। वीडटाफरफणा 5 709 चाहत एए 6 रटड709, 
9898९0ए:९१ थिंटाएफुच। वा5टाफए0्त वी5एप्रफडशत0 300ए6., 0५ वा €एॉक्ाव[55 09, 
मिरणॉार्टा प्र९ रण पी पशा।वों ॥ छि वीर वएटत[ वा के 5 व70 वा वा प्राटगाएा ॥ बा)! 
व्रइटावए075., ९ 7९०९॥। तं520एश9 ० 70८6६ ए९त5६ #िएा। वाणीरशा' प९ाएप टवएशा) छा ध& 
भी ८णरत।॥।॥]दु ीढ चेगाशदह 0०टफ्र्वांणा छा की आर आी0पत0 3९॥ दा 7९४ ४7५ ॥॥827765 
वठ5पा5$ 800फए ॥6 उपारभीटाॉए छत सिंह एहए वाएएस्‍ावा। ब॥व-छिवशां शीइटशसाफात्, 


$0दाएछा;: वार 5८7 एाफा 5 ज्राविश) ॥ लि९ वदाभों-ठिकीणां इटाॉफ्रों 55 औठछ्ा ०५ पाए 
27652768 ० ॥8 59९८ांवे टीडाकटाशा | ॥ ९ एठात फऊुचा, निएए९एटा 6 छिवाया शारए/ 86 








ही ४८५८ (2 0.०,४५५,९ 8894: 202080022%2 2 2:07: 
| 0252 


55 ५९.०७३१०१३२०,९,१,९५०,१,०/१,०,० ,०,६,८,०,३,,३५ 





45 पक४ते थी किवांता। 88785श0ा इ99०290०/0., ४॥॥४ (06 €३7॥४7१ 7'3॥॥॥-8: 77 ॥8279005 
शाएा०9 08 079 | 8प्ाएए छा ॥९ आ0 5०णाते, ध९ फ़ाछ5९7 762070 ४५९४ (6 ॥075 । 
इच्र00| (07 पाए 0799 ४०७४८). 


0प्राप्ो००४७एपत९:. 7३० ०7१00873979 ७० 5 5८7 छाठा 4$ ९१९०६ 0690) पड ०७ (2 
जिषाछवा 706507व ॥00९0 3०0ए४ 2॥6 35 ॥ ]छ8-ा! #9्ञ४, 9प5 ०-/-ए०-॥० ४09]0 9९ 7९७४ 
85 0 एचक व्रत ७0 07. 


एसाइएार0.0069: | १द९९ ण्याग 8. ४७3५5एवा9ए जशो0 ॥35 50५9९५४४९० हि टश्यापफए 8.0. 
ब$ 6 गरा05 970040]९ दवा ० ९ गेगाएवा ॥5ट907, 


(०णाापष्टापा5: प_6 वाइटांएाएा 7९९0765 ती९ शातंठ्शाशए॥। 06 3 ९०४७९-४॥४।६८४ 0५ 7॥6 
ींशीवां) #फ्रवा रिशंणाव) काटा ज्री०0 3905 6 ९ 59फ39५7०. ॥॥6 गध्ा॥९ ० ९ 
॥९टॉफ़रांशा ० (९ हक्षां |$ ॥04 ॥0॥९7॥07९26, 


$5गाएल्कफप्ा०: 6 0९८0प्राशा८९ ७ कांड अंत्रावीत्या 6 का वी९ वद्ग्राफवां र|ज़ंदागएी 35 
8९९० 000९ 9० 2 एा९ णावुर्शबावाह ८०ण्रा70ए259 0ए९४ ९ वक्ञातराए्र छत इध7ए०79५/० 
गरशा।ण९्व॑ 0७ए 6504 ॥ 6 5९९०१ ३060 एेक्षत ब 99, ज़्ारा९ 6 ॥07॥९ ०८८पा$ 
ग[णाव णंत (०4० ((0903), 794० (?िड्यातफ्३8) गाव #९४०००४०7० (९९४००फणा9), ॥॥6 5पछ९३ा०ा 
7366 99 ठिपा०७ गाव ॥(.6. 56५॥3 ह9फ्नग था वगहप्राशाट ह70०प्रात॑5 सवृष्बाग[वु 3609० छा 
पृ बाफ्व गाव 9५/० जात #7/०॥ [खिव) 35 700 9९९॥ णजातवीट्दांध्त एज) ॥० 9725९॥॥। 
64500५४।५ र्णा (6 7९ इधा9०7४7० ११] | 050॥]9007 र्णा 
तफ्रगा (2शिएत क्‍0 १६ श्षैफ्र्षा 0 क्षीपज्रवावा) क शि९ ववाओं 5ववा5ुगा वीशावाॉफा९), 


#एजचशा॥ चिंएॉपान॥) ४7०: ]76 00007 ० (९ ८3५९-७१2!2४. ॥6 ॥05079॥07 80९५ ॥06 
गद्ा॥6 ० जां5 लगा [87 एक), ० 5 गिरा (2प0०7) बात ० शगइटा। (872८/6)., ॥0॥5 
टाए27 डइठाशा९7( ९४40!05 प5, 6 8 व9 प]९€ 3॥0 एछा।॥ ॥०50]ए0९ एटांवि।फए, 0 
पिशाएंफप्रि 5 दवांटीडीा) 00॥0॥60 ॥ प९ 7 दवा ऊउक्काठुथ) वशवांपा९ पा) 9१ 79९८750730 ९ 
कप ॥ 8 वब्राओ-छाद्रगयां ॥32ट790070. ७३७ (९ €४४९०९७०७॥०ा7 ०6 थी९ [7९९ ८0७०९० 
॥779$ ((!0]95, ("९8५ 370 ?8॥0५999), शाजिया पिशाॉपरादा ै2 $ (॥९ 7050 ०९]९७४८९ते 
॥९70 ० [6 5ा6वा) है9० ए्ता। 8 [96 ॥णाए०७7 0[| 90९0$ 0॥ 70 09 ॥99)9 द्िा09७5 
वठ्णो। फ़ुणशा$. [९ कैफ सरराढ वा बाटांधगा ॥677] पत९३४९ वह 00 वृ््ृबतणा 
[7708677 जिव्ापावएपा), प॥6॥ 370९७४०१०5 37९ 7शज्पांस्व 40 ॥वए९ [777069020 8पठुा९09376 
एजीएबा०ा ग शीढ पा टठजातए, हाल ५ इदवांत (० 74०४ ९णापुप९७/९७ 5४९ए९७॥ (॥7005 
ाशीवा8 ॥ 8 04३९, नि९ [00६ ए०ए्वपः (700677॥ ॥79॥0 जरा गछवा बैबा॥08) 677 
िाचफ््च्ाा30, (6 ]06व् ठसांट(ढांत, १९० गरशिणरालाए ० 5 ९फढछ्ाां 4$ 20रातीएपा20 एप ९ 
शाश्छशा वा३टफ्रीणा ८06 70 ९्ात०ए्तारपा एशाए जश्चा पीर लॉफ ९ ०ा॥पृष्तएा९०. 
एा094४०ए 6 तठगाबाीएणा ४३५ गावत॑९ (० एण्ाढगधतदाबां2४ ९ एणटठ7फ. 


2202:::70078: 52226 20002 का 
40० 24:22: 20020 4020200 9५ है 2 हा 


छ0घढ ० ४ गि॥०0.5 ९६९४४४5५ 2077९०९० जशांपी #टी ॥5 कीं ध्रीशा 82 आठ8 8 ह 







972९52॥६९० छत 8 हरधाव९र्पा0प७ पाफजाठऐबांगा धिपां। (76॥॥) जटा ण०ज्ञांत टृ०मांराः ्राभ्ाफाईवो9 . ।..- 
ण 6 फशाहणा ०णगाउप्रधग[्व ॥, ९ टली0०56 40 ठ॒ीए०४ ॥ 2७३७ 40 ४ 902(४४55 /ैएएसाफ्रडा कं, 
शा गाइण्णाप्र ए0प0 9९४ गराएा९ एऐशादीटांब] [0 ॥2 एपफ्जीट इ००त, काटी फ़ठ्ड गएा णाफए 8... 


घाश्थ 9३707 "एप बी50 4 0209] फ़ुद्गाणा धरी058 90785 गेए595 7शा०20 09980 छा ९ . 


9०९(5. निंगवबीए काटा घोर छत 3 वशछ0ा९ तंश्वी। ज्यीशा ॥९ ली गशाभाप क#शाफादशा्क। . . 


एफ्ाए078, ९ (ीए/ढ दि, ए० [000 7388638007 #6ग भा, ॥2/0208909 ॥5 १७७०0४/ 
॥$ ॥598 [7003099 067९ ० हर दिंाठ$ ॥270070०06 | ी€ (ए० ?िप9ए7 वृ्याभी-छि बीत 
ज्टाएस्‍0०05 ((787. 56-57). 


एड: 5द्या72 35 99॥/ ० पफा९ ब्वांर 5ट₹ए075., | ॥6475 वीशाव9 '8 99९९ 67 $९४ांशत' 
ब806 05627 4€दाा९2त 40 4९ 70८2:-9205 ॥ 6 ८३ए९-४ा।९(९१5, 39 एाशाह07 6 ए0०ते . 
एथा९€ 0 ॥९9॥ 8 बंठ)4 70745 "079 0 €॥॥9९०. 


वा, प१्0तएफएड) (छठाश्रठुरण वंतांफा, 5०भधरीा 270०० 70क्‍॥877०५) 


55: वतगातवप्र शाढ्व० 45 9 द्रा5. गरठात-शवर्श 6 6९ 0णए ० ए0॥692९९ ((॥९४४॥). # 
प्रध्राए९॥ छा बंक्ाब वियव९५ 8त ॥ए९ ॥ 60097 बात ९ मर९ंं)00प5776 णाँ।988 ० 86ग्रप्ा, 
860 ४र।29९ एं]88९५ छढा९ 00ऐवगा। ढें.्व]3 ८९7९५ | 6९ ॥82९0४०४ .९४709. 


पफराशा९ बार [एछ० चंखांतव ग50790075$ ठा 70ातप ए९॥०१६ं)५ ॥0 8-9 ८९७४एव०९5 8.70. 
(06 6 पभाौशा ॥ ॥06 उइांंजाी) एच ता टिद्या एकल) 7९0605 0 3 [0०वा दगींशीया'$ ०7४5 
॥0 उिश्ांवा) ७ ९ शाएंट ॥ 6 जार (685. 283 9 ]96), 87006 ॥08९07॥9007 
॥ ९ धा76 ए९३१ ० रिक्राब)आवह "०55 (475, 83 6 934-35) #९(४४5४ ॥0 ४४ |0८टां 
बैदातह औावग8€ टगी९€व एव्रंपएएशा)0-9-79एश९पा9ी। बातव॑ [0 6 बंताताठ [९800९॥0 ४७९८७३॥३64 
वद्वा। रिहाप्रा7307 80083. 


पृक्राहा6 बार एछ0 गंद्ाद वाइटाएॉा०गा5ड व 85द॒ांपा ची50 व5चाध्रार्त 00 8-9 टशापा2९5 
8.7. चर ० धाशा गाइटाएए2९त ॥) ॥6 50फ फ्रर्खा ० रिवरीएव विदाताफ्रद्धागवा ी 7४075 40 
27 ढ॥त5शाधाशा। [0 पी९ 0#००7वा [0 (९ [0९३४ चंक्वा8 शा०9९) 09 3 लांशीबी) तव्ाारत॑ 
दराफवॉएचडा, शहै।ठीरा घ्रा३टाफॉता ॥०४0०ए५ धाहिा[]$ पे विवा एिवाएकचफ्रवा) (९३४० ००) 
(७70प07 ७४०९7 [6९ 670675 ० एा|बज््याफ (770989ए7 3 उि्याब ला।शीँयिाग) बात | ॥7 2, 
एथार (#852., 258-259 ० 968-69). 


का छ8&5म्ाावा वता्ा5ट्काएपवाएएव: 


छ0ग्न ब भिााठलं बए०प्रां 4.5 छा5, #0जी। छी पछणातठफा, फैशारश बार 6९९ परढापा॥। 
एबएथडगा5 जी 700॥-9295 0टब्ीए दाएप् 35 रिक्राएाब रिक्रात॑बरणता रिउतपरॉफयां, 076 ० पी९३2८ 
<3ए९775 985 5९ए९॥४ ०265 गात॑ आह वीब5 (छठ ०७९९5, एप एशाविश 85 बाएं डटाफरएा 





ठा 52७ एफणएाढ. ॥ढ पााव €8एटा।ा 
ट्वॉ९त एक्लाटाबशदाएवगवी, गद्यारत॑ 
बीए 8 टाप्रतव8 00०060]65 ८टएा 
70 ॥6 5$00[079 700॥ ।९७४०७।7॥ ७ 
80 7., 435 [९6 700](-0९05$ ७० 
व6€ 007 ब्ात॑ 8 0485-6९ ८९ 
शावठ९ ० शिब्राइज्शोबगा5व ०0 4 
7066 एव 45$8छ॥6व 0 (९ 80॥ 
व्शापाए 2.0. (?2. 7). 


वृकठपढ्षी ही€ €डा5शग०९ ० 
6 700॥-0205. ॥0  [॥९ 
500[9(07९ ।६७६ 0९९४ (0ए॥ 67 
8 06 72, [6 3॥[-8ि वी।गा। 
वाइटा।क्ञाणा थी वीं5$ टवएटशाओ ७६5 
8$500ए९2॥९० ०५७ ॥7) 499] ४५७ 
४. (#970793707[9५9 ० (॥८ 
पृ वाट 72094767 
० #ा०)३०९०१००9५. & 97९।१४॥9979 
7९५594579९४ 3॥0८[९€ ०7 ॥॥९6 
068207ए279 ॥98$ 92४८7 [000॥5॥€0 
0ए पिवांग4 (88747. 7|९ 
व5ट490ा 45 ९€973५60 ॥] ।७४० 
वि65 ठगी ॥€ 50009 7008- 
400 ]ए५७ ०प्यौ॥06 ॥€ ८३९७९॥॥ 
रण ?8750338 . वृक७ 
8ट॥9॥07 45$ ९€%०05९६ ॥0 
अपगीता। बाव॑ दा। गत ॥95 एछात एटशाए व), एपा टगा हती] 00 720९ 6ए ए्गींत ४07, (7॥- 
ग्रा85507 ॥ 7?!. 8). 


या #४70 785.5707प: 

६. टांच्रा#वजएफक्का रएव बहता प्राल्‍-वन्‍्वात 

६.2... बरात्टां ८९एॉकव वॉशऑशचध्रादमा 3 

क्‍.. [. चिाव०जाशएओ! (077) [69 (॥6 जा99०) ० #ददापा ४( (९ ७०व०76 ० (€००) 
६[47889५9893॥. 

[.. 2 ३3 ७९०३ (वाव्रतवधा) 77506 0 चिठलं, 





| .पररिद्वाउश्शादा व गिावतुद 80९ ऐ।ह (0४एटतआ ॥ 70ा6फः 
(5000 ४९० 0.). 


प््ाइप्बछ९: 7)6 |द79५४592० ० [॥९ गइएफ्ञताणा 5 वठाग्ों, 8 ॥0९900ए €&१7/८ ।5 [76 
०९एच7९१०९ ० बचाव जा द्वक्रा।०फ्रव! (िविशा ६०फ्रकफ्वा) बात प्राकावा। (पा 0/477). 
0५४४९४८॥/ (॥6 ॥व॥76 ० [९ ए]898 हचए (5 छाए 35 (00 5298790९ 07१5 (०प्व! प्रा), 





2.8 797-8/खरए॥। [7507797607. 70790097 (८. 3/0 ट्शाएए /5.2.), 


वृकढ बरवींर्टा।एरट 46[0), 'प्र०पराठुषशा, [परा067" 06078 ॥ पि९ ट०ीं6वक्‍र्षांवं. छिपा €ॉ५(ह). 
#(व३फ्व94.. 300 तर्व३##क्‍कवाव धात॑ एलाशिा था 6 बाजी ठिता$ #वरमाक्वा बाते व/क्लदमा 
72$79९००८।७. 


$6काएा:; वाह इलांफां 4६ वबराग-ठिवया। ता व ९ इ456 35 $९९॥ श0ग फि6 २ए४वॉएटत 005 
णएा 675 4॥6 96, 74. ९(८, [परढ गाशतीदों -॑ 39ग 0९९प79 थी शीए छतावटा बाएणंवा 6677 685 
९) 85 ग 6 ठिांशा एपफाडएट 07. 6 शॉट 70 $ एछ९ट्यांवाए एापा6व] 85 का पा9- 
7९€॥6९८९(00, ॥ ००ए0पघ$ ॥59872८९ ० 5टाएवेा ९0. 8 ॥शगव7६०॥७ (९०ए७7४ ।$ (७ 
विवीद्वाता एा वी९ गध्याएटा पााएर एप 8 ॥परावा ०णाफरांशाए 722 १072075 ए/26| 
870॥$९५. ॥॥5 5 [४ 0०गाफ वायां-छिद्राए। 0३ए९ घिज्टापजीकुी ॥500ए6789 5४० लिए ॥ . शतक 
8 प्रप्राष्मब 066प्रा5. की 6 वरचटा०ए४ ० सौर एए॥ं गाद्वा79, 2 ०एाॉ०प्रावए७ॉए ० ॥6 
॥$279॥67 १$ ट658९0 35 ॥8-! 3८ ः 


एार्0000,06%: (जा छऊु्मे१९०व३ा गएशा००। हा?प्शत8 शिरए ॥509607 7939 0९ 45जांद60 ॥७० 
पाछ ०6 वद्या॥|-ठिव्ाां ?िटा00 (३०0पा 3-4 ट८तॉपा।९5 8.0.) 


(0बादाब)ा$5: ॥॥6 ०२७॥8३०एा 72€०0०065 थीठा ॥९ जाव82८ छा 0वरफा गावतवंर  शात0फ्ारएा 
बॉ. पी९ टणाग्रवात ० दिक्वारवफ्रुफना बाते वावां चिंटट) 77क्‍706 [2 ॥॥72९ 700)0 02०5५. 


दाद्रव्राध्बफ्रक्रक्मा: क्‍जठ05४ा सटांवापर वीए बंदंशव प्राण्तां( णी0 062209/९9 (९४ ट8ए९४7॥, ई609/4 
शै्ट ॥8 #64 0868८0०४० 35 858९॥ 9 ९ वाइटएछ0ता, है | छशातठंठफराशां 09 ४९ एत)06४ 
जीबाद डतवत 6 ९५७725३०7 ९०१, 'ग॑ ९ एछाववादह छा ८0गाधावाप'! 70ए2७।४ 6 पाशएवं ॥छपछुबात 
कफ, भ्मा।ला वभंड प्राछगां - ७०३७५ ॥९0, य 





कीद्द्वॉद्चल्ड 572 3५ (68 70967 जीग्व९ ० #+ंबाए (छाजा०प्राट०० है5वांप्रा) वज्रंगव्र धण्छा (0 
पृजातंपा, ४5 विश्ाणाढह0 2४०7॥6९४ ॥९ सी जा टाधरापर४ 40 एट ७ वेश्या इॉशाशाए. 


कैलाश ॥ कै रात॑ठ्शाश्गा 6 7९ीहांठपड हरि, [॥6 छएा2ए8९ाआा 78000 8 धी€ ९थ7॥6€४ा चिाठणा। 
जार्शडाए४ छा शी€ ठएटपराशार2 ० िडि एठा0 ता वबाओ। इटा॥075. (76 €9767 चविवाएपंबग)ा) 
पृ्ा॥-छिगेजो गिडटा।फञाणा$ छा कठपां गी९ इ९टठाप॑ धश्यापाप्र 8.0. ढ७गएछ0ए गि6 ढवएएचडांरा। 
शिद्वॉए7( €ऋछा४३507 त्रगताशावाा 6 कंचाधा। (7४8, 4-2). 


चिठला ; 6 ग््या॥९ ० वीर शंग्राए्ना50॥ शएी]0 ०75९॥९४ (९४ ०९65, धाठणठ्ी) ॥6 ॥5 76 
(65८७० 89 $प८॥ ॥ 6 [5इटॉफ़ा0ा, ॥॥6 तवबा€ चिंट0] ५०5 0076 0५ 5८एश९/6 9९€79075 
7#2207066 ॥ ९ बायीं इधर 67७१९. 


बीबर: ॥स्‍९ डांद्रावंगा0 ९४7255०07 
०९८७6 |7 $5९ए८7४हां 7-35/98॥7॥] 
॥5ट7/क्‍फ075 70 8७7०४ ह6 #0८॥-७८०५ 
(., 5९३5) ०९८८०फांट6 979 धा€ 707॥६5. 
वृक्तढ6 फ़ारइशा। वाइटाफरॉलिा इटिकादु 0 
'3 ब्ा/क्ाावा ', ९7९ एशााप ६६३८ ९९ 
70८%-0९65$ | 5 ८ढ९ए९॥, एा0ए९३$ (गा 
वि९ शाधा गाढ्वाां 3 700४-9९१ 670 प6 
९ पए॥006 ० ॥8९ 7०0८४-50९१९४, ॥॥6 
शा एशंगए त०त0060 ७५७ ४०7०5 ॥॥० 
पाचां, एापांप्प, 994, #0॥/ ९(८., ॥7 [९ 
इजा-87छक॥ गरइटक्मएा075. 


॥ए. ४६०64 घए४7? 87 १7 (6ा॥92९९ 
वृष, $56प्रात 47९० 9845724) 


डावत९&: पि्वगाएाएवा। ॥8 6 बधवों] ॥ 0 (० 
$ दा5 40 ९ ॥070 ७० ाढ 6णार्त 
(७॥78९४ (एशढ्य]), 89०प 3 #त. 40 ९ 


2.9 80७५कष:च॥०॥॥ फरात 0वएछ।, छ९ञ ० (6 जीउछुर ब0 00 6 707677 
पि९एजाएाए4ाए (5000 87००४ 0[.) ॥ी606 ०७ 6७ शावो 4५९ 64४० $5॥067, 





पीशा8४ 5 4 शाव७७]९७ 0ाागाीतका 
००पत९5$ 5१०/९० 606 ० ॥॥6 09 ०0० वाठाषा, ॥0९८3॥॥9 दाठशा 479970777842!५ 85 
मैवप580, '$०४2४९ ७०७०८१$' (?], 9). ॥॥ढा6 [8 ॥ धो] ॥ 
एव. ॥ 35 4 409 ०208 9५०६ 5000 व्छा।, 
एचएशणा, [॥९९ 5 |प६। 006 ७९० ॥5806 तार (68 


वांपावं ८३ए९॥॥ ॥९7९ बिटांगठ 
पहाढ 9 व0 प्राए-व॥6९ ० पी९ 0709 ०0 ॥)6 
एलशा। ढंत5९।४० 6] (९ 702 ०0, वी विखा। : 





ज॑ पर एड्चएटाए 4358 3 टगएपॉँठाः पएरठांश! 2टढी)।ओ 5ट007९०0 ठप ० ॥एछ 70०28. पफह लहझढाग। छषांड 
९१ पए 0 ४४ वधााप्र 5४8४४0॥ 0५9 ०एशीी6ए वीएात ९ |ब९, ह दावा 00९ एथ७7/2 5 2 
ढऊडाॉसाएश रण 4०९ शा एवागांग65 तणार वी "रवीश ज़ांप्राशां ०घ पीर व्शाग्रव ण एीढ€ एक्ट. 
पफाढ३ढ तढए़ांटां 6 क्‍ीध्रणा९५ ० 0पए7 ग्रढ0, णा€ ० फिशा गा बालाढा, दाव (४० ती फिरा) जांच 
प्ञाबांड20 वैद्यातं$, बात॑ 8 एरग्राब्ा, व॥6 फएवांगिाहड ०2०8 40 ९ चिव्व॒बीधांट ?€704 बात - 
ग्रा89 0७९ 047९0 0 ब00पा पी ॥3 गर्शो 6 (6 वि४ जा]शाशांपा)! 8.0. 


पृ भा 895 था क्‍्ा$टडाफएवत0णए: 8 ढागा-छाक्ाएं वैडइदाफ़राठा ७७५ ताडटठएटाएव वा 
हिं।8 टएशा) एशाफ़ 7९८थाए (992) ७५ 5, रठुंवश्रप ्छ 6९ ईिफ्रादरागगाफए 06फ्ब्रप्रार्यां ७ 
विर९ #72032006ववा८व) 5प7ए९ए ० ॥06 बा0 (.. एरशागावद्धावएडा, 3 0९4 इटोाठ0 एठ्टाीटा. 
वाढ फोइटॉफराता वै्च5 ॥ एश एटशा एफए5॥९0 ३>थ7 ० 3 छाशीशिांतविवाए ॥०9०४.879९४7 
7९907 वाग0प्राढाह 6 0500ए९८०ए. व सा।टाफाता 5 शाहाबए९टत 0 धार उ50फ्राढाा 
डांत€ 0 ॥९ 702८६ ०प्रौडंत€ ९ ट8ए९७॥, जे 0 4छनतार 0 फाणाएटा ॥ वगिएणा कता), +ै 
85 छए०॥ एशाफज़ का &70 धार श|शा5 आए 5९९॥ ०7ए शिंगफ्र, ॥ाढ वि३ट7एतणा 8 47 0पा 





74.04क्रागरी-8-व5ट2फछ97, र४ुठआपाएठ0 (८, को प्शाधपाए 8.0.) 


[त€5 ८6क्रांगाा९त ए्वंतरींत ब 7९टॉग्राह्पांवा 70प6., (॥-॥77972०55007 ता .?. 0.) 


कछड़त #्रए0 788738.57078: 


7.4... (गबबकबक १) कररथतत#०८० 
2. टर॑टएएआडईी द्रफ्राएचाफ 











न "पथ 4 ॥३२७१७०४ के 00000 
020: 200202020002022 2 


[..3., €€टटड्वमठछगग/ 2९० 
7.4... जएंडाव कथधा। 


89८८९५५ (इप्रत/977), (३४९-आशौंटा (7०) ८५5९१ ६० 0०९ पाहेत९ (८९७ ७०६६७) ०ए 
0७कब्रारबाग), 70067 [79 फ्०7५) ० (ढकगा। एण॑ ?९शाणाए०४वठे, (* 0७५ इज्ञ00].) 


[6४050868: वढात, ॥॥6 शीएड९॥०९ ० एुच्चाग3048 ॥्रा80392 8 3९९७ ॥ 6 60707॥ 
#7एफव/प, 0ि वा गण, पणाी6[' 


50घाएा; .88९ ॥ठागी-578॥7. ३७॥9 ० (6 |शांट75 ॥६0४ (०9, ४७०, 79, गाए 49, #5९९ 
ह्श्टांबा७ रा 'इछाडि' (686॥895) ०7 धाढ (०9. “व प्णता आध्ीए रएाएशत ॥04208] 
[९, 7०. णी) एबएगं वर05 भात #० €शफि। [गश णिग5. वी€ ने ग्रारतीबों आ8ीुत ॥95 
७९८०९ 9 इशा-टा९०एॉौठ एपाए९ 40 6 ४. ॥6 ॥5ए07/ए7 (0॥09$ ४९ ॥8-॥ 07090क 8०४० 
डज़िर ढागएंग्ज्राह पीढ एप, 'ैज' ब0०ए४ णा 0 6 ह9॥ा रण घगाप्र (पा गण थो) ०३७० 
<णाइगाह7(, 6 ए९टणीवा ॥€एशाइह)] ०णी | 35 ॥ परि0-शी९टा०ा [8 096 (0 43 $507709) 
९0. 


९0भार0080,00५: 2 न ३8८४ एछॉ079 0०९४।॥0095$ 0० (९ ९७० ० (॥6 +.6९ ए९७7॥0०6 ०॥ 
बाब्राभी-ठिग्गात ७06 प्रव्र ०९ १४४६गञ०त० [0 300ए पी€ शाते णी पा 0फएए ट९्भ्रापाए 0.0. 


0०0०ाह्रष्रा 5; ॥॥6 रफ़ाठाग्जो 72208 ॥8 क्षी ० 4 70०0६-8शी0४7 ( वाॉ॥) 09 "९४४क॥/कषा॥, 
फर प्रणारश एा ९९४८दाप ०००णाढााठु क्‍0 धीढ णांहदुढ रण रिशप।9फेवों. 


5छता००ण 07 छतवेत्राढा: ४४४9 गित9 8९शा वा वीर एणागशाटशशशा। रण 2 ॥5९॥9000 
बात ए०एंवं ऐ4 प्राडर्बापडा णि 4 ॥ग्रॉपादों (९एाढइशंगा ता पी 70०/॥. वी 6 97090$20 


वशाल्की0ता 45 2एणा86, 5 45 धी€ णाए का0एजएा 00८पराषशव0९ क्षां पी€ इ8भर्रणं | 
पथ 82709075. ३ 


7७#प्रता7०वाँ: िखा€ ० व. जीबपुर, 7॥6 ज।बहुढ 709 ज़ा०00॥ए ७९ तैदात॥8। #) ॥6 
ग्रा०त९४7॥ जाँबतुर ण एशप्राए०६ वऐैुठपाँ 5 शा5. ६$0फ॥ छत 4॥2 ८8ए९7॥. 2 


एाग्राबिाओ। बाते ९एटॉफवआर: पिव्वाता९श5 6 (९ तंगाठा छा ॥॥68 ९१४९४ हा ॥6 पंक्ष्ण्य।/6४7 
7057०९८0ए९४४. पह४ ९५४७०१९४5॥0/ (९शााशिाम। 83 9700809 46 9९ 39॥॥: प्र0 के एथंपशा। 
(१2॥7€) ग्रातं काश, 40007/6 #5एए्ीषत्रि छा ज शैते७/ एग्राब्ा [76 0 0९ प्रीचेश/३६०00 जा 
पी९ वार्ड! इटश३2 ० रतला 0०067 छांडि! [0 (8 ८000४), । पंत १६ हम 4६ 5३] 
0396, छ€ |99९ (0 करारा दी 6 गताद बाप ॥श त09ॉस्‍४० 40 पर 5छ6 ऐंद्रा९, 
॥0 8 एशापफ एाए5पढ। 9९४०४९॥०४०. ह॒ 
वगाढ गब्ा९5 शावातु की दब बाए वराशिशजशाएए, /ैटएठाकाव 0 06 (प्राधशावााएं 
शाइब्ाहैड, हेवाडी ठा0 हवएचतईं हार शा वंशाततदु 3 वंगाव गपा, #८८००:७॥०६ ० बा ०9 
वी पका), ईगीफ्दा ७३5 ० 70ब०5६ एगो0 गराएएठ॑ंडा6त 85 प्रधाए 88 450 9७75९5 ॥7 
(९ वैद्याती वद्चाव €फ़ॉर एाण्वॉल्यटॉंगररबमबरार, ॥९ €#ए/४5आरं00$ डेच्ता हागचे ऐप्रवदीकिचा 


20220770/07/0200/276/ 2223 5 


22५ 2222 22232 225 228 ५०००2 


॥#०पएथमएए ए०टपा की दिवधावतेव धाइटाफ़ाठतड ज्रोराश पी हरा 0 वेंडातव तछा$, १5 (5 [6. 
#िडा जार चिंठ शा 85 एऐटशा णिपाएत की 3 क्‍खाभी-छावबातिा। वीाडटा9॥07. सि०ए४2ए2/, ।0 (5 & 
प्रा०90 9०0 एरीशीरशः 8४ (एछ०0 #०775, 700श बाते वंब्प्र|ा(रशः 7€९:760 [0 ॥ 42 फ़ाएचशां 
(50४9079, ज&ा€ गधा8ह णा 8५ 0९००(७९६5. ॥॥6 रारातरएंड60 3७5चछ९४४०त 5टाछ 5. 
90एणंडठावां खत 8 'दृपए९४067 #ढवप्रा।2$3 पित९7ः आशंपतए् ॥ ॥ ० वहा ् ढे्ागब एठागवटी।ड 
॥780946॥ 





पृप्न७ उप्रगाऐणो छा डाॉवंदंतठत, वी2 छित 499द7फ बाते 6 वबा९5 शावाब ॥ ्टित! 
एंटडए वाशंत्यांट ग्रांशाबटीणा शांति खेहावंा) ॥ रिवातवातधोत8 गे ऐीं3 एटा00, 


7ढ। 5 02ए९-४९१६१. ॥ग्रांड [8 ९ एफ 0०2फाशा८९ ्ी फिंड छिए 80 दि काएजा) ॥ 3 
पृद्चाओ-फकियांगां ॥82क्‍7%07. 8 ९३67 वैगशा।-87ताा 507790005 93ए6 किी९ छि|ा कुठरी. 
[व विश वां वाइटाफ्र0ठा5. एवं $ धी९ शंकातव॑ब70 छत 0िा बेंचांत8 70739९४725 8॥0 
2॥0/9९5. 


8४२0० ७।॥,.६०6६४भ टाष7 5 


ग॥6 एा९5९८णां शांपतए 45 फटा 0६7 विवुशा 970]6९ पात॑ंशांव९0 09 7९ 35 3 'िवरगाब 
एशा6ठण ता थार विवाद ए०ठछाटा। 6 लांडठएटठोी रिशएक्‍९शालाी 0 ८0क्राफल[ॉर 3 7९शां5७७ ७० 
शावाचु९0 (079५5 ० पार गढ7-8गागा ॥5ट7075. | 4768 07. 6.७. हवा, ण्यारश 
एारटाएण रण ९ 59684१9॥09 022०7थाधप्रार्शां, 87९॥3९०००व०ांटछ 5ए7ए९9५ ० ॥0॥3, 'चैए5072९, भारत 
जि, पिाधात एवशाबतीता), जिा९एटॉ0, विवातिवतप 3९ 26:ब्ांधिाषश्यां छा #ाटी३९००४७५, 
३०795, गात॑ दिीशं। 20क्‍९3898025 छा बटा।ए९€ 20-67 गात॑ 35958706 वपएच 79 4९॥0 
छए078. ॥॥6 एछ609/ग०॥5 ० ॥6 ८5ए९705 बा0 ॥6-॥97९55807$ [| (॥९ ॥750#79#07$ 
एफपए0॥5॥80 ॥९76€ 4९ 09 धा6€ ९००0प९59 0 श्र वाओतववबतण 596४ 0९947 ० ४॥८9९००१५७. 
| किट जिंक, ि.चिवाोलींगछुवा), एीडाएाठ), 54वीं 07099 ए 0०॥१७०7१९5, 0 9709४999 
70596 (0 ॥6 7/शा॥०6 8॥85 वा6त॑ बााबगाद9 छा ड९९| 5८४770]08098 007 ८056९ $प09 ब्रा।6 
72-2079976 ० 2९ ॥522८४5४0]९ ८३०७ 752779075. 


# $7.:2८7 ष्टू8/]76 ॥]57॥7 
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39]9 ॥ने. #लहआ3 5350], '7॥6 (३ए€शा5 काते उितथीाश वरी5टॉफ्रीजगाड एण $0प्ररीषशा शि्ीव, 
#2#छएटबॉं&. ०णाँ ##र 758 0//एमा/ंा (07 ४०८2४८2९, 20073, ??. 3327-48. 


924 ॥६.५७, 5प7गगञागाए३ / प्रा, *॥6 टिग्रपी९5 चिंजाप्राशा5 0 ९ फिब्ातए््क 20प्राफ 
बात धीशा ग्रिइ"आफा।णा5', 2#०6वं&, ० [#॥ 6 कान 0शाशाएपधव (ए०आरि/शार९, 
ं86789, 772. 275-300. 

43966 उावएबाॉयथा िैंग्रोवतेरएए७त, '(0०9प्5 ए शेड ववाओी-ठिीगोा।एा ॥0527|/0075' (९78), 
पलाशांश्वल ०8 उहिडटाईंरां०४8४ 2966, (३०7३5, ?7?., 57-73. 

967 7॥',७. कंग्रोब्रानवुधा), टिद्वाए इएपम्रंड ईैंम्ाँद्ा 24॥4९०27ध३79, िंव095. 

4968 वृश्बश्बावद्या चिंवाव0४एचत, बागी-छितवंायों वाइटॉफ़ीणा> ० दी उैगापृणाा ह85०, * 

- इ#णटवैं3, ० एसिर #एटतमवतव [॥ॉरापफावडांतातों (07ढ€7४702०-$ साय ७ गिंवााओ।ं 





]972 


972 
974 


98] 


डाप्रव/658 496&, ]/७0755. ४०!. ), ??. 73-06 


है, एडगा९शाइटफिवा, है. एरट 5099ए ० ध6 वंबण-छेिबाधा। ॥52ट0960975 
ठैटाब एलांथ्रांब6, ४५७, ?7?. 763-97 

ए. पिच्छुगञएवलाए शा 4, बवॉण्टॉएएडा ( ॥ठा), ैं30735. 

8. (शबंगणबाएं (९१, ॥4.७. 8०॥70९5॥), खकराडव 4/6-धा९ 9 76797, ठउकफ्र2 
बागान्शाव9, िंटएए जिया, [सिट्संडट० रीता श्यगी गा 077शारीडर एाठ्ज॑वांशए 6 
[€>5 6 85 वात बगायं जिश्टाफ्रांणाई गाटांप्तागतु 4 क 7वा॥-87477.) 

जि,5. एटा॥वाउ5छगाए, ऊककाइत #दाव्रि[/प्र दमा दैचा-एटटा४ड०, ( वध, 
705$0५7१0७5), चिं8635. 





20222 2० 22222 222 2९८ 


७४५७73845,.439 550८5 एव एशाए 
राधा एरट द 


97. 8॥99८ाथा073 गा 3॥953787.* 


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केशरिन फेशी विष केशी विभर्ति रोदसी। 
केशी विश्व॑ स्वर्टशे केशीदं ज्योतिरुच्यते | ।8॥। 
सुनयो वातरशना: पिशइगा वसते मला। 
वातस्यानु धाजिं यन्ति यद्देवासों अविक्षत।।2।। 
उन्मदिता मौनेर्यन वातां आ तस्थिमा वयम्‌ | 
शरीरेदस्माक यूय॑ मर्तातों अभिषश्यथ |॥3।। 
अन्तरिक्षेण पति विश्वा रूपावचाकशत्‌ । 
मुनि देंवस्थ देवस्य सौकृत्याय सख्रा हित: | |4।। 
बातस्थाश्वों वायो: सख्राथों देवेषितों मुनिः। 
उभौ समुद्रावा क्षेति यश्च पूर्व उतापर;।॥5।। 
अप्सरसां वन्धर्वाणां मृगाणां चरणे चरन्‌। 
केशी केतस्य विह्ान्त्सस्था स्वादुर्मदिन्तम: | 6 । । 
वायुरस्मा उपामन्धत्पिनष्टि समा कुतन्तमा। 
केशी विषस्य पात्रेण यह द्रेणापिबत्सह । ।7 । 

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ब9]2900$ 7 09प 58974 - 
दिग्वासा वातरशनो निम्नन्थेशो निरम्बर: ॥ 
निष्किज्वनो निराशंसो जश्ञानचक्षुरमोमुह:।। 
सेजाराशिरनन्तौजा ज्ञानाब्धि: शीलसागर:। 
तेजोमयोषमितज्योति भूतिस्तमोषपह: । ।* 


प्‌ [क्ठुबएप/७॥8 0॥९८5 [॥8 ९ए८7ए००९ 5000॥8 909४ 40 7]9748 चधा5 8७॥ए (षिया)0 
(9०8४25९ ग्रीज््था, 22.). ॥ पघिधाश 53फ5 धीबा ॥0९ औआठफए9 टांटाइछ िशा: 


न नि्चेतिनं तस्माँ हग्वाससमनुत्तमं। 

बालोन्मत्त विचेष्टं तु मत्परं ब्रह्मवादिनम्‌ ।। २३.५ 

भस्मव्रतश्च मुण्डाश्च ब्रतिनो विश्वरूपिण:। 

न तान्यरिवदेद्दिदान्‌ू न चैतान्नभिलंघयेत्‌ ।। 

न हर्सन्नाप्रियं बूयादमुत्रेंह हितार्थवान्‌। 

यस्तान्निन्दति मूढात्मा महादेवं स निन्‍्दति।। 

यस्त्वेतान्पूजयेन्नित्यं स पूजयति शंकरं। 

एवमेष महादेवो लोकानां हितकाम्यया।॥ २३.९-१० 

नग्ना एवं जायन्ते देवता मुनवस्तथा। 

ये चान्ये मानवा लोके सर्वे जायन्त्यवासस:।। 

इन्द्रिवरजितैर्नग्नो दुकूलेनापि संवृतः:।। 

तैरेव संवृतैर्गुप्तो न वस्त्र कारण स्मृतम्‌॥॥ २४.१३.१४ 

पृफार४ एशापफ्णभाव 7४४7६ बा0गी67 2एशा ॥ एंटी (( 5 इच्ंत पठा (06 एश्लात्रए 0९ए७ए४०व॑ 

श6एचनाणीबय 0 0एट/व70०ए७ ९ जिवुवाएवार चिएांफ 0 पारा ९ठातंपटां 


ततो दिगम्बरो मुण्डो बहिर्पिच्छधरो डिज। 
भाया-मोहो असुरान्‌ श्लक्षणमिंद वचनमत्रबीत्‌|।२।। 
तपस्याभिरतान्‌ सोष्थ माया-मोह महासुरान्‌। 

मैत्ैय ददुशे गत्वा नर्मदातीरसंश्ितानू। 





दिग्वाससाभय धर्मों धर्मोष्यं बहुवाससाम्‌ |। 
इत्थनेकान्तवाद च माया-मोहेन नैकधा। 


सेन दर्शयता दैत्पास्स्वधर्म त्याजिता हिज।। 
अहनैत महाधर्म माया-मोहेनते यतः। 
ओ्रोक्सास्तमाश्रिता धर्ममार्वतास्तेन ते5्मवन ।। १८.९.१२ 


पका एक॥8 7प्रा० 0९5 (0 बरा0ारा रजांशा, कै 589५ व 6 6ै/4९5, 24995 20 
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#रबांपाढ रण गेब्रागांश) वी ०एएारटांग।ए९ एवए:- 

अर्हघ्यमामकं घर्म माया-मोहेन त्ते यत्त:। 

उक्तास्तमाश्निता घर्ममार्हतास्तेताभवन।। 
अयवीमार्गसमुत्सुज्य माया-मोहेन तेज्सुरा:।। 

करितस्तन्मया ह्ासंस्तथान्येत्तत्परवोधिता: | 

तैरप्यन्ये परेतैश्च तैरन्योन्यैस्तथापरे। 

नमो अ्हते चेति सर्वे संगमे स्थिरवादिन:।॥ ७.१२०-१२६ 
अईन्तो देवता यत्र निर्मरन्थो दृश्यते गुरु:। 

दया चैव परो धर्मस्तत्र मोक्ष: प्रदुश्यते ।। ३७.१७ 


याढ एफ्गरा5्ख्व धब्वीतिता 499०5 0 900९ पाणर ० ब्रा, 72 प्गदतंव ?ग्राणयुं॥४०927590 
(९5८7७0९४ ॥९ 0९ छा जं6व्ा0गवाए३ 35 (0॥005: 


पाणिपात्र चरन्योगी नासकृद्‌ शैक्षमाचरेत्‌। 
नाचमनं तथा।। 

अयाचितं यथा लाभं भोजनाच्छादनंभवेत्‌। 
परेच्छा च दिग्वासा: स्नान॑ कुर्यात्‌ परेच्छया।। ५.३१ 
मुनि: कोपीनवास: स्यान्नग्नो वा ध्यानतत्पर:॥ 
एवं ज्ञानपरों योगी ब्रह्मधूयाय कल्पते |। ४.३१ 
कटिसूत्रं च कोपीन दण्ड वस्त्र कमण्डलुं । 

: सर्वमप्सु विव्वज्याथ जातरूपधरश्चरेत्‌।। २.७१ 


प्‌॥४६९ ७7४ €ए #९४7९४८०९४ एटा ग्रताी८8९ 0९ प्रबंएा९ १70 5 श्अशां 6 एशांवावशा 
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9359५, ६७४७७, ए8७३, रिगबगारशा।, ७7०७०, 28५78, २७॥६४६० , छावुद्राएद्ाव, तलैशीलां, 
पंच ५980॥279, एागिबदग, मांावा५७, 08५३५०५, पिं835, 4४३५३, पिधु7०08 87४ ॥०३४०|९ 
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8038, एउठाप्रतंत रिघावा॥ ९८. 

86०९०१७, 40.36 

8०2०४, 2353॥7 'नैैं७9043|47) 

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दब हुआ 





20220 22020 32258 इक : 
2002220222022022202 00222... 


- डा० महेन्द्र भानावताँ 


राजस्थानी लोकभाषा में ऋषभदेव की विचारणा और चिंतारणा कई रूपों में रही है। जैनों के प्रथम तीर्घकर 

के रूप में जहां भगवान ऋषभदेव की विशिष्ट पूजा-अर्चना, मान-मनौती और आग्रह-याचना के प्रसंग मिलते हैं वहां लोक 

जीवन में लोक देवता के रूप में इनकी घरपना के कई पक्ष उद्धाटित हुए पाये जाते हैं। विभिन्‍न स्तुततियों, स्तवनों, स्तोत्रों, 

, सज्ञायों, विनतियों, बीसियों, चौवीसियों, सिलोकों, ढालों, सपनों, तबनों, भजनों, लावणियों त्तथा रासों के माध्यम से भगवान 

' ऋषभदेध की विविध-रूपा वन्दना के बहु आयामी स्वरूप को लोकमंगलकारी परसना देकर राजस्थानी लोक अपनी अभिव्यक्ति 
में अभिभूत हुआ लुललुल पड़ता है। 


इस लोक ने, ऋषभदेव के आलोक को लोकगीतों के माध्यम से तो लोक चेतना को मुख्रित किया ही, प्रकृति 
और पर्यावरण के हवा, पानी, जंगल, पहाड़, घाटे, घाटी और गुफा धूणियों तक को प्रदीषप्त किया है। अपने आत्मानुशासन 
को धर्म और अध्यात्म का ध्वज देकर भक्तों और भगतों ने ऋषभदेव की ही शरण पकड़ी है। यही शरण उनकी तरण 
सारण दुःख निवारण बनी है। प्रभातियों और वधावों के माध्यम से सूरज की साक्षी में ऋषभदेव की अभ्यर्थना ने आत्मशुद्धि 
का कायाकल्प देकर भोग से योग का आत्मरस दिया है। 


अन्य कोई महापुरुष, कोई देवता, कोई जिनेश्वर, कोई लोकेश्वर इतना आदरित और रूपान्तरित नहीं हुआ जितना 
.ऋषभदेव हुए। ब्रह्मा के रूप में इसके चोपड़े बांचे गये हैं तो विष्णु के रूप में भी इसके मंगलाचार गाये गये हैं । महेश 
के रूप में भी इसकी भनुहारें बखानी गई हैं तो आदम के रूप में भी इसकी ओकरवाण दी गई है। देवों में देव है तो 

* यह। फृषि का देवता है तो यह। भूमि का भोमिया है तो यह। दिन का करणहार है तो यह। ण्ही जिनवर है। यही 
आदीएवर है। यही दीनानाथ और करुणाकर है। ऋद्धि-सिद्धि का दातार भी यही है इसीलिये यह रकमनाथ है और केसर 
प्रिय होने के कारण इसे केशरियानाथ एवं केसरिया लाल की लोकप्रियता मिली है। आदिवासियों में अपने वर्णानुरूप काला 
शरीर होने के कारण यह कारिया बाबा अथवा कालिया देव के नाम से ही सर्द व्याप्त हैं । इघर मेवाड़ के धुलेब कस्बे 
में देश का जाना माना ऋषभदेव जी का तीर्थ स्थल होने से घुलेनघणी के रूप में भी इनकी बड़ी मानता है! केसरिया 


नाथ की असीम लोकप्रियता से धुलेब कस्वे को मौणकर इस स्थान का नाम भी ऋषभदेव अथवा केसरिया जी हो गया 
है। घुलेब जैसे इतिहास और पुरातत्व के अध्ययन में जा सिमटा है। 


हे प्रारंभ में यहां जिनालय था। यह कब अस्तित्व में आया कुछ नहीं कहा जा सकता। चौदहवीं-पंद्रहवीं शताब्दी 
में इसका जीर्णोद्धार हुआ। पूरे देश में यही एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां सब जात-पात और धर्म समुदाय के लोग #्वेताम्बर- 


दिगम्बर जैन, वैष्णव, शैव, भील, एवं पिछड़े प्रतिमा पूजन-अर्चन करते हैं। प्रतिमा पर कोई लेख नहीं होने के कारण इसकी 
प्राचीनता के संबंध में कई कथा-किंवरदंतियां हैं। ह 


* ३५२, श्रीकृष्ण पुरा, उदयपुर-३१३००१ (राज० ) 








कट कय 80008 का 4४४2 रु ४2४४ 8255720:0 52 228 20000 ०००० ५४०४४2२ ] 
४०००० ०2५०20:40 ० ०१४१० १३६४०९०५ ६ 29/2 04: ०: 220225 22 22५ ५५ 22222: 222 ५० 2222 शक ८: ह 
अऋषभदेध के चरणों में भक्तों 


जज जी 
प्र कप" 
[ हिल अ टी बकेण 5४ 





की भीड़ बराबर बनी रहती है। कोई कार्यसिपर मनौती करने आते हैं हो कोई “ 
अपने आंमस में घूत की लालसा लिये नूसने आते हैं। देवता सबको देखता है। सबकी सुनवाई करता है ॥ एक कार सी. 
एक तीन वर्ष के बालक के बराबर केसर तोल कर ही चढ़ा दी गई थी। कई लोग चाह,ल्ये उतरवाने के लिए भी अपने... 
चैेंटे को लिए आले हैं। चाहूल्ये उत्ततवाने की बोलमा (मनौती) चोली होती है। जब संतान हो जाती है तो पहली जार , 
भगवान के दरबार में ले जाकर बालम के चाड्ल्थे उतरवाये जाते हैं कारण कि वह संतान ही इसी देवता की दी हुई होती 
है। और ऐसी मनौती बोली हुई रहती है। राजस्थान में ऋषभदेव जी के सर्वाधिक मंदिर हैं। जैसलमेर के लोदवा-में 
संवत्‌ दो का प्राचीन मंदिर है जहां की प्रतिमा आज भी पृजान्तर्यत्त है। 


ऋषभदेव के यक्ञोगान में कहयों ने अपनी आत्मीय भावनाओं की अभिव्यक्ति दी है। मुनि आसकरण, गज मुनि, ह 
आचार्य अमोलक ऋषि चंद्र कुशल, घेवर, चौथमल, नवलमल, गजेन्द्र, तेज विजय, रोड कवि जैसे कई सुनाम हैं किन्तु इनसे 
अधिक तो वे नाम हैं जो अनाम बने हुए हैं मगर जिनके गीतों की गंगाएं अनवरत लोक समूह को पावन कर आत्भोद्धार 
की राह दे रही हैं। “बोल-बोल आदेश्वर व्हाला कांई थारी मरजी रे म्हांसूं मूंडे बोल” पद हजारो हजार कंठों पर बढ़कर 
सब ओर गूंजित हैं। नियमित रूप से ऋषभदेव का सुमिरण जहां पापों का नाश कर जीवन को शुद्धि देला है वहां जन्म 
-जन्मान्तर के आवागमन से भी मुक्ति दिलाता है। कई लोग प्रतिदिन सोने से पूर्व और प्रात: उठने पर त्रिदेव नमन के 
कूप में - “ऋषभदेव रक्षा करो। शांतिनाथ साता करो। पारसनाथ पार उतारो। दुःख दर्द दूर करो ” नाम से माला फेरते 
हैं। आदिवासी समुदाय में तो कालिये बाबा की आण चलती है । इसका सौगन दिलाकर आदिवासियों से सत्य वचन प्रकटाये 
जाते हैं। कोई आदिवासी अपने इस देवता की साक्षी लेकर झूठ नहीं बोलेगा। 


असीम लोकश्रद्धा के धनी ऋषभदेव अवसर्पिणी युग के प्रथम शासक, प्रथम शिक्षक, प्रथम श्रमण और प्रथम तीर्थकर 
थे। अंसि, मसि और कसि (कृषि) से जुड़ी सर्व कला, संस्कृति, विद्या, व्यापार और आचार-विचार उन्हीं की देन हैं । उन्होंने 
मनुष्य को धर्म का मर्म, जीवन का मर्म एवं कर्म का मर्म बताया और पुरुषार्थ का पौरुष समझाया. । वे मानव सभ्यता 
और उससे जीवन सरोकारों के सिद्धात्मा थे। उन्होंने “भोग प्रधान वातावरण में जीने वाली मानवजाति को पुरुषार्थ एवं 
कर्मथोग का संदेश दिया। श्रम और संयम फा मार्ग दिखाया। अक्षर बोध दिया। वर्णमाला सिखाकर ज्ञान का ध्वार खोला। 
लेखन, संगीत, नृत्य, कृषि और पाक-विद्या सिखाई। परस्पर प्रेम, सदृभाव, आत्म-रक्षा, सुरक्षा संस्था की कला के साथ 
आस्त्र और युद्धकला का ज्ञान कराया | इसी कारण आज संपूर्ण मानव जाति आदीश्वर बाबा के रूप में. उनका स्मरण करती 


है।” (केवल मुनि) 


ऋषभदेव ने कहा बहुत कम । किया बहुत ज्यादा। सर्व समृद्धि का सुल्ल भोगने वाले ऋषधदेव अचानक अकिंचन 
बन गये। त्यागी विरागी से वीतरागी बन गये | सबके सनाथ बने भगवान स्वयं के लिए अनाथ बन सर्वतोभावेन आदिनाथ 
बन गये। किसी को कुछ नहीं कहा। न धर्म की बात कही, स श्रमण की बात कही। न त्याग की बात कही, न तपस्या 
की बात कही। बावजूद इसके चार हजार राजन्य पुरुष उनके अनुगामी बन गये। सब कुछ छोड़ दिया और जैसा ऋषभदेव 
करते रहे, उनके देखादेख दे भी करते रहे। भूखे-प्यासे-तपते-ठिठुरते असहय कष्टों की यातना भोगते रहे । इतने प्रभाव 
वाला, बिना कुछ उपदेश दिये समृद्धि भोगियों को सर्वरूषेण त्यागी बनाने वाला विश्व-इतिहास में कोई और पुरुष नहीं. 
हुआ। 


धर्मस्थानको में तीर्थकरों की स्तुतियों में महिलाओं के ठाठ का क्या कहना। त्तीर्थकरों की चौबीलियां और स्तवन - 





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शाकर जे फूली नहीं समाती हैं । सपनों के रस में गर्भवास में त्तीर्थंकरों की माताओं को जाने वाले स्वप्तों के कई 
लोक की महत्वपूर्ण घरोहर बने हुए हैं । एक सपने का भाव देख्क्यि जब बालजन्म पर कैसा कितना हरख्र उमड़ छलकता 
है - “आंगण ओवरिया चुणावो । नारियलों से नींव भराओ । दाई बुलाओ जो तीर्थकर को झेले । सोने के छुरी से 
उसका नारा मोराओ । रूपों की कुंडियो में स्नान कराओ । रानी के आंगन सास बुलाओ जो बालक को पटरी झेले । 
जोशी बुलाओ जो बालक का नाम निकाले । ढोली बुलाओ जो ढोल बजाये । सेवक बुलाओ जो भालर बजाये । भुजा 
बुलाओ जो मंगल गाये । कुम्हार बुलाओ जो कलश लाये । सुदाग्रिन से सूरज पूजाओ । हौज खुदाओ । आरती उत्तरवाओ। 
झलमा पूजाओ । ढोल्या ढराओ । पगल्या मंडाओं । ” 


देव पूजा के लिए पूजा का थाल लिये महिलाएं खड़ी हैं। कब दरवाजा खुले। पट खुलें और देबता के दरसण 





हों - 
“सामी कदकी ऊबी रे कदकी खड़ी रे दरवाजे 
तोईनी खोल्था द्वारा रे 
स्ामी पांव पूजण दोनी मुख देरवण दोनी 
मेँ दूरी सूं आयाजी।” 
है स्वामी ! कब से तुम्हारे द्वार पर खड़ी हैं तो भी दरवाजा नहीं खुला है। स्वामी पांव पूजने दो। मुंह देखने 
दो। हम बहुत दूर से आई हैं। ) 


ये सपने विवाह पर चाक नूतने के दिन से लेकर विवाह होने तक प्रतिदिन प्रात: गाये जाते हैं। पर्यूषण के दिनों 
में तो मुख्य रूप से इनका गाना होता है। इनका गाना बैकुंठ पाना और नहीं गाना अजगर का अक्तार पाना है। इन्हें 
गाने वाली को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति, जोड़ने वाली को झूलता हुआ पुत्ररतन और रोग-शोक से मुक्ति तथा ज्ञानावरणीय 
से लेकर अन्तराय तक के आठों कर्मों से छुटकारा हो तो कौन इन्हें गाने गवाने से चूक देगा। 


सपनों ही से जुड़े गीत आदिवासी महिलाओं में भी प्रचलित हैं। इन सपनों में ऋद्धि-समृद्धि नहीं है। सोने चांदी 
और रत्नों की माया नहीं है। फलीफूली बाड़ी और खेती है जिस पर उसका पूरा परिवार आश्रित है:- 

“सूंतीने सपनु आब्यु म्हारी सैयोर 

सपना में रकमनाथ जोया म्हारी सैयोर 

रकमनाथ ने पारै तो वाड़ी म्हारी सैयोर।” 

एक अन्य गीत में ऋषभदेव को सुमिरते-सुमिरते छोटी बोर बाली बालकी जवान हो गई है - 

“कूड़ा कमारे केवड़ो केसरियालाल 

बोरियं ने परमार बणी है जुनणिमाल 

नानीक हती सेलही केसरियालाल” 


प्रात: केसरियालाल को याद करने से दिन कमाई वाला निकलता है। गृहस्थी का पेट पलता है। इस दृष्टि से केसरिया 
नाथ का स्मरण रोजी रोटी देने वाला है। प्रभाती की पंक्ति है - 


“दांहो उग्पो रे, केसरिया। ने शरणै के वाणु लो भले वाणिवा।” 





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ऋषि लालचंद, विनयचन्द, धर्मसिंह की लिखी चौजीसियां तीथ करों की जीवन लीलाओों की परिआ्यक हैं | इनमें 
राम के प्रति तुलसी का जैसा समर्पण भाव(“राम सौ बड़ो कौन है? मो्सों कौन छोटो? राम सौं खरो है कौन मौसों फ़ौम 
ऋोटो?”) देखने को मिलता हैं। उदाहरण फे लिए - - 


(अ) 


(ब) 


(स) 


प्रात: उठ चौथीस जिनन्द को सुभिरण कीजै भाव घरी । टेक ।। 


रिपश्न अजित संभव अभिनंदन सुमति सुमति दो कुमति हरी। 
पदुम सुपास अन्‍्दा प्रभु ध्यावों पुष्पदंत हव्या कर्म अरी।। 

तुम सम नहिं कोई तारक दूजो दृढ़ निश्चय मन मांही धरी। 
ब्रिलोक रिख कहै जिम तिम करीने मुक्तिश्नी यो मेहर करी।। 


श्री जिन मुझने पार उतारो प्रभु म्हैं चाकर चरणां रो | टिक।। 
रिपश्न अजित संभव अभिनंदन निरंजन निराकारी। 

सुमति पदम्‌ सुयारस चंदा प्रभु मेट्या हैं विषय विकारी।। 
अंधम उधारण परम पदारथ अजर अमर अविकारी। 

दान शील तप भावना भावो दया घर्म तत्व सारो।। 

ऋषि लालचंद इृण पर विन वे म्हारो करो निस्तारो।॥ 


ऋषभनाथ कू रंग हैं जीत्या जग जरूर।। 
भई हार दूरजण सणी काटी फौज करूर।। 
काटी फौज करूर आदि अरिहंत देव हैं। 
लागत प्रतिपल पांव जगत सहु करत सेव हैं।। 
कहै रोड़ कर जोड़ घन हैं पिता मात कूं। 
जीत्या जंग जरूर रंग हैं ऋषभनाथ कूं।। 
$.. $ के 
एक बात तो अजब तुमहारी हूँ जांणू तू घन काला। 
तेरा नाम से टूटे बेड़ियां र टूटे लोह का ताला।। 


केसरियानाथ की आंगी को लेकर उसके चमत्कार को लेकर कई गीत मिलते हैं । भेलों में दिन-रात राह चलते, 
झूलते, गाते नाचते केसरियामाथ की विरूदावली की झढ़ी लग जाती है। आदिनाथ का लोहा सबने तो माना सो माना 
' पर अंग्रेज राजा शक उसकी मनौती मानने को विवश हुआ है। आदिवासियों का एक गीत हैं जिससें डगमभाती नाव देख 
अंग्रेज राजा कालाजी फेसरियाजी को बड़े देव के रूप में याद कर के मनौती लेता है। जब उसकी नाव पार लग जाती 
है वह केसरियाजी आकर अपनी मनौती पूरता है चांदी के घोड़ें चढ़ाता है - 


.... “झूरेविया राजा। पूरव रे देसां नो है। दरिया वसोवस है। नाव तो नास करे है। भूरियो बसार करे है। कूण 
मोटे रो देव है। हाथ जोड़ी ने उबोरे । खम्मा घणी खम्मा है।। भारी मानता लेवे है। रूपां न घोड़ीला है । नाव तो 
खालवा लागी है। घूलेव आवी लागी हैं। घोड़ीला सड़ावे है।” 


राजस्थान के शिल्प और स्थापत्य में भी ऋषभदेव की प्रतिका सर्वोपरि मिलती है। यहाँ अधिकलया ऋषभदेव तथा 


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पार्श्वनाथ के मंदिर मिलेंगे। जो मंदिर ध्वस्त हो रहे हैं उनमें प्रत्येक मंदिर की विग्रह पट्टिका पर ऋषभदेव-आदिनाथ 
की प्रतिमा मिलेगी। इससे स्पष्ट है कि धार्मिक कार्यों और विशेष अनुष्ठानों पर सर्वप्रथम सर्वाधिक ऋषभदेव का स्मरण 
तथा पूजा-प्रतिष्ठान शुभ शकुन तथा निर्विध्त कल्याण रहा है। चित्तौड़गढ़ का सर्वाधिक प्राचीन स्तंश्न 'कीर्तिस्तंभ' आदिनाथ 
को ही समर्पित है। इसके वक्ष भाग में चतुर्दिक आदिनाथ की प्रतिमाओं का उत्कीर्णन प्रत्येक जन का मोह, माया, मान, 
गुमान आदि का त्याग कर आत्मोद्धार के लिए जिन शासन की ओर प्रवृत्त होने की प्रेरणा देता है। 


ऋषभदेव के मंदिरों के निर्माण और प्रतिष्ठा की कहानियां भी बड़ी दिलचस्प और लोक में शुद्धाचार की प्रतिष्ठा 
की भावना से अनुप्राणित हैं। जहां भी देखा कि निर्माणाधीन मंदिर की प्रतिष्ठा शास्त्रानुकूल नहीं हुई है, यतियों ने अपने 
मंत्रबल से उस मंदिर को ही वहां से उड़ाकर कहीं अन्यत्र जा पटका। ऐसे मंदिर या तो ध्वस्त हो गये या फिर जन विहीन 
उजाड़ रह गये। नारलाई (पाली) का यशोभद्र मंदिर, करेड़ा की बाबूड़ी मंगरी पर ध्वस्त प्राय ऋषभदेव मंदिर, गोमाता 
का जिनालय, पालोद का जिनप्रासाद तथा देलवाड़ा के एकाधिक प्रासाद यंतियों के तपोबल की ही करामात बने हुए हैं। 


जैन मत में साढ़े चौहत्तर शाह का वर्णन मिलता है उनमें आकोला (छींपों का चित्तौड़ जिला) का सूराशाह भी 
एक बड़ा वरेण्य था। उसने यति हजारी भोजक को अपना सिर काटकर दे दिया। यति ने उन्हें पुन: जीवन दान दिया 
और कहा कि यदि वह मंदिर बनावे तो मूर्ति वे ले आयेंगे। जब सूराशाह ने आकोला में जैन मंदिर बनाया तब प्रतिष्ठा 
के लिए मूर्ति यति हजारी भोजक कहीं से उड़ा लाया। यह प्रतिमा भगवान ऋषभदेव की थी। ऐसे ही भैंसडाकला (उदयपुर) 
का भींया या भैंसा शाह बड़ा नामी रही जिसकी परीक्षा से प्रभावित होकर एक यति आदिनाथ का मंदिर ही कहीं से उड़ा 
ले आया जो आंज भी वहां मौजूद है। ऐसी मान्यता है कि ऋषभदेव तथा हरण्य गमेशी देवताओं की आराधना से जैन 
यदि मंदिरों को उड़ाने की विद्या में पारंगत हो जाते थे। 


इसी आकोला के कवि मोहनलाल ने ऋषभदेव की आराधना में कई छंद स्तुतियां लिखीं। इनके लिखे पद ही पचास 
हजार के करीब इनके सुपुत्न श्रीकृष्ण 'जुगनू' के पास सुरक्षित हैं जो अद्यावधि अप्रकाशित हैं। मोहनजी ने श्रावक बारहखड़ी 
की रचना (संवत्‌ २००३) की। उसमें ऋषभनाथ के कुछ छंद वर्णित हैं। नमूने के लिए यह पंद दिया जा रहा है- 


ऋषभनाथ ही जग में केवल पद को प्राप्त हुए/उसी के कहे ज्ञान से ही कई मानव फिर मोक्ष गये/जो जन ऋषभनाथ 
के गुण को अनन्य चित्त से गाता है/मोहन श्रावक वही जन-जन से सीधा मोक्ष सीघाता है। 


मेड़ता के वीरवर कल्‍्ला राठौड़ का तो जन्म नाम ही केसरसिंह था) चितौड़ के युद्ध में इन्होंने अप्रतिम शौर्य और 
जो वीरता प्रदर्शित की वह इतिहास का अमर पन्‍ना ही बन गई। भेवाड़ महाराणा द्वारा टोकरगढ़ का परगना दिये जाने 
पर कलूलाजी प्रतिदिन ऋषभदेव के दर्शन कर केशर चढ़ाते। ये कल्‍लाजी चक़वात युद्ध के धनी थे। इसमें दोनों हाथों 


में दो-दो तलवारों द्वारा चारों ओर से दुश्मनों पर वार किया जाता। इस युद्ध के लहने वाले कल्लाजीः अकेले एकमात्र 
योद्धा हुए। ५ 


इन प्रकार यह कहा जा सकता हैं कि राजस्थानी लोकभाषा में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की स्तुति में बहुत कुछ 
लिखा गया है। जितना लिखा गया हैं उससे अधिक गाया गया है। जितना गाया गया उससे अधिक आत्मसात किया गया 


है। अपनी समग्र चेतना में यहां का लोक इस देवता को अपने हिये की आंख और आत्मा की पांख़ देता हुआ चित्र को 
चांदनी सा उजलाता रहता हैं। द 


70090 


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श्री ऋषभनाथ और उनकी मूर्ति परम्परा 


डा० रमेश चन्द्र शर्मा * 


भगवान्‌ महावीर का महान्‌ अवदान होने से वह जैन धर्म के प्रतीक बन गए हैं और जन मानस में घर्म संस्थापक 
के रुप में प्रतिष्ठित हैं। यह ऐसी ही धारणा है जैसे श्रीराम व श्री कृष्ण हिन्दू या सनातन धर्म के आदि पुरुष अथवा प्रवर्तक 
, न होते हुए भी लोक में हिन्दू संस्कृति के सर्वमान्य प्रतीक के रुप में प्रतिष्ठित हैं। भगवान्‌ महावीर की स्थिति पांचवी 
शत्ती ई० पू० में मानी जाती है किन्तु उनके पूर्ववर्ती पार्श्ननाथ जो आठवीं शती ई० पू० में थे, को भी ऐतिहासिक महापुरुष 
स्वीकार किया गया है और अधिकांशत: उनके ही सिद्धान्तों को वर्धमान महावीर ने भी प्रचारित किया। अहिंसा, सत्य, 
अस्तेय, और अनासक्ति इन चार महत्त्वपूर्ण सूत्रों को आधार मान कर पार्श्वनाथ जी मे धर्म का प्रचार किया। महावीर 
जी ने इनमें ब्रहमचर्य अथवा संयम और जोड़ दिया। दूसरी और साहित्यिक सन्दर्भ यह भी प्रमाणित करते हैं कि धर्म 
प्रवर्तन पार्श्वनाथ से भी पहले हो चुका था और इसका मूल श्रेय श्री ऋषभनाथ को है जिन्हें आदिनाथ या प्रथम जिन 
अथवा तीर्थंकर माना गया। इसका उल्लेख न केवल जैन साहित्य करता है अपितु जैनेतर साहित्य से भी इसकी पुष्टि होती 
है। भागवत में उनका स्मरण इस प्रकार किया गया है: 


नित्यानुभूत निज लाभ निवृत्त सृष्ण: 
श्रेयस्थ तद्रचनयाचिर सुप्त बुछ्धे:। 
'लोकस्य यः: करुणयाभयामात्मलोक 
माख्यान्नयों भगवते ऋषभाय तस्मै।। भा० 5.6.49 


ऋषभनाथ ने अपने पुत्रों को जो उपदेश दिया उसे भी भागवतकार ने जिस प्रकार उद्धत किया है उसमें जैन 
धर्म की नीतियां समाहित हो गई हैं। इसमें दैहिक सुख से ऊपर उठकर तपस्या द्वारा चिरन्तन सुख की प्राप्ति को वरेण्य 
बताया है। कर्मकाण्ड की निन्‍दा की गई है। हृदय की ग्रन्थि को निर्मूल करने से ही संसार बन्धन से मुक्ति मानी है और 
सभी प्राणियों को आत्मवत्‌ मांनने पर बल दिया है। 


यहां यह उल्लेखनीय है कि भगवान्‌ महावीर के निर्वाण के शताब्दियों पश्चात्‌ लिखे साहित्य में अतिशय ख्याति 
अर्जित करने पर भी प्रवर्तक के रुप में वर्धमान जी को नहीं अपितु ऋषभनाथ जी को ही स्वीकार किया गया । साथ ही 
जब सामंजस्थ और समभाव की लहर दौड़ी तो भी हिन्दू धर्म के अवतार के रुप में ऋषभदेव ही प्रतिष्ठित हुए । इससे 
भी सिद्ध होता है कि ऋषभनाथ महावीर जी से पूर्बवर्ती तो थे ही अपितु धर्म संस्थापक के रूप में दिव्यत्व प्राप्त कर चुके 
थे। 


लौकिक साहित्य के अतिरिक्त वैदिक साहित्य में भी ऋषभ या वृषभ का वर्णन एक राजा की भांति हुआ है जो 
. प्रजा को सम्पन्न रखता है 


- # महानिदेशक, राष्ट्रीय संग्रहालय, ॥॥, जनपथ, नई दिल्‍ली-00॥॥ 


02204 2000020222 27722 
आचर्षणिप्रा वृषभो जनानां राजा कुष्टीनां युद्हूत इन्द्र:। ह 
स्तुत: श्रवस्यन्नव सोममद्रिग्‌ युक्तव: हरी वृषण याहयवाड।॥ ऋ० -23-477 
त्वं रथं प्रभरो योधमृष्वभावों युध्यन्तं वृषभ दशब्युम । 
. त्वं तुग्रं वेतसवे व चाहन्त्व॑ तुजि गुणन्तभिद्र तूतो:।॥ ऋ० 4.8.26.4 
विष्णु पुराण के अनुसार नाभि और मेरु देवी के पुत्र के रुप में ऋषभ का जन्म हुआ। उनके सौ पुत्र थे जिनमें 
वीर भरत को राज्य सौंप कर उन्होंने वन में जाकर कठोर तप किया।. (वि७ पु७ 2..27-32) 
भागवत में स्पष्ट किया है कि सुन्दर कान्तिमान शरीर एवं ऐश्वर्य, बल पराक़म आदि गुणों से सम्पन्न होने के कारण नाभि 
ने अपने पुत्र का नाम ऋषभ अर्थात्‌ श्रेष्ठ रखा । _भा० 5.3.20 तथा 4.2 
वायु पुराण के अनुसार ऋषभ के पुत्र भरत के नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा:- 





नाभिस्त्वजनयत्‌ पुत्र भेरु देव्यां महाद्युति:। 

ऋषभे पार्थिव श्रेष्ठ सर्वक्षत्रस्य पूर्वजम्‌ । | 

ऋषभा द्‌ भरतो जज्ने वीर: पुत्र शताग्रज:। 

सोछभिषिचयाथ भरत: पुत्र प्राव्राज्यमास्थित:।। 

हिमाहव॑ दक्षिण वर्ष भरताय न्यवेदयत्‌। 

तस्मात्तद भारतं वर्ष तस्य नाम्ना विधुर्वुधा:। वायु पुराण 3.5052 


इसी की पुष्टि नूसिंह पुराण में हुई है: 
“ऋषभादुभरतो भरतेन चिरकालं धर्मेण पालितत्वादिदं भारलं वर्षमभूत्‌ नूसिंह पुराण 30.7 


इन साहित्यिक सन्दर्भो से यह स्पष्ट है कि जैनेतर अनुश्वुतियां भी ऋषभनाथ जी को एक प्रमुख धर्म प्रवर्तक, महा 
पुरुष अथवा दिव्य पुरुष के रुप में स्वीकार करती हैं । वैदिक साहित्य के उद्धरणों से प्रतिपादित होता है कि मानव सभ्यता 
के आदि युग में ही वह सुप्रसिद्ध थे। जैन मान्यताओं के अनुसार काल चक़ को अति सुख, सुख, सुखदुःख, दुःख सुर, 
दुःख और अति दुःख इन छ भागों में विभकत किया है। इन्हें चक़ के आरे या त्तीलियां माना जाना चाहिए। काल चक्र 
के चलने पर इनकी यथा समय आवृत्ति होती रहती है। सुख से दुःख की ओर जाना अवसर्पिणी या अवनति काल माना 
जाता है और दुःख से सुख की ओर जाने को उत्सर्पिणी या उन्नति काल कहते हैं। इन दोनों अवसर्पिणियों में करोड़ों 
वर्षो का अन्तर है और प्रत्येक अवसर्पिणी एवं उत्सर्पिणी काल के दुःख सुख्र रूप' भाग में चौबीस तीर्थकरों का जन्म होता 
है। वर्तमान में अवसर्पिणी काल के चार भाग बीत चुके हैं और पांचवां भाग चल रहा है। अब करोड़ों वर्षों तक किसी 
तीर्थकर का जन्म नहीं होगा क्योंकि तीर्थंकर केबल चौथे भाग अर्थात्‌ दुःख सुख रूप में ही प्रकट होता है। ऋषभनाथ 


इस अव-सर्पिणी काल के तीसरे, भाग के अन्त में हुए और अब उस काल का पांचवां भाग है। इसकी काल गणना असम्भव 
है और इसे करोड़ों वर्षो में गिनना होगा। 


हिन्दू धर्म ग्रन्थों में ऋषभनाथ को मानव जाति के आरम्भ कर्ता मनु और सतरूपा से पांचवी पीढ़ी में माना जाता 
है। तदनुसार वह प्रथम सत्तयुग के अन्त में उत्पन्न हुए। तब से अब तक अट्ठाईस सतयुग हो चुके हैं। इस प्रकार जैन. 
व हिन्दू दोनों का विश्वास है कि ऋषभनाथ जी का प्रादुर्भाव काल कल्पनातीत अतीत की गाया है। जैन परम्परा में ऋष 
के पूर्व चौदह मनु हुए जिन्होंने मानव जाति के कल्याण के निमित्त विभिन्‍न युग में मार्ग प्रशस्त किया चौदहवें मनु नाभिराय 


. मे बच्चों का जाल कंटवाने की प्रथा चलाई जिसके फलेस्वरूप उनका नाम नाभि पहा। इन्हीं की पी भक्त देवी से 


न 


कह 


“जाता है और वित्तीय शंती ई० पू० के उहीसा में सण्डगिरि की 


22088 07: ५०४८४२८२९४ 84% (2४ 22002: 27222 
२५280 220000000000000000 7 %0000000020000000000000 72222: , 


! 





ऋतणभनाथ का जन्म हुआ। ऋषभदेव ने नगर नियोजन, लोकिक व॑ व्यावहारिक ज्ञान की शिक्षा दी तथा कृषि कर्म की. , ः 


' स्थापना की । वास्तव में उन्होंने जिन प्रमुख कार्यो का शुभारम्भ किया उन्हें बट्कर्म कहते हैं, वे हैं - कृषि, असि, मधि, 


शिल्प, वाणिज्य और विद्या। प्रजा पालन के इन महत्वपूर्ण कार्यों की स्थापना के कारण ऋषभदेव को प्रजापति या ब्रह्मा . 
भी कहते हैं। इनकी पत्नी सुनन्‍्दा और नन्‍्दा से सौ युत्र उत्पन्न हुए जिनमें ज्येष्ठ भरत थे। राज सभा में नृत्यांगना मौलांजना '._ 
की भृत्यु से उन्हें वैराग्य हुआ और तपस्या के लिए वनवास स्वीकार कर कैदल्य ज्ञान लाभ किया। ह 


आदि जिन होने के फलस्वरूप अन्य सभी चौबीस तीर्थकरों में श्री ऋषभनाथ का स्थान अग्रणी है अत्त: यह स्वाभाविक: 
था कि जब भूर्ति पूजा का थी भणेश हुआ तो आदिनाथ को ही प्रमुखता दी गई। वैसे जैन धर्म में प्रतिमा पूजन उतना . 
ही प्राचीन माना जाता है जितसा कि स्वयं जैन धर्म अथवा मालव सभ्यता का आरम्भ तथापि इस कथन को पुंष्ट करने 
के लिए पुरावशेषों का अभाव है। । 


सिन्धु संस्कृति में हड़प्पा से प्राप्त लाल पत्थर के छोटे नग्न घड़ को कुछ विद्धानों ने जिन मूर्ति माना है (चित्र . 

०-१) । यदि इस मत को मान्यता दी जाए तो अब से लगभग चार पांच हजार वर्ष पहले की मूर्ति वर्धमांन महावीर 
था पार्वनाथ जी की. लो हो नहीं सकती । नेमिलाथ जो भहाभारत कालीन थे, की इतनी प्रतिद्धि नहीं हुई होगी कि 
सिन्धु संस्कृति में उनकी मूर्ति की आवश्यकता की अनुभूति हुई हो। अन्य बीस तीर्थकर स्वयं जैन शास्त्रों में विशेषकर 
कल्प सूत्र में केवल नाम मात्र से जाने जाते है। अत: उनमें से किसी की मूर्ति का निर्माण अकल्पनीय है। इस स्थिति . . 
में उक्त पुरुष धड़ को मात्र ऋषभनाथ जी की ही भूर्ति माना चित्र सं०-१ सौजन्य: राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्‍्ली। 
जा सकता है। यहां यह उल्लेखनीय है उस संमय तीर्थकरों के 
परिचय चिन्हों का आरम्भ नहीं हुआ था अतः सन्दर्भित मूर्ति 
को निर्विवाद रूप से तो नहीं अपितु अनुमान से आदिनाथं मान 
लेने में फोई आपत्ति नहीं प्रतीत होती । कलएतमक द्रष्टि से यह 
बड़ी विलक्षण कृति है। इसमें अनेक परवर्ती फलाशैलियों का 
पूर्वाभांस झलकता है) मस्तक, बहें और टागे न होने पर भी 
सन्धि के रेखा चिन्ह इंगित करते हैं कि ये जवक्षव अलग से बनाकर 
लगाए गए श्रे। शरीर यष्टि का आरोह अवरोह जहां यूनानी कला 
के निकट है वहीं पेट का तुन्दिल रुप कुषाण अथवा कुछ पूर्ववर्ती 
यक्ष मूर्तियों का स्मरण दिलाता हैं। कुछ खिंचा शरीर प्राणायाम 
प्रक्रिया का संकेत करता है जिसे भारतीय कलाकार ही भूर्तरूप 
दे सकता था। कुल मिलाकर यह अदुधूल मूर्ति रहस्य की अनेक 
पते समेटे हुए है। कुछ लोग इसे यक्ष प्रतिमा स्वीकार करते है। 
' - हड़प्पा संस्कृति के पश्चात जिन मूर्ति सम्बन्धी पुरावशेषों 
का लगभंग दो सहत्ाब्दियों से अधिक का तम्यां अन्तराल बीत 





गुफा में हाथी मुम्फा अभिलेख से यह रहस्योद्याटिस होता है. . 





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कि कलिंगाधिपति खारवेल ने अपने शासन 
के रूप में उस जिन प्रतिमा को हस्तगत कर लिया जिसे नन्‍द राजा कलिंग से मगध ले गया था। अर्थात्‌ चौथी शत्ती ई० 
पू० में यह जिन मूर्ति कलिंग में स्थापित थी तो अवश्य ही इसका निर्माण पहले हुआ होगा । 


मान्यता है कि पटना के समीप लोहानी पुर से प्राप्त नग्न युरुष घड़ जिस पर मौर्यकालीन पालिश है वही जिन 
मूर्ति है जिसका उल्लेख ख्वारबेल के अभिलेख में है (चित्र सं०-२)। यहां कुछ तथ्य विचारणीय है। पहली बात तो यह 
है कि यह मूर्ति मूल रूप से कहां प्रतिष्ठित थीं, कहां चित्र सं-२ सौजन्य: भारतीय शानपीठ, नई दिल्ली 
स्थानास्तरित हुई, पुनः बिहार कैसे पहुंची आदि रहस्य. बने हुए 
है। दूसरा बिन्दु यह है कि इस प्रकार की पॉलिश अशोक से 
पहले प्रचलित नहीं थी और न पूर्ववर्ती प्रस्तर मूर्तियों के निर्माण 
की परम्परा के उदाहरण मिले हैं। अत: सन्दर्भित जिन प्रतिमा 
को नन्‍्द राज का समकालीन मानने का औचित्य नहीं प्रतीत 
होता। 


इसे किस जिन की प्रतिमा माना जाए यह भी एक 
गुत्यी बनी है। अवश्य ही यह जिस निर्माण काल का 
प्रतिनिधित्व करती है उस समय त्तीर्थकरों के परिचय चिन्ह 
प्रचलित नहीं हुए थे। इसमें भी सन्देह है कि चौबीस तीर्थकरों 
की मान्यता उस समय तक प्रतिष्ठित हुई होगी । तथापित 
जैसा कि पहले स्पष्ट किया गया है ईसा से कोई शताब्दियों 
पूर्व ऋषभनाथ को पर्याप्त लोक प्रतिष्ठा मिल चुकी थी । 
अत: प्रतिमा को आदिनाथ की मूर्ति भी माना जा सकता है। 
खारवेल के अभिलेख में जिस प्रतिमा का उल्लेख है उसे कलिंग 
जिन कहा गया है:- 





द्वाइशे च वर्ष->----------- सहस्त्रै: वित्रासयति उत्तरापथ राजानु-------- 
मागधनां च विपुलं भय जनयन्‌ दुस्त्यश्बं कलिंग जिन, 
सन्निवेश----०--- अंग मगध बसुं व नयतति। 


अब यह विचारणीय हो जाता है कि क़लिंग में उस समय किस तीर्थंकर की मान्यता थी। इस पर विद्वानों ने भिन्‍म 
मत व्यक्त किए हैं। अवश्य ही यह जिन जनमानस में और राजकुल में इतनी प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुके थे कि वह एक क्षेत्र 
विशेष अथवा उस समय की पारिभाषिक भाषा में देश विशेष के इष्ट देवता के रुप में प्रतिष्ठित व पूज्य हुए और कई 
शतताब्दियों तक यह मान्यता स्थिर रही। ऐसा प्रतीत होता है कि यह महावीर जी से पृथक्‌ जिन रहे होंगे क्योंकि सहाबीर 
जो बिहार में उत्पन्न हुए, को नन्द राज या ख्वारवेल के समय कलिंग जिन के रूप में प्रतिष्ठित करने का औचित्म नहीं . - 
प्रतीत होता । यही बात सेमिनाथ व पार्श्वनाथ में कहीं जा सकती हैं। दूसरी ओर ऋषभनाथ जी को सार्वदेशिक प्रतिष्ठा. 


“'अक्षक दा. पाप्किन शक बे >कमशक | हिला बता न | 


हल 
| 


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हे | 
०१० पड ७ क ९१०१०१५ ४१९०९,२ १३१३, ००,३,०,कए०,० ११:0० १०,ज १०,०१०, ००१० :% ४, 


महावीर जी से पूर्व ही मिल चुकी थी। अत: खारवेल,फ़े लेख में कलिंग जिन का अभिप्राय ऋषधनाथ से लिया जा सकता - 
हैं। । ' 





हड़प्पा और लोहानी पुर की इन कुछ अनिश्चित और संदिग्ध मूर्तियों के पश्चात्‌ जैन मूर्तिकला का प्रभात मधुरा . 
में उदित होता है। इनका शुभारम्भ प्रथम शत्ती ई० पू० में बने आयाग पटों से होता है जिनमें अधिकांशत: बहुत से शोशभा 
चिन्ह उत्कीर्ण रहते हैं। कुछ में तीर्भकर की छोटी आकृति है जिनमें परिचय चिन्ह न होने से पहचान संभव नहीं, हां 
पार्श्यनाथ को सर्पकर्णों से आच्छादन की परम्परा चिरकाल से चली आ रही है और एक आयाग पट में भी इसका अंकन - 
है। शेष तीर्थकरों को नामोल्लेख से ही जाना जा सकता है। है 


आयाग पटों के कुछ समय पश्चात्‌ ही जिनों की स्वतन्त्र मूर्तियों का निर्माण मथुरा में आरंभ हुआ और शीघ्र ही 
प्रथम तीर्थकर ऋषभनाथ को कंघे पर लटकती जटठाओं के साथ प्रदर्शित किया जाने लगा। मथुरा में इनकी मूर्तियां तीन 
मुद्राओं में मिलती हैं। पहली घद्मासन में ध्यानस्थ, दूसरी तपस्यारत खड़ी जिसे कायोत्सर्ग कहते हैं, तीसरी सर्वतोभद्र अथवा 
चौमुखी जिसमें चौकोर स्तम्भ पर चार जिन प्रतिमाएं चांर दिशाओं की ओर देखती बनी रहती हैं। ये प्राय: खड़ी हैं और 
नीचे ब्राहमी लिपि में अभिलेख होता है। इन चार जिनों में ऋष्भनाथ को कंधे को छूते केश से और पाश्वनाथ को 
सर्पछत्र से पहचानते हैं। अन्य दो का परिचय संभव नहीं। वैसे मूर्ति अभिलेख व जैन साहित्य के अध्ययन से यह तथ्य 


प्रफट होता है कि मथुरा में ऋषभनाथ, पार्एउ्व/सुपार्ण्यनाथ, नेमिनाथ तथा वर्धमान महावीर की पूजा प्रचलित थी। 
चित्र न० ३ सौजन्यः राज्य सयहालय, लखनऊ 





उक्त तीन प्रकार की मूर्तियों के अतिरिक्त मथुरा से हीं एक प्रस्तर पट मिला है जो ड्वित्तीय-प्रथम शत्ती ई०७पघू० 
का हैं।. इस पर ऋषभनात्र के वैराग्य का अंकन. माना जाता है (चित्र सं०-३)। एक नर्तेकी राजसभा में नृत्य कर रही 
है, वादक वाश्रयंत्र बजा रहे हैं। साथ ही नग्त व्यक्ति वैयग्य भाव से चल रहा है। कहते हैं कि राज नर्तकी नीलांजना 
एक बार ऋषभनाथ की राज. सभा में ही नृत्य करते हुए ही संज्ञाशून्य हो गई। जैन साहित्य में मीलांजना को अप्सरा 
भी जताया गया है। उसकी पीड़ा व छटफ्टाहट को देखकर ऋषभनाथ के चित्स स्थित वैराग्य का संचरण हो -गया और 
चह राजपाट छोड़कर तपस्या के लिए वन में चले गए। तीर्थकरों की जीवन लीला से संबंधित घटनाओं का अंकन बहुत 





जिस प्रकार मथुरा का अन्य देव अथवा महापुरूषों की प्रतिमाओं के निर्माण में विशिष्ट योगदान रहा है इसी प्रकार 
आरण्भिक जैन मूर्तियों की यात्ती भी मथुरा ने ही भारत को सौंपी है। इस दृष्टि से प्रतिमा विज्ञान, लक्षण विधान एवं 
सौन्दर्य बोध की मान्यताएं भी प्रतिष्ठापित हुई हैं। मथुरा कलाशैली में चित्तीदार लाल अधवा भूरे पत्थर का प्रयोग जैन 
मूर्तियों के लिए भी हुआ। जिन मूर्तियों के वक्ष को श्रीवत्स चिन्ह से लांछित करना यहां फी विशिष्ट परम्परा है जिसे 
कई अन्य क्षेत्रों में अपनाया गया किन्तु पूर्वी तथा दक्षिणी भारत में मूर्तियां प्राय: बिना श्रीवत्स चिन्ह के बनी। 
ऋषभनाथ की मूर्तियां भी इसी तथ्य को प्रमाणित करती हैं। मथुरा में जिन मूर्तियों की चरण चौकी पर अधिकांशत: लेख 
मिलता है जिसमें संवत्‌ और जैन संगठन तथा समाज का उपयोगी विवरण मिलता है। 


चित्र सं०-४ सौजन्य: राष्ट्रीय संग्रहालय, नाई दिल्‍्ती 
गुप्त काल में शास्त्रीय लक्षणों के आधार पर जिन अं 


प्रतिमाओं का निर्माण हुआ अथवा प्रचलित मूर्ति परम्परा के 
अनुसार प्रतिमा लक्षण बने यह कहना कठिन है। किन्तु ऐसा 
प्रतीत होता है कि वृहत्संहिता तथा आदिनाथ की मधुरा से 
प्रसिद्ध मूर्ति लगभग समकालीन है तदनुसार 


आजानुलम्ब बाहु: श्रीवत्सांक: प्रशान्त मूर्तिश्च। 
दिग्वासास्तरूणो रूपवांश्च कार्योहतां देव: । 58/45 


समुद्र व सागर द्वारा स्थापित गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि 
में अभिलिखित मूर्ति जो मथुरा संग्रहालय में प्रदर्शित है इसलिए. 
अप्रतिम महत्व की है कि इसमें 'ऋषभस्य प्रतिमा” भी लिखा 
है (चित्र सं०-४)।| इससे ऋषभनाथ की मूर्तियों को पहचानने 
में कालान्तर में बड़ी सरलता हुई। कंधों पर लटकती जटा 
मानक चिन्ह बन गई। 


मथुरा की जैन और विशेष रूप से ऋषभ प्रतिभाओं 
की समीक्षा करते हुए कंकाली से प्राप्त और अब राज्य संग्रहालय 
लखनऊ में प्रदर्शित एक वृषारोही की मूर्ति का उल्लेख 
आवश्यक है जो शुंग काल की है। संभव है यह स्वतंत्र मूर्तियों 
के निर्माण के पूर्व ध्वज मूर्ति के रूप में प्रतिष्ठापित की गई 
हो जिसका अधभिप्राय ऋषभ से हो। 








जी की भी कुछ मूर्तियां हैं। इनका संमथ लगभग ज़ौथी शती चित्र सं>-५ सौजन्य: अमेरिकन इंस्टीट्यूट आफ 


ई० आंकां गया है, इनमें कायोस्सर्ग (चित्र सं>-५) और ध्यानत्थ घन स्टटीज, चांराणसी 


[चित्र स्ं०-६) दोनों प्रकार की मूर्तियां हैं। इसी प्रकार गुजरात 
में अकोटा से मिली धातु मूर्तियां भी उल्लेखनीय हैं । गर्थी शती 
के अन्त फी एक चोदीसी मूंति में ऋषभनाथ क्रो बीच में धोत्ती - 
पहने दिखाया है जो श्वेताम्बर जैन परंपरा. का अनुसरण है (चित्र 
सं०-७)। 


गुप्तोत्तर काल में अन्य जिनों के स्राथ ऋषभनाष के 
प्रत्तिमा लक्षण पूर्णतया सुलिश्चित हो गए और पहचानने की 
कठिनाई का समाधान ढूंढ लिया गया। मध्यकाल में मूर्तियां यहु 
आयामी हो गई। उनके साथ पार्श्यचर वा शासन देवता भी अंकित 
होने लगे। त्दनुसार ऋषभ चिन्ह ृष अथवा बैल निश्चित हुआ, 
गोमुख उनके यंक्ष बने और शासन देवी का स्थान चक्रेश्वरी ने 


ग्रहण किया। 


मध्य युग अर्थात्‌ नवीं शत्ती ई० से प्राय: सभी जिन मूर्तियां 
लक्षण उृत्ति का अनुसरण करती हैं, हा क्षेत्रीय भेद स्पष्ट हैं। 


चित्र सं०-६ लौजम्य: अमेरिकन इंस्टीट्यूट आफ इंतिह्वन 
स्ट्हीज, चाराणसी 








जैसे कहीं श्रीवत्स चिन्ह है व कहीं नहीं। कहीं वह दिगम्वर' 
हैं और कभी-कभी वस्त्र के साथ भी प्रदर्शित किए हैं। जैसे . 
चोपड़ा खान देश से मिली कांस्य प्रतिमा जी लगभग आठवी - 
शली की है और प्रिंस आफ वैल्स संग्रहालय, बम्बई में सुरकित 
है, में ऋषभनाथ को घोती पहने दिखाया है। 


मध्य युग में चिन्द ज्र शासन देवताओं के साथ अस्थ - 
आकृतियां जैसे गण धर, चंबर धारी, उपासक च॑ कभी-कभी . 
दानकर्त्ता की आकृतियों को श्री प्रधांन मूर्ति के साथ बनाया... 
गद्या। ऊपर प्रभा एवं माला धारी गन्धर्व भी अंकित हुए | .. 
साथी ही देव दुन्दुभ्ति वादक की प्रस्तुति भी आवश्यक हों गई 
ऋषभनाथ की कुछ सूर्तियों की यारव पट्टी गज; सिंह; शाईल. . 
आदि से अलंकूत की गई। अंकित तथा उत्कीर्णे मानकों को . 
अष्ट प्रतिहायों के रूप में मान्यता दी. गई ः 


अशोक कक: सुरवुध्प यृष्टि' दिव्य ध्यनिश्यामंरभांसन व ५ 
भा मण्डल दुन्दुभिरातपत्र सतमाति हार्याणि जिनेश्वराजाम्‌ 4... 












ब क, 22922 ४४५ 


इनके प्रदर्शन से मुख्य 
अभिव्यक्त की जो मध्य युगीन मूर्ति तक्षण की प्रधान विशेषता 
है। खजुराहो से मिली लगभग 0 वीं शती की मूर्ति (चित्र 
सं०-८) कलात्मक दृष्टि से सराहनीय है। 


अन्य जियों के साथ भी ऋषभनाथ का अंकन हुआ। 
यदि वह चौबीस तीर्थकरों सहित हैं त्तो उसका नाम चौबीसी 
पड़ा | यदि तीन जिन हैं तो उसे त्रिती्थी पांच होने पर पंचतीर्थी 
कहा जाता है। यह परम्परा कुषाण युग से उत्तर मध्य काल 
तक चलती रही। इसके साथ सर्वतोभद्र अथवा चौमुखी 
प्रतिमाओं में ऋषभदेव का प्रदेर्शन सभी युगों में लोकप्रिय 
रहा। जधघीना (भरतपुर, राजस्थान) से मिली ऐसी मूर्ति में 
इष्टदेव दण्ड मुद्रा में हैं (चित्र सं०-९)। 


क्षेत्रीय दृष्टि से ऋषभ नाथ की प्रतिमाएं प्रायः समस्त 


चित्र सं०-८ सौजन्य: अमेरिकन इंस्टीट्यूट आफ इण्डियन 
स्ट्डीज, बाराणसी 












/०९०९७१०१० ९०१५१: 


चित्र सं०-७ सौजन्य: अमेरिकन इंस्टीट्यूट आफ 
स्टडीज, वाराणसी 








भारत से ही मिली हैं तथापि गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, 
आन्ध्र प्रदेश, राजस्थान, उत्त्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश प्रमुख हैं। 
बिहार, बंगाल व उड़ीसा से भी कुछ मूर्तियां मिली हैं। 


पूर्ववर्ती प्रतिमाएं अधिकतर पाषाण की हैं | गुप्त काल 
से धातु प्रतिमाएं बनने लगीं और भश्य काल में भक्ति व निज 
सेवा के प्रचलन से छोटी धातु मूर्तियां बहुल संख्या में बनी। 
बहुत सी मूर्तियों पर संवत्‌ आदि भी उत्कीर्ण रहते हैं जिनसे 
उनका ऐतिहासिक और कलागत महत्व बढ़ जाता है। राष्ट्रीय 
संग्रहालय नई दिल्ली में सुरक्षित पश्चिमी भारत की एक कांस्य 
मूर्ति में ।599 संवत्‌ है जो 54। ई० निर्धारित होता है (चित्र 


सं०-१०)। ह 
भारत के तो प्राय: संभी प्रमुख संग्रहालयों प्ें 
ऋषभनाथ की मूर्तियां सुरक्षित हैं। कुछ वोधियों सुरक्षा 





जित्र सं०-९ सौजन्य: अमेंरिकंस इंस्टीट्यूट आफ डरपिडियमक 
स्टूडीज, वाराणसी 





संग्रहों व पुरास्थलों पर भी दुष्टव्य हैं। साथ ही विदेशी संग्रहालयों में भी इनका प्रतिनिधित्व है। इस दृष्टि से बंगलादेश, 
फांस, इलैण्ड, डेनमार्क, जर्मनी व अमेरिका के संग्रहालय उल्लेखनीय हैं। अकेले ब्रिटिश म्यूज़ियम में ऋषभनाथ की अनेक 
प्रस्तर व धातु मूर्तियां हैं। स्व० डॉ० ब्जेन्द्र नाथ शर्मा ने भारत तथा विदेश के संग्रहालयों में सुरक्षित जैन मूर्तियों का 
परिचय अपनी एक पुस्तक में दिया था। यह बहुत महत्वपूर्ण सर्वेक्षण था जो 4979 में प्रकाशित हुआ। त्तब से सामग्री 
भें और अधिक वृद्धि हुई है और प्रामाणिक अभिलेसों के आधार पर अद्यतन सामग्री अपेक्षित है। 


बिन बआ। 





डा० गोकुल प्रसाद जैन * 


जैन धर्म की प्रभावना शाश्वत परम्परा से रही है। जैन धर्म आध्यात्मिक और नैतिक जीबन की एक विषिष्ट पद्धति 
है जो उसे वैदिक जीवन की पद्धति से यथक्‌ सिख करती है। इन भिन्‍त-भिन्‍न जीवन-पद्धतियों की परम्परा युग-युगान्तरों, . 
कल्पों और मन्वन्तरों से अली आ रही है और उनका विवरण हमें वेदों में संकेत रूप से तथा उनका उपंवृह्वण करने वाले 
पुराणों में विस्तार से प्राप्त होता है। 5 जे 


बैदिक परम्परा का आदर्श पुरुष ऋषि, सथा जैन धर्म के नियमों, आधार और सिद्धान्तों का आदर्श रीति से पालन 
करने वाला मुनि व्यवहार में पर्यायवाची-से बन गये हैं, किन्तु वस्तुत: भुनि मननशीलता, आश्यन्तर प्रवृत्ति और 
निवृत्ति-परायणता का बाचक है और ऋषि प्रवृत्ति-परायणता का। अत: ऋषियों से मुनि परम्परा भिन्‍न है। भुनि गृहस्थ 
नहीं होता और न उसमें ऋषियों की भांति यज्ञ-प्रयुत्तियां होती हैं। 


वाल्मीकि रामायण' (अयोध्या काण्ड-१०९/३६) के अनुसार, धर्मानुरामी, तेजस्वी, त्यागी, अहिंसक और मल रहित 
होना मुनियों की प्रघानता है। महाभारत में इन्हें मधु, मांस और मय त्यागी बताया गया है। मीता में मुनि को वीतरागी, 
वायु पुराण' (१६/३), स्कंद पुराण* (२/५/५१९) और भागवत पुराण (७/१५/७) आदि में मुनिचर्या, उनके मु्णों आदि 
पर प्रकाश डाला गया है। 


दुखेष्वनुद्विग्नमन: सुखेषु विगत-स्पुष्: । 
कीतराग-भय-कोध्ष: स्थितधीर्मुनि्च्यते” ।। 
->भगवत्‌ गीता-२/५६ 


वायु. पुराण' (१६/३), स्कंद पुराण” (२/५/५१९) और भागवत पुराण" (७/१५/७) आदि में मुनिर्र्या 
मुणों आदि पर प्रकाश डाला गया हैं । ) मुनिचर्या, उनके 


पौराणिक परम्परानुसार, सनन्दन आदि मुनि वाराह कल्प के आदि में ऋषियों उत्पत्ति 
है दै तथा अर्धनारी रूद्र की 
पूर्व ही विद्यमान ये। शैव सम्प्रदाय के लिंग पुराण में सृष्टि की उत्पत्ति सम्बन्धी विवरण में, उन सनन्‍्दन आदि कप 


की उत्पत्ति शैव सम्प्रदाय में शिव से ही मानी गई है तथा ये मुनि “ 
ही अटठासी सहस्त्र थी मुनि यति भी कहलाते थे। उनकी संख्या आरंभ काल हें 


श्रमण मुनि परम्पता और ऋषि-मुनि समन्वय 








कहकर उनकी उृत्तियों का विवरण भी दिया गग्ा है। अंत: स्पष्ट है कि ऋग्वेद की रचना के समय दिमम्बर झुनि परभ्यरा 
... विश्वमान थी और वे देवतुल्य माने जाते थे। उत्सरकालीन वैदिक परम्परा में वातरशमा मुनि पूर्ववत्‌ सम्मान पते हुए. 
' ऊंध्वरेता [ब्रह्मचारी) और अ्रमण नामों से अभिहित होने लगे थे, बथा:- । 





वातरशना हवा ऋषय॑: श्रमणा: उर्घधमंथिनों बभूवु:"।। 
- तैत्तिरीव आरण्यक - १/२६/७ 


मुनियों की भ्रमण संज्ञा इतनी लोक प्रचलित हुई कि आगे के समस्त वैदिक, जैन और बौद्ध साहित्य में प्रायः 
भुनियों का श्रमण, और उनकी तपस्या और अन्य साधनाओं का श्रामण्य नामों से ही उल्लेख पाया जाता है। ... 


तैत्तिरीय आरण्यक तक व्यवहार में ऋषि-मुनि परस्पर पर्यायवाची होने लगे थे। ऊर्ध्वरेता वातरंशना श्रमण मुनियों 
का ऋषि के रूप में और गृहस्थाश्रमी चेदमंत्र ऋषियों का मुनि के रूप में उल्लेख मिलता है। वस्तुत: समन्वब-बुद्धि के 
परिणामस्वरूप मुनि-वृत्तियों को अंगीकार कर वैदिक सम्प्रदाय में ब्रह्मचर्य, गुहस्थ, वानप्रस्थ और सन्‍्यास इन चार आश्रमों 
की व्यवस्था स्थापित की गई और इस प्रकार, ऋषियों और मुनियों में एकत्व स्थापित हुआ और वे परस्पर पर्याय बन गये। ., 


केशी-रुद्र समन्वय 


वातरशना मुनियों की परम्परा वेदों से लगाकर पुराणों के रचनाकाल तक प्रबलता से चलती रही। केशी (ऋषभ) 
वातरशना मुनियों के अधिनायक थे। रुद्र ने उनके साथ एक पात्र में प्रतीकरपेण जलपान किया। फलत: रूद्व के स्वभाव 
में शीतलता, दया और जीवरक्षण की प्रवृत्तियां भी आ गई और वे जलाष और जलाष-भेषज की उपाधियों से विभूषित 
हुए। यही रुद्र का नया रूप है जो शिवशंकर और पशुपति नामों से प्रकट होता है। इन्हीं नामों से रु द्न्‍र विशेष पूज्य और 
आधाषनीय सिद्ध हुए। 


डा० सुनीति कुमार चा्टुर्जा के मत से, रद्र अनार्य (तमिल) देव हैं। तमिल में इन्हें “चिवन्‌” (लाल) और “चम्पु” 

कहा गया। आयों ने इसका उच्चारण “शिव” और “शम्भु” किया। वैदिक परम्परा के अनुसार, उन्हें स्थान, पत्सियां और 

पुत्र देकर वैदिक कुल में मिलाने का प्रयत्न हुआ। किन्तु इस नये देव को सभी वैदिक ऋषियों ने स्वीकार नहीं किया । 

दक्ष द्वारा शिव को यज्ञ में न बुलाने से अपमानित शिव-पत्नी सती का स्वयं को अग्निकुण्ड में भस्म कर देना इसी तध्य 
को प्रभाणित करने वाला पौराणिक प्रसंग है। । 


शिव पूजा, वैदिक यज्ञ और ऋषभ पूजा 


'शिवपूजा द्रविड्ध काल से आज तक सर्वथा अहिंसात्मक है जिसमें शिघर को पत्र, पुष्ष, फल और जल आदि पदार्थ 
: निवेदित किए जाते हैं। चैदिक विधि तो देवों की घृत, मधु, पुरोडाश, सोम आदि पशुमांस अर्पण है। इसीलिए यहें - 
अलि-कार्य कहलाता है। आचार्य जिनसेन कृत महापुराण: (१८/६०) में वृषभ को ही स्वयंभू कहकर सब तापसों हरा. 
'' चुणों और जल से पूजा की जाने का उल्लेख है। ह 


शिव पूजा तो चेद-पूर्व द्रविड़-संस्कृति से सम्बद्ध ची ३ यह तथ्य पुरातत्व की गवेषणाओं से भी प्रमाणित होता हैं 
. विंधु-घांही के उत्लनन से प्राप्त पद्मासन. मुद्रा में नग्न मूर्ति सिर पर श्वृंगाकृति एंवं हाथ घुटनों पर, उध्वरेतरसू-प्रंतीक 





ऊपर उठती लिंगाकृति निश्चित ही वेद पूर्व द्रविड़ संस्कृति के योगीश्वर या मुनीश्बर शिव की प्रतीक है। सर जान मार्शल 
ने “वैदिक एज” (पृष्ठ २०३) में स्पष्ट कहा है कि वैदिक आरयों ने “शिव-पशुपति-रुद्र” एवं “शिव पूजा” मोहनजोदड़ो 
संस्कृति से ली है, किन्तु वैदिक देवताओं की तरह शिव को यज्ञ, होमादि से सम्मानित नहीं किया। रुद्र को निवेदित अन्न 
चौराहे या एकान्त स्थल पर डाल दिया जाता है। यही व्यवहार यूनानी अपने पूर्ववर्ती विजातीय देवता “हेलाटे” के प्रति 
करते थे। 


पूर्वोक्त मुनि परम्परा (जो ऋषि परम्परा से भिन्‍न पड़ती है) वेद-पूर्व पशुपति-शिव सम्प्रदाय से अभिन्‍न सिद्ध होत्ती 
है। यही शिव ऋग्वेद में केशी एवं उनके अनुयावी वातरशना मुनियों के रूप में दिखाई पड़ते हैं। 


दैदिक एवं पौराणिक साक्ष्य 


ऋग्वेद में स्थान-स्थान पर सर्वत्र ऋषभदेव का १४१ स्थलों पर १४१ ऋचाओं में स्तुति-परक उल्लेख और उत्कीर्तन 
हुआ है" (१२९ ऋचाओं में ऋषभदेव के रूप में तथा १२ ऋचाओं में वृषभदेव के रूप में)। वैदिक ऋषि विविध सन्दर्भो 
में भक्तिभाव से विभोर होकर बारम्बार ऋषभदेव की स्तुति करते हैं। 


ऋण्वेद में ऋषभ को पूर्वज्ञान का प्रतिपादक और दुखों का नाशक कहा गया है।" ऋषभ ने घोषणा की कि महादेव 
(परमात्मा) मर्त्यों में निवास करता है, अर्थात्‌ प्रत्येक आत्मा में परमात्मा है” । ऋषभ स्वयं आदि पुरूष थे जिन्होंने सर्वप्रथम 
मर्त्यदशा में अमरत्व की उपलब्धि की थीं'। ऋग्वेद के रुद्रसूकत में कहा गया है कि “हे वृषभ! ऐसी कृपा करो कि हम 
कभी नष्ट न हों।” 


यजुवेद में भी ऋषभदेव से अज्ञान का अन्ध्रकार दूर करके मुक्ति-प्राप्ति की प्रार्थना की गई है। अथर्ववेद का ऋषि 
मानवों को ऋषभदेव का आह्ान करने की प्रार्थना करता है'' । ऋषभदेव अग्निदेव के रूप में संसार के उदर का परिषोषण 
करते हैं" | मंगलकारी ऋषभदेव हमको भरती प्रकार प्राप्त हों। जो ब्राह्मण ऋषभदेव को भली प्रकार प्रसन्‍न करता है 
वह शीघ्र सैकड़ों प्रकार के तापों से मुक्त हो जाता है: उसको सब दिव्य गुण तृप्त करते हैं"“। 


अधर्ववेद के नवम काण्ड में (चतुर्थ सूक्‍त में) ऋषभदेव शब्द से परमेश्वर का ही अभिप्राय ग्रहण किया गया है 
और उनकी स्तुति परमेश्वर के रूप में अत्यन्त भक्ति-भाव के साथ की गई है" । 


वैदिक काल से लेकर अब त्क रुद्र या शिव और ऋषभ को प्राय: पर्यायवाची माना गया है। केशी (ऋषभदेव ) 
वातरशना मुनियों के अधिनायक थे। केशी को समस्त ज्ञातव्य विषयों का ज्ञाता, सबका सख्त्रा, सभी का प्रियकारी और 
सर्वेत्कृष्ठ आनन्दकारी माना गया है और उन्हें प्रकाशमय, सूर्यमण्डल तथा ज्ञानमवी और जटाधारी कहा गया है”। केशी 
सूकत की अन्तिम ऋचा में वर्णित केशी द्वारा रुद्र के साथ जल पीने की घटना का वर्णन है जिसका समर्थन शतपथ ब्राह्मण 
से भी होता है”। अतः रुद्र, महादेव, पशुपत्ति आदि नाम ऋषभदेव के ही नामान्तर हैं। 


ऋग्वेद में रुद्र-सूक्‍त मे रुद्र की जो स्तुति की गई है, वहां रुद्र के स्थान पर पांच बार “वृषभ”"* का उल्लेख आया 
है। यहां रुद्र को “आहत” शब्द से सम्बोधित किया गया है। यह आहत उपाधि त्तीर्थकर ऋषभदेव की ही हो सकती है 


क्योंकि उनका चलाया हुआ धर्म आहत धर्म के नाम से विश्वविश्वुत है तथा वैदिक शास्त्रों और पुराणों में भी आईत मत्त 
के नाम से उल्लिखित पाया जाता है। 





“शतहद्वीय स्तोत्र" में रद्व को “शिव, शिव्षतर तथा शंकर” कहा गया है”। श्वेताश्वतर उपनिषद्‌ में रुद्व को “ईशा, , 
महेश्वर, शिव और ईशान” कहा गया है। मैत्रायणी उपनिषद्‌ में उन्हें “शम्भु” कहा गया है। इसके अतिरिक्त, पुराणों 
में वर्णित “महेश्वर, त्रयम्बक, हर, वृषभध्वज, भव, दिगम्बर, दिग्वास, चारुकेश, जटाभार-भास्वर, ऊध्वरेन्द्र तपोमय, शान्त, ' 
दान्त, इन्द्रियपति, अक्षोभ्य, मत्यौजतन, अघोर, ऐसनन्‌, तत्पुरुषन्‌, अहिंस, चैकिस्तान, ज्ञानी, बज़संहनन, पिच्छिकास्त्र, भ्रष्टा, . 
स्वयंभू, जनारदन, अधोक्षज, विश्वम्भर, नरकान्तक, परमेश्वर, त्रिनेत्र, वृषांक, नटराज, जटी, कपर्दी, दिग्बस्त्र, यती आत्मसंयमी, . 
बहाचारी, ऊर्ध्रेतस्‌ आदि नाम पूर्णरूषेण तीर्थंकर ऋषभदेव को भी लागू होते हैं। ये विशेषण ऐसे हैं जो अपने अर्थ. में 
पूर्ण रूप से ऋषभदेव पर भी भली भांति सार्थक होते हैं । वज़ससंहनन और पिच्छका-धारण जैन तीर्थकर और मुक्तिसामी 
मुनि के विशेष लक्षण माने गये हैं और इनका शिव के साथ संबंध अनिवार्य रूप से परम्परा-साम्य और एकत्व प्रकट करता 
है। शिवपुराण में शिव के आदि तीर्थकर वृषभदेव के रूप में अवतार लेने का उल्लेख” है और प्रभास पुराण में भी ऐसा 
ही उल्लेख प्राप्त होता है"। 


शिवपुराण में ऋषभदेव को शिव के अट्ठाईस योगावतारों में गिनाया गया है और उन्हें प्राचीनता की दृष्टि से 
राम और कृष्ण के अवतारों से भी पूर्ववर्ती मान्य किया गया है। 


वैदिक परम्परा में वैदिक रुद्र को ही पौराणिक तथा आधुनिक शिव का पूर्व रुप माना जाता है, जबकि जैन परम्परा 
में ऋषभदेव को ही शिव कहा गया है, ऋषभदेव के मोक्ष मार्ग को शिवमार्ग तथा मोक्ष को शिवगति कहा गया है। शिव 
वस्तुत: धर्म प्रजापति के वंशज थे और धर्म प्रजापति ही पन्द्रहवें जैन तीर्थकर धर्मनाथ हैं“*। 


रुद्र सूक्त में रुद्र का सर्वज्ञ वृषभ के रुप में उल्लेख किया गया है' और कहा गया है कि “हे विशुद्द, दीप्सिमान, 
सर्वज वृषभ ! हमारे ऊपर ऐसी कृपा करो कि हम कभी नष्ट न हों** ॥” 


ऋग्वेद में रुद्र का सोम के साथ आहूवान किया गया है" और सोम को वृषभ की उपाधि दी गई है" । ऋग्वेद 
में रुद्र का व्रात्य के साथ उल्लेख किया गया है और सूक्‍त के आरम्भ में ही कहा गया है कि “त्रात्य महादेव बन गया, 
ब्रात्य ईशान बन गया है! |” “ब्रात्य ने अपने पर्यटन में प्रजापति को शिक्षा और प्रेरणा दी” |” 


आचार्य विमल सूरि के “पउम चरिउ” में जिनेन्द्र का रुद्र के रुप में स्तवन किया गया है और रुद्र से सम्बन्धित 
विविध प्रसंगों का ऋषभ से सम्बन्धित विविध प्रसंगों से आध्यात्मिक तादात्म्य और सामंजस्य स्थापित किया गया है” | 


आचार्य वीरसेन ने अर्हन्तों का पौराणिक शिव के रुप में उल्लेख किया है'। 


महाकवि पृष्पदन्त ने अपने महापुराण में ऋषभ का रुद्र के रुप में अनेकशः उल्लेख किया है और रुद्र के 
विविध प्रसंगों और ऋषभ के विविध प्रसंगों का साम्य और ऐक्य स्थापित किया है"। 


लोकमान्य साक्ष्य 


चैंदिक मान्यता के अनुसार, शिव की जन्म तिथि शिवरात्रि के रूप में प्रतिवर्ष माघ कृष्णा चतुर्दशी के दिन व्रत 
रखकर मनायी जाती है| जैन परम्परा के अनुसार, ऋषभदेव के शिवगति-गमन, मोक्ष या निर्वाण की तिथि भी माघ कृष्णा 
' चतुर्दशी ही है, जिस दिन ऋषभदेव की शिवत्व उत्पन्न हुआ था । उस दिन समस्त साधु-संघ ने दिन को उपवास रखा 
: त्तथा रावि में जागरण कर शिवगति-प्राप्त ऋषभदेव की आराधना की । इस रूप में यह तिथि “शिवरात्रि” के मा से 





वैदिक परम्परा में शिव को कैलाशवासी कहा गया है। जैन परम्परा में भी तीर्थकर ऋषभ की शिव-लाधना रूप 
. त्तप और निर्वाण का क्षेत्र कैलाश पर्वत है, जहां उनके पुत्र चकवर्ती सम्राट्‌ भरत ने एक मन्दिर बनवाया था और उनकी 
मूर्ति स्थापित कराई थी०। 


शिव ने तप में विध्त उपस्थित करने वाले कामदेव को नष्ट कर शिवा से विवाह किया | शिव का यह प्रसंग ऋषभदेव 
से यूर्णतत: मेल खात्ता है। ऋषभदेव ने मोह को नष्ट कर शिवा देवी के रूप में “शिव” सुन्दरी मुक्ति से विवाह किया। 


उत्सरवैदिक मान्यता के अनुसार, जब गंगा आकाश से अवतीर्ण हुई, त्तो चिरकाल-पर्यन्त वह शंकर की जटा में 
ही भ्रमण करती रही, तदुपरान्त ही वह भूतल पर आई। तीर्थंकर ऋषभदेव की स्वसंवित्तिरूपी झञान-गंगा असर्वन् दशा 
तक उनके मस्तिष्क में ही प्रवाहित रही, तत्पश्चात्‌ सर्वज्ञ होने के बाद वही धारा संसार का उद्धार करने के लिए वाणी 
द्वारा प्रवाहित हुई। 


जैन पुराणों में, जैसे ऋषभदेव के वैराग्य का कारण नीलांजना चाम की अप्सरा थी, उसी प्रकार वैदिक परम्परा 
में नारद द्वारा शंकर-पार्वती के सम्मुख “द्यूत-प्रपंच” का वर्णन उल्लिखित है जिससे प्रेरित होकर शिव की संसार से विरक्ति, 
परिग्रह-त्याग तथा आत्म-ध्यान में तल्लीनत्ता का सुविस्तृत उल्लेख किया गया है। 


राजस्थान के प्राचीन जैन तीर्थ केशरियानाथ में ऋषभदेव की केशर चढ़ाने का महांत्म्य माना जाता है। वस्तुतः 
ऋषभदेव जटाओं के कारण ही केशरियानाथ कहलाते हैं | केशर जटा का ही पर्याय है| 


वैदिक परम्परा में शिव को महेश्वर कहा ग्रया है। जैन परम्परा ऋष भदे व 
को महेश्वर मानती है। उन्होंने ही सर्वप्रथम अपनी पुत्री “ब्राह्मी” को लिपि (अक्षर विद्या) का परिज्नान कराया। 


वैदिक परम्परा में शिव का वाहन “ऋषभ” (बैल) है तो जैन मान्यता में भगवान्‌ ऋषभदेव का चिह्य भी “वृषभ” 
बैल) है। 


तप, ज्ञान, इन्द्रिय-दमन, शान्ति और अहिंसा विषयक शिव की वैसी ही मान्यतायें हैं जैसी ऋषभ और अन्य तीर्थकरों 
की। 


महोषधिदान 

ऋग्वेद में शिव को भेषज या औषधि दाता कहा गया है। जैन बाइमय में पुराणकारों ने ऋष को जन्म-जरा- मृत्यु 
आदि संसारिक व्याध्ियों से पीड़ित जीवों को धर्मरूषी औषधि प्रदान करने वाला कहा है। 

दो पलियां और ज्येष्ट पली से सौ पुत्र | 

महापुराण के अनुसार, ऋषभदेथ को उनकी पत्नी यशस्वत्ती से सौ पुत्रों की प्राप्ति हुई जिनमें ज्येंष्ठ पुत्र भरत चक्रवर्ती 


87। रह की विशेष रूप से दो पत्नियों के उल्लेख मिलते हैं-सती और पार्वती। सत्ती से उत्पन्न मानसपुत्र पृथ्वी और 
अन्तरिक्ष में शत-रुद्र के नाम से प्रसिद्ध हुए। | रा 5 





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वैशाग्य, बनगमन और ध्यान 


शैव सम्प्रदाय में ऋषभ का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान हैं। लिंग पुराण और वायु पुराण के अनुसार, ऋषभ सब क्षत्रियों.' 
में पूज्य और उनके पूर्वज थे। पुत्र-वत्सल ऋषभ ने ज्येष्ठ पुत्र भरत.को राज्य देकर वैराग्य धारण किया और शान प्राप्त 
कर शिव रूपी परम यद प्राप्त किया। स्कन्द पुराण में, शंकर की संसार से विरक्ति, समस्त परि-ग्रह त्याग, वनगमन, दिगम्जर 
वेश, आत्म-घ्यान में तल्‍लीनता आदि का जो विशद्‌ वर्णन मिलता है, वह अपने म्ुख्यांश में ज्यों-का-त्यों ऋषभ के लिए 
भी उपयुक्त प्रतीत होता है। 


शिव के अक्तार ऋषभ 


जिस प्रकार जैन पुराणों में ऋषभ आदि २४ तीर्थकरों की उत्पत्ति का वर्णन है, उसी प्रकार शैव पुराणों में २८ 
परावर्तों का वर्णन पाया जाता है। वर्तमान वाराह कल्प में उनका सबसे प्रथम रूप शिखायुक्त श्वेत महामुनि के नाम 
से हिमवान्‌ पर्वत के शिखर पर छागल नामक पर्वत पर प्रकट हुआ। नवमें परावर्त में वे ऋषभ के नाम से उत्पन्न 
हुए । शिव पुराण'* (४/४७-४८) में उल्लेख है कि कैलाश पर्वत पर स्वयं शिव ही सर्वज्ञ सर्वगामी ऋषभ जिनेश्वर. 
के रूप में प्रगट हुए थे और उनका चरित्र स्वर्गदायी, यशस्कारी और आयुवर्धक है। 


शिव और ऋषभ के गण और गणधर 


शिव के अनुयायी गण कहलाते हैं, और उनके नायक हैं शिवपुत्र गणेश। ठीक यही व्यवस्था ऋषभ देव के तीर्थ 
में भी पाई जाती है। उनके मुनियों के गणनायक या गणघर चृषभसेन हुए। यथार्थत: जैन परम्परा में सभी तीर्थकरों के 
अनुयायी मुनियों के गण रहे हैं और उनके अधिनायक गणाधिप, गणेश या गणधर. कहलाते हैं। उसी परम्परा में महावीर 
के भी गणघर इन्द्रभूति गौतम थे। 


आगम और निगमः 


जैव धर्म का प्रतिपादन करने वाले प्राचीन परम्परागत ग्रंथ आगम कहलाते हैं जिनकी संख्या सौ से भी अधिक 
है। इनमें काभिक, कारण, सुप्रमेद, वातुल तथा शाक्तागम, कौलागम, मित्रागम आदि विशेष प्रसिद्ध हैं। प्राचीन आर्ष जैन 
ग्रंथ भी आगम कहलाते हैं, जैसे हादशांग आगम या अर्धभागधी आगम, षट्‌-खण्डागम आदि। वेदादि प्राचीन साहित्य 
निगम कहलाते हैं.। 


शिव और ऋषभ की पूजा विधि में एकरूपता 


जैन और शैव थूजा सामग्री में भी एकरूपता है। जल, सुगंध, अक्षत, पुष्प, दीप, धूप, नैवेध और फल यही अष्टद्रव्य 
ऋषभ आंदि सभी तीर्थकरों एवं शिव दोनों परम्पराओं की पूजा विधियों की साधन सामग्री होते हैं। 
चने: युध्पे: फलैवापि जलै्वा विमलै: सदा। 
'करवीरै: पृज्यमान: शंकरो वरदों भवेत।। 
.. - स्कन्द पुराण४ - (१/५/८९) 





लिए अंक कक 52222 2222 22222 >> 
- अग्नि पुराण". (७४/६३) आदि। 
जैव और जैन शासन-देवता 
सिंहवाहिनी अफ्रेश्वरी देवी जैसे शिव के साथ सम्बद्ध हैं, दैसे ही ऋषभ के साथ भी। वे उनके शासन देवता पद 
पर प्रतिष्ठित हैं। ऊर्जयन्त गिरनार (काठियाबाड़) की सिंहवासिनी देवी जैनों द्वारा भी पृज्य मानी जाती हैं॥ शिव 
सम्वन्धी अन्य देवियां, जैसे काली, महाकाली, गौरी, वज्ांकुश आदि तथा देव कुमार षण्मुख आदि अमेक देव जैन तीर्थकरों 
के शासन-देवी-देवताओं के रूप में जैन मन्दिरों में प्रतिष्ठित और पूजित पाये जाते हैं। ' 


शिव और ऋषभ की एक साथ स्तुति 


जैन कवियों के मानस में ऋषभ और शिव का ऐक्य और अभिन्‍नत्व वर्तमान रहा है। जैन साहित्य में आदि तीर्थकर 
ऋषश्न की रुद्र या शिव के रूप में स्तुति करने के परम्परा प्राचीन काल से निरन्तर प्रचलित पाई जाती है “ (महापुराण- 
२४/३३)। शिव रुद्र के रूप में पश्चात्कालीन मान्यताओं के अनुसार जो नई बातें समाविष्ट हो गईं, उनका निषेध करते 
हुए भी, जैन कवियों ने जिनेन्द्र को रुद्र मानकर भी स्तुति की है (नागकुमार चरित”' -महासती पृथ्वी देवी द्वारा सुति-२/३)। 
जैन और शैंव आस्तायों में रुद्रस्तवन मिलते हैं। प्रारंभ में शिव का स्मरण रुद्र के नाम से किया जाता था। वेदों में उनका 
“रुद्र” नाम आया है। “पउम चरिय” के मंगरलाचरण रुद्राष्टक में ऋषभ का रुद्र के रूप में स्मरण किया गया है। 


डा०ए० चिन्तामणि ने लिखा है कि “इक्ष्वाकुवंशी ऋषभदेव जैनों के प्रथम तीर्थकर हैं और उन्होंने आर्यों को अहिंसा 
घर्म का पाठ पढ़ाया था। ऋग्वेद में इन्हीं ऋषभ की प्रशंसा की गई है और श्रीमद्भागवत पुराण में इनको विष्णु का उदतार 
घोषित किया गया है। ऋषभ का चरित्र हिन्दु पुराणों में वैसा ही है जैसा कि जैन शास्त्रों में है। 


प्राचीन आदिवेद जो अहिंसा पर आधारित था, इक्ष्वाकुवंशी भगवान्‌ ऋषभदेव द्वारा उपदिष्ट हुआ था। ऋग्वेद 
की रचना के पहले ही ऋषभ प्रणीत अहिंसा धर्भ अस्तित्व में था। मोहनजोदड़ो और हड्डप्पा के पुरातत्त्व से इस मान्यता 
का समर्थन होता है। चहां दिगम्बर खड्गासन योगियों की आकृतियां मिली हैं जो तत्कालीम मानवों के उपास्य थे। दे 
योगी जैनों के प्रथम तीर्थंकर ही हैं जिन्होंने अहिंसा धर्म का प्रचार और योगचर्यामथ सप की साधना की थी । सिन्धु उपल्यका 
के पुरातत्त्व से सिद्ठ यह ऋषभ प्रणीत अहिंसा धर्म निस्संदेह ऋग्वेद की ऋचाओं के रचना काल से पहले ही प्रचलित 
हो चुका था। ऋषभ मतानुयायी उन आर्यों से प्राचीन आर्य थे जो बाद में भारत आये। 


दक्षिण भारत में प्रचलित शैव धर्म में रुद्, शिव अथवा कपालेश्वर की पूजा की जाती है जिनकी महिमा भेवर 
के भजनों में है। इस पर भी शैव एक आदि शैव घ॒र्म की बाल कहते हैं जिसमें शिव प्रेम और दया के अवतार ही माने 
गमे हैं। वह आदि शैव धर्म ऋषभदेव का अहिंसा धर्म था जो दक्षिण में प्रचलित रहा। 


अत: यह बहुत-कुछ संभव है कि भगवान्‌ ऋषभ ही वास्तविक शिव हैं और आदि शैष धर्म जैन धर्म से अभिन्‍न 
था। अधुना शिव का जो रूप मिलता है, वह कापालिकों का दिया हुआ है| 


ऋषध और शिव का ऐक्य और अभिन्‍तता हक 
अरातन परम्परा इस जात की साक्षी है कि ऋषभ और शिव अभिन्‍न ये] स्वयं शिव यूराण के रधयिता यही कहते 





इत्यं प्रभाव ऋषभोषक्लार शंकरस्य मे। 
सता गतिदीनवबन्धु नवम: कभिस्तवन: ।॥४७॥ 4 
- शिव पुराण - ४७ * | 
अर्थात्‌ इस प्रकार ऋषभावतार होगा जो मेरे लिये शंकर (शिव) हैं। वह सत्पुरुषों के लिए सत्यपथ, नवमें अबलार - । 
, और दीनबन्धु होंगे। | 
इसी प्रकार, प्रभासपुराण में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि ऋषभ को शिव का अवतार कैलाश में हुआ, यथा: 
कैलाशे पिमले रम्ये वृषभोष्यं जिनेश्वर:। 
चकार स्वावतारं अर सर्वज्ञ: शिव:4॥५९।। 
- प्रभास पुराण - ५९ 


इस उल्लेख से स्पष्ट है कि शिव-शंकर का अलंकृत रूप मूलत: ऋषभदेव के तेज और तपस्या का रहस्यमय वर्णन 
है। इसी प्रकार, जैन परम्परा में भी ऋषभदेव का बहुश: स्मरण शिव के रूप में मिलता है।” ५ 


प्राथीन काल में प्रचलित प्रतीकालंकारवाद शैली 


विद्वानों को लगभग दो हजार साल पहले लिखा हुआ एक पत्रक ([.2४९/ /(४0225) मिला है जिसमें लिखा है . 
कि प्राचीन काल में एक चित्र शैली (5/90०॥८) फी भाषा और लिपि (शल०दागअआगं८ ।.ब90०४० & 5८790) प्रचलित 
थी। विद्वान्‌ ऋषि-मुनि उस शैली का आश्रय लेकर अध्योत्मवाद का निरूपण किया करते थे जिसे ये अपने शिफ्यों को. 
देते थे। गुरु-शिष्य परम्परा से यह रहस्यवाद मौखिक प्रणाली ढ्वारा घारावाहिक रूप से चलता रहा। किन्तु एक समय आवा 
जब लोग इस रहस्य को भूल गए। “अनर्थकार्हि मंत्रा:” की बात टीकाकारों को थरबस ही कहनी पही । बाइजिल में विद्ातों 
'को इसीलिए ललकारा गया कि उन्होंने शान की कुंजी को स्रो दिया (४४०८ (0 ए९ [.,39९75 ५९४ ॥808 08 ॥० 029 
० ध्णशं००५७) ** । वैदिक परम्परा के ब्राहमण ऋषियों भें इस शैली का रहस्य लुप्त हो गया। इस साक्षी से शिव .. 
का अलंकृत रूप स्पष्ट भासता है, वास्तविक नहीं। महाकदि कालिदास इस सत्य से परिचित थे (न सन्ति यायार्व्यविंद: 
पिनाकिन:-कुमार संभव - ५/७७)*८ । प्रतीकवाद को समझ लेना हर एक का काम नहीं, गूढ़ार्थ तक पहुंचना होता है । . 


आषभ और शिव की मूर्तियों में समानता 


इस आज्ीन प्रचलित मान्यता के आधार पर कि ऋषभ ही शिव हैं, शिव की इस प्रकार की मूर्तियां बनाई मई ज्ये . 
बिल्कुल ऋषभ-शूर्ति से मिलती-जुलती हैं। इन्दौर संग्रहालंग में इस प्रकार की एक पूर्ति है। उसे देखकर जैन भूर्ति का , 
भ्रम होता है, किन्तु वह शिव की मूर्ति है।”' कतिपय लिंगाकार जैन सूर्तियां भी मिली हैं। लिंग-पूजा कैलाशपुजा का 
अतीक है। | 


.....सैव-जैन फरप्पताओं में क्षेत्रपालों का स्थान 
...... : कै परव्यरानुसार देवों का धय दूर करने के लिए शिव ने चौंसठ कषेत्रपलों की सृष्टि की थी और यह व्यवस्था . 






की थी कि उनकी अर्चना किए बिना धार्मिक क़ियायें निष्फल होंगी। जैन मन्दिरों के प्रवेश-ह्वार पर प्राय: क्षेत्रभाल की 
स्थापना पाई जाती है जिनकी वंदना-अर्चना आवश्यक मानी जाती है। वे इस तीर्थक्षेत्र या मन्दिर के संरक्षक देवता समझे 
जाते हैं। 


जैव और जैन गुफायें और मन्दिर 


प्राय: प्राचीन शैव और जैन गुफायें और मन्दिर एक दुसरे के समीप स्थित पाये जाते हैं। वेलूर (एलोरा) के गुफा 
मन्दिर इस बात को प्रमाणित करते हैं। विशाल शैव गुफा मन्दिर बड़ा कैलाश एवं जैन गुफा मन्दिर छोटा कैलाश कहलाते 
हैं। करकंडु नरेश (महावीर-पूर्व) द्वारा पार्श्वनाथ के तीर्थ में बनवाई गई घाराशिव (तेरपुर, जिला उस्मानाबाद, आन्ध्र प्रदेश) 
की शैव और जैन गुफायें तो प्रसिद्ध ही हैं। चन्देल राजाओं द्वारा बनवाये गये खजुराहो (जिला छतरपुर) के जैन और 
शैव मन्दिर अपनी स्थापत्य और मूर्तिकला के बेजोड़ नमूने हैं। नर्मदा तट पर ओंकारेश्वर के समीप जैन तीर्थ क्षेत्र सिद्धधश्कूट 
शैव-जैन सम्बन्धों की प्रगाढता का प्रमाण है। 


जिशूल और प्रिरल 


वैदिक परम्परा में शिव को त्रिशूलधारी बतलाया गया है। जहां भी शिव की मूर्तियां उपलब्ध होती हैं, वहां उनके 
चिह्य (प्रतीक) स्वरूप त्रिशूल अंकित किया जाता है। शंकर का लांच्छन त्रिशूल है और वही चिह्न त्रिरत्न के नाम से जैन 
निर्मितियों में और मूर्तियों आदि पर पाया जाता है। उड़ीसा में उदयगिरि की खारवेल की गुफा में यह स्पष्टत: दृष्टव्य 
है। जैन परम्परा के अनुसार, त्रिरत्न या रत्लत्रय सम्यक्‌ दर्शन, सम्यक्‌ ज्ञान और सम्यक्‌ चारित्र का प्रतीक है। कुषाणकालीन 
जिनमूर्तियों के आसन में त्रिशूल पर ही धर्मचकर का चित्रांकन किया गया है।"* 


ललित कलायें 


शिव को गीत, वाद्य, नृत्य आदि कलाओं का आदि प्रवर्त्तक माना गया है। डमरू और नटराज की मुद्रा सुप्रसिझध 
है। उसी प्रकार, आदि तीर्थंकर ऋषभदेव के सम्बन्ध में महापुराण* (१६/१२०) में उल्लेख है कि उन्होंने अपने पुत्र और 
शिष्य वृषध्नसेन को ज्ञ केवल गीत-वाद्यादि की शिक्षा ही दी, वरन्‌ सौ से भी अधिक अध्यायों में गंधर्व-शास्त्र का प्रतिपादन 
भी किया। 


६० 


इस प्रकार, ऋषभ और शिव के सम्बन्ध में तुलनात्मक दृष्टि से विवेचन करने पर इन दोनों में पूर्ण समानता दृष्टिगोचर 
होती है तथा यह निष्कर्ष निकलता है कि यह समानता किसी एक ही विराट महापुरुष की ओर इंगित करती है और वे 
विराट्‌ महापुरुष तीर्थकर ऋषभदेव ही थे, अन्य कोई नहीं। 


सन्दर्भ सूची 
वाल्मीकि रामायण (अयोध्या काण्ड), १०९/३६- 
भगवद्‌ गीता (२/५६)« 
वायु पुराण (१६/३)- 
स्कंद पुराण (२/५/५१९ )« 


ब्ू बम टुएण. इक 





२५, 


२६. ॒ 
२७. 
श्८. 
२९. 


ऋगेद - १०/१३६/२० 
सैत्तिरीय आरण्यक - १/२६/८७० 


आचार्य जिनसेन - महापुराण - १८/६७« 

सर जान मार्शल - वैदिक एज, पृष्ठ २०३० ह 
ऋग्वेद-२/३४/२; १०/१०/२/६; १/१९०/१; १०/१८७; १०/४५/१; १०/४५/२; १०/१६६/१ आदि। 
ऋग्वेद-५२/३८० 


ऋग्वेद-४/५८//३- 
तन्मर्त्यस्य देवत्व सजातमग्र: ------ (ऋग्वेद ३१/१७) 
एवं वश्चो वृषभ चैकिस्तान यथा देव न हृषीषं न हंससि ------ ऋग्वेद-रुद्र सूकत २/३३/१५० 


अथर्ववेद - कारिका १९/४२/४- 

अथर्ववेद-९//४/३० 

अथर्ववेद-९/४/७० 

अथर्ववेद ९/४/१८० 

अधथर्ववेद-९/ध४/७/९/४/१८ आवदि। 

ऋग्वेद-१०/१३६० 

शतपथ ब्राह्मण - ६/१/३/१८- 

एवं वश्नो वृषभ चैकिस्तान यथा देव न हृषीषं न हंससि (ऋग्वेद २/३३/१५)« 
यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता)-१/८/६, वाजसनेयी ३/५७/६३- 
इत्यं प्रभाव ऋषभो5्वतार: शंकरस्य मे। 

सता गतिदीनबन्धुर्नवम: फथित्तस्तव।। 


ऋषभस्य चरित्र हि परम पावन महत्‌। 

स्वर्ग्ययशस्थामायुज्यं श्रोत॒व्यं च प्रयत्नत:।। - शिवपुराण ४/४७-४८० 
कैलाशे विमले रम्ये वृषभोज्यं जिनेश्वर:। 

अकार स्वावतार: च सर्वज्ञ: सर्वग: शिव:।। - प्रभासपुराण ६/४९० 
शिवपुराण-७/२/९- ह 


'डा० कुंबरलाल व्यासशिष्य - ऋषभ और शिव की तुलना विषयक शोध लेख। 
शव वपश्चो वृषभ चैकिस्तान यथा दैव न हुवीषं न हंससि-ऋग्वेद २/३३/१५० 
ऋगष्वेद-६/७४० 





३७. 
३८. 
३९, 


४१, 


४२. 


४३. 


ड४, 


४५, 


ड६. 


४७. 
४८, 
४९, 


५०, 
५३. 


ऋग्वेद-१५/१/४/५० पु 
आत्य आसीदीयमान एव स प्रजापतिं समैश्यत - अधर्ववेद १५९० 

पउम चरिउ - रुद्राष्कक - विमल सूरि १-७० 

घबला टीका - आचार्य वीरसेन-पु० १/४५-४६० 


महापुराण - पुष्पवन्त १०/५० 
डा०ए० चिन्सामणि द्वारा लिखित “ऋषभदेव और आदि शैव धर्म” नामक लेख - “वेदान्स केसरी ” में 
प्रकाशित मूल अंग्रेजी लेख के संक्षिप्त हिन्दी रूपान्तर के रूप में अहिंसा वाणी - “तीर्थकर ऋषभदेव 
विशेषांक”, अलीगंज (एटा) यू०पी० में प्रकाशित अप्रैल-मई १९५७ विशेषांक । 

शिवपुराण - ४/४७-४८० 

स्कन्द पुराण - ९/५/८९० 

अग्नि पुराण - ७४/६३० 

महापुराण - २४/३३० 


नाग कुमार चरित (महासती पृथ्वी देवी द्वारा स्तुति) - २/३- 


ऋषभदेव और आदि शैव धर्म - डाएए० चिन्तामणि ( मूल अंग्रेजी लेख का संक्षिप्त रूपान्तर विदान्त 
केसरी में प्रकाशित)) अहिंसा वाणी - तीर्थकर ऋषभदेव विशेषांक, अलीगंज (एटा), यू०पी०, 
अप्रैल-मई-१९५७० 


शिवपुराण - ४७- 

प्रशास पुराण - ५९० 

प्रतिष्ठासार - जयसेनाचार्य - ४८२० 

वीरसेनाचार्य - घबला टीका - २४, २५० 

पट्खण्डागम टीका - पृष्ठ ४५, ४६० 

बाइबिल। 

कुमारसंभव - कालिदास - ५७७० 

इन्दौर संग्रहालय, इन्दौर-मूर्ति सं० १, मध्य भारत पुरातत्व विभाग । 

“बंगाल, बिहार और उड़ीसा के जैन स्मारक” और “महावीर स्मृति-ग्रंथ”, पृष्ठ २२७-२२९० - 


महापुराण - १६/१२०० 





वैदिक एवं पौराणिक साहित्य में ऋषभदेव - पा. 
प्रो० खुशाल चन्द्र गोरावाला * 


गर्भादिठअस्स जस्स उ हिरण्णबुट्ठी संवचणा पड़िया। 
केश हिरण्णगण्स्जवम्म्रि उवगिज्जए उसभो।। 


(पम्प 3-68) 
चैदिक परम्परा में धोषणा-वाक्य है- विकिर 

"अस्मद्देश प्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मन:। 

स्वं स्व धर्म प्रशिक्षेयु: परथिव्यां सर्वमानवा: ।। 

आरयों (आव्रजकों या नोमैडों) के आगमन को ही आधुनिक विश्व-इतिहास तथा प्राचीन भारतीय इतिहास का प्रारम्भ 

मानना, वेदों को पाश्चात्य विश्व के लिए उद्धरित करने वाले महामनीषी मैक्सम्यूलर को भी इष्ट था, जैसा कि उनके “वेदों 
की उपयोगिता डुगुनी है विश्व तथा प्राचीन भारतीय-इतिहास की दृष्टि से”- वाक्य से स्पष्ट है। जर्मन मनीषियों का भारतीय 
संस्कृति की शोध हमारा महोषकार है तथा उपलब्ध स्रोतों के आधार पर यह उनका उदार अध्ययन था। (जैसा कि आज 
का ब्राहमण-अर्थ करने से स्पष्ट है)। किन्तु जब वे बौद्ध साहित्य के संपर्क में आए तो उन्होंने वेदों के आधार पर बनी 
मान्यताओं में परिवर्तत किया तथा बौद्ध मान्यताओं के मूल की ओर मुड़े। इस शोध में सबसे पहले उनकी दृष्टि उन 
जनजातियों पर गई जिन्हें वेदों में दास, दस्यु, पणि, व्रात्य आदि नामों से उल्लिखित गया किया है तथा वैदिक धर्म को 
न मानने वाला कह करके इन्द्रादि से इनके विनाश की प्रार्थना करते थे। इन ऋचाओं पर पुनर्वियार करने पर जिल्लासुओं 
या विद्वानों को अ्रतीति हुई कि आयों के आने से पहले ही से सप्तसिन्धु, आदि भारत के अंचलों में बसे “जनों” ने, आया 
की संस्कृति को ग्रहण महीं किया था क्योंकि उनमें से कितने ही “जनों” की संस्कृति वैदिक संस्कृति से बेहतर श्री। 


'निग्गंठ - इतिहांस के स्त्रोतों (पुरा अवशेष, टंकितलेख, जनोक्तियां और साहित्य) में भाषा-विशान भी आ 
चुका है। फलत: उक्त स्त्रोतों के आघार पर भाषा-विज्ञान की दृष्टि से खोज करते हुए जेकोबी को संतोष नहीं हुआ; . 
क्योंकि बौद्ध वाइंमव में आए निगशण्ठ का बुद्ध के प्रतिद्वन्दी रूप से वर्णन का समाधान वैदिक स्त्रोतों की व्याख्या से नहीं 
होता था। बेंद ब्राहमण तथा यज्ञ विरोधी होने के कारण बौद्धों को ब्रात्य आदि मानने की कल्पना आयी किन्तु इतिहास 
के आरों सर्वमान्य स्रोतों ने ही रोक दिया क्योंकि भारतीय इतिहास के ये साक्षी महात्मा बुद्ध उनके धर्म को वेदीसर घोषित. 
करले थे तथा बुद्धचर्या निग्गट्ठ “निर्ग्रन्थ” या दिगम्धर को भी इन (बुद्ध) का प्रतिदवन्दी कहते थे। फलत: पाणिनि-फ्तड्जलि ' 
झ्ारा उल्लिखित “अ्र्षण आ्राहमण”। को समझने के लिए मुद्ध के पूर्ववर्ती पार्शनाथ पर दृष्टि गई | अग्रजन्श - पार्श्वमाथ. 
आऋषभ या दुधभ के समान होकर भी निर्ग्नन्य परम्परा में अग्रजन्मा नही थे अपितु बहुत बाद के थे। वैदिक चुम के आरम्भ 
सें यह प्रक्तिया में ब्रहणा चतुर्थः था तथा यज्ञ की सविधि तथा निर्विध्त पूर्ति का परिचालक होने से “ब्राहमणों” का रदिता 
होने के कारण उत्तर काल में स्वभुस्लेल प्रजापति का भुख़ बनकर अग्रजन्भा बन गया था। किन्तु यजुरवेंद स्पष्ट कहता है. 


+ ज़ं०.३8/2, अ-॥, ब्रह्मानन्द पुरी एक्सटैंडान, वाराणसी-22005 































कि अग्रजन्मा “हिरण्यगर्भ”र , अपनी अग्रता को बनाए रखने के लिए प्रजापति को हिरण्णर्भ बतलाना स्वाभाविक 
था, किन्तु अलौकिकता या रहस्यवाद के भाव का यह शब्द विज्ञान की कसौटी पर भी खरा उतरना सरल नहीं है। तथा 
प्रजनन-विज्ञान तो स्पष्ट कहता है कि गर्भज प्राणियों में ही नहीं अण्डज प्राणियों में भी गर्भाण्ड सोने का नहीं अपितु 
उस जाति के नर-नारी के रज-वीर्य का ही अण्ड होता है। फलत्त: हिरण्यगर्भ” का सोने का अण्ड अर्थ न करके अन्यपद 
अघान बहुब्रीहि समास करने पर व्याख्या होती है - जिसके गर्भ में आने पर सृष्टि स्वर्णमयी हो गई थी। यहां पर (स्वर्ण) 
शब्द भी लाक्षणिक है जैसा कि चकवर्ती के रत्मों में रत्न शब्द है तथा इतिहास में “स्वर्ण युग” आदि है। भारतीय परिवेश 
में जन्मे और बढ़े पुरातत्ववेत्ताओं ने इसलिए ही लिखा था। आचीन समय से ही भारतीय समाज में ऐसे 'मनीषी थे जो 
श्रमण कहे जाते थे। वे ध्यानस्थ ही रहते थे तथा यदा-कदा “मोक्षमार्ग” का उपदेश देते थे। वह उपदेश प्रचलित धर्म 


(वैदिक या ब्राहमण) से भिन्‍न होता था* | 








2272502225. 22 ॥५५९४०,३ ३. 


रु 
ईब्ग्एर, 


यह सुविदित तथ्य है कि प्राचीन भारतीय इतिहास के समान प्राचीन साहित्य के उद्धार का श्रेय भी पाफचात्त्य 
विह्ठानों को ही है। यदि मैक्सम्यूलर, आदि ने वेदों को विश्व के सामने रखा तो जर्मन विद्वान जैकोबी" को जैन वाइमय 
के उद्धार का श्रेय जाता है । उन्होंने लिखा कि बौद्ध वाइमय में आया “निरगंठ” ही नहीं अपितु पावा में “नाठपुत्त” का 
निर्वाण भी मिलता है तथा उन्होंने सिद्ध किया कि महावीर से 250 वर्ष पूर्व लगभग 877 ई0 पू0 में वाराणसी के राजा 
विश्वसेन के पुत्र रूप में निर्गनन्थों के 23वें तीर्थंकर (उपसर्गहर वामासुत ) पार्श्वताथ हुए थे जिसे समस्त पाश्चात्य विद्वानों 
ने माना जैसा कि “बुद्धिस्ट इण्डिया” के प्रसिद्ध लेखक के शब्दों में “जैन लोग भारत में प्रारम्भ से और बौद्ध धर्म के 
उत्थान से लेकर अद्यावध्धि अविच्छिन्न रूप से रहते आए हैं।”? 


जैकोबी के द्वारा कल्पसूत्र आदि के अध्ययन तथा सम्पादन ने पाश्चात्य जगत्‌ को उस जैन वाइमय की ओर आकृष्ट 
किया जिसको मूल आर्हतों (दिगम्बरों ) ने वीरनिर्वाण की छठी शी में लिपिबद्ध किया था तथा जो सम्प्रदाधियों (श्वतोम्बरों) 
में वी० नि० की दसवीं शती में लिपिबद्ध हो सका था। जैन वाइमय के प्रकाश में आते ही तत्कालीन पुरातत्व वेत्ताओं 
मेँ घामस, आदि ने माना कि महात्मा बुद्ध जैन धर्म के संस्थापक का विद्रोही (मध्यम मार्गी) शिष्य था* तथा बेवर, लार्सन, 
आदि को अपनी मान्यता “जैन धर्म, बुद्ध धर्म की प्राचीन शाखा है” को बदलना पड़ा तथा डा0 व्यूहलर की कृति ने श्री 
हुल्ल? की प्रायीनतम कल्पना को भी बल दिया जिसके अनुसार मोहनजोदड़ो, हड़प्पा उत्तनन के पहिले सुमेरियल-सभ्यता 
को इतिहासज्ञ प्राचीनतम कहते थे इस पुराविद्या कांति के कारण ग्रंथ (पुस्तक) रूप से प्राचीनतम माने जाने वाले वेदों 
का पुन: आलोड़न भी हुआ तो पता लगा कि ऋग्वेद में ही वृषभ शब्द अनेक बार आया है तथा नन्‍दी (सांड़) इन्द्र, रुदर, 
सोमादि परक अर्थ करके इनके लिए प्रयुक्त हुआ है। इसके अतिरिक्त, वेदों में आए शिश्नदेव त्था “वातरशन” पदों की 


भी वैसी ही व्याख्या की गई है जैसी कि “देवानांप्रिय इति मूर्ख” करके पत्उजजलि ने सम्राद्‌ अशोक की उपाधि ही लिखी 
थी। 


यह इसलिए संभव हुआ कि वेदों के मुख्य व्याख्याकारों (महीधर तथा सायण) में सायण की टीका ही पाश्चात््य 
जगत्‌ को स्पष्टतर ली। जबकि ऋषियों को वेदमन्त्रों के दर्शन होने के लगभग लीन सहस्न वर्ष बाद सायण हुए थे तथा 
भारत आए आर्य (आव्रजक) तब तक यहां के मूलवासियों से मोक्ष, सन्‍्यास, संयम, दर्शन, मुनि आदि लेकर सभा कर्मकाण्ड 
और परकर्तत्व आदि देकर उनमें घुलमिल गए थे और “येषांच शाश्वतिक: समन्वय:” हो चुका था। फलत: सायण आया 
के मूल रूप तथा सप्तसिन्धु आदि प्रदेशों में बसे मूल निवासियों के स्वरूप की कल्पना ही नहीं कर सकते थे, जैसा कि 





॥ इक 000 #॥ इक 
उनके हारा अथर्ववेद के पंचदशम काण्ड' के प्रथम सूक्त -“द्रात्य आसीदीयमान एवं स ग्रजापतिं. संमैरबत्त” की ज्याख्या 
“कांचद विद्वतृतमं महाध्तिकारं पुण्यशली विश्वसम्मान्य कर्मकांडपरेर्ब्राहमणेर्विद्िष्टं व्रात्यमुपतक्य वचनमिति मन्सव्यम्‌” से 
स्पष्ट है। उनके लिए भाषा-विज्ञान की दृष्टि से सोचना भी संभव न था, क्योंकि तैत्तिरीय ब्राहमण यजुर्वेद (3, 4, 5,॥) 
व्रात्य को नरमेध को वध्य बलि कहता था और व्यासजी महापातकी” कह चुके थे। 





हम यजुर्वेद” में (5 मं सूं0 2-4) विश्व पुरुष को “अग्रजन्मा” और हिरण्यगर्भ में खोजें तथा चमत्कार परक 
व्याख्या को विवेकसंगत बनावें। प्रजापति अग्रजन्मा थे यह दोनों घाराओं (भ्रमण, ब्राहमण) को इृष्ट है। वे हिरण्यगर्श 
थे, अर्थात्‌ उनके गर्भ में आते ही सृष्टि सुवर्णमयी हो भई थी। उन्होंने प्रजा को कृषि, मसि, असि का उपदेश दिया था। 
अपने अभ्युदय की चरम सीमा पर पहुंचकर संसार तत्व को समझ कर मोह छोड़कर वे विरक्‍त हो गए थे। आसमुद्रान्त 
शासन को छोड़कर मुमुक्षु हुए नाभिनन्दन ने अपनी समाधि के द्वारा रागादि दोषों के मूल कर्मों का क्षय कर वीतराग होकर 
जीव उद्धार करने का मन्त्र दिया था और परमब्रहम”” पद को प्राप्त हुए थे। यजुर्वेद का हिरण्य सूकत “कस्मै देवाव हविषा 
विधेम” जिज्ञासा का उसी प्रकार समाधान करता है जिस प्रकार बौद्धों के निग्गंठ का बुद्ध के अग्रज समकालीन नाटपुत्त 
के श्रमण वर्णन “पावाए णिव्युदो महावीरो” ने किया था। वे शिश्न देव थे, अर्द्धनारीश्वर थे और वातरशन थे इसलिए 
ही ऋग्वेद द्वारा जगह-जगह उन्हें सादर संस्तुत किया है तथा वेदपूर्व में घुलने मिलने पर पुराण युग में अवतारों के क्रम 
से 8वां अवतार भी माना है। प्रारम्भ में शतफ्थ ब्राहमण प्रजापति के मत्सूय, कूर्म और वराह अवतारों को देता है। महाभारत 
इन तीन के साथ नृसिंह, वामन, परशु-राम, राम, वासुदेव (कृष्ण), हंस, कल्कि, जोड़कर दश करता है। हरिवंश पुराण 
6 ही मानता है। वायुपुराण दत्तात्रेय और व्यास बढ़ाकर 2 करता है। वराहपुराण बुद्ध को बढ़ाता है। भागवत में 22 
(प्रथम स्क0) 23 (द्वि० स्क०) और 6 (चतु0 अध्यायी) गिनाए हैं, तथा 8वां अवतार ऋषभ देव को कहता है 
(स्क0 5 अ0 3)। इस प्रकार स्पष्ट है कि पौराणिक युग आते-आते ब्रात्यों के देव वृषभ को वैदिक परम्परा में भागवत 
ने भी उनके तप, त्याग और प्रभाव को मानकर पतंजलि के “शाश्वतिक विरोध: को शाश्वतिक समन्वय:” कर दिया था। 


पादटिप्पणियां 


0 येषां च शाश्वतिक: विरोध: । यथा अहिर्नकुलम्‌, गोव्याप्रं, श्रमणब्राहमणम्‌ अन्न हन्द्रसमासत्वेन स्वाभाविक 
विरोधत्वात्‌ एकबद्भाव: | 
02 होता, उद्गाता, अध्वर्यु तथा ब्रहमा यज्ञ के कर्ता थे। 
03... हिरण्यगर्भ: समवर्तताग्रे भूतस्य जात: पतिरेक आसीतू। 
स दाघार प्रथिवी भामुतेमां कस्मे देवाय हविषा विधेंग।॥। (3-4) 
य आत्मदा बलदा यस्य विश्व उपासते प्रशिषं यस्य देवा:। | 
यस्य छाया अमृत यस्‍्य मृत्यु: कस्मै देवाय हविषा विधेम।॥ (25/3) 
थ: प्राणतो निमिषतो महित्वैक इद्राजा जगतो वभूव। 
मे ईशे अस्य द्विपदश्चतुद्पद: कस्मै देवाय हविषा विधेम।॥ (25-7) . 


38456&७& 


30 


37 


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33 
34 


चेन चौक परथियों च दृढ़ा पेश स्व: स्लशरित येव नाक:। 


का मा 
ही 2४ १३ ०८००९ ८०,५१० १००१4०२०१३१४९ १९०३४ 












यो अन्तरिंक्षे रजसो विधान: कस्मै देवाय हविया विधेस।। (32/6) 
हिरण्यगर्भ: - हिरण्यमयरस्याण्टस्यगर्भभूत: प्रजापति: हिरण्यगर्भ: 
समवर्तताग्रे ८ यहा हिरण्यमयो. अण्डो गर्भवद यस्थोदरे वर्तते सो असौ सूत्रात्मक: 
हिरण्यार्भउच्यते। अग्रेन -प्रपज्दोत्पत: - प्राक्‌ समवर्तत। मायाध्सात्‌ सिस्स॒क्षो: परमात्मम: 
सकाशात्‌ समजायत। 
चअक, किंकणो, छत्र, दण्ड, चूड़ामणि, चर्म, तथा असि ये सात रत्न होते थे। 
इसी प्रकार महिच्री, सेनापति, हाथी, अश्व, पुरोहित, शिल्पी एवं गृहपति ये सात चेतन रत्न होते थे। 
कलेक्टेड चर्क्स आफ आर0 जी0 भण्डारकर, भा० ! पु0 7 
इण्हियन एण्टीक्वैरी, भा0 7 प0 43 
राईस डेविजस, पृ0 42 
इण्डियन सैकूटस आफ जैनिज्म। 
श्री हुल्स का अनुमान था कि अर्ध-आव्रजक सैमेटिक जन द्रविड़ों के सम्पर्क में आए थे तथा सिन्धु घाटी 
वाली सुविकसित द्रविड़ों की संस्कृति से वह सब लिया था जो नील की घाटी में पाया गया है। 
हवन सन्‍नो रूदेह बोधि वृहदवंदेम विदेधेसीसोवीरा:॥ 
एवं वश्नो वृषभ चेकितान यथा देव न हणीषे न हंसणि॥॥ (2 33 5) 
विहारशील व्रात्य था जिसने प्रजापति को सम्यक्‌ उपदेश दिया था। 
किसी महत्तम विद्वान, महा-प्रभावशाली, पविश्न स्वभाव, विश्वमान्य तथा कर्मकाण्ही ब्राहमणों 
के घिद्वेष के पात्र ब्रात्य को मानकर अथर्थ के इस सूक्त को समझना चाहिए। 
मंगलाचरण की गाथा। 
महाभारत 5-35-46 
प्रजापतेश्य वै स॒ परमेष्िनश्च पितुश्च पितामसहस्य च प्रियं धाम भवित य एवं वेद। (26) 
सूक्त। 
स्‌ प्रजापति: सुवर्णमात्मानमपश्यत्‌ तल्‌ प्राजनवैल्‌ 
तदकेम्रभवत्‌ तललाभमभवत्‌ तन्महदभवत्‌ 
तदुब्रहमा भवत तत्तपो अभवत्‌ ततू सत्यमभवत्‌ त्तेन प्रजायते। ! 3 | 
सो अवर्धत स मरहानभवत्‌ स महादेवो अभ्वम्‌ 
से वेधानामीश पर्पेलि स ईशानो अभवत्‌ 5 
स॒ एक प्रात्यो अभवत्‌ स धनुरादल तदेवेन्द्रधनु: ६ 
नीलिमस्मोदर लोहित पृष्ठ: 7 
भीलैनो प्रिय प्रातृष्य॑ प्राणोति 
लोहितेन हिषन्त विष्यलोपिल्‌ ग्रहमदादिनो बदन्ति 8 
त॑ वृष्टर्च रथंतरं चादिश्यश्च विश्दे च देवा अनुष्पचलन्‌ 2 


35 





विद्वांस व्रातृवमणु बदलते (3 सूकल 2 ): 

सूक्‍त. -7 स सत्रानंत देशमनु व्यवलन 24 त॑ प्रजापतिश्य 

प्रजापतियों प्रथम जिजीविदु सशासकृष्याविदुकर्मस प्रजा:। प्रशुद्धतत्वो: पुनरदृभु 
सोदय ममत्वतो निर्विवदे विदांव इत्यादि (देवागभ समन्तसभद्रचरणा:) 


पी पी 





पणि और श्रमण संस्कृति 
प्रोफेसर कृष्णदत्त वाजपेयी * 


डा० आनंद कुमार स्वामी का यह कथन विचारणीय है : “मैं भारतीय संस्कृति का प्रशंसक इसलिए नहीं हूँ कि 
वह भारतीय है, बल्कि इसलिए कि वही सच्ची संस्कृति है। ” प्रागैतिहासिक काल से लेकर अर्वाच्चीन समय तक भारतीय 
संस्कृति का विकास होता आया है। जिन मूलभूत तत्वों को हम उसमें देखते हैं वे हैं: सत्य, अहिंसा, त्याग और सहिष्णुता। 
मानवता के उदात्त पक्ष को अपना कर इस संस्कृति ने स्वतंत्र चिंतन और “वसुधैव कुटुम्बकम्‌” की भावना को विकसित 
किया। इस तथ्य को हम भारतीय दर्शन, धर्म, साहित्य और ललितकलाओं में देख सकते हैं। 


हमारे प्राचीन साहित्य में आचार-विचार के दो पक्ष मिलते हैं - एक वैदिक-स्मार्त परंपरा और दूसरी श्रमण परंपरा। 
वैदिक तथा परवर्ती साहित्य में “श्रमण विचारधारा के तत्व द्रष्टव्य हैं। इन दोनों विचारधाराओं का समन्वय भारतीय 
संस्कृति में संपन्‍न हुआ। इससे एक कल्याणप्रद जीवन-दर्शन का निर्माण हुआ, जो मानवता के विकास में सहायक सिद्ध 


हुआ। 


92-22 में सिघुंघाटी में एक महत्वपूर्ण सभ्यता की खोज हुई, जिसे “सिंघु-घाटी सभ्यता” कहा गया। उसे 
भारत की प्राचीनतम सभ्यता माना गया। अनेक विदेशी एवं देशी विद्वानों ने उसे अनार्य या द्रविड़ सभ्यता कहा। उनके 
द्वारा यह धारणा व्यक्त और प्रचारित की गयी कि हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, चहुंदड़ो आदि की विकसित नगर-सभ्यता को 
भारत में बाद में आने वाले “बर्बर” आरयों ने नष्ट कर दिया और प्राचीन सभ्यता के बहुसंख्यक लोगों को मौत के घाट 
उत्तार दिया। यह भ्रांत मत चाहे जिस उद्धेश्य से प्रचारित किया गया हो उसकी पुष्टि के लिए यथेष्ट प्रमाण आज तक 
नहीं उपलब्ध हो सके। ईरान, अफगानिस्तान तथा उत्तर-पश्चिम भारत (पाकिस्तान सहित) में पिछले पचास वर्षों में 


अनेक प्राचीन स्थलों में उत्खनन तथा शोध-कार्य किये गए हैं, परंतु उक्त मत की संपुष्टि के लिए आवश्यक सामग्री प्राप्त 
नहीं हो सकी। 


आरंभ में सिंधु नदी के कोंठों में ही उक्त सभ्यता के अवशेष मिले थे, जिससे उसे “सिंघुधाटी-सभ्यता” कहा गया। 
बाद में हरियाणा-राजस्थान क्षेत्र पर प्रवाहशीला और अंत में अरब सागर में मिलने वाली प्राचीन सरस्वती नदी की घाटी 
तथा उसके समीपस्थ क्षेत्र से भी इस सभ्यता के अवशेष मिले। अनुसंधानकार्य जारी रहा। आज उक्त सभ्यता के प्रसार 
के जो विवरण उपलब्ध हैं उनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि तथाकथित सिंधुघाटी सभ्यता का प्रतार पश्चिम 
में बलूचिस्तान से लेकर पूर्व में सहारनपुर एवं आलमगीर पुर (जिला मेरठ, उत्प्र० ) तक तथा उत्तर में कश्मीर से लेकर 
दक्षिण में गुजरात के सूरत क्षेत्र तक था। हो सकता है कि भविष्य भी खोजें इन सीमाओं को और भौ आगे ले जाएं। . 
अब इस संस्कृति की अधिक व्यवहारिक “संज्ञा” “हड़प्पा संस्कृति” प्रचलित है। कुछ विद्वानों ने उसे “सारस्वत्त संस्कृति” 
कहा है। सरस्वती नदी के तट पर की गयी खोजों में प्राप्त अवशेषों के आधार पर श्ेसा अहकप, पहनकर कमर जतर-पफपतकस कक प्रा पर पर ऐसा माना गया है। हाल में बहरीन-केत्र गया है। हाल में बहरीन-दीश्न 


एच-१५, पद्माकर नमरें, सामर-ए४८०555४ स्‍म्ठ अऋठ शिनलट 





से शहप्पा संस्कृति की अनेक कलात्मक मुहरें मिली हैं। 


सिंधुघाटी-सभ्यता के लोग लिखना-पढ़ना जानते थे। उक्त क्षेत्र से प्राप्त बहुसंख्यक मुद्राओं पर तथा कुछ घातुखण्डों ' 
एवं मुण्पात्रों पर दाएं से बाएं (कभी-कभी बांएं से दाएं) लिखी जाने वाली एक लिपि मिली है। इस लिपि को पढ़नेः 
के अनेक प्रयास पिछले लगभग सात दशकों में किए गए हैं और अभी जारी हैं। परन्तु इस लिपि का सर्वसम्मत पाठ अभी _ 
तक उपस्थित नहीं किया जा सका। इस दिशा में डा० एस० आर» राव का वाचन अधिक युक्तिसंगत लगता है। सघसे 
पहले बैंडेल नामक विद्वान्‌ ने इस लिपि को पढ़ने का प्रयास किया और घोषित किया कि हड़प्पा-संस्कृति आर्थों की थी। 
उसने लेखों में कई नाम बैदिक देवों के पढ़े। अन्य विद्वानों में जिन्होंने इस लिपि को पढ़ने की चेष्टा की, हंटर, हवाजनी, . 
हेरास, प्राणताथ, एस-के०राय आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। उन्होंने अपने-अपने ढंग से उक्त लिपि को पढ़ने का प्रयास 
किया तथा अपने षाठों के आधार पर व्याख्याएं प्रस्तुत कीं। अनेक विद्वानों ने हड़प्पा-संस्कृति को द्राविड़ संस्कृति बताथा। 
व्हीलर, पिगट, ब्लूमफील्ड आदि ने आरयों को इस संस्कृति का विध्वंसक करार दिया, जिसकी पुष्टि नहीं हो सकी। 


भारतीय आर्य, उनके निवास-स्थान, समकालीन अन्य जनों से उनके संबंध आदि अनेक प्रश्नों पर पिछले लगभग 
दो सौ वर्षों से विद्वान विचार करते आ रहे हैं। अभी तक अनेक समस्याएं बनी हुई हैं और अधिकारी विद्वाल उने परं 
एकमत नहीं हो सके हैं। प्राचीन साहित्य, ज्योतिष, भाषा-विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, पुरातत्व आदि की सहायता से इन 
समस्याओं को हल करने के प्रयास किये गये हैं और अब भी हो रहे हैं। इन अध्ययनों के फलस्वरूप हाल में कई रोचक 
तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर हम यह कह सकते हैं कि भारत में आयों का आगमन कई समयों में अनेक समूहों 
के रूप में हुआ। ये लोग उत्तर-पश्चिम की ओर से वर्तमान अफगानिस्तान, सीमान्त प्रदेश, काश्मीर त्तथा पंजाब में आते 
'रहे। आर्यों की प्राचीनततम शास्त्रा, जिसे हिन्द-यूरोपीय शाखा कह सकते हैं, मध्य एशिया के .पामीर-क्षेत्र में थी। इस क्षेत्र 
को हमारे साहित्य एवं महाभारत में जम्बूद्ीप के उत्तरी भाग उत्तरकुरु की, विशेषकर सुमेरु और उसके समीपवर्ती क्षेत्र 
की, बड़ी प्रशंसा मिलती है। वर्तमान पामीर का भू-भाग प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से अत्यन्त मनोरम है। 


अनेक पौराणिक आख्यानों सें सुमेर की इस सौंदर्य-राशि का गुणगान मिलता है। आर्यों का आदि स्थल, जहां 
उनकी प्रारंभिक सभ्यता का उन्मेष हुआ, सुमेर-क्षेत्र प्रतीत होता है। वहां इन्द्र नामधारी जन ने अपने शौर्य तथा उत्साह 
के द्वारा कीर्ति उपलब्ध की होगी। उसके वंशजों या उत्तराधिकारियों ने इस कीर्ति को बढ़ाया। धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिमी 
भाग इच्द्त्व के मुख्य प्रसार क्षेत्र बने। 


...मेंत प्रदेश से आयों की अनेक शाखराएं समय-समय पर इस क्षेत्र में आई। कुछ शाखाएं ईरान, पश्चिमी एशिया 
तथा यूरोप के कई भागों में गईं। इनमें अनेक प्रकार के सांस्कृतिक एवं आर्थिक आदान-प्रदान होते रहे। जल तथा स्थल 
भआार्गों से लंबी यात्राएं करने वाले अर्थलोलुप पणि-जनों (वर्तमान बनियों) के उल्लेख वैदिक साहित्य में प्राप्त होते हैं। 
वर्तमान पुरातात्विक शोधों से ज्ञात हुआ है कि सिंधुधाटी या “हड़प्पा-संस्कृति” के लोगों तथा ईरानी-सुमेरी संस्कृति के 
लोगों में अच्छे व्यापारिक संबंध थे। बहरीन से प्राप्त मुद्राओं से भी इसकी पुष्टि हुई है। 


..... आरयों ने जलयात्रा को प्रोत्साहन देने के लिए नौका-निर्माण की ओर ध्यान दिया। इस बात के प्रुष्ट प्रमाण नहीं 
आध्त हो सके कि उन्होंने नौका -निर्माण-कला असुरों से या अन्य किसी पक्ष्विमी जाति से सीसी, अथवा उसके आविष्कारक 
मे स्वयं थे। तत्कालीन साहित्य से केवल इतना पता चलता है कि आर्य लोग जल-यात्रा के बड़े प्रेमी थे। वे नवियों के 
"अतिरिक्त समुद्र में भरी यात्राएं करते थे। समुद्री यात्राओं के लिए बड़ी नौकाओं और जह्ाजों का होना आवश्यक था, क्योंकि 













ओोटी नावें समुद्र में काम नहीं दे सकती थीं। ऋग्वेद में लंबी यात्राओं में जाने वाले बड़े जहाजों के उल्लेख मिलते हैं। . 
'छुप्र नामक ऋषि ने अपने लड़के भुज्य को एक बड़े जहाज में बैठाकर शत्रुओं से लड़ने भेजा। मार्ग में कुछ गड़बड़ हो 

जाने से भूज्य का जहाज डूबने लगा। तब भुज्य ने रक्षा के लिए अश्विनीकुमारों से प्रार्था की। अश्विनीकुमारों ने 00 
'होंडों चाला.एक- बड़ा जहाज रक्षार्थ भेजा। उस पर भुज्य और उसके साथी बैठे और तब उन्होंने अपनी थाआ पूरी की ।' 


जल-यात्रा के अन्य अनेक मनोरंजक वर्णन वैदिक साहित्य में मिलते हैं। आर्य लोग प्राय: मनोविनोद के लिए 
या समुद्र में बहुमूल्य रत्न प्राप्त करने के उद्धेश्य से बात्राएं करते थेश। एक जगह एक ऋषि अपने इष्टदेव से प्रार्थना 
करते हैं कि “है देव, हमारे आनन्द और कल्याण के लिए हमें जहाज के द्वारा समुद्र पार ले चलो” । दूसरे स्थल यर वसिष्ठ 
की समुद्र-यात्रा का रोचक वर्ण हैं' | वरुण के लिए कहा गया है कि वे समुद्र में चारों ओर फिरा करते है। ऋग्वेद में 
'कई सूक्‍तों में जरुण को जल का अधिपति कहा गया है5। 


कुछ विद्वानों का अनुमान है कि वैदिक आर्यों को समुद्र-यात्रा का ज्ञान नहीं था। उनके विचार से वेदों में जिस 
“सिंधु” शब्द का उल्लेख अनेक स्थलों पर मिलता है उसका अर्थ समुद्र से नहीं बल्कि सिंधु नदी से है। उनका कहना 
है कि लंबी जलयात्राओं के जो उल्लेख वेदों में हैं, उनसे उन्हीं यात्राओं का मतलब है जो सिन्धु नदी के निचले भाग 
में की जाती रही होगी, जहां नदी का पाट इतना चौड़ा रहता होगा कि बीच धारा में पड़ी मौका नदी के तट से दिखाई 
न दे पड़े“! परन्तु यह मत्त ठीक प्रतीत नहीं होता। उन संदों में जहां सिन्धु शब्द मिलता है यही भासित होता है कि 
यह समुद्र के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है, न कि नदी के अर्थ में। परवर्ती भाष्यकारों ने “सिंघु” शब्द की व्याख्या समुद्र के 
अर्थ में ही की है। ऋग्वेद भें “पणि” लोगों के उल्लेख मिलते हैं और उनके लिए कहा गया है कि वे अधिक धन के 
लालच से अपने जहाज दूर देशों को भेजते एवं सारे समुद्र को मथ डालते थे?। आर्य व्यापारियों के लिए वैदिक साहित्य 
में “देवपणि” शब्द मिलता है, जिससे प्रतीत होता है कि पणि शब्द अवैदिक व्यापारियों का सूचक होगा। जब इस बात 
के प्रमाण मिलते हैं कि हड़प्पा-संस्कृति काल में भारतीयों का सुमेर के लोगों के साथ यातायात संपर्क था तब यह कहना 
कि उस सभय लोगों को समुद्र-यात्रा का ज्ञान नहीं था, उचित नहीं जंचता । स्थल-मार्ग द्वारा भारत से इन देशों में जाना-आना 
उस समय निस्सदेह दुरूह था, जबकि जलमार्ग अपेक्षाकृत सुगम था। * 


ऋग्वेद में वस्तुओं को खरीदने और बेचने के उल्लेख हैं। व्यापारियों के लिए “वणिज” और “वाणिज” शब्द मिलते 
हैं'। अधर्ववेद में दूर्श ( ऊनी धुस्सा), पवस्त (चददर) और अजिन (बकरी का चर्म सभ्रा उससे बना हुआ चस्त्र) आदि 
व्यापारिक वस्तुओं के उल्लेख मिलते हैं?। इस ग्रंथ के तीसरे मंडल के ]5वें सूकत से तत्कालीन व्यापारियों के संबंध में 
अनेक मनोरंजक बातें मालूम होती हैं। इस सूकत से पता चलता है कि कुछ व्यापारी बड़े साहसी होते थे और एक स्थान 
से दूसरे स्थान में जाने की कठिनाइयों की परवाह नहीं करते थे। कभी-कभी रास्ते में जंगली जानवरों और डाकुओं के 
कारण उनका जान-माल खतरे में पड़ जाता था। अत: अपनी यात्रा आरंभ करने फे पहले वे इन्द्र ले प्रार्थना करते थे 
कि वे मार्ग की सब विपत्तियों से उन्हें बचायें तथा उनकी यात्रा निर्दिष्म समाप्त करें । व्यापारी लोग अग्निदेव से भी प्रार्थना 
करते थे कि उन्हें कय-विक्रय में यथेष्ट लाभ हो जिससे व्यापार में लगाया गया उनका घन चूद्धिगत हो । वैदिककाल 
के कुछ व्यापारी बड़े महत्वाकांक्षी हो गये थे । वे दूर स्थानों में जाकर लेन-देन करने लगे थे। ऐसे व्यापारियों को बौद्धकालीन 
सार्थवाहों का अग्रज कहना अनुचित न होगा। | | ह कक 


वैदिक साहित्य में “वणि” नामक व्यापारियों के अनेक उल्लेख हैं। | पतियों के संबंध में विशानों के कई सतत है। 
इुछ लोगों का अनुमान है कि वे परशियन थे, जिनका उल्लेख यूनानी लेखक सट्रेथो मे किया है। अन्य विज्ञान्‌ उन्हें किसी 
आदिम जाति का बताते हैं सचा अन्य कुछ लोगों का मत है कि वे फिनिशियन थे, जिन्होंने पश्चिमी एशिग्राः ता अफ़ीका 






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' के कुछ प्रदेश पर अपने शब्य स्थापित किये:और एक प्रधान व्यापारी जाति के रूप में उभरे। संभावना इसी खाल की... 
- अधिक. प्रतीत होती है कि *पत्चि ” लोग भारतीय व्यापारी थे। वे अपने जहाजों में फारस की खाड़ी तक ले जाते और 
यहां सुसेरी तथा मिस्त्री व्याप्तारियों के साथ लेन-देल करते होंगे। वैदिक साहित्य से पत्ता चलता है कि कुछ व्यापारी खेले - 
भी थे जो अधिक लालच के कारण समुद्र में अत्यधिक आवाममन करते थे और उसे मथ डालते. थे। ऐसे लोगों की निंदा 
की मई है। एक स्थान पर ऋषि अश्विनीकुमारों से ब्रार्थना करता हुआ कहता है, “हे देव अश्विनि, इस प्रकार के कद 
सोभी पणियों के हृदयों को दुकड़े-टुकड़े कर दो, जिससे उनका इस प्रकार का लोभ सदा के लिए छूट जाये**॥ 


पणियों के संबंध में जो उल्लेल्न प्राप्त हैं उनके आधार प्रर यह कहा जा सकता है कि व्यापार में थे बहुत चटु. 
थे और धन-प्राप्ति के उद्धेश्य से स्थल और जल-मार्गों से यात्रा करते थे। नौका-निर्माण तथा संचालन के सकवीकी शान . 
में वे प्रवीण थे और लेन-देन का कार्य भली-भांति जानते थे। “देवषणि” शब्द से यह आभास मिलता है कि वे साथ 
परण पणि जनों से भिन्‍मता रखते थे। | 


“चणि" से “वणिज”, और वाणिज की अ्युत्पत्ति युक्तिसंगत है। परवर्ती बनिया शब्द इससे उद्भूत हुआ होंगा। 


उक्त सिंधुधाटी सभ्यता में प्राप्त मुहरों के वाचन के आधार पर अनेक विद्वानों ने इस बात की पुष्टि की है. कि 
व्यवसाय तथा व्यापार संबंधी अनेक शब्द इन मभुहरों में उपलब्ध हैं। 


यह निस्संदेह विचारणीय है कि क्या पणियों को श्रमण-संस्कृति से जोड़ा जा सकता है। परवर्ती इतिहास से यह 
स्पष्ट है कि चतुर्वर्ण-व्यवस्था में वैश्य वर्ग पर्याप्त प्रभावशाली हुआ। जैन घर्मावलंबियों की संख्या वैश्य वर्ग में बढ़ती 
गयी। गुप्तोत्तरकाल में देश के आर्थिक विकास में उनका असाधारण योगदान रहा। परंतु अभी इस बात की पुष्टि के 
लिए पर्याप्त प्रमाणों की आवश्यकता है कि वैदिक साहित्य में उल्लिखित पणियों का अभिज्ञान श्रमण-संस्कृति के मानने 


वालों के साथ किया जा सकता हैं। संदर्भ 
। संदर्भ 
ऋग्वेद, ), 6, 3-5 
दे० ऋग्वेद, 7, 6, 7; 5, 56, 6; !, 48, 3 आदि। 
ऋण , 9, 7-8 
आऋ० 7, 88, 3-4 
ऋ० , 25, 7 आदि। कालांतर में बैदिक देवता वरुण जल के अधिष्ठाता देव माने 
जये। पौराणिक साहित्य में वरुण के स्वरूप में जल के पूजन का महत्त्व बढ़ा और जलराशि 
सागर, सरितिदि) के किनारे बसे हुए अनेक स्थानों को तीर्थ-रूप में गौरव प्रदान किया 
जया। जल-यबाजा के समय वतण की पूजा आवश्यक मानी गयी। अब भी व्यापारी प्रायः 
समुप्र-भरात्रा आरम्भ करने के पहले वरुण का पूजन करते हैं। 
6 चे० मैक्डानल तथा कीच, वैदिक इंडेक्स, भाग 2, पृ० 43-8 
7... ऋग्वेद, 2, 48, 3; .], 56, 2 
8 ऋग्वेद, ।, 2, ; 5, 45, 6 
- 9 अर्थ, .5, 7, 6, ;ल्‍ 
. 40 अनजी, एकोनॉमिक लाइफ इन ऐंशियंट इंडिया (कलकत्ता, 945) प० 37 हा 
प्र उद्ाहरणार्थ, देखिए ऋग्वेद (, 33, 3; ,56, 2 2,48 , 3; 0, 6, 6) अषर्वजेद (,7); वाजसनेग्ी संहिता | 
. . 35, 4 ) | 
, 8... आ० 6, 53, 7-8 छ एछफए 


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॥९8060 'चिंवी)390व गाव॑ ता।श 5णाग्रोब्ा 5९३5 ८००९० #07 'निणी६7]0040 शाग९॥9 
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जआपडा9, ॥९ 5प/शा९ 2३१67 ० 5#प््राव 4 7९०५७॥८ ० छिव्ावाव, +९३४5४८८० (॥९ 
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जा) ७९६ 7९8९९ गाध्ावु ०९०ए. वृफ९५ वएछ ॥075 वरवटा००१0 पर शढब्ते-0/655 बाते 
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०्पाड/शंटी४त॑, [॥678 $ ॥0 ए७०।९४८०७ ०५॥॥०००. प.९ए 3972०७7 ६० 9७ ६6 विछुणा ७5 रण #वीदा 
४०१४४. ११ [॥009॥ 47९०७0३९४००४५ ]960-6] (९एाट॑ंड 66 (शाव्बाव 60465 67 286 |. 
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णै तणा-शणजेशा०९ 0ए९ रुणशा८९, [॥6#0ाए ण 707-ए0ऐे९श८४ 0एश' जणेशा८९ 8 ठंल्रंटॉ2्त 
जा कागोंश 70.23 ० रिब्रां० ९९ 8 23(6) बात 23(0). वैंच।९ त6द॒प॥257605,.40 0 ता करोड ०५ 
30 हर 50 तर हएागार ए0372५. [॥2ए क्ावए एशी ७४ ८2णाफ्बाएत जाती प्रावदुव्धीवड ठवॉट 
रिबन प्ाच्राएव रण फी९ कं9ए३ए९१०, 56वें 70.430 ता फॉर हटाए, जाती सांद्रापुशालरा | 

शक छाए ७६ 8, त8फ़ॉंटॉड ब #ंगातवतवु शावार 852९४९ व (९ िंवए54785 गरश्तावीणानं 

9०4७४, 88/0076 ॥९., 0॥ ९ #9॥ाग 90९, 5 त९क्राटा28 5 (शर्त गाठफररा, 76 ९डा9- 
णताबाए कर 90,347 जा 296 [>)९ए वर्काल$ 8 पागा 0 व एगावा णत 4 ंधुर?!'5 0०१9, 
एक रजआ9 ॥७४० हभाव 4075 ९शाशातं९त ब्रैंशावी५, ॥॥6 प्रावा 9090 री (6 46५7७ ॥5 709: 
5परटी वैष्ागा-चाधगादा विकुप्राए5 द्वार 9705९ 00७70 ॥ 5प्रायर। बा 5६७७. 50९०त वकुप्ा९5 
त७ए्ञाए प्रा४ किाभीववं सवाजाहआए ०2ए९९॥ ॥॥९ क्रागादो ब्रात ह॥९ गाता) ॥॥0, ३50, 2 
कांचायणी  इज़ॉतांबए 0एश वाशि्ीजा, 7॥2९ ए9ण/९ए शिव (6व07९5 ० 20७५ [२ ज!॥ा 
वा ॥0.4, [.#२७ 60 705. 4. 6, 2] 2॥० [.*>%ए] दवा 05.9 ४0 2] ४7९ ० $97॥व 279९ 
ए0997९5 ध8ट2॥९6 77ण०९7-800025$25 0प्र |80॥89. [॥९6फ 799 0९ ८07एगढत जात ?िपाइटयौ।5 
5एग्रॉंठों शाद्यां2 0॥09275 0 6 £६॥३-एफ४ रिा5एव३ ० ॥९ #&72९7०३०८०७.'१ ॥९5४ 
गालालए0वटवी प्रहार 72॥05 ० (९ 52795णएवत्रा)। ४६९५ 7९ह० 970०९ ०९ए०70 600० ० 
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(९ ॥९४ 07 6 0009 0७2॥0६ 79५2७, 6॥0 370९॥88८ $2४| [7070 [7 72[92$९7/5 8 37४० (979- 
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$फप्गाढ/9 (0]]09275 ० 59073]9 25 0९एंट०९१० 7९6 (607९५, १० ४९ (7 ४९७5 ९४८०ए्वा०त 
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90 0०30४ [0 4000 8.0., 8८८०००॥०0७ 40 0९ ॥06679 725280]९5. | 


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शपिएुगाठ ९५०९६॥॥ (९ ४धवंता। ॥९80 ० (९ डाक 0१८४, ॥ 06 509॥05548॥8 प्राएठ॥3074] 

- 2०४५०; 98 ००99 ॥0 एणा कांड गग्ातेड, 0७४ 07शा॥ 5९९६ ०0 (0९ ९०99 ॥6 9९॥08 5$/90।0055 
जररि९, नंद 60820028 ॥ 006 ग0ुप7९ 0 8 ६$६०७९ ७७४ ॥६ 5९७पश६ 0066. नं 5 86] ज्रा।॥8. "९ 
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$0गर९४ 667 5€ए07 उज्ञपव 45०९९. [॥९ छ4ठावा ग0्षप76 (६) ७0 ९ #ि3970 धिएा76 
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$0॥6 0 जीता ९ ॥486 ज्राव९ ९ 7९8४ ०9 जाती 8 शाबा। एव 200, 8 72ए2३5९ 808 , 
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धी€ ॥शा।॥996 50704 ॥28॥9 छा ॥6 इआञ्तांबो ध्पीएट बात टाजीश्बा।00, 78 70689: 
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बएू772०व5 [0 ७९ (९ टए७०॥) ० ए९ 54ज्र्ांदा 0फ्रावजरांट 72096, 59॥ग्रॉं9 0 ॥86770., 7॥8 
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प्‌ू#6 इट९श॥९ 6 606 204 5 धाठा 6 ९70509 370 70 ० 0०2९. [727४ 45 90 ०शि८९ 
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7९३४८९पि ९५९३ 3 शी/ ॥987 7९70. 7]25९ 37९ 46 50९78 0[707-ए0]27068 7802% 97 
् एा0शा८९, ॥॥० वठरुएार 249 ?९€एा९5शा।।5 विठा.प5, 507 6 0ज्ञा5, वी पी९€ वात 6, णांती 
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इ5005 07 3 ए०९०09॥९. धश प5 4907९ 45 8 कु४गा ॥500708] 722070, 978४ 7९92९5९7/5 (0९ 
हि (5679गा) 5प०-78४८2९ ० उिव्ाढांव,  5ांद्िगर॑ं९श/0 70॥7 6 ह्वाएव॑ फिज्ञीवएचाए 782९ ॥ 6. |# 
4039 935. ॥]6 '/।] 709फपं।९5, 072९6 87 7९४४8॥0९5 00 पीा€ उिवाणवाफ्ठा ए8005 
5 छा. 0595 ए०2079९व (0 95 #& 5प५0-73८९४ ० उितडा83, [2९5९ 509फ्र्रावा "रत्रारा2 
7९25$ 059]93फ9 0९९४७ वि॥7्70]980708॥#% शांत 06 छीवाबौ९फ््था गराश्ांट 7९:005, 900'839ञ76 
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॥# रश विडा 2एब0९ लिप, तल 2एशाबजे९, थी मिड 900४8 780-०॥-"४ांजव, ति६ हार्ड 






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70 7शीह्वाणा, 4 (8 0मरापफ् छा ए०ए; ॥॥0४ पार छिीव्रागंशफब - एवए, पी8 उ्य्ााशश2फ छ३०५, (॥2. 
(७आवफ् + फ्रव9 णा प[छ - ॥278 - ए8फ 0 #पएड्वा९ए३ - ७४३०७,१९ (7९९०३ (ठास्टांआ-) एव गात॑ 
0९ वि]029ए8-७०७७. ॥0 (॥2 972-४072 ब925, [5 ७७७ (7४ इ5टांशगती6 $एंशॉगि।ए 0दुद्रांशा; 
४ उत्ााव(2ए३-9७३ए ७९2४६ (९ 5छ्वी (वैगिवा) बचत पी९ 7९8४ ए० पी९ वाशिीएटा [(विंत॥9) ० 
पी 5छाॉत्ता-ए्ठए (83-83) 00ुवांडा. 


पगु0, शा ७४७५, (६ 8 ज़ीशाठा॥९७१0॥, 70 3 छठशाए९ एटंगठु 0ए 2 घा0त॑९ ० एशंप5. 
पधाढ फ्रताग्श व80 8 वा, एांटी 45 079 ०९ ए४५, ॥० ००]९८. पतढ वीह6 80 7 इशशग, 
व एं५9७ ०९08.7? ॥60 !95 70 ॥9॥72, 4270९, ! 5 0७॥॥४० [93 ॥52४[. 790 45 2797255, 
पश्ग्णांप्र, 4050९ ए42८870फ, 70क्‍76255, ए0]९, परा/ंशा॥९0, 50!, 4077255, 8076 8॥0 
प्रणं5डए॑९, 80 5 70०707. ॥॥#९ गाठएशाहशा। ० सि९ छ052९05 0ए ८20९5 (क्‍6ठाट्टाथा 
770607). #थीं ॥45 597806 #णा | (780) 35 फशिधशादह 377९0); पीठ एिए/ड९70०९ (58) 
इज़ाबाबव #06गा 7 (80) 35 27-९४5$श॥6९ (29-5व) (6 ॥0 797९0), [80, ५॥।00 7९८, 
डांठु0०5, पाशआ।४57९गाप (8एफगैतव 54), 30, पापा त्रद्ा९, ८00065 घराधां ४िश ॥९3[स्‍9 
(एफ०क४।३४ 59). 780 5 0९ वृष्चगागा।एर ०ापुदागंट पर्भाप्र ० पीर 0एफ्रददांठ धा0 ९ ए४फ्रन्ताव 
($एश्यॉएवड) 370 0 ॥6 ९१ञरशाट९ 0 [6 327-0:(8९7८९, [6९ 09937८ पाए ० ९ [७० 
्राष्राण४॥ए ९४2।५5॥५ए2८ ॥00 050]6€ ०9705/९5. 


पृब0 45 ९एश-नाबाईठाप्रावाए2, [80 ए04ंघपट९त (00९: (भर ए0०500८९६ [ए७०., ॥५9०0 
790०40९९४ 0766, भाव [॥2९९ 977040९९० 8 788. 730, [08, 45 6 ०94॥॥0 पाए ० ९ 
परागरवाशिक 2€0 बा0त॑ (९ वाधारटिश ०९, 3076 प्ंती बत0075 0 0०7९5 40 [0९ ०70974 
0॥९ [0 ॥8/.€ 00९ 9॥6 40 गाव फ॒. 


ए6 (8(ता89, 5570) ॥8 ४255. वात (काठाय90, 5870-85, एट, 52१) |$ 
क्षपफिश्ंए27९58., एैबा5 5 ९४०98507. ४॥ 5 ॥5 0970९ ९ैछाश्शा. ॥॥#6 प्रए ० ४ 970 
एगाध्र 5 0०धचग्रांटवए #70760पफ5$ बात $ ॥07९ व व एदाशार 00 $९८७/६५ 20707 ० 3] 
॥शद्व 7०095. शा ताझाद्ाता07ए9 एशा95 70प0९४ 370 ग्रां5८7ए (0 (6 7९००॥९. [॥0९फ ९ 
छाशवा 7000675 0शए९९॥ ९9एश॥ बात॑ ९द्वाती 707 छ्रीणा 00777 ८७ 252892९, ४०५ गधा 
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रिपाएब-सक्‍शीब, (0 धार छरडा (8 8ए०ाव809व4, (0 ९ ठगी त९ ए्ृतपाप बाएं 40 (6 
50पणा पी९ वंद्राएप१स9व ००्तागश्कां5, १॥6 9209० टण्गगव ॥07 तीढ ?िपरएव-संततरव बात (९ 
एाक्प्पाप क्‍6 धार रग्राएएतएएव ८०तावि्वा। 22 7259श९टॉ।ए2ए [0097 85 (९ ५४|6९॥॥४७ ७70 (९ 
पाप 8९.33 पृ चा0तछा 00शाण०8छए 20-000ठ2९8 ०० (९5९ ०ए७॥$ ० 6 छा8- 
मचा गालंशा ग्रापापव पांदानीगाह ॥0ग ०6 ०0वरा (0 ॥6 एफश, पी6 ट्यॉंतवरशा 
पाकिनएाए ७३५ ती९ 5679०  ०२7०४0॥९४००१ ०6 (९ #79875, ॥ 385 06९॥ |७८९6॑ ६0 6 500 
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कूद छा ९ फट 590ढ60ह॥ 07655, राशाव!गह ए०0 6 ९वडाएता इ९३-९८०३5६, गरटांएवाएव पीला 
० टग्रगाव, ि, रिक्षात ।5 ॥6 ता0आ शाविशा। गाठ्णांतात ज़िागह गा पी९ €शांएट ०0 वि९5४ की .. 
€गाश्ग्रा5.+ [॥6 ८७ा८९फ्ञा छप्रग्रश्प ९० 8४ एश। ०९ ९ ८णारएए रिब्राशप, अंतर ज़िव ठ धर 
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गांड लाटप्राइंडाईीवा रएंत९70९, ॥09 5 ९ वीं. रि्ापा ठ तीर ता0त॑ंटा। ॥25 45 6 कै. 
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चाछ टांप्रश९75 ० ९ ९ांहा। गाठण्रांग्राा5, ॥९20०९, 0०० 399०९०87 40 ७९ 07९ ०४ (॥९ 5७7॥९ 
चाठणांया।, चि।. 6ैकै99304, ॥870९, 5, ॥९709, तर्यॉ९१ एफ चिी. एदाओ., 5 ीं5 वा0ठतेशा। 
शिया? 79782 0 ॥0प्रता॥॥5 धौचा॑ पीर दारवांथड अआरंधांग 923075ध९ 0 (6 92-7४070, (९ 
972-4000 8.0. १525; रि586॥8, (॥€ 58व, एणं५(९१, 70 06 ९७४ ० ॥९४ रिब्राता ॥0प्राधत5 
॥९5 रिप्ाए३-एंतला93, 66॥2०व6 शांति एका॥व, वी 3979९वरा5 पर्णार ०ढांगा।) दव (6 ह580॥7 739 
॥6ए6 ध4एशी९९ ० (।गर #0ग्रा शिवाब, गा धी€ गाठईं बरारांंशां 9एनांड0ा८ (0९5, 749 ०९ 
९एशा ०2076 ॥6 एशी९० ६0० $5फ्राढः द्राव +9फ्रा गाव ९ िरशाटाडारवा, 8 ९2 
रहड्ांगाटकों उिपतत/5ता, 7॥6 प्रबाए९ 9क्‍050॥9 ० ९ एाबटा८8।| (॥॥९5९ 9९०9।९ ७०७६ ०४०१ 
(ठगरॉपिश्ंगांधा णएांटी 843ए९ सौशा। ९ ए050फोफ 0 ३602टांचरे 0847$5ा0, ० ८टठ0ग्राग0 
5275९ बात छ5८656 #002692.१९ व ह6त 700॥76 40 00 एव (४ ४(9॥, ए९ १0०83 ७0 
पर चिपाता, ॥ 6 049 998 07 [९ ब्ाटांशां वतत तीर ॥046॥7 625, ॥ एव5 वप9प5 बात॑ 

"8 €एशा प्राश्टा2४९० ०ाप्र ॥ गरापातवा९ वाबारशावीधशञाट गद्ञाश5, 780॥9 दात॑ 3090त087 
729725९॥ (९ ०09709॥02 0 पक्षा-ट्पराशा।$ 0 (एवाशा, ए2., ((०00059757. 070 [25९ 
९९ एच्ाज़ा।प् ॥0प8स्‍5 ८0इाप/ा९6 ॥॥6 ८07पिइ९४ (श्ञाा९४९ ण0509॥9. ॥॥#6 दाश्वांट्शा[ 
(7९8९ वैह्रठछॉ$ एव5 5पघा>240, ए॥6 छ€-०एा507 ता ्िफपनी$, कक ध्ीौ05९ ब8ु९०, ९ धीतां 
रिबक्शाव था डितद्ाबांड, (९ ब08 वावाणां0पए5 298 5907972९005 959९ प्रणु 087प9९0. 
रिब्वणा॥ ० छिवाबा5, रिश्छीरश छा 5पफ्रारा, 59990 ब70 ९४ चिरएतशा/हा९शा बाते 5प्र-ट्ा ० 
(मजाए्ब, ॥९ ण्ञा00 6 ९ पीछा ०ए/पा९-७००76, 299९०7 0 0९ 070९ बात ९ इदा९ ९7807 
एी0 बुबएट पार 7धुनि-8फतावा छवफ्र 40 ४ ज्रा06 एठ6; गरटॉफकग]र6ु ९ एीशा 53ए४५४ /ैफ्ता, 
$86्रापट बा6 निद्यागा बधुद्धारड्वा।तगा5 ० 0९ ॥00 बाते 0९ ए९छ एंटी, 709, ध32/७॥५ 
०४75० फ्रांसत8९ धर 4९७ 56 ९ टिब्रशशा। 5फ्रग्रांबा।ए छी डिांगतव्वाबाब, ॥॥6 9ए बात रिप९ छा 
$एगरीगाफ का पी९ छार-नीच076 टजोपाल-प्रणाति ए३5 ९४5९॥ार्चोफ् छा णाए बाप ९ 8ठत6 
एणाशश्वरांड, अऑागादशा व €९ागा। 728005 दात॑ ए८चौशा ॥ 0605, प्यांटी) ७३5 वां [९ 
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प्रा0४ं डह2छव 06 80०९७, 8ी८पांवा26 0पव5 ठारबांए४४ ॥2॥807॥ बात 5छाॉंग्रीव ए92507%828. 
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बजाए 6 2४ 0959 एवच, विश फछार्णग्परातं?त ऐप ।४ शैगफ्-णिप्रापविण सिं॥309, 5 
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शिप्राचंश्त था 50९0ाती० 5फ्ञतगाए <णाज़ांजाठ णै॑ रिश्वाणिपा) (इद्याव्राए।), रिववए (59०७) 
खा सिटश॑ंणा (908एन59), ए॥ढा (0९ 7प९ ठ जगंश्ाल्९ शाःशालीएत ॥5४ॉ ०ा ॥6 एौँगारं 
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गाते #दगागा5इब (07-एणशाटरी क्‍0 लार्टारए बा6 479फ9 वशाशधयिीवांर 68 9९5९४ 756 छा ए०॑ेशा 
इचएश्चट९एफए. 


वृ॥6४ छ5ग्गां2 €घराग्रपॉबा।ए९ ८णाएबाबाए९ बात टवीटव #एतफए 0 पी९ एपो5 0520ए४2४॑ 
ए9फ7॥2770908॥7 5०॥९४८९५ 0 टजाॉपाबी गा7090099, ८एरॉएा5। ह९0099, दजाॉपाता ॥॥2॥38९०!०६ए 
बा0 टॉपाडाी तुरठद्राचएणाफ; जात 270006ा०व, ठ4ए८४८वा 8॥0 5072८ट8 97275922८॥ए९5 
प्रश्गाएंघ०प8४ए 2070007%0 ॥९ ४076४ 9९5०९०॥ए९5 एावागएंचु0प४ए ए077090730९0 १९ 
िश्लठ02 05८0027ए ७ 6 52९४॥06 5फ्राभाए, ॥0फ2९ए९/ णाणात तीशी वाशिफ़ाशवॉ0णा5$ 
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€ज72॥४॥0275 एशा९ 5एंटाए ८7०06 07 पात९7/ 6 एपंत476९ ० ॥6 #रध्वा। 47९॥९९ ० (॥९ 
इटांशाएहशं ॥ 0णार्टापताव 6 7वरंपार ०07९ ९एशफ्र0वए बिटाड 0॥80 ठ870 ॥8प7० 7906 (0९॥7 
52४00 6 0५छ९४पा९एा5 ठात (0४ ९४०एश॥एञशता$ ठुण ९ तंद्रा। ८००07०७४०07०8. [7४ 0॥8$20५९77 
् पाढ हींग), जी गा का$ 32०८०णाएदा।ओ९75, ४४७५ [९ ९८०ँ८प5००७ ० ४९ 52९70८ 
छक्शांग्रशां5 टक्षाव९6 ॥70फ9॥क्‍2॥07/2768507. 00[ ८05९. (॥९ 7रव९८7४8॥50 ॥007972(40॥5 
०९25९ 5ज़ा।श 5200९70९5 ही], ग्रबापाब9, 0९ दाब्गाश।९थफए 09990भा०४0 धार हरजाववीह 
वाष्ाए/शंबा।05. ॥॥6 गगाशावड इटाशा$5 ब0९ ८०7) 749 वर।४79९ ९ ८०000९[७४।०$ 
ण प९ वराशाब5९ 52070 ९१००४ागश्या5, ॥00९, 587979, 09 ६6 59706] 522795 
बाठ7९ ९7 ताप धरार7छा९॥6 ८06058085 0॥॥6 8क्ञॉंग्रांवो 500शशत7९८ ९४७९7।॥९४५, (00॥/9 
8 घचाश्याँ ॥00-5ट८0॥5६ 3]0॥९, 79 ७९॥-ए९७75९व वां छाशा९फ 2079शंशा ॥ िंव8- 
820॥66 (९76 इटां27०९) ब्रा 5क्ञा-852९७॥6४ (897 इटाशाट९) बा ०णी। वष्गाधवाए४ए 
पाभा०9॥ निएा052श०९, ॥86 रि58003, ए॥॥०00॥0 0९ 5द45णए०ा। ७४०॥९ए५ ८एॉए९-टाण॥र607- 
छ8५० (7945, ४९७ 855, £56फ॒7 ४१0 ९ चिंटा।शा गाशवा 99 0.9000 8.0. ८0 ०णीँश प९ 
॥9 0776 (5छ8+ ग्राब९४४८) ॥297शव्रीतणा , ॥0 3 052200 07९, शांतिः ४ 9९7४८ 
०6 शुजभावव, (रात 6 8ज़ाडी ॥0गा6 500४9 095 पए 076 5प९८॥ द्वाश्वा 0॥05ट0॥स्‍क्‍8(, 
छ९ ॥38ए९ 0 शावां। ८तांशा एप पांड भतार 3997022टी, 8 0॥९ 59-52000॥5(5 00 4८८९ 
पि९ 78079] ९०72ए/078 छत त९ प्रबंब5टाशग035 ॥9 विश 0 50270028, 600 ४]८९ ए९75४. 


पा ॥8ए०९, ॥ 6प्ा [5 3070 ०67 25९5, 32८0९9९0 (॥९ ८०7८५३०75 ० ४. ॥8(8- 
$2शाशा।[स्‍5$ ए०/९९म्राए् ९7 गरवा35८श।।व0.6व520ए27९5. 7॥29ए $8090, 40 00 |प5६८९ ॥6 
$2श6९ बाव॑, ॥९0९९, [0 06 #079, 3)30 60 ॥॥४९०७५७९. 0७9 ांश-09/शंवाठत5 5॥0ए0 ७९ 
ीगाबा, ॥रशंतिरा फ़ाशुप्रााएएत वा 5९टांब्रावा, ऐै८ ४॥0००० ७९ 78079, ॥९[प्ट 97९]५०॥८९० 
घ67 $९८ाॉव्रा।वा, ४४ ४0०७४ 0४ "0705 #6 लिएत05 [निपाद्ाब) ०ाए, ॥९0व९7 0४ ए25६27- 
€ठड़ांडहा 0 700श९॥-50 घाी।शा 0705 98607 ९ वंपठ॥2८-007#9-निंप्रशञा। 06 त्ावव- 
89967|इ-छ8कज्ावतांठ निणा05. (0प9 बा €[॥0९१४५४ ि0090 ८8 (० िडं८80 0९ 407405टांट726 
बाते ह४ निछणाए (नाव) ० पा 06७च बात >र०ए९० फ़ांब्ाश-टिवाएँ. 


रिघ्प्ष्रषटारट:558 | 
. () (. हि. ७७7; रिउ40॥3 2९०४; 935, उद्यातव 76 चिंदाव03], छ9श॥।; एग्च०० 67 





0. 
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32. 


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वृ॥6 एचाक्काए 7एशिशा०९३ बाए इाएशा ॥ 6 #त९९ 5७ फ्तत्च॑" व्ीजाँसत - 
छप्र जी एृखाधंब शिक्चक्वावए गंगा. 725९ 7४(४70९९६ बवाए पएण॑रच व 09 ग्रंक्‍्ट 
099 रिएाब्95 बा बा व (४ उद्वाइंफा राएएड5९, डिपा, प्रागिजायॉशए, 
४॥९36 ॥्€727065 980९४ ०९९७७ ७ज्रा86 ॥ 5000 0॥0४ पाठत॑शा एटा30$ | 
पा रिफ़ाब55, 07९0395, 40 0878॥ रि६5४0॥3 707 पश॥ पाए साध: 

(2) उक्ात्व छिीवदुन्नएद्ांव-र्िव99प्रा3)5; 2.7.0 
रिया); एाब्रॉएघढााए ?शि०णेशा5ऊ एण छभवाए० वीड0ए, प्राएर्णज।5॥2व॑ 

() रिवया; रिब्वंजा3- 7॥९ चिं०४ वैशलंशा। 2९-हा प्रगा ठछाएदवंशञ 5ज्वाग ?िश॑ंडजावघु& 
पाएप०॥5॥60 

(2) डिदए००४७; 7.2.4.5. 

(8४९०४; 3.23.43.4, 2.3.8.8., 3..6.5, 6.4..2, 30.4.6.0, 0..0 

२४४०९०००७; 2.3.].4., 3.3..47., 5.3.40.9., 6.2.7,8., 6.5.3.3., 7.6.45 

8.6.2.23., 8.7.5.] 

672०७; 30.4.6.40., 4.7.3.2 ५ 

5.4... ८0९५; +िफतवश ८३४एथांगा5 2 0037]|00970; 938; थिंगावतर०, 900॥८60॥5 

60फएछगराशा। 0 गाठंव, ग९७ ०2९] 

छपिल्कालाब्राताब वा); 079. 0॥. (.2.83.5.)., 7०8९५ 67-68 

(]) 8६ए०९०७३; ].7.3.., 8.9.6.5. 

(2) दिया; 0॥क्षा5 बात 6ठा0णा ० गाए३१-विाव 

रि्या।; एा्राफ्रग्राबाछ5; ॥7०ए0॥5॥60 

8.९. चिंवपगात॑दा, 5शाशबर 50॥6; ४९१वाट 882९; ४०एपार 0॥९ छा फिर रॉ्एशा- 

एठीपरा786 नाडश0ए 20 (पॉणर ० 6 लिवीदशा ?९2००)९, ]957; एीठ8096 ४(9फछ 

छत्रण्चा2 3077089; 29925 ]76-77 ४ 

रि९ए. नि.न€ा3;, 50090805 70 ?27000-706-68(€5762॥ एऑपा०; ४०). 7., 3953; 

जिक्षाया वनीड॑णालडां रि०३टबाला व5तप्राॉं2, 3077949; 2०४९ 224. 

पिला; 09. 0 (५) 

ए. 507060०7 0+908; ०079. (आ. ऐर...)४.6.६.); 

5. ०५८४४; [॥2४ 73८९ ०॥॥6 क्ालृशा। 00870; 4960; 8०0९0 82 ०१0 ४ 6ुद॥) रिच्एं 

[.07060॥ 

[2०9०८०१त ए४४०॥९०ए; ६९४९८४एथा०75 ४ ४; 3955; पहतारश छिशात ॥0., 4.57 

लशाव5; 09. 0॥., 2०9९ 466, 67 

नि€7०७5; 09, (॥., 798९5 ]72, 286, 473, 483, 95, 245, 234<:235 

नि.र. लगी; [#6 क्षाटाशा निंज0प्र ् किया टिंब४; 7960; िंटावैर्पणा आाप॑ (0गराएकाए : 

[.0,, !..०॥स्‍00॥ ; 

छू. ठठतंणा 0066९: 09०. 


20 
3-2 


१ 


द्यात निवारर्तठत्त: ।॥6 379 ० एाजॉटवॉजा था ए९ पिश्या 5485४; 39754; फ्र|दिवऊ कार्य 


षिद्याधुऋर .0., 4.0700॥ 
पिशछ5; 09. (४/., 7289९ 298, 308, 336-337, 380 


' छिल्लागणीयातवाल उंात; 09. (॥. (र्च.0..8.5.); 2०5९ 72 


एगा।र 8949० 09. 0॥. 48,0.); 2०96 424. 





29. 
30. 
3]. 


32. 
33. 


34. 
35. 


ए०।॥5$ 89462; 09. ८॥. (६...); 798९ 227 


ए०॥5 89996; 09. ला. ([5...); 7896 24]., 06 0गंप्यार्ं नी7089ए79॥06 0००९७ 
पाढ &ा5हटां5९१ 05॥75 ॥ /ए527 

बैं39725 4.2घ886; ॥#96 ]2४55 0 [3057; 58226 800/05 ० ९ 5554 5९7]25; ४७० 39; 
966; ४०७0ं०े उिद्या्/39033, 72४; 286०5 2,5, 3, 5-6. 

(3) बंगा85 ।९89९ 079. (0. (.7.); 78४९५ 47, 74, 243; 49, 650 67:69; 35- 
36; 29-292, 355, 38; 249, 297, 349, 298-299, 8; 68; 83-84; 6; 369- 
370; 7, 305, 23; 6]; 08; 55; 20-202. 

(2) बेंद्रा7९५ [.९8३७९, 09. (। (.7.):9ए०. 40; 288९५ 84, 95, 5740 69 ((कवब्फांश 
रा) 

(3) (58,; हैधा]4॥ 006 27०0९ शाप्न्‍॥४०5; पाएप्र॥न#एत; ]704फ:०॥०३ 52200 
ए पृब्णंश कफांग्रागाफए; ॥6 7छछिशा०९६ गिणा ए0पा25 39 ठतत0 40 ॥90७९ 0९९७ दांए८/ 
॥९€7९ ७0076 ज्ांती ९ वृषठांब्रा075, एप, 5९फएदाबांटव ॥९7९ ६0० 5एा फा९ इलाशाध९ ० 
इशएवा वा 7्शा27025. 480ं3 597॥4 45, ९72, 0220 972527920 [0 7 20799680' 
१०४५] 

बैधा९5 ९०6९९; 09. ८॥. (..); ४०. 39; ?३6९०५ 369-370 

हें. ९हुछढ; 09. ला. (..): ४०. 39; ?88९ 20 ०१0 [२०४४ ! 

निशा नि, 700750॥; 775288589089प7७४३८०७; ]93]; 0चशाएग ४९, 897096; 
४०; ., 256९5 38-39, 450 ॥0 56. 

नि... 907780॥; 09. 0॥., (].); ?68६९ 32व. 

3.९0. [.8५७: [708 35 0९5८00९० ॥ ६79 76५5 06 8छै09माशा बात बंशा।शा; ]94व; 
(पट०८ & (०., [.000॥, 798९ 2. 

रिगालागावाब उगभा; 09. ९0. (५.७.5.5.); ८४४०९ ता, 298०४ 32. 

रि. (बएा5; ॥॥6 78०0 ् शाफ्श०5; उिद्यांथा। 3006 ]0., पि९छ ४०) ४8; 27892 92. 





४५.5899 पर पप्तर प्र. ाए७ए८:)०७ 


9. 5वांपफ्रव 78! फिदालातद * 


वबक्ना$ छुगफुशा 8 था] ॥शाए। 0 ॥ए2जीतुवांरट ९ एछ070 २5३०४ 306 ॥8 ॥६९०0 ७9०॥05 
रणा्रणप्राट्वागाठु एी€ ध्वा॥९€ 0 ४ गीँ।हएत 5९१७९, 0 6 रिवुए2१ (रिए) ९ ४070 20 
चा९ 98९ए रिब्व॑णीा3 50 0७20००076 005टप्रा४ 40 ॥6 €हांशा पीठा ॥॥6 शा 52ट00575 भरी५९ 
5ठफ्रब्ा० 88४९ 8 ग्रपाएरा ० कांल्फाशंबाी0ता5 एंड, उटावीटांब] गराफ्जआीए, 2फ्रपाएएतर: बागत 
दागबााबा।हदा, ९ #ववाए३ए2तव टवृष्बीए ठए०९५ वां (05९ शश्वागव5 ०28025 एकःएए5 
गाहशा 3०5०९5 प्रांटी प्रछ 8 ९0ा००फ्ञा एांटदा गाव गराए0ए९४ 3 गणाएश  फरज़ीाएतवाव्व 
50765 मी गं5 9806870प्राव ० ४९ 3७०. [([ 95$ ॥6ठ गाफ़ टगालशा जा उिद्ोधाधाव 
प्राफ्चव00597 0 ॥ ३99९५ 93 5 2006०९7760 एगॉ। 8 गणाएशा छत ठाएा इठटांठेतठदाट्वां 
852८5 बात 0९४ ९ एावबॉफ्३४5, रियव5 जला 96 2876९0 शा डंद्ांप$ #07 [४ रिए. 


एम एा ९४ ए०0/सत रिक३80७)3/४:४३2फस्‍ड गत णशाए आाएते एच 


पृबताव ९ ए0765$ गशर्गां7ई [0 05% 0 उच्ची, ९ वए९शआंद्रुवा07 एट/ऑथआ5$ 40 2 
056€ ७४0705. 


बि० ४४३४३, ॥ (06 257ए5ए2८१ (8५७), ९ ए०0706 ५ प5५९० ॥ (९ 5९॥5९ ० '?6प्रा 60! 
९.६. एछ०प्रांगवु ० पीर 50प्राव 9 ॥॥6 इट6९, छग्नैंटी ॥5 32९9९ 69 एात्रा९ए ज़ति (९ 
एारीड 3. 37 गरताबारॉफ 0०06 5 वीग्रॉरसत गाल्वाादु 60 फ़ुठपा ९ 5९९€त णि 
एाल्वुथारएप' जागांटी 5 वएठाविएंर छि ी९ ए७0705 पाशा, जवाब, एाइव0ी5, डरिबकणाव, ४758, 
एज, ॥ 5 एशफ़ ॥ाशाढडागाद पी व वर्गातद '3िए7 ॥$ वएवीवब0ी९ थी 6 टोगफाश$ एा, 
, ऋण, जण़ा बात रू, ए३-०-एॉड ॥5 परल्वागदु रिठ्प्राढाँ गा धी€ 297०25 शा, ॥. #ए, 
अऋणा ढ&गा6 रे, पशवा 5, 9०00 धार घाल्यावाइ5 '8िएेॉ7 बात १2007९7" 45 उश्थां॥00९ 8 2379९75 
, >जा 760 डे गाए. 


89॥॥/05%5: ॥श€ ४0705 6 ७ए। छड३९३ ॥ (6 80 ब्वा'४ ७॥80ए७॥, १5४०७, "75४8 गाते डरा 
प्रतीटी। दाढ एप5९४१ 6 ९ ९४०72५५075 'विधाढ।, ० ९४४९5, (7050870 ० ००७४५! खो ०प४ए 

- हठघा$' [क्‍क्राइडक्‍89); एछ९टफ़ाए | 68 67075; वव्णशाप 7शं्वाणा जाती ९०णए5 तीर जी 
धी€ विधादा९एा, 870 वगधुण्डाएं, ए०006-07) 47४८५ 9 | ॥6 छाया ७ शाधआ।€5. 


ीशा।फ पाचाइडटि0722४ ० (0९32 ग्रार्वागरवु5 02८प7७० एगौशा वा 258 ए0तात5 गाते 5076 
+ ॥९छ जाछ7 एणा05 ०४७97९५5 6९ गाश्यांप्रत ए9०एडा ०णा प्रांदाएन गिलापताए ९7087, प्रा 
- फठणरढा, क्रांचादों छ0ए९7, छंद ढार 850 मर ब!|र्एए25 छा पीर प्ररशंेततेए5ड वैं॥४९ वशतार, 
छात्फुबा, 04०977, कावताप्र दावे 0528. 656 ७०7०5 बा४ ७7४5, शा5ब७)8४, ए।5७8, 
-एाइ्डाएचा), ४४३, ए/इडगएए, एाआ8, एाहआ वात एशाइव्ाप्रधवएवां, 


$ एक्छढिडछछा की पी 9०फगाधाणा ० उक8ंधग, एियेग एक्ाण्शाआंए, 0०॥-370007 





8259065 92४ 9०एपंवा प्र€॥॥795, इणा१९ 05गाढा इएथ्टाी2ट, बॉ९5०॥०० छत फा०्फूरा 
॥॥११९६४ ४6. ७४४ िएाते ज्रंटीा वए९ 2000९8९6 8079 ॥ [6 'चिंद्ा85 एलटी 5 8 घी) 
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3]90 ॥6 एचव९वव78 87 ॥708706 [88|(वावरः एछगांटी ७४85 वैढाँंएए 8550८ ब९0० ६0 [ए0638 ३५ फशॉ, 


टिश्राग्णा॥षारताँध 50909 दाशद ए5 3 ए25९ए८पि 760णाल|6त07 ० 8३4७॥8७ बाएं वितान 0 
पी९ ९शाॉशाए वि छा छा0०८४०० छाता पावाब था04॑ ४४७७, रिड्व/3 9०७5 850 ॥770020., ि्तःद 
घिए०8९९ 8४80॥8 ॥0 | ५८७. नि ७४७5 €एा०चा72९० शा 076 667 |5 7०एछशपि वृषरा।ए (65५ 





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जा सरल ्ठ॑ वाताब एव तेर्टार्वत5 गाते 6 [8 8 $070ए७ था पी९€ 92ए9९४५ ७ धिंड 
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[िठाव व्राडज९0 पए पाते पीर विधारा5ड गाव रााशाहुरटत 70 निंरा0० 00 4 विाणारएः जेपंसी 
प्रावए ०6 तप 40 ॥6 काएवंटां एण 'पिउ्क्ीब ०एॉा. पार 050 ०ए७॥०३५ छा ९ रिवता5 गत ढा। 
]9922 00 ॥5 9€7507 ॥॥0*॥8 5 06फ्रॉंटांटत॑ 35 8 (५४॥॥४' (>?267'5 06॥#॥9). 7॥#४7७ 5 8 
97996४ 67 ०९५४०णशा09 0९ छ९०॥॥., ॥१९ ॥९7०९ छ0ए९३ ७ [6078 900 ३3०प७५॥॥ए०॥ 0 (७- 
2८095 6 0०॥6€ 92८९ गराछ9 ०2 तघ९ 40 पी९ ॥्राएब्टां ० दिल्वणींजशा 0ए2/ ॥0ढ579. ॥7)6४ #7०ात 
09००9 ० 3 कवीरांवा व व खेगा वाबसा।ठा गरंधझा। ॥6ए४ ०९९॥ गरी]४00० (४०प७क 5 पाए, 
बृूकढ एरश/प्टॉाणा5$ $0 रिब5७७ ०७ए ९ छेपरॉ|-फााब 45 6 ठप्राछएण ० रीशाः ८09एछोॉराड४ पाए, 


80ए९7९ॉवएआए रिकल्‍0॥93: २5३०॥३ बॉछशठठा८टबीए $ए०शा ० भार दिगढा ० €वॉए25 था0 
॥पश््र्थ्ातव॑ ० 20095 9९८व३॥९ ९ दि067 ० ए970९८ठः ० ऐश ठार्तथां 03945 (00९७॥ ००॥६5) 
एल ग्रा१ए ०९ (९७॥॥60 एव पीर जाणापुरईा 5७वा 6 तंद्वांग्रांशा (,९, ९ पा०पाा #ै०५ णां।ट' 
$ #९तृएशाए बप4९९ ६0 ॥0 ९४ 8५७. ]क#5 इ९वां ० रिइ्वणीव विवत 02207 50 00तरतिशा पिता 
पि९ गदर छा शार ठंठर्शं ग्राग्फांलांा ह0प५ (&0७0/270008) छव5५ दाएटशा (6 गदा९ रि३७०व० 
वराठप्राा।, विविटर, कक गांकी। वीेबएट एटा ९ घाठप्रांतवांत लाएचफं) 67 4 गश्ताऐएए एंवट९ 
(फ्रवा099॥) 0९6९ ९ 78-44 60०7 गांशा। 43५४ कक7शार्त शाला 35 72207060' 
ए०ए 6९ 2०. ॥96 |त।त6 ० 8 गपशाएडा रण 70090 3790 4068 ९70९5 970 ९॥7 0९३०-०00]25 
०९॥॥६ 0९ए४०प7०० 99 ॥0फ70705 376 70070९0 ॥९€7९. ॥ 5 0॥5$ 940९ ९) 3$ ॥)शग07९तं ७५ 
ग्रधा९€ एशारए (९ 20970673८9 ७९ए९शा (6 ९९ 00705 ([75970॥) ॥3%97०7०06. ९7९ 
क्‍$ वा ॥ए0९श्वांता 00 #09५१॥ [0 छुष ७७ छा 0९ एचॉीटीटाॉत एमी) ॥5 [0706 88७7» ९ 
वमंध्गाताीत्र, छिपा घर ९ णंदात्ञाप्र ० द्वाएपत (ाज़्बाएएत०), ९९ बार 0 09 0९५5 जोा0 दा 
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चु९ठदाबए॥८8] आॉपचॉ005 ॥3ए९ ए९९॥ 66७गव60 एप 3 गिछशाली 5टातठंैठा 49९एए 0 
0९॥तीएत ऐजिबीा8 ध्णीत 709प्र5 0९०९४7९५; 5004 जात) 50049 उ5फ्रादाढातदठ; उी॥७ ध्णत 
880078; 'चिंद्रावश53 छत] 079580| बात 'चिंगुंगणं जात गिठ्दणआछए5, 72४2 [0 (6 ॥07- 
बज्बाविणावए ० चार एछए९ा, | टायतां 599 गांड तैशाप वए०पा #ाएपकी, 8 ॥ ९ ऐि४७ ॥ 4$ 
लए0पए्लतव, पीर 5९वां छा रि्राा5 एंटी टीबा9०९० ज़ीगाशीटबाोफ 0 #70ए004 2४० थ!।.. 8०७. 


विश्चाएटाउाब 0 वरा्६ (09 


8५०. |, 70 (2-6) 97707०एा१5 ॥#6 ग्राफडतट ढीबाबटारए ० ९ 20% ४058 वाएशा 
७9९०३ प्9०॥ ॥९ दछाठएणा९तंएु९ #>7ल्‍९52९०//४॥४०९४ 7 ठ6ी ॥6 वीश॑ंत5 वर्दापतवीण[मर पिड 
58९02९; ए॥0 45 ९ [#70४टां0 ० था धर रसाशंशाटढ प्रश॑ंपदाए पी6 एफएवए३ ब्ात॑ 200 
बा0 ज0 006 00९ ए०एढ़ा 85 3 ताएटा 3०2९5५ 0 8 0श[९5. 8 प्रए७:डथ 0९७॥479 
बाते हछबता जीती (९ १5 ७0830 909007060. वा 7€वदिता 0 जाश' तीएशञा।॥९३, 00७ $ 
0छगातीश्त शत एडस्‍0प्5 ठतंशत९5 (779: 2९909) बात पव$ 4 तीडइधाटा दंद्गाप्र 55 शी, 





पडा 785 १0० 0गए एटा गा280039 इतछ्रातएत एांपी एवा0फ5 चेशंतहड एप ४५० 
ल85 9८९एटॉ0फर9 ॥5 परगएटशाइवं तावावटांश (एाइएशाएएव) 4ए९ 0 जरगंटी ॥6 छांशछव 8॥ 6 
8कॉबाला। ९४765. ॥॥6 ०एवशा9 व्ृशातीटबाँता$ रण फिड्क्शीन बार टाॉशएशआ वा 6 #ए. 


पड्कणकब-रेलत-पघ्र०व: शिद्वाब रि580॥5 एा॥0९४७, 90प75 6 5 था इद्वा।825 पी वा) 
प्र) ९ एथाट7०३, 5£5९७।९०१९, 6 एव्रॉटा5 दा९ उठांत 00 ए४ 2 एरांएटड ० 6९ ४7३७. 


प्रड्नणीकनपफएाइडसबाधफएल: रिज्ञाप णा ९ शठंश$ (?9फ्रट8४0एवआ), शरिणीब इुएा पी अंकाए५ रा 
एंंइएब्रापफुन वैव्शा।व 6 00९ ए 49, एग्रप्ाब टैडणा), िंवापा बातव॑ 875599. 4 5 एटाए 
वधएएबिमां वीताँ ॥ ही€ ्विषशा ०0858वां परज्रता00059ए ठपा जिंगाप्र गा एंशाप 6८070 छुषां 6 
$9(७$ 06 ४३४४०१७]०३. 


(४४०७३ हछा 6९ $6७५ ० गर्वाएतंपरढ 0९५९5 ३$ एटा. 


पिहनोएतबनणीव6 $णा: रिट०टवॉ)।)ाह 6 विवाए एॉ ९ रि., 0५ 35०0 97070०05 (९ 
पीचा5८ा८79005 ० 5९ए९१-89९0, 0ए९९€पं 5७ एछञा०0 ९9 इडिब्प्रो4- 


पहनी बरन/ 8): 7[005370-॥07०6 एा5दणाव 0 ए75३४ 35 ए९९॥) ९वृष्गाश्व णांधा &90. ॥ 
वि९ णिागरा ए एब्वां5एथशवबा3, 75 एऐपायागदु बिएय्योए 8४ ३5० [70900७॥0४0. 


प्रप्तद्तन शाक्वा& 07 2४००० 


गा ब॥0०ागरा चिंवा3, "75००३ ५ग]॥ (.९. ॥९ 907४ट९ापि डि580॥व) 5 667०० ए्गा 
6 कैं०07 वात पीशारए 5 4 छागए९८7 छा ९ ए९व३ा।. 


ए+इथणीबचणरित्की छः 05 इॉवस्त ८6, ७४॥5४७०॥३७ ॥35 एट८शा 06७॥606 ०७७ीग) (९ 50, €॥€ 
एाइ4जीा5द 448 एशशा तंद्यावीएत जाती रिग्ोव 4,९..॥९ रि०त4गाहं 5पा, उिप॑ धार वती९८४ए९ 


(रह्ल्‍गवह्णाछढ) ७३९७ चएणीॉ९५ 0 रित्वांह 35 एटशीे) ३५ एाइग्जाडह विठणा98 एशाॉउिटडो 370 ८७ाफ्र 
]0775. 


एाइनणीाहण्विप्रतत्: (०0ातापागब पीर वढांद्राता णंता रि०8., पाइवछी3 ॥85 ०९९० 0९70॥60 
शाप फ्िपताब 8॥50 ॥ ९ टणरारड ्ि छि्वेव5छुणा बात दाप्ाउ5 शरा६ 8 ९७ ३४०]९८ए९५ ॥॥९ 
बदाएँंता, 0जऐ0वीबरंगागव कात॑ 70498 वब०एंए (0 रिघताव 35 एछढरी, 80 गराताारा छॉ808 ॥ ९ 
ए0्रांर्रा छा एबाप्ब, ॥९ 8 गाराांगा९त 35 िीबठाब 370 0060 जी विद्या& छांटी 
बएएशडाइ गा ढजंतारशं 0 [.00 5एव ॥ वश गारज़र0099, #7 रएफ्रॉब्रावता07 ० पाए ९ 
शाशगाए ॥ वा€ 6क्ञरंग्रांणा रा पार छिाग्यीच्राबण्बता 385 ए०टा दाडएपा९त ३० रात, 2५९ (0 ।ांड 
॥्रदा७ब४ंगधु 90४७, 6 ०९८७८ 'र्िद्यीवएा3. 


ए7४४०७8९४४०छ९७३४ ० 89१९०: ह# शिए प्राधा$ था धार लैए जताट्वाल धादा ए१३७ विव5ड 9९७९७॥ 
विशाप्रीएतव शांत ७०४ जादोी का [67 छाबागाबातवों (शक्वपार ए६5 तंढगीतॉराए ए0]|छनर््व जाते 
४३४. ॥क5 उढीगांठता ७९5 ९ 5प०डंआद्ाटर छा 2) ९ 72805. पका #िट्जोपज र्ज़ एच वां 
ढाणीरदा एछंवट९ 45 7257907$6 0 छछ्मशाढ्ाढ कितः गा।णाघुईं (05९८ ए0 66 गा ९४८ को 





जा एटएडछा. 


एशअरप्रकन्मरअीअर-लोअत एक: 50एाए का ग९8००ए, एावांएड 5 वशाधीर्ते छाती फियाॉया 

९|शाइष्गा 40९ क्‍0 8 हा&807255. ॥6 ९१५७चिनाँ।0ा ता ब्रा 8 धरंएशा ०9 धार 690. (एटा. 
88. $20904 (792४३॥9), 7 85 पी९ आंबध९ शशा 42९ ए85 फ़ा030फ्रांटबॉफए #वीगांधद पॉफ्दाइवा , 
66भताए जाती ढो। 2९ एऐथा।५5. 


एश्नांएछन्करतेस्नतीबशाएी: 2एट 0 ॥8 कार्वाडि70प5 ८000प$ क्षात॑ 8 ॥पएटा ० ठि॥5, ह 
पएाचाज8 १95 छ९९॥] 0९527/0260 35 (॥6€ ०० ७ 674. शित95509९89, ॥ 5 850 2 695 
जरीहए0 42 7९0ए79ण0/९३ ॥ विंग 3 00९? ७ पए2758॥ छिएता5. 


ह#57€ा 3९909 ॥89 ७९ वाशिफाशांड0 ४ ८ठप्राट्श ० ९ छफ़ंगालवांगा ० 
एागाफजब5 (0 3 2855 ० वेंगां05 ांधावातादु 40 ए४0095 फ़द्गा5 छा 63 06शारःर प्णी। 8 
#रपाएशा ० शिवौपा९5 एंटी 376 92९5९ए०९० ९ए९7ा (00497 3॥0795 [९४ रं॥॥5. '॥6फ9 बा९ 
जि (छद्तंताब); शाशीशहुर्शरटढ (ए]श०7१३3); ०९१पॉवएि! ता255 3॥0 0704॥2745. ॥॥6 ॥द्ाव।0ा 
० ०6 ० वॉ5 फछाँगादं 40 50फ॥ ३०एश९वचा5 0 6 लि छा ?55प9388.  र07-0000070९ १0 
फि2९ छाग॑णटांता ० छात्र बाए (9४० 706४ टैबावटॉ2४ॉ४05 3एशककिांट ॥ ९ 2५. 


०षटा,एडा0फए: 76 6९॥९7 एज #॥९ धल्थाार् छिपफ/08, रिइ्वशाव ॥ वी९ ह#ै५० 0० ठत्ोप् 
छ/252८7"ए९5 ए870प५5 $0९5 ०07 ॥९ एशाह०रा5ड वंगाद जात की तश९श॑काड एंटी बाढ९ त0प्राव 
॥6 हपट!|९७७ लिए ॥ फी९ रिए एएाॉ 3850 शावतव2९5 तीढ९ ९९. | 8०९5 8 िी कीडठ7ए 
(6 २58 0वांचा 04९४४ एाती 5 7शव070 ज्योति ठतीषशा तशांत0९5, ॥॥९८ (05९ ८९4 ॥7 
6९ ८०7क्‍06748९9: उिललेठठ5फ़वा, #ै0835; भ$ वलावए जाती विपा5; गात॑ ग्राफ्ुडॉॉटवोी बचत 
4|९8०7स्‍6वीे ए०0॥07 जाली गाबवं6 वा तेष्गाटे धांति जिवातग0९ए४, 06९ 5४09 ० (8 
रि६80ीव्ांशा 485 3 काटा 0 एकातता शि्वपार5 वएद्रॉव8 वी ग्रोठतदा। गेबांत 8. 


| जि ७.) 





१4ाष4& रा एफरट फ वा, 


7, १.0८४व०॥एवग्फबॉाशी।एओ * 


076 र् शा ॥79]09 ०४9९९३७ ० ववाओ रएॉपा९, ज़ोराशीा। बंगक वीएशारर ॥439 ए९शा 
ए/९त०गांगवा। ढात॑ व09# एटााबाशा 5 गा विैहाबॉधार, गंगा एक्राएिपॉजा 0 वैंगाए 
काशलाएार ॥35 02९7 ५० अंध्ाटठण। [ठगी गिव$ वा ग्रांए टार्यए्त लि दि९ बेंडा05 8 59९८ 
डरलार | पर मिंडा0ए ली वां जॉल्गएणा९, एपा श्वि5 350 ९४०णीश९त॑ एडआ८ ग0ाता5 ॥ 
७७7095 339९८05 ०॥6 8009 ० [९ बाएं ब्राह्णएग१९ गाते ग्रठ्रप्रांश25, ठेंगं। 5९०5 ॥37९ 
शाज॥।ए९० (०९ 9! ादएच5९, 20770०5९0 ९९ठुथा 90९75, ए्वीशा ७४७४0765 0ा दाधगाशगवा 
270 9705009, ०07॥९00 ]९5५८०॥३ 0 97९5९ँ९१ 09 तढढ5 ० शाग८५  फातए ए2/5९५. 


पृफढ गबापा९ छा चंदा) 2णाए0प्रठता [0 #एा॑एार बाते ॥5 शगरश्यरट णा वखागों 50९0९ 
व ०९ ए८३ा 38प00९0. 270 छा0९750006 उठ्ठाडईां ९ छब2०छ/0णात छा 6 080729) 
9700९5५25 एंटी #45067760 व्यय 50टाटॉफ़ #ण 4 095004क्‍9 एॉएवे, छा$79 ए०5९०, 
भावगर[०090९७शा7९ ढ॥60 रैप्राद्ांडईं2ट ठ6ुथा$60 ० फि९ ९9५ ८शाफप९5 ० ऐि& ए॥गीशावा 
शाब 0 ३ शाप ८णाएं९९%, व्रिदाबाएा।९8ठो, ८व७९ एणांदांएवं 6 शाद्ाीरत ०॥९ 9५ ९ 
ग20९ए6| (9९४. ॥॥6९ ०७7030 9९7॥005 प्तत॥) एांभंटी ॥९56 टोौगातु९$ ०४0 ०९ झॉपवाटत 3९ 
8 ९१७7 कांडाठताएगी 9200, 06 9206फ॒णंबा।प्र काठ) 35 ९४ टहाएशा) (5व700व477) 36९, 
णि0ए९० 0७पए 6 9९१04 6 फीता गा णंला गठ670, 5390॥0, 0077906 (308॥075 
वाढाटहञावाफ ग्रीपशाररत॑ 24 ्रगदांर्व एांत 02८2 व80075, एॉपााव९फ स्‍९३१तंतव्र 40 ॥९ 
९47 गाश्तां४एवा छरशा04, 7० 6॥0 40 ॥6९ 42॥ ढशपर९5, शा 0९ जाॉमधुपथ)] 600 09॥- 
णणॉपाबो वांशिवटपठा 72466त 5 37०५ 330 ट/श्व2त0 8 7९७ 5020-टप्रप्डी 73070%, णंंटा 
टबा॥९ 0 0७ 7९८078979820 35 छए०३॥फए ृढ्यां। गरात माटी रत 40 ऐएी९ ९रा€१६९१०९ ० (॥९ 
गृठातो ठटएॉफपावां 7१९७४००. 


की पी ९थांप गरंजशठतांधव छशाां०व, गाए रण पी एछ०शा5 705 ॥९70८ 389९ छ९।९ 
९0770586 ४9 कद्या। 90९-३८४०478, ९ (७8707, ७३० 0०9 फ्ापएढ ० शा 380क्‍॥09 (0 गाठशंश' 
दी€ एशाठटऐोबा, छदा& ट0प्रांएत॑ बा006 ९ दाध्वा छ0९5 ७ 6 वाया! उकापवा वां 
निंबधधावां, दी० बेगा। टॉा(ए छ़ुबड ९डटली७॥९७, धा067 (0९ 70फ्रढां 98007398 ० (९४ ?28॥0985. 
ए०लटबा97, णा९र रण पिह बंध ए०९४$, ९००ग्र70520. ३९ए०। ४! ए९८75९४, छणीटा ॥9802 ०९८7 
टंबडशीर्त प्रातंरशा ऐ€ ढोछका गात॑ क़ुपाबण॥ ०0॥९८४०07५, ((९ दिंचन्‍्ध्रता०एरवा वा चिल्धाएडिका 
६६0फ्रच१ रिफापपरा बा, ढातीशः जैद्या) 90९ बाते छ90०9व७०ए ढ5$0 बा 39770व076687, ४४७5 (6 
बपशाठा रा व ?प्रश्यता ए०25९(92) 70 & 'िल्कशंगररां ए2/5९ (226). 


पाल लैबता्रल्नांपधलयारां ० जियातएा िंद्ापांआ09, जाजार दंढइटाणमद हर टाए रण 
चिंवपरा9, 7र्शशा३ 0 99 पाठ्य छा 8 ग्राणाव्श9ए 6 29 बगते धर बश्नएलॉट2ड 07 गे! 
| ७७२७० पान५ कक २७७७७७७७५४५४ महा ए०म॥५«+मक५+७४+४० कया 42५/१ ७४५०० कया ४७ सा प्ा्ककन न ३ल्‍बमनम्म छकदकन्‍क-के+००ाअन. 


तन. तल ननल तल न ननीनीतन-ीननननन++-त-त--न+-+-++++-००-०............................. 
(कार णि नाञ्नजञांटर्भ 80065, ३.९.७., प९ए ऐशाए: 20, ए७छपराफणवा॥, व... पि९ए (ठग, पि.0७॥॥-67 






$2९75, ४४१० €०पांद [06४68 ्रा० 6 फ़बडां दाठ 6 पाए/र 20765 जात सं फरार्छचा, १ ]॥8० 
बैडांश ज्राबटॉ0९ ० इशनिजाग्राठांगाता 0७ आठ अंवाएधांता! य.९.एथशॉसवश्प्रजों (४७2055879) 


8 गाशाएँए80 व 5९०९३३) रिप्रावण ए256९5. शेर हएटी. 7ढिशा८४३ छएप्रां6व धाठाटढाश (6 , - 


इएाण्व( छा वेदगांइो बी तीर वा्जों 7९607॥ ऐप पि९ एऐश्वांगगागदु ७ तर एफाइावा हाथ वात (0 


वी 978$९08 रा गंगा) 5802005 806 इटीठब्रा$ प्रा० श्र 7९55९०८९१ ॥ छत पडा . 


50८९9, पीशार 5 र९शंव्वांगाए ॥0 ९एंतशारटर ० व्यां। 502८९ एशाप ्रीप्रशाटर्त॑ 9 बा 
$छगटदा। छठफ् 09 6 ढंग 9९)९४६ ॥ 68 7796007747८8 ० ४०707 ॥४., ॥॥6 खैद्वात$ बाते 
890606॥#$5, ए/056€ 9765९0९९ $ 2560 0 ए0०॥ी ऐप काशादाफ 7९९7/९८९$5 890१0 चत्ो0।'.6 
बपाशश्धाटर्गाप्रि 97 6 गा छठिबीा।ं वीइटाए0ण5 छा ॥6 260 टशांपए 8,202, [40 शत 
०९॥(धए४ 8.0. 9९700, ए९४72८ 30८९9०॥९० 35 [७० 60095 ० 35९९॥८५ 0 ॥शा०घाए2४75 
८७०८शााशतव 706 जाग ॥8 5्ातोएया ॥/7९८५ ० रएजंरशा०९ थाएं णी०, 09 शी ९४शाएथाए 
बाॉएप0९5, 7९7९ [0 ए९ 765922९व 85 80 90 इ९टांणा छत इ०टं९फ् धावत [0 जराठा 6 
[597 गिाठएर75 ९ॉथात९१ वि९शा पा्ांटांदो 5पफुए0ा. 


[/४९॥गवदाफर, पी९ [एछ0 73)07 ९77९5 ० 6 एथआऔऑता) 0७55८$, 7.0ए९ 270 एंड, 
870 [९ ९५7९॥0४)9 शैपा9॥50९0 389[702८॥ ०0 [06 ९०79 वा)॥5 40 7९॥6807 87908 ७४०१8॥॥9 
॥एशात्राारत प्रा्वचरिटाछएत 0ए € बंदी) छा उिप्रतृ(भांडं 06९45 06 सशणाप्रीटाबांगा, परर्तांवाता वा0 
54 एचा07, ॥॥85 9९706 ए४७5 ८)478८९५९6 ४9 67 दागताीएणाई, ॥90व ०३३४६ ० 502०9 
0प्र्रांध्वाता बा0 तीहिशा। ९९20-0जॉपाठ) 200९5 ८2606 [९ शांधयां, ९ठढटी णांता ॥5 ०जा 
पर0िग तरशाए, 72897९5श॥076 0/शिशा। 5000-2007076 79९053. 4 45 णाए ॥ ४९ 7९9॥00 
०[॥ फाँगरा।5 (गा८/्प्रै््॥), प्रीीशर 5976एॉपादा 0एढचा0ता5 एटाढ |रशाहड4९१ खात॑ (९ 
॥ररयाों 07 20556] 20725, पर४72 [67९ शव5 3 5छप्ा छा ह06 बातं॑ ०0शग्राष्ावलंठां 85८॥एॉफ 
पीवां 6९ गंदा बात उतार ढीहांणा5 ठुवागरएत 0072९2०5, 9द९एॉ३7ए बरगा079 ९ 
879982735. 


पकाढ ९गाए पिचाया। टच5505 ७९7९ $फ्रशाशावराट्वाए 208टॉ९8 खावे बरष्थाहुरते प्रयतश' 
वीशिश्ा बा009038 घापटी िषश के ९ 77 - 80 ९एाॉफां४$ 8.0. एजीशा (९ हर7९ 
58785 ४३७५ ध्रीएशा 0 शाह बगाओी जीटागाफ #०३१९४9 फ्दा।णावेी१९० ऐप गी९ िंवतधात्ा 
रिब्रा0५०७5., 6 हा 8 9ीएशा (8९८९० (60 वि€ वेगा)। जिग्एंतेव 5ग्राहाब 0प्स्‍0९४0 9७ए 0० 
एब5०704, 5 एणओ। ० ?0]फ्रण०908, 7 चिंउरतपाठ ॥ 6 ४.६. 528 « 468-69 8.9. ॥ 5 
प्रितश ०९॥९४९१ शिवा ॥5 5वाठह्ी5 गाछषाशँफ 7एसए९०त पार िंपां5 उद्या्ीच रण 6 वेह्ात$ 
छार्डात९त 0५९० 9५ 57 (पराठद॑बंधात॑8८चा फ्रथ० बा०्पाते 8 4७ ट्थांपाप् 8.0. 2 4 922९ ८80 
एचग्वाए3 30रातीरत जाए पप्फरूगाएएएणीफ्र गा 50प॥ कैीटठा तीड0टॉा, फ्रशरट 3 407 
ढेडात्र ॥0१स्‍88४0ए9 ९ज४९० फलशा595 िणा। पी वेश शाप 8.0. गा 6 एशीएवे छत गा 
बड$णशातंधाटए 4,6. व [40 6कि एशांपा९५, एछ6/68 वी शिवरोकां एरार स्शावंटा९वत 54790, 
णा९ ०७ पाला एशाव फिर वि०४5 ०ंब एाएणाब्चुड 7शावराएत वा उ5थारंणा 99 चियां 
5बाएड0579)7 ॥) 5.380०8.,0. 458 | [8 रिबांबीए गाणावश९शए-९ वाढ बंठगा। 5गादाव वां 


व 22०४७ ३0४8४ ८ ॥ 0828 मी 03७07 ७७ 
54:7१: 22272 22222 22220 
:220220028/:000:2500:22000:0: 20227 222277:2020 


खिज़ाशा 0 फबांत वगा2चव० 00 पशा, 7765९ पाणााद$ छा९ 0टी९एशत 00 9०९७ ऐ९९ा छुशवां ५ 


रे 


- िंडतंपादा। 45५ 250 0०९॥९ए९० 0० व4ए४ एा०प॑पटरएत॑ 82एढ७:व ए0/05 | एीर एॉत्धॉबिा धइृलााट, ; 


-809४ ए छंद एीरिबशीजप्रॉडडक, टिएंश्फॉप शा बडत ्वीाए॑ीएएॉश0) ए९7९ (0ए7 (0 (॥6 
बृणों 539ए4 उिँद्वांती अं 68४ वाएा8एशाफबाब३5ा, 300 गंतवानध्ातैवा,7 





वाद 90०8-5876काा फ़ुटाा086 छछ5 ०णा€ ० व्यशंतिा 0ज्रयाते$ 8 वाढए ४00०0- 
8००४८०॥7८ (णजबॉता, (2४ ९47॥९3॥ ९एत॑रार९ छा इपली  लाबाबर 3१श९०वातशिध्ु हा ४ 
क€ब्रां॥्णिव् छी 2 70 ८श्माएए 8.0. [॥6 फ्ांराएशांगरह 92700, 4.6. ॥०७४७ ॥6 4७ ० 6॥ 
'हशाएा।88 80.0., 7९29725275 8 फखाआं।ता वैपांगव णींटी छठी उिप्रवेतोतोडशा ठातव॑ उंग्ोषेशा), 
छथा।९0४|8ए7 6 शा, शगाशहु०।त 35 ॥6९ 0.ागावा। 7शीह्ठा0ा5. ॥ 4$ अंध्ाीट्रा। दशा ते 
इ९ा)९5 0 ७४०४5 ०ा श४ं८5, ग्राछाबाॉफ व70 50९वच ३05 ४८7९ ०८07790520 00७779 [75 
ए9९॥00, ढतआ05 2 ७ ण्ांदा ॥8ए6 ए९९४॥ बा॥एप्रॉटत (0 चत्या) बचत छि944कांश बणी05079, 
प्रत१७७९ 8४९४ ॥09॥ 9385 [॥८ रिब्रॉशिर्ऑर|खान्रॉच्घ 67 ९ ९6०९० 3॥052(0 ७०7॥5., 5006 
छा रछग) 5एएी) 85 तार ॥#प्रटदप्रन्‍्यों ताए फिड्लॉताएबथर ॥5ए९ एटशा 7९2९० 85 72950725 ० 
वृद्शां। ॥8/वॉपार गात॑ गर रात वी शांही ९इाणशा 09 6 द्वाभाड 0 40039. 7#6 टांदास्‍९९॥ 
ह09ब८८ ४०7॥5 ०४९ 6॥ 6दव75, ०ए गाव [878९, [0 उ3॥ 3५४०75. ॥॥९7९ 37०, ॥0४४८५४८।, 
प्रपा 5 6 व8687065 ॥0 णादीा पी€ वेख। €ौद्यावआ5 0 उव09579 8०९ ०९७१ ८079070५९१४७], 
85 ९9 ॥7९€ ॥0 ॥0070एशाए09ए ७०706 0ए 0ए शंतिरा वाश्याव] 0 ९ॉशाओदा ९ए॥७९॥८९०, 


 &07श॥709 8॥॥076छ 2९5९ एटा४ए५ 5 धी९ दुषच्चातनों, 07९ ० ९ छाश्वांट5 पाा। 
९]85905. जिडिश्यशां ९५ 8ए४ ए९शा ९५७०॥९५5९१ ॥९दुगवा।बद 6९ 7९६00 ए 5 8७०7 
वृशपण्ब्रोपएगा, ९एशाए 5९९ लगांगाादु पीर 90९ 0 06 ॥5 07, #९70965 ॥3ए९ ७९८॥ 780९ 
(0 राफ/रां 6 ए27/325 50 35 [0 विए०00 ह6 ८|७॥॥४5 0 ९३८॥ 5९८(, 8 72९॥8005 9777८9९5 
बात॑ ॥04] ०04९5. ॥॥6 (घ्रशछी 5 ० पराएश/53] 790792८6 9 5$ €८व 800 7077087९ 
श्बप९, 0 एगा[6७च अंधाटगा<९ 5 6 ढतज़ाउक5 शव 9ती ९ दिंएश्शी 90 फिल्यॉश्वताएशः 
ए क0 ॥०ग-ंप्रीणव (४गरीरएकरश्बांब्योप्रगा88), (९ 8728872९55 ० 35८९॥८५ (#रंधीशा एुशाणात॥3!|), 
3०5॥0९00९ ॥0॥7 गाढा ९बरॉँएव, 727797९7०06 छा परणातंवा€ 795, ॥४ धद्वार्वां7९५55 ० 
॥शाप्राएदा0ता, एशालट्फ़ांणा ० पा), कोेशां॥ञ९ए066७ ॥07 3॥2000] बाते ९ाफ़बांता ता 
0९४7४.९ पृ॥९ 06८ॉगा8 रण दशक एठ0चीत 8]80 5९९४ 40 9९०7९७१९ धी& एश-४005 4९77८5 ०0 
बगा। वीशबापा९ 5ए८) 85 90705 07 ९(॥05, 09] वात ह॥एए७७ 370 रिघश्श्र28$ . 


पृकर€ उब्रा)5 गएएंडट ॥6 व्याीठाञांए रण ॥९ पाना [0 8 वंगा) 4692067 ०९०७|।९० 
हि|ब68794 0 िात8|॥०948, एजां० 5 0७०॥४०९१ (0 ॥30९ ॥५४० ॥॥ (॥९ दा€क शै्वा। ० 6 किए 
व्शाप्राए 8.00, 300 (6 विश वा ० फैट कीच टश्माप्ाप 8.0.7 १॥७ &क्नार्डश ह7छुघा९१5 ० ९ 
बै्लांगड 768 079 ॥6 दिए 089 ९ ७०४४ ॥$ 8 ७74०९ ८0068 0 ॥073)5 985९० 008 ॥6 77१८45]९ 
रए क्र्रेह्राइब, ॥]6९ 52709ण075 7७8धशा८९ 707 (१९ 6९570७८(०7 ० |6 |$ ॥2५४९॥(ए 


0९८७९७ 40 ७०७ ही€ दांत ९५८९॥९॥८९८ ० ॥९ (#प९ 35९८९(८. ॥%$ 45 5440 40 ७९ 9506776 60/ 
9५9 ॥॥6 ८०फफाश. * 


#सरजांइ०्शांगतेक्रणाटछता एसॉचराज 079 
घएांए बश्पुफॉध्यववरबाउयथाी शय्वाशछ," 


प्राष्या)8 6 6 8 ॥वा9]6 टरबापा९ 0 ध९ 5०९ प्रछ०्णा 004, 45 7 एटा पीछा) 
व ॥॥008व74 ७०६०5 9९707760 3८८070॥9 (०0 ४९४४८ +0।९६."९ ] 45 (९7 ९(88960 (॥3( [९ 
० जिवीया प्रदान पीवा 5 7] ८0०ग्रॉ०0पा9 एठाफे सत ॥7९67ए बात 98८८९ ४७४ (९ 66०5 
एणांगरएशव  शिर दिपरन। 7९छुबाताद (॥९ 90572] ० ब्रक्रैच्रनाछ६, ॥5 (0९ वंशा3 तेंद्/अंबगल,* 
मैपणादु जीरा वांराधगं ९एंवंद्व2९5, ६६४० ९० ७० बीणिवंशत 09 ॥2 छठ छा 5 भ6 
7९शिशाट€ ॥0 "#ैठएाब82एव70" ॥ (९ किफड ए०पए९४., &८८06]ग6 [0 (४९ बंजुअवड लंड 


मे 






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#ैपछीगघुगएवा) वर्शाशाड 0 ॥9 किए वीक्राइआ7 फेडवफतड6००७ 0 #ैतेगा303, ॥]9 वैशागा5 
ँ0हहुपरशनअरईॉस22, शाखश्श्याइंेक््एल्कुशिया", फकरृठ्लॉएबप्रलिाशितेशए89', प्रांत का 
एछशतैन्राशनाॉंविंदश', ठतत छशांग्रएशा वशतैल्ाायकत' एतांटी बार ठिपात ॥ (९ दिल्‍ली, 8०2 ७2९2१ 
(िि्टात 0 तंशडटाएिर 8४ 5९एशा3 279ए९5 छा पी९ गा, ए३४४०७७5 00067 (€शाा5$ 826९ 5880 
वरराए/टॉटत॑ 35 एटिफं।एछ ० 6 गंबा3,7 पशाढह हिए! पीठ ९ 60रा९€7रहाठ7 ७ धीषट : 
बा।द्ॉ९०४ाॉ, 8 चउंठा3 एठछा५॥ ॥ 87]|, तए0९५ ता (९ रैथ्कशी 8)0 ॥2(275 [0 ॥ 38$ 
"एप" 6 6फप7 इटा।एएढ' विच5 था50 9९९2) बैशा क्‍0 5५७7० दिशा एशारएा पता रीछ 
॥एश्शी 45 83 वेंद्ंाव छठ. 7 रिरांग्रारबदाीवा 5 7600008॥ ८०ग्राशशांध्राए 0) ॥१९ टरध्रश्ज, 
धारा  326000972९ ध्योत गा 0प७ था0 (0ट27॥725, ए०पंत 364 5४9970०07 ॥9 [08 
बैंद्वागठ टीबां॥5, 90.0.70फ९, ॥0:2९ए९7१, 60९5 700 ब८८९छ७ाए 8 वंद्वंतव टांगात३, 0. पीए ऐशआं5 
छा 3 ८00्कांट  ॥6 लीच[एछ/ ० 6 हाश्वा९55 0 350९(९5 फांसी 5, 82८00000 (० ४9), 
वषांल 0५#एट0ए९ ७० भीढ९ 066३ भी वापएएीपएडा एठ5 3 वें. वार रलॉसलॉटंशा ० 
पफ्प्र्गौपश्वा, 2096 ए2९०९३४, 4$5 09्सी४१९€ 707९ ८075ए9600"0प$5 फिछा शा 5 टाी8फएटा, 4 
८, (6 दिए च्छी ९४७०पा०५ 6 46९3।5 ० ्रीशिब्॥ ॥ 9) ॥5 व ८075, ८ॉतिंट, 50८8॥ 
बात ९९०70०. ९ द्ृपाठा ब606॥९5525 |#ं52क्‍, श्00 7284359 ॥0 235025, [१20%9९५5 67 
5९॥९६5, 40 4९ ७|ॉ॥0९ ७ 790879४870, ॥#0७5, ४)३९०८४ 789 ७९ ॥06€ ४७३९८५७०४ ९५४॥/९४$९४० 0७9५ 
$ट0]975 0 [72 ठांछी। ० 6 इँप्ारी, ९7९ 8 0 0000 हा | | गिड बाप॑ 0ाशा0/ 
गा शाटरछों ७0०78. ॥6 ज्ागटाए९5 ९४एठप्रात॑ंरत जा कै बार ठा प्रा।एडटा5गी 799॥09007. 


पफा९ फिल्कांद्रतांएथ7, एकादोी अश्ात5 ॥65% 0 6 दिंपल्नी ॥ 2डागिबाणा ॥5 3॥30 0॥02॥ 
[0 9९४ 8 बैड] एठा70, | 5 8 ७०7 69 दिवांट5, 0्शी।056 ट०णाए7०0आीएा रात 2०7्रीयातठा ४ 
35८7॥/0९0 (९० 8 फुषांठत0 णीशा 6९ छि8 0 सीद हां।त॑ इ769ुवा) वा िंगत॑पाठां 5 उपछएए7०ठ05९त (७० 
परदए९ विी0प5॥९0.73 ठफ्रटएटा, ९ धवतात।ठा हढावागातु (0 6९ सिाशट 5व्ाधुवआत5 बाते 6 
बाचराँएपॉांता ० 5076 छा ९ 48 ठ08०0॥९ ४०705 40 एी९€ साशिवाफ़ #ैटवव4९09 5 ० हां€ः ठाांवाा। 
वाव॑ ॥8४706९ [(॥6 'िंत्रांताएशओ। गांधी एटा 0४ 3 970४/-5वगाछुवा) छतठाए ज्ींटी, ॥09९०८॥, 
[0०ए९४ (#९ 67979 एबवी[9) ० ॥6 59876वा वात॑ ४४७५ 20905200 एात॑टरा [6 फ्धा707206९ 
जज पर निद्व077वां ?30935., 06705 ८०पराफ़ांश रिबर!।प्राधागाता, 76ाध 0७ 5 उरद्याघर 5 वति0एणा। 
वां छा९€5९॥७. 20796 ९5 | 8 ०0॥एथशाएण! ए०णिशर 0 6 (ए्डाी 500 5995 0 [695९ (७०० 
छाश्छां, ४0705, 5९१०॥8७ 35 ॥ररएा8) ८0शा3725, 405शतढ९ 709 3 006 6 हुआ पर] 
९ ए्मी०णोीढ ९2 8॥80 502८व३) फ0559ए छा पी दा >९०092.75 पकढ छ0ा+; ६ गजीदा 
एी20 (९ प्ररेक्रौत्ः एंशवैड्वाक्त, "(९ ४९१४ छा थी९€ <्जॉीएव075 ० ९ इ8०७ॉ." पृफेश ए७07 5 
7९एांटाड जांता 0895 82 68 #52९॥06 रण ए९वात, एप खाए 9००9 गात॑ ६ जेशणए चारा 
94589 क्रिक्ों (938( 0९९१६ ० दिश्वा8) 6९(९००॥॥76 पी९ गवरधा€ ० फ़ाट्श्शां ॥0. 


जफछए/र 458 ॥0० 5०69 ३०८०पां री ९ तठांदांत ० पांड ४07५, ९ ट्जाएएएोे 
तेंव5ठ0 48 90 97०९४ 3000 उद्याव 35९८९८५, (एटा 0ए जिओआं)९, टगा€ 0 6 रि्वाठंफ्थ 
ए०प्रा।ए छ्लीशार ९५ ए९श/९ 5च5ए7णाॉंण०त 0०ए 6 रिक्त िण्ठु एिंप्रागएफुणापएडपता), तारा 
पीए  िध्ा।॥९€ एए७५ 0ए६, ॥९ए जांशारत 0 शाप 60 पीछा एज) ८0एणाए7ए, पे तीर रिग्रातएड 
फ्राह् 72095०० 40. गण ती९ ४70९6 38८९४८६४ 0 88ए९ ही, 50 पी९ए फरार एजणाशावांगढ6 
00 06987( $2८शाए ७ परत, रबी रिविणागचव 3 पषकारो। एातढा ऐसर$ 5९३, ९ ॥०९७ 70 





की 57020 7:02 20%: ; 

द€ चृष्या।द्राड ए९ा९ रवावाएत बाते 0एा4 (0 वाहि जातरशफ 707 0१6 बाठाीशा, ॥॥0॥6४ 6 
6छां ॑ बातुरा, 0तेशरत विक्षा। क्‍0 9६४ (॥60छा 0 वा€ वएटा' एढाठु2, 0५ 7 ए8$ 0पात॑ एव 
४ छद्मागन-ैर्बा 32700$ टाबांगािगवु 7िपए वैष्ापा/रते पृा्भागांत$ गि0ववॉरप॑ बात॑ इछटा। उठकर 
९ टपाशा। थात॑ टक्रात2 40 ए€ 987॥. [0 ॥25९ धो९ गत 88०४ (€ ग्धार फिंबौद्तेपए्नर, 
85076 ०ागडशा ए८१525७ 6728 5806 (0 क्‍898ए९ 7९ठटाीरत॑ #6 छद्वाह5 वा ०त_€ा 5905 शांत 476 इ5ठां6 
009९४ 0फा6 ॥ ७ एछ० ०0॥९८ॉं0ा5 ८2९6 एकाॉग्रयशाणी गाते कैश्यारशट287॥7॥. 5 [)॥6४ (९ 
905 ॥९ए७7४ 00वंंग्रश्त ९ 9>05फुर्षांद्ाए ९7[0720 09प [76 फसिंब्ॉब्रतीएअ7- 


वृजशार $5 तीहशिशा९ ७ ठछातवागा द्रा]ण58 5९०३५ 7९हुवाताग्व ९ त&6 ० ४ ए07६ 
गात॑ | 5 एडा0प59 888800 0 ॥6 गि॥ ढषापाए 0.., 70 ॥6 इ९८०घात 6 76 ८९॥/घएए 
80.०7. (5खा5ुठगा। 927॥00) बात ९एशा 35 बा९ 35 6 5९एशाए 6ा शांत ८९€॥७7५० /8./0.!6 ] ॥5 
250. 2९6 वां धाढ ००ाए०भाँता ० ॥6 सिंडबतीएबाए पापा 0९ 7४शिा९6 [0 ॥९ 9९706 
बीए 6 रक्षा ० धार छग्सं१३ 5वद्वाहवाव ठा चिंक्तेपाग गा 8.0. 470 3080 0प७6 ॥॥6 
चा॥€ 6 ६०]80॥73 0०८फ्ांठा ० चिंवव!प्रा३, 7 [न09९ए९७/, [९7९ 0०7 ७९ ॥0 000७॥ ७६ (0 ।९ 
बापिवर्णा प्र बच वाएठगांग्राट९€ छा वी९€ घ्रठ।॥, छा ॥ एशंगाए5 0 फी९€ 2८३५३ 0 ८णाफएठजआा।ता 
09 35 ॥९ रिबरढाारजातोंएधब्ाद्रददिप (शंकाएटा तींत5०॥९० ४४००॥5) भात॑ #द्ाव05 755 ॥॥ 
8 #ंथा23, जाली शाणाशावराट०5 ९ 28॥९९7१ ७००07/5.5 


वर फिक्रोॉग्वाफबा 5 गाए 0 रकीटग ए0., 7॥९6 4$ ॥0 फ्ाट्पोवा ९700 
(004 9 4 970 ॥0 [3९४ ० 7शीहंणा, ॥॥6 7वग6 40९8 ० ॥6९ छ०$ ॥5 9! ० हैवश्गा॥. 
दिछांध्राथात5 व0व ९ फि्बताएशा 0ए९ 02006 005९॥०॥0 ४४०05 (0प9॥6प0 [6 द्वाशी 
९०पा79. 2096 ॥9$ गंकतए लीबाइटशा5९९ विद्या 35 गढणात “6 #ाणातु 5९05९ ७ घाठाव। 
०णांदुबा00, 2 ९वाा९३४ 35जाबाणा बरीशा एठी९009९5३, ६ शिए०८वां वात घा5९।ीओआ टीवा9 
बाते इशाशागीए ७ 40मत7255 ० गा। धोवां 2९ ७९४५ च्राए/०5७७९, १ 


वर शि्रो्माठी। गत हैश्रारकोटटाबाडा 39!50 ०९॥0०09 (0 (॥॥९ 7009 '८०३।९८व०॑ 
एडबागट्यांत्रदाब्रानोदचव, पर व्यती0ा ण हर एडशाब्रशा0व (5 530 [0 ७९ 6 बगा।व 0फए प्रकार 
थिपा/पावाफ्ावा, 76 वयीणा 55 ००0]९ट९१ गात ९ता०त एरधएध७)।९ ०0 $5ज्रा95 ॥ (॥९ 
ए९शणबच ए९ं।९., 7॥९5९ छ0ए९705 ८0704 गठ॑ ग्राढा2009 9772009९5 ० ८07)6प८। फ+ए 8॥50 & 
980०० 6९३] ० ४०१0॥ए 8609, $0प्रा९ ० जाता बार (००९१ ग॥ पीर वाएब्ॉटबटांफऑनिना बा 70 
प॥6 बर्चातणा छा वीढ कैिगारकॉ०28८७॥ 0०7 "0९ ९३५७९४८९ ० 0७ श9 णा जा(एढ८" (६ 0०९ 
पशण्माणाबांए9वटएचा, पर एठ07॥ शाणाटांवा०5 पऐ४ गीए९ 70]९3 छा ८000८ (एडट2एशशाक5 
जरंटी) 57९ थग89, 82९9७, ७६९५७, छश्थीाश्र८च४ए७ वात॑ एयर 8-० द7ीछ) !॥ 
पबाधांध पुएएशतव9 8 ॥०६५ ० [6 ॥005९॥०॥०१९॥ ७६ छ९|| ७६ 6 35८९(९८, [00प6/7 (25९ 
विए७ शछणादव! ए77९09|०७ बा९ ०णागतणा! (0 0तारा 72॥8075 3)50,2! प॥४ 9० ४०7॥5 रिद्धंथाव१०7 
बात #िल्याश्टाटटकाछा, 370, 85 ॥९0700760 शगा९7, 60गराश्टाएत एव 2 ।29870989 


360007( छा शि€ ठांदा। ० 6 विल्वोद्रतएथा, ७०, 70फ९५०९+, $९८श१६ (0 98 4 [ठि€ा 
07९3५67. 


चृतढ हांबदा, फ््ांटा (५ ०0९ ० फ९ श९ांहव९श॥ |255९7 ८389846$ 
45० $%0 (0 ७७ 8 ७४०7६ ० व6॥08 णांहा।, 0|क्‍8 5प्र0, ।(तातराद। 
चि0जएा ९४८८७ एटा ॥8 १६ शंप्रेश्त 95 ० 05096 ० िगीएएवजथधाठा, 


(8809 2८९४एए), ।5 
५३१, 076 (5 7९७४ 
$0 ता वद्वायी ताप, 





0०76 ० एव वैंग्वैफवा लैटवतपेटा३ए,ह || चंदबा> जाती गएट 'फिक्दावबाए! (0फ्ांट3, 08. कॉयल), - 
द्रल्ाफुच्चाशमा, रॉइकश्मडइफए, एन्रातंडशमा, बाते छि, (8९ वए2 जाए९ड ० कि, 7१76 हांडजों, 40 


हि2(, 0685 फाग्रावाए णदी गरातागां5 बाते शायृजीव95९5 ९ एा।02५ ०0 45०९४९ ॥०. ५४.४. ४. 
एि॥क्नंत्तांठा, ॥0ए९एछ7, ठांते 700 82229(0 शारदा पी९ बणा]067 ए85 8 उंचा3. कैंट एटीरएटत 50 प९ 
चा7069पटा०09 ए९7३९, जशरंटी ॥5 8506 40 गतीरांर ॥9 6 800 ए85 8 उं॥99, 30॥॥5 ० 
ताशिशटा पराराएा/र४3(075 800 धाठा (06 १९(९7९८02९ [0 ॥€ ४८४७७ 40 (९ ७००76९ $099 (रा 
€ ढएॉ075 ॥९॥607 ७३७5 07070005 निग60एांशा, * (कताटयीठांफ्रवा 45 650 ७शा४ए2९त0 [0 96 
6९ 30 ० ॥॥6 वंछक्रोशिकाँतो डछारओ॥एथलेछ ५ प१)5५ ७४०7६ 0९०)३ ण्यीत ॥98 9752फ४ 
० 0ए९ 270 णशवा गात॑ 0एी0ए05 वी€ इ$ग्राहुवआ पवतवाी।ठा बात 35 5प८टी 74$ #९१७९॥।५ 40०४० 
0पए वरारताएएवी टकागशाएवा075. ॥॥2 किंदाशबाा|8ता5 6, एतांटी वी 7९59९९ 6 कौदांबाए 
प्रशा। 785 $8८०0व 0॥9ए 0 ंिपशक) 700 छंटा ॥५ 2ा०तीश ० 8 टरंध्रांएशा 25587 
टॉ559205 ॥8 880 ढावएिप्रांटह 0 गेंगा।॥ 2एी098॥9 2704 ९ वया07 4$ 3390 (0 ७९ 05९ 
एच णावतवाः 2 पर #ंशररंगयां टिण्फुबवेंध, दाइ0 त6९वीणद प्रांती बफएएणशएी, 8 प्रदाएा 
[१९776 ० 2४ 5दाहुबा एए००7॥5, 5 वाएीएचॉटत (09 वंत्ा। दा0एा) 55 फैपाब0947 2709 5 तंठां९0 
का चीढ 5 ८९शापाए 8.0.7% प॥€ ८०एए०शीएण ७ 6९5९ खरा ढटै855॥05 4$ धुशाटतवाए 
3556720 (0 ३ 9०700 ७९७०८ 0९ 7॥ ८शापाप्र 8.0. 0०७७ ॥९ए 99796४७॥ १0 0९ 597९80 
०ए९7 $2९ए९7४8 2ट९€7/07९5$. 


पृक्रढ ढांक्गाट्डा 7943टा८ ए०7ै5 (0582४067 729725९४४ 8 5882९ ० वराशाडंएट वैश्याए 


बलाएाए तठगांगवांश्त॑ 99 की९ गा-०००८ट 800 ॥07-#ग्रागाबाटवी 5९टां्ववाी 7/शॉहा075 4९ 


ब्याह बाए॑ उि्ततताशा, ॥॥९ए एठणएांत 390० 506665 विचा ९ ॥९052]9 शैश्याडाग।कीट 


दबा७१९५ ० हो वगया।5 एशार ह0एणफ्र 0 इप्रा९०।ए ९700९0 0ए हा 99 पारागूगाएशांएवे खाते 


5908] 406985 ए[ 0९ 7907-५606 ॥९हं005 #०एवागच् रगांआ, छिपतेतोाहजा। 870 #्ाणितिआ . 


जा धा९ ए९४०9 णी०ज़ाह 6 ९०८ ढ5९ ०ए ॥९ एटद्वा।धग॥ ९(७४७८५. ॥॥९ ॥027289॥79 
प्रतीपशाट९ ता खंगंग 7लीहांठगप$ड गाव गलावड्ञाफ्रडटगी वीठफपठगा ० बवातओ वीछाद्रॉपार 5 ढॉतीटो 


0॥8८७।ए 5७९) ॥7 ४०7४5 ७ ब्वा) बप॥097॥79 णा ॥ 6 9९एव९आा 7074] 800 ९॥008] ॥60698 


जा 502९०. ॥6 एगंत ९905 5895छग्वी(एक्श्था दावे गिंग्ााात्िरध्शओ, जोलएिी! एर०५७ ४950 हे 


लि ॥ 2 इ$९6 एटशा०0०0१, बॉएड 0 6 तेठातबदारर 6 पीर बंगात बात उिपतेतोाडईं 7९068005 
गा0 धो एप्राढ7८ढीं 787 ण एऐशंए 00४9275, >ला०परवा)ए9 ॥) 6 प्राफडा ८शा॥९5 6 
9075 ब700 एद्यार ०८९४१९५. 


वर जाग्क््ग्सीछतछातव 35 2 ९ए॒ांट ० द्वार वीशटाठाए गात॑ शैंडाणांटवाँ परवांपर धात॑ 5- 


ब0पा९त क्‍0 8 97706 ० ९ (6७7३ 70प्र॥ वियाएि, 0, एजी0 कशा०ा८४१ दा ९ववंता5ड 0 
पि९ 707९ ठ्यूत 922टछा72€ 27 ३5०९८४८-वि(0-क08), 09877 707) 0९507070॥09 50॥€ 70०7 
०0९४5 ॥६९ ?पादा, चिंवरत॑ंपाव बात ४००) 35 ०९77९५ त0779०6 एफ वखंगाी।शा।, उन दात॑ 
6 वाती76 टठजाशप्रा।9, [४5 शजठ एा०्एसंत25 पश३९िं शहद ्वां0 गी6९ गर्वापार छा दी€ वेंढां। 
॥ढाहांए0, (९ बसा गराठावअआंटा23 बाव वरधाशांर5 छ058 गीधावांए$ ए4ए४७४ गा गीतों 
706 9) 207९07907877 500९9. | 2५० |9फ७ शाज्रोव४ं5 ० देद्वशधक 85 97९0768(0४6 


(घरों) एछगाटी ॥8 ९४एवि]९व 7094 ॥6 आऑणए एण 6 ॥९70 #0एवंवा बात ग5 प्रणणाह, #ू 


लीबडा९ एल दिद्ावरदांदा गातं॑ चिच्वतावएं, पड ८0प्र४5क 


पृश्० बिंद्रहांशरोसोँवार] 0 तरंग एब्ावा, 8 ऐिप्र09क8 शुअंए रण पी उछा8 , 


नर 





ह फुएट7690, ८०्आांद्वांघा5 ॥0 ४0०प्राय0९ ॥€४720८2९5 ६0 वंद्वंत्ांडागा 35 5 9 907905४ ॥5 ० 
2डाडतीशी 8 दु।राव९55 ० उिप्रतावाशा एॉइ-द्रनछाॉंक 3 तवश 7९6075 द्वात॑ ए05074८8) 
इफ्ड९९75., ४९६, ९ एए०070 घरा050002०|ए वतवांटा०5 प९ एफछार9०ा4९/क्राट९४ ० वधा। वरीपरटत१2९ 
खत (९ छप्लारांतदोा 5४९5छँँ छा (5 60॥0ए2€75 0 पाी९ वी टठप्रशाए, ( ४50 ७9णाध5$ (० 
श डॉछकॉता ० 7ए879 ०९४४०९०७ ९५७2 एए०० 907-9९७॥८ 5९८५. 


छप ४४2४ 60 ८९0(ईएाए 68.0. 8 शाणाह 7श्वटलांठगा 5९ 79 30 फि९ रिप्रवाट कटॉंदांठ75 
छा उद्लोएंडा0 300 एडांडराचपांधा एशठुदा (0 एं९ णांधी पीर गधगा। बआगव ठिषव6काह 5९८४६ 07 7093। 
9गजाबफएुर गाते 522० 925९. ॥7$ $ ॥शी९८९४ 9 एै2४ छा 660 (९ ९४७काटपा$ 6 
छाक्ञॉब, (९ #रए७३# 370 गरएथा॥ए, जंती ९7 प्भनिद्या।ए €१ा०)णाव) वकछुणएवा बाएं शाएी9385 
७ पर 9९7०९ए0व०7 छा 3 एछठाइछावा 95066, शाहएशा एांशाप 67 5ए3, [0 ध्)0॥ 0९००॥॥०7१ ७७०७५ 
९#ए97ए९६5४० ी।0090॥ पी 5९7525, ९ वैधावा 906ए9 िपरावा ९ांडाश९९) ए०टकाशांत्रड 3 
72९८९55३7५ एशीांटरो९ रण फीड वा।शाइरशए एठण्रापि शशातीगावो ९४9९शाट€ ० ॥शीवीठ75॥ा9 
जाती 5006. ॥#१5 ४७५ 7 वाटरटा 597०7 ॥0 ॥2९ ९"%/7एशा€ छित्वा5 ता इशॉ-07प्र९ गाते 
79९737९6€ 36ए0८७/९० ०७ए ॥९ बेचा) 7शीहांगा 6 5४ एच्रा0, 7॥6 7250 ७०७5 (९ 20790 जञतठा 
रण बारां [प्ररा5 एंटी ८760 06 बछात ९709 73007 0 ॥5 64८०० ८०367 
0 8 976750798] 6९ए06%ा [0 3 ?िएढ0॥९ 506 806 (6 ९॥॥८75270९6 ० ॥5 70$94 70ए3॥ए९ 
॥शॉफाीणा ७5. (6९ €79]९ 35 2 0छ88९ ०6 5080. 


छिए९ 40 0९४ लाशाहु९ ॥ 7093! छगा०णानप९ बात (6९ €#छएुआपांशव 50टां3] 0982 07 (॥2 
छादांएए ८पॉा, वीर उठा5 08 विश ग्रीएशाटर€ गी ॥9]07 ट९आ7९5 उ(९ िग्वाटाएपावा। ता0ं 
शिंकतपाग बात एरढा€ 00680 [0 ट0णाीाि ढक विीटाढाए बटाज़ा।8५ [0 ९ ११8७ वीठा ० 
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८०ण्रए्पांता 40 छुग्गरा।वा ०णराधाएटत 0 0७ 36प्रीटियां बात था बताता एारफ़ 850 (ए7९१ 
पधाशा बाशा।कत 40 90506ए बात €हांटठव7१फ्रीए, |॥ ॥6 ९७४५ ४2०९०३] चंधा!। ९7४(७7०, 
धार फ्राभंत ढताएछाच ता पं ठेद्ा।5५ छ55 ६0 95 ९शाहाठप्त5 वणत0॑ चातारं 9डघट060 
$६९९७४४७७ णगं।त (6९ ढेंढा) 758॥007, ॥१_6 उ8॥ ७०१९४ ७० एड 9९४400 350 77770090८९0 ॥6€७ 
९7025, ए०॥८९७॥६ गर्व 4एवशरतुप९४ ए गरवााहरतणा गा प९तीएफ्ठ क्‍दाभी जॉशाबापार, 


वर वंगंतड 850 3609606 टछांवांत फ्ऱनांटवं पा इषा+९० ० एछ०९४७9 ॥॥९ (४ एछ9, 
पिाएशपदत ठाव करार्थाका 0 चुरा।ह0त छा एटा5९७ 395 39 90फ७87 89७ एी _द्वावएणा) 4) 00९7 
६० ८8779 ६0 6 7955९5 ८०च09॥८व४० पीशआ९5 ० 6 5ग्राशफी रएएनश 270 साल 
07एण/6प ४४०7॥5 ॥६९ (॥४ ैंएल्प्रशादाते्/त एएल्शाओा, ए?लशधरकनॉना च तीर लिया 
निदाप्रशावाते॥ात करन 800 शतएन्ाथ्रॉ्धात 72 दिल्लएएथ 35 एशी 3५ 6 #फडक्नन्ाातेक्वंगरा।िन7 
पाब, ॥॥९४ एंड छा प्रव5 800%०१ था वगरदाीठा ० पाढ शान ० (९ फागिागविा|28 ९770९ 
पएशा९$ वात॑ ऐश्वाए0ादां 30ए6शंह्रा5 ध0 0९5८॥॥७०५ (6 प्रैशाप्र ०  ॥शाएंंणए एशाच वहा) 0एा 
6 9570९९४55ड07 3॥0 (९ 572९८ 50९॥९5५ ९ए०9४0त6 शा।ण0रा्त 7९3८ंछा 28॥70॥76 [76९ ७४०7507[0706€75, 
पिच 35 6 970९250॥ ७ ९ छा ४ए०४९5 अआधगीवा 7९४८४०४ ब्गाठाहु (6 5प०)]४८ॉ5. 


वज्मंगठु 40 (बएचएछ ए?ापएर वह्चा॥।, ॥( 45 रशंतेशा। (वा 33 प्रि०7८९ 985$ 
>€शा पा0४ फारइवंगरांत्रवा। ॥॥ 05 89272 3४0०. 0| (४४ ॥०८ पर8]07 ९€एॉ८७ की वर, (७००, 
(९ बीएबॉटब्रटीगौशकलत 870 (९ घ्रद्धांगाएडएना वार 2०क्‍ाएणएएगाड छा फैट बंब्ा85. ॥॥2 





$ बाँड0 ८थआाडांत0९€760 (0 0९ ९ दाध्योटडईा रशांडइगतदु विद्यायीं शीशदाफ प्रा०मप्रयशा,* व क्तीएा . 
रण परनंड 772 ९एॉट ७४३5 ०९ वाएबीकउत०एवा, 0 45 5ठत 40 ॥998 एशशा 3 080ए७४ हा. 
नैए्4/009072९.' #९८टछ96 (0 गंगाब धरवाततठा ९ एशथंगादुरत 0 ९ (०३ 70फ2) जि779 बाते 
छा3$ दा0जा व ?ठएएडका0.7 8 दिरा प्रव्धाता 2ी89296 ऐप फि6 पायी उंप्रिवढठ बठेत5 दी  - 
गींढा 2 परी! ट0एा5९ ० डॉपतए की वद्ाती 800 5दवाढंदा, ॥6 प्रा660 0 2॥ वच्टटरट ताँ क 
729ए८ए ९ाए 9९.२९ | 45 520 शीछां ॥९ एशा। (0 चथिव्प॑पार्ठा, एजी। |गरं5 छुच्च/घ्र, 70 49४ [१67€ 
लि इणारव6 6९ टणाएगाए छा ९ ठ्वार्व 9065 ० 0 वद्ांती ऊद्धाद्चअना, ४४॥३९ 
ग8779 ॥#€ ताशागद्ाएता एबााशत॑ 0५ ॑द्याब जरा।शि5 ग ९ (76 जी उलांद०घ५ बात॑ ॥909 : 
मकांशबांपा९, #6 90०९५ | ऐड उद्योधुधा, वाबीशावरत पारांत 0व2९ॉपफ वा इुशाहावों बाते पीता: 
् वाएणावंफबत2एचा ॥ एवबाएटपवा, 70 ०0070फ0९ (0 ॥0९ सशवांपा९ ० 00०९ (कज्आान्वुअास 

7989). ता 666306एठा 9 5वात [0 48ए९ 32229(९6 [9४ 2॥38९0982०. (00 ॥7९ बतएं८९ 6 ॥5 
श९बटी९ा, ॥6€ ॥5 ९०7905९० ार उफिचताएं।पादरशा बात धारा) जाती ]९ [एबटोी९7'$ छल्ता$5867 

करैढ ४7०८९ ९ ह०णाए रा 2एशो60 था टांचा। 45५9५5.7 पृत९ फिडर्शॉश्फॉशिश ४४७5 20790560 ७७ 

या [00576 ९ ॥792७743706 ० ॥6९ ०009, ही९ €फीशाशशा५। वर्ाप्तार ० एछशतोती आते 

०वीशा 7९|4९०० 36९4५. 4. ॥5 पिएिशा वद्याबाशत पिवाँ ज्रीशा ॥8 9769४7९४त6 ॥5 ७४०7॥ 40 !॥९ 

$्याध्ुघध, (2 [20९४४ एशा€ ग़पटी ग्रग्र7९५55९१० ४ वा, एपा क्‍ठांडट0 तठपंंप5 बधुग्ा।ईड पी 

लीवाबटांरशा ० पीर वणगाठा, वी 5 इगांत गिठा न्‍छाव80९ए४४ 4906 (0 एरातशाए० वा ०0९७। [0 

एा०ए९ 5 एणाए 8६ 2 व5०टॉ८, ज्रीस्‍0 #990 7९१0प70९0 ३ ए0700ए एंस्यज्णा९5५, रिया 

8 बाणीशा गग्रार€ छा एंड ९2, णा 3९९८० छत उार्बाप4 5 वतेएशांधः९5 रची 0परशागवा।त9 

॥] 8 ॥37799 गरठाग।9892. 


पार गमाएनाॉच्बटांपरयशनबा। 5 वीर आऑ०णाए ० फरार गरए्बॉब, एी0 बॉीशा ॥॥379 
(फपवबा।0705 7९645 पी९ द्ावुव॑गा 65 9फ 5 दि€। वा0 वाशा 7९(70५07202९5 € ४078 4॥0 
॥ए९५ (९ | छा 8 बेब 35८९४८ 20 छुांघ5 0॥55 वा |3$. वी]€ हठ0679 ० राए्व॑व8 णित$ ९ 
$प0]९८ प्राक्ॉश ० 5वग्रा5ंतओ ए0785 $प्रटी] 35 ठब्तएब्नटांभॉबानाओ व0 रक्षपएएपैंअआ879] 0० 
एब्पा0एाबशाग3, (९ ३फ्थाश्रता्रश्र0बमाएव 20 तर जंएन्रातानश्शाश्रयंदएत (0 ६४ शा) 09 
निद्या["व073., ॥6 5476 #0फ 5 3/$50 7ढावाशत गा पर िंाद्यफ्च्च 7808 (पट छाल्फ़्चाशशओ>) ० 
छच्चयाबणाबताब था।व॑ ॥ वी णीह्प्रते जफुप्ागाव. 6५९ 5९एटाव। एशाहंगा5 ० 6९ उदार 
5079 ताहि १0०0 0०06 गरागीश वा एशांबगा पंराचां5. खंप5 पीर गेएडॉबटॉधरालआां, साली, 
प्85 ए९शा 85$9॥2४0 ६0 3 9९700 एशएश९शा 2 928वधा5 रण 6 शाती टश्यांप्राप्र आएं ॥6 
विारा वीबो छा पाए शॉस्एशाओ ट्शाएाफर, 3 त06७४ ॥6 5९छशा 0 06 दा 0063 ४४07॥., | 5 
एढीरएरत॑ 0 96€ 0०35९0 07 ९ ं&क्रएअ०्प्रतद्ातओा। 370 350 उ्वांत [0 एऐश्वः थ एंत्ड्ल 
72$९॥स्‍04972८€ (0 ९ छब्शैएन्नटाशाक्रशाक्षाकओं, #ै5 [06 500 ट्थारटॉपडंएट रशंप्॑दाटर 40 9४४ 
पीठ 056 (७० चराशा 9णाऐेड 2९7९ गां।श[0ता 0 तीढ मीफश्बब्टॉा।ग्रगनाों, धतव॑ 85 था पट 
सावष री 6९ एगराधाशाहिंक पिं०६टग्रदाफँतिगाफ्ुक, ताफॉडोफ4९एचा छ55 एटी४एटत (0 पीवएट 
89580 ॥$3 ४०फ॑ जा पी6 तंगी कृप्रश्या्रक, वी गाए एट फ़ाटउपराारव वा (8 ॥ं बाधा एशाडंक्पत 
॥$ 9बच९ते 0॥ प€ फांप्रधार्बा ऑंजाए रण उरवबाध्थ 2०्रांवाग९१ गे (0० ैंबब्क्ृ्राबनव, एगीएी ऋव5 
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ी०ण 30 + ७७५ फिा०पवी पी९ खेगा।35 शिवा गिषाफ़ 5गाईतों बात॑ शिवा ७००705 ४८९१९ 
[स्‍704घ5८७वं (0 06 दागी 5949९, [॥९ ४०४ 95 5 वीशबाफ 7005 एगी गा पि€ बा 
॥30क्‍007 घछ०आाह ०३४८६ (0 0० 5व्ावुग) ४085 गाते वा ॥6 5व्वा5ंता च्रएएक वती।एणा) जा 
जाली ९ बचाता 5 एरटी बटवणबाा९6, है ए०वर्याप[ बताता 35३०८6685 6 वित00$ 
एंग्राफच, ए्णा० प्राण॑ंर गी€ रिवानफएब्रायक थी वा), जंती वीर एाडक्रॉक्‍्रशानाओ 0फए उगग्राप विवा 
द्ाऐशा बता।(९१ 75 40९00267९55 0 ॥॥6 कसंंफए्ब्लॉछ्रटां॥ग्वश 3त॑ (6९ 5क्राबा0ा ९ 
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पफ्छ भभांश्वॉप्3फए्नाॉ।, बा०एगरा परातं० ९०॥९०, ७३७५ 3।50 ०077905९80 99 4 बंध) १७०7. 
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हा, पितवत्राए९$ा 2॥०0ं विनधुर्वाप्पधा्र॥ ७००३७, 0९2 5380 [0 ॥80९ 9८€९॥ ८०॥७००५९० 0०५ 
बैंड दरण्ा075. 780(९3|/फ जठ6/76 ल्‍5 द00/॥ 7000 हि€ 867 0 पीर १ब5०वी।इ/्श्एएछ 
€#८९ए७( पावां, ॥९ ७३५७ 8 वे0३ 35८९८. [|6 5७079 ० क$ #ग्रफएक 5 70270९0 वध) (९ 
॥रीपवशा ०0 5506९ €ण्शा ण्यीत ॥९ गा।09प८टॉांता 0० 3 5प्ररजशीपेरट 0ा ॥९ बांयव! ॥ (0 
$477€ 0॥ ॥306 ० ॥66 वीठपा, १ पृगराढ जगा ॥ीशा९ वएएटव्ा$ 00 0७९ वा 6 5०७6! 
छा 8 ॥06४ ग्गाशव। ए०पोत गा 7शी2ए९४ 2॥ १507( 0 6 703] 725907540॥॥79 67 बश्ञणावों 
$8८९2, आर९ ९ ९४३श९ागाव! वि्रा079 890 ८0-0फशाबाँ०णा एरपणशरशा पी0प्त 300 ४०70 
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वि€ 0िणातेशा छा वीर विंबाए928 ज्रा050909.7 पृ|॥९ एए07॥ 850 €!९एटा९०७ ९7]क्‍९ ७४/०7909 [0 
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बप्रव्माया चिंचावरसबाधाबा शैएवता (७]वा०7 (8.0.620-650) १0 (१९१९(०7९ ग्रापडं 0९ 982९0 
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व एछा00 ारा पावा 6 ब्ा।रा विदा ० 6 शांधाा ट्शांपरए, एपां ॥ गांधी! एशी] 5ए९ ७2८७ 
इठा6 एशारचा९5 रवाींडा, 70 #ागा3588579, (९४ 5पॉ]07 ० ॥॥6 भब्फ्नापाएुओ कौर 7१899 


चप्रगांर विठा (6 एऐपराडगनाओ वा0 6097 एतराबठ '5 एणाधशांबाए 006 ं897गते। छत) 
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व॥९ (प्रांद्गाबा। $ एवच5९त ता 3 ?िप्राधा८ ४09 ९०7ा/॑गारएत व (९ लैबीइक्रपरनवआक, 7 









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बाणाह (6 बाय 5८०६5. | 5 (९6 वा ह९ (८ ताप ॥9ए९ 0९९८7 'पि]छाॉि९ ७ 'श्छिरए 
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वींढां०तुएपर एगीाएी 36595 9९ ९शगराएफ्र णि एंरी०50एाॉम्र८० (092८७$5४०. ॥॥6 छ०ा६ (5८ 
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एाणाधाशा बा5ात ण्यांदीा 2९ धार उिप0०ा5 बातव॑ प6 #एे5 20 ४765 जा) (6९ वीगठो 
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$ब्रकाएच्पु-ंगव9, तंबाइ्याह वात॑ ढवलॉस्ड् 0 पि९ गाँवागारा 0 फिटाबा0ण 07 छु०0व॑ 
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दरिाउद्याप्र|ं3ब गाते चिंवतीएड8 बा।त॑ 35 6 ९ै0०0वांटॉफए 02805 ० 8 उप्रशंशा ए पी #)सीघचड, 
एछ0 छष्टा8 70 097 40 |907 85.48 50॥2 $९0]75, ॥0९५९१, ०९॥९ए९४ 6 08 छ०7% 
छ485 ए976980ए 20॥90/520 #णा॥ढांग]8 एडॉफएटशा 6 गीएः गए वी४ गांधी) €रपॉधाए 2.0.4% 


परत छाए ैड5 2॥ ९५४८०९॥रां 2एगराशा।|वाए ८3]॥९0 ऊज्ाअएश जिएलअट्शालल ४ॉ70छ7, 


32227 20 
2222 2९०२१०१५१०१४१०९४१२६; 


शावाशा ०७५ प्रबगाशाय पापा ॥ ९ ग्ााक्राब्रनीन 5फ्ग6., पएगाशावे घाफाओं ॥85 ०८९7 
पिद्यावी९त शांत चिंवाइशा3 एल, 0९ वि0प्क गेग्राव स्विटारश 9 6फ/च्लौएव॑ व रीघव- 
एगाटा ॥ ४ ढघच्तरशा) ८शापिाए 8.0. व€ रएणााएशादिंठा ॥45 ए०0९त॑ पं | टॉव्07दांर 
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490० 4७०९५ ][7 पट एरढा 45 5टा।एपराग] फठ/ बाते 5९४ एश752५ 07 6 कैप ॥टट९फए४, 
व गठाणां| एशा$07 0 (९ सिलद्यापयंंयानरातैत काअएग्र्रट479 ० ऊद्यगान्राग्रिी)॥ धैए७ 325 3 ८00९ 
ण॑ इलातपटां छा ॥005९॥0)!0875. 





चृक्रढ वेद 25550 एिरश्प्रशॉस्गिओ, तरठीातद ण्यीत तीर 367 एा ए08फ्र््रा4, 5 
970०0क्ाआांफए गा वातढफुरशातशा एठा॥, ॥० ८0१७० ॥ गाए ० वी९ एवव60593! |85. ॥॥8 
बचाठा ० पां$ड एछ०0) ७७५७ 8 खेंडाग8 0फ वार दिखावप ५९रॉाए, 6९ एटा (एफारी ० ६०ा४५. 
वृध्क०एढ्की एटाफए की $ दाता ्ा की वी, 4 एशटा52, त] 3 7९267 ७०7४६, [१९ 
दृक्ाक्षुध्रशाातंब्रौब्जबॉद्योधबग॥, 52९५ तीवा ९ ४३5 व ॥40९ | परचैद्याएवा, जी ॥35 ०2८९7, 
306०0 छाए ए]ठफज्राबावबागा वी वी९ टजाफएडा०ढ तंज्ञाटा,? पृतर6 छठ 35 750 साठ 
35 रिंएाधु एएरशशरापरत्यतयां, तीरशा ९ वणीताः' बात॑ एकठफ्र्ध्ागाइबाीदी, बरींदा पीट ॥९€0.7 


बृपाढ झताफ ७ ए92फ्रग्राब विद ' रण (ि्प्रड्व॥90व, टठजॉर्वो ७ ९ एव58 7990०, $ 
तंढ्बा जी गी ३ट९एटाठी ए०0॥85. ॥॥6 गरगा 0८प५5 ० 252 ७४0765 858 ॥€ ४09 ०। 5 
ब0एशाए2५5५, ००वुप९३४३$ वात गिवी एशाप्राटंदा07. ९ डिलीगएशगरीव एा (५७9३०009३, 
छवाशा वी 800०पा (९ तीडं 0 5९८०ाएं टशा।ापा् 8.0., भातं ॥॥ ॥४९ रित्रां$8७०॥ |970७392८, 
टछातिग5 ९ ४09 0० फिद्यावजब30489, ९ 50 ० एंवंबए०३, ए725४9९5 व 6०) तारा 
80725. (06 ॥॥९5९ ॥॥62 50प ० एतफ्रढाव 80णा९ 4$ #2९44९6 ॥ 7]९४ उिज््कीद्रा9॥9 ७०॥९7) 
की उगा5दएा। ०ए ॥९ ठउदाढउव सात >िपणंगां3, की धी९ ठक़ांगांठगा छा 5एगायगरवतव एटा, ॥8 
रिए/एचॉसबतविया 45 वात॑र0९० ६0 5 5ग्रा5#ता एशा5ांतगा ०णा ९ उिेनीनॉध्यबा8छ, 3 [७० ठट(0८॥ 
७४०5, ॥ जीती शी९ 509 ० एवंहफ्रगाव 5 ९वबाॉस्ते, वार ९ पएताउपेन्एछ दिक्एफ्रछआ ॥ 
3वा5ऊदा। बात॑ 6 शत्रु एएशा/व3 रिंबएएशआआ, ७० गांठ देंबएफएच्च७ 0 (॥6 28785, ९]0 
॥ €बपगे ९॥४शा एज 6९ 58079ए ० सए४६३.२ [॥2 509 ० छत99979 $ द्वां50 7€/९7720 0 
76 चिैंडाशिरॉदिलौशां व ठतारटा बिंदाती छणाऔ॥$. ग९ एतब्रएशाशाएलाॉंविछ, ०ार ० (९ 
गागणा ९००५, 5 कएएव्राशाफ गातीदरशा पछशाओंगा एण पीर इधा6 आणए, जा ९ 089५ ० 
शिवीप्रगाफिपाडीवबा, (68 ९८९।९८०१०९6 व्रा)0ाबाठतः ० ॥९ ऊाग्रिफ़ग्वॉबत्थका, (९ ०2॥८९तण एथ5 
टपशदाां दवा पीर एंति्फ्र्राना बिन 5५ ७45८० 0 3 ४ए्तए छा इ९एटावा ७४०75 एा (९ 2ध० 
णी॑ फिर इ९टछावे| 5वग75गा., 7 पृश्ञा5 ॥3$ [९० ६0 6 ०णापरञणा गिववां [5 एछा॥ ॥39 0९ 70/॥ा 
चार वत एशांपराए णा ९एशा ढ्थाह7. छाप वा $ 9709406 फीां पी पतक्षप्ल्ला॥ती ६० फिया 
7्शिा।26 0 09 #वाप्रबाऔजानीवबाः 45 ह6 वात ९एछाए बात ॥0 (९ एरच्राबरंछाो, 5॥0९ 
पीर रिएश्च्पॉाविद्यां 5 ठतातारतए 3 ए०) 9३5७९१ णा ४ सेशीनब८७१७ ० छएप्राएणा।[8, ॥ 


प्रापश्ष ०९ (९प गीरा ९ झंडी) रश्ापाप्र 8.0. 67 बए०पा तार 205९ ० 6 रिव्वातप्व-रित्रीवए७ 
एशा०00 .6. थीं ट्शाप्राएं 8.0. 


पर ब्णा।ठत ६0570 एशाः, शाप 5 ठउद्या4, ती52055९५ पै९€ उद्याव तंठटा।72९5४ ॥ 5003९ 
प्रशंढ], निश ॥85 ३6०फ्लॉाटत 8 शागएंर 0पा >९०परा।छ। ४ए़९ बात ९ 7०९४ 76॥क्‍ए 48॥88४5 8 ऊंचा 
[शा बरा०हु [6 वीडावबाए एविडडा८$ ० 6 वात ए0ाति, १6 जएणक ९शाा००00९५ (0९ ९५४००()३।| 





' एक्ाइटराउट3 छा हड प्राणमा॥0059ए9 गाव॑ ०00आ0599279 रण पड बंडा।ई बात की एगलाएिएंबा 
पैरड5 एग। रेस्ड  एांदंउ्रबती।8735 ः 


बृपह बंबात55 शैवएरट परावतंढ वश ०तांधाए्प्राताड 4 ॥९ विहांत छा कष्यागाहा, , 
' एछ70904ए ७96 छउा<०पाए9., 7॥९ १ब्रड्ञाएबाप्रवछनाॉंदिक गात॑ (९ प्रैयफएफलाभ्रयध्ुलादरालरराशुओईं- 
रा हिप्रधोद्रकक्रतुकाव छा ए2०ावए0०१४व #0ाशढॉगिर 0णगातेत 6 0056९ ० ऐै४ छाती) ००मप्ाए 
#.9,5 प्‌॥७ वरचाणा टयो)$ वप्राइ्शा ७ तंइटाए)४ ० उध्यावशइध809., ९ बुआ 48 . 8३ 
बजांपद्ा॥ढयां रण 8 क्शब्राफाशइुबांद॥, जरींटी) 48 बा ग्राएणांग्रा। ९96४ जा 9705०09.. 
फढ वबॉ2: 45 प्रातपढ 9 वॉ$ बहार 2ात॑ वी "एाँशा0$ बा ९ह्बएडा)ए९ (6०७॥987 0 8 
क्ॉशिषा पाहार5 ॥ खाएं, व वद्व३ द्वाए्शा 798 ६0 8 गी28 ए०णाा)शााए, 7 जॉली व चाप 
प्रणराएंश ० फॉढिवाए उछ्शटाप्राढ78, 0तीरा्ाइरट प्रशाता०ता।, वार 9/2527ए९६, (प्वावश्षवध्या, 3 
तहांइटाफ़ॉ९ रण &#ाप्रीवश्चधुवाव, जरा०एं& 8 20प्रााशार्षाए [0 ए९ रिबरंधुनां, जाांटी 350 4$ 5कंतं 70 
ए2 87॥ 7ुठांशा ८207707जाी07., 7॥6 १ब्कामॉकशििड्लाशका णोतवेटी 20795 ० ॥2फ्रएछ 
इच्याएड8 5 वणराएते [0 (प्रधश्छथ्वदुन्ला8 , १ 


पृणराढ 88०%०7प्रोाछौट ना क्षय 5 ठ7 ग्राएठापंवा।। ए७70 जा छहादागाणता, ०35९पए_ ०ा 02 
एण्श्प्रॉछपी६87879 ० पर 70889एफा एन ठ70 0665 एंव ॥0ए९ दबाव ४९० ९४०८7९८४८९४, 
पृ॥6 बच0 एछ७६ ०९ पिदाएठ्जादुशाधाएं। एी0 45 ०९४ए९८१ [0 ॥37ए6 7९० 6 ?िएॉफ्र८ा9५०५॥, 
0०9 6 छएग्या3 ० 06 रिणप्रार्क 2एश 99798 ॥906 6 ० #ए|च४९कोवाव रिाएए७,१ 


]768 फिशाक्रॉक्रबरप्रिश्चक्त, 0700067 ॥7907वा छछा॥ 0 काशा।ए]॥, ७४७७ 2077905826 #29 
०९ ठफ़ावणाव एबातदांउ, ण्णंवंशाएफ व गंडां॥8., | 8 3 ॥07 ९49९ टजाएए।शाच शररैए5९एट) 
एशाफिशह वा060 (९25 छा वीर 0प्ताठप्वाब्रू॥ओीड बात ७45 छा 59०९९टा (शॉप, 8७, एण्फफा, 
प्रथडक़नप 230 89) एा (९ वात [40 0482, 7॥5 ए४०07॥ ०50 5 03560 0० [06 70468999४9७४३.** 
पफढ छाई ॥8 प्रद्धारत ीढा दिए विधीवाण्वाब िशावावा३ छा 5०थाी रंैव्रीधफकृतपणानीशा 
निग्फ्रांछ09प५,% पकाछ 967 एक5 9 ताइएंए96 0 ०९ ए३८९८थाबाता (एथावाढ॥6!) 86 ०0 ॥4९४ 
् एडांबातठेदां, 4९ 5 ०९॥९ए४० 0 ॥8ए०९ ॥0९0 तप्तइ व९ वर ० (चांएजाहव ॥ ० 2 
6९॥0:9 8.0.), ॥9४0 ०ताढ/ ए678 ७ धार 8द्च॥९ ब्रपराी07 ब्रार ९ ४९#्क््फुनर/क्षनों 00 
विद एबएटमन्रशतीओआनबोरा, (॥९ दर 27906 वरग्ाारते बीए 5 श्टीडा,१ 


?€09]98 9९ ॥0श ॥शाम्रद्रापच्९ टएणा॥॥0प07 ० 8 78४9७5$ 0 वैंबाओ ठाद्यगधरातवा 
शा ऐश कैन्याशपो, वाह बचाव ० रगा5 एठफ्पोदा एछाई ता दावागागादा एव5 उि्दाधात), जए्0 
8 उ्योत॑ (0 श४४ वएएत ॥ 6 एशा।। ढश्लांधराए कया िर संता ० ँपाठाप्राछव हरी. 
ह0०९८०070॥79 [0 (९ (6मश्ृच्नावक्ार्तं दा क्क्रंलि अन्त , (2 3007 ७०७५ 920075९0 9 ए &वाक्रा०97343 
शाप्र्चधु्राएचछ, 8 ॥यांएा छा (0शप्चप्र, प॥९ छछाफ ब्रो३० 595 पीवां ठित्एग्राय्राती एछ७5 3 ध्वाए४ ०6 

' $थाव8एप्राथा व (प्रापा0प्रावत, एोडएी 485 ९४॥ 0शापरीरत 3५ 3 9400 70९47 ५8पफ्र्या]879ववा 
6 (.छााणद्राणर >क40(.% छेक्षफख्राकाए0 5 बाड0 उतांत [0 ॥4ए९७ ००गरा908४८० ॥ ८ग 6 
7श्थृप्श्ड रा 8 एच (ठफ़ा धुन अऑपक्र्ररनकॉपद2 फिशागप्रौसा दि्वशीगितेण एछचइओ 
रैश्रशाशुबफक्रपाबिलार्ओ लिबएअरध्बाशा),5 पश8 एछा 890 8 95९९४ णा 7४ 7-७ॉधाक््रा एच, 
बाद 4 खंड, 99 'रै5 अंग्राक्रॉटाएए आ३0 शउशारडड, फज़ाइएांटीए कांडफ़ांडटरत ही एांतगीशएः ७४970 25 
मी 9€हए6 5 व40प0900॥ ७ वा चा्रााए087, तह ए0च॥ उ(क्ातं$ 685५0 0 ९ ॥/046 ब$ फ़ॉए व 
9 8४एाद्रा0४, 5५६ एफिंद ७ दिशा, मं 098 पैखाओ दाश्यापावा अंधाएंड सगतें 22४8 ० 





शा ,१५०३३,९५०, 202/002.0: 25 ८९." ५०७१५९५०,०,९५९, ९, 
सी ि; 02 044200200 22/72/2227 270 22027 


/०११०९०९०१३९५' 


6000७9 . 


पृक्रढ ९४९ वाफणाीवदा। एठ४5 ता ९5००5ावए॥५, ९ एांपएयप्गडाप्रुबवर्तत 09 2 
छएकदवावागणा।, शिग्रद्वश्नेग्रशदुगाधतंप 5ए एप्रगगापा गात॑ ॥९ एप्रतेद्रशवरकंग्रापुद्रावंध 0प् 
छद्धार्तब्रवएपएचछछ बा९ इगांत [0 ०९ वंक्ंतव ००7. गत8 8 पशावकिाहत॑ 8 ॥8 €वावींटड व वाए। 
ग्राष्चु्रातंच दाठ्णा बात 45 उठांत [0 ॥4ए४ 0०९९१ ८07705४0 09 छ9एग्ंवाध्यापाओ 0 ती€ 7९५०९३ 
णा 07९ 586॥6ंका, | ९ शित्रतुग॑गात॑ंगां ए७५, 35 5 कुबप्रॉटगा डांवां९४५, 200705९6 ७ए धी€ $०7 
० जिएव्ंबागापा।, 72 [एए0 ए0765 ग्रापछा ए>€ 558ंदराढत॑ 00 8 7९700 दां४श07 40 76 7458 
छा तार फ|फ्रबंगफ्ठ पार ० 200235.% प्‌॥6 शिगक्रंग्गरोद्ु्कापैध 5 ०0750276व 0 0४ 6 ग0शं 
्राए०णाव7 छा वी6 साहएट गातव॑ 5 एशस्‍९ए९त 0 छिए वी एवडॉ5 ० वारएा ७४0०7॥5 ०7 
]९5८०0873[2779.0%7 


पका९ एचतब्रक्तावणांगरधुब्ण्तैप 35 092एशा ॥९ 09 909प्रौव्ा ० ९ ९९ श्रांछुचातए 5५, 
जता९ ९ 57९ [ए० |९४४८०५ शढाई ए705छ7255ए९ डशबतु९$ ी ची९ व00वच्राटशशटा। ०0 
[९५८०३5७79 ॥7 बा, चिंब्रातवीठएुपाप५३, वी९ ठयीी0 ० ९ एप्रतचधवाषांछुना वैध, ए००४५ 
8 गठाएट ०ए ए॥ग्एपागा 0 एागं (?शाप्रातद्रातप्रा क ॥6 565प 8८०७ ए>ज८०). ॥॥6 
छद्ातछकुयां रण दागोाॉविष्वकुवाबर 5 वाशाणाएते था 06९ एप्तबशवांभांकुब्ा तप 20 ॥९४८९४ ॥6 
बप[]67 €०प्रांत 0 ॥3ए९ [ए९त 92086 ॥6 ९०ाराए065607 ० ९ ऊकिब्वलंदुओं, 7.2., ॥6 ९] 
"शाप्राए 8.0. लजरढ 380 ९0परत ग6ठ 438ए९ ए९९॥ [९ बंइटाफा९ छा ९ (.प्रावणाीवत)9 एश0 
टणाए़ोरत॑ ९ कैंचीकुएशलान 0ए)त75द 6 वां छा पीर रिवज्ञावधपाँव विाध ज्ञात ॥, | 
8००पा 8.0. 896, 35 45 ०९॥९ए९१ 0०ए इ०ा९ 5८॥०।87४.५१ [॥९ १णाठा भिगाइशॉ ठाए2४ 8 2८७९ 


80 कां5 ववदशाधाफ की 2 2077९: 
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एच्चत्ग्गवे५४:६-$प्रशच्ए्रतेत्या7व फ़लग0 सनैिंथात॑॥]ए9त797०. " 


प#_6 ४०795 "प॒॥]॥97979फ५8/ कफ॒प्ा80470९7007" ॥श४ौ६९१$ 40 र्॥09]898 370 7० 40 (५७79४9॥9073 . 
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वाप्राबाप्रापणावबां बात॑ 5 इठांत (0 92८ ७९ एशाज९ते वा 5द75%0. 672 89]2220$ 0 4४९ 
€शजआा20 3 0चावीवताव 0 6 सागर ० िकश्ञात९एद्रावज़्त गात॑ ॥€ वितं5 767॥07 8 ७०४४६ 
०ग्रोरत शनीतोगातब ऊचब्एचॉलतीदाशात9 त९०॥0५ जा ९ एववात075 बा 9079 ० (6 
बैगा।5 एगरगधाए्राए की बीए इ०0प्रीौटशा 20ए्राए.% पा सीए फाहुब्गतण तट िशार 5 8 
॥€शशा९॥6०९ ॥0 ९ रिं्रशाहुबका रण दिग455875 गात॑ एठ005 छिणातए॑ 5टढा४7९० क ९ ७०7९ वा 
$0 गी0व॑शा) पीता वी एठ0)त ७2 ॥7905झ06 (0 8589 (0 39 तेत्वां४ 85 ९३7५ ब5 ॥6 उशंध्राती 
एशाधाए 8.0. वर एप्रतं्रवाक्मोग्रांचुगआतंघ (९7९0९ 5९९7६ [0 9७९ (6 ३हांट४/ धात पर०भ॑ 
॥9तद 677) ० ॥6 786 [छं८0॥5. सिप्रावीशा ७जंत&त८९९ ॥ 5प979०४ ण ए6 १5० ० चिल्या049फप7७55 
क्‍$ 50979॥80 9७ [४० |9679]0॥5 छ [९ वं€ तठी हि।हा80९एचवए०, 06 ता ?6643ए९१७ ठग0 
पी€ 0पाढा हि पतएच्पा.7? पर छिकारा शश्याता$ चिंगात॑गबएप्ापड8 35 तार ० ९ 
निश्या878 ० 6 पिवावटदातावत९४०३ ्ाए९०, ए९ ९ ]2(९7 ॥रॉटसि5 !0० 3 'तेएए नक्सल 
जी।गपए९ ०्गीढपे चिंगातंदाबफपापञ्चाएवग्ांए, 50 िद्याततांवफ्पापञडव परौपडा वैदएडट 2८० ॥ (॥6 
$शॉश्शातवी ८९शापाए, पर वराध्थक्फ्प्दु्बॉफ॒एशशगबरा णरगीटो 9 2ए३/2९० (0 869 वएी07899 
शिगापंगरैठ9प७ए5३ 5 7004४ व ॥९ई९/९८९ [0 ॥96 ाएपफाबाबाय, 77 





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टश्री$5९ शोी6ली 5 03520 छा 4 रिपज्ाबागंट- ड09ए र्ाग9 ० 'ैशाप ठात॑ निंद्वतत॥9, रेट 
घछग्गरवंड्रड98 ० 6 ति#00700 ॥॥॥87॥8879, प्राण, 7॥6 57962 45 पिशा क्राक्वाशिशत 
० कऋरणकछ 800 85 णीश चंबा ए0785, 6 8079 4$ परशष८8 89 8 गिल्रा९७७४०7६ छि 
र९;एछ७०पावाब गाएणांबा एगॉछठडफ्रीाएवब 00०९ॉ४॥76०5 छा पी खब्ोत 7शीकांता, ९७ ठफ्ीठा 
एड्राबा43९०३१५३ 5 चैदशावीट्त जाति 8४ दि005 वेाब एकटारा विंवीइटाव एडगवत43, एी0 
4600छ78॥80  थी€ 00प7९४९४ए। टशापराए वा सांग दिखा .6. ॥९ ७९४०० ० ४ ए||चफ्रथादपुथाठ 
प्रादा छिपंकेव रिठए9७. नि. एछ95५ छएटों। एटा5९० ॥7 वबागां| द्याप॑ उद्याइ।तां ठात 9576 ८ (९ 
ए्ाछएथ णजी।अड४ िंडएॉटब्रोइश्बएड7दँ, 2 जिट एा0€४ 2टठगागशश्यांबरा5 [04 गणगएडा ० फ्ाईंवा। 
७0705 5पटी। १5 शिक्राट्षं#खए, रिएएडटकाश्रेश्वाय, उद्ला॥्वएड8ब्रएश ताते 5एच्वेएल्तंबाशयाब भर. 
९४ <0ग्रगाशा।379 40 6 फै]द्वॉइ8$4, |7090) 95 $शवएचक जिएल्यॉडाबाा, )5 3)50 आए90४2० 
0 95 वर्णया05॥9. 


पृफ्ा९ $शॉफुप्रल्यावाय 35 वादा ॥रठांबर्णेरट ए07 ९१० वंत दाश्वा 7€एटाशाटट 0०ए (7९ 
पृबशोी बं॥743$., 702 ५०7४ छुए७2५ ॥ 80९00प770 ० (6 ॥०2५ 0॥॥6 »५४9-686 #8क्कषी्द बए ध7 ७४५७७, 
छ)० 37९ ९ (एशा।फपर०पा 7॥057/9735, 4 ७९]ए४ (2७॥७००७॥॥75, १] 772 ५७४४४७०९०७४५, 
९ ॥्रा९ उद्यांब0९०७५ दात ॥ी९ भाह सिवाए३5७१९७७५., ॥ ९ ८079९ ० 6 गद्याधा।0, 4९ 
$९ए८॥८ा (€॥९(५ | बक्यांजशा। 37९ त७टी जीत ॥ 5076 (शी, 80९०0 व्रीवचु [0 ढवाव ए50ाी6ा, 
धार ठ्थाठा ० ९ $ल्‍ॉफुफ्रश्याक्ष॥ओ छछशा। 0 5डावए्याव९ॉवु09, ॥07 5 गए 9908 
ए€+प्शाब्रात॑ंपा, (0 ९7 2 $078097 $465775. 72 ७६ करवा छा 4 7प॥7/2९7 0० इप्ली धडंध०2९५ 
छा वृद्वागोां उंगा055 एंडंगराद छावणए्गाव 3९906, पीर परा०४ गाएएउाविधां उंवा।व टढाएढह वा 59७ 
[ातावब, वी 5 एटस्‍९ए९१ हा फिट वधतठा, लिीठछशांग्रठु 6 रडधाएा९ छा 6 एंद्ात309 
एबिकराप्रातब्रा्एबक्एश्यान (6.0.997) ०७५2० !5५ ७४०7॥ ०7 ९ कैंक्रैन्कुप्र्शान ्ा गौा।व$इशाव 
बात 0ए)चणाबधाब, 50 706 9णारे 789 ०९ 990९० बरीी€7 ॥6 ९॥0व ८९१७५ 2.9. 530८8 |॥९ 
चिंगरा[73५8॥4 59९ ए3५ ९एवड)९7 707 क०पां ९ ]3॥ टक्शांप्राए 40 ॥९ 370 ८९्शापाफ्र 
8.0०., ॥ ॥5 8]80 ॥2€06 धीवां 6९ ७४०07#॥ ०७5 97094799 ८07779052९6 ॥ ३००० 6९ की 67 50॥ 
छाप 8.0.56 एटा#क्वांठारंपाप, ॥0णए2ट2ए९7, 00९5 ॥6 ब्र८८ट९७० (6 0670॥९6व॥697 ० (68 
०फजततातठा 0 पीर $ल्‍फए्ए7ए्ना जीत निंवा(49ए07ए५१, (6 दरपात0 ए ९ एच्रत॑ख्ध्राताताधुबातैप . * 
ह8८८०घ्वागठ 0 गांचा, ॥ चिंग्राठब्राफपाएड5३ विढते ऐएटशा पीर बणी0ा, वी 8 इचाफ़ाओआआतब वीक का फीट 
साछुातंध ॥९ १55 एल] ए९४५९5 व छावो5९ ० गी$ 8५७/७, ठप्रात्ृणीबचैस॥, 4 ७०05० 
पराशाच्राव2९ है€ $ 596 0 ॥3ए९ ८077905४6 3, श्यो॥९ दीशाद 970 परषश्यीठा 7 8 ?फप्/्क्ाबधा 
शंफाढा ० ह९ 89९४7 07 5 8ली)6एशा875५ बाते विवां 4 एफ 96 एश्यॉपाबी छि छा वधी0॥ 
40 हुए ब ९०९ 40 ऊ5 तैशापाए वी 9 रिप्रश्यग्ा ०0 5 ॥5870॥00९, .« 


ए००7/॥5 !४० (ध९ 5चल्‍क्प्रश्ब्रगाक टालाढरत ऐड बैंदाओी ए०८व्एप्रोबाएं बाते कराए ४ए2 
ठप गन्दी कल््एकौलआा (दुसा) 2809 2073॥), ध्योयधारा धी08 5९शा९४7020९5 ॥ 35607 ७९।९ 
॥987592९75९0 शा वद्वाणी, ॥॥6 39एछ6९ गणिव९१ ००70॥त67000 ॥6९९०१09 ॥ ए।शाव)76 ॥९ 
ज० कीशबाए 48095 50 35 0 एाश्वा ॥९ण ए४05 ए छिएवों बात॑ हैशाबर८ श्शटशीशाएर०. 


छाप ६१९६5 


4. औैद्राश्दमपर-एः ठे; 2प्रल्‍द्रगावशाप्र+कछ्क: 3; ऑप्रनम्रगरेक्रत्प्रर:4 उतगर्त शकिैवशागवार;20, 
566 ऐए. 5पावरतावाांवा, शि]ढ-ीशविचिए्यल पृद्दाला। किर्व॑०७, रचिपर्ध/व5, 4966, 9742. 


अंकल कल पक, 





4. 
2. 


3. 
4. 
5. 
6. 
7. 
48. 


9. 
20, 
2. 
22, 


तर, 3प्रकवगादा।वत, इक्षेंत, >274 
हडलफएुटाॉठफुनणती छा बातो एच्बॉप्रःरछ, 6ा0टट 5 
7.8. ऐ८53, बलॉडॉलाल 8 5०छ 09 रा, 22, 40-49; 32४ &50 ९.७. रेखशाएज, €( 


बेश्ाॉंतन 7 ढम्शांए्ल्श गेंक वन्य 0ए 8. एागांधिठएथा।, उिीशवाएचन झाबाजाती, फिषए 
ए€7४॥, ॥974 7,47. 


प'.ए. $26३एव एव्रातंकाबावः, # सिड॑ए०डटए ० पलक छ७४/७४छ७०३७-250-600 
#.89., 3957, 77. 26-27 


वेद्वाप्तोडता ब709 वाठाओ ॉशहाबापार था खिल्एुटीठफुणनतीड ७०ाँ वसा किला 
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हए. रिशधा९०॥, ०9०. ०६., ?.30 

(ग्राएजांशा। ९ए९॥5 ्ा म$ ४ बार परद्रादंरत द्ात॑ ॥6 5 ९एशा तिदशारीणत जात पी९ 
जिरबट्बाफ्व एा 2720 ग 8 पिछाती 8९60 एाशञ6. जि 5 56 40 ॥4ए९ ॥ए९6 67 
$0०गाशाप्र6 ॥ 'चिठज़ोबव (000 चजरवए0७8॥ 'चैंब635) फ्री!शार वे€ ८0॥स्‍7052४प (९ 8्यिश्डोी 
गाए छुखश९ ( 0 ०07९ 0 5 तां5०9९५ 0 ०७2 [725९720 १0 [९ वच्ाशी 5ठाधुवा वां 
66ए७४७. द्वारा ॥6९ 5 5ढ0 0 गबए९ घएणा९ 0 ?णाा, एरोटार ॥९ ॥ए९१ ०णा ९ 
पा।ठठा। बात वॉधाए0९60 क6/एहप्र - 7.8. #ाशवाएीवाबा।व पिवफ्रा87, प्रारत्ण्रांपर्च्ा 9) 
विल्शॉट्टांपा बेंडांगरनव ऊल्याबजन ऊॉवंतानान सजांडांद्र/छ889छ9आ7, 72, 8-03). 

8. (ए्रदाफबएच४ा, +णाणलात॑ 00 वॉन्ध्रफ्रतका 2ैश्थाटएटी, 2.5५. | 

॥0ांच,, 75९. 

8. क्ाग्रागगाओाब चिंठज्रा०, ०9. ट., 2?7.6 # (6४76 7९ वर्णी९७ 8 ग्ाएशः ० 
5९०0975 0 एशॉ९ए८ (९ दिंघश्याँ 0 ०2 4 79075 ४०70), 

६.०. रिव्वा7९50, ०9. ८28., 7.37. 

२०१९5 ०॥ ९ िंपाशों छा धार बाय ए०श९ ग्ाएए्गीएएवा, सा्वीवा #्रावप्रथ9५, 
ए०. ४२४४, ?.22 (॥6 700०४ 49 40 0९ &079ए ० [078 5 ५चा5९८ 0ए 06ए्वा9 
6ा 66९८९ एंा३४ ॥€ $3892८' ५5 ७॥९.) 

४६. (ए79एए5एवां, ्रार7०त, ६०0 पिंड्ॉन्रताएथा (0ए रिगंब87079293 सिादां), ?.3, 

७.७. 709९४, ॥७ पिक्रांबताएचर, [098. 7... 

॥छांब,, 27, जानंड; हरिग)ग5०0एवबांब्ज़ीडों, ०७9.टॉपर., 700., ?27.6,. 

॥.0. प्यार), ०कु.ढा।., ऐ7?. 43-44, &स्ाध्थथा।, ४०.३७, 7,228. 

4.5. सिथा]व्रश्प्रशाए #एफ्रगापदा, हलक शा 5०चवी शिवा ठेंक्ातवा्रंहछा, ?,92. 
"डांतितों चियाशराओं ियाइएएल तैन्रांगतीशब्ों्राएछ 

एवा दित॑प्रधुणाा ए0एबां ऊर्नैाणो ऋ्रगराप्रोद्षधा 

चारांवजीडिाएसक दचाहए0 तचरढ)क्षतं। एसाफए-३ए९० 

हिरागागव] न्वएन एकशंदरंडिनंधयावददच" - 7709, (0 िब्वॉं30ए७87, ?.7. 

पृपाछढ फिब्या्रदीएछा7, 7700. ?.४, 

इ८ाईशण], ४०।.४०७, ?.229. 

8६.४. सिद्ा०आ, ०७-८९॥., 2.45. _ 


७.७. 709९०, 6 फिंडाॉबतांएथ+, प्रार7०१., ?. 5. 


248. 


26, 
27. 


28. 
29. 
30. 
34. 
32. 


33. 
34. 


35. 
36. 
37. 
38. 
39. 
40. 
4], 
42. 


43. 
44. 
5. 
-46. 
47. 
48, 
5 49. 
. 50. 
: #], 


'ए.फ.ह. 9#शंतादा, $(प्रता४७ ॥ वंडका) लिराशॉश्चरःर अत न।४67ए, 
-डिल्नाॉणा, 2०), 27.23 
7९.ए, छुदाा९३), ७७. ०(६., ?.46. 








४५, इद्धतबञंएव रिबरादवयाबाका, है सिढॉ2०ए ला पन्ना! ॥छ7न्रंध्र३2, 29.66. 
छा ४फकुश्बां४7४३७०७, :70:764-65. 


निश्वञानिएॉटोब, 7व8, 0पए शिक्वाव पिंग्रावंदंताधाबा, बिग) ध9एछ७89, ॥#्आ[प्रा 
7989, ये 


65.0. 7०७9०, ॥#७8 फिंडॉंहतए8४7, 770०00. ?.#॥. 

छ,४, 3शब्गाधधादा।व 9९0, 2४. रब टग्रांचा॥४0), 70700. ?.. 
4६.8. पिं।॥हैदारक 5880, (०)88,  7?.56, 

७.५. उ5प्रद्रा॥रतबा।43 प्रा, चपनॉ एाश्ॉब्शनका, 7700., ??.2-3. 


व.85. #&फ्््पश्णरा। 54587/, "]॥॥6 8086 एण वि वा) 7एड्रेत्वलगांगगावतो, व्रितीयल 
कैशधु्४४ए, ७०.36, ?.285. 


॥93., ?2.287-288; ७.७. 5छद्ातर्3 फ्ररा, उंक्तरधबटांगलाथता, 00., ?.. 


बणबं,, [[[ $ 5च्चोंवे शिक्षा गी€ 7४०४३८)॥॥व7000॥ 87९०9 ॥9785520 ६॥९ 0.0७ दागछ 
लैअयफुठफ्रव॒ ठा कठाएाबुव वीं रात वादा वा गो5 वीाडांबाट९ट 5608॥87 20090520 (!९ 
ए७एएड शिघ्रशल्राब्क॥ ॥ 006०7 (0 ९४३०॥8४४ ९ 509९70079 छा ५४० 56ए8 7९8800). 


७.५. 5एवाशंतबधाव फ्री, वॉसकॉसश्रटोक्रौद्धक्तना॥0), [00. 20.6. 

06.0. 2709०, 7फा७ फ़ैब्रांब्रताएशआ-, 2.32॥. 

७.७. 8०0१९5॥, ०७9. ०८॥., ??.48-49. 

॥एांध., 2.84-90,. 

॥0ंत,, 

, , उद्याद्याशा3 9९7, एप्रीह्रशाअमा, (075] ४७०४)), ॥॥7०00., ?.५. 

$सारेब्णा, हैएा, ?.236. 

छत, (९,82. सिदाधशाांव 9857, (035, , ?2.545; 

8 400 टशापए (७४९ 45 3050 $5७68९8४४ए० 6 ॥$ ७७०7/, 870 (९४ दृथध0०7 45 
4ठ6९४660 जात ३ $#ीफएव्ावीअतैरए७ प्राशा।07९6 ॥] ७ 973५974 8९903 [9$९४४97007, 
ध्फाछ्रश्यज्रा।शथ शिकै।2७, 7. 490-9] 

६.ए. फ्द्वााश5॥, ०99. ९॥., 90-9] 

ह. ए्ीडंद्रा०ए४-ा), िदॉ७8॥, ?2.. 

ईछांध., 22. 

॥9/श्व., ?.23. 

॥छांब्र,, ?22.2-3, $6#9#बक्रा), ४०१.१९०!, 7.257. 

&ै. एीडॉएर2शओआओ।, चि७४७३४॥, 227?,6,8,0. 

$ब्शांशक्ां, एं०.२ए, 2९,237. 

कै, एफए8७३7॥, शिडट७९७४), ?,2. न्‍ ु 

ए.,ए. इच्चदगांगवरतीक फिर, ला अफिया, 2.300ण, ऐिं। दालतंबध्शणाएं, 76 ंठमकढ्षय - 





56. 
57. 
58. 
59. 

60. 
6१. 
92. 
53. 
64. 
65. 


66. 
67. 
68. 


69. 


70. 
7. 
72. 
73. 
74. 
78. 


ए०्ण्माएए, 79.34. 
0७.५४. 5फ्रवागद्ावव फिर, रि९ए/प्राध्थशााकं, ?ि, रण. 
॥छांवं, 


॥७ांब,, 270. :ऋणा-%घं 
गफ्र#९ 37९, ॥ 004 3 ॥रपरएश ० 5दाडंदाा एण75 छोटी 06वे एांत (९ इंएाए ० 
(एतबफ्ा4 शारटा 3998979 00 ]5ए९ एटशा ए0फफ्ांवा, एांबें,, ?.5ए 


है, परराविद्धा।व 5357, (००७, 2.55. 

मेंग्प्र#्ण्ी ० व९ रि्एुओं #ैडांबा< 5०टारसाए, 3906, ??, 689-92. 
ह.&. जाढधठग३ 5०997॥, 2०08७, ?2.543. | 

52४20, ४०७० >#ए, ?.230. 


उछ्ध,, (5 ९एटा) 5७65९5९१ पाठ ॥९ 70067फफ्रवा 5९ $ 8 खेश्रं7गव ०07४ बाते 
8 पाठ व वग्या।ब 9 कि - 5. ए४वाफ्रव्छपां शीतवि, 5९ग्रांबगाओी, 3०,222, 339). 


छात्र,, &ए, 27. 480,237-238. 
विदा च3ज़वि]वारवाधा वां, 0.9. 
$5९0798389], »ए०, 7?.]80, 237-238. 

४, ल्‍&70835ए9%67, ०७.९८॥., ?2.3],3व4. 


छ.8. 5एवा44 फ्षशा, 5०. किश्ाशाधा, ॥700., ?2.]2. 7#5 83ए87970 56 ए८९॥ 
विल्याताीर्त 0प 50९४ जात (6 ठउिचएडावाती जी0 48 प्राढ07९0 व ढा ॥$ट॥0ा 


॥#0ता एवच्रागाबाेवा बटटठकावांगवु [0 रारदी ९ एव गि९ >7९2९फ़ाता छा 8 उिद्याव केितव - 
6 ०895; ६.. ४०॥. 7ए, ?7.40. 


डइलधबाण, जँएा, ?.239; ॥(.8. िदठां।ठगा8 5957, ०09.०॥., ?.549. 
॥908., ४०!.४४, ?7, 276-277. 


7.5. ६एफएपए-४ण्रधाशा 5550॥ "]॥6 #96 एण 6 वाणी गण्दास्वताि।वाना॥।, शिकेशा 
#्रांवुण्बएछए, ए०!.३6, 7.288; (प्रचा।९४ाए उ0प्रातार्शंं ० हार गिफ्ट $०टांरए 
(९ग्ंभ$), ४०.७, 77.36-37. 


४. रिवछु4ए5 जिदाहुग, "िंवावंबंब9पापचराव 770 5 बछुढए," एवग्भ5, जा, 272,487- 
493 (60750ए॥4073 45 8850 ग्राशञा0९6 | 8 ए९796 5ट॥907 0०7 वाट घतछ0०709], 
(ंहाढत व 6 5ंडांट्शा एशा।प्रए -+ ग्रिइटाफाणा पि०. 302 छा #ापरों रिस२_फुणएणा ० 
5०) (ातांबा 5फांइ४००॥४॥० 4939-40). 


340 ० 4939-40 ४70 75 ० ]940-4व. 

|. रिठ5ए०5 एथा5०, ऐज्वं5 ४, 2.495. 

#. (ा्ोए्3एवा), निशाप्रशनक्ाते्ाय िप्राथाठगा, 2.. 
५. एछमोत्ांगगरव[पाप रिश्व॑ंशवा, 59 शएेपाशाबा, ?9.. 
॥87 6., ?.]ए. 

॥छांब,, 272.7॥-ए. 





-+. गश्षाप७ #र ७09 &टता।हइटाएए पर 
एक ाराप#प5६५ 


797.॥0९.७. शि्वा7९७॥,* 
; | 


प#058 रण ए60४ ए0, 07 ॥687॥76 |[€ (९ ० गाए 949९, €शए€टां गराढ (0 ध्रएट 8 वीडी , 
० वी९ बेंबागब प्रागरापाशया$ 0 ैद्या्वॉदिदय एव ९ 0९4४/08, 6980९5 370 866५०॥७7075 
जी 0७०९ इफढाए 85$999गगा6९0 हरिंटा ॥96ग्राततु (0 72. 85 8 धावाशा' ० 800, ४8९ |! १8०७९८ 
९05९7 [0 060, ० ग्राफ़ ०0जा सकाठछां८०, 5 00 79१0 42८९ शा€ ठांदु॥5 ० चंगातब वाठाधाशलसपारए' 
हि दिवापर्बाकद बात तीशा। (0 जा पी९ ऐप्क्‍वंशा ० प्रपफ्न्‍र 97927 [00 गाए ०० ए०7८ीफडातठा 5ठा 
ज़ाठा 6 बंद्यावव प्रोण्राणाशा।5 ण दिदागवाव9, ब्४३५ एछ९। ण्रत(९शा ७0०0, ॥8ए€ ७१0 ॥8५४४ 
700 बला]6ए०९४, ३ ठग 5५ | 3ए6४ 760 5०7९१ गाए 0ए 207$50027९8, 07 4५९ 4 उक्त 
(6. धारट्जीव96 #50698 गव्ााशिबद्रा05 छत वंधा9॥॥; 0पॉ, वा ॥ 000 वि((, 76 
7ण॑ए्बांठव एशीशाव (5 ऊुठफुशा 5 जाए गिर एशीरा पघाठां ज्गीठा ठछा 0प00९( 6 ॥6९०५ 
॥009फ ६5 वैद्यौबशंा3 5 9750९ ॥९2८#ंग8$ औठाए ० 8 गात॑ गरा्ाटांव! 3207€00!78 
फकाएडा पफुणा #शा) 59 ढं॥्आहफए धागा 35 [6 वधात07 छा 9809, वाठण्ढा 0९ जा ० पिी$ 
एवएशा 5 शा एशां, 06 0प85$ एश।एी) ॥8ए९ 6006 0 5 207(९€75 ॥5ए९ कुष९ैा९त 69 
ध) गाए शागरत 67 फ्रश्चा$ वा 4 आ/डाट0, | व मी ब०णा9 ए०ट९टदा इस्ाटीॉस्‍ह णि व छिपा 4 रो॥29 
0 ००6०९ ॥९€॥॥. | १09९ | ]47८ ठां [व5 िणाव॑ 076 5 गठाग्रांगठु ॥#0पक्ी प्रठ०ण ९४००९८टडॉ।075 
हा0 79 9700९504075 ॥89फ 70 ७९ [06 587॥९. 


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रा *"९०ा679] 005९67ए405' एगएी 39]९११5 ब5 ९ ए97005घ९ 0 #6 जा०0)रप्रा। शा | 
72९ ९०९४ एपज[टदाॉठा 0॥ 'बगागव है। गातए॑ शिलोवाएटापा९ एपजाडारतव 0फए ॥6 दितवाबाए७ 
ब579ख[ज) ,([४९ए 92९7: 4974), 4॥6 ॥९677208 ९क्ाठ7 5॥97 #. (0॥0/॥ 009827५9९५: "व 5 
प6पा ६0 ८णालटांए९ ता बाप गंदा दातीडांट 9 वाट्म्रोश्ट0त्जांट टालवबॉतठता विधा 00९5 ॥0 
7शी। 40, 879 ८७॥ 06 [50 वां९त॑ नि्णा, दिी९ परवान एवा) णी पिता वाई वात दब्वाटभा९४टए/९, 
0 80599, ५४6 अटल) 72९॥8005 370 गाज्रा0082८ट43॥] ८002८९.॥5 ७ च०४॥०४४४॥ 9700प८९व॑ 
5टपरएपाव। 0775 60 ठिपात ॥ ९ 'टार्शी0ास्‍5 छा 0०प्तोषश तदाठ्शबाठताड, ऐप ९ए२2त 252 
९०07#कगढते [0 ॥6 डॉए४ ० [९ छा बात॑ एश00 40 एग्रंटत ॥९9 एशं00920. 7॥05,, एऐी)॥6 
7९09765९€7907 0० ९ $0#004$प7070; 'रिक्रात्85ए474-07फ90, 605##7494व064, €९०., (प्र: 
रा बंद्यावब परज्ता0099, बढ एश्ट्ांवोए उद्या3, व वीर आप्रोर छा ७७एटपरातणा €फटता 89 
लिीठ्श्णश्त ९ ८णाशािफ्रणबाफ छज़र 6 पीढछ 2ढदांगा ॥ जशाांती धार्प्ु एटएा९ 970490९0." 


रिप्रागरशा 0, ०0णााएं)9 गे 6 इवगा९€ ए29, ॥6€ 58५७७ “[॥#67९ $ ॥0 १९॥६॥०॥-५४४5४४ 
कंरटिशाटर ॥ (68 56पॉफ़ॉपावों शाणएशीजशिगरा5ऊ ० [68 72॥98095 ,.९2/4९८2५. ॥]6 इद्या९ 
ह्रटांभार58 छा [6 5 59एगरशाएं का 8 इ5८पाएपर छा ती 7९ंदांणा5, ९४९९एाॉ घ्र986 7( 5 57८(|ए9 
76॥8॥005 4 टडद्वावटाटा, एिठी। धीदषा ४0६४5, वरीढातवे्ा।5, ॥एफ्रातड, ०9$7/08569, इपाथ- 
+7-68, रिवाग्थाव शिंवोबाडओ १080, ब-300, #9ए७॥फए५ फिब४88, चए५०2४-970023. 





इप्ार्यदाप 07 ०पिडच- दिया ए05, 29 वफ़ःश्दा रएशाजजीशार, आाएाए ठा वा क्रीतिष्ारदाड, बपते 
ग0ंजतव्ु ॥ 08 बचशंदार दरेशारए8४ दावे फाश्टाट228 ० 879 शह्षित्ता ० फ़्श्श्यार॑ पथ 
39$९१/७१2९ ॥ 9७8268 ० छएणा577. ॥॥#6९78 5 0 ध्द्वाइवज़ाद 8 दिए पैसा ९ ४७७०४ 
0०0$6/फ्रद्रा।जाड डआाठपोदं 06 ट0राशंब्राएए इक] गरगगा।एं 09ए थाए णाए ए्रशगाप्ु ॥0 ग्राम? का 
' ७छ]९९८ए९ 8३55९5डघ08॥ रण ९ 8०॥१४एशाशां5 ७ ९ कृबा[05 छा बंदातांइता ॥ ॥8 वीहांत॑$ ठा 


था शात॑ 72॥९९०७४९. 


७०७, 40 द्ुषां (0 ॥॥6 5प्र0]९८( छा 79 992, शॉभिटा। ॥$ उद्दाति4 37 8009 ठालोगाएटापार 
ते |ढ/03(3९8, ॥ 9९ 37४ 70 92॥९०९ ९:४9747॥09 ॥967क्रीठत 6 ॥6 70 टशांधाए 8.90., 
बाते 686 45 0 72890॥ जो एछ& औएपीतद ॥0, ऐ6 कड0ण9 0 वबरनांश्या ॥ दिद्वााातं।॥ 80९5५ 
42८ 740 ॥6 970-/50 व 'चिंग्षाफ्वा) एशा॑ं०्त ध्गी पीर परांदाचाणा, ॥०ा 6 छ07#, ० 
छिीद0/49गीप३एथाओ) बा0 8 56 वर छत भिंड 080फ925 थात॑ तिशा $९॥एकारता ॥0 ९ 
री।ए 3८8 रण शावए्बराबए2हु08, छिपा  5क्‍7चएथ902६७०४७ ३९ ॥0 क्ताशटाफ्ल बटाजाए 
$९९॥5 (0 ॥98ए6 ए९९॥ िवबिां26 9707 60 (९ भारी) ८€॥रंघाए 8.0. 


वृक्ा3 48 ॥ शत: टातवजं जाता छोवा वि37एशारत एड 8 ॥6 वाछाा क ९ ९४९१९ 
50प॥ ०ए 6 एशाप्रडण॑ब, 9 पी एव्रातपदा 7९्वाणा [0 ०७९४ ॥06 972052. [( ॥$ ध९॥९१४।ए७ 
7९८९ए९व०, था आ078 लॉाटप्राशग्यादों €एजंतशा॥०९५ फिठा फ़वा ० ऐ९ प्रांद्रभाा 73॥43 2९१० 
गातव॑ [भा छा०0९९१९० पितिश ३0 बात॑ ३९ॉ।९त॑ दतिशाइशैए७४ ॥ ९ ॥॥9 फबटा$ ० धी९ 
रिग्रातफ्र॒चा ८०0जगए ए्रीश९ प्र€ गिते गा 6 700॥-9९१5 बात 509९ 06 6९ फ्रधाएश४। 67 9॥9॥9 
छ07॥९6 0 ९8४ए९7०॥9 वा गेडटाएाएणा5 वि बैग 4 ९७०० ऋ धछतांटी ए2/९०, 4९2070॥79 (० 
घा९, 90 ॥6९९9 ० धा€ निंवपाएगा ० ० पीर फा०-लै90०४७7॥ 0९८०४१९४. 


सर ४० ॥० जिव 5एटी। एज़ंदाबफॉाल्या बाते 7000-८एां €छाीडशारा6त छा उतर 
बलाएणा।४५ गा 86 चिंवएएगा एशा060 व 5वएब्ावँ९903 एंटी ए्र85 गाद्याप्र धगएड एटा 
इ्पांएत 67 इपटा उवाण९5. 


| ढगा तंग; छा हा [६४४ (9० 90590|6 एःफ़ंबाब्ा008$ ० 8 आ#वतविाध ८एणावड: 


. की धो ९वाए 989९ ० ९४धशा९ वंदांत6 ब७5९749, $00॥9049 बाते ४४।--७४7०९६७॥०॥, 
जद 0७६५ 8॥ ९ ०६४९ णा९र]० ०७॥7$॥7 7€3९९6 #कात्रवावाद4, 00 9७2०5 ४०878 लए 0०पा ०7 


वि€ 76665 ब्ात॑ ॥0 ८६०2४ ४०7९० पएुणा €श॑ 5घ2८॥ 82८8 #0फा0 ७४०४८ #5 च्‌ृपाश 
९€55शाईद वैश्वा।व ९६; 


2... फर्श हाढ आंग्राफ९० रात्पव्ठी 4८ (० (णा्श्यातचा।ए९ए छशाप्रावणाहु 6 १५॥९9 छा (१8 
वचात।९05 ० उठ्यंत8 350९(९५ 0 62060 इकाावववत 959 छाकठ तेठशा ० एमए 02 इधार्ई३225 


४४8७३ 700 6000९ 928८8५३४९ (905९ ०8॥9 उदत6 प्रभेछा॥॥5 40 57बएबाब०लाह्ुठांव तं6 का ६३7१५ 
जाती प्रीढ्ा 3 529. | 


वृफ्नाड आंकाए उप्रावाए़, 0९ए०त 6 श्ाण्शग्राहव(६ 60, 07 6 क्राधाका, $787 87१9 
499९ 0० 70८0-८फंतत85 40 ॥९0667 85८९॥८ ॥6 4038 जाट ि+40७०, | ब।लिहाए छाद्पवा 
077९ 0५ चार वं65८29॥07 ० (७ €५एथाशए९, 0०6 70८-3प78८७8 '#ट८2062७प॑ की 6फएडा 





२222022%22220225220202% 25.2 


इल्च्शबमंककैशांह्णंक बात॑, 93९ ्ी जला 2चोग्टीबा0ा3 89 तठएणा बाएं बादांग्रर॑ >कातवीं 
श्हांए 9 ९ उा0 €शाएा9 8.ए. ७५ #>्ररीषांक्-वंव-चडा470-चावडप इशाच्रहए अऑधठांडइए, 


छि6 पाया 35 | क०ए, रफ़प्लावफृतओींटवां /एसरि/शव085 ६0 ॥९ ८०णाइएपएटवठता छा एजॉवबाएट 
रण गेंबात्र॥ -जंड2९8 एा ए07भंध्0ए था दिव्ावबाबोए एटड)ा। 0 फ्रॉल्वेर गा ठ0तोए रा ४७ वा-590 | 
एश्शॉपा3९5 6.0. वच्ुछ्यातत छा 3 व्राजाचशा ९ एएडलंछीतए छा 3 गावाएगातों ९0 छा 2 श्ष् 
तं९€८३७९५, | ॥49 ए०च 0पा वढ76 चीव पार ।शै॑ब्धरशेए 8१७९ 809 छ (उत्तावा्व 5 चडपक 
हिकाप्रातशतां3 20शशा0९5 07च758 6 शा ० ९ 90 एश्शाॉप्राए ॥.0. एाता था ९ज़ंछशगभांटवा 
ए076एड्राइए प्रुश॥शावा९0 ७ए (९४ 6ए5फृप्ा ॥9507%67 छा रिजएश्च्ताथा। छा फिट एथाफ 
दड्तंबताए8 7परतितु 0095९ | ठिल्लाउए७४., ॥6९ 529 ८ठताः0०एशा३५ ८९९5 70फात॑ ज़ोहां ॥8, | 
वा 779, 8 8वनीटदाा 607शटतणा ॥0040080 | त€ (९ व पा शींत56 7४2070 0७७ 
९ 0ोीछागयां रापपागएटा शाधाइटॉ, 770तच वार 2 6 कांड जींदा क्राइटशफ़ाठा ए९ शशि) धोया 
ंग्वंडा09 रिल्सेएडॉग्राडा) ०8055८0 ॥#6९ ९०5एटॉांए्ा छत ३ (९ताफ़ार छा 'रिद्राषोधीार [व 
एश्डाात शैंकवागावधगिप्रडएश्वंता रि्शरात रिडविवारशात वा), सपरातीश णा ॥ ॥6९ ]7 6 
इधा९ छिाफ़रॉर 5 7€शि2त 40 85 रीता 0 दिवा3., िंटा४€ (९ 5द78त07 छए०ा0 007 [श079॥९, 85 
5ांक्ाग39 ९शठ7३७ए०2७, ए35 ध८००१एव, 5ए5९१७९८३ए, ॥09४९ए९१, ॥02 €हा ०९ ४४७5 
0०77ए0८९० (0 ॥९606 ३ 800 ९ ॥णशगांदोी एजाणा भार ७ कि लगिीएण्णाव शांश एव ०७५७ 
€7985९७ 50 ॥8 बं७००6/09० 20पी0 9९ 7९३७० 55 ॥गवा।49०, ज्रगा९ ९वाणठ 5 वइटा+फ्ञाँठा एए 
#९06 97. 8.7. (09%, श्या]०प ए०ग्राह ०पर गे 5पल 20ए2टॉां0ा ॥30 ०९९४ ९८४९०, 
3007४ ९ 7280479 770094 35 0€ [98९00९0. 00९ 300 ॥40 (07९९७ ७79घ४९0०, 
पकष्ंाहु 5प०97ग्णा 7०7 ीशा॑हाए 50097085, शिव एि्वा79, ॥0॥93॥680 ॥) फिवाँ #ै॥9/990 ४४85 
008€ 0०8९7 9॥ उल्दोएंड) गरा6 शा 6 ए०ञआए9 ए छि4फ्व) ॥ (78969 एथ) ७९ 
8&॥९४० ७8०४४ ६0 ॥7€ ९॥056 ० ॥िढ€ 50 टश॥आ।एाए 28.0. ॥॥70प89 ॥06 ९७७९ 67 ॥08 वंच्रानन 
करमंश्ाबाला ० 2 5त)8फु्छघछा 7079४ विदा ७७५ 5 फिविी९ हॉहग9॥९06९0 ७पए 
7४शि02९, पिपरररः 00 | 6 इ्मातह ॥5टफ्री0१, 0 धौ€ 099 ० ?ि49ए8, 7707९ ॥%89 
| पिह कथन १वड 0 शिव वचार2, 50768 5९४0 570975 ॥3५8 2५७०॥।ए [00४/0॥ए (०९६७॥॥0॥820 
पीर एबटा।फए ० 97. 96575 टथराटीचरं०ा5, हि. 8 आप्शेप्र शशि पिशिश रडटचएआ३ि075, 
हताकंप्रतलल्व बा 0पचाबकुपफा, 7१89 गैढंफ मर एांधद्वेंपठ धीह$ ८0एा70ए2४75ए 0 बा शाएं, री, 38 2 
7डडपो।, 97, 00) आऑठफपांत एढ 70726 काक्षा। ए९ एठपात ०४ ॥00079 वा ९ क्णा)5 रण सोचा 
ए०छांत 06 (॥९ ९बावीरडा ७(80९ 07075-997 खंच्रत8 (९726 ग *वागाबाव8, 5 8 एशट्दएड2, 
०७७ छ९ धा०एछ सछा) 5८77075 दावा स्विएछेएयरायावा 5 972960285075 क्राग्पे 5076 0द्ाएुथ 
एपॉ/शशड 9 $ठाएविरशात रिब्राविांवात एर6 गत फारटटवटत वात ॥ 0636४, कैड्ते ॥50 कैप वेबतीव 
शगकफ्राॉरएड, ७४ (0ए2 ग6ां 50 विः ऐ९९ए वर (0 2 विशाएफि (8 ॥85 छा धीढंएा 2०तडाफएटाठा 597 ' 
#099. 


0एएएटढए, 8 एैशग फरोला।ार बाएं बडाड0 3 टणांध्रिषठप5 ४०09 ० ग्थादव ब्रा बाते 
- दाद्रभीडटापाल ॥) दिदाउश्रा्थए8 92207 3एश३७०)९ (0 प५ 707 प्रा ग्रांतवं& ७ 8 60 टशाएफ़ 
#ै.0, एड ॥6 ढडवरशीआीवाशा। ० ९ टाशपफएनरा 42927007974 076 रिवा)ठांवंदव था 
:.. ७ एठाहइटीविबा।0त एकामवु३3 #9०एश का $0एक्‍ह6 स्कराशशंौ, कै ॥5 2077009 गिशणए 





् डुागवांबाए१ 5 ऐगा।4 3 बाते बालंतरोण्टांपा68 बँएवप्र३ वा९एजीवबफ वश्शग्रत$ ४३ व 8 ४०५९ 
0705 9 8. (आठना छ्रमांणी | ॥80 चृणठछा९त वा पी ए९€7ए 20गाध़िशाल्शाशा् एण 5 9489९॥. ॥6 
०ग्रॉफ अछिशाट९ 5 धीद्वय ॥ 8 ०8५5९ ० दिगवावंगाव 00095 ४०१७५ ६76 घटा ॥ 0 6 
८856 छा काठ तह 72603 ० ]49. 76, छाती पी९ ९६८०फ़ीणा 6 0प्तगावा, म ए०5 गा 
एटह्शाबावबा्ब चीठा, वंबातवाजा शातजएटत छि 0759 णशांपांटड छार्वा 9०एप्रौगाए, ाठएाएछ थात॑ 
99पौटा९९, ९2 7९८८55व३३ए फाशल्वर्षाआ४5 णि ९०शाषोातह बरालाएटॉफदी ढटांणा।९५, 


लिप, एछ 2ट8॥ क्‍7॥ ० 7। )९85 ए०0 एशाए 5000 7४235075 60 [95 ब3797फ धंपदा0ा. 
(॥8 8 किवा #०॥ ९३9 धा॥65 बेंगंगाजआ व 92८07९ था वाश्दारं 27 छत 6 7९ींहां0प5 
| 0 #एवॉं5 छा ९०७३१ श्टागरंट्वीए उणा-वेंगरगव ॥09052045. ] ॥4०४ ०ी९४ ०९४३ €)॥79 
$इपटी) रा गाज कशातं5 3$ बा९ कांशर5एत 0 ९ज़रएावबएग॥ंट्ठा तंवांव रीता ९एशा | [058 
#8005९॥०]05 ६ प्गांली जाशा ए९/४ शपारी 0092९5 ० उव्वांणा९ बातं॑ एक्वांशा०एगनॉ४ 775. 
भगाशा०॥ ॥ब0 9९९ ९६४व।५ #ग्पाएं] वी९€ाशा5 0॥6 गबगवद लितवी, ॥) विटा 6 ँा९5छा 
050ए इअ्पाएंएदा णा व घाशाएटा ० चराएणागा 9008९३5 ता खगाधांशा | #वाधदावत 5 70 3 6 
(५७९ 40 ४6 इपड्ाशादारर पीवाँ 7शींदांगा ॥80 #९९९ाएटत कछा एगारा वां एव5 पर (6 
्रांत6)2 ०0 धार 440॥ ८९शआपाए 8.0. 


पक़6 ०9067 723507 5 वावां ॥6 (एशवापऔ४५३७5, एश0 ॥546 6607 2 #9$॥ 7९ ९|९०३७०2० 
6 [ा0 छा धी९ (वा749053 40 ॥९ 5वाप5 ता व टावक्ए97/-5८९7०, [30 गरावते९ व विश 
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एतैप्रा४5 वि ॥8ए8 फैशशा छािशा 0 ऐी९ गंगा ९४८९॥९४7८९ ० (6 चैग्राब प्रा०्त्रपरारशशड, 
ण॑ दिखा गातएं॑ संरएी।२/९, छकांटी $ 9 एशाःपए पट बात 45 #छ९ ठि वा 40 ३६९, पौ९।' 
706 गा पीढ तीाएटा ता$5शा।व्रवागा छा पी ॥006 धा९३55प6 ता खेबाभांशा वादाप वीर गान 
बेंबा।वड 985 ए९श। वागागवतोा, खत शीड डॉबॉशारशा ०0०राफाशीशातवं5 ९एएशा (९ गाह्योराशिं 
प्राक्ा€शांथा6075 07 द्वारा तंद्रागांडा, 7070, | 722८06८टाॉ, ण्ती 207शतातवा0॥, $९९तावु था िवतठुवां 
वा िठाती दिवादांसंतिठ 3 परतरबापारए, ॥7970ए0520 शााएण०  एीमंटी 5 09छक्‍कशाएक्ल्त खेथोा॥5 
79392, 2700श॥ शां-हा6 ॥ शरबा।8४75, ॥ ॥53)]26 37090 ७०/४979०० ०ए ॥6 ।0८8 9४०४6 95 
(6 8040९55 9९६०[९- ठउिव््थात3 .6. ९ व९6॑ 8४धग॥9.. 


89 [॥$ वाजठ<छा7 प्रो5ट07<८९कूतंणा वैशा०ाहइाबांएश५ | व एशाीगच, 6प्रश्ा] ॥ठा 
2€४शाएवबाए, गरद्यातरा कि 04 वाढाछुरा ० बंत्राांशा 0 ९ दिए ० (९ ९एट949५9 5020- 
हशॉंध्वांठएप5 ॥6४ ०6९ दिगाग्रब्वीदुब धात॑ ् दबाव, है] (8 700 7शावंत5 07 ९ 0६ए0९ 
लिी0एला$ड ण॑ ९ वन १0 60 38 40 7श00ए९ 5७८) जा32670९फ90०8 6 फ8९९ खेक्वंपरांशा बग्ात॑ 
॥5 बा बात बाए(6टॉपाढ की जरातफुल 9९59०८ए९, जात फहछ गिर ॥092 2 5 छा 
वबए9एशा 509श- ० ९३, | जी ८गालंपतवर 0७ए एगाणजणांतरत व6९ ए०705 ० 8 907 €्थयांपाए 
टम्रागरांग छा दुद्यातवाबाधव: 


जब, 
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बा।एीवजरा)वंव एवावा96 वा 


बु इठांपा९, ज्गाती दाश्बा व९एगाता, वा गी९ खगगांगब शाएं९5 ० दिवावाॉदा(8 7" 


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26/80, (द्वा00॥| (शाह, 

थ्याएपा - 20800] 


नामि#& 5. 880॥0॥ .8।. 
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80098 - 282003 


६. ६(.६ए7३१०॥॥०५ 0. 
4774, छ8॥का दा रिक्षा। नि080, 

23, 08798 0४॥|, 

४७७४ 0७7 - 0002 


#.९, £८४०।॥३६६४|॥४० ॥४707७57॥॥55 
# + 8/4, 30 ॥0050]8) /॥69, 
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६॥३९४४ ६€४४085 (॥40॥8) ?(शा,. ५४0. 


२.0. 80): ॥५०, 87, 20/७ - |, 
(जाक्षाएए8 4008७, 

24/97, #परत| रिक्षाव, 

अपा9 - 282002 


0.४, 7६2॥..६£5 ७४. 0, 
2, 33) (6, व 89, 
#98/५ [.७7७, 

807॥749 - 400 002 


2&९80 ॥0/ 7. 4.0. 
8-7/0 - 2, शिएाओ। (0०-००. 
॥#प्रज्ञा|ध। £3 8७9 

चिथपधा& १080, 

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॥2. 


43 


44. 


48. 


49. 


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5॥/४ 'नैज्ञा।<७, रिक्राउशा) उश्वट का, 

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प8२/४ (८॥48740 ॥३७२६5७॥॥ (0।+#&/[40 
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#| दवा - 3000व 


॥0057॥# 05£५घ६.07?|#६्वा 
009१, ।0, 

०७ 80॥0॥08, 27, 

ह&॥ +ि. व. जिएोत9]७७ २०७0, 
(20७8 - 700 004 


8£36#&5. 5४/६६॥ ८धारानगष्ट 
9 -+ 9, 50पथा0 ६)%0७7500 |शैं७।९७, 
जिद्वा - | ४७७४ 028॥॥ + 40049 


जप 0050॥87।05, 
ज3क्षा१ #॥थ्ा छा 
२ि)७7४ 0|0॥०॥|, 

एल - 0006 


3/७/४5॥॥4&0ब ६&।.६७7१0४805 ७0. 
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2८0..055॥6 &६&.६८777084.5 (.0. 
(इन एध्रातत063, 30 700॥, 
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॥40&4 85६40 ६5 ८00870॥40॥ 
॥ 50 50090 8७9॥000, 
9. 8. 4080, 0७00 - 0006 


१।क्र६5 07 ॥404 
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50|0७७ 5॥9७४, 
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84, /0०७७॥9, पिल्लाशाल्षा 20॥70, 
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7९%. ४ /र 3।/०0|+। 
9-4, (त्वांश्र॑एशा 50009, 
0क्राएपॉ9 + 700070 


छ8£/358.] 5४ ६६षटा ८रापह 
७0 -9, 5000 ६५७३४०१ भिक्षा(७६, 
एड्ा। - ।, 4७७४ 0७॥। + 40049 


४९१३5७०॥१5५ 724.057॥0 ॥॥०७॥.०६४छ85७ 
4277, आए रिफाथ, 5प्रशश निश्ञाता, 
90॥४ - १0007 


ए#॥4र? 8. 5र७5॥ 3३॥४ 
7/9 - & #॥३&॥ 40480, 
७ 00॥9४ - १0002 


#5/0स्‍९ 84॥404.55 
89, कं ड्ावराद्षा नि80 १089, 
8७89७ 07055, 
893790/06७ + 560053 


3७१९४ ॥[श६ ॥0७5फराद्5 [.40, 
7/25, #ाइका। ति०8७तं, 02898 0था।, 
चिकन 08॥0॥ - 0002 





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एकांत) + 40006 


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0०।४ - 40006 


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उ्राफ 36॥, उल्ाउ॥ फैलएक, 
ए७॥॥ - 0034 


*रि0न8 5&.55 00970 प&70व 
4-5, 5परदुक्माती सिं९३, 

2275, एउज्मां लाश[ध्रुआं०प 

व॥क्ा छल, 0७॥॥ - 0006 


(#रा॥ 05॥240॥. 00. 
433, यहां: ठिल्यरथ।, 
90॥॥ -+ 440006, 


&॥३॥(७९४ (॥४०0॥8&) १४४७७६॥१ 60. (0. 


2/8, #ि0०फ िंश्दुबा 
0७0॥॥ - 70007 


४॥5॥4&॥. ॥१00878॥25 
2, विक्का जा, 

448, निश्ाधु १090, #ैटनभ्रक्‍ए्फा, 
(७॥॥ - 00353 


#&750७'5 ६.६078।00. ॥४0087/55 
4/89, 0७१ 9409०, 
0४॥ [॥05, #छ्ा०४ -+ 2682002 


न#ि08॥40 जात हमारा एक 
६€।0 40७७७, शा०2 (१३8, 
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डे करा (9फ्रकतिशाड 77णा:- 
छ8६€.४४४४४ ७0०7०४7०७ ०७५7. ॥70. 
8070.02, 05#79,4 - 282007 


> बैताणाएंी९5 >* वबलंण$ > 00ाएछ़ा०३$5०5 3 ॥0फ0श/व।| 08950 शिह्वा।क्‍05.., 


20078 ९०, : 75347, 7948], 75282 १86४ : 0565-355 8॥0१8 ॥ 7६/.55१28॥ "8६/357१/8 
#800 : 0962-350284/5220 


बड़ा मन्दिर, हनुमान ताल, जबलपुर स्थित कल्चुरी युगीन भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा